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Author: By Nation Now Samachar Team

  • Iran-Israel conflict: ट्रंप का जी7 छोड़कर वॉशिंगटन लौटना, ईरान-इजरायल संघर्ष में बड़ा कदम उठाने का संकेत

    Iran-Israel conflict: ट्रंप का जी7 छोड़कर वॉशिंगटन लौटना, ईरान-इजरायल संघर्ष में बड़ा कदम उठाने का संकेत

    Iran-Israel conflict: कनाडा में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन को बीच में ही छोड़कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अचानक वॉशिंगटन लौट गए हैं। उनकी इस अप्रत्याशित वापसी ने वैश्विक मंच पर हलचल मचा दी है। ट्रंप ने कनाडा से रवाना होने से पहले एक बयान में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर निशाना साधा और मध्य पूर्व में चल रहे ईरान-इजरायल संघर्ष को लेकर बड़ा इशारा किया।

    ट्रंप का मैक्रों पर तंज और सीजफायर से इनकार- Iran-Israel conflict

    जी7 समिट के दौरान ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पर निशाना साधते हुए कहा, “पब्लिसिटी चाहने वाले मैक्रों ने गलती से कहा कि मैं सीजफायर के लिए वॉशिंगटन लौट रहा हूं। यह गलत है, मेरा मकसद इससे कहीं बड़ा है।” ट्रंप ने साफ किया कि उनकी वापसी का उद्देश्य इजरायल और ईरान के बीच युद्धविराम कराना नहीं है। उनके इस बयान ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने यह भी कहा कि मैक्रों “हमेशा गलत बोलते हैं,” जिससे दोनों नेताओं के बीच तल्खी साफ झलक रही है। Iran-Israel conflict

    ट्रंप की यह टिप्पणी तब आई जब मैक्रों ने दावा किया था कि ट्रंप इजरायल-ईरान युद्ध में सीजफायर के लिए प्रस्ताव लेकर आए हैं। लेकिन ट्रंप ने इसे खारिज करते हुए संकेत दिया कि उनकी प्राथमिकता कुछ और है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “ईरान को मेरे द्वारा सुझाए गए समझौते को स्वीकार करना चाहिए था। यह मानव जीवन की बर्बादी है। ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे।”

    जी7 में इजरायल को खुला समर्थन- Iran-Israel conflict

    जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल सभी सात देशों—अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन—ने इजरायल के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि इजरायल को अपनी आत्मरक्षा का पूरा हक है। साथ ही, उन्होंने ईरान पर दबाव बनाया कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को रोके। जी7 के बयान में साफ कहा गया कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह वैश्विक मंच से इजरायल को मिला समर्थन ईरान के खिलाफ उसके रुख को और मजबूत कर सकता है। Iran-Israel conflict

    हालांकि, ट्रंप ने जी7 के इस संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, जिससे अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग दिखाई दिया। यह कदम उनके एकतरफा फैसलों और दबाव की रणनीति को दर्शाता है, जो उनकी विदेश नीति का हिस्सा रहा है।

    ईरान-इजरायल तनाव: क्या है मौजूदा स्थिति? – Iran-Israel conflict

    पिछले कुछ दिनों से ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर है। इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों और परमाणु सुविधाओं पर हवाई हमले किए हैं, जिसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है। ट्रंप ने पहले ही ईरान को 60 दिन का अल्टीमेटम दिया था कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाए, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। Iran-Israel conflict

    इजरायल ने अमेरिका से अपने सैन्य अभियानों में सीधे शामिल होने की अपील की है, खासकर उन अंडरग्राउंड परमाणु सुविधाओं को नष्ट करने के लिए, जिन्हें निशाना बनाना मुश्किल है। अमेरिका के पास ऐसे विशेष हथियार हैं, जो इन सुविधाओं को नष्ट कर सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अभी तक अमेरिका ने इन हमलों में प्रत्यक्ष भागीदारी से इनकार किया है, लेकिन क्षेत्र में अपनी सेनाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। Iran-Israel conflict

    अमेरिका की अगली रणनीति क्या होगी?- Iran-Israel conflict

    ट्रंप के बयानों और जी7 समिट से अचानक लौटने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका अब ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है? उनकी टिप्पणियों से साफ है कि वे सीजफायर के पक्ष में नहीं हैं। इसके बजाय, वे ईरान पर “अधिकतम दबाव” की नीति को और सख्त करने के मूड में दिख रहे हैं। ट्रंप ने पहले भी ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने अमेरिकी हितों या ठिकानों पर हमला किया, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

    वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह रणनीति न केवल ईरान को दबाव में लाने की है, बल्कि वैश्विक मंच पर अमेरिका की ताकत को फिर से स्थापित करने की भी कोशिश है। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और इजरायल का खुला समर्थन इस बात का संकेत देता है कि आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

    भारत के लिए क्या मायने? – Iran-Israel conflict

    इस पूरे घटनाक्रम का भारत पर भी असर पड़ सकता है। भारत के ईरान और इजरायल दोनों के साथ मजबूत रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। जहां इजरायल भारत के रक्षा क्षेत्र का अहम साझेदार है, वहीं ईरान भारत को सेंट्रल एशिया के साथ व्यापार के लिए रास्ता प्रदान करता है। ऐसे में भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति सावधानी से तय करनी होगी ताकि वह न तो पश्चिमी देशों को नाराज करे और न ही ईरान के साथ अपने संबंधों को कमजोर करे।

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    सोर्स- AAJ TAK

  • Aligarh Factory Blast: अलीगढ़ में केमिकल फैक्ट्री में जोरदार विस्फोट, एक युवक गंभीर रूप से घायल

    Aligarh Factory Blast: अलीगढ़ में केमिकल फैक्ट्री में जोरदार विस्फोट, एक युवक गंभीर रूप से घायल

    Aligarh Factory Blast: अलीगढ़ के रोरावर थाना क्षेत्र के नादा बाजिदपुर में एक केमिकल फैक्ट्री में अचानक हुए जोरदार विस्फोट ने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी। यह हादसा इतना भयावह था कि विस्फोट की आवाज कई किलोमीटर तक सुनाई दी, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।

    स्थानीय निवासियों के अनुसार, धमाके के तुरंत बाद फैक्ट्री से एक केमिकल ड्रम के टुकड़े हवा में उछलकर आसपास के क्षेत्र में बिखर गए। इनमें से कुछ टुकड़े पास के एक मकान में जा गिरे, जिसके परिणामस्वरूप एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल युवक को तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाने के लिए तत्काल कार्रवाई शुरू की, जबकि पुलिस ने घटनास्थल को सील कर जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, यह विस्फोट केमिकल ड्रम में अत्यधिक दबाव के कारण हुआ हो सकता है। हालांकि, सटीक कारणों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम जांच में जुटी है।

    यह घटना क्षेत्र में फैक्ट्रियों के सुरक्षा मानकों पर सवाल उठा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन ने अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए। प्रशासन ने अब फैक्ट्री के सुरक्षा मानकों की गहन जांच करने का आश्वासन दिया है।

    पुलिस ने फैक्ट्री मालिक और कर्मचारियों से पूछताछ शुरू कर दी है। साथ ही, आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इस घटना ने न केवल स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सख्त करने की मांग को भी तेज कर दिया है।

    आने वाले दिनों में इस जांच के नतीजे सामने आएंगे, जो इस हादसे के पीछे की वजह को स्पष्ट करेंगे। तब तक, प्रशासन और पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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  • ISRAEL IRAN WAR: इजरायली बमबारी से थर्राया तेहरान! राजधानी छोड़ रहे हजारों लोग, सड़कों पर जाम और अफरा-तफरी

    ISRAEL IRAN WAR: इजरायली बमबारी से थर्राया तेहरान! राजधानी छोड़ रहे हजारों लोग, सड़कों पर जाम और अफरा-तफरी

    ईरान की राजधानी तेहरान इस वक्त अपने सबसे डरावने दौर से गुजर रही है। इजरायली मिसाइल हमलों और हवाई बमबारी के बाद पूरे शहर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। आम लोग शहर से पलायन कर रहे हैं और शहर की अधिकतर सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम लगा हुआ है।

    तेहरान में रह रहे नागरिकों के अनुसार, अब हर कोई अपने परिवार को सुरक्षित स्थान पर ले जाना चाहता है। खासकर उत्तर दिशा में स्थित ग्रामीण इलाकों की ओर भारी संख्या में लोग भाग रहे हैं। लेकिन बढ़ती भीड़ के कारण ये रास्ते भी बंद होने की कगार पर हैं।

    CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, लोग घबराए हुए हैं और पेट्रोल पंपों पर कई किलोमीटर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। जर्मन प्रेस एजेंसी डीपीए के रिपोर्टर ने भी कहा कि शहर में बदहवासी का माहौल है और लोग बिना योजना के बस निकल पड़ रहे हैं।

    इजरायली वायु सेना द्वारा किए गए टारगेटेड हमलों में ईरानी वैज्ञानिकों और शीर्ष सैन्य अधिकारियों के आवासों को निशाना बनाया गया। कुछ तस्वीरों में देखा गया कि कैसे सटीक हमलों में आवासीय इमारतें ध्वस्त हो गईं। इससे आम नागरिकों में भय का माहौल और गहरा हो गया है।

    सीएनएन से बातचीत में एक शख्स ने कहा, “मैं घर नहीं छोड़ना चाहता लेकिन अपने बच्चों की जान खतरे में नहीं डाल सकता। मुझे उम्मीद है कि अमेरिका हस्तक्षेप करेगा।”

    तेहरान में हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके हैं कि सरकार को खुद सामने आकर लोगों को भरोसा देना पड़ा है। सरकारी प्रवक्ता फतेमेह मोहजेरानी ने बताया कि मस्जिदों, स्कूलों और मेट्रो स्टेशनों को आपातकालीन शरण स्थलों के रूप में खोला गया है। मेट्रो सेवा अब 24 घंटे खुली रहेगी ताकि लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सकें।

    ईरान की राजधानी में ऐसी स्थिति पहली बार नहीं बनी है, लेकिन इस बार की बमबारी और टारगेटेड हमले शहर की असुरक्षा को उजागर कर रहे हैं। इजरायल और ईरान के बीच यह संघर्ष अब सीधे नागरिकों के जीवन को प्रभावित कर रहा है।

    सरकार और सेना द्वारा किसी बड़े पलटवार की जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह हमला और तेज होता है, तो पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैल सकती है।

    इस तनावपूर्ण स्थिति में तेहरान की सड़कों पर फंसे लोग सरकार से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि यह युद्ध रुके और आम नागरिकों की जान बच सके।

  • JHANSI GANJA SMUGGLING: मछली दानों में छिपा था गांजा! झांसी में 90 लाख की खेप पकड़ी, दो तस्कर गिरफ्तार

    JHANSI GANJA SMUGGLING: मछली दानों में छिपा था गांजा! झांसी में 90 लाख की खेप पकड़ी, दो तस्कर गिरफ्तार

    JHANSI GANJA SMUGGLING: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में मोंठ थाना पुलिस और एसटीएफ प्रयागराज को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने मछली दाने के बीच छिपाकर तस्करी किया जा रहा 90 लाख रुपये मूल्य का गांजा बरामद किया है। इस मामले में दो तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया है, जो गांजे की भारी खेप को डीसीएम ट्रक के जरिए राज्य से बाहर पहुंचाने की फिराक में थे।

    एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने मीडिया को बताया कि पुलिस को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि झांसी-कानपुर हाईवे पर एक डीसीएम ट्रक में भारी मात्रा में गांजा ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही मोंठ थाना पुलिस और एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए ट्रक को रोका और तलाशी ली।

    जांच के दौरान हरियाणा नंबर के डीसीएम ट्रक से 2 कुंतल 30 किलो 400 ग्राम अवैध गांजा बरामद हुआ, जिसे बड़ी चालाकी से मछली के दाने के नीचे छिपाया गया था।

    गिरफ्तार हुए तस्कर

    इस मामले में पुलिस ने राहुल कुमार (36) निवासी बिजनौर और जयप्रकाश पासवान (35) निवासी दरभंगा, बिहार को मौके से गिरफ्तार किया है। पूछताछ में उन्होंने बताया कि यह गांजा छत्तीसगढ़ से लाया गया था, जिसे आगे किसी अन्य राज्य में सप्लाई किया जाना था।

    अंतरराज्यीय गैंग से संबंध

    गिरफ्तार तस्करों ने खुलासा किया कि गांजा तस्करी के इस नेटवर्क में उनके दो और साथी शामिल हैं—यूसुफ अंसारी (बरेली निवासी) और पवन पांडेय (प्रतापगढ़ निवासी)। ये दोनों फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

    कैसे छिपाया गया था गांजा?

    गांजे को इस तरह छिपाया गया था कि उसे देखना और पकड़ना आसान न हो। मछली के चारे के बोरे के बीच गांजा भरा गया था, ताकि ट्रक की तलाशी के दौरान शक न हो। लेकिन पुलिस की सतर्कता ने तस्करों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

    नशे के खिलाफ सख्ती

    झांसी पुलिस की इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ अभियान की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। आए दिन यूपी के विभिन्न जिलों में नशे के सौदागरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, लेकिन जिस तरह यह तस्करी हो रही थी, वह बेहद शातिर तरीका था। एसएसपी ने साफ किया कि मादक पदार्थों की तस्करी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।\

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  • Ali Khamenei Lavizan Bunker: ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई लाविजान बंकर में सुरक्षित, इजराइल के लिए हमला असंभव

    Ali Khamenei Lavizan Bunker: ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई लाविजान बंकर में सुरक्षित, इजराइल के लिए हमला असंभव

    Ali Khamenei Lavizan Bunker: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को तेहरान के सबसे सुरक्षित लाविजान बंकर में शिफ्ट कर दिया गया है। यह कदम क्षेत्रीय तनाव और इजराइल के साथ बढ़ती सैन्य टकराव की आशंका के बीच उठाया गया है। लाविजान बंकर को ईरान का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता है, जहां से खामेनेई देश का नेतृत्व संभाल रहे हैं। इस बंकर की विशेषताएं और रणनीतिक महत्व इसे इजराइल जैसे शक्तिशाली देशों के लिए भी अभेद्य बनाते हैं। आइए, इस बंकर और इसके महत्व को विस्तार से समझते हैं।

    लाविजान बंकर: अभेद्य किला- Ali Khamenei Lavizan Bunker

    लाविजान बंकर तेहरान के उत्तर-पूर्व में, सुप्रीम लीडर के आधिकारिक आवास से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह बंकर इतना सुरक्षित है कि इसे मिसाइल हमलों से भी बचाया जा सकता है। ईरान की सेना इसकी कड़ी निगरानी करती है, और इसे देश की सैन्य रणनीति का केंद्र माना जाता है। इस बंकर का निर्माण इस तरह किया गया है कि यह बाहरी हमलों को झेल सके। पहले भी खामेनेई ने संकट के समय इस बंकर का उपयोग किया है।

    लाविजान क्षेत्र में ही ईरान की जमीनी सेना का मुख्यालय भी मौजूद है। यहीं से युद्ध और सैन्य गतिविधियों की निगरानी होती है। ग्लोबल सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, लाविजान में मिसाइल उत्पादन की सुविधाएं भी हैं, जो इसे रणनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं। अगर इस क्षेत्र पर कोई हमला होता है, तो ईरान की सैन्य शक्ति को गहरा नुकसान हो सकता है।

    न्यूक्लियर साइट का खतरा- Ali Khamenei Lavizan Bunker

    लाविजान में एक अंडरग्राउंड यूरेनियम साइट भी मौजूद है, जिसे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने दुनिया के सबसे सुरक्षित न्यूक्लियर ठिकानों में से एक बताया है। यह साइट लाविजान बंकर के आसपास ही स्थित है। अगर इस क्षेत्र पर हमला होता है, तो न्यूक्लियर रेडिएशन का खतरा पैदा हो सकता है, जो तेहरान और आसपास के लाखों लोगों के लिए घातक साबित हो सकता है।

    https://twitter.com/TheBahubali_IND/status/1934429922715447521

    इजराइल के लिए इस क्षेत्र पर हमला करना इसलिए भी जोखिम भरा है, क्योंकि यह न केवल सैन्य नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर इजराइल की छवि को भी धूमिल कर सकता है। न्यूक्लियर रेडिएशन का खतरा युद्ध से भी बड़ी तबाही ला सकता है, जिससे इजराइल को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ सकता है।

    अली खामेनेई: ईरान की सत्ता का केंद्र- Ali Khamenei Lavizan Bunker

    86 वर्षीय अयातुल्लाह अली खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर हैं और देश की सारी सत्ता उनके हाथों में केंद्रित है। हालांकि ईरान में राष्ट्रपति और कैबिनेट का गठन होता है, लेकिन सभी बड़े फैसले सुप्रीम लीडर ही लेते हैं। खामेनेई 1989 से इस पद पर हैं और इससे पहले वे ईरान के राष्ट्रपति भी रह चुके हैं। उन्हें ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खुमैनी का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता था।

    खामेनेई का नेतृत्व ईरान की सैन्य, धार्मिक और राजनीतिक नीतियों को दिशा देता है। लाविजान बंकर से वे न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि देश की रणनीति को भी निर्देशित कर रहे हैं।

    इजराइल के लिए चुनौती- Ali Khamenei Lavizan Bunker

    लाविजान बंकर की सुरक्षा और न्यूक्लियर साइट की मौजूदगी इजराइल के लिए बड़ी चुनौती है। इस क्षेत्र पर हमला करने का मतलब है लाखों लोगों की जान को खतरे में डालना और वैश्विक स्तर पर निंदा झेलना। इसके अलावा, ईरान की सेना और मिसाइल क्षमता भी इस क्षेत्र को अभेद्य बनाती है।

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    Jaunpur triple murder: जौनपुर तिहरे हत्याकांड का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार, हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद

    Jaunpur triple murder: जौनपुर के जफराबाद थाना क्षेत्र के नेवादा अंडरपास के पास बीते 25 मई को हुए तिहरे हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने दो वांछित अभियुक्तों – प्रिन्स निषाद निवासी केराकत और सौरभ बिन्द निवासी सरपतहां – को मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। Jaunpur triple murder

    गौरतलब है कि इस हत्याकांड में बदमाशों ने पिता लालजी और उनके दो बेटे गुड्डू कुमार एवं यादवीर की लोहे की रॉड और हथौड़े से निर्मम हत्या कर दी थी। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद किए हैं। Jaunpur triple murder

    इस मामले में पहले भी एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या की वजह पुरानी जमीन से जुड़ा विवाद, मुकदमेबाजी और महिलाओं से दुर्व्यवहार को लेकर उत्पन्न नाराजगी थी। गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में हत्या की योजना और क्रियान्वयन की बात स्वीकार कर ली है। Jaunpur triple murder

    सीओ देवेश कुमार ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने दोनों आरोपियों को रेलवे क्रॉसिंग के पास से दबोच लिया। इस बड़ी सफलता के बाद पुलिस अब मामले की आगे की जांच में जुटी है ताकि अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका भी स्पष्ट की जा सके। पुलिस प्रशासन की यह कार्रवाई जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है।

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    Mirzapur Illegal sand mining: जोपा गांव में अवैध बालू खनन पर प्रशासन का शिकंजा, ट्रैक्टर-ट्राली सीज

    Mirzapur Illegal sand mining: मीरजापुर (विंध्याचल) के जोपा गांव में रविवार सुबह अवैध बालू खनन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ट्रैक्टर-ट्राली को सीज कर दिया। यह छापेमारी विंध्याचल थाना क्षेत्र की नदिनी चौकी अंतर्गत की गई, जिसमें एसडीएम सदर गुलाब चंद्र, खान अधिकारी जितेंद्र सिंह और नायब तहसीलदार चंद्रगुप्त सागर के नेतृत्व में पुलिस बल शामिल रहा।

    छापेमारी के दौरान बालू से लदा ट्रैक्टर-ट्राली खेत में खड़ा मिला, जिसे देखकर चालक मौके से फरार हो गया। प्रशासन ने दो जेसीबी मशीनों की मदद से ट्रैक्टर को बाहर निकलवाया और उसे खान अधिकारी के वरिष्ठ सहायक दीपक द्वारा गैपुरा चौकी तक पहुंचाया गया।

    Mirzapur Illegal sand mining

    एसडीएम सदर गुलाब चंद्र ने बताया कि जोपा और कछुआ सेंचुरी गोगांव क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन पर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सीज किए गए ट्रैक्टर को गैपुरा पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही गोगांव क्षेत्र में भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    हालांकि, अब तक गोगांव में कार्रवाई नहीं हो सकी है, जिसका प्रमुख कारण पुलिस का अपर्याप्त सहयोग और कुछ स्थानीय माफियाओं को संरक्षण मिलना माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की सक्रियता को तो दर्शाया है, लेकिन खनन माफियाओं की पकड़ को लेकर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

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  • Bareilly Candle March: अहमदाबाद विमान हादसे पर फरीदपुर में कैंडल मार्च, सैकड़ों लोगों ने दी श्रद्धांजलि

    Bareilly Candle March: अहमदाबाद विमान हादसे पर फरीदपुर में कैंडल मार्च, सैकड़ों लोगों ने दी श्रद्धांजलि

    Bareilly candle march: अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे ने पूरे देश को गहरे शोक में डुबो दिया है। इस त्रासदी में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए बरेली जनपद के फरीदपुर में हिंदू युवा वाहिनी की स्थानीय इकाई ने एक भावुक कैंडल मार्च का आयोजन किया। Bareilly candle march

    यह श्रद्धांजलि मार्च भारत माता मंदिर से प्रारंभ होकर ब्लॉक परिसर स्थित शहीद स्तंभ तक गया। मोमबत्तियों की रौशनी में केवल प्रकाश नहीं था, उसमें उन परिवारों की पीड़ा भी झलक रही थी जिन्होंने इस दुर्घटना में अपने परिजनों को खोया। Bareilly candle march

    कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर मृतकों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की। मौन उस पीड़ा और देशभक्ति का प्रतीक बना, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं था। Bareilly candle march

    Bareilly candle march

    इस आयोजन में फरीदपुर विधानसभा अध्यक्ष गोविंद चौहान, नगर अध्यक्ष अजय गुप्ता, सभासद रंजीत सिंह चौहान, संजीव सिंह, निक्की सिंह, आदित्य प्रताप सिंह समेत अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। दर्जनों युवाओं की भागीदारी ने इस कार्यक्रम को और भी भावुक व प्रेरणादायी बना दिया। Bareilly candle march

    इस श्रद्धांजलि सभा ने यह साबित किया कि देश जब किसी संकट से गुजरता है, तो उसकी असली ताकत जनता की एकता और जागरूकता होती है। कैंडल मार्च केवल एक कार्यक्रम नहीं था, यह एक संदेश था — कि भारत एक परिवार है और जब कोई दुःख आता है, तो हम सब एकजुट होकर खड़े होते हैं।

    जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और युवाओं की इस सहभागिता ने यह भी दर्शाया कि लोकतंत्र की आत्मा संवेदनशीलता और सहभागिता में निहित है। यह आयोजन एक ऐसी लौ बन गया है जो केवल मोमबत्तियों से नहीं, बल्कि आत्मीयता से जलती है।

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  • Ahmedabad Plane Crash: पूर्व सीएम विजय रूपाणी का DNA मैच, राजकोट में होगा अंतिम संस्कार

    Ahmedabad Plane Crash: पूर्व सीएम विजय रूपाणी का DNA मैच, राजकोट में होगा अंतिम संस्कार

    Ahmedabad Plane Crash: 12 जून 2025 को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लंदन के लिए उड़ान भरने वाला एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान (AI171) टेकऑफ के कुछ ही मिनटों बाद मेघनीनगर इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे में 242 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों सहित कुल 275 लोगों की जान चली गई। इनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे। रविवार, 15 जून 2025 को अहमदाबाद सिविल अस्पताल के अधिकारियों ने पुष्टि की कि विजय रूपाणी के शव का DNA मैच हो गया है। अब उनका पार्थिव शरीर परिवार को सौंपा जाएगा, और राजकोट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। Ahmedabad Plane Crash

    विजय रूपाणी: एक समर्पित राजनेता का अंत- Ahmedabad Plane Crash

    विजय रूपाणी, जो 2016 से 2021 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे, इस हादसे के सबसे प्रमुख शिकार थे। 68 वर्षीय रूपाणी लंदन में अपनी बेटी से मिलने जा रहे थे। वह बिजनेस क्लास में सीट 2D पर यात्रा कर रहे थे। उनकी मृत्यु की खबर ने न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ा दी। भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने इसे पार्टी और देश के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

    रूपाणी का राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुआ था। 1976 में आपातकाल के दौरान उन्हें जेल भी हुई थी। राजकोट के मेयर, राज्यसभा सांसद, और गुजरात के परिवहन व जल आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री के रूप में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। 2021 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद भूपेंद्र पटेल ने उनकी जगह ली।

    DNA पहचान और शव सौंपने की प्रक्रिया- Ahmedabad Plane Crash

    हादसे की भयावहता के कारण अधिकांश शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिसके चलते DNA टेस्टिंग के जरिए पहचान की जा रही है। रविवार सुबह तक 248 शवों के DNA सैंपल लिए गए, जिनमें से 31 की पहचान हो चुकी है। इनमें से 20 शव उनके परिजनों को सौंपे जा चुके हैं, और डेथ सर्टिफिकेट भी जारी किए गए हैं।

    अहमदाबाद सिविल अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजनिश पटेल ने बताया, “हमने 31 शवों का DNA मिलान पूरा कर लिया है, और 12 शव परिजनों को सौंपे गए हैं। पूर्व सीएम विजय रूपाणी का DNA भी मैच हो गया है।” शवों को उनके गृहनगर पहुंचाने के लिए 192 एम्बुलेंस और वाहनों को तैनात किया गया है। इसके लिए 230 टीमें बनाई गई हैं, जो परिजनों के साथ समन्वय कर रही हैं।

    विदेशी नागरिकों के परिजनों का अहमदाबाद आगमन- Ahmedabad Plane Crash

    विमान में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली, और 1 कनाडाई नागरिक सवार थे। हादसे में मारे गए 11 विदेशी नागरिकों के परिजन रविवार को अहमदाबाद पहुंच सकते हैं। एयर इंडिया ने विदेशी नागरिकों के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर (1800 5691 444) जारी किया है, ताकि उनके परिजनों को सहायता मिल सके। इसके अलावा, अहमदाबाद सिटी पुलिस ने भी हेल्पलाइन नंबर (079-25620359) उपलब्ध कराया है।

    ताबूतों की व्यवस्था और राहत कार्य- Ahmedabad Plane Crash

    हादसे के बाद शवों को उनके गृहनगर भेजने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। 170 ताबूत बनाने का ऑर्डर दिया गया है, जिनमें से 100 ताबूत वडोदरा से अहमदाबाद लाए गए हैं। बाकी ताबूतों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। राहत कार्यों में 100 फायर वाहन, 46 अर्थमूवर्स, और 591 सदस्यों की मेडिकल टीम तैनात है।

    गुजरात सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए शोक परामर्शदाताओं की नियुक्ति की है, ताकि वे इस मानसिक आघात से उबर सकें। अहमदाबाद नगर निगम ने मौके पर ही डेथ सर्टिफिकेट जारी करने की व्यवस्था की है, ताकि परिजनों को प्रशासनिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

    हादसे का प्रभाव और जांच- Ahmedabad Plane Crash

    इस हादसे में केवल एक यात्री, 40 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक विशवास कुमार रमेश, जीवित बचे। वे सीट 11A पर थे और आपातकालीन निकास द्वार से कूदकर बच गए। उनकी हालत स्थिर है, और वे सिविल अस्पताल में इलाजरत हैं।

    हादसे की जांच के लिए विमानन दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की टीम सक्रिय है। विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद कर लिया गया है, जो दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में मदद करेगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान में तकनीकी खराबी के कारण यह हादसा हुआ, लेकिन पूर्ण जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।

    राजकोट में शोक की लहर- Ahmedabad Plane Crash

    विजय रूपाणी के गृहनगर राजकोट में शोक की लहर है। शनिवार को शहर में आधे दिन का बंद रखा गया था। राजकोट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की अपील पर दुकानें, व्यवसाय, और 600 से अधिक स्कूल दोपहर तक बंद रहे। रूपाणी का अंतिम संस्कार राजकोट में होगा, जहां उनके परिवार और समर्थक उनकी अंतिम विदाई के लिए इकट्ठा होंगे।

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  • Israel Iran War: Fordow पर नजर, Tehran पर वार! जानिए इजरायल-ईरान संघर्ष में अमेरिका की ‘नो एंट्री’ नीति

    Israel Iran War: Fordow पर नजर, Tehran पर वार! जानिए इजरायल-ईरान संघर्ष में अमेरिका की ‘नो एंट्री’ नीति

    Israel Iran War: इजरायल और ईरान के बीच तनाव ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर हलचल मचा दी है। दोनों देशों के बीच मिसाइल हमलों की तीव्रता ने स्थिति को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है। इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल के रिहायशी इलाकों, जैसे तेल अवीव और हाइफा, को तबाह कर दिया है। इस युद्ध ने न केवल मध्य पूर्व को, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी संकट में डाल दिया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संभावित बंद होने की आशंका ने तेल की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है। इस लेख में हम इस युद्ध के विभिन्न पहलुओं, Fordow न्यूक्लियर प्लांट की खासियत, और इसके वैश्विक प्रभावों पर चर्चा करेंगे। Israel Iran War

    (Photo Credit – X)

    चुनिंदा ठिकानों को बना रहे हैं निशाना– Israel Iran War

    इजरायल लगातार ईरान के न्यूक्लियर फैसिलिटी, सैन्य बेस और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को टारगेट कर रहा है। जवाब में ईरान ने इजरायली रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर आम जनता को नुकसान पहुंचाया है। इस युद्ध के केंद्र में ईरान का Fordow न्यूक्लियर प्लांट है, जिसे लेकर इजरायल ने अब अमेरिका से मदद मांगी है। Israel Iran War

    ईरान के मिसाइल हमले में इजराइल के 10 लोग मारे गए, 200 से ज्यादा लोग घायल हैं, 35 लापता हैं. (Photo Credit – X)

    Fordow प्लांट: ईरान की परमाणु ताकत का केंद्र– Israel Iran War

    Fordow न्यूक्लियर प्लांट ईरान के सबसे हाई-सिक्योरिटी यूरेनियम संवर्धन संयंत्रों में से एक है। यह Qom शहर से 32 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है और पहाड़ के अंदर बना हुआ है। यह प्लांट IRGC (इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स) की निगरानी में है। इसमें लगभग 2000 सेंट्रीफ्यूज हैं, जिनमें से करीब 350 उन्नत IR-6 मॉडल के हैं जो 60% शुद्धता तक यूरेनियम को संवर्धित कर सकते हैं। यही कारण है कि इजरायल इस प्लांट को ईरान के परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ मानता है।

    इजरायल ने मांगी अमेरिकी सैन्य सहायता– Israel Iran War

    ईरान के साथ जंग को 48 घंटे गुजर चुके हैं और इस बीच इजरायली सरकार ने अमेरिकी प्रशासन से अपील की है कि वह Fordow प्लांट पर हमले में इजरायल का साथ दे। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि प्लांट की अंडरग्राउंड स्थिति की वजह से उनका देश अकेले इसे नष्ट नहीं कर सकता। Israel Iran War

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    अमेरिकी रुख: सैन्य समर्थन से फिलहाल इंकार– Israel Iran War

    हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका फिलहाल इस युद्ध में सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगा। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने भी बताया है कि अमेरिका की प्राथमिकता फिलहाल मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य और राजनयिक संपत्तियों की सुरक्षा है।

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, “इजरायल को फिलहाल अपने दम पर लड़ाई लड़नी होगी। हम ईरान को चेतावनी देते हैं कि वह हमारे किसी सैनिक या ठिकाने पर हमला न करे।” Israel Iran War

    जंग का विस्तार और वैश्विक खतरे

    अगर अमेरिका इजरायल का साथ देता है, तो इसके दूरगामी और खतरनाक परिणाम हो सकते हैं:

    1. मिडिल ईस्ट में व्यापक युद्ध: ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी देश इजरायल की मदद करेगा, उस पर हमला किया जाएगा। इससे सऊदी अरब, कतर, बहरीन जैसे अन्य देश भी युद्ध में घसीटे जा सकते हैं।
    2. अमेरिकी सैनिकों पर खतरा: मिडिल ईस्ट में 40,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इन पर मिसाइल या प्रॉक्सी हमले की आशंका है।
    3. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी: यह समुद्री मार्ग विश्व के 30% तेल व्यापार का रास्ता है। युद्ध की स्थिति में ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना सकता है, जिससे तेल कीमतें आसमान छू सकती हैं।
    4. परमाणु अप्रसार संधि से बाहर निकल सकता है ईरान: युद्ध बढ़ने की स्थिति में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय समझौतों से बाहर आ सकता है।

    इजरायल-ईरान युद्ध की वजह- Israel Iran War

    इजरायल और ईरान के बीच तनाव नया नहीं है। यह संघर्ष दशकों पुराना है, जो 1982 के लेबनान युद्ध से शुरू हुआ, जब ईरान ने लेबनानी शिया और फिलिस्तीनी समूहों का समर्थन किया था। हाल के वर्षों में, ईरान के परमाणु कार्यक्रम ने इस तनाव को और गहरा दिया है। इजरायल का मानना है कि ईरान का परमाणु हथियार बनाने का इरादा क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है। इसीलिए, इजरायल ने “ऑपरेशन राइजिंग लॉयन” के तहत ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए।

    क्या शांति की कोई गुंजाइश है?

    हालात बेशक गंभीर हैं, लेकिन अमेरिका ने यह संकेत भी दिया है कि वह चाहता है कि ईरान बातचीत की मेज पर लौटे। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम इजरायल को रोकेंगे नहीं, लेकिन हम इस जंग का समाधान कूटनीति से चाहते हैं।”

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    सोर्स- AAJ TAK