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सीतापुर में उद्योगपतियों के आगे क्यों नतमस्तक हो जाता है वन विभाग? धरनाग में प्लाटिंग के नाम पर पेड़ों की कटाई का आरोप

सीतापुर में उद्योगपतियों के आगे क्यों नतमस्तक हो जाता है वन विभाग? धरनाग में प्लाटिंग के नाम पर पेड़ों की कटाई का आरोप

शिवाकांत दीक्षित, जिला संवाददाता – सीतापुर सीतापुर जिले से एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है, जहां नैपालपुर रेंज के अंतर्गत आने वाले धरनाग क्षेत्र में एक बड़े उद्योगपति द्वारा नई प्लाटिंग के नाम पर भारी पैमाने पर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाए जाने का आरोप लगा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यहां सरकारी धन से लगाए गए दर्जनों पेड़ व ट्री-गार्ड नष्ट कर दिए गए हैं।

3 महीने से जारी है मामला, कार्रवाई सिर्फ कागजों में?

ग्रामीणों का कहना है कि यह घटनाक्रम करीब तीन महीने पहले वन विभाग की जानकारी में आ गया था। उस समय स्थानीय वन क्षेत्र अधिकारी ने दावा किया था कि “कार्रवाई की जा रही है”, लेकिन इसके बाद जो दिखा वह कार्रवाई नहीं, बल्कि अफसरों की खामोशी थी।सूत्र बताते हैं कि वन विभाग की मौजूदगी के बावजूद क्षेत्र में न सिर्फ मिट्टी पटाई का काम पूरा कर दिया गया, बल्कि लगाए गए ट्री-गार्डों को तोड़कर हटाया गया और प्लाटिंग काटने की तैयारी तेज कर दी गई।

जिला प्रशासन की छवि मजबूत, पर वन विभाग क्यों बेपरवाह?

सीतापुर के जिलाधिकारी राजा गणपति आर अपनी सख्त कार्यशैली और पारदर्शी प्रशासन के लिए जाने जाते हैं। आम जनता का मानना है कि उनका कार्यकाल सीतापुर के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि वन विभाग आखिर इतनी बड़ी गतिविधि से आंखें क्यों मूंदे हुए है?स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग उद्योगपतियों के सामने नतमस्तक नजर आ रहा है, जबकि जिला प्रशासन किसी भी तरह की माफियागिरी या अवैध गतिविधि बर्दाश्त करने के पक्ष में नहीं है। लोगों ने कहा कि “डीएम की कार्यशैली का उद्देश्य स्पष्ट हैकिसी भी विभाग को मनमानी की छूट नहीं।”

लगभग 50% पेड़ नष्ट—स्थानीय पर्यावरण पर खतरा

स्थल निरीक्षण करने वाले ग्रामीणों के अनुसार, प्लाटिंग वाली भूमि के ठीक बगल में लगे जीवित और सुरक्षित पेड़ अभी भी मौजूद हैं, जबकि सामने वाली पट्टी में लगभग 50% छोटे पौधों को नष्ट कर दिया गया है।लोगों को आशंका है कि प्लाटिंग शुरू होने के बाद बाकी बचे पेड़ भी धीरे-धीरे काट दिए जाएंगे।

अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी पर

अब देखना यह है कि यह मामला जिलाधिकारी तक पहुंचने के बाद वन विभाग पर सख्त कार्रवाई होगी या नहीं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते संज्ञान न लिया गया तो सीतापुर के हरियाली क्षेत्र को भारी नुकसान हो सकता है।

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