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औरैया बिधूना में परिवार पर लाठी-डंडों से हमला, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल तहसील पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

बिधूना में परिवार पर लाठी-डंडों से हमला, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल — तहसील पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

औरैया उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के बिधूना क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक परिवार पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला किया गया। घटना को हुए करीब 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट परिवार अब न्याय के लिए तहसील समाधान दिवस का सहारा लेने पर मजबूर हो गया है।

थाना कुदरकोट क्षेत्र के कराता गांव निवासी पीड़ित बलवीर ने बताया कि 20 सितंबर को लगभग 10 लोगों का समूह उनके घर पर आ धमका। इन हमलावरों में पुरुषों के साथ महिलाएं भी शामिल थीं। उन्होंने अचानक लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला बोल दिया। बलवीर को जमीन पर गिराकर बेरहमी से पीटा गया। जब उनकी पत्नी सुमन और बेटी शिवानी ने रोकने की कोशिश की, तो उनके साथ भी बुरी तरह मारपीट की गई।इस हमले का वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। घटना के बाद बलवीर और उनका परिवार इलाज के लिए अस्पताल गया। डाक्टरी परीक्षण में बलवीर को गंभीर चोटें आने की पुष्टि भी हुई।

पीड़ित परिवार ने थाने में सौकीन, मोहबत, श्रीकृष्ण और रामशशि सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ तहरीर दी थी। पुलिस ने मामला तो दर्ज किया, लेकिन पीड़ितों का आरोप है कि कुदरकोट पुलिस ने हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई।

न्याय की आस में थके हुए बलवीर, उनकी पत्नी और बेटी तहसील समाधान दिवस में पहुंचे और दिवसाधिकारी को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा। शिकायत में उन्होंने फिर से आरोप लगाया कि सभी आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से हमला किया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हुए।

पीड़ितों ने यह भी कहा कि डाक्टरी रिपोर्ट में गंभीर चोटें आने के बावजूद पुलिस ने केवल सामान्य धाराओं में केस दर्ज किया, जो न्याय के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि रिपोर्ट के आधार पर सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं, इस मामले में स्थानीय लोगों के बीच भी पुलिस के रवैये को लेकर नाराज़गी है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर आरोपियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ग्रामीण इलाकों में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रशासनिक तत्परता पर्याप्त है या नहीं।

वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और यदि गंभीर धाराओं के साक्ष्य मिलते हैं, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कुदरकोट पुलिस इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा या नहीं।

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