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Author: By Nation Now Samachar Team

  • Panchayat Season 4 Review: सत्ता की कुर्सी के लिए फुलेरा में छिड़ी सियासी जंग, मंजू देवी बनाम क्रांति देवी की दिलचस्प टक्कर!

    Panchayat Season 4 Review: सत्ता की कुर्सी के लिए फुलेरा में छिड़ी सियासी जंग, मंजू देवी बनाम क्रांति देवी की दिलचस्प टक्कर!

    Panchayat Season 4 Review: 2020 में जब देश कोरोना की मार झेल रहा था, तब अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई वेब सीरीज पंचायत ने हर घर में अपनी जगह बनाई। इस सीरीज की सादगी, देसी ह्यूमर, और फुलेरा गांव की कहानियां दर्शकों के लिए एक कम्फर्ट जोन बन गईं। अब, पंचायत सीजन 4 के साथ फुलेरा की मंडली एक बार फिर लौट आई है, और इस बार कहानी में है तगड़ा पॉलिटिकल ड्रामा और हल्की-फुल्की हंसी का तड़का। लेकिन क्या ये सीजन पहले की तरह दिल जीत पाया? आइए, इस रिव्यू में जानते हैं।

    कहानी: फुलेरा में चुनावी बुखार- Panchayat Season 4 Review

    पंचायत सीजन 4 की कहानी वहीं से शुरू होती है, जहां सीजन 3 ने अलविदा कहा था। प्रधानजी (रघुबीर यादव) पर गोली चली थी, जो उनके कंधे को चोटिल कर गई। अब जख्म तो भर चुका है, लेकिन उनके मन में डर और दर्द अभी भी जिंदा है। दूसरी ओर, सचिव जी यानी अभिषेक त्रिपाठी (जितेंद्र कुमार) पर विधायक (प्रकाश झा) से मारपीट का केस दर्ज हो चुका है। साथ ही, वे अपने CAT एग्जाम के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन फुलेरा गांव में सबसे बड़ा ट्विस्ट है पंचायत चुनाव, जहां मंजू देवी (नीना गुप्ता) की प्रधानी की कुर्सी खतरे में है। Panchayat Season 4 Review

    इस बार मंजू देवी का मुकाबला है बनराकस (दुर्गेश कुमार) की पत्नी क्रांति देवी (सुनीता राजवार) से। क्रांति और बनराकस की जोड़ी, बिनोद (अशोक पाठक) और माधव (बुल्लू कुमार) के साथ मिलकर, मंजू देवी और उनकी टीम को कड़ी टक्कर दे रही है। विधायक भी इस विपक्षी खेमे का खुलकर समर्थन कर रहा है। दूसरी ओर, प्रधानजी और उनकी टीम को कोई अनजान शुभचिंतक मदद कर रहा है, जिसका राज अभी छिपा हुआ है। क्या मंजू देवी अपनी गद्दी बचा पाएंगी? या क्रांति देवी फुलेरा की नई प्रधान बनेंगी? ये सवाल आपको आखिरी एपिसोड तक बांधे रखते हैं। Panchayat Season 4 Review

    क्या है खास?- Panchayat Season 4 Review

    पंचायत सीजन 4 की सबसे बड़ी ताकत है इसका देसी ह्यूमर और गांव की सादगी। मंजू देवी और क्रांति के बीच की नोंक-झोंक, बनराकस की चालबाजियां, और बिनोद की बेवकूफियां दर्शकों को हंसी के ठहाके लगाने पर मजबूर करती हैं। खासकर बिनोद का किरदार इस सीजन में कमाल का है। अशोक पाठक ने आखिरी एपिसोड में बिनोद के इमोशन्स को इतने शानदार ढंग से दिखाया है कि आप उनकी मासूमियत और मजबूरी दोनों को महसूस करते हैं।

    चुनावी ड्रामा भी इस सीजन का हाईलाइट है। गांव की पॉलिटिक्स, वोट की खींचतान, और चालबाजियां आपको भारतीय ग्रामीण राजनीति की एक मजेदार झलक देती हैं। साथ ही, किरदारों की एक्टिंग इस सीजन को और रंगीन बनाती है। नीना गुप्ता मंजू देवी के रोल में उतनी ही दमदार हैं, जितनी पहले थीं। रघुबीर यादव का प्रधानजी का किरदार आपको इमोशनल कर देता है, और जितेंद्र कुमार सचिव जी के रूप में फिर से दिल जीत लेते हैं।

    कहां रह गई कमी?- Panchayat Season 4 Review

    हालांकि पंचायत सीजन 4 मनोरंजन से भरा है, लेकिन यह सीजन 3 की तरह थोड़ा उथला लगता है। कहानी ज्यादातर चुनाव और पॉलिटिक्स के इर्द-गिर्द ही घूमती है, जिसके बाद कुछ नया देखने को नहीं मिलता। सचिव जी और रिंकी (सांविका) की प्रेम कहानी, जिसका फैंस को बेसब्री से इंतजार था, इस बार भी ज्यादा आगे नहीं बढ़ी। दोनों का रोमांस पिछले सीजन से बस एक कदम आगे है, जो थोड़ा निराश करता है।

    इसके अलावा, कुछ नए किरदारों को कहानी में शामिल किया गया है, लेकिन उनकी मौजूदगी बस कुछ पलों तक ही सीमित है। इन किरदारों को और गहराई दी जा सकती थी। साथ ही, प्रधानजी पर गोली चलाने का रहस्य इस सीजन में सुलझ तो जाता है, लेकिन उसका जवाब उतना संतोषजनक नहीं लगता। कहानी का पैटर्न कुछ जगहों पर प्रेडिक्टेबल भी हो जाता है, जो सीरीज की ताजगी को थोड़ा कम करता है।

    एक्टिंग और टेक्निकल पक्ष- Panchayat Season 4 Review

    पंचायत की कास्ट हमेशा से इसकी जान रही है, और इस बार भी सभी ने अपने किरदारों को बखूबी निभाया है। दुर्गेश कुमार का बनराकस आपको गुस्सा भी दिलाता है और हंसाता भी है। सुनीता राजवार क्रांति देवी के किरदार में जंचती हैं, और फैसल मलिक का प्रह्लाद चा फिर से दिल छू लेता है। चंदन रॉय (विकास) और सांविका (रिंकी) अपने रोल में सहज और प्यारे लगते हैं।

    टेक्निकल पक्ष की बात करें तो, मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में शूटिंग ने फुलेरा गांव को जीवंत बनाया है। अनुराग सैकिया का बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के मूड को और गहरा करता है। सिनेमटोग्राफी और एडिटिंग भी साफ-सुथरी है, जो सीरीज को एक रियलिस्टिक टच देती है।

    क्या देखें? Panchayat Season 4 Review

    अगर आप पंचायत के फैन हैं और फुलेरा गांव की सादगी, हंसी, और पॉलिटिक्स का मजा लेना चाहते हैं, तो पंचायत सीजन 4 आपके लिए है। ये सीजन भले ही पहले दो सीजनों जितना तगड़ा न हो, लेकिन फिर भी ये एक पारिवारिक शो है, जिसे आप अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर देख सकते हैं। मंजू देवी और क्रांति देवी की जंग, बनराकस की हरकतें, और बिनोद की मासूमियत आपको हंसाने और सोचने पर मजबूर करेंगी।

    रेटिंग: 3.5/5

    पंचायत सीजन 4 एक मजेदार और इमोशनल राइड है, जो थोड़ा और गहरा हो सकता था। फिर भी, फुलेरा की ये कहानी आपके चेहरे पर मुस्कान जरूर लाएगी।

    सोर्स- indianexpress

  • Iran Israel ceasefire: आखिरकार थम गया ईरान-इजरायल युद्ध, ट्रंप की मध्यस्थता से थमी 12 दिन की तबाही

    Iran Israel ceasefire: आखिरकार थम गया ईरान-इजरायल युद्ध, ट्रंप की मध्यस्थता से थमी 12 दिन की तबाही

    Iran Israel ceasefire: ईरान और इजरायल के बीच बीते 12 दिनों से जारी युद्ध आखिरकार अब थम चुका है। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने राहत की सांस ली है, वहीं इस युद्ध के आखिरी पलों में हुए घटनाक्रमों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार को ईरानी सरकारी टेलीविजन ने आधिकारिक रूप से संघर्षविराम लागू होने की पुष्टि की। उधर, इजरायल ने भी अपने नागरिकों के लिए जारी आपातकालीन अलर्ट हटा लिया है।

    ट्रंप की मध्यस्थता बनी निर्णायक मोड़- Iran Israel ceasefire

    इस संघर्षविराम की सबसे अहम भूमिका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रही। उन्होंने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर युद्ध को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त किया। ट्रंप ने मंगलवार सुबह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर यह घोषणा की कि दोनों देश युद्धविराम पर सहमत हो चुके हैं। ट्रंप के अनुसार, यह सीजफायर सुबह 9:30 बजे (भारतीय समयानुसार) से प्रभावी हुआ।

    उन्होंने बताया कि पहले ईरान युद्धविराम शुरू करेगा, फिर 12 घंटे बाद इजरायल। इसके 24 घंटे के भीतर यह युद्ध आधिकारिक रूप से समाप्त मान लिया जाएगा। हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ‘लास्ट मिशन’ में क्या-क्या शामिल था, जो इस युद्ध की समाप्ति से ठीक पहले पूरे किए जाने थे।

    ईरान का आखिरी क्षण तक संघर्ष- Iran Israel ceasefire

    हालांकि युद्धविराम की घोषणा के बावजूद ईरान ने अंतिम समय तक इजरायल पर हमले जारी रखे। इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) के अनुसार, संघर्षविराम से एक घंटे पहले तक ईरान ने तीन बार मिसाइल अटैक किए, जिनमें चार नागरिकों की मौत हो गई। तेल अवीव में सायरन बजे और लोग बंकरों में चले गए। इससे संघर्षविराम को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई थी। Iran Israel ceasefire

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमारी सैन्य ताकत दुश्मन को आखिरी क्षण तक जवाब देने में सक्षम है। यह हमले हमारे आत्मसम्मान और ताकत का प्रदर्शन हैं।” Iran Israel ceasefire

    अमेरिका-इजरायल के हमलों से बुरी तरह हिला ईरान- Iran Israel ceasefire

    13 जून को शुरू हुए इस युद्ध में ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों — फोर्डो, नतांज और इस्फहान — पर बंकर बस्टर बमों से हमला किया। साथ ही इजरायली हमलों में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के चीफ हुसैन सलामी समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक मारे गए।

    https://nationnowsamachar.com/national/india-nuclear-weapons-bharat-parmanu-shakti-pakistan-chin-takkar/

    इस युद्ध में ईरान के लगभग 1000 नागरिकों की जान गई, और उसके बुनियादी ढांचे को गहरा नुकसान पहुंचा। सड़कें, पुल, सैन्य डिपो और संचार व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई।

    अंतरराष्ट्रीय मंच पर अकेला पड़ा ईरान

    युद्ध के दौरान ईरान को मिडिल ईस्ट के किसी भी देश का प्रत्यक्ष समर्थन नहीं मिला। रूस और चीन जैसे महाशक्तियों ने केवल नैतिक समर्थन दिया, जबकि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ खुलकर कोई भी देश नहीं आया। इससे ईरान की कूटनीतिक स्थिति और भी कमजोर हो गई।

    घरेलू दबाव और अंतिम हमले का कारण

    इस जंग में हुए भारी नुकसान के बाद ईरान के अंदर गुस्सा और आक्रोश चरम पर है। सूत्रों के अनुसार, कट्टरपंथी गुटों ने सरकार पर दबाव डाला कि वह किसी भी हालत में जंग को खत्म न करे और इजरायल के खिलाफ निर्णायक रुख अपनाए।

    यह भी सामने आया कि इजरायल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को भी निशाना बनाने की योजना बनाई थी, जिसे ट्रंप की हस्तक्षेप के बाद अंतिम क्षणों में रोक दिया गया। इसीलिए ईरान के अंतिम मिसाइल हमलों को उसकी “राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन” के तौर पर देखा जा रहा है।

    ईरान का संदेश — हम किसी के दबाव में नहीं

    सीजफायर लागू होने के बावजूद ईरान का कहना है कि उसने किसी के दबाव में आकर यह निर्णय नहीं लिया। उसका कहना है कि वह खुद निर्णय लेने में सक्षम है और यह समझौता उसकी शर्तों पर हुआ है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया, “हमने न युद्ध शुरू किया था और न ही हम युद्ध चाहते थे, लेकिन हम हर आक्रमण का जवाब पूरी ताकत से देंगे।”

    हालांकि इस सीजफायर से दोनों देशों में तत्काल शांति स्थापित हो गई है, लेकिन जिस तरह ईरान ने अंतिम समय तक हमले किए और इजरायल की प्रतिक्रिया हुई, उससे लगता है कि यह शांति अस्थायी है। अमेरिका के दखल ने इस बार स्थिति संभाल ली, लेकिन भविष्य में स्थायी समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत है।

    एक ओर जहां इजरायल ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया, वहीं ईरान ने आखिरी वक्त तक अपनी जुझारू नीति को बरकरार रखा। अब सवाल यह है कि क्या यह युद्ध वास्तव में समाप्त हो गया है या यह केवल एक विराम है अगले संघर्ष से पहले?

    https://nationnowsamachar.com/national/agni-5-conventional-missile-india-defense-strength/

    SOURCE- AAJ TAK

  • Moradabad girl request Yogi: मुरादाबाद की बच्ची की गुहार पर सीएम योगी का संज्ञान, तुरंत मिला स्कूल में एडमिशन

    Moradabad girl request Yogi: मुरादाबाद की बच्ची की गुहार पर सीएम योगी का संज्ञान, तुरंत मिला स्कूल में एडमिशन

    Moradabad girl request Yogi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में सोमवार को भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला, जब मुरादाबाद की एक मासूम बच्ची ने शिक्षा के अधिकार की गुहार लगाई। बच्ची ने खुद मुख्यमंत्री से कहा, “मुझे स्कूल में दाखिला दिला दीजिए, पढ़ना है बाबा।” बच्ची की मासूम अपील सुनकर मुख्यमंत्री ने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए और पूरा प्रशासन हरकत में आ गया।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो ने लोगों के दिलों को छू लिया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मुरादाबाद के जिलाधिकारी अनुज सिंह ने केवल कुछ घंटों में बच्ची का नामांकन शहर के सबसे प्रतिष्ठित स्कूल सी. एल. गुप्ता वर्ल्ड स्कूल में नि:शुल्क करा दिया।

    शिक्षा के अधिकार की गूंज मुख्यमंत्री दरबार तक

    बच्ची की यह अपील न केवल प्रशासन को जगा गई, बल्कि यह संदेश भी दे गई कि यदि सही मंच और नीयत हो, तो शिक्षा जैसे मौलिक अधिकार को हर बच्चा पा सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह त्वरित एक्शन उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सक्रियता और जवाबदेही का उदाहरण बन गया है।

    https://nationnowsamachar.com/uttar-pradesh/varanasi/amit-shah-in-varanasi-central-zonal-council-meeting/

    📌 प्रशासन की तत्परता बनी मिसाल

    मुख्यमंत्री के आदेश के बाद जिलाधिकारी अनुज सिंह खुद इस मामले में जुटे और कुछ ही घंटों में बच्ची का एडमिशन पूरा करवा दिया गया। अब यह बच्ची शिक्षा के एक बेहतर मंच पर अपना भविष्य संवार सकेगी।

  • Agni-5 conventional missile: पलक झपकते ही होगा किराना हिल्स का खात्मा! ये मिसाइल तैयार कर रहा भारत, जानिए खासियत

    Agni-5 conventional missile: पलक झपकते ही होगा किराना हिल्स का खात्मा! ये मिसाइल तैयार कर रहा भारत, जानिए खासियत

    Agni-5 conventional missile: भारत अपनी रणनीतिक रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा चुका है। अब अग्नि-V मिसाइल का एक पारंपरिक (गैर-परमाणु) संस्करण विकसित किया जा रहा है, जिसमें अत्याधुनिक एयरबर्स्ट और बंकर-बस्टर वारहेड शामिल होंगे। इस मिसाइल की रेंज 2000 से 2500 किलोमीटर तक सीमित होगी, लेकिन यह 7.5 टन के भारी वारहेड से लैस होगी, जो दुश्मन के सैन्य ढांचों को एक झटके में तबाह करने में सक्षम होगी।

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    अग्नि-V का नया पारंपरिक संस्करण: क्यों है खास?- Agni-5 conventional missile

    मौजूदा अग्नि-V मिसाइल एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसकी रेंज 7000 किलोमीटर से ज्यादा है और यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। लेकिन अब DRDO इसके एक पारंपरिक संस्करण पर काम कर रहा है, जो दो मुख्य प्रकार के वारहेड के साथ आएगा:

    अग्नि-V मिसाइल का एक पारंपरिक (गैर-परमाणु) संस्करण (फोटो- इंटरनेट)

    1. एयरबर्स्ट वारहेड:

    • हवा में फटने वाला यह वारहेड बड़े क्षेत्र में तबाही मचाने की क्षमता रखता है।
    • यह सैन्य ठिकानों, रनवे, रडार और एयरबेस जैसे ढांचों को निष्क्रिय कर सकता है।
    • इसका असर व्यापक होता है, जिससे दुश्मन की पूरी सैन्य संरचना अस्थिर हो सकती है।

    2. बंकर-बस्टर वारहेड:

    • यह वारहेड 80-100 मीटर गहरे भूमिगत बंकरों और परमाणु ठिकानों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
    • स्टील और कंक्रीट की मोटी दीवारों को भेदने की क्षमता रखता है।
    • यह विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान के गुप्त ठिकानों को टारगेट करने के लिए उपयोगी होगा।

    तकनीकी विशेषताएं

    • रेंज: 2000-2500 किमी (कम रेंज का कारण भारी वारहेड पेलोड है)
    • गति: मैक 24 (लगभग 29,400 किमी/घंटा) – दुनिया की सबसे तेज़ मिसाइलों में शामिल
    • लॉन्च सिस्टम: कैनिस्टर आधारित – कहीं भी, कभी भी तैनाती योग्य
    • नेविगेशन: रिंग लेजर गायरोस्कोप, नैविक और GPS आधारित सिस्टम – 10 मीटर से कम CEP (Circular Error Probable)
    • सामग्री: हल्के कंपोजिट मैटेरियल का उपयोग – 20% वजन में कमी, प्रदर्शन में वृद्धि

    विकास की स्थिति- Agni-5 conventional missile

    DRDO ने इस पारंपरिक संस्करण के डिजाइन और इंजीनियरिंग पर कार्य शुरू कर दिया है। हालांकि इसका परीक्षण अभी लंबित है। DRDO द्वारा मार्च 2024 में “मिशन दिव्यास्त्र” के तहत MIRV (Multiple Independently targetable Reentry Vehicle) अग्नि-V का सफल परीक्षण किया गया था। अब यह तकनीक पारंपरिक संस्करण में भी इस्तेमाल की जा सकती है।

    क्षेत्रीय प्रभाव: पाकिस्तान और चीन पर नजर- Agni-5 conventional missile

    पाकिस्तान:

    • रेंज में पूरा पाकिस्तान: 2000-2500 किमी की रेंज पाकिस्तान के हर कोने तक पहुंचती है।
    • बंकर टारगेटिंग: किराना हिल्स जैसे भूमिगत ठिकानों पर हमला कर उन्हें नष्ट किया जा सकता है।
    • एयरबेस टारगेटिंग: पेशावर, कराची, इस्लामाबाद जैसे सैन्य हवाई अड्डे निष्क्रिय किए जा सकते हैं।
    • रणनीतिक संदेश: भारत की नो-फर्स्ट यूज नीति मजबूत होगी, लेकिन जवाबी हमला और भी ताकतवर होगा।

    चीन:

    • हालांकि रेंज चीन के अधिकतर हिस्से को कवर नहीं करती, लेकिन तिब्बत, युन्नान और शिनजियांग जैसे बॉर्डर क्षेत्रों के मिलिट्री बेस इस मिसाइल के रडार पर होंगे।
    • चीन के बंकर आधारित कमांड सेंटरों को भी टारगेट किया जा सकता है।
    https://nationnowsamachar.com/international/iran-vs-israel-us-military-comparison-missile-fighter-jet-analysis/

    क्या यह सैन्य रणनीति में बदलाव है?

    बिल्कुल। अब भारत केवल परमाणु हथियारों पर निर्भर नहीं है। यह पारंपरिक स्ट्राइक क्षमता न केवल दुश्मन को चेतावनी देती है, बल्कि सीमित युद्ध के परिदृश्य में भी एक निर्णायक बढ़त देती है। इस मिसाइल की मौजूदगी भारत को एक मजबूत ‘डेटरेंस’ क्षमता प्रदान करती है, जिससे बिना परमाणु हथियारों का प्रयोग किए ही प्रभावी सैन्य कार्रवाई की जा सकेगी।

    एक्सपर्ट व्यू:- Agni-5 conventional missile

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि पारंपरिक अग्नि-V का विकास भारत की “सर्जिकल स्ट्राइक से आगे” सोच को दर्शाता है। यह मिसाइल युद्ध की शुरुआत नहीं, बल्कि मजबूती से जवाब देने की तैयारी है। ट्विटर/X पर सैन्य मामलों के जानकार @InsightGL ने कहा – “यह मिसाइल किराना हिल्स के प्रवेश द्वार को नष्ट करने से आगे बढ़कर पूर्ण विनाश कर सकती है।”

    भारत की पारंपरिक अग्नि-V मिसाइल आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरण को बदल सकती है। यह सैन्य शक्ति को सटीकता, गति और क्षमता से लैस करेगी। भारत अब केवल न्यूक्लियर पावर नहीं, बल्कि एक स्मार्ट स्ट्रैटेजिक फोर्स बनने की ओर बढ़ रहा है।

    https://nationnowsamachar.com/international/iran-israel-war-oil-price-impact-on-india-economy/


  • Iran-Israel war: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल!, भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

    Iran-Israel war: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल!, भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

    Iran-Israel war: ईरान और इजराइल के बीच जारी टकराव में अमेरिका की संभावित एंट्री ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई उथल-पुथल मचा दी है। इसका सबसे बड़ा असर मिडिल ईस्ट की स्थिरता और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ने वाला है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिलेगा। इससे भारत जैसे तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में कीमतों में कोई भी बढ़ोतरी सीधा असर महंगाई, आयात बिल, रुपये की वैल्यू और सबसे महत्वपूर्ण GDP पर डालती है।

    भारत जैसे देश, जो अपने कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90% आयात करता है, के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती है। बढ़ती तेल कीमतें न केवल महंगाई को बढ़ावा देती हैं, बल्कि आयात बिल, रुपये की कीमत और जीडीपी पर भी नकारात्मक असर डालती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या भारत इस तेल महंगाई को झेल पाएगा? इसके जवाब के लिए हमें इतिहास के पन्नों को पलटना होगा और 2008 की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण करना होगा।

    2008 में कच्चे तेल की कीमतों का उछाल- Iran-Israel war

    2008 में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अपने चरम पर थीं। उस समय कीमतें 147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। कुछ विशेषज्ञ तो यह भी अनुमान लगा रहे थे कि कीमतें 200 डॉलर तक जा सकती हैं। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। उस समय भारत की अर्थव्यवस्था को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। जीडीपी वृद्धि दर, जो सामान्य रूप से 7-8% के बीच रहती थी, 3.1% तक गिर गई। हालांकि, यह गिरावट केवल तेल कीमतों की वजह से नहीं थी, बल्कि वैश्विक वित्तीय संकट ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई थी।

    उस समय महंगाई भी एक बड़ी समस्या थी। 2008 से 2012 के बीच औसत वार्षिक महंगाई दर 9.9% थी। बढ़ती तेल कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ रहा था, जिससे रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ रही थीं। इसके अलावा, रुपये की कीमत में गिरावट और आयात बिल में वृद्धि ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाला।

    तत्कालीन सरकार ने कई कदम उठाए, जैसे कि तेल सब्सिडी को कम करना और ईंधन की कीमतों को बाजार के हिसाब से तय करने की शुरुआत करना। इन उपायों से कुछ राहत मिली, लेकिन अर्थव्यवस्था को पूरी तरह स्थिर करने में समय लगा।

    वर्तमान स्थिति: तेल की कीमतें और भारत- Iran-Israel war

    आज की बात करें तो कच्चे तेल की कीमतें 75-80 डॉलर प्रति बैरल के बीच हैं। यह 2008 के 147 डॉलर के मुकाबले आधी से भी कम है। अगर महंगाई के हिसाब से समायोजित करें, तो वास्तविक कीमत 2008 के स्तर से 66% कम है। इसका मतलब है कि मौजूदा कीमतें ऐतिहासिक रूप से अभी भी कम हैं।

    हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की स्थिति में कीमतें 110-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जैसा कि कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है। ऐसी स्थिति में भारत के सामने कई चुनौतियां होंगी:

    1. महंगाई में वृद्धि: तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी। इससे ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी, जो रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित करेगा।
    2. आयात बिल में इजाफा: भारत का तेल आयात बिल बढ़ेगा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा।
    3. रुपये पर दबाव: आयात बिल बढ़ने से रुपये की कीमत में गिरावट आ सकती है, जिससे आयातित सामान और महंगे हो जाएंगे।
    4. जीडीपी पर असर: बढ़ती महंगाई और आयात लागत से आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

    क्या भारत तैयार है?- Iran-Israel war

    भारत की अर्थव्यवस्था आज 2008 की तुलना में अधिक मजबूत स्थिति में है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं:

    • तेल भंडारण: भारत ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाए हैं, जो आपात स्थिति में तेल आपूर्ति को सुनिश्चित कर सकते हैं।
    • नवीकरणीय ऊर्जा: सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश ने तेल पर निर्भरता को कुछ हद तक कम किया है।
    • आर्थिक सुधार: रुपये की स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए कई नीतिगत कदम उठाए गए हैं।

    इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति की स्थिति भी पहले से बेहतर है। अमेरिका ने पिछले एक दशक में अपने तेल उत्पादन को दोगुना कर लिया है और अब वह दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। इससे मध्य पूर्व के तनाव का वैश्विक तेल कीमतों पर असर पहले की तुलना में कम हो गया है।

    महंगाई का प्रभाव- Iran-Israel war

    वर्तमान में भारत में महंगाई दर मल्टी-ईयर निम्न स्तर पर है। मई 2025 की बात करें तो, महंगाई दर काफी हद तक नियंत्रण में है। लेकिन अगर तेल की कीमतें 120 डॉलर के स्तर को छूती हैं, तो महंगाई बढ़ने की संभावना है। इससे उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति प्रभावित होगी, खासकर निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों की।

    भविष्य की संभावनाएं- Iran-Israel war

    क्या इतिहास खुद को दोहराएगा, या भारत इस बार तेल कीमतों के झटके को बेहतर तरीके से झेल पाएगा? यह कई कारकों पर निर्भर करेगा:

    • वैश्विक तेल आपूर्ति: अगर अन्य तेल उत्पादक देश, जैसे सऊदी अरब और रूस, आपूर्ति बढ़ाते हैं, तो कीमतों पर नियंत्रण हो सकता है।
    • सरकारी नीतियां: भारत सरकार तेल सब्सिडी, करों में कटौती या अन्य उपायों के जरिए उपभोक्ताओं को राहत दे सकती है।
    • वैकल्पिक ऊर्जा: नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ने से तेल पर निर्भरता कम होगी, जो भविष्य में भारत के लिए फायदेमंद होगा।

    ईरान-इजराइल युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के संभावित बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। हालांकि, मौजूदा कीमतें ऐतिहासिक रूप से कम हैं, और भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। फिर भी, सरकार और नीति निर्माताओं को सतर्क रहने की जरूरत है। तेल कीमतों के बढ़ने से महंगाई, आयात बिल और जीडीपी पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए समय पर कदम उठाने होंगे।

    क्या भारत इस चुनौती से पार पा लेगा? यह समय और सरकार की नीतियों पर निर्भर करता है। लेकिन एक बात तय है कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाएं भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए हमेशा एक बड़ा जोखिम बनी रहती हैं।

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  • Kanpur Dehat News: परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का दौरा, अकबरपुर कस्बे में नमस्ते चौराहा और बस स्टैंड का किया लोकार्पण

    Kanpur Dehat News: परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का दौरा, अकबरपुर कस्बे में नमस्ते चौराहा और बस स्टैंड का किया लोकार्पण

    रिपोर्ट: अशोक चौहान
    Kanpur Dehat News: उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह अपने एक दिवसीय दौरे पर कानपुर देहात पहुंचे, जहां उन्होंने नगर पंचायत अकबरपुर में नमस्ते चौराहा और बस स्टैंड का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) और अखिलेश यादव पर तीखे शब्दों में हमला बोला।

    🏗️ कार्यक्रमों में शिरकत, विकास कार्यों का लोकार्पण– Kanpur Dehat News

    दयाशंकर सिंह ने अकबरपुर नगर पंचायत में बनकर तैयार हुए नमस्ते चौराहा और बस स्टैंड का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद गांव-गांव तक यातायात और परिवहन की सुविधाएं बेहतर करना है।

    🗣️ सपा प्रमुख पर निशाना– Kanpur Dehat News

    अखिलेश यादव के 2027 में महिलाओं को टिकट और रोजगार देने के वादे पर कटाक्ष करते हुए मंत्री ने कहा:

    “अखिलेश यादव को सबसे पहले परिवार से बाहर निकलना चाहिए। सपा में 24 सीटें परिवार के लिए रिजर्व हैं। अगर कोई और राजनीति करना चाहता है, तो 25वें नंबर से शुरुआत करनी होगी।”
    उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को पहले दो दर्जन सीटों के भीतर भी महिलाओं को टिकट देने की हिम्मत करनी चाहिए।
    कानपुर देहात पहुंचे यूपी के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह (फोटो- नेशन नाउ समाचार)

    तीन विधायकों के निष्कासन पर प्रतिक्रिया– Kanpur Dehat News

    समाजवादी पार्टी द्वारा तीन विधायकों के निष्कासन पर परिवहन मंत्री ने कहा कि सपा अब सिमटती जा रही है।

    “जो लोग मुलायम सिंह यादव के साथ संघर्ष करते हुए पार्टी में आए थे, वे अब दूसरे दलों में शामिल हो रहे हैं। यह दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी अंदर से बिखर रही है।”

    सपा में टूट की ओर इशारा– Kanpur Dehat News

    दयाशंकर सिंह ने आगे कहा कि सपा अब वैचारिक रूप से कमजोर हो चुकी है। पार्टी में संघर्ष करने वाले नेताओं की जगह वंशवाद हावी हो गया है, यही वजह है कि लगातार सपा के वरिष्ठ नेता और विधायक पार्टी को छोड़ रहे हैं।

    अकबरपुर कस्बे में नमस्ते चौराहा और बस स्टैंड का किया लोकार्पण (फोटो- नेशन नाउ समाचार)

    परिवहन विभाग की उपलब्धियां- Kanpur Dehat News

    दयाशंकर सिंह ने अपने विभाग की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया है और विभाग को लाभकारी बनाया है। ओवरलोडिंग और डग्गामारी जैसे मुद्दों पर सख्ती बरतने से विभाग ने अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया है। इसके अलावा, पीपीपी मॉडल के तहत बस स्टेशनों के कायाकल्प की योजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है।

    कानपुर देहात के लिए भविष्य की योजनाएं- Kanpur Dehat News

    मंत्री ने कानपुर देहात के लिए भविष्य की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में और अधिक परियोजनाएं शुरू की जाएंगी, जिनमें सड़क, परिवहन और बुनियादी ढांचे से संबंधित कार्य शामिल हैं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए कि सभी कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे किए जाएं।

    स्थानीय लोगों ने परिवहन मंत्री के दौरे और परियोजनाओं के उद्घाटन का स्वागत किया। अकबरपुर के निवासियों का कहना है कि नमस्ते चौराहा और बस स्टैंड के शुरू होने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में सुधार होगा। एक स्थानीय निवासी, रमेश कुमार, ने कहा, “हमारे क्षेत्र में इतने बड़े स्तर पर विकास कार्य हो रहे हैं, यह देखकर खुशी होती है। मंत्री जी का दौरा और उनकी सक्रियता हमें भरोसा देती है कि सरकार हमारे साथ है।”

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  • UP Education Reform: उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्रांति की शुरुआत, 39 जिलों में CM कंपोजिट विद्यालयों का निर्माण शुरू

    UP Education Reform: उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्रांति की शुरुआत, 39 जिलों में CM कंपोजिट विद्यालयों का निर्माण शुरू

    UP Education Reform: उत्तर प्रदेश में बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए योगी सरकार ने एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। प्रदेश के 39 जिलों में मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय की स्थापना का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इन मॉडल स्कूलों में प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं कक्षा तक की शिक्षा एक ही परिसर में प्रदान की जाएगी। शिक्षा क्रांति 2025 के तहत यह योजना राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और समावेशी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

    योजना का उद्देश्य और महत्व- UP Education Reform

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना का लक्ष्य है कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और तकनीक से युक्त शिक्षा मिले। उत्तर प्रदेश मॉडल स्कूल के जरिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बच्चों को कॉन्वेंट स्कूलों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का मानना है कि ये विद्यालय न केवल शिक्षा का केंद्र होंगे, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कौशल प्रशिक्षण और खेलकूद की सुविधाएं भी प्रदान करेंगे।

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    प्रथम चरण में सभी 75 जिलों में एक-एक मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय बनाए जाएंगे, और दूसरे चरण में प्रत्येक जिले में एक और विद्यालय की स्थापना होगी। इस तरह प्रत्येक जिले में दो मॉडल स्कूल होंगे, जो लाखों बच्चों को आधुनिक शिक्षा का लाभ देंगे।

    निर्माण कार्य की प्रगति- UP Education Reform

    राज्य सरकार के मीडिया सेल के अनुसार, 39 जिलों में निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इनमें सीतापुर, बिजनौर, कानपुर देहात, महाराजगंज, अम्बेडकरनगर, बुलन्दशहर, लखीमपुर खीरी, बलिया, सुल्तानपुर, हमीरपुर, रायबरेली, औरैया, अमेठी, हरदोई, अमरोहा, चित्रकूट, ललितपुर, जालौन, चन्दौली, फिरोजाबाद, श्रावस्ती, इटावा, मैनपुरी, हापुड़, कौशाम्बी, मऊ, गाजियाबाद, शाहजहांपुर, गौतमबुद्धनगर, संतकबीरनगर, सम्भल, गाजीपुर, मुजफ्फरनगर, रामपुर, हाथरस, बदायूं, बहराइच, भदोही और बागपत शामिल हैं।

    इन जिलों में वित्तीय स्वीकृति और भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके अलावा, 10 अन्य जिलों में जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने वाला है। शेष जिलों में शासन स्तर पर स्वीकृति और भूमि चयन का काम अंतिम चरण में है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को गति देने के लिए सरकार ने छह प्रमुख निर्माण एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी है।

    विद्यालयों की विशेषताएं- UP Education Reform

    मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालयों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक की शिक्षा एक ही परिसर में प्रदान करेंगे। प्रत्येक स्कूल 5 से 10 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा, जिसकी लागत लगभग 30 करोड़ रुपये होगी। ये विद्यालय आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे, जो बच्चों को वैश्विक स्तर की शिक्षा प्रदान करेंगे।

    इन स्कूलों में निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध होंगी:-

    • 30 स्मार्ट क्लासरूम: डिजिटल बोर्ड और इंटरैक्टिव लर्निंग के लिए।
    • डिजिटल लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब: तकनीकी ज्ञान और रिसर्च के लिए।
    • आधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला: प्रायोगिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए।
    • मिनी स्टेडियम और खेल मैदान: बच्चों के शारीरिक विकास के लिए।
    • कौशल विकास केंद्र: रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के लिए।
    • शिक्षकों के लिए आवास: शिक्षण कार्य को सुगम बनाने के लिए।
    • सुरक्षा और सुविधाएं: सीसीटीवी निगरानी, वाई-फाई, स्वच्छ जल और शौचालय।

    शिक्षा और कौशल विकास पर जोर

    इन विद्यालयों में न केवल किताबी ज्ञान, बल्कि कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। बच्चों को डिजिटल साक्षरता, तकनीकी कौशल और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही, खेलकूद और सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व का समग्र विकास होगा।

    एक स्थानीय अभिभावक, रमेश कुमार ने कहा, “हमारे बच्चों को अब गाँव में ही शहर जैसे स्कूल में पढ़ने का मौका मिलेगा। यह योजना हमारे लिए बहुत बड़ी राहत है।”

    सरकार की प्रतिबद्धता

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना को शिक्षा के क्षेत्र में गेम-चेंजर बताया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी मुख्यधारा में लाएगी। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि निर्माण कार्य समय पर पूरा हो और गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।

    भविष्य की योजना

    पहले चरण के बाद, दूसरे चरण में प्रत्येक जिले में एक और मॉडल स्कूल बनाया जाएगा। इसके अलावा, सरकार ने प्रदेश की 8,000 न्याय पंचायतों में भी सीएम मॉडल कंपोजिट स्कूल स्थापित करने की योजना बनाई है। इन स्कूलों में 10 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी।

    मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय योजना उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू करने जा रही है। यह योजना न केवल बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करेगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी मदद करेगी। सरकार की इस पहल से लाखों परिवारों को लाभ होगा, और उत्तर प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में उभरेगा।

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  • Amrapali River View Society Protest: बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भड़के आम्रपाली रिवर व्यू के निवासी, सड़क पर किया जोरदार प्रदर्शन

    Amrapali River View Society Protest: बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भड़के आम्रपाली रिवर व्यू के निवासी, सड़क पर किया जोरदार प्रदर्शन

    Amrapali River View Society Protest: ग्रेटर नोएडा वेस्ट में अपने सपनों का आशियाना बनाने की उम्मीद में फ्लैट खरीदने वाले निवासियों को बार-बार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले घर पाने के लिए लंबा संघर्ष और अब घर मिलने के बाद मूलभूत सुविधाओं के लिए जद्दोजहद। आम्रपाली रिवर व्यू सोसाइटी के निवासियों का सब्र अब जवाब दे चुका है। अपनी मांगों को लेकर सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और एनबीसीसी (नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन) और कोर्ट रिसीवर (सीआर) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

    प्रोटेस्ट मार्च और निवासियों की मांगें- Amrapali River View Society Protest

    पिछले रविवार को आम्रपाली रिवर व्यू सोसाइटी के निवासियों ने काली पट्टियां बांधकर और हाथों में तख्तियां लेकर रिवर व्यू सोसाइटी से गौर प्रोजेक्ट के मुख्य द्वार तक प्रोटेस्ट मार्च निकाला। प्रदर्शन में पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल थे, जो एनबीसीसी और गौर बिल्डर की कथित अनदेखी के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। निवासियों का कहना है कि सोसाइटी में मूलभूत सुविधाएं जैसे पार्किंग, लिफ्ट, पार्क और क्लब हाउस की कमी है, जिसके लिए बिल्डर ने पहले वादा किया था।

    निवासियों ने बताया कि सोसाइटी में 13,208 फ्लैट्स हैं, लेकिन केवल 50% फ्लैट्स के लिए ही पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है। इससे हर दिन पार्किंग को लेकर झगड़े और तनाव की स्थिति बनी रहती है। एक निवासी, दीपक ने कहा, “हमने अपने मेहनत की कमाई से फ्लैट खरीदा, लेकिन बिल्डर ने जो वादे किए, वे पूरे नहीं किए। पार्किंग का मुद्दा सबसे बड़ा है, जिसके कारण हमारी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।”

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    लिफ्ट और पार्क की समस्या- Amrapali River View Society Protest

    सोसाइटी में लिफ्ट की स्थिति भी चिंताजनक है। बारिश के मौसम में ओपन लॉबी के कारण लिफ्ट शाफ्ट में पानी भर जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक पैनल खराब हो जाते हैं। कई बार लिफ्ट में लोग फंस चुके हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। निवासियों ने लिफ्ट की मरम्मत और रखरखाव को प्राथमिकता देने की मांग की है।

    इसके अलावा, सोसाइटी में बच्चों के लिए कोई पार्क या हरियाली वाला क्षेत्र नहीं है। निवासियों ने पोडियम पर ग्रीन जोन विकसित करने की मांग की ताकि बच्चों को खेलने के लिए सुरक्षित जगह मिल सके। एक अन्य निवासी, संजय ने कहा, “हमारे बच्चे कहां खेलें? सोसाइटी में एक भी पेड़ या पार्क नहीं है। बिल्डर ने ग्रीनलैंड को गौर बिल्डर को बेच दिया, जिससे हमारी सुविधाएं छिन गईं।”

    गौर बिल्डर पर धोखाधड़ी का आरोप- Amrapali River View Society Protest

    निवासियों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि एनबीसीसी ने सोसाइटी की ग्रीनलैंड को गौर बिल्डर को सस्ते दामों पर बेच दिया। उनका दावा है कि इस सौदे में पारदर्शिता नहीं बरती गई और निवासियों को उनके हक से वंचित किया गया। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हमें पार्किंग और ग्रीन एरिया के जो वादे बिल्डर-बायर्स एग्रीमेंट (बीबीए) और अलॉटमेंट लेटर में किए गए थे, वे पूरे नहीं किए गए। हम चाहते हैं कि हमें पार्किंग की पूरी जानकारी दी जाए और हमारा हक मिले।”

    क्लब हाउस: नाम का ढांचा, सुविधा शून्य- Amrapali River View Society Protest

    सोसाइटी के निवासियों ने क्लब हाउस को लेकर भी नाराजगी जताई। बिल्डर ने फ्लैट खरीदारों से क्लब हाउस के लिए अतिरिक्त शुल्क लिया था, लेकिन मौके पर केवल एक खाली ढांचा मौजूद है। कोई सुविधा जैसे जिम, स्विमिंग पूल या कम्युनिटी हॉल उपलब्ध नहीं है। निवासियों ने इसे बिल्डर की वादाखिलाफी करार दिया।

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    डीएलपी बढ़ाने की मांग

    निवासियों ने एनबीसीसी की उदासीनता को देखते हुए डिफेक्ट्स लायबिलिटी पीरियड (डीएलपी) को एक साल और बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि सोसाइटी में निर्माण संबंधी कई खामियां हैं, जैसे दीवारों में दरारें और खराब क्वालिटी का काम। इन समस्याओं के समाधान के लिए बिल्डर को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

    भविष्य की चेतावनी

    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे आंदोलन को और उग्र करेंगे। निवासियों ने हर रविवार को प्रदर्शन करने का ऐलान किया है और सुप्रीम कोर्ट से भी हस्तक्षेप की मांग की है। एक निवासी, ऋषि ने कहा, “हमारा धैर्य अब खत्म हो चुका है। अगर हमें न्याय नहीं मिला, तो हम कानूनी और सामाजिक स्तर पर अपनी लड़ाई को और तेज करेंगे।”

    आम्रपाली रिवर व्यू सोसाइटी का यह प्रदर्शन न केवल बिल्डर की मनमानी को उजागर करता है, बल्कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में अन्य सोसाइटीज के निवासियों की समस्याओं को भी सामने लाता है। निवासियों की मांग है कि उनकी मेहनत की कमाई का सम्मान हो और उन्हें वह सुविधाएं मिलें, जिनका वादा किया गया था। अब यह देखना होगा कि एनबीसीसी और प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं।


  • Akhilesh Yadav action: समाजवादी पार्टी ने तीन बागी विधायकों को पार्टी से निकाला, अमित शाह से मुलाकात बनी कारण

    Akhilesh Yadav action: समाजवादी पार्टी ने तीन बागी विधायकों को पार्टी से निकाला, अमित शाह से मुलाकात बनी कारण

    Akhilesh Yadav action: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने तीन प्रमुख विधायकों – अमेठी की गौरीगंज सीट से राकेश प्रताप सिंह, रायबरेली की ऊंचाहार सीट से मनोज पांडेय और अयोध्या की गोसाईगंज सीट से अभय सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह फैसला सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लिया, जिन्होंने इन विधायकों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ नजदीकी बढ़ाने का आरोप लगाया। यह कदम सपा की विचारधारा और अनुशासन को बनाए रखने की दिशा में एक मजबूत संदेश माना जा रहा है।

    बागी विधायकों की बीजेपी से बढ़ती नजदीकी- Akhilesh Yadav action

    पिछले कुछ समय से ये तीनों विधायक सपा की विचारधारा से हटकर काम कर रहे थे। विशेष रूप से, 2024 के राज्यसभा चुनाव में इन विधायकों ने सपा के प्रत्याशियों के बजाय बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों को वोट दिया था। इस क्रॉस वोटिंग ने सपा के तीसरे उम्मीदवार आलोक रंजन की हार का कारण बना, जबकि बीजेपी के आठवें उम्मीदवार संजय सेठ को जीत मिली। इस घटना ने सपा के भीतर गहरी नाराजगी पैदा की थी।

    इसके अलावा, हाल ही में इन तीनों विधायकों की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी थी। यह मुलाकात उस समय हुई जब बीजेपी उत्तर प्रदेश में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की रणनीति बना रही थी। सपा ने इसे पार्टी के मूल सिद्धांतों के खिलाफ माना और इन विधायकों को निष्कासित करने का फैसला लिया।

    सपा का सख्त रुख: विचारधारा से कोई समझौता नहीं- Akhilesh Yadav action

    समाजवादी पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर बयान जारी करते हुए कहा कि इन विधायकों ने “सांप्रदायिक, विभाजनकारी और नकारात्मक विचारधारा” का समर्थन किया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि ये विधायक किसान, महिला, युवा, कारोबारी, नौकरीपेशा और सपा की ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) विचारधारा के खिलाफ काम कर रहे थे।

    सपा ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि इन विधायकों को सुधार का मौका दिया गया था, लेकिन उनकी ‘अनुग्रह अवधि’ अब समाप्त हो चुकी है। पार्टी ने यह भी कहा कि भविष्य में भी जन-विरोधी और पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

    सात बागी विधायकों में से तीन पर कार्रवाई- Akhilesh Yadav action

    2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के सात विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। इनमें राकेश प्रताप सिंह, मनोज पांडेय, अभय सिंह, राकेश पांडेय, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्या शामिल थे। हालांकि, सपा ने अभी केवल तीन विधायकों को निष्कासित किया है। शेष चार विधायकों – राकेश पांडेय, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्या को सपा ने उनके हाल के व्यवहार में सुधार के आधार पर अभी और समय दिया है।

    सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि बाकी विधायकों ने पीडीए के प्रति अपनी आस्था दिखाई है, जिसके कारण उन्हें अभी पार्टी में रखा गया है। यह कदम सपा के रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें वह अपनी विचारधारा को बनाए रखने के साथ-साथ पार्टी के भीतर एकता को भी प्राथमिकता दे रही है।

    बीजेपी के साथ नजदीकी: क्या होगा अगला कदम?- Akhilesh Yadav action

    इन तीनों विधायकों की बीजेपी के साथ बढ़ती नजदीकी ने सवाल उठाए हैं कि क्या ये विधायक अब बीजेपी में शामिल होंगे। मनोज पांडेय पहले ही बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, और राकेश प्रताप सिंह व अभय सिंह भी बीजेपी नेताओं के साथ सक्रिय रूप से संपर्क में थे। हालांकि, बीजेपी ने अभी तक इन विधायकों को कोई बड़ा ऑफर नहीं दिया है, और लोकसभा चुनाव में इन विधायकों की सीटों पर बीजेपी को कोई खास फायदा भी नहीं मिला।

    सूत्रों के अनुसार, बीजेपी इन विधायकों को विधान परिषद या अन्य छोटे पदों पर समायोजित करने पर विचार कर सकती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि क्या ये विधायक अपनी सीटों पर फिर से जीत हासिल कर पाएंगे। अगर इनकी विधानसभा सदस्यता रद्द होती है, तो उपचुनाव की स्थिति बन सकती है, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है।

    सपा की रणनीति और भविष्य- Akhilesh Yadav action

    सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी अपनी विचारधारा और अनुशासन के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। 2027 के विधानसभा चुनाव और 2026 के पंचायत चुनाव को देखते हुए सपा ने संगठन में बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं। हाल ही में कुशीनगर को छोड़कर सभी जिलों की कार्यकारिणी भंग की गई है, ताकि एक व्यक्ति-एक पद के सिद्धांत को लागू किया जा सके।

    यह कदम सपा की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अपनी छवि को और मजबूत करना चाहती है। अखिलेश यादव ने बार-बार जोर दिया है कि सपा सामाजिक न्याय, समानता और पीडीए की विचारधारा पर आधारित है। इस निष्कासन के जरिए सपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जो भी इस विचारधारा के खिलाफ जाएगा, उसे पार्टी में जगह नहीं मिलेगी।

    समाजवादी पार्टी का यह सख्त कदम न केवल बागी विधायकों के लिए एक सबक है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत भी हो सकता है। राकेश प्रताप सिंह, मनोज पांडेय और अभय सिंह का निष्कासन सपा की विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना यह होगा कि ये विधायक बीजेपी के साथ अपनी सियासी राह कैसे बनाते हैं और सपा इस स्थिति का फायदा उठाकर अपनी स्थिति को और मजबूत करने में कितनी सफल होती है।

    सोर्स- ETV BHARAT

  • Noida Share Market Fraud: नोएडा में शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट के नाम पर 33.92 लाख की ठगी, तीन गिरफ्तार

    Noida Share Market Fraud: नोएडा में शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट के नाम पर 33.92 लाख की ठगी, तीन गिरफ्तार

    Noida Share Market Fraud: शेयर बाजार में निवेश कर मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर नोएडा निवासी से ₹33,92,161 की धोखाधड़ी करने वाले तीन साइबर ठगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ये ठग लोगों को शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट के नाम पर फंसा रहे थे और फिर लाखों रुपये की ठगी कर फरार हो जाते थे।

    इस मामले में थाना साइबर क्राइम, नोएडा में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद एडीसीपी साइबर क्राइम मनीषा सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच शुरू की। जांच में पता चला कि पीड़ित से झूठे प्रलोभन देकर करीब 34 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कराए गए थे। पुलिस ने राजस्थान से तीन साइबर अपराधियों – महेन्द्र, दिनेश और विकास – को गिरफ्तार किया।

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    पुलिस ने इनके पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में दिनेश एक फर्जी कंपनी का प्रोपराइटर था, जिसे ठगी के पैसे को ‘डायल्यूट’ करने के लिए खोला गया था। वहीं महेन्द्र कंपनी का मेंडेट सिग्नेचर अथॉरिटी था और विकास इस गिरोह में पैसे की सेटिंग का काम करता था।

    पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस गिरोह ने अपनी कंपनी में 4.20 लाख रुपये की साइबर ठगी से प्राप्त राशि जमा की थी। इनके द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जांच के दौरान एनसीआरपी पोर्टल पर देशभर से कुल 11 शिकायतें सामने आई हैं। इनमें कर्नाटक (4), महाराष्ट्र (3), तमिलनाडु (2), उत्तर प्रदेश (1), और पश्चिम बंगाल से भी शिकायतें मिली हैं।

    एडीसीपी मनीषा सिंह के अनुसार, पीड़ित की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई करते हुए संदिग्ध खातों को फ्रीज कर दिया गया है और आगे की जांच जारी है। उन्होंने जनता से अपील की कि ऐसे लुभावने प्रस्तावों से सतर्क रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंक या इन्वेस्टमेंट से जुड़ी जानकारी न दें।

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