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कानपुर देहात में ई-रिक्शा पर सख्ती: परिवहन विभाग का विशेष जांच अभियान, 250 वाहनों का चालान

कानपुर देहात में ई-रिक्शा पर सख्ती: परिवहन विभाग का विशेष जांच अभियान, 250 वाहनों का चालान

कानपुर देहात। जिले में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने ई-रिक्शा के खिलाफ विशेष जांच अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत जनपद के विभिन्न कस्बों और ग्रामीण इलाकों में पैसेंजर ई-रिक्शा और ई-कार्ट की गहन जांच की जा रही है। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई लगातार बढ़ रही शिकायतों और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए की जा रही है।

250 ई-रिक्शा का चालान, जांच जारी

परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अभियान शुरू होने के बाद अब तक करीब 250 ई-रिक्शा का चालान किया जा चुका है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, कानपुर देहात में कुल 2643 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं, जिनकी क्रमवार जांच की जा रही है। जांच के दौरान कई ई-रिक्शा बिना वैध दस्तावेज, फिटनेस प्रमाण पत्र और हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) के चलते पाए गए।

HSRP और दस्तावेज अनिवार्य

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-रिक्शा भी मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत आते हैं, इसलिए इनके लिए वही नियम लागू होते हैं, जो अन्य वाहनों पर होते हैं। विभाग ने ई-रिक्शा चालकों और वाहन मालिकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों में HSRP नंबर प्लेट, वैध फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा, ड्राइविंग लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाण पत्र अवश्य बनवाएं और वाहन चलाते समय साथ रखें।

अधिकारियों ने बताया कि कई चालकों में यह गलतफहमी पाई जा रही है कि ई-रिक्शा के लिए कम दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। नियमों की अनदेखी करने पर चालान और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

सड़क सुरक्षा के लिए सख्त कदम

परिवहन विभाग का कहना है कि यह अभियान केवल चालान काटने के लिए नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा है। बिना फिटनेस और बीमा वाले ई-रिक्शा यात्रियों के लिए खतरा बन सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह विशेष अभियान आगे भी जारी रहेगा।

चालकों से अपील

विभाग ने सभी ई-रिक्शा चालकों से अपील की है कि वे समय रहते अपने दस्तावेज पूरे कराएं और यातायात नियमों का सख्ती से पालन करें। इससे न केवल कार्रवाई से बचा जा सकेगा, बल्कि सड़क पर चलने वाले आम नागरिकों और यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

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