नई दिल्ली भारत में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बड़ा राजनीतिक समर्थन देखने को मिल रहा है। सभी राजनीतिक दलों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की इस साहसिक कार्रवाई की सराहना की है।
नई दिल्ली में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, जिसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन किया। इस बैठक में रक्षामंत्री ने सभी दलों के शीर्ष नेताओं को जानकारी दी कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है और भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों पर जोरदार प्रहार किया है। उन्होंने बताया कि मंगलवार रात हुए इन हमलों में लगभग 100 आतंकी मारे गए हैं।
बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और अन्य प्रमुख दलों के शीर्ष नेता मौजूद थे। रक्षामंत्री ने यह भी साफ कर दिया कि अगर पाकिस्तान ने कोई और नापाक हरकत की, तो भारत उसे और भी कड़ा जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।
यह सर्वदलीय समर्थन एक बार फिर दर्शाता है कि देश की सुरक्षा के मुद्दे पर पूरा भारत एकजुट है
मेरठ को युद्ध के दृष्टिकोण से हाई रिस्क जोन माना जाता है। क्योंकि यह देश की तीसरी सबसे बड़ी छावनी है। ऐसे में मेरठ की जनता को आपात स्थिति के लिए तैयार होना पड़ेगा। पूर्व मेजर हिमांशु ने नेशनल नाउ समाचार से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि मॉक ड्रिल और SOP लागू करना जरूरी है ।ताकि आपात स्थिति में जनता को सुरक्षित रखा जा सके।
आपको बता दें पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा है, जिससे युद्ध की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में एतियात के तौर पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है। ताकि जनता को आपात स्थिति के लिए तैयार किया जा सके।
वही पूर्व मेजर हिमांशु की माने तो देश की जनता का एकजुट होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से बड़ा खतरा है और हमें इसके लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि मेरठ की जनता को आपात स्थिति के लिए तैयार रहना होगा और मॉक ड्रिल में भाग लेना होगा।
जहां मेरठ की जनता को आपात स्थिति के लिए तैयार करने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है। इसमें जनता को आपात स्थिति में क्या करना है, इसकी जानकारी दी जाएगी। साथ ही SOP लागू करने से आपात स्थिति में जनता को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
मेरठ: शासन के निर्देशानुसार 7 मई को आयोजित होने वाली जनपद स्तरीय मॉक ड्रिल की तैयारियों के संबंध में आज मेरठ के कलेक्ट्रेट स्थित विकास भवन में जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया गया।
वही इस बैठक में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए और मॉक ड्रिल के सफल संचालन हेतु रूपरेखा तय की गई।
इस पूरे मामले में मेरठ के जिलाधिकारी डॉ विजय कुमार सिंह ने बताया कि मॉक ड्रिल का मुख्य आयोजन कल शाम 4:00 बजे सेंट जोसेफ स्कूल, मेरठ में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त जनपद के विभिन्न विद्यालयों, अस्पतालों, ग्रामीण क्षेत्रों एवं अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर भी मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इस अभ्यास का उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया की तैयारियों को परखना है।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे मॉक ड्रिल को लेकर भ्रमित न हों और सहयोग प्रदान करें। अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया है कि मॉक ड्रिल के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जाएगा।
जिसके बाद सिविल डिफेंस की चीफ वार्डन संदीप गोयल ने बताया कि जिस प्रकार से भारत सरकार का आदेश है कल पूरे देश में मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा l सिविल डिफेंस की कल शाम को टाउन हॉल में ब्लैक आउट कर के मॉक ड्रिल की जाएगी। मेरठ में भी सायरन बजाकर तैयारी की जा रही है।
मेरठ: उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में एक बार फिर भ्रष्टाचार को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई है. मेरठ की रिश्वतखोर महिला दरोगा अमृता यादव को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. वर्ष 2017 में बुढ़ाना गेट पुलिस चौकी प्रभारी रहते हुए 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ी गई. जिसके बाद डीआईजी कलानिधि नैथानी ने अमृता यादव को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए हैं.
दरअसल, साल 2017 में मोदीनगर, गाजियाबाद निवासी समीर ने शिकायत दर्ज कराई थी. समीर ने बताया कि उसकी शादी मेरठ कोतवाली निवासी मजहर से हुई थी, जो विवाह के बाद मायके चली गई और पति समीर पर दहेज उत्पीड़न, बलात्कार सहित कई धाराओं में केस दर्ज कराया. इस केस की जांच महिला दरोगा अमृता यादव को सौंपी गई थी.
20 हजार रुपये में हुई थी डील जांच के दौरान अमृता यादव ने समीर को फोन कर केस में लगी धाराएं कम करने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की. अंत में 20 हजार रुपये में मामला तय हुआ और समीर से यह रकम बुढाना गेट चौकी पर ही लेने को कहा गया. समीर ने इस रिश्वतखोरी की शिकायत एंटी करप्शन विभाग से कर दी.
रंगेहाथ पकड़ी गई महिला दरोगा एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और समीर के हाथों सीरियल नंबर अंकित किए गए 2-2 हजार के 10 नोट दरोगा तक पहुंचवाए. जैसे ही दरोगा ने रिश्वत की रकम ली, टीम ने उसे रंगेहाथों पकड़ लिया. इस गिरफ्तारी के बाद विभागीय जांच में भी अमृता यादव को दोषी पाया गया और उनके खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई की गई.
कोर्ट ने सुनाई सजा सितंबर, 2024 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट ने अमृता यादव को सात साल की सजा सुनाई थी, साथ ही 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था. तब से अमृता यादव बागपत जेल में बंद हैं. अदालत के आदेश और विभागीय रिपोर्ट के आधार पर अब डीआईजी मेरठ रेंज ने उन्हें बर्खास्त कर दिया है.
पहले भी लगे थे गंभीर आरोप गौर करने वाली बात यह है कि अमृता यादव पर इससे पहले भी महिला थाने में तैनाती के दौरान रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे थे. उनके आचरण को लेकर कई शिकायतें अधिकारियों के पास पहुंचीं थीं, लेकिन इस बार वह रंगेहाथों पकड़ी गईं.
कलानिधि नैथानी, डीआईजी, मेरठ
डीआईजी का सख्त संदेश इस पूरे मामले पर मेरठ रेंज के डीआईजी कलानिधि नैथानी ने कहा कि, “अगर कोई भी पुलिसकर्मी अपराध या भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है और अदालत में दोषी सिद्ध होता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. कानून व्यवस्था और पुलिस विभाग की गरिमा बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है.”