11th International Yoga Day: विश्व भर में योग की महत्ता को बढ़ावा देने वाला 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस गोरखपुर में उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सांसद रवि किशन शुक्ला ने योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। इस अवसर पर शहर के गणमान्य नागरिक, छात्र, चिकित्सक, और स्वयंसेवी संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
सांसद रवि किशन ने योग को भारत की अनमोल धरोहर बताते हुए कहा, “योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन और आत्मा को शुद्ध करने की कला है। यह भारत की संस्कृति का ऐसा उपहार है, जिसे आज विश्व ने अपनाया है।” उन्होंने लोगों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। 11th International Yoga Day
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि योग भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से योग आज वैश्विक स्तर पर एक आंदोलन बन चुका है। योगी ने जोर देकर कहा, “योग स्वस्थ शरीर और सकारात्मक सोच का आधार है, जो हमें समृद्ध और समर्थ भारत की ओर ले जाता है।”
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, नगर निगम के अधिकारी, और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। स्कूली छात्र-छात्राओं ने भी योगासनों का प्रदर्शन कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। सामूहिक योग सत्र के बाद सभी ने मिलकर “स्वस्थ भारत, समर्थ भारत” के लिए संकल्प लिया। 11th International Yoga Day
इस आयोजन ने न केवल योग के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि गोरखपुरवासियों में एकता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया। स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने कहा, “ऐसे आयोजनों से हमारी युवा पीढ़ी योग के प्रति प्रेरित होती है। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि गोरखपुर योग के इस उत्सव का हिस्सा बना।” 11th International Yoga Day
गोरखपुर का यह योग कार्यक्रम एक बार फिर साबित करता है कि योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है। आइए, हम सभी योग को अपनाकर स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण में योगदान दें। 11th International Yoga Day
Barabanki Police Encounter: बाराबंकी जिले की पुलिस और स्वाट टीम ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए मुठभेड़ के बाद दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी पुराने हिस्ट्रीशीटर हैं और लखनऊ व बाराबंकी में कई आपराधिक मामलों में वांछित थे।
पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय के निर्देश पर चलाए जा रहे चेकिंग अभियान के दौरान फतेहपुर पुलिस को सूचना मिली कि ताल गांव नहर पटरी पुलिया पर दो संदिग्ध व्यक्ति खड़े हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब दोनों को रोकने का प्रयास किया, तो उन्होंने भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश घायल हो गया और दूसरा भी पकड़ लिया गया।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान पंकज उर्फ भागी निवासी मोहम्मदपुर खाला और समर सिंह उर्फ पपली निवासी जलालपुर थाना रामनगर के रूप में हुई है। पुलिस ने उनके पास से ₹10,000 नकद, अवैध तमंचा, जिंदा कारतूस और चोरी किया गया पान मसाला बरामद किया है।
पुलिस के अनुसार, इन दोनों ने 3-4 जून की रात फतेहपुर के बेहटी गांव में एक बड़ी चोरी की घटना को अंजाम दिया था, जिसमें सोने-चांदी के जेवरात और महंगा पान मसाला भी चोरी किया गया था। ये दोनों अपराधी पहले से ही लखनऊ और बाराबंकी में कई आपराधिक वारदातों में संलिप्त रहे हैं। मामले में अभी भी दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
एएसपी विकास चंद्र त्रिपाठी ने मीडिया को बताया कि दोनों अपराधी बेहद शातिर हैं और लंबे समय से पुलिस के रडार पर थे। इनकी गिरफ्तारी से फतेहपुर क्षेत्र में बढ़ रही चोरी की घटनाओं पर रोक लगने की उम्मीद है।
Sonbhadra Doda Posta: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में पुलिस और STF की संयुक्त टीम ने नशीले पदार्थों की तस्करी का एक बड़ा मामला उजागर किया है। बीती रात करीब 01:25 बजे, राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत हिन्दुआरी तिराहा पर चेकिंग के दौरान एक मिनी ट्रक से 1806.56 किलोग्राम डोडा पोस्ता बरामद किया गया, जिसकी बाजार कीमत लगभग ₹1.80 करोड़ आंकी गई है।
गश्त कर रही STF और राबर्ट्सगंज पुलिस को एक संदिग्ध ट्रक देखकर उसे जांच के लिए रोका गया। जब ट्रक की तलाशी ली गई तो उसमें बड़ी मात्रा में अवैध मादक पदार्थ डोडा पोस्ता मिला। मौके से दो तस्करों – अकरम खां और मोहम्मद आरिफ (दोनों बरेली निवासी) को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि वे रांची (झारखंड) से यह मादक पदार्थ लेकर बरेली जा रहे थे और इसके एवज में उन्हें मोटी रकम मिलने वाली थी।
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह में एक और व्यक्ति, अनिस अंसारी, भी संलिप्त है जिसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में धारा 8/18/25/29/60 NDPS एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है।
अनिल कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक सोनभद्र ने बताया कि “इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन-कौन हैं, उनकी तलाश जारी है। पुलिस की टीम अन्य वांछित तस्करों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।” यह कार्रवाई मादक पदार्थ तस्करों के लिए बड़ा झटका है और पुलिस के लिए एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है।
Iran-Israel Conflict: 21 जून, 2025 को ईरान और इजरायल के बीच युद्ध अपने नौवें दिन में प्रवेश कर चुका है, और शांति की कोई उम्मीद नहीं दिख रही। ईरान ने तेल अवीव और हाइफा पर मिसाइल हमले किए, जबकि इजरायल ने ईरान के एक यूएवी कमांडर को मार गिराया और इस्फहान के परमाणु अनुसंधान केंद्र पर हमला किया।
Footage just in: Iran launches a barrage of missiles as the 18th wave of Operation True Promise 3 begins, striking Zionist targets in occupied Palestine.#OpTruePromise3pic.twitter.com/gHxFtdd3Xg
— Iran Military Monitor (@IRIran_Military) June 21, 2025
तेल अवीव पर ईरानी हमला- Iran-Israel Conflict
20 जून, 2025 को ईरान ने तेल अवीव, बीरशेबा और हाइफा पर करीब 20 बैलिस्टिक मिसाइलें और रॉकेट्स दागे। तेल अवीव में सायरन बजने से लोग आश्रयों की ओर भागे। इजरायल के आयरन डोम और एरो मिसाइल रक्षा प्रणालियों ने कई मिसाइलों को रोका, लेकिन कुछ रक्षा तंत्र को भेदने में सफल रहीं। तेल अवीव में एक आवासीय इमारत की छत पर आग लग गई, जिसे अग्निशमन दल ने नियंत्रित किया। रमात गान में एक सरकारी कार्यालय वाली इमारत को नुकसान पहुंचा, और 15 लोग मामूली रूप से घायल हुए।
हाइफा, जो एक प्रमुख बंदरगाह और नौसैनिक अड्डा है, में एक ऐतिहासिक मस्जिद को नुकसान पहुंचा। विदेश मंत्री गिदोन सार ने ईरान पर हमले का आरोप लगाते हुए कहा, “ईरान की आक्रामकता उनकी कूटनीति की कमी को दर्शाती है।” ईरानी मीडिया ने दावा किया कि हमले इजरायल के सैन्य ठिकानों और कमांड सेंटरों पर केंद्रित थे।
इजरायल का जवाबी हमला
इजरायल ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की, जिसमें पश्चिमी ईरान में मिसाइल लॉन्च साइट्स और खुजस्तान में हवाई रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया। इस्फहान में, जहां ईरान का प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र है, विस्फोटों की खबरें आईं, जिसमें पांच लोगों की मौत हुई। इजरायल ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के ड्रोन कमांडर रजा मूसवी को मार गिराया, जो अहवाज से हमलों के लिए जिम्मेदार था।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, “हम ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देंगे।” इजरायल का लक्ष्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को नष्ट करना है।
परमाणु विवाद
ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस संघर्ष का केंद्र है। इजरायल का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है, जबकि तेहरान इसे शांतिपूर्ण बताता है। एक ईरानी अधिकारी ने यूरेनियम संवर्धन की सीमा पर चर्चा की इच्छा जताई, लेकिन इसे पूरी तरह बंद करने से इनकार किया। संयुक्त राष्ट्र में इजरायल ने चेतावनी दी कि वह तब तक हमले जारी रखेगा जब तक परमाणु खतरा खत्म नहीं हो जाता। ईरान ने अमेरिका की संभावित भागीदारी पर चिंता जताई, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप ने दो हफ्तों में निर्णय लेने की बात कही।
इन हमलों से दोनों देशों में नुकसान हुआ है। इजरायल में दर्जनों लोग घायल हुए, और स्कूल व अस्पताल बंद हुए। ईरान में नागरिक हताहत हुए, जिससे तनाव बढ़ा। ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों ने इजरायल की रक्षा प्रणालियों पर दबाव डाला है। क्षेत्रीय देशों जैसे कतर और जॉर्डन की भागीदारी ने स्थिति को जटिल किया है।
यह संघर्ष अभी थमने के आसार नहीं दिखाता। कूटनीतिक प्रयास विफल रहे हैं, और दोनों देश अपनी सैन्य रणनीतियों पर अड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने युद्ध को रोकने और परमाणु विवाद को सुलझाने की चुनौती है। तेल अवीव और तेहरान में तनाव बना हुआ है, और दुनिया इस संकट पर नजर रखे हुए है।
International Yoga Day 2025: 21 जून, 2025 को पूरी दुनिया ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के 11वें संस्करण का उत्साहपूर्वक उत्सव मनाया। इस अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम का नेतृत्व किया। अपने प्रेरणादायक भाषण में, उन्होंने योग की वैश्विक यात्रा और इसके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक लाभों पर प्रकाश डाला। पीएम मोदी ने योग को एक ऐसी शक्ति बताया, जो न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, बल्कि वैश्विक शांति और एकता को भी बढ़ावा देती है।
योग की वैश्विक यात्रा- International Yoga Day 2025
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत 2014 में हुई, जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 21 जून को योग दिवस के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को 175 देशों का समर्थन मिला, जो वैश्विक एकता का प्रतीक था। पीएम मोदी ने इस ऐतिहासिक पल को याद करते हुए कहा, “यह केवल एक प्रस्ताव का समर्थन नहीं था, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए एक सामूहिक प्रयास था।” आज, योग दुनिया भर में करोड़ों लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। चाहे वह दिव्यांग व्यक्ति हों, जो योग शास्त्र पढ़ रहे हैं, या अंतरिक्ष में वैज्ञानिक, जो योग का अभ्यास कर रहे हैं, योग ने सभी सीमाओं को पार कर लिया है।
योग: शांति और संतुलन का विज्ञान- International Yoga Day 2025
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत योग के वैज्ञानिक आधार को आधुनिक शोध के माध्यम से और मजबूत कर रहा है। देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान योग के लाभों पर शोध कर रहे हैं, ताकि इसे आधुनिक चिकित्सा पद्धति में शामिल किया जा सके। योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक तनाव को कम करने और आंतरिक शांति प्रदान करने में भी मदद करता है। पीएम मोदी ने कहा, “योग हमें सिखाता है कि हम अलग-थलग नहीं हैं; हम प्रकृति का अभिन्न अंग हैं।”
योग को जन आंदोलन बनाने की अपील- International Yoga Day 2025
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 का थीम “Yoga for One Earth, One Health” वैश्विक स्वास्थ्य और सामंजस्य की दिशा में एक कदम है। पीएम मोदी ने योग को एक जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “आइए, योग को एक वैश्विक संकल्प बनाएं, जो शांति, स्वास्थ्य और समरसता की ओर ले जाए।” स्कूलों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर योग सत्रों को बढ़ावा देकर, हम इसे एक सामूहिक जिम्मेदारी बना सकते हैं।
वैश्विक एकता के लिए योग- International Yoga Day 2025
पीएम मोदी ने वैश्विक समुदाय से अपील की कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को योग की शुरुआत के रूप में मनाया जाए, जहां आंतरिक शांति वैश्विक नीति बन जाए। उन्होंने कहा, “हर देश और समाज को योग को एक साझा जिम्मेदारी बनाना चाहिए।” योग का अभ्यास न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जागरूकता को भी बढ़ाता है। यह हमें “मैं” से “हम” की ओर ले जाता है, जो एकता और सह-अस्तित्व का आधार है।
योग की सांस्कृतिक जड़ें- International Yoga Day 2025
योग भारत की प्राचीन परंपराओं में निहित है और केवल शारीरिक व्यायाम तक सीमित नहीं है। यह आत्म-खोज और आध्यात्मिक विकास का एक विज्ञान है। पीएम मोदी ने कहा, “योग हमें भारत की संस्कृति के मूल्यों – सेवा, समर्पण और सह-अस्तित्व – से जोड़ता है।” जब व्यक्ति अपने हितों से ऊपर उठकर समाज के लिए सोचता है, तभी मानवता का कल्याण होता है।
योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं- International Yoga Day 2025
पीएम मोदी ने लोगों से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। प्राणायाम, आसन और ध्यान जैसे सरल अभ्यास शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। समुदायों को स्कूलों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर योग सत्र आयोजित करने चाहिए। विश्व भर में सरकारें और संस्थान योग के लाभों को मान्यता दे रहे हैं और इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों में शामिल कर रहे हैं।
एक टिकाऊ भविष्य के लिए योग- International Yoga Day 2025
योग का प्रकृति के साथ सामंजस्य पर जोर इसे स्थिरता के लिए एक शक्तिशाली उपकरण बनाता है। यह व्यक्तियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। पीएम मोदी का “Yoga for One Earth, One Health” का दृष्टिकोण व्यक्तिगत और ग्रहीय कल्याण को जोड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 ने योग की वैश्विक यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ा। विशाखापट्टनम में पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन ने योग के शांति, स्वास्थ्य और एकता को बढ़ावा देने की शक्ति को रेखांकित किया। योग को अपनाकर, हम एक ऐसी दुनिया बना सकते हैं जहां आंतरिक शांति वैश्विक सामंजस्य का मार्ग बने। आइए, हम योग को केवल 21 जून तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और एक स्वस्थ, शांतिपूर्ण और एकजुट दुनिया की दिशा में योगदान दें।
INTERNATIONAL WAR LAW: ईरान और इजराइल के बीच तनाव अपने चरम पर है। इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से पलटवार किया। इस बीच, एक बड़ा सवाल विश्व मंच पर उभर रहा है: क्या अमेरिका ईरान पर सीधा सैन्य हमला करेगा? और अगर हां, तो क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस हमले का नेतृत्व करेंगे? चर्चा है कि अमेरिका ईरान के परमाणु ठिकानों को बंकर बस्टर बम से निशाना बना सकता है, जो केवल अमेरिका के B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ही गिरा सकते हैं। लेकिन यह इतना सरल नहीं है। अंतरराष्ट्रीय नियम, सहयोगी देशों की मंजूरी, और वैधानिक प्रक्रियाएं इस फैसले को जटिल बनाती हैं। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
अमेरिका का सैन्य विकल्प: बंकर बस्टर बम और B-2 बॉम्बर्स- INTERNATIONAL WAR LAW
अमेरिका के पास GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर, जिसे बंकर बस्टर बम के नाम से जाना जाता है, एक ऐसा हथियार है जो गहरे भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम है। यह 30,000 पाउंड का बम विशेष रूप से ईरान के फोर्डो परमाणु संयंत्र जैसे मजबूत ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो पहाड़ों के नीचे बना है। इस बम को केवल B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स ही ले जा सकते हैं, जो अमेरिका के सैन्य शस्त्रागार का हिस्सा हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बम वाकई फोर्डो जैसे ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर सकता है? कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस बम की प्रभावशीलता पर सवाल हैं, और अगर यह नाकाम रहा, तो अमेरिका एक लंबे युद्ध में फंस सकता है।
🔴 ब्रेकिंग न्यूज: अमेरिका को बड़ा झटका! 📍 ईरान की संसद से अमेरिका के लिए बुरी खबर ▪️ ईरान की संसद में सांसदों ने अमेरिका के झंडे को जलाया ▪️ लगाए गए नारों में कहा गया – “अमेरिका हो बर्बाद!” ▪️ सांसदों ने दी धमकी – अमेरिका पर परमाणु बम दागेंगे ▪️ हालांकि, फिलहाल ईरान के पास कोई… pic.twitter.com/rvhcP9dyr0
ट्रंप की दुविधा: हमला करें या कूटनीति अपनाएं?- INTERNATIONAL WAR LAW
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा है कि वह अगले दो हफ्तों में ईरान पर हमले का फैसला लेंगे। व्हाइट हाउस के सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की योजना को मंजूरी दी है, लेकिन अंतिम आदेश देने से पहले वह यह देखना चाहते हैं कि क्या ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए तैयार है। ट्रंप की यह रणनीति दबाव बनाकर कूटनीति को बढ़ावा देने की हो सकती है, लेकिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने साफ कर दिया है कि वह “बिना शर्त आत्मसमर्पण” नहीं करेंगे। ऐसे में ट्रंप के सामने दो रास्ते हैं: या तो वह सैन्य कार्रवाई का जोखिम उठाएं या कूटनीतिक रास्ता अपनाएं।
अंतरराष्ट्रीय नियम: हमले की वैधानिकता पर सवाल- INTERNATIONAL WAR LAW
संयुक्त राष्ट्र (UN) के नियमों के अनुसार, किसी देश पर हमला केवल तीन परिस्थितियों में वैध माना जाता है:
आत्म-रक्षा: इसके लिए यह साबित करना होगा कि ईरान से तत्काल और स्पष्ट खतरा था।
मानवीय संकट को रोकना: बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन को रोकने के लिए।
यूएन सुरक्षा परिषद की मंजूरी: बिना इसकी अनुमति के हमला गैरकानूनी माना जा सकता है।
इजराइल और अमेरिका दावा कर सकते हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम उनके लिए खतरा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफाएल ग्रोसी ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। बिना ठोस सबूत के हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन माना जा सकता है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों की वैश्विक छवि को नुकसान हो सकता है।
ब्रिटेन की भूमिका: डिएगो गार्सिया का महत्व- INTERNATIONAL WAR LAW
अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए डिएगो गार्सिया जैसे सैन्य अड्डों का उपयोग करना पड़ सकता है, जो हिंद महासागर में स्थित है। यह अड्डा भले ही अमेरिका संचालित करता हो, लेकिन इसका स्वामित्व ब्रिटेन के पास है। इसलिए, ट्रंप को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की मंजूरी लेनी होगी। स्टारमर, जो 2003 के इराक युद्ध के खिलाफ थे, ने उस समय इसे गैरकानूनी बताया था। उनकी राय है कि आत्म-रक्षा का दावा तभी मान्य है, जब खतरा तत्काल और स्पष्ट हो। अगर ब्रिटेन इस हमले को मंजूरी देता है और यह गैरकानूनी साबित होता है, तो ब्रिटेन को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है। INTERNATIONAL WAR LAW
ट्रंप की चुनौतियां: सहयोगियों का समर्थन और कानूनी बाधाएं
ट्रंप के सामने कई चुनौतियां हैं:– INTERNATIONAL WAR LAW
सहयोगी देशों की मंजूरी: नाटो और अन्य सहयोगी देशों का समर्थन हासिल करना जरूरी है। बिना उनके समर्थन के युद्ध वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर सकता है।
अनुपातिक जवाबी कार्रवाई: अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, जवाबी कार्रवाई खतरे के अनुपात में होनी चाहिए। अगर अमेरिका ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला करता है, तो इसे गैरकानूनी माना जा सकता है।
ईरान का पलटवार: ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उसके परमाणु ठिकानों पर हमला हुआ, तो वह इजराइल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। इससे युद्ध क्षेत्रीय स्तर पर फैल सकता है।
वैश्विक प्रभाव: क्या यह विश्व युद्ध की शुरुआत होगी?-
ईरान-इजराइल तनाव में अगर अमेरिका शामिल होता है, तो रूस और चीन जैसे देशों की प्रतिक्रिया अहम होगी। अगर ये देश ईरान का सैन्य समर्थन करते हैं, तो यह संघर्ष नाटो के साथ बड़े टकराव में बदल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ हफ्ते इस क्षेत्र की दिशा तय करेंगे। शांति की कोशिशें जारी हैं, लेकिन तनाव कम होने के आसार कम हैं।
ट्रंप के सामने एक कठिन विकल्प है: या तो वह सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करें और ईरान पर हमला करें, या फिर कूटनीति के रास्ते पर चलें। अंतरराष्ट्रीय नियम, सहयोगी देशों की मंजूरी, और वैधानिक प्रक्रियाएं इस फैसले को जटिल बनाती हैं। अगर ट्रंप हमले का रास्ता चुनते हैं, तो उन्हें न केवल इजराइल बल्कि पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का भरोसा जीतना होगा। क्या ट्रंप इतिहास में शांतिदूत के रूप में याद किए जाएंगे या युद्ध शुरू करने वाले नेता के रूप में? यह उनके अगले कदम पर निर्भर करता है।
लेखक: संदीप कुमार स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की एक ताजा रिपोर्ट ने दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींचा है।
India nuclear weapons: हाल ही में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की एक ताजा रिपोर्ट ने दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींचा है। जनवरी 2025 तक भारत के पास 180 परमाणु हथियार हो गए हैं, जो पाकिस्तान के 170 हथियारों से अधिक हैं। यह पहली बार है जब भारत ने परमाणु हथियारों की संख्या में अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान को पीछे छोड़ा है। पिछले दो सालों में भारत ने 16 नए परमाणु बम बनाए, जबकि पाकिस्तान का परमाणु जखीरा पिछले तीन सालों से स्थिर है।
इस बदलाव ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या भारत अब केवल पाकिस्तान को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति नहीं बना रहा? क्या इसका लक्ष्य अब चीन जैसे बड़े खिलाड़ी से टक्कर लेना है? इस लेख में हम भारत की परमाणु शक्ति में आए इस बदलाव, इसके कारणों, और भविष्य की रणनीति को विस्तार से समझेंगे।
पिछले दो सालों में भारत की परमाणु शक्ति में क्या बदलाव आया?
SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने 2023 से 2025 तक अपने परमाणु हथियारों की संख्या में लगातार इजाफा किया है। 2023 में भारत के पास 164 परमाणु हथियार थे, जो 2024 में बढ़कर 172 हो गए, और अब 2025 में यह आंकड़ा 180 तक पहुंच चुका है। लेकिन यह सिर्फ संख्या का खेल नहीं है। भारत ने अपनी परमाणु ताकत को नई तकनीकों और डिलीवरी सिस्टम के साथ और मजबूत किया है।
कैनिस्टराइज्ड मिसाइलें और MIRV तकनीक: भारत ने हाल के वर्षों में कैनिस्टराइज्ड मिसाइलों पर जोर दिया है। ये मिसाइलें परमाणु हथियारों को तेजी से तैनात करने में सक्षम हैं और इन्हें आसानी से छिपाया जा सकता है। इसके अलावा, भारत की अग्नि-5 मिसाइल में मल्टिपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स (MIRVs) तकनीक होने की संभावना है। यह तकनीक एक मिसाइल को कई अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता देती है, जिससे भारत की रणनीतिक ताकत कई गुना बढ़ जाती है।
परमाणु पनडुब्बियां और डिलीवरी सिस्टम: भारत ने अपनी परमाणु त्रिकोणीय रणनीति (land, sea, air) को मजबूत करने के लिए INS अरिहंत और अन्य परमाणु पनडुब्बियों पर काम तेज किया है। ये पनडुब्बियां समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता रखती हैं, जो भारत को दूसरी स्ट्राइक क्षमता प्रदान करती हैं। यानी, अगर भारत पर पहला परमाणु हमला होता है, तो भी वह जवाबी हमला करने में सक्षम होगा।
अग्नि-6 और लंबी दूरी की मिसाइलें: भारत अब अग्नि-6 मिसाइल पर काम कर रहा है, जिसकी रेंज 6,000 से 8,000 किलोमीटर तक हो सकती है। यह मिसाइल न केवल पाकिस्तान, बल्कि चीन के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती है। यह भारत की रणनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है, जो अब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहता है।
INS अरिघात (INS Arighat) 29 अगस्त 2024 को भारतीय नौसेना में शामिल हुई, जो पानी के अंदर से परमाणु हथियार लॉन्च करने में सक्षम।
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने पिछले कुछ सालों में अपने परमाणु हथियारों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं की है। हालांकि, वह फिसाइल मटेरियल (परमाणु हथियार बनाने के लिए जरूरी सामग्री) जमा कर रहा है और शॉर्ट-रेंज टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियारों पर ध्यान दे रहा है। ये हथियार छोटे क्षेत्रों में तेजी से इस्तेमाल के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, खासकर भारत के साथ सीमा पर संभावित युद्ध की स्थिति में।
भारत ने पहले क्यों रखे कम परमाणु हथियार?
ऐतिहासिक रूप से भारत के पास हमेशा पाकिस्तान से कम परमाणु हथियार रहे हैं। इसके पीछे कई रणनीतिक और भौगोलिक कारण थे:
‘नो फर्स्ट यूज’ नीति: भारत ने 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति अपनाई, जिसका मतलब है कि भारत कभी पहले परमाणु हमला नहीं करेगा। इस नीति के तहत भारत का ध्यान ‘मिनिमम क्रेडिबल डिटरेंस’ पर रहा, यानी इतने हथियार रखना कि जवाबी हमले से दुश्मन को भारी नुकसान हो। इस वजह से भारत ने कम लेकिन शक्तिशाली हथियारों पर ध्यान दिया, जबकि पाकिस्तान ने ‘फर्स्ट यूज’ नीति के तहत ज्यादा हथियार बनाए।
पाकिस्तान का छोटा क्षेत्रफल: भारत का क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर है, जबकि पाकिस्तान का सिर्फ 7.96 लाख वर्ग किलोमीटर। छोटे क्षेत्रफल वाले देश को कम हथियारों से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सकता है, क्योंकि इसके सैन्य और आर्थिक केंद्र कम दूरी पर स्थित हैं। भारत ने इस आधार पर कम लेकिन शक्तिशाली न्यूट्रॉन, फिजन, और थर्मोन्यूक्लियर बम बनाए, जो 1.5 से 20 किलोमीटर के दायरे में तबाही मचा सकते हैं।
संसाधनों का सीमित उपयोग और तकनीकी फोकस: 1990 और 2000 के दशक में भारत का परमाणु कार्यक्रम शुरुआती दौर में था। भारत ने अपने संसाधनों को न केवल परमाणु हथियारों, बल्कि आर्थिक विकास, सैन्य आधुनिकीकरण, और वैज्ञानिक अनुसंधान में भी निवेश किया। भारत ने हथियारों की संख्या से ज्यादा उनकी गुणवत्ता पर ध्यान दिया, जैसे कि अग्नि मिसाइलें, परमाणु पनडुब्बियां, और MIRV तकनीक। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने परमाणु हथियारों को प्राथमिकता दी और इसे अपनी रक्षा का आधार बनाया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध: 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद भारत पर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे, जिससे फिसाइल मटेरियल की उपलब्धता सीमित थी। वहीं, पाकिस्तान को चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशों से मदद मिली। 2008 में भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के बाद भारत को फिसाइल मटेरियल की आपूर्ति बढ़ी, जिसने इसके परमाणु कार्यक्रम को गति दी।
INS अरिहंत भारत की पहली स्वदेशी परमाणु शक्ति से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है। इसे 2016 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया, जो भारत की परमाणु त्रिकोण (Nuclear Triad) को पूर्ण करता है। यह पनडुब्बी गुप्त रूप से समुद्र में रहकर परमाणु जवाबी हमले की क्षमता प्रदान करती है।
🌍 टॉप 10 परमाणु संपन्न देश और उनके लड़ाकू विमान (2025 अनुमान)
रैंक
देश
परमाणु हथियार (बम)
लड़ाकू विमान (Fighter Jets)
1️⃣
रूस
5,580
1,500+
2️⃣
अमेरिका
5,244
1,900+
3️⃣
चीन
500–600
1,600+
4️⃣
फ्रांस
290
270+
5️⃣
ब्रिटेन (UK)
225
130+
6️⃣
पाकिस्तान
170
350+
7️⃣
भारत
180
600+
8️⃣
इज़राइल
~90 (गोपनीय)
250+
9️⃣
उत्तर कोरिया
50–60
~40 (सक्रिय संचालन में बहुत कम)
🔟
ईरान
0 (अभी परीक्षण/अविकसित)
300+ (अधिकांश पुराने मॉडल)
🔍 प्रमुख बिंदु:
रूस और अमेरिका के पास विश्व के कुल परमाणु हथियारों का लगभग 90% हिस्सा है।
चीन अपने परमाणु जखीरे को तेजी से बढ़ा रहा है, हर साल 100 तक नए हथियार जोड़ रहा है।
भारत और पाकिस्तान में संख्या तुलनात्मक रूप से कम है, लेकिन तकनीकी विकास जारी है (जैसे MIRV, कैनिस्टर मिसाइलें)।
इज़राइल अपने परमाणु कार्यक्रम की पुष्टि नहीं करता, लेकिन अनुमान है कि उसके पास 80-90 बम हैं।
ईरान के पास फिलहाल सक्रिय परमाणु हथियार नहीं हैं, लेकिन उसका कार्यक्रम दुनिया के लिए चिंता का विषय है।
भारत की परमाणु-सक्षम मिसाइलें
– तीनों माध्यमों से परमाणु हमले की ताकत (Land, Sea, Air Launch Capable)
मिसाइल का नाम
रेंज
मिसाइल प्रकार
परमाणु क्षमता
लॉन्च माध्यम
विशेषताएं
अग्नि-5
~5,500 किमी
बैलिस्टिक (ICBM)
✔️
भूमि (Mobile Launcher)
MIRV तकनीक, पूरे चीन को कवर करता है
अग्नि-4
~4,000 किमी
बैलिस्टिक
✔️
भूमि
रणनीतिक गहराई से हमला
अग्नि-3
~3,500 किमी
बैलिस्टिक
✔️
भूमि
भारी वॉरहेड क्षमता
अग्नि-2
~2,000 किमी
बैलिस्टिक
✔️
भूमि
रेलवे प्लेटफॉर्म से तैनात
प्रथ्वी-II
~350 किमी
बैलिस्टिक (SRBM)
✔️
भूमि
कम दूरी का सामरिक उपयोग
K-15 (सागरिका)
~750 किमी
SLBM (Submarine Launched)
✔️
INS अरिहंत (पनडुब्बी)
पहले से तैनात परमाणु SLBM
K-4
~3,500 किमी
SLBM
✔️
INS अरिघात व भविष्य की SSBNs
लंबे रेंज की समुद्री परमाणु मार
निर्भय
~1,000 किमी
क्रूज़ मिसाइल
संभावित ✔️
भूमि / हवाई प्लेटफॉर्म
रडार से बचने वाली लंबी उड़ान
ब्रह्मोस (परमाणु नहीं)
~450–800 किमी
सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल
❌ (अभी नहीं)
जल / भूमि / वायु
भविष्य में परमाणुकरण संभव
क्या भारत अब पाकिस्तान और चीन से एक साथ निपट सकता है?
SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पास 600 परमाणु हथियार हैं, जो भारत से तीन गुना से भी ज्यादा हैं। इसके अलावा, चीन हर साल 100 नए हथियार जोड़ रहा है और उसके पास 350 इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBMs) भी हैं, जो रेगिस्तान और पहाड़ों में तैनात हैं। अगर पाकिस्तान (170 हथियार) और चीन (600 हथियार) को जोड़ा जाए, तो यह भारत की तुलना में चार गुना ज्यादा है।
फिर भी, भारत की रणनीति अब बदल रही है। भारत की अग्नि-6 मिसाइल और परमाणु पनडुब्बियां इसे लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता दे रही हैं। ORF के सीनियर फेलो सुशांत सरीन का कहना है कि भारत की रणनीति अब केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। भारत यह संदेश देना चाहता है कि वह पाकिस्तान और चीन के साथ दो मोर्चों पर एक साथ मुकाबला करने में सक्षम है।
भारत की ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति इसे नैतिक रूप से मजबूत बनाती है, लेकिन जवाबी हमले की क्षमता को और बढ़ाने की जरूरत है। भारत अब अपनी परमाणु त्रिकोणीय रणनीति को मजबूत कर रहा है, जिसमें जमीन, समुद्र, और हवा से हमला करने की क्षमता शामिल है। यह रणनीति भारत को दोनों पड़ोसियों के खिलाफ मजबूत स्थिति में ला सकती है।
भारत की भविष्य की रणनीति
भारत का परमाणु कार्यक्रम अब क्षेत्रीय शक्ति से वैश्विक शक्ति की ओर बढ़ रहा है। अग्नि-6, MIRV तकनीक, और परमाणु पनडुब्बियों के साथ भारत न केवल पाकिस्तान, बल्कि चीन जैसे बड़े देशों को भी जवाब देने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, चीन की सैन्य और परमाणु ताकत अभी भी भारत से काफी आगे है।
भारत को अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ कूटनीतिक रणनीति पर भी ध्यान देना होगा। पाकिस्तान और चीन की बढ़ती साझेदारी भारत के लिए एक चुनौती है, लेकिन भारत की तकनीकी प्रगति और रणनीतिक नीतियां इसे इस चुनौती से निपटने में सक्षम बना रही हैं।
भारत ने परमाणु हथियारों की संख्या में पाकिस्तान को पीछे छोड़कर एक नया इतिहास रचा है। यह बदलाव न केवल भारत की रक्षा रणनीति को मजबूत करता है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर उसकी स्थिति को भी सुदृढ़ करता है। हालांकि, चीन के साथ तुलना में भारत को अभी लंबा रास्ता तय करना है। भारत की ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति और तकनीकी प्रगति इसे एक जिम्मेदार और शक्तिशाली परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है। क्या भारत भविष्य में चीन से भी टक्कर ले पाएगा? यह समय और भारत की रणनीति पर निर्भर करता है।
Ghaziabad murder: गाजियाबाद के मुरादनगर थाने के बाहर बुधवार रात जो हुआ, उसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया। गांव मिल्क रावली निवासी 35 वर्षीय रवि शर्मा की उस वक्त गोली मारकर हत्या कर दी गई जब वह अपने भाई के साथ थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचा था। चार गोलियां लगने से रवि की मौके पर ही हालत गंभीर हो गई और अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उसकी मौत हो गई। Ghaziabad murder
🔴 ब्रेकिंग न्यूज: गाजियाबाद मुरादनगर थाना गेट पर युवक की गोली मारकर हत्या
कार हटाने के विवाद में अजय और मोंटी ने रवि शर्मा को मारी चार गोलियां
रवि शर्मा थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचा था, गेट पर ही ताबड़तोड़ फायरिंग
बताया जा रहा है कि गांव में कार निकालने को लेकर अजय चौधरी और मोंटी से रवि का विवाद हो गया था। विवाद के बाद अजय अपने साथियों के साथ पहले रवि के घर पहुंचा और मारपीट की। रवि ने इस घटना की शिकायत के लिए थाने का रुख किया, लेकिन थाने के गेट पर पहले से मौजूद अजय और मोंटी ने अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस ने इलाके में नाकेबंदी की है और आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
रवि के भाई विकास शर्मा ने बताया कि हमलावरों के बारे में पहले ही पुलिस को जानकारी दे दी गई थी, लेकिन सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतज़ाम नहीं किए गए।
पुलिस का कहना है कि मुख्य आरोपी अजय चौधरी हाल ही में जेल से बाहर आया था और पहले भी एक बलात्कार के मामले में जेल जा चुका है। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज व चश्मदीद गवाहों की मदद से हत्यारों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।
Mainpuri Bulldozer Action: कहते हैं, गरीब का सपना पूरा होने से पहले टूट जाता है। मैनपुरी के अकबरपुर गांव में कुछ ऐसा ही हुआ। ओम शरण कठेरिया, एक दलित किसान, जिन्हें 2003 में एसडीएम ने मकान बनाने के लिए जमीन का पट्टा दिया था। उस वक्त उनकी जेब खाली थी, मकान बनाने का सपना सिर्फ सपना ही रहा। सालों की मेहनत के बाद, जब ओम शरण ने अपने परिवार के लिए पट्टे की जमीन पर छत डालनी शुरू की, तो अचानक बुलडोजर आ गया। एसडीएम घिरोर प्रसून कश्यप, पुलिस और राजस्व टीम के साथ पहुंचे और उनके आधे बने मकान को अवैध बताकर ध्वस्त कर दिया। Mainpuri Bulldozer Action
जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह का कहना है कि ओम शरण की जमीन की पैमाइश नहीं हुई थी। पट्टे में दी गई जमीन का सही चिन्हांकन न होने से वह जिस जगह मकान बना रहे थे, वह गलत निकली। सुनकर मन सवाल उठाता है—जब पट्टा दिया था, तो जमीन की निशानदेही क्यों नहीं की गई? गरीब को घर का हक देकर उसका सपना तोड़ा क्यों? जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर आगे भी चलेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि सरकारी या ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा न करें, वरना कानूनी कार्रवाई होगी। Mainpuri Bulldozer Action
यह सिर्फ ओम शरण की कहानी नहीं, बल्कि उन तमाम गरीबों की है, जिन्हें सिस्टम के चक्कर में उलझा दिया जाता है। मैनपुरी में अतिक्रमण रोकना जरूरी है, लेकिन क्या प्रशासन पहले सही नक्शा और पट्टे की जमीन का ब्योरा सुनिश्चित नहीं कर सकता? ओम शरण जैसे लोग अब क्या करें? उनका हक कौन देगा? यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि गरीबों के लिए न्याय का रास्ता इतना मुश्किल क्यों है? Mainpuri Bulldozer Action
Israel-Iran War LIVE Updates: ईरान और इजरायल के बीच सैन्य संघर्ष अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। वहीं, अमेरिका भी इस संघर्ष में निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सैन्य हमला करने की योजना को मंजूरी दे दी है, लेकिन अंतिम आदेश परमाणु गतिविधियों की अगली रिपोर्ट के बाद देने की बात कही है।
इजरायल ने अराक रिएक्टर इलाके के आसपास की बमबारी- Israel-Iran War
इस बीच इजरायल ने ईरान के अराक रिएक्टर और उसके आसपास के इलाकों में भारी बमबारी की है। इस कार्रवाई में 40 इजरायली फाइटर जेट्स ने हिस्सा लिया और 100 से अधिक मिसाइलें दागी गईं।
अभी अभी इज़रायली वायुसेना ने ईरान की राजधानी #तेहरान पर 50 से भी अधिक बम गिरा कर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है।
साथ ही इसराइली वायुसेना ने ईरान के #अराक स्थित एक अप्रयुक्त परमाणु रिएक्टर 50 से ज्यादा बम बरसाए हैं।#अराक_रिएक्टर की कोर सील संरचना को खासतौर पर निशाना बनाया गया,… pic.twitter.com/tYgYtHgbsh
इजरायली रक्षा बल (IDF) ने जानकारी दी कि अराक रिएक्टर को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वहां प्लूटोनियम उत्पादन के संकेत मिले थे। इस ऑपरेशन के दौरान रिएक्टर को सील करने वाली संरचना भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। इजरायल ने इस इलाके के नागरिकों से पहले ही इलाका खाली करने की अपील की थी।
ईरान का पलटवार – मिसाइल से हमला– Israel-Iran War
अराक पर हमले के जवाब में ईरान ने तेल अवीव, बीर्शेबा, रमतगन और होलोन पर चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें से एक मिसाइल तेल अवीव के एक अस्पताल पर गिरी, जिससे अफरा-तफरी मच गई और 20 से अधिक लोग घायल हुए।
सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने इससे पहले ड्रोन हमले के जरिए भी इजरायल के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। फार्स न्यूज एजेंसी ने पुष्टि की कि ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई की तैयारी में है। Israel-Iran War
‼️ मध्य पूर्व में बड़ा धमाका — युद्ध की आहट तेज़
अभी कुछ ही दिन पहले अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने यह बड़ा खुलासा किया था कि इज़राइल न्यूक्लियर बम बनाने की दहलीज़ पर खड़ा है…..
और आज — सुबह तड़के इज़राइल ने ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित परमाणु, सैन्य ठिकानों और न्यूक्लियर… pic.twitter.com/ZOBZvBBSsy
— صَبَـͣـــꙺـــͣـــᷤــــا (@Saba_speak) June 13, 2025
ट्रंप का ‘लास्ट चांस’ और बंकर बस्टर प्लान– Israel-Iran War
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ बैठक कर ईरान की फोर्डो न्यूक्लियर साइट पर 30,000 पाउंड वजनी बंकर बस्टर बम के इस्तेमाल की संभावना पर चर्चा की है। सूत्रों की मानें तो ट्रंप की योजना फाइनल वारंट देने की कगार पर है, लेकिन अंतिम निर्णय ईरान के परमाणु गतिविधियों की पुष्टि के आधार पर लिया जाएगा।
जानमाल की भारी हानि
अब तक की जानकारी के मुताबिक, ईरान में 450 और इजरायल में 24 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। ईरान के कई शहरों में इमरजेंसी हालात बना दिए गए हैं और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हो चुके हैं।
संभावित बातचीत की उम्मीद
एक तरफ जहां जंग जारी है, वहीं अमेरिकी मीडिया में यह दावा किया जा रहा है कि ईरान ट्रंप के बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार हो सकता है। यह बात तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तैनाती को काफी बढ़ा दिया है।