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Author: By: Nation Now Samachar Desk

  • Lohri 2026: लोहड़ी पर तिल, मूंगफली और गुड़ क्यों खाते हैं? जानें साइंस

    Lohri 2026: लोहड़ी पर तिल, मूंगफली और गुड़ क्यों खाते हैं? जानें साइंस

    Lohri 2026 का त्योहार हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है और इस दिन उत्तर भारत में खास तौर पर आग जलाकर, ढोल-नगाड़ों के साथ नाच-गाना किया जाता है। लोहड़ी का नाम आते ही तिल, मूंगफली और गुड़ की खुशबू हर घर में फैल जाती है। अधिकतर लोग इसे सिर्फ परंपरा मानकर निभाते हैं, लेकिन असल में इसके पीछे दादी-नानी का ऐसा साइंस छिपा है, जो आज भी पूरी तरह सही साबित होता है।जनवरी के मध्य में जब ठंड अपने चरम पर होती है, तब शरीर को ज्यादा ऊर्जा, अंदरूनी गर्माहट और मजबूत पाचन की जरूरत होती है। Lohri 2026 पर खाया जाने वाला पारंपरिक भोजन इसी जरूरत को ध्यान में रखकर चुना गया है।

    तिल खाने के फायदे

    तिल की तासीर गर्म होती है। इसमें हेल्दी फैट, कैल्शियम और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। सर्दियों में तिल खाने से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है और शरीर को अंदर से गर्माहट मिलती है। यही वजह है कि लोहड़ी पर तिल के लड्डू और रेवड़ी खास तौर पर बनाए जाते हैं।

    मूंगफली क्यों है जरूरी

    मूंगफली को एनर्जी बूस्टर माना जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और अच्छे फैट होते हैं, जो सर्द मौसम में शरीर को ताकत देते हैं। ठंड में जब शरीर ज्यादा कैलोरी खर्च करता है, तब मूंगफली उसे संतुलित रखने में मदद करती है। Lohri 2026 के मौके पर मूंगफली खाना शरीर की ऊर्जा जरूरत को पूरा करता है।

    गुड़ क्यों माना जाता है सुपरफूड

    गुड़ आयरन से भरपूर होता है और पाचन को मजबूत करता है। यह शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करता है। सर्दियों में गुड़ खाने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और ठंड से लड़ने की ताकत मिलती है। यही कारण है कि लोहड़ी पर तिल-गुड़ का खास महत्व है।

    दादी-नानी का साइंस कितना सही?

    बिना किसी लैब रिसर्च के हमारे पूर्वजों ने यह समझ लिया था कि मौसम के अनुसार खानपान बदलना जरूरी है। Lohri 2026 पर खाया जाने वाला पारंपरिक भोजन आज के न्यूट्रिशन साइंस के अनुसार भी पूरी तरह सही बैठता है। यह त्योहार सिर्फ खुशियां मनाने का नहीं, बल्कि शरीर को मौसम के अनुसार संतुलित रखने का भी संदेश देता है।इसलिए लोहड़ी पर तिल, मूंगफली और गुड़ खाना सिर्फ रिवाज नहीं, बल्कि सेहत का एक नेचुरल फॉर्मूला है।

  • Monalisa: महाकुंभ में माला बेचने वाली मोनालिसा बनी स्टार, पहली फिल्म का ऐलान “द डायरी ऑफ मणिपुर”

    Monalisa: महाकुंभ में माला बेचने वाली मोनालिसा बनी स्टार, पहली फिल्म का ऐलान “द डायरी ऑफ मणिपुर”

    Monalisa: महाकुंभ में माला बेचने वाली मोनालिसा आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। कभी धार्मिक मेले में श्रद्धालुओं को माला बेचने वाली यह साधारण लड़की अब फिल्मी दुनिया में कदम रखने जा रही है। महाकुंभ की माला बेचने वाली मोनालिसा की कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो यह साबित करती है कि किस्मत कब और कैसे बदल जाए, कोई नहीं जानता।

    महाकुंभ के दौरान मोनालिसा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उनकी सादगी, आत्मविश्वास और अलग पहचान ने लोगों का ध्यान खींचा। देखते ही देखते वह सोशल मीडिया सेंसेशन बन गईं और यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया। महाकुंभ की माला बेचने वाली मोनालिसा को ऐसे मौके मिले, जिनकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

    अब मोनालिसा अपनी पहली फिल्म “द डायरी ऑफ मणिपुर” के जरिए अभिनय की दुनिया में डेब्यू करने जा रही हैं। बताया जा रहा है कि वह फिलहाल फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं और प्रोजेक्ट को लेकर काफी उत्साहित हैं। फिल्म से जुड़े लोगों के अनुसार, मोनालिसा का किरदार कहानी में अहम भूमिका निभाएगा और दर्शकों को उनकी सादगी व अभिनय का नया रूप देखने को मिलेगा।

    कभी साधारण जीवन जीने वाली मोनालिसा अब लग्जरी लाइफस्टाइल में नजर आ रही हैं। शूटिंग के सिलसिले में वह हेलिकॉप्टर से यात्रा कर रही हैं और कहा जा रहा है कि वह अब करोड़ों की संपत्ति की मालिक बन चुकी हैं। महाकुंभ की माला बेचने वाली मोनालिसा के लिए यह सब किसी सपने से कम नहीं है।

    मोनालिसा की कहानी संघर्ष, मेहनत और किस्मत के अनोखे मेल की मिसाल है। उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन उनकी पहचान महाकुंभ से निकलकर फिल्मी दुनिया तक पहुंचेगी। आज वह न सिर्फ खुद के लिए, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद बन गई हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

    यह कहानी बताती है कि अवसर हर किसी के जीवन में आता है, बस जरूरत होती है उसे पहचानने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की। मोनालिसा का यह सफर आने वाले समय में और भी लोगों को प्रेरित करता रहेगा।

  • Kadhai vs Pressure Cooker : स्वाद, समय और सेहत के लिए कौन सा बर्तन बेहतर

    Kadhai vs Pressure Cooker : स्वाद, समय और सेहत के लिए कौन सा बर्तन बेहतर

    Kadhai vs Pressure Cooker: किचन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले बर्तनों में कढ़ाही और प्रेशर कुकर शामिल हैं। रोजमर्रा की भाग-दौड़ में प्रेशर कुकर खाना बनाना तेज और आसान माना जाता है, जबकि कढ़ाही में तैयार खाना स्वाद और परंपरा के लिए पसंद किया जाता है। लेकिन सवाल सिर्फ स्वाद या समय का नहीं है, बल्कि सेहत और पोषक तत्वों पर भी असर पड़ता है।

    1. कढ़ाही में खाना

    कढ़ाही में खाना आमतौर पर खुले बर्तन में और मध्यम आंच पर पकाया जाता है। इसमें सब्जियां, मसाले और तेल अच्छी तरह मिलते हैं और खाना धीरे-धीरे तैयार होता है।

    फायदे:

    • सब्जियों का रंग, खुशबू और बनावट बेहतर रहती है।
    • मसालों का स्वाद अच्छी तरह निकलता है, जिससे कम मसालों में भी स्वाद बढ़ जाता है।
    • धीरे पकने वाला खाना कुछ लोगों के लिए पचाने में आसान होता है।

    सावधानियां:

    • ज्यादा तेल या तेज आंच पर तलने से पोषण घट सकता है।
    • समय और ईंधन की खपत अधिक होती है।

    2. प्रेशर कुकर में खाना

    प्रेशर कुकर में खाना बंद ढक्कन के अंदर भाप और दबाव में पकता है। इससे दाल, चावल, सब्ज़ियां और खिचड़ी जल्दी बन जाती हैं।

    फायदे:

    • खाना जल्दी तैयार होता है, समय की बचत होती है।
    • पोषक तत्व अधिकतर सुरक्षित रहते हैं क्योंकि कम समय में खाना पकता है।
    • ऊर्जा की बचत होती है।

    सावधानियां:

    • लंबे समय तक तेज आंच पर पकाने से कुछ पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं।
    • ढक्कन खुलते समय सावधानी जरूरी है।

    3. स्वाद, पोषण और समय का संतुलन

    यदि आप स्वाद और धीरे पकने वाले पोषक तत्वों को प्राथमिकता देते हैं, तो कढ़ाही बेहतर विकल्प है। वहीं, अगर समय की बचत और ऊर्जा की बचत जरूरी है, तो प्रेशर कुकर अधिक सुविधाजनक है। स्वास्थ्य और पोषण के लिहाज से दोनों तरीकों का संतुलित उपयोग करना सही माना जाता है।किचन में दोनों बर्तनों का महत्व अलग-अलग है। स्वाद और परंपरा के लिए कढ़ाही, जबकि समय और पोषण बचाने के लिए प्रेशर कुकर का प्रयोग करना समझदारी है। कढ़ाही vs प्रेशर कुकर का चुनाव आपकी प्राथमिकता और जरूरत पर निर्भर करता है।

  • हमीरपुर : डीएम के निर्देश पर गोहांड में कंबल वितरण कार्यक्रम,ठंड से बचाव के लिए प्रशासनिक पहल

    हमीरपुर : डीएम के निर्देश पर गोहांड में कंबल वितरण कार्यक्रम,ठंड से बचाव के लिए प्रशासनिक पहल

    संवाददाता प्रवीण कुमार मिश्रा हमीरपुर जिलाधिकारी घनश्याम मीना के निर्देशानुसार जनपद की सरीला तहसील के विकासखंड गोहांड में गोहांड में कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता उपजिलाधिकारी सरीला बलराम गुप्ता ने की, जिसमें जिले के विभिन्न प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय कर्मचारी उपस्थित रहे।

    इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष जयंती राजपूत, राठ विधायक मनीषा अनुरागी, गोहद नगर पंचायत अध्यक्ष अनीता सत्येंद्र राजपूत और पूर्व ब्लॉक प्रमुख मुकेश राजपूत ने सक्रिय भूमिका निभाई और जरूरतमंद लोगों को कंबल वितरित किए। अधिकारियों ने बताया कि शासन की मंशा के अनुसार ठंड से बचाव के लिए यह पहल समय पर जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है।

    कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों ने कंबल वितरण के साथ-साथ गरीब और असहाय परिवारों की स्थिति का आंकलन भी किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के गोहांड में कंबल वितरण अभियान नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि सर्दियों के दौरान किसी को भी ठंड से राहत न मिले। इसके अलावा, प्रशासन स्थानीय स्तर पर जरूरतमंदों की सूची तैयार कर उनकी मदद सुनिश्चित करेगा।

    एसडीएम बलराम गुप्ता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का संयुक्त प्रयास ही ऐसे सामाजिक कार्यक्रमों की सफलता सुनिश्चित करता है। उन्होंने सभी उपस्थित जनप्रतिनिधियों, कर्मचारियों और स्वयंसेवकों को उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया।

    इस दौरान कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि गोहांड में कंबल वितरण केवल एक राहत कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा और जनसुरक्षा की दिशा में प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम का यह स्वरूप लोगों में सकारात्मक संदेश भी पहुँचाता है और जरूरतमंदों में आशा और सुरक्षा की भावना जगाता है।

    अधिकारियों ने बताया कि ठंड से राहत अभियान लगातार जारी रहेगा और आगामी सर्दियों में भी गोहांड के विभिन्न गांवों में कंबल वितरण, गर्म कपड़े और आवश्यक सामग्रियों का वितरण किया जाएगा। इस पहल से न केवल ठंड से सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि सामाजिक एकता और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास भी बढ़ेगा।

    गोहांड में कंबल वितरण कार्यक्रम ने दिखाया कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयास से समाज के कमजोर वर्ग तक समय पर राहत पहुंचाई जा सकती है। इस तरह के पहल से सरीला तहसील और गोहांड विकासखंड के लोग सर्दियों के मौसम में सुरक्षित और संरक्षित रह सकेंगे।

  • Afghan girl Shiv bhakt : शिव की भक्त अफगानिस्तानी हसीना सदफ, मुस्लिम नाम में जोड़ा ‘शंकर’, बनना चाहती हैं हिंदुस्तानी बहू

    Afghan girl Shiv bhakt : शिव की भक्त अफगानिस्तानी हसीना सदफ, मुस्लिम नाम में जोड़ा ‘शंकर’, बनना चाहती हैं हिंदुस्तानी बहू

    Afghan girl Shiv bhakt : नई दिल्ली/एंटरटेनमेंट डेस्क:टीवी रियलिटी शो Splitsvilla 16 में एक अफगानिस्तानी कंटेस्टेंट इन दिनों चर्चा में बनी हुई हैं। अफगानिस्तान की रहने वाली सदफ न सिर्फ अपने बेबाक अंदाज़ बल्कि अपनी आस्था को लेकर दिए बयान के कारण भी सुर्खियों में हैं। सदफ पिछले 10 वर्षों से भारत में रह रही हैं और उन्होंने खुलकर कहा है कि वह किसी हिंदुस्तानी लड़के की दुल्हन बनना चाहती हैं

    मुस्लिम नाम के साथ ‘शंकर’ क्यों?

    शो के दौरान जब होस्ट करण कुंद्रा ने सदफ के नाम को लेकर सवाल किया, तो वह भी कुछ देर के लिए कंफ्यूज नजर आए। करण ने पूछा कि मुस्लिम होने के बावजूद वह अपने नाम के साथ ‘शंकर’ सरनेम क्यों लगाती हैं?इस पर सदफ ने जो जवाब दिया, उसने सभी का ध्यान खींच लिया।

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    शिव भक्ति से जुड़ा है नाम

    सदफ ने बताया कि वह भगवान शिव की बड़ी भक्त हैं और शिव पर उनकी गहरी आस्था है। उन्होंने कहा कि शिव उन्हें शक्ति, शांति और जीवन का रास्ता दिखाते हैं। इसी आस्था के कारण उन्होंने अपने नाम के साथ ‘शंकर’ जोड़ लिया है।

    सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा

    सदफ का यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग उनकी आस्था और खुले विचारों की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ इसे लेकर सवाल भी उठा रहे हैं। हालांकि, सदफ साफ कहती हैं कि आस्था किसी धर्म की मोहताज नहीं होती

  • कानपुर: बिल्हौर थाने में Bjp विधायक राहुल बच्चा सोनकर का बयान,”मस्जिदों में सूअर का मांस न मिले तो नाम बदल देना”

    कानपुर: बिल्हौर थाने में Bjp विधायक राहुल बच्चा सोनकर का बयान,”मस्जिदों में सूअर का मांस न मिले तो नाम बदल देना”

    कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के बिल्हौर से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राहुल बच्चा सोनकर सोमवार देर रात बिल्हौर थाने पहुंचे, जहां उनका अंदाज़ और बयान चर्चा का विषय बन गया। थाने के अंदर मौजूद पुलिसकर्मियों से बातचीत के दौरान विधायक ने जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया, उसने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

    थाने में विधायक का तीखा तेवर

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विधायक राहुल बच्चा सोनकर देर रात बिल्हौर थाने पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पुलिस कई लोगों को ठीक से नहीं जानती क्योंकि वह केवल ऑफिस में बैठकर नौकरी कर रही है। विधायक ने यह भी कहा कि उनका इतिहास भी “बहुत गंदा” रहा है और वे खुद को पूरी तरह साफ छवि वाला व्यक्ति नहीं मानते, जितना लोग समझते हैं

    बयान का वीडियो और चर्चा

    विधायक के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने बीजेपी और विधायक पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। इस मामले में कार्रवाई नहीं होने पर विधायक राहुल बच्चा बिल्हौर थाने पहुंचे और इलाके के पूरे मस्जिदों में सूअर का मांस फेंकने की धमकी दे डाली. इस मामले में जानवरों की कटाई करने वाली रहमान कुरैशी की फैक्ट्री को तत्काल सील कर दिया गया है. साथ ही प्रतिबंधित मांस की तस्करी करने के आरोप में 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है.

    फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और मांस के अवशेषों के सैंपल को जांच करने के लिए कलेक्ट किया.वहीं, इस मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर संयुक्त पुलिस आयुक्त आशुतोष कुमार एडीसीपी कपिल देव सिंह मौके पर पहुँचे. पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने गौ वंस वाले मामले में लापरवाही बरतने पर चार पुलिस कर्मियों निलंबित कर दिया है. बिल्हौर इंस्पेक्टर अशोक कुमार सरोज ,चौकी इंचार्ज प्रेमवीर, हल्का इंचार्ज आफताब आलम हेड कांस्टेबल दिलीप गंगवार को इस मामले में निलंबित किया गया है.

  • बहराइच: खुद को प्रमुख सचिव बताने वाला फर्जी अफसर गिरफ्तार, नेपाल कसीनो जाने की थी तैयारी

    बहराइच: खुद को प्रमुख सचिव बताने वाला फर्जी अफसर गिरफ्तार, नेपाल कसीनो जाने की थी तैयारी

    बहराइच उत्तर प्रदेश से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शख्स खुद को यूपी सरकार का प्रमुख सचिव बताकर लाल-नीली बत्ती लगी इनोवा कार से नेपाल में कसीनो खेलने जा रहा था। लेकिन भारत-नेपाल सीमा पर बहराइच जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते उसे और उसके चार साथियों को पकड़ लिया।

    प्रमुख सचिव बनकर दिखा रहा था रौब

    पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार मुख्य आरोपी की पहचान धर्मेंद्र सिंह के रूप में हुई है। वह अपनी इनोवा कार पर लाल-नीली बत्ती लगाकर खुद को यूपी सरकार का बड़ा अधिकारी बताता था। उसके साथ कार में मौजूद चार अन्य युवक—शुभम बाजपेई, अनमोल यादव, सचिन सिंह और स्वप्निल सहाय—भी इसी झूठी पहचान के सहारे सीमा पार करने की कोशिश कर रहे थे।

    नेपाल में कसीनो खेलने की थी प्लानिंग

    जांच में सामने आया है कि सभी आरोपी नेपाल जाकर वहां के कसीनो में जुआ खेलने की योजना बना रहे थे। सरकारी अफसर होने का झांसा देकर वे चेकिंग से बचना चाहते थे, लेकिन बॉर्डर पर तैनात सुरक्षा बलों को उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं।

    भारत-नेपाल बॉर्डर पर ऐसे खुली पोल

    बहराइच जिले में भारत-नेपाल सीमा पर जब वाहन की गहन जांच की गई तो न तो कोई सरकारी दस्तावेज मिला और न ही किसी तरह का आधिकारिक पहचान पत्र। पूछताछ में आरोपी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, जिसके बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया।

    फर्जीवाड़ा और सरकारी प्रतीकों के दुरुपयोग का मामला

    पुलिस का कहना है कि यह मामला न सिर्फ फर्जी पहचान का है, बल्कि सरकारी पद और प्रतीकों के दुरुपयोग से भी जुड़ा है। लाल-नीली बत्ती का इस्तेमाल कर आम जनता और प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की गई।

    आरोपियों से पूछताछ जारी

    फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है। यह भी जांच की जा रही है कि इससे पहले वे इस तरह की हरकतें और कहां-कहां कर चुके हैं। पुलिस ने इनोवा कार को भी जब्त कर लिया है।

    प्रशासन की सख्ती

    इस घटना के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फर्जी अफसर बनकर सरकारी रुतबे का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीमा क्षेत्रों में चेकिंग और कड़ी की जा सकती है।

  • रायबरेली में गूगल से मंदिर खोजकर घंटा चोरी करने वाला गैंग गिरफ्तार, 3 क्विंटल से ज्यादा घंटे बरामद

    रायबरेली में गूगल से मंदिर खोजकर घंटा चोरी करने वाला गैंग गिरफ्तार, 3 क्विंटल से ज्यादा घंटे बरामद

    रायबरेली।डिजिटल जमाने में अपराध के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। रायबरेली पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो गूगल सर्च और लोकेशन के जरिए मंदिरों की पहचान कर वहां से घंटे चोरी करता था। इस गिरोह का मुखिया मध्य प्रदेश के भिंड जिले का रहने वाला है, जो किसी भी नए शहर में पहुंचते ही पहले वहां के प्रमुख मंदिरों को ऑनलाइन सर्च करता था।


    गूगल लोकेशन से मंदिर चिन्हित कर देते थे वारदात को अंजाम

    पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य किसी भी जिले में जाने से पहले गूगल मैप और सर्च इंजन के माध्यम से प्रमुख और पुराने मंदिरों की लोकेशन निकालते थे। इसके बाद रात के समय मंदिर पहुंचकर वहां लगे भारी-भरकम घंटों को चोरी कर लेते थे। चोरी के बाद ये लोग तेजी से जिला छोड़ देते थे, जिससे पुलिस को इनके बारे में सुराग मिलने में दिक्कत होती थी।


    पुलिस चेकिंग से बचने का अनोखा तरीका

    इस गैंग की एक खास रणनीति यह भी थी कि ये अपने साथ एक महिला को रखते थे। पुलिस चेकिंग के दौरान महिला को बीमार बताकर वाहन को बिना ज्यादा जांच के निकलवा लिया जाता था। इसी चाल के कारण यह गिरोह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।


    स्थानीय लोगों की मिलीभगत भी आई सामने

    पुलिस के अनुसार, गैर जनपद से आए इस गिरोह ने रायबरेली के दो स्थानीय लोगों को भी अपने साथ मिला लिया था। इनकी मदद से गिरोह को मंदिरों की जानकारी, रास्तों और इलाके की स्थिति समझने में आसानी होती थी। हाल ही में गिरोह ने जगतपुर थाना क्षेत्र स्थित एक मंदिर को निशाना बनाया था, जहां से कई घंटे चोरी किए गए थे।


    संयुक्त कार्रवाई में गिरोह गिरफ्तार

    घटना के खुलासे के बाद जगतपुर थाना पुलिस और एसओजी टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपियों को ऊंचाहार क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान पुलिस ने इनके पास से 3 क्विंटल से अधिक मंदिर के घंटे और एक चार पहिया वाहन बरामद किया है।


    अन्य जिलों में भी कर चुके हैं वारदात

    रायबरेली के पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों का लंबा आपराधिक इतिहास है। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने उन्नाव जिले में भी मंदिरों से घंटे चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया है। अन्य जिलों में हुई चोरी की वारदातों को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है।


    डिजिटल साधनों से अपराध पर पुलिस की नजर

    इस मामले ने साफ कर दिया है कि अपराधी अब तकनीक का सहारा लेकर वारदात कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि मंदिरों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर अब डिजिटल निगरानी और स्थानीय स्तर पर सतर्कता और बढ़ाई जाएगी।

  • Pakistan Inflation: पाकिस्तान में महंगाई का कहर, 1 किलो चावल 320 रुपये तो चिकन 840 रुपये के पार

    Pakistan Inflation: पाकिस्तान में महंगाई का कहर, 1 किलो चावल 320 रुपये तो चिकन 840 रुपये के पार

    Pakistan Inflation News in Hindi:पाकिस्तान में महंगाई आम जनता की कमर तोड़ती जा रही है। रोजमर्रा की जरूरत की चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। ताजा हालात यह हैं कि एक किलो चावल की कीमत 320 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि एक किलो चिकन 840 रुपये से भी ज्यादा में बिक रहा है। बढ़ती कीमतों ने पाकिस्तान के मध्यम और गरीब वर्ग की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

    खाद्य पदार्थों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी

    पाकिस्तान के कई शहरों में खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं।

    • चावल: ₹300–320 प्रति किलो
    • चिकन: ₹800–840 प्रति किलो
    • आटा, दाल, तेल और सब्जियों की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है
    • महंगाई की इस मार का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों और सीमित आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है।

    आर्थिक संकट ने बढ़ाई परेशानी

    विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान इस वक्त गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में कमी पाकिस्तानी रुपये की गिरती कीमत ईंधन और आयातित वस्तुओं के महंगे होने कर्ज और ब्याज का बढ़ता बोझ इन सभी कारणों ने महंगाई को और भड़काने का काम किया है।

    आम जनता में आक्रोश

    महंगाई के चलते पाकिस्तान में आम लोग सरकार की नीतियों से नाराज नजर आ रहे हैं। कई जगहों पर लोग कह रहे हैं कि अब दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है। सोशल मीडिया पर भी बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार की आलोचना तेज हो गई है।

    सरकार के सामने बड़ी चुनौती

    पाकिस्तान सरकार के लिए महंगाई पर काबू पाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में जनाक्रोश और बढ़ सकता है।

  • International Kite Festival 2026: साबरमती रिवरफ्रंट पर पीएम मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने साथ उड़ाई पतंग

    International Kite Festival 2026: साबरमती रिवरफ्रंट पर पीएम मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने साथ उड़ाई पतंग

    Ahmedabad News | International Kite Festival 2026:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 में एक साथ पतंग उड़ाई। यह दृश्य न सिर्फ भारतीय संस्कृति की जीवंत झलक बना, बल्कि भारत-जर्मनी के मजबूत होते द्विपक्षीय रिश्तों का भी प्रतीक माना जा रहा है।

    भारत-जर्मनी दोस्ती की नई तस्वीर

    पतंग उड़ाते हुए पीएम मोदी और चांसलर मर्ज़ की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। दोनों नेताओं ने हंसते-मुस्कुराते हुए पतंग महोत्सव का आनंद लिया। इस दौरान भारतीय लोकसंस्कृति और पारंपरिक उत्सवों को लेकर जर्मन चांसलर की उत्सुकता साफ नजर आई।

    पीएम मोदी के निमंत्रण पर पहली बार भारत आए मर्ज़

    जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर पहली बार भारत यात्रा पर पहुंचे हैं। अहमदाबाद पहुंचने पर उनका भव्य और पारंपरिक स्वागत किया गया। पतंग महोत्सव में उनकी मौजूदगी ने आयोजन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

    संस्कृति और कूटनीति का संगम

    अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 के मंच से यह संदेश भी गया कि भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत के जरिए दुनिया के देशों से रिश्तों को और मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों में वैश्विक नेताओं की भागीदारी सॉफ्ट डिप्लोमेसी को नई मजबूती देती है।

    द्विपक्षीय संबंधों पर दिखा भरोसा

    पीएम मोदी और चांसलर मर्ज़ की यह साझा उपस्थिति भारत-जर्मनी के बीच बढ़ते सहयोग, आपसी विश्वास और रणनीतिक साझेदारी की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।