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Author: Amar Shukla NNS

  • delhi baadh 2025; दिल्ली बाढ़ 2025: यमुना का रौद्र रूप, खतरे का स्तर बढ़ा

    delhi baadh 2025; दिल्ली बाढ़ 2025: यमुना का रौद्र रूप, खतरे का स्तर बढ़ा

    delhi baadh 2025; दिल्ली इन दिनों बाढ़ के गंभीर खतरे से जूझ रही है। मानसून की तेज बारिश और हरियाणा से छोड़े गए पानी के कारण यमुना नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और राजधानी के निचले इलाकों में पानी घुसने लगा है। प्रशासन ने हालात को देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया है। स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। दिल्ली सरकार और एनडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।

    दिल्ली में बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ा?

    यमुना नदी हर साल मानसून के समय उफान पर आती है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर हो गए हैं।

    • लगातार हो रही तेज बारिश
    • हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया भारी मात्रा में पानी
    • नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुँचना
    • निचले इलाकों की जल निकासी व्यवस्था पर दबाव

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि बारिश का यही सिलसिला जारी रहा, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

    delhi baadh 2025; किन इलाकों पर सबसे ज्यादा असर?

    यमुना का पानी बढ़ने से दिल्ली के कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया है। प्रभावित क्षेत्र इस प्रकार हैं:

    delhi baadh 2025;
    • लाल किला
    • मजनू का टीला
    • कश्मीरी गेट
    • आईटीओ क्षेत्र
    • यमुना बाजार
    • लोहे का पुल और उसके आसपास के इलाके
    • ओखला और कालिंदी कुंज

    इन जगहों पर पानी घुस जाने के कारण स्थानीय लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

    delhi baadh 2025; प्रशासन की तैयारियां और अलर्ट

    दिल्ली सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं।

    प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम:

    1. निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।
    2. राहत शिविर लगाए गए हैं, जहां भोजन और दवाइयों की व्यवस्था की गई है।
    3. एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है।
    4. यमुना के किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।
    5. ट्रैफिक पुलिस ने कई रूट डायवर्ट किए हैं ताकि लोगों को परेशानी न हो।

    दिल्ली वालों की मुश्किलें

    • कई घरों और दुकानों में पानी भर गया है।
    • बिजली और पानी की सप्लाई प्रभावित हुई है।
    • यातायात पर भी गहरा असर पड़ा है।
    • स्कूलों और दफ्तरों में छुट्टियां घोषित की गई हैं।
    • लोग जरूरी सामान लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों की राय

    मौसम विभाग और बाढ़ प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना का जलस्तर अगले 24 घंटे बेहद अहम रहेंगे। यदि बारिश जारी रही तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

    एक अधिकारी के अनुसार:

    “यमुना का जलस्तर खतरनाक निशान को पार कर चुका है। यदि बैराज से और पानी छोड़ा गया तो दिल्ली के और भी इलाके जलमग्न हो सकते हैं।”

    delhi baadh 2025; लोगों से अपील

    प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सरकारी निर्देशों का पालन करें। निचले इलाकों में रहने वाले लोग तुरंत सुरक्षित जगहों पर चले जाएं और बच्चों तथा बुजुर्गों का खास ख्याल रखें।

    delhi baadh 2025; दिल्ली इस समय बाढ़ के गंभीर संकट से गुजर रही है। यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं, लेकिन आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति पर ही हालात निर्भर करेंगे। नागरिकों को सतर्क रहने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

  • New GST slab 2025-आठ साल बाद बड़ा बदलाव,नई GST स्लैब 2025 लागू

    New GST slab 2025-आठ साल बाद बड़ा बदलाव,नई GST स्लैब 2025 लागू

    New GST slab 2025– देश में GST सुधारों के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने 56वें GST काउंसिल की बैठक में अब तक की सबसे बड़ी GST सुधार पैकेज की घोषणा की है। जिसे 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाले इस बदलाव में चार दरों (5%, 12%, 18%, 28%) को सिर्फ दो मुख्य स्लैब—5% और 18%—में समाहित कर दिया गया है, आपको बता दें लग्जरी और ‘सिन’ वस्तुओं पर नई 40% स्लैब लागू की गई है। यह आठ साल बाद पहली बार ऐसा व्यापक पुनर्गठन है, और इसका असर घरेलू बजट से लेकर वैश्विक व्यापार संबंधों तक फैला है।

    GST में क्या-क्या हुए बदलाव और नई दरें और वर्गीकरण

    दो मुख्य स्लैब 5% और 18%

    • दैनिक उपयोग की वस्तुएँ जैसे साबुन, टूथपेस्ट, लोबान, और पैकेज्ड फूड अब 5% पर आएँगी।
    • इलेक्ट्रॉनिक्स (TVs, ACs, वॉशिंग मशीनें), छोटे वाहन और अन्य मानक सामान अब 18% पर टैक्स होंगे।

    नई 40% स्लैब लग्जरी और सिन उत्पाद

    • महंगी कारें, तंबाकू उत्पाद, पैनेल्टी कार जैसे लग्जरी और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुएँ अब 40% टैक्स के दायरे में आ गयी हैं।
    • 2017 में GST शुरू हुआ था, और यह सबसे बड़ा स्लैब सुधार है जिसे पिछले आठ वर्षों में देखा गया है।
    • इस कदम का उद्देश्य कर ढाँचे को सादा बनाएँ, अनुपालन बढ़ाएँ, और मध्यम वर्ग व किसानों को राहत मिले।

    घरेलू लाभ में क्या मिला जनता को

    आर्थिक हलचल में सुधार

    • यह सुधार उपभोक्ता खर्च बढ़ाने और महंगाई को लगभग 1.1% तक कम करने में मदद करेगा।
    • SBI के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांत घोष का कहना है कि GST सुधार से GDP में 60 bps तक इजाफा हो सकता है, जबकि अमेरिकी टैरिफ का गिरावट पर असर नगण्य रहेगा।

    New GST slab 2025; विभिन्न शहरों पर दिखा असर

    • गुजरात के उद्योगों में विशेषकर वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो, पैकेज्ड फूड—सभी में मांग में बढ़ोतरी और लागत में कमी की उम्मीद है।
    • फसल मशीनरी, कृषि उपकरण पर 12% से 5% की कटौती किसानों के लिए राहत लेकर आएगी।
    • Tata Motors ने वाहन कीमतों में ₹1.55 लाख तक की कटौती की घोषणा की है, जिससे लाई-फेस्टिवल-सीजन में बिक्री बढ़ने की आशा है।

    विपक्ष और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

    • कांग्रेस ने कहा कि यह बदलाव “8 साल बहुत देर से” आया है, जबकि सरकार ने इसे चुनाव से जोड़ने के आरोपों से इनकार किया।
    • पंजाब के BJP अध्यक्ष ने इसे किसानों और आम जनता के लिए “उपहार” बताया।

    New GST slab 2025; अमेरिका पर प्रभाव — व्यापार नीति पर GST का दबाव?

    अमेरिकी टैरिफ और घरेलू संरक्षण

    • अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाने से घरेलू उपभोक्ता खपत में रुचि बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा रही है।
    • विशेषज्ञों का मानना है कि यह GST सुधार अमेरिकी टैरिफ के असर को काफी हद तक जूस कर सकता है, जिससे GDP में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।

    आत्मनिर्भरता और आर्थिक पुनरुद्धार

    • इस रणनीति से घरेलू खपत को बढ़ावा मिलता है, जिससे निर्यात निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत अधिक लचीला दिखता है।
    • प्रधानमंत्री मोदी ने इसे “दिवाली बोनस” बताया, जो राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण लाभ है।
    पहलुविवरण
    स्लैब बदलाव5%, 18%, 40%
    ऐन कार्यान्वयन तारीख22 सितंबर 2025 — नवरात्रि की शुरुआत से प्रभावी
    घरेलू प्रभावमहंगाई में कमी, उपभोक्ता खर्च में वृद्धि, कृषि और MSME को राहत
    अमेरिका पर प्रभावटैरिफ के असर को कम करने में घरेलू मांग की भूमिका

    New GST slab 2025; नई GST स्लैब 2025 एक ऐतिहासिक सुधार है — चार दरों से सिर्फ दो मुख्य स्लैब तक बदलाव, लग्जरी वस्तुओं पर 40%, और घरेलू मांग को तब तक बढ़ावा देना जब वैश्विक टैरिफ बाधाएँ बढ़ रही हों। यह कदम न केवल कर संरचना को सरल करता है, बल्कि आत्मनिर्भरता, उपभोक्ता विश्वास, और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देता है। अब समय है—आप अपनी राय साझा कीजिए: यह GST सुधार आपके जीवन या व्यापार को कैसे प्रभावित कर सकता है?

  • Bihar band aaj NDA : बिहार बंद आज — NDA का प्रदर्शन और रविशंकर प्रसाद की प्रतिक्रिया

    Bihar band aaj NDA : बिहार बंद आज — NDA का प्रदर्शन और रविशंकर प्रसाद की प्रतिक्रिया

    Bihar band aaj NDA ; 4 सितंबर 2025 को बिहार में एनडीए (NDA) ने पांच घंटे का बिहार बंद बुलाया। यह विरोध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माता के खिलाफ महागठबंधन के किसी मंच पर कही गई कथित अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ था। इस बंद का नेतृत्व भाजपा महिला मोर्चा और एनडीए की अन्य समर्थक महिलाओं ने किया। इसमें मुख्य भूमिका भाजपा नेता एवं केंद्रीय सांसद रविशंकर प्रसाद ने निभाई, जिन्होंने प्रतिरोध के स्वर में तीखी टिप्पणियाँ कीं। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे—बंद का असर, प्रशासनिक प्रतिबिंब, रविशंकर प्रसाद का बयान, और राजनीतिक पटल पर इसकी गूंज।

    1. बंद का ऐलान और उद्देश्य

    • एनडीए ने 4 सितंबर 2025, सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक का बिहार बंद बुलाया। इसका उद्देश्य था—प्रमोद की मां के खिलाफ अभद्र टिप्पणी पर विरोध जताना।
    • बंद के नेतृत्व में शामिल थे—भाजपा महिला मोर्चा, जदयू महिला मोर्चा, लोजपा (रा.), हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा), राष्ट्रीय लोक मोर्चा की महिलाएं।

    2. बंद के दौरान क्या खुला और बंद रहा

    • आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं और रेलवे जैसी आवश्यक सेवाएं नियमित रहीं; परंतु स्कूल, कार्यालय और परिवहन सेवाओं में व्यापक व्यवधान रहा।

    3. बंद का प्रभाव और प्रदर्शन

    “बिहार बंद आज NDA ;

    • पटना, गया जैसे प्रमुख शहरों में सड़क जाम और प्रदर्शन देखे गए। कई जगहों पर ट्रेन रोकी गई, शॉपिंग और सार्वजनिक गतिविधियाँ ठप रहीं।
    • दानापुर में आगजनी की घटनाएं हुईं; बाजार और चौराहों पर उसका असर रहा।

    4. रविशंकर प्रसाद का तीखा बयान

    Bihar band aaj NDA
    • भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने इस बंद के माध्यम से विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मतदाता सूची पुनरीक्षण मामले पर दबाव बनाने के लिए सड़कों पर उतर रहा है।
    • उनका सवाल था—“जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है, तब विपक्ष क्यों प्रदर्शन कर रहा है? क्या उनका उद्देश्य अवैध मतदाताओं को वोटर लिस्ट में बनाए रखना है?”
    • उन्होंने मतदाता सूची की पारदर्शिता की बात की और कहा कि अधिकांश लोग स्वयं मतदाता सूची में अपना विवरण अपडेट कर चुके हैं।
    • एक अन्य मौके पर उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि क्या वे चाहते हैं “घुसपैठिए” मतदाता सूची में बने रहें—जिससे यह सवाल राजनीति निर्माण का हिस्सा है।

    5. प्रतिपक्ष की प्रतिक्रिया और बयानबाजी

    • तेजस्वी यादव ने इस घटना की निंदा की, कहा कि मां के खिलाफ अपमान अस्वीकार्य है और व्यक्तिगत हमले लोकतांत्रिक परिधि पर हावी नहीं होने चाहिए।
    • हालांकि उनका बयान सीधे इस बंद के संदर्भ में नहीं था, लेकिन भावनात्मक और राजनीतिक प्रतिवाद का हिस्सा बना।

    राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

    बंद का महत्व:

    • लोकतांत्रिक चेतना और सम्मान की राजनीति;
    • मुखर विरोध का प्रदर्शन: महिलाएं प्रमुख भूमिका में;
    • आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के प्रक्षेपवक्र पर असर।

    प्रशासनिक चुनौतियां:

    • स्कूल, कार्यालय और परिवहन बाधित;
    • लेकिन सेवाओं में चुस्त कार्यक्रम को रक्षा मिली।

    राजनीतिक संदेश:

    • रविशंकर प्रसाद का बयान सुप्रीम कोर्ट और चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष के संदेह को रेखांकित करता है;
    • बंद ने विपक्ष के राजनीतिक रणनीतियों पर सवाल खड़े किए।

    निष्कर्ष

    आज का बिहार बंद एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश था—यह मजबूत, सुनियोजित और NDA का विपक्ष विरोधी प्रदर्शन था। रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष पर सुप्रीम कोर्ट में मुद्दा विचाराधीन होने के बावजूद सड़क राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने विरोध को असंवेदनशील और अपमानजनक घटना के खिलाफ मानवीय और संवैधानिक प्रतिक्रिया बताया।

    भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह घटना आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को कैसे प्रभावित करती है—क्या यह NDA को गति देगी, या विपक्ष के लिए प्रतिक्रिया का मंच बनेगी? आपकी राय या प्रतिक्रिया इस विषय पर क्या है? कृपया नीचे टिप्पणी करके साझा करें।

    Read more: Ramswaroop Memorial University में छात्रों पर लाठीचार्ज, प्रशासनिक गाज और राजनीतिक विडंबना

  • Bigg Boss 19 Tanya Mittal ladai; Bigg Boss 19 में Tanya Mittal का ग्लैमर और विवाद

    Bigg Boss 19 Tanya Mittal ladai; Bigg Boss 19 में Tanya Mittal का ग्लैमर और विवाद

    Bigg Boss 19 Tanya Mittal ladai; Bigg Boss 19 की शुरुआत ही जोरदार हुई है, जब Tanya Mittal ने अपनी ग्लैमरस उपस्थिति और आत्म‑विश्वास के साथ घर में प्रवेश किया। उन्होंने ना केवल 800 से भी अधिक साड़ियाँ लेकर आने का दावा किया, बल्कि अपनी ‘बॉस’ कहलाने की चाहत, सुरक्षा व्यवस्था और स्पिरिचुअल पहचान ने घर में और सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा कर दिया। इस लेख में हम उनके सफर, विवादों और दर्शकों की प्रतिक्रियाओं को विस्तार से और सटीक तथ्यों के आधार पर उजागर करें

    Tanya Mittal कौन हैं?

    Bigg Boss 19 Tanya Mittal ladai

    Tanya Mittal, एक स्टाइलिश सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, उद्यमी और स्पिरिचुअल स्टोरीटेलर हैं। उन्होंने Gwalior से शुरुआत करते हुए केवल ₹500 में हैंडबैक और ऐक्सेसरी का ब्रांड खड़ा किया। उन्हें 2018 में “Miss Asia Tourism Universe” का प्रतियोगिता खिताब भी मिला। उनकी इंस्टाग्राम पर 2.5 मिलियन फॉलोअर्स हैं, और वे अपना स्टार्ट‑अप, पेजेंटिंग और सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाती हैं।

    बिग बॉस 19 में प्रवेश और पहले प्रभाव

    उन्होंने बिग बॉस 19 में प्रवेश करते वक्त Salman Khan से सवाल किया—उनकी निजी ज़िंदगी पर। Salman ने मज़ाकिया अंदाज़ में जवाब दिया कि “सच्चा प्यार अभी तक नहीं हुआ” और Tanya ने इसे “अधूरा प्यार” ठहराया, जो दर्शकों के बीच चर्चा का हिस्सा बन गया।

    800+ साड़ियाँ, बॉस कहलाना और सुरक्षा‑दावे

    Tanya ने दावा किया कि उन्होंने 800 से अधिक साड़ियाँ घर के अंदर ली हैं और वे दिन में तीन बार आउटफिट बदलने की योजना बना रही हैं। यह उनका फैशन स्टेटमेंट और पारंपरिक पर आधुनिक टच दोनों ही दर्शाता है।

    साथ ही, उन्होंने कहा कि सभी उन्हें “बॉस” कहें जैसे उनके परिवार में होता है, और उन्होंने सुरक्षा गार्ड्स का ज़िक्र करते हुए कहा कि वे कुंभ मेले में लोगों की जान बचा चुके हैं।

    सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया और ट्रोलिंग

    उनके आपत्तिजनक बयान—“बॉस” कहलाने की चाह, सुरक्षा दर्शाना और साड़ियाँ लेकर आने की लिस्ट—सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और आलोचना का विषय बने। कई लोग उन्हें “घमंडी”, “क्रिंग” और “स्पॉइलब्रैट” कहने लगे।

    झगड़े और टकराव

    Nehal Chudasama के साथ पोहे पर विवाद

    1 सितंबर के एपिसोड में, Nehal ने Tanya से कहा, “आपके मुंह से बदबू आ रही है!”—जो Tanya के लिए काफी आक्रामक था और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    Ashnoor Kaur के साथ उम्र‑शेमिंग

    एक बातचीत के दौरान Tanya ने मजाकिया अंदाज़ में कहा: “Side hato, bacche hain idhar।” जवाब में Ashnoor ने पलटकर कहा: “Bacha koi nahi hai yahan।”

    भावनात्मक खुलासे और दर्शकों की प्रतिक्रिया

    Tanya ने बताया कि उनका एक पूर्व प्रेमी उन्हें छोड़ गया क्योंकि वह उन्हें सुंदर नहीं पाता था। इस घटना ने उन्हें आत्म‑संवर्धन की राह पर प्रेरित किया, जहाँ उन्होंने खुद को रूपांतरित किया और खुद पर काम किया।

    महाकुंभ में पुलिसकर्मियों की जान बचाई?

    उन्होंने दावा किया कि महाकुंभ के दौरान उनके सुरक्षा गार्ड्स ने पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों की जान बचाई है—इसने शो में एक सेंसेशन पैदा कर दी।

    शो में रणनीतिक स्थिति और नामांकन

    इस सप्ताह की नामांकन में Tanya Mittal भी नॉमिनेट की गईं—उनके साथ Gaurav Khanna, Neelam Giri, Natalia Janoszek, Abhishek Bajaj, Zeeshan Quadri और Pranit More भी थे।


    निष्कर्ष

    Tanya Mittal का बिग बॉस 19 में प्रवेश ग्लैमर से भरा और विवाद से घिरा रहा। उनके फैशन चॉइस (800+ साड़ियाँ), आत्म-विश्वास, कथित सुरक्षा गार्ड्स, और घर के भीतर उनके बयान—सभी ने उन्हें एक विवादास्पद लेकिन आकर्षक व्यक्ति बना दिया। उनकी व्यक्तिगत कहानी, जैसे कि पूर्व प्रेमी द्वारा ‘सुंदर नहीं’ कहा जाना और महाकुंभ में बचाव का दावा, उनका चरित्र और परिपक्वता दर्शाती है। उनके टकरावों ने रियलिटी शो को और दिलचस्प बना दिया है।

    Visit tanya instagram: tanya mittal

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  • lekhkon kaa virodh: जम्मू-कश्मीर में 25 किताबों पर बैन, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल

    lekhkon kaa virodh: जम्मू-कश्मीर में 25 किताबों पर बैन, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल

    कश्मीर में शब्दों से डरने लगी है सत्ता?

    lekhkon kaa virodh: जम्मू-कश्मीर सरकार ने हाल ही में 25 किताबों पर प्रतिबंध लगा दिया, इनमें बुकर पुरस्कार विजेता अरुंधति रॉय से लेकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते सुमंत्र बोस की किताबें शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि ये किताबें आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देती हैं, जबकि लेखक और पब्लिशर्स इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला मान रहे हैं। इस फैसले से सिर्फ कश्मीर नहीं, बल्कि पूरे देश में बौद्धिक स्वतंत्रता को लेकर बहस छिड़ गई है।


    सरकार का आदेश और उसका असर

    किन किताबों पर लगा प्रतिबंध?

    • 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर सरकार ने 25 किताबों पर बैन लगाने का आदेश जारी किया।
    • अरुंधति रॉय की ‘आजादी’, सुमंत्र बोस की किताबें, अथर ज़िया की ‘Resisting Disappearance’ और अनुराधा भसीन की ‘A Dismantled State’ प्रमुख रूप से शामिल हैं।
    • कुछ किताबें 18 साल पहले पब्लिश हुई थीं।

    सरकार का पक्ष

    सरकार का कहना है कि इन किताबों में ऐसा कंटेंट है जो:

    • आतंकवाद को बढ़ावा दे सकता है।
    • अलगाववाद की मानसिकता को उकसाता है।
    • जम्मू-कश्मीर की कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।

    पुलिस की कार्रवाई

    • सरकार के आदेश के तुरंत बाद पुलिस ने श्रीनगर समेत कई इलाकों में बुक स्टोर्स पर छापेमारी की।
    • जिन किताबों पर प्रतिबंध है, उनका स्टॉक जब्त किया गया।
    • दुकानदारों ने डर के कारण किताबें हटा दी हैं और कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।

    lekhkon kaa virodh: “ये सिर्फ बैन नहीं, दहशत फैलाने की साजिश है”

    lekhkon kaa virodh जम्मू-कश्मीर सरकार ने हाल ही में 25 किताबों पर प्रतिबंध

    सुमंत्र बोस बोले: “ब्रिटिशों जैसा कर रही है सरकार”

    नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते सुमंत्र बोस ने तीखी प्रतिक्रिया दी:”90 साल पहले अंग्रेजों ने नेताजी की किताब बैन की थी। अब मेरी किताब पर बैन लगाया गया है। क्या हम लोकतंत्र में सरकार की आलोचना भी नहीं कर सकते?”उनकी किताबों को लेकर सरकार की कार्रवाई उन्होंने अभिव्यक्ति की आज़ादी का दमन बताया।


    अथर ज़िया: “कश्मीर की हकीकत से डर रही सरकार”

    अथर ज़िया की किताब ‘Resisting Disappearance’ भी प्रतिबंधित पुस्तकों में है। ये किताब कश्मीर में गायब हुए लोगों की कहानियों और महिलाओं के संघर्ष पर आधारित है।”ये कोई पहली बार नहीं है। कश्मीर में पहले भी किताबों, लिटरेचर और यहां तक कि सिलेबस से किताबें हटाई गई हैं।”उनका मानना है कि ये बैन सिर्फ कंटेंट पर नहीं, बल्कि कश्मीर की सच्चाई को छिपाने की कोशिश है।

    जो अथर ज़िया ने उठाए lekhkon kaa virodh पर:

    • किताब में जिन महिलाओं की कहानियां हैं, वो सच्ची घटनाओं पर आधारित हैं।
    • 2014 के बाद से कश्मीर में दबाव और सेंसरशिप बढ़ी है।
    • किताबों के बहाने लोगों में डर फैलाया जा रहा है कि अगर आपके पास कोई बैन की गई किताब मिले, तो पुलिस रेड कर सकती है।

    अनुराधा भसीन: “सरकार हर आलोचना का सबूत मिटाना चाहती है”

    अनुराधा भसीन की किताब ‘A Dismantled State’ आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर में बदलावों पर आधारित है।”2019 से 2021 तक मैं कश्मीर में रही। मेरी किताब पूरी तरह तथ्यों और फील्ड रिसर्च पर आधारित है। इसमें कोई आतंकवाद को समर्थन नहीं है।”उनका कहना है कि सरकार को बताना चाहिए कि उनकी किताब आतंकवाद से कैसे जुड़ी है।

    • पब्लिशर्स किताब छापने से पहले कंटेंट की कई स्तरों पर जांच करते हैं।
    • अगर आतंकवाद खत्म हो गया है, तो किताबों से खतरा कैसे?
    • सरकार ने पहले मीडिया की आज़ादी खत्म की, अब किताबों की बारी है।
    • कश्मीर में लंबे समय से सेंसरशिप है, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ गया है।

    क्या बैन का उल्टा असर होगा?

    लेखकों का मानना है कि इस तरह के बैन किताबों को और लोकप्रिय बना सकते हैं। क्योंकि अब अधिकतर कंटेंट डिजिटल माध्यम से भी उपलब्ध है।”लोग अब इन किताबों को ऑनलाइन खोजेंगे और पढ़ेंगे। बैन लगाकर आप विचारों को नहीं रोक सकते।”


    निष्कर्ष: सवाल सिर्फ किताबों का नहीं, आज़ादी का है

    जम्मू-कश्मीर में किताबों पर लगा बैन केवल साहित्य का मुद्दा नहीं है, ये एक बड़े लोकतांत्रिक सवाल की ओर इशारा करता है—क्या सरकार आलोचना सहने को तैयार नहीं? क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अब सिर्फ एक सैद्धांतिक अधिकार बनकर रह गई है? आपकी राय क्या है? क्या सरकार का फैसला सही है या ये अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला है? अपनी राय नीचे कमेंट करें या इसे शेयर करें।

    SOURCES : List of books banned in India

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    कानपुर में अखिलेश दुबे को जेल भिजवाने वाले रवि सतीजा का एक ऑडियो सामने आया है। इसमें अखिलेश दुबे भाजपा नेता को धमकी देते हुए जेल भिजवाने की बात कह रहा है। इतना ही नहीं, रेप केस का भी जिक्र कर रहा है।

    akhilesh-dubey-threat अखिलेश दुबे कहता है-

    – लड़की का कोर्ट में बयान हो चुका है, अब कुछ हो नहीं सकता। लेकिन, पहचान में चूक की बात कहकर तुम्हें बचा रहे हैं। इसके साथ ही किसी को जेल भिजवाकर काम खत्म करने की बात भी दुबे कर रहा है।

    रवि सतीजा से अखिलेश किसी ध्रुव गुप्ता के घर जाने और उसे ढूंढ़कर मामला खत्म कराने को बोल रहा है। रवि सतीजा और अखिलेश दुबे के बीच क्या बात हुई? किस मामले को लेकर दोनों की बात हो रही है?

    दुबे के खिलाफ ऑडियो बना मजबूत सबूत
    रवि सतीजा ने बताया- यह धमकी भरी कॉल अखिलेश दुबे ने 11 फरवरी, 2025 की दोपहर 3 बजकर 37 मिनट पर की थी। दुबे मेरे खिलाफ झूठा रेप केस दर्ज कराने के बाद मामला सेटल करने का दबाव बना रहा था।

    इस वजह से 1 मिनट 47 सेकेंड की इस कॉल रिकॉर्डिंग में मैंने उसकी हर बात पर हां में हां मिलाई। सतीजा ने बताया कि उनके खिलाफ रेप का झूठा मुकदमा दर्ज होने के बाद सामाजिक छवि धूमिल हो रही थी। इसके साथ ही जेल जाने का डर बना था। इस वजह से दुबे की हर बात में हां में हां मिलानी पड़ रही थी। इस ऑडियो को एसआईटी को भी बतौर सबूत सौंप दिया है।

    अब जानिए अखिलेश दुबे के बारे में

    एक ऐसा वकील, जिसने कभी कोर्ट में नहीं की बहस
    अखिलेश दुबे एक ऐसा वकील है, जिसने कभी कोर्ट में खड़े होकर किसी केस में बहस नहीं की। उसके दरबार में खुद की कोर्ट लगती थी और दुबे ही फैसला सुनाता था। वह सिर्फ अपने दफ्तर में बैठकर पुलिस अफसरों के लिए उनकी जांचों की लिखा-पढ़ी करता था। बड़े-बड़े केस की लिखा-पढ़ी दुबे के दफ्तर में होती थी।

    इसी का फायदा उठाकर वह लोगों के नाम निकालने और जोड़ने का काम करता था। इसी डर की वजह से बीते 3 दशक से उसकी कानपुर में बादशाहत कायम थी। कोई उससे मोर्चा लेने की स्थिति में नहीं था।

    काले कारनामों को छिपाने के लिए शुरू किया था न्यूज चैनल
    अखिलेश दुबे ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए सबसे पहले एक न्यूज चैनल शुरू किया था। इसके बाद वकीलों का सिंडीकेट बनाया। फिर इसमें कई पुलिस अफसरों को शामिल किया। कानपुर में स्कूल, गेस्ट हाउस, शॉपिंग मॉल और जमीनों के कारोबार में बड़े-बड़े बिल्डर उसके साथ जुड़ते चले गए।

    दुबे का सिंडीकेट इतना मजबूत था कि उसकी बिल्डिंग पर केडीए से लेकर कोई भी विभाग आपत्ति नहीं करता था। कमिश्नर का दफ्तर हो या डीएम ऑफिस, केडीए, नगर निगम और पुलिस महकमे से लेकर हर विभाग में उसका मजबूत सिंडीकेट फैला था। उसके एक आदेश पर बड़े से बड़ा काम हो जाता था।

    मेरठ से भागकर आया था कानपुर
    अखिलेश दुबे मूलरूप से कन्नौज के गुरसहायगंज का रहने वाला है। उसके पिता सेंट्रल एक्साइज में कॉन्स्टेबल थे। मेरठ में तैनात थे। वहां रहने के दौरान अखिलेश दुबे की सुनील भाटी गैंग से भिड़ंत हो गई। इसके बाद वह भागकर कानपुर आ गया।

    बात 1985 की है। अखिलेश दुबे किदवई नगर में किराए का कमरा लेकर रहने लगा। दीप सिनेमा के बाहर साइकिल स्टैंड चलाता था। इस दौरान मादक पदार्थ तस्कर मिश्री जायसवाल की पुड़िया (मादक पदार्थ) बेचने लगा। धीरे-धीरे आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो गया।