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Author: Navneet Tiwari

  • Pankaj Chaudhary UP BJP President Banne ki Khabar, Kal Dakhil Hoga Namankan!

    Pankaj Chaudhary UP BJP President Banne ki Khabar, Kal Dakhil Hoga Namankan!

    Pankaj Chaudhary UP BJP President banne ke liye taiyar hain. Sūtrō ke anusaar, ve kal namankan dakhil kar sakte hain. Janiye kyon yeh nishchay hai aur iske kya maayne hain

    भारतीय जनता पार्टी (BJP) उत्तर प्रदेश में जल्द ही अपने नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कर सकती है, और सूत्रों के अनुसार, इस पद पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का नाम लगभग तय माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह खबर तेजी से फैल रही है कि पंकज चौधरी कल यानी शनिवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। यह निर्णय उत्तर प्रदेश भाजपा की रणनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है, खासकर अगले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए। Pankaj Chaudhary UP BJP President बनने की यह खबर प्रदेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

    कौन हैं पंकज चौधरी और क्यों चुना गया यह नाम?

    पंकज चौधरी, वर्तमान में केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री (Minister of State for Finance) के रूप में कार्यरत हैं और महाराजगंज लोकसभा सीट से लगातार सांसद रहे हैं। उनका चयन कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को साधने की भाजपा की रणनीति का हिस्सा है।

    Pankaj Chaudhary को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे के संभावित कारण और राजनीतिक मायने:

    • क्षेत्रीय संतुलन: चौधरी पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच एक मजबूत कड़ी माने जाते हैं, जिससे पार्टी को पूरे प्रदेश में पैठ बनाने में मदद मिल सकती है।
    • जातीय समीकरण: वह एक प्रमुख पिछड़ा वर्ग (OBC) नेता हैं, और उनका चयन पार्टी के OBC वोट बैंक को मजबूत करने और साधने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में OBC समुदाय का समर्थन सत्ता की कुंजी रहा है।
    • संगठनात्मक अनुभव: पंकज चौधरी का लंबा राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव उन्हें इस महत्वपूर्ण पद के लिए एक स्वाभाविक पसंद बनाता है।
    • केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा: केंद्र सरकार में उनकी भूमिका यह दर्शाती है कि उन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का गहरा विश्वास है।

    कल दाखिल हो सकता है नामांकन पत्र

    लखनऊ में भाजपा मुख्यालय में इस संभावित घटनाक्रम को लेकर गहमागहमी तेज हो गई है। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पंकज चौधरी शनिवार को औपचारिक रूप से नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि इस बार नाम लगभग फाइनल हो चुका है।

    नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, जल्द ही उनके नाम पर मुहर लग जाएगी और वह आधिकारिक तौर पर UP BJP President का पद संभाल लेंगे। यह नियुक्ति निवर्तमान अध्यक्ष के स्थान पर होगी और पार्टी को एक नए नेतृत्व के साथ आगामी चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी।

    UP BJP में बदलाव के मायने और आगे की चुनौतियां

    नए अध्यक्ष का चयन ऐसे समय में हो रहा है जब Uttar Pradesh में भाजपा को कई महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना है, जिनमें शामिल हैं:

    1. लोकसभा चुनाव 2029 की तैयारी: नए अध्यक्ष की सबसे बड़ी जिम्मेदारी 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी संगठन को मजबूत करना, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और चुनावी रणनीति बनाना होगी।
    2. विपक्षी दलों की एकजुटता: विपक्षी दलों की बढ़ती एकजुटता का मुकाबला करने और पार्टी के वोट शेयर को बनाए रखने की चुनौती भी नए अध्यक्ष के सामने होगी।
    3. संगठनात्मक समन्वय: सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना ताकि विकास कार्यों का लाभ चुनावी सफलता में परिवर्तित हो सके।

    पंकज चौधरी जैसे अनुभवी नेता का प्रदेश अध्यक्ष बनना यह संकेत देता है कि भाजपा इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती और वह जातीय तथा क्षेत्रीय समीकरणों को साधकर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।

    Pankaj Chaudhary UP BJP President बनने की खबर उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक निर्णायक मोड़ है। उनका नामांकन दाखिल होना लगभग तय माना जा रहा है, और यह प्रदेश भाजपा के लिए एक नए युग की शुरुआत होगी। उनकी नियुक्ति से पार्टी को संगठनात्मक मजबूती मिलेगी और OBC वोट बैंक को साधने की रणनीति को बल मिलेगा। सभी की निगाहें अब कल के घटनाक्रम पर टिकी हैं, जब यह साफ हो जाएगा कि पंकज चौधरी आधिकारिक तौर पर Uttar Pradesh BJP की कमान संभालेंगे या नहीं। इस महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव पर हमारी नजर बनी हुई है। आपके विचार में, पंकज चौधरी का अध्यक्ष बनना भाजपा के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा? हमें कमेंट बॉक्स में बताएं।

  • Barabanki university lathicharge: Ramswaroop Memorial University में छात्रों पर लाठीचार्ज, प्रशासनिक गाज और राजनीतिक विडंबना

    Barabanki university lathicharge: Ramswaroop Memorial University में छात्रों पर लाठीचार्ज, प्रशासनिक गाज और राजनीतिक विडंबना

    Barabanki university lathicharge: Ramswaroop Memorial University

    बाराबंकी की रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ हुई बर्बरता का मामला सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुँच गया है। छात्रों को बेरहमी से पीटने वाले पुलिस अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन इस घटना ने कई गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यह लाठीचार्ज केवल एक हिंसक घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी तस्वीर है जहाँ शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है और एक बड़े राजनीतिक संगठन की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। आखिर क्या वजह थी कि चार साल से छात्रों की परीक्षा नहीं हुई? 2021 में मान्यता खत्म होने के बावजूद लाखों रुपये लेकर नए एडमिशन क्यों दिए गए? और इस पूरे घटनाक्रम में शिक्षा की आड़ में कौन सा बड़ा खेल खेला जा रहा था? यह रिपोर्ट इस पूरे मामले की परतें खोलती है।

    शिक्षण व्यवस्था की खुली पोल: छात्रों पर क्यों बरसी लाठियां?

    मामले की जड़ में रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी का एक गंभीर शैक्षणिक और प्रशासनिक कुप्रबंधन है। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी पिछले चार सालों से उनकी परीक्षाएं नहीं करवा रही थी, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया था। यह आरोप तब और भी गंभीर हो जाता है जब यह सामने आया कि यूनिवर्सिटी की मान्यता 2021 में ही खत्म हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद वह छात्रों से लाखों रुपये फीस लेकर एडमिशन देती रही।

    लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी जब छात्र अपनी डिग्री के लिए भटकने लगे और उनका भविष्य अंधकारमय दिखने लगा, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया, अपनी आवाज उठाने का प्रयास किया। लेकिन, जब विरोध की यह आवाज प्रशासन तक पहुंची तो, छात्रों के आरोपों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने पुलिस को बुलाकर उन्हें शांत कराने की कोशिश की। इसके बाद जो हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। पुलिस ने छात्रों पर बेरहमी से लाठियाँ भांजी, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए।

    लाठीचार्ज के बाद का भयावह मंजर और सियासी हलचल

    पुलिस के इस हिंसक लाठीचार्ज में कम से कम 12 छात्र घायल हुए। घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहाँ भी हालात बदतर थे। अस्पताल में घायल छात्रों के लिए पर्याप्त बेड तक उपलब्ध नहीं थे, और वे दर्द से तड़पते रहे। यह स्थिति केवल पुलिस की क्रूरता नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही को दर्शाती है।

    Barabanki university lathicharge

    जब हालात बेकाबू हो गए और प्रशासन पर सवाल उठने लगे, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। रात में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के आवास का घेराव किया, विरोध प्रदर्शन किया और दोषी अधिकारियों का पुतला दहन किया।

    यह घटना तब और भी ज्यादा चौंकाने वाली हो जाती है जब हम एबीवीपी की पृष्ठभूमि पर गौर करते हैं। एबीवीपी, जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी और जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा पर आधारित है, आज दुनिया का सबसे बड़ा छात्र संगठन है। इस संगठन ने हमेशा छात्रों के अधिकारों, राष्ट्रवाद और शिक्षा के मुद्दों पर मुखर होकर आवाज उठाई है। भाजपा सरकार को सत्ता में लाने में भी इस संगठन की अहम भूमिका रही है। ऐसे में, उसी सरकार में पुलिस की लाठियों से एबीवीपी कार्यकर्ताओं का पिटना एक राजनीतिक विडंबना और प्रशासनिक चूक दोनों को उजागर करता है।

    सीएम योगी ने लिया संज्ञान, प्रशासनिक गाज गिरी

    जब यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इस पर तत्काल और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम के दखल के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और दोषी अधिकारियों पर गाज गिरना शुरू हो गई।

    प्रशासनिक स्तर पर हुई प्रमुख कार्रवाइयां इस प्रकार हैं:

    • सीओ सिटी हर्षित चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
    • नगर कोतवाली प्रभारी और गदिया चौकी के तमाम पुलिसकर्मियों को उनकी लापरवाही और क्रूरता के कारण लाइन हाजिर कर दिया गया है।
    • इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आईजी अयोध्या प्रवीण कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    • कमिश्नर गौरव दयाल को यूनिवर्सिटी की मान्यता और वैधता की विस्तृत जांच करने का आदेश दिया गया है, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि 2021 में मान्यता खत्म होने के बाद भी एडमिशन क्यों दिए गए।

    यह कार्रवाई दर्शाती है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है, लेकिन सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या सिर्फ अधिकारियों के निलंबन से इस तरह के मामलों में लगाम लग पाएगी?

    निष्कर्ष

    रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी की घटना ने एक बार फिर शिक्षा के क्षेत्र में चल रही अनियमितताओं और छात्रों के शोषण की कड़वी सच्चाई को सामने ला दिया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस शिक्षा व्यवस्था को युवाओं के भविष्य का निर्माण करना चाहिए, वही उनके लिए एक जाल बन गई। इस घटना ने प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवालिया निशान लगाए हैं, और राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।

    फिलहाल, जांच चल रही है और उम्मीद है कि दोषी अधिकारियों के साथ-साथ यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। यह जरूरी है कि शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता लाई जाए और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन को बख्शा न जाए। यह मामला भविष्य में सभी शिक्षण संस्थानों और प्रशासन के लिए एक सबक साबित होना चाहिए।

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  • Hanuman Statue Amethi: तालाब से हनुमान प्रतिमा मिलने से हड़कंप

    Hanuman Statue Amethi: तालाब से हनुमान प्रतिमा मिलने से हड़कंप

    अमेठी के कमरौली थाना क्षेत्र के बनभरिया गांव में बुधवार शाम एक अनोखी घटना ने ग्रामीणों का ध्यान खींचा। शीतला माता मंदिर के सामने स्थित तालाब के सूखे हिस्से से हनुमान जी की पत्थर की प्रतिमा मिलने की खबर फैलते ही गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने जयकारों के साथ प्रतिमा के दर्शन किए, वहीं प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए तुरंत पुलिस बल तैनात किया। यह घटना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से गांव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


    प्रतिमा की खोज का पूरा घटनाक्रम

    ग्रामीणों ने देखा और खबर फैली

    • 20 वर्षीय अखिलेश उर्फ सोमिल कनौजिया और उसके दोस्त गाय चराने गए थे।
    • इसी दौरान उनकी नजर तालाब में दबे पत्थर पर पड़ी।
    • उत्सुकता से मिट्टी हटाई और लगभग डेढ़ से दो फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा दिखाई दी।
    • प्रतिमा के दर्शन की खबर फैलते ही पूरे गांव के लोग वहां इकट्ठा हो गए।

    पूजा-अर्चना और ग्रामीणों की भागीदारी

    • ग्रामीणों ने प्रतिमा के सामने नारियल फोड़े और भव्य पूजा-अर्चना शुरू की।
    • आस-पास के अन्य गांवों से भी श्रद्धालु मौके पर पहुंचे।
    • गांव वाले भविष्य में प्रशासन की अनुमति मिलने पर प्रतिमा की स्थापना और मंदिर निर्माण की योजना बना रहे हैं।

    पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

    • थाना अध्यक्ष कमरौली, मुकेश पटेल ने बताया कि सीओ अतुल सिंह के साथ स्थल का निरीक्षण किया गया।
    • प्रतिमा लगभग दो फीट की प्रतीत हो रही है।
    • अंधेरा होने के कारण पूरी जानकारी सुबह ही स्पष्ट हो पाई।
    • शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया।

    धार्मिक और सामाजिक महत्व

    • यह घटना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक एकता को भी दर्शाती है।
    • गांव के लोग मिलकर मूर्ति की पूजा कर रहे हैं और भविष्य में मंदिर निर्माण की तैयारी में हैं।
    • स्थानीय प्रशासन भी इस घटना को शांतिपूर्ण रूप से प्रबंधित कर रहा है।

    स्थानीय दृष्टिकोण और नागरिक प्रतिक्रिया

    • ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिमा की खोज ने पूरे गांव में उत्साह और श्रद्धा की भावना जगाई है।
    • युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर प्रतिमा के दर्शन किए और पूजा-अर्चना में भाग लिया।
    • घटना की जानकारी के तुरंत बाद सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार चैनलों पर भी इसकी चर्चा होने लगी।

    सुरक्षा और प्रशासनिक उपाय

    • पुलिस ने घटना स्थल पर निरंतर निगरानी रखी।
    • प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि श्रद्धालु और ग्रामीण सुरक्षित तरीके से दर्शन कर सकें।
    • भविष्य में मंदिर निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और मार्गदर्शन के लिए स्थानीय प्रशासन सक्रिय रहेगा।

    निष्कर्ष

    कमरौली के बनभरिया गांव में तालाब से हनुमान जी की प्रतिमा मिलने की घटना न केवल धार्मिक उत्साह बढ़ाने वाली है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। प्रशासन और पुलिस की सक्रियता ने यह सुनिश्चित किया कि घटना शांति और सुव्यवस्था के साथ संपन्न हो। भविष्य में, ग्रामीणों की सहभागिता से भव्य मंदिर निर्माण की संभावना है।

    ग्रामीण और श्रद्धालु इस घटना को साझा कर रहे हैं, और आप भी अपने विचार और अनुभव कमेंट में साझा कर सकते हैं।

  • औरैया: मकान की छत ढहने से युवक की मौत, गांव में मातम

    औरैया: मकान की छत ढहने से युवक की मौत, गांव में मातम

    उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद से एक हृदय विदारक खबर सामने आई है, जहां एक कच्चे मकान की छत अचानक गिर जाने से एक युवक की जान चली गई। यह हादसा मंगलवार सुबह तड़के हुआ, जिसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे फरीदपुर गांव को सदमे में डाल दिया है। मलबे के नीचे दबकर 35 वर्षीय मनोज कुमार कुशवाहा की मौत हो गई, जबकि उनके साथ उसी कमरे में सो रही उनकी माँ और बहन चमत्कारिक रूप से बच गईं। यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर मकानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। इस दुखद खबर ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है, और हर कोई इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे से स्तब्ध है।


    एक दुखद सुबह: कैसे हुआ हादसा?

    यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना मंगलवार सुबह लगभग 5 बजकर 9 मिनट पर हुई। पूरा गांव गहरी नींद में था, तभी अचानक एक कच्चे मकान के ढहने की तेज आवाज से शांति भंग हो गई। फरीदपुर गांव में रहने वाले मनोज कुमार कुशवाहा अपने परिवार के साथ सो रहे थे, जब उनके मकान की पुरानी और कमजोर छत भरभराकर गिर गई। छत का भारी मलबा सीधे उनके ऊपर आ गिरा।

    आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। उन्होंने देखा कि पूरा मकान मलबे में तब्दील हो चुका था। ग्रामीणों ने तुरंत ही बिना किसी देरी के राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। वे अपनी जान जोखिम में डालकर मलबे को हटाने में जुट गए ताकि अंदर दबे लोगों को बाहर निकाला जा सके। इस बीच, किसी ने घटना की सूचना पुलिस और फायर ब्रिगेड को दी।

    पुलिस को जानकारी मिलते ही प्रभारी निरीक्षक कोतवाली औरैया पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। उनके साथ फायर ब्रिगेड की टीम भी थी। ग्रामीणों और पुलिस के संयुक्त प्रयास से मलबे को हटाया गया और मनोज को बाहर निकाला गया। वह बुरी तरह से घायल हो चुके थे।

    अस्पताल में युवक की मौत, प्रशासन का बयान

    रेस्क्यू ऑपरेशन के तुरंत बाद, मनोज को तत्काल एक एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल भिजवाया गया ताकि उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके। हालांकि, अस्पताल पहुँचने तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने गंभीर चोटों के कारण उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही उनके परिवार में कोहराम मच गया।

    इस दुखद घटना की पुष्टि करते हुए क्षेत्राधिकारी सदर अशोक कुमार ने बताया, “आज सुबह करीब 5 बजकर 9 मिनट पर हमें सूचना मिली कि फरीदपुर गांव में कच्चे मकान की छत गिरने से एक व्यक्ति दब गया है। पुलिस व फायर सर्विस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के सहयोग से घायल को जिला अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।”

    परिवार में पसरा मातम: माँ और बहन सुरक्षित

    मृतक मनोज कुमार के लिए तो यह सुबह आखिरी साबित हुई, लेकिन सौभाग्य से उनके परिवार के अन्य सदस्य इस हादसे में सुरक्षित बच गए। क्षेत्राधिकारी अशोक कुमार के अनुसार, मनोज के साथ उसी घर में उनकी 60 वर्षीय माँ सुखदेवी और 20 वर्षीय बहन रचना भी सो रही थीं। दोनों इस दर्दनाक हादसे में पूरी तरह सुरक्षित हैं। परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं कि माँ और बहन तो बच गईं, लेकिन घर का इकलौता सहारा उनसे छिन गया।

    इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरा सदमा दिया है। मृतक की पत्नी पिछले कई वर्षों से उनके साथ नहीं रहती हैं, ऐसे में परिवार में इस दुख को साझा करने वाला कोई नहीं है। मनोज की माँ और बहन का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है, और लोग इस दुख की घड़ी में परिवार को सांत्वना देने के लिए उनके घर पहुँच रहे हैं।

    पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

    पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम की तैयारी शुरू कर दी है। कानूनी प्रक्रिया के तहत शव का पंचनामा भरा जा रहा है। क्षेत्राधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की सूचना तहसील प्रशासन को भी दे दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि “अन्य विधिक कार्रवाई की जा रही है।”

    इस तरह की घटनाएं अक्सर ग्रामीण इलाकों में कमजोर मकानों की वजह से होती हैं। प्रशासन ने मृतक के परिवार को हर संभव सरकारी सहायता देने का भरोसा दिलाया है। यह घटना सरकार और स्थानीय प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि वे उन परिवारों की पहचान करें जो जर्जर और असुरक्षित घरों में रहते हैं और उन्हें सुरक्षित आवास मुहैया कराने के लिए कदम उठाएं।

    निष्कर्ष

    कच्चे मकान की छत गिरने से हुई मनोज कुमार की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक सामाजिक त्रासदी है जो ग्रामीण भारत की एक गंभीर समस्या को उजागर करती है। जबकि पुलिस और प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए तत्काल कार्रवाई की, इस घटना ने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया। अब यह हम सभी का कर्तव्य है कि हम ऐसे असुरक्षित घरों में रहने वाले लोगों की मदद के लिए आगे आएं। उम्मीद है कि सरकार मृतक के परिवार को पर्याप्त सहायता प्रदान करेगी और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

  • Auraiya Apradh Police Naakam: एक ही दिन में दो घटनाओं से सदर कोतवाली पुलिस पर उठे सवाल

    Auraiya Apradh Police Naakam: एक ही दिन में दो घटनाओं से सदर कोतवाली पुलिस पर उठे सवाल

    Auraiya Apradh Police Naakam – रिपोर्ट: अमित शर्मा, औरैया

    औरैया सदर कोतवाली क्षेत्र में इन दिनों अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं और लगातार घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन इन्हें रोक पाने में पुलिस नाकाम साबित हो रही है। एक ही दिन में हुई दो बड़ी वारदातों ने सदर कोतवाली पुलिस की कानून व्यवस्था की पोल खोल दी है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

    एक ही दिन में दो वारदातों से खुली पुलिस की पोल

    अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने एक ही दिन में दो अलग-अलग घटनाओं को अंजाम दिया। अज्ञात चोरों ने जहां एक मोटरसाइकिल चोरी की घटना को अंजाम देकर पुलिस को चुनौती दी, वहीं दूसरी घटना में डाकघर में पैसे जमा करने जा रही एक महिला एजेंट के बैग से शातिरों ने बड़ी रकम पार कर दी। ये दोनों घटनाएं यह दर्शाती हैं कि अपराधियों को पुलिस का कोई खौफ नहीं है।

    इन वारदातों के अलावा, पिछले लगभग एक सप्ताह में हुई कई चोरियों और घटनाओं में भी सदर कोतवाली पुलिस एक भी मामले का खुलासा नहीं कर पाई है। यह स्थिति न केवल आम जनता के लिए चिंता का विषय है, बल्कि इससे पुलिस अधीक्षक की ईमानदार छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।

    क्यों नाकाम साबित हो रही है सदर कोतवाली पुलिस?

    यह एक बड़ा सवाल है कि आखिर क्यों सदर कोतवाली पुलिस अपराध को रोकने में नाकाम हो रही है। जहां चोरियां, लूट और अन्य छोटी-बड़ी वारदातें लगातार हो रही हैं, वहीं पुलिस का हाथ खाली है। इस स्थिति ने पुलिस की गश्त व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    यह माना जा रहा है कि पुलिस की ढिलाई के कारण ही अपराधी बिना किसी डर के वारदातें कर रहे हैं। सदर कोतवाली पुलिस को इन घटनाओं का जल्द से जल्द खुलासा कर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाना होगा, अन्यथा आम जनता का पुलिस पर से विश्वास उठने लगेगा।

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    pilibhit mukhya sevika appointment : राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार ने 23 मुख्य सेविकाओं को दिए नियुक्ति पत्र

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    पीलीभीत (उत्तर प्रदेश): पीलीभीत जिले में बाल विकास विभाग को एक बड़ी सौगात मिली है। 20 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, सीधी भर्ती से चयनित 23 मुख्य सेविकाओं को आखिरकार नियुक्ति पत्र मिल गए हैं। गन्ना विकास एवं चीनी मील के राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार ने गांधी सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में इन नवनियुक्त मुख्य सेविकाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन का सजीव प्रसारण भी दिखाया गया, जिसने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया।

    20 वर्षों के ‘वनवास’ के बाद मिली नियुक्ति पत्र

    यह नियुक्ति प्रक्रिया बाल विकास विभाग के लिए एक मील का पत्थर है। पिछले 20 वर्षों से मुख्य सेविका के पद पर कोई सीधी भर्ती नहीं हुई थी, जिसके कारण इस पद पर काम करने की इच्छा रखने वाली कई योग्य महिलाओं को लंबा इंतजार करना पड़ा। इस देरी को अक्सर “वनवास” के रूप में संदर्भित किया गया था, और आज, यह ‘वनवास’ समाप्त हो गया है। इन 23 महिलाओं के चयन से बाल विकास विभाग को मजबूती मिलेगी और आंगनवाड़ी केंद्रों के कामकाज में सुधार की उम्मीद है।

    सीएम योगी के संबोधन का हुआ सजीव प्रसारण

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    नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में सभी नवनियुक्त मुख्य सेविकाओं और अधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन को ध्यानपूर्वक सुना। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सरकार की योजनाओं और समाज के प्रति सेवा भाव पर जोर दिया। गांधी सभागार में सजीव प्रसारण की व्यवस्था की गई थी ताकि सभी लोग सीधे मुख्यमंत्री के विचारों से जुड़ सकें।

    ‘नवनियुक्त मुख्य सेविकाएं सरकार की मंशा के अनुरूप करें कार्य’

    नियुक्ति पत्र सौंपते हुए राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार ने सभी नवनियुक्त मुख्य सेविकाओं को उनकी नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी और उनसे पूरी निष्ठा के साथ काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि “मुख्य सेविकाएं सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य करें।” मंत्री ने आगे कहा कि सरकार की मंशा समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है।

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    जन सेवक के रूप में काम करें और नई तकनीक को अपनाएं

    राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार ने नवनियुक्त सेविकाओं को एक महत्वपूर्ण सीख दी। उन्होंने कहा, “आपको सरकार का सेवक बनाया गया है, परंतु अब आपको जन सेवक के रूप में काम करना है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल सरकारी नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार नई तकनीकों का उपयोग कर आंगनवाड़ी केंद्रों को और अधिक सशक्त बनाएगी और एक बेहतर व्यवस्था स्थापित करेगी।

    जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने भी इस मौके पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने सभी मुख्य सेविकाओं को उनके कर्तव्य और दायित्वों का पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन करने की सलाह दी।

    यह नियुक्ति न केवल इन 23 महिलाओं के लिए एक नया अध्याय है, बल्कि यह पीलीभीत जिले में बाल विकास और पोषण कार्यक्रमों को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

  • kaushambi police encounter: लूट के आरोपी बदमाश को लगी गोली, चोरी की बाइक और तमंचा बरामद

    kaushambi police encounter: लूट के आरोपी बदमाश को लगी गोली, चोरी की बाइक और तमंचा बरामद

    kaushambi police encounter- रिपोर्ट: लवलेश कुमार, कौशांबी

    कौशांबी में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। कोखराज थाना क्षेत्र में हुई एक पुलिस मुठभेड़ के दौरान एक लूट के आरोपी बदमाश को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश के पैर में गोली लगी है, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने आरोपी से चोरी की बाइक, अवैध तमंचा और लूट का सामान बरामद किया है।


    केशवापुर में हुई थी लूट की वारदात

    यह पूरा मामला 23 अगस्त की रात का है। कोखराज थाना क्षेत्र के केशवापुर गांव में एक परचून की दुकान को निशाना बनाते हुए बदमाशों ने लूट की वारदात को अंजाम दिया था। बदमाश दुकान से लाखों रुपये की ज्वैलरी और नकदी लेकर फरार हो गए थे। पीड़ित दुकान मालिक ने तुरंत इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई, जिसके बाद से ही पुलिस बदमाशों की तलाश में जुटी हुई थी।

    पुलिस टीम लगातार मुखबिरों के माध्यम से जानकारी जुटा रही थी। गुरुवार की रात, पुलिस को एक सटीक सूचना मिली कि लूट की वारदात में शामिल आरोपी उसी इलाके में मौजूद है।


    पुलिस मुठभेड़ में बदमाश घायल, गिरफ्तारी

    मुखबिर से मिली सूचना पर कोखराज थाना पुलिस ने बिना समय गंवाए आरोपी का पीछा करना शुरू कर दिया। जब आरोपी ने खुद को पुलिस से घिरा हुआ पाया तो उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। अपनी जान बचाने और बदमाश को काबू करने के लिए पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की।

    पुलिस की जवाबी फायरिंग में गोली लगने से आरोपी घायल होकर सड़क पर गिर गया। पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया।


    बदमाश से बरामद हुआ लूट का माल और हथियार

    घटनास्थल पर पहुंचे सीओ सिराथू, सत्येन्द्र तिवारी ने इस पूरी घटना की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि घायल बदमाश की पहचान प्रयागराज के पुरामुफ्ती थाना क्षेत्र निवासी के रूप में हुई है।

    पुलिस ने मुठभेड़ के बाद बदमाश के पास से एक चोरी की बाइक, एक अवैध तमंचा, दो जिंदा कारतूस और केशवापुर की दुकान से लूटा गया कुछ सामान बरामद किया है। घायल आरोपी को इलाज के लिए तुरंत जिला अस्पताल भेजा गया है।

    इस सफल मुठभेड़ से यह स्पष्ट है कि कौशांबी पुलिस अपराध और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है ताकि लूट की इस वारदात में शामिल अन्य लोगों को भी पकड़ा जा सके।

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  • Aligarh Chakubaji Vivad: शराब के नशे में हुए झगड़े में युवक की मौत, परिजनों का हंगामा

    Aligarh Chakubaji Vivad: शराब के नशे में हुए झगड़े में युवक की मौत, परिजनों का हंगामा

    रिपोर्ट: शशि गुप्ता, अलीगढ़

    अलीगढ़ में बन्नादेवी थाना क्षेत्र के पीछे एक सड़क किनारे शराब पीने के दौरान दो युवकों के बीच हुए विवाद ने खूनी रूप ले लिया। मामूली कहासुनी के बाद हुई चाकूबाजी में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी बाद में अस्पताल में मौत हो गई। इस घटना के बाद, युवक के परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया, महिला पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की और पुलिस पर शव गायब करने का आरोप लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा।

    शराब पीने के दौरान शुरू हुआ विवाद, चाकू लगने से युवक घायल

    यह घटना बन्नादेवी थाने के ठीक पीछे एक सड़क किनारे हुई। जानकारी के अनुसार, कुछ युवक एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे, तभी उनमें से दो के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते, यह बहस मारपीट में बदल गई। झगड़े के दौरान एक युवक ने दूसरे पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल युवक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी।

    अस्पताल में युवक की मौत, परिजनों का हंगामा

    इलाज के दौरान घायल युवक ने दम तोड़ दिया, जिससे अस्पताल में हड़कंप मच गया। जैसे ही युवक की मौत की खबर उसके परिजनों को मिली, वे आक्रोशित हो गए और अस्पताल में हंगामा करने लगे। उनका गुस्सा इतना ज्यादा था कि उन्होंने अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की कोशिश की और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए परिजनों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की।

    पुलिस पर शव गायब करने का आरोप और धक्का-मुक्की

    हंगामे के दौरान, युवक की महिला परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि पुलिसकर्मी युवक के शव को गायब कर रहे हैं। इस गलतफहमी और गुस्से के कारण ही उन्होंने महिला पुलिसकर्मी के साथ धक्का-मुक्की की। परिजनों के इस व्यवहार से स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई।

    भारी पुलिस बल की तैनाती और सीओ द्वितीय का बयान

    अस्पताल में हो रहे हंगामे और तनाव की सूचना मिलते ही, तत्काल भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस बल का नेतृत्व स्वयं सीओ द्वितीय ने किया। उन्होंने स्थिति को संभाला और परिजनों को शांत कराने का प्रयास किया।

    सीओ द्वितीय ने परिजनों को समझाते हुए बताया कि युवक की मौत के बाद शव को कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमॉर्टम के लिए मोर्चरी भेजा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस शव को कहीं भी गायब नहीं कर रही है, बल्कि यह एक प्रक्रिया का हिस्सा है। सीओ द्वितीय ने कहा कि परिजनों को गलतफहमी हो गई थी, जिसके कारण उन्होंने हंगामा किया।

    पुलिस फिलहाल इस पूरे मामले की जांच कर रही है और कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। युवक के शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मामूली विवाद भी कितनी भयानक घटनाओं को जन्म दे सकते हैं, और नशे की हालत में हिंसा की प्रवृत्ति कितनी खतरनाक हो सकती है।

  • jhansi farji registry vivad: कलेक्ट्रेट में भिड़े 2 पक्ष, पुलिस कर रही जांच

    jhansi farji registry vivad: कलेक्ट्रेट में भिड़े 2 पक्ष, पुलिस कर रही जांच

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    झांसी, उत्तर प्रदेश। मंगलवार को झांसी कलेक्ट्रेट परिसर उस समय अखाड़े में तब्दील हो गया, जब फर्जी जमीनों की रजिस्ट्री के आरोप में दो पक्ष आपस में भिड़ गए। गाली-गलौज और हाथापाई की सूचना पर तुरंत पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। यह घटना एक बार फिर भूमि विवादों में धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों को उजागर करती है, जिसकी जांच नवाबाद पुलिस कर रही है।

    क्या है पूरा मामला jhansi farji registry vivad: कलेक्ट्रेट में भिड़े दो पक्ष, पुलिस कर रही जांच: कलेक्ट्रेट में क्यों भिड़े दो पक्ष?

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    जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के ग्राम सिंगररा निवासी विनोद राय किसी निजी कार्य से कलेक्ट्रेट गए थे। उसी दौरान, सुनील साहू भी अपनी जमीन से जुड़े एक पुराने मुकदमे की पैरवी करने के लिए वहां मौजूद थे। दोनों पक्षों का आमना-सामना होते ही उनके बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज और गुत्थम-गुत्थी में बदल गई।

    इस अप्रत्याशित घटना से परिसर में हड़कंप मच गया और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। हंगामे की सूचना मिलते ही नवाबाद थाना पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को शांत कराया और मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें थाने ले आई।

    फर्जी रजिस्ट्रियों का गंभीर आरोप

    थाने में, दोनों पक्षों से अलग-अलग पूछताछ की गई। इसी दौरान, एक पक्ष सुनील साहू ने विनोद राय पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। सुनील साहू ने पुलिस को बताया कि विनोद राय ने उनकी जमीनों की फर्जी रजिस्ट्रियां कराकर उन्हें बेच दिया है। सुनील साहू का यह भी आरोप है कि विपक्षी ने सिर्फ उनकी ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों की जमीनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें धोखाधड़ी से बेचा है। इसी जमीन विवाद और धोखाधड़ी के कारण दोनों के बीच कहासुनी और हाथापाई हुई थी।

    यह आरोप दर्शाता है कि यह मामला सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि यह एक बड़े और सुनियोजित फर्जीवाड़े का हिस्सा हो सकता है। पुलिस के लिए यह जांचना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वास्तव में फर्जी दस्तावेज बनाए गए थे और क्या इस मामले में कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।

    पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच on jhansi farji registry vivad: कलेक्ट्रेट में भिड़े दो पक्ष, पुलिस कर रही जांच

    नवाबाद पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। दोनों पक्षों के बयानों को दर्ज किया जा रहा है और आरोपों की सच्चाई जानने के लिए जांच-पड़ताल शुरू कर दी गई है। पुलिस को अब संबंधित दस्तावेजों की जांच करनी होगी और जमीन के रिकॉर्ड्स को सत्यापित करना होगा। यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या इस तरह की और भी शिकायतें पहले दर्ज की गई हैं।

    यह घटना झांसी जैसे शहर में बढ़ते भूमि विवादों और धोखाधड़ी की घटनाओं की ओर ध्यान दिलाती है। इस तरह के मामलों में, पुलिस की निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई न्याय सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह घटना आम जनता के लिए भी एक चेतावनी है कि वे अपनी संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों के प्रति अधिक सतर्क रहें और किसी भी संदेहजनक गतिविधि की तुरंत सूचना दें। पुलिस मामले की जांच पूरी करने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।

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  • TRF की नई साजिश बेनकाब: पहलगाम हमले के बाद कश्मीर में फिर बड़े हमले की तैयारी, अलर्ट पर आर्मी – PAHALGAM ATTACK

    TRF की नई साजिश बेनकाब: पहलगाम हमले के बाद कश्मीर में फिर बड़े हमले की तैयारी, अलर्ट पर आर्मी – PAHALGAM ATTACK

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए हिंदू पर्यटकों के नरसंहार (PAHALGAM ATTACK) के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) एक और बड़ी आतंकी साजिश की तैयारी में है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, TRF कश्मीर घाटी में किसी बड़े आतंकी हमले की योजना बना रहा है। इसके पीछे पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर के इशारों पर काम करने वाले आतंकी नेटवर्क की भूमिका मानी जा रही है। रिपोर्ट सामने आने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती की गई है। क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को भी तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    कश्मीरी पंडितों और प्रवासी मजदूरों को बनाया जा सकता है निशाना
    एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खुफिया एजेंसियों को मिले ताज़ा इनपुट्स से संकेत मिलते हैं कि आतंकवादी समूह कश्मीरी पंडितों, प्रवासी मजदूरों और यहां तक कि सुरक्षा बलों के जवानों को भी निशाना बना सकते हैं। इसके चलते भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी की जा रही है और जवानों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।

    TRF का भड़काऊ वीडियो और जिम्मेदारी से इनकार
    पिछले सप्ताह TRF ने एक वीडियो जारी कर भारतीय सुरक्षा बलों को धमकी दी थी। इसमें TRF ने घरों के ध्वस्तीकरण को लेकर हमलों की चेतावनी दी थी। हालांकि बाद में संगठन ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी से इनकार किया। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि TRF ही इस हमले के पीछे है और वह लश्कर-ए-तैयबा का ही मुखौटा संगठन है, जो पाकिस्तान की शह पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है।

    जवानों को सतर्कता के निर्देश
    इंटेलिजेंस इनपुट के बाद घाटी में तैनात सभी सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है। सभी यूनिट्स को कैजुअल मूवमेंट बंद करने और ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल से बचने का निर्देश दिया गया है। सुरक्षा बलों को कहा गया है कि वे बिना पूर्व सूचना के किसी भी स्थान पर न जाएं।

    क्या है TRF : TRF (The Resistance Front) साल 2019-20 के दौरान उभरा एक आतंकी संगठन है, जो लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी माना जाता है। यह संगठन कई आतंकी घटनाओं की जिम्मेदारी ले चुका है, खासकर कश्मीर में नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमलों के लिए कुख्यात है।