Balrampur Illegal soil mining: बलरामपुर के श्रीदत्तगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग़ालिबपुर गांव के पास अवैध मिट्टी खनन का बड़ा खुलासा हुआ है। खनन माफिया द्वारा यहां से अवैध रूप से मिट्टी निकालकर खरदौरी क्षेत्र में डंप की जा रही थी। इस अवैध गतिविधि की भनक लगते ही खनन अधिकारी ने तत्काल मौके पर छापेमारी की और JCB मशीन व डंपर के साथ खनन माफिया को पकड़ा।
🔴 ब्रेकिंग | बलरामपुर में अवैध मिट्टी खनन माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई 🔸 खनन अधिकारी ने ग़ालिबपुर के पास दबिश देकर पकड़ा अवैध मिट्टी खनन 🔸 अवैध मिट्टी जेसीबी और डंपर से श्रीदत्तगंज के खरदौरी में गिराई जा रही थी 🔸 खनन माफिया द्वारा दिनदहाड़े किया जा रहा था मिट्टी खनन का काला… pic.twitter.com/qKOPAvr5CB
जानकारी के अनुसार माफिया दिनदहाड़े प्रशासन को नजरअंदाज कर मिट्टी खनन का काला कारोबार चला रहे थे। छानबीन में सामने आया कि यह कार्य लंबे समय से गुपचुप तरीके से किया जा रहा था।
खनन निरीक्षक बलरामपुर, जिनसे जवाब की अपेक्षा थी, वे मीडिया को बाइट देने से बचते नजर आए, जिससे प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस अवैध खनन से आसपास की जमीनें खराब हो रही हैं और ग्रामीण मार्गों को भी नुकसान पहुंच रहा है। प्रशासन की इस कार्रवाई से माफियाओं में हड़कंप मचा है।
Fatehpur Murder Case: फतेहपुर में सीसीटीवी कैमरे के विवाद ने एक बुज़ुर्ग कारखाना संचालक की जान ले ली। थाना जहानाबाद क्षेत्र के बिरनई गांव में अंशु अवस्थी नामक युवक ने देर रात सो रहे 62 वर्षीय कालीशंकर उत्तम पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल हुए कालीशंकर को अस्पताल ले जाया गया लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई।
🔴 ब्रेकिंग | फतेहपुर में हत्या 🔹 सीसीटीवी कैमरे को लेकर दबंग ने की बुज़ुर्ग की हत्या 🔹 लाठी-डंडों से हमला कर कारखाना संचालक को किया घायल 🔹 रास्ते में अस्पताल ले जाते वक्त हुई मौत 🔹 आरोपी अंशु अवस्थी और एक अन्य के खिलाफ FIR दर्ज 🔹 पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा 🔹… pic.twitter.com/5reNtp3PUe
परिजनों के अनुसार कालीशंकर ने हाल ही में अपनी सुरक्षा के लिए कारखाने में सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे। इसी बात को लेकर गांव का दबंग अंशु अवस्थी नाराज़ था। पहले भी दोनों के बीच विवाद हुआ था और पुलिस ने समझौता करवा दिया था। लेकिन देर रात करीब 12:25 बजे अंशु अवस्थी फिर पहुंचा और सोते हुए कालीशंकर पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
चीख-पुकार सुनकर बेटे शिवशंकर और परिजन मौके पर पहुंचे तो कालीशंकर लहूलुहान पड़े थे। उन्हें तत्काल अमौली अस्पताल ले जाया गया जहां से डॉक्टरों ने उन्हें रेफर कर दिया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
शिवशंकर ने आरोपी अंशु अवस्थी और एक अज्ञात युवक के खिलाफ थाना जहानाबाद में एफआईआर दर्ज कराई है। थाना अध्यक्ष सतपाल सिंह ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
यह घटना न केवल ग्रामीण क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे सुरक्षा के उपाय भी कुछ लोगों को नागवार गुजरते हैं।
Kanpur Dehat News: सोचिए क्या हो जब एक पति खुद ही अपनी पत्नी की शादी उसके प्रेमी से करवा दे? जी हां, यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है जो कानपुर देहात के रसूलाबाद कोतवाली के भग्गा निवादा गांव में घटी। इस मामले में योगेश तिवारी नामक युवक ने अपनी पत्नी सोनी की शादी उसके प्रेमी विकास से स्वयं करवा दी, वो भी गांव के मंदिर में पूरे रीति-रिवाज़ से। Kanpur Dehat News
2010 में हुई थी शादी, फिर रिश्ते में आई दरार– Kanpur Dehat News
योगेश तिवारी की शादी 2010 में बिल्हौर कोतवाली के सांभी गांव की निवासी सोनी से हुई थी। शुरूआत में सब सामान्य था, लेकिन कुछ ही वर्षों में उनके रिश्ते में कड़वाहट आने लगी। आए दिन झगड़े होने लगे। 2016 में सोनी ने योगेश पर दहेज उत्पीड़न का मुकदमा भी दर्ज कराया, जिसके बाद से उनके बीच का तनाव और गहरा हो गया।
गायब रहने लगी पत्नी, मिली जान से मारने की धमकी– Kanpur Dehat News
शिकायत दर्ज होने के बाद सोनी अक्सर गांव से गायब रहने लगी और जब भी योगेश सवाल करता, वह उसे जान से मारने की धमकी देती। योगेश का कहना है कि कई बार उसने डर के चलते चुप रहना ही बेहतर समझा।
डेढ़ महीने पहले छोड़ गई घर, फिर लौटी प्रेमी संग– Kanpur Dehat News
करीब डेढ़ माह पूर्व सोनी घर छोड़ कर चली गई थी। 25 जून को वह अपने प्रेमी विकास के साथ गांव लौट आई और पति योगेश से कहने लगी कि वह अब विकास से शादी करके उसी के साथ रहेगी। यह सुनकर योगेश के होश उड़ गए।
योगेश पहुंचा पुलिस चौकी, पुलिस ने जताई असमर्थता
डर के साए में जी रहे योगेश ने तत्काल चिस्ती पुलिस चौकी पहुंचकर पूरी कहानी बताई और अपील की कि सोनी की शादी उसके प्रेमी से करवा दी जाए। लेकिन पुलिस ने इस पर अपनी असमर्थता जताई।
पुलिस से निराश होकर योगेश वापस गांव आया और अपने माता-पिता से विचार-विमर्श किया। अंततः उसने गांव वालों के सामने लिखित सहमति पत्र तैयार करवाया और गांव के मंदिर में सोनी और विकास की शादी करवा दी। शादी के बाद सोनी विकास के साथ चली गई।
हत्या का डर बना कारण
योगेश का मानना है कि मेरठ, इंदौर, और औरैया जैसे कई शहरों में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जहां पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी। इसी डर के चलते योगेश ने यह चौंकाने वाला कदम उठाया। उसका मानना है कि यदि उसने ऐसा नहीं किया होता, तो शायद वह अपनी जान से हाथ धो बैठता।
IND vs ENG 2025: भारतीय क्रिकेट टीम को इंग्लैंड के खिलाफ लीड्स टेस्ट में 5 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। यह मुकाबला भारत आसानी से जीत सकता था, लेकिन खराब फील्डिंग, अति उत्साह, औसत कप्तानी और निचले क्रम के बल्लेबाजों के निराशाजनक प्रदर्शन ने टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस हार के साथ भारत पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में 0-1 से पीछे हो गया है। अब सभी की निगाहें 2 जुलाई से एजबेस्टन में होने वाले अगले मुकाबले पर टिकी हैं। आइए, इस हार के कारणों और इससे निकलने वाली पांच मुख्य बातों पर नजर डालते हैं।
Ofcourse we were not upto the mark, Drop catches have cost us in lost of Match. Lets learn from mistakes and come back more stronger in next Game.#INDvsENGpic.twitter.com/iwlBQKL6dv
यह भारत का पहला टेस्ट था, जब रोहित शर्मा और विराट कोहली टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके थे। बल्लेबाजी में उनकी कमी शायद उतनी नहीं खली, लेकिन फील्डिंग में खासकर कोहली की गैरमौजूदगी साफ दिखी। कोहली की स्लिप में चुस्ती और खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने की क्षमता भारतीय टीम को बहुत याद आई। नए कप्तान शुभमन गिल के लिए यह पहला टेस्ट था, और अनुभव की कमी ने उनकी कप्तानी को प्रभावित किया। IND vs ENG 2025
1. बुमराह पर अत्यधिक निर्भरता- IND vs ENG 2025
जसप्रीत बुमराह ने एक बार फिर साबित किया कि वह भारतीय गेंदबाजी के रीढ़ हैं। पहली पारी में उनके पांच विकेट ने भारत को 6 रनों की मामूली बढ़त दिलाई। हालांकि, दूसरी पारी में बुमराह का जादू नहीं चला, और बाकी गेंदबाज दबाव नहीं बना सके। यह हार दर्शाती है कि भारत की जीत की उम्मीदें काफी हद तक बुमराह पर टिकी थीं। यह रणनीति लंबे समय तक कारगर नहीं हो सकती। अन्य गेंदबाजों, जैसे मोहम्मद सिराज और शार्दूल ठाकुर, को भी जिम्मेदारी उठानी होगी। IND vs ENG 2025
2. शुभमन गिल की औसत कप्तानी- IND vs ENG 2025
शुभमन गिल ने बल्ले से शानदार शतक जड़ा, लेकिन कप्तान के तौर पर वह प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। नाजुक मौकों पर उनकी रणनीति में स्पष्टता की कमी दिखी। गेंदबाजों का रोटेशन सही नहीं था, और फील्ड प्लेसमेंट भी रक्षात्मक रही। इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने आखिरी दिन तेजी से रन बनाए, लेकिन गिल उन्हें रोकने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बना सके। अनुभव के साथ उनकी कप्तानी में सुधार की उम्मीद है।
3. शतकों का ढेर, फिर भी हार- IND vs ENG 2025
भारतीय बल्लेबाजों ने इस मैच में पांच शतक जड़े। ऋषभ पंत ने दोनों पारियों में शतक ठोके, जबकि शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, और केएल राहुल ने भी सैकड़े बनाए। व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करना अच्छा है, लेकिन जब टीम हार जाए तो इनका महत्व फीका पड़ जाता है। निचले क्रम के बल्लेबाजों ने निराश किया, जिसके कारण भारत दूसरी पारी में बड़ा स्कोर नहीं बना सका।
4. जीत की भूख का अभाव- IND vs ENG 2025
मैच के आखिरी दिन इंग्लैंड ने तेजी से रन बनाकर मुकाबला अपने पक्ष में कर लिया। इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों की बॉडी लैंग्वेज में निराशा और थकान साफ दिखी। फील्डिंग में सुस्ती, रणनीति में भ्रम, और जीत की चाह का अभाव भारत की हार का प्रमुख कारण बना। कोहली जैसे सीनियर खिलाड़ी होते तो शायद टीम में जोश और जुनून देखने को मिलता।
5. संतुलित टीम की जरूरत- IND vs ENG 2025
लीड्स टेस्ट ने दिखाया कि टैलेंट के साथ-साथ अनुभव और मानसिक मजबूती भी जरूरी है। भारत को अगले मुकाबले के लिए गेम प्लान और टीम चयन पर ध्यान देना होगा। अर्शदीप सिंह को बाएं हाथ के तेज गेंदबाज के तौर पर मौका देना फायदेमंद हो सकता है। साथ ही, कुलदीप यादव जैसे चाइनामैन गेंदबाज को शामिल करने पर विचार करना चाहिए, जो किसी भी पिच पर प्रभावी हो सकते हैं।
यह हार भारतीय टीम के लिए एक सबक है। एजबेस्टन टेस्ट में भारत को अपनी गलतियों से सीखकर वापसी करनी होगी। शुभमन गिल को कप्तानी में सुधार करना होगा, और बाकी खिलाड़ियों को सामूहिक जिम्मेदारी लेनी होगी। बुमराह के साथ-साथ अन्य गेंदबाजों को भी आगे आना होगा। फील्डिंग में सुधार और निचले क्रम की बल्लेबाजी को मजबूत करना जरूरी है।
लीड्स टेस्ट में भारत की हार ने कई सवाल खड़े किए हैं। शुभमन गिल की कप्तानी, खराब फील्डिंग, और रणनीति की कमी इस हार के प्रमुख कारण रहे। हालांकि, यह सीरीज का पहला मुकाबला था, और भारत के पास वापसी का मौका है। युवा खिलाड़ियों को अनुभवी खिलाड़ियों की कमी को पूरा करना होगा। क्या भारत एजबेस्टन में जोरदार वापसी करेगा? यह देखना रोमांचक होगा। IND vs ENG 2025
PF withdrawal via ATM: जल्द ही कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाताधारकों को PF का पैसा निकालने के लिए EPFO कार्यालयों या जटिल ऑनलाइन प्रोसेस की जरूरत नहीं पड़ेगी। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने जानकारी दी है कि EPFO अब PF अकाउंट्स को सीधे बैंक खातों से लिंक कर रहा है, जिससे कर्मचारी सीधे ATM या UPI जैसे माध्यमों से अपने PF अकाउंट से एक निश्चित राशि निकाल सकेंगे। यह सुविधा जुलाई 2025 से शुरू होने की संभावना है। PF withdrawal via ATM
PF निकासी होगी आसान और तेज़- PF withdrawal via ATM
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नई सुविधा के तहत कर्मचारियों को एक लिमिट तक की राशि निकालने की अनुमति होगी। इससे उन्हें इमरजेंसी के समय मदद मिलेगी और साथ ही PF अकाउंट में रिटायरमेंट के लिए आवश्यक राशि भी सुरक्षित रहेगी। अब तक PF निकासी के लिए लंबी प्रक्रिया और मैनुअल जांच की जरूरत होती थी, लेकिन यह नई तकनीक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना देगी। PF withdrawal via ATM
PF अकाउंट से 72 घंटे में निकाल सकेंगे ₹5 लाख- PF withdrawal via ATM
PF खाताधारक अब इमरजेंसी की स्थिति में 72 घंटे के भीतर ₹5 लाख तक निकाल सकेंगे। पहले यह सीमा केवल ₹1 लाख थी। यह घोषणा भी मंत्री मंडाविया द्वारा 24 जून को की गई थी। यह सुविधा मेडिकल, शिक्षा, शादी, मकान खरीदने या बनाने जैसे मामलों में विशेष रूप से लाभकारी होगी। PF withdrawal via ATM
ऑटो सेटलमेंट से प्रक्रिया और भी आसान- PF withdrawal via ATM
EPFO ने ऑटो सेटलमेंट की सुविधा शुरू की है जिसमें कर्मचारी के क्लेम को सॉफ्टवेयर स्वतः प्रोसेस करता है। इसमें अफसरों के हस्तक्षेप की जरूरत लगभग नहीं होती। अगर UAN, आधार, पैन और बैंक डिटेल्स KYC के साथ पूरी तरह से लिंक हैं, तो क्लेम 3-4 दिनों में अपने आप निपट जाएगा। यह सेवा शिक्षा, विवाह, मकान खरीद, और मेडिकल इमरजेंसी जैसे मामलों में लागू की गई है। PF withdrawal via ATM
मैनुअल प्रोसेस में लगता है समय
वर्तमान में, मैनुअल प्रोसेस के तहत PF निकासी में 15 से 30 दिन लग सकते हैं। इस प्रक्रिया में EPFO कर्मचारी दस्तावेजों की जांच करते हैं और यदि कोई त्रुटि होती है तो निकासी में देरी हो सकती है। बड़ी या जटिल क्लेम, जैसे फाइनल सेटलमेंट, अक्सर मैनुअल जांच की मांग करते हैं। PF withdrawal via ATM
क्या करें कर्मचारी?
EPFO की इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों को अपने UAN को आधार, पैन और बैंक खाते से लिंक करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही KYC को पूरी तरह से अपडेट रखना जरूरी है। आने वाले दिनों में EPFO इस नई सेवा के लिए दिशानिर्देश और तकनीकी विवरण जारी करेगा।
ATM और UPI के माध्यम से PF निकालना अब सिर्फ एक सपना नहीं रह जाएगा। EPFO की इस पहल से करोड़ों कर्मचारियों को राहत मिलेगी और निकासी प्रक्रिया पारदर्शी व त्वरित बनेगी।
BJP Janjagran Amethi: अमेठी में भारतीय जनता पार्टी द्वारा इमरजेंसी के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जनजागरण अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान के तहत पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बृज बहादुर सिंह ने अमेठी स्थित भाजपा कार्यालय में जन जागरण गोष्ठी को संबोधित किया और प्रेस से बातचीत करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 1975 में कांग्रेस द्वारा लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला था, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता। BJP Janjagran Amethi
बृज बहादुर सिंह ने कहा कि “आपातकाल के दौरान लोगों की स्वतंत्रता छीन ली गई थी, लोकतंत्र की हत्या कर दी गई थी। निर्दोषों को जेल में डाला गया, प्रदर्शन करने वालों पर गोलियां चलाई गईं, और आम जनमानस को भय और उत्पीड़न के माहौल में जीने पर मजबूर कर दिया गया। यह कांग्रेस की तानाशाही प्रवृत्ति का प्रमाण था।” BJP Janjagran Amethi
उन्होंने आगे कहा कि आज जब इमरजेंसी के 50 साल पूरे हो रहे हैं, भाजपा पूरे देश में जनजागरण अभियान के माध्यम से यह संदेश दे रही है कि कांग्रेस की नीतियां देश विरोधी और लोकतंत्र विरोधी रही हैं। लोगों को उस समय की सच्चाई बताई जा रही है कि किस प्रकार से कांग्रेस ने केवल अपने परिवार और सत्ता को बचाने के लिए देश की जनता को कुचला। BJP Janjagran Amethi
प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है जिसकी विचारधारा राष्ट्रवाद से कोसों दूर है। “यह पार्टी केवल अपने परिवार की भलाई के लिए काम करती है। जब इनके परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री नहीं बन पाया तो उन्होंने पर्दे के पीछे से सुपर पीएम बना दिया। असल में सत्ता का संचालन वही कर रहे थे, लेकिन जनता के सामने लोकतंत्र का दिखावा किया गया।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस को लोकतंत्र के नाम पर सिर्फ दिखावा करना आता है। असली लोकतंत्र की रक्षा भाजपा ने की है, जहां आज मीडिया स्वतंत्र है, लोग खुलकर अपने विचार रख सकते हैं, और कोई भी सत्ता का गुलाम नहीं है।
लोकतंत्र के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता- BJP Janjagran Amethi
बृज बहादुर सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का उद्देश्य लोकतंत्र को मजबूत करना और राष्ट्रहित में काम करना है। “1975 की इमरजेंसी हमें यह याद दिलाती है कि सत्ता की लालसा में कोई भी पार्टी कैसे देश के संवैधानिक ढांचे को तहस-नहस कर सकती है। भाजपा देश को सचेत कर रही है कि ऐसी गलती दोबारा न हो।”
उन्होंने मीडिया से अपील की कि वह इस जनजागरण अभियान को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं ताकि आज की पीढ़ी भी समझ सके कि लोकतंत्र को बचाने की कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी।
Shubhanshu Shukla Astronaut: 25 जून 2025 की तारीख भारतीय अंतरिक्ष इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई, जब लखनऊ के युवा और भारतीय वायुसेना के जांबाज फाइटर पायलट शुभांशु शुक्ला ने Axiom-4 मिशन के तहत अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरी। यह मिशन स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से दोपहर 12:01 बजे भारतीय समयानुसार लॉन्च किया गया। यह ऐतिहासिक मिशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर बढ़ते भारत के एक और कदम का प्रतीक है।
मिशन Axiom-4 की खासियत- Shubhanshu Shukla Astronaut
Axiom-4 मिशन एक प्राइवेट अंतरिक्ष उड़ान है, जो चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर ISS की ओर रवाना हुआ। शुभांशु शुक्ला इस मिशन में पायलट की भूमिका निभा रहे हैं। उनके साथ तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं—नासा की पूर्व अंतरिक्ष यात्री और इस मिशन की कमांडर पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोज उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कपू।
Axiom-4 मिशन को खास बनाने वाली बात यह है कि यह मिशन पूरी तरह निजी कंपनी Axiom Space द्वारा आयोजित किया गया है, जिसमें तकनीकी सहायता SpaceX द्वारा दी जा रही है। Shubhanshu Shukla Astronaut
A proud moment for India!
Heartiest congratulations to Group Captain Shubhanshu Shukla, the Mission Pilot of Axiom Mission 4, on this historic achievement.
xiom-4 मिशन का अवलोकन- Shubhanshu Shukla Astronaut
Axiom-4 मिशन नासा, स्पेसएक्स, और Axiom Space के सहयोग से शुरू किया गया चौथा निजी अंतरिक्ष मिशन है। इस मिशन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रयोगों को बढ़ावा देना है। मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जिनमें शुभांशु शुक्ला पायलट की भूमिका निभा रहे हैं। अन्य तीन यात्री हैं:
पैगी व्हिटसन: नासा की पूर्व अंतरिक्ष यात्री और इस मिशन की कमांडर।
स्लावोज उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की: पोलैंड के यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के अंतरिक्ष यात्री।
टिबोर कपू: हंगरी के HUNOR प्रोग्राम के अंतरिक्ष यात्री।
यह मिशन स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान के जरिए ISS तक पहुंचेगा। लॉन्च के लगभग 28 घंटे बाद, यानी 26 जून 2025 को शाम 4:30 बजे (IST), यह यान ISS के साथ डॉक करने वाला है।
30 हजार किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान- Shubhanshu Shukla Astronaut
फाल्कन-9 रॉकेट की मदद से लॉन्च हुए इस मिशन ने लगभग 30,000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरी। उम्मीद की जा रही है कि यह यान भारतीय समयानुसार गुरुवार शाम 4:30 बजे ISS पर डॉक करेगा। नासा, स्पेसएक्स और Axiom Space की साझा निगरानी में यह मिशन पूरी तरह नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से संचालित हो रहा है। Shubhanshu Shukla Astronaut
शानदार ! Axiom 4 मिशन लांच । भारत के शुभांशु शुक्ला मिशन का हिस्सा हैं। चार एस्ट्रोनॉट स्पेस जा रहे हैं । ऐसा दृश्य हर किसी को बचपन में एस्ट्रोनॉट बनने का सपना देती है । pic.twitter.com/dh4QlarSo4
— Narendra Nath Mishra (@iamnarendranath) June 25, 2025
शुभांशु शुक्ला: एक प्रेरणादायक सफर- Shubhanshu Shukla Astronaut
लखनऊ में जन्मे शुभांशु शुक्ला की शुरुआती शिक्षा सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एम.टेक किया। साल 2006 में वह भारतीय वायुसेना में शामिल हुए और एक कुशल फाइटर पायलट के रूप में Su-30 MKI, मिग-21, मिग-29, जगुआर, डोनियर और हॉक जैसे विमानों को उड़ाया। उन्हें 2,000 घंटे से अधिक का फ्लाइंग अनुभव है।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का अंतराराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन-आईएसएस के लिए #AxiomMission4 अब कल प्रक्षेपित किया जाना तय किया गया है। नासा, एक्सिओम स्पेस और स्पेस एक्स की आईएसएस के लिए चौथे निजी अंतरिक्ष यात्री अभियान की शुरूआत कल दोपहर 12.01 पर करने की योजना है। pic.twitter.com/NpAq1UK6aN
2019 में शुभांशु ने ISRO के गगनयान मिशन के लिए आवेदन किया था, और चार अधिकारियों में से एक के रूप में चयनित हुए। उन्होंने रूस और बेंगलुरु में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिससे उनकी अंतरिक्ष यात्रा की नींव मजबूत हुई। Shubhanshu Shukla Astronaut
लॉन्चिंग में देरी के पीछे कारण- Shubhanshu Shukla Astronaut
Axiom-4 मिशन को लॉन्च किए जाने में कई बार देरी हुई। पहले खराब मौसम, फिर फाल्कन-9 रॉकेट की तकनीकी समीक्षा और अंत में ISS के रूसी मॉड्यूल में रिसाव के कारण इस मिशन को कई बार टालना पड़ा। पहले यह मिशन 29 मई को लॉन्च होना था, फिर 8 जून, 10 जून और 11 जून को संभावित तारीखें आईं, लेकिन अंततः 25 जून को लॉन्च सफल हुआ। Shubhanshu Shukla Astronaut
अंतरिक्ष मिशन का भारत पर प्रभाव- Shubhanshu Shukla Astronaut
शुभांशु की उड़ान भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता और वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग में उसकी भागीदारी का प्रमाण है। ISRO पहले ही गगनयान मिशन की दिशा में काम कर रहा है और ऐसे निजी अंतरिक्ष उड़ान अभियानों में भारतीय भागीदारी भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक- Shubhanshu Shukla Astronaut
Axiom-4 मिशन इस बात का प्रमाण है कि आज की दुनिया में अंतरिक्ष अन्वेषण सिर्फ सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रह गया है। निजी कंपनियों के सहयोग से अंतरिक्ष अनुसंधान और यात्राएं अब तेजी से संभव हो रही हैं। Axiom Space, SpaceX और NASA का यह साझेदारी मॉडल आने वाले वर्षों में और भी अधिक निजी अंतरिक्ष मिशनों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
शुभांशु के मिशन से क्या उम्मीदें हैं?
इस मिशन में वैज्ञानिक प्रयोगों से लेकर जीवन-सम्बंधी तकनीकी परीक्षण तक कई कार्य होंगे। अंतरिक्ष में 28 घंटे की यात्रा के बाद शुभांशु और उनका दल ISS में प्रवेश करेंगे, जहां वे कुछ दिन रहकर विभिन्न मिशनों को अंजाम देंगे। यह मिशन आने वाले भारतीय गगनयान मिशन के लिए भी उपयोगी अनुभव साबित होगा।
50 years of Emergency: 25 जून 1975 की वह रात भारतीय इतिहास में एक काले अध्याय की शुरुआत थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आधी रात को देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लागू करने का ऐलान किया। यह निर्णय न केवल भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ा झटका था, बल्कि इसने देश की सियासत को भी नए रंगों में रंग दिया। इमरजेंसी के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ, हजारों लोग जेलों में बंद किए गए, और प्रेस की आजादी पर ताला लग गया। लेकिन इसके बावजूद, इस दौर ने भारतीय राजनीति में कई ऐतिहासिक बदलावों को जन्म दिया। आइए, इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने पर इसके पांच बड़े सियासी प्रभावों पर नजर डालें। 50 years of Emergency
1. जयप्रकाश नारायण: एक नए नेतृत्व का उदय- 50 years of Emergency
आजादी के बाद से भारतीय राजनीति में कांग्रेस का वर्चस्व निर्विवाद था। पंडित जवाहरलाल नेहरू और फिर इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने केंद्र और राज्यों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। लेकिन इमरजेंसी ने इस एकछत्र राज को चुनौती दी। इस दौर में जयप्रकाश नारायण, जिन्हें ‘लोकनायक’ के नाम से जाना जाता है, एक नए नेतृत्व के रूप में उभरे। 50 years of Emergency
जेपी, जैसा कि उन्हें प्यार से बुलाया जाता था, ने इमरजेंसी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू किया। उनका ‘संपूर्ण क्रांति’ का नारा युवाओं और आम जनता के बीच गूंजने लगा। इस आंदोलन ने न केवल इंदिरा गांधी के नेतृत्व को चुनौती दी, बल्कि भारतीय सियासत को नए चेहरों और विचारों से परिचित कराया। जेपी ने साबित किया कि नेतृत्व केवल सत्ता में बैठकर नहीं, बल्कि जनता के बीच रहकर भी किया जा सकता है। 50 years of Emergency
2. किंगमेकर की परंपरा की शुरुआत- 50 years of Emergency
इमरजेंसी विरोधी आंदोलन ने भारतीय राजनीति में एक नई परंपरा को जन्म दिया—‘किंगमेकर’ की। जयप्रकाश नारायण उस समय गैर-कांग्रेसी दलों के सबसे बड़े प्रतीक थे। 1977 के आम चुनाव में उन्होंने जनता पार्टी के गठन में अहम भूमिका निभाई, जो विभिन्न विचारधाराओं के दलों का गठजोड़ थी। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि जेपी ने न तो खुद चुनाव लड़ा और न ही सरकार में कोई पद स्वीकार किया। 50 years of Emergency
25 जून, 1975 भारतीय लोकतंत्र का काला दिवस है।
आज ही के दिन कांग्रेस ने देश पर आपातकाल थोपकर संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व नागरिक अधिकारों का गला घोंटने का कुत्सित कार्य किया था।
देश में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना हेतु संघर्ष करने वाले सभी महान लोकतंत्र सेनानियों को कोटिशः… pic.twitter.com/n3QXCE6pOi
जेपी ने किंग की जगह किंगमेकर बनने को प्राथमिकता दी। यह एक ऐसी परंपरा थी, जिसने गठबंधन की सियासत को जन्म दिया। इसके बाद भारतीय राजनीति में गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ, जो आज भी देश की सियासत का एक अहम हिस्सा है। 50 years of Emergency
3. कांग्रेस के एकछत्र राज का अंत- 50 years of Emergency
आजादी के बाद से 1975 तक, कांग्रेस का भारतीय सियासत पर एकछत्र राज था। केंद्र से लेकर राज्यों तक, कांग्रेस की सरकारें थीं, और इसे चुनौती देना किसी भी दल के लिए असंभव-सा लगता था। लेकिन इमरजेंसी और इसके खिलाफ हुए आंदोलन ने इस मिथक को तोड़ दिया।
1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी ने कांग्रेस को करारी शिकस्त दी। इंदिरा गांधी स्वयं अपनी रायबरेली सीट हार गईं। इस हार ने कांग्रेस की अजेय छवि को ध्वस्त कर दिया और यह साबित किया कि भारतीय मतदाता सत्ता को बदलने की ताकत रखता है। इसने लोकतंत्र में जनता की ताकत को और मजबूत किया।
4. जनता परिवार का जन्म और विस्तार- 50 years of Emergency
इमरजेंसी विरोधी आंदोलन ने विभिन्न विचारधाराओं को एक मंच पर लाने का काम किया। समाजवादी, गांधीवादी, और जनसंघ जैसे अलग-अलग विचारों वाले दल एकजुट हुए और जनता पार्टी का गठन हुआ। 1977 के चुनाव में जनता पार्टी ने 542 में से 298 सीटें जीतकर सरकार बनाई।
हालांकि, जनता पार्टी की सरकार ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी और दो साल में ही आंतरिक मतभेदों के कारण यह बिखर गई। लेकिन इसने कई नए दलों को जन्म दिया। जनता दल, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल (यूनाइटेड), बीजू जनता दल, और राष्ट्रीय लोक दल जैसे दल इसी जनता परिवार का हिस्सा हैं। यह दौर भारतीय सियासत में बहुदलीय व्यवस्था की नींव साबित हुआ।
5. बीजेपी का उदय और दिल्ली की सत्ता तक का सफर- 50 years of Emergency
इमरजेंसी विरोधी आंदोलन ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उदय की पृष्ठभूमि तैयार की। भारतीय जनसंघ, जो जनता पार्टी का हिस्सा था, ने इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन जनता पार्टी में आंतरिक मतभेदों के बाद अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं ने 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की।
बीजेपी ने अपनी शुरुआत दो सीटों के साथ की थी, लेकिन धीरे-धीरे यह पार्टी भारतीय सियासत की मुख्यधारा में शामिल हो गई। 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी ने पहली बार केंद्र में सरकार बनाई, भले ही वह केवल 13 दिनों तक चली। इसके बाद 1998 और 1999 में बीजेपी ने पूर्णकालिक सरकारें बनाईं, और 2014 से यह पार्टी लगातार केंद्र की सत्ता पर काबिज है।
इमरजेंसी का दीर्घकालिक प्रभाव- 50 years of Emergency
इमरजेंसी का दौर भारतीय लोकतंत्र के लिए एक कठिन परीक्षा थी, लेकिन इसने कई सबक भी सिखाए। इसने जनता में लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा की और सत्ता के विकेंद्रीकरण को बढ़ावा दिया। इमरजेंसी ने यह भी साबित किया कि भारतीय मतदाता अपनी ताकत को पहचानता है और वह सत्ता को बदलने की हिम्मत रखता है।\
आज जब हम इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने की बात करते हैं, तो यह याद रखना जरूरी है कि यह दौर न केवल एक संकट था, बल्कि भारतीय सियासत को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक मोड़ भी था। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व से लेकर बीजेपी के उभार तक, इमरजेंसी ने भारतीय राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया।
इमरजेंसी का दौर भारतीय इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसने न केवल सियासत को बदला, बल्कि लोकतंत्र को और मजबूत करने में भी योगदान दिया। इसने सत्ता के एकध्रुवीय स्वरूप को तोड़ा और बहुदलीय व्यवस्था को जन्म दिया। आज, जब हम इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने पर पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यह स्पष्ट है कि यह दौर भारतीय सियासत के लिए एक टर्निंग पॉइंट था, जिसने देश को नए नेतृत्व, नई परंपराओं, और नए दलों से परिचित कराया।
सोनभद्र। संवाददाता – मनोज कुमार Sonbhadra murder case: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के शाहगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत मराची गांव में हुई गोलीकांड की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। गत 17 जून की रात हुए अमरनाथ यादव हत्याकांड का पुलिस ने आज खुलासा करते हुए तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुरानी रंजिश और पारिवारिक दुश्मनी इस निर्मम हत्या की वजह बनी। पुलिस ने आरोपियों के पास से अवैध हथियार भी बरामद किए हैं।
🔴 सोनभद्र बुलेट ब्रेकिंग: अमरनाथ यादव हत्याकांड का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार 🔴
🔸 शाहगंज थाना क्षेत्र के मराची गांव का मामला 🔸 17 जून की रात अमरनाथ यादव की गोली मारकर की गई थी हत्या 🔸 तीन नामजद आरोपी गिरफ्तार: ओमजी पाठक, मंगला गुप्ता और अन्तलाल गुप्ता 🔸 गिरफ्तारी प्रा.… pic.twitter.com/z1al4P6BDO
अपर पुलिस अधीक्षक (नक्सल) त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मराची गांव निवासी 55 वर्षीय अमरनाथ यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के पुत्र अनिल यादव की तहरीर पर दो नामजद सहित तीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा के निर्देश पर तीन टीमें गठित की गईं थीं। आज सुबह मुखबिर की सूचना पर एसओजी व शाहगंज पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में ओमजी पाठक, मंगला गुप्ता और अन्तलाल गुप्ता को प्रा. विद्यालय उमरी के पास से बाइक सहित गिरफ्तार किया गया।
तीनों आरोपी अदालत में पेश होने की तैयारी में थे। पुलिस के डर से मुख्य सड़क की बजाय वैकल्पिक रास्ते से जा रहे थे, तभी गिरफ्त में आ गए। पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
हत्या की वजह बना पुराना विवाद– Sonbhadra murder case
गिरफ्तार अभियुक्त मंगला प्रसाद गुप्ता ने बताया कि अमरनाथ यादव ने वर्ष 2023 में उसके माता-पिता के साथ मारपीट की थी, जिससे उसके पिता का हाथ टूट गया था। इस घटना के बाद उनका परिवार मजबूरी में पैतृक संपत्ति बेचकर लालगंज (मीरजापुर) चला गया और फिर सूरत में नौकरी करने लगा। मंगला ने बताया कि अपमान और तकलीफ से आहत होकर उसने अमरनाथ को मारने की योजना बनाई।
रची गई साजिश, अंजाम दिया गया मर्डर– Sonbhadra murder case
मंगला ने अपने दो मित्रों – ओमजी पाठक और अन्तलाल गुप्ता – को इस योजना में शामिल किया। 17 जून की रात तीनों आरोपी बाइक से मराची गांव पहुंचे। अमरनाथ अपने घर के बाहर मच्छरदानी के अंदर सो रहे थे। मंगला और ओमजी दोनों तमंचे लेकर पहुंचे, जबकि अन्तलाल बाइक के पास निगरानी कर रहा था। मंगला ने अमरनाथ के सिर में गोली मार दी। आवाज सुनकर घरवाले जागे तो ओमजी ने भी फायर किया और तमंचा वहीं छोड़कर भाग निकले।Sonbhadra murder case
तीनों आरोपी मीरजापुर भाग गए और अलग-अलग जगहों पर छिपे रहे। कोर्ट में पेशी के लिए आज जा रहे थे कि पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। तलाशी में एक देसी तमंचा और एक खाली कारतूस बरामद किया गया। Sonbhadra murder case
पुलिस की तत्परता से खुला राज– Sonbhadra murder case
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी में एसओजी टीम और शाहगंज पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण रही। पुलिस ने यह सफलता मुखबिर की सूचना और तकनीकी सर्विलांस के जरिए हासिल की। पुलिस अब आरोपियों से घटना में प्रयुक्त अन्य हथियार और साजिश से जुड़े सबूत इकट्ठा कर रही है।
Railway Fare May Hike: रेलवे से यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को जल्द ही झटका लग सकता है। भारतीय रेलवे 1 जुलाई 2025 से नई फेयर पॉलिसी लागू करने की योजना बना रहा है, जिसके तहत एसी और नॉन एसी कोच के किराए में प्रति किलोमीटर दर के हिसाब से इजाफा किया जाएगा। यह प्रस्ताव रेलवे बोर्ड द्वारा तैयार कर रेल मंत्रालय को भेजा गया है और अंतिम मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा।
क्या है प्रस्तावित बदलाव?
नई फेयर पॉलिसी के तहत:
नॉन एसी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को प्रति किलोमीटर 1 पैसा अधिक देना होगा।
वहीं एसी कोच में यात्रा करने वालों को 2 पैसे प्रति किलोमीटर का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।
सेकेंड क्लास यात्रियों को 500 किमी से अधिक की दूरी पर आधा पैसा प्रति किलोमीटर की दर से किराया देना होगा।
500 किलोमीटर से ज्यादा सफर करने वालों पर असर
यह बदलाव सिर्फ लंबी दूरी की यात्रा (500 किमी से अधिक) पर लागू होगा। इसका मतलब है कि रोजाना के लोकल यात्रियों या कम दूरी पर सफर करने वालों पर इस बदलाव का कोई असर नहीं पड़ेगा। यह बढ़ोतरी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के एसी और नॉन एसी डिब्बों तक ही सीमित रहेगी।
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि 500 किलोमीटर तक की यात्रा करने वालों के टिकट की दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। इस बदलाव का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना है, लेकिन आम यात्रियों पर न्यूनतम प्रभाव डालने की कोशिश की गई है।
यह पूरा प्रस्ताव फिलहाल रेल मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। एक बार स्वीकृति मिल जाने पर यह नई दरें 1 जुलाई 2025 से देशभर में लागू कर दी जाएंगी। मंत्रालय का कहना है कि नई नीति पारदर्शी और संतुलित होगी।