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Category: बिज़नेस डेस्क

  • Tata Sierra SUV  की कीमत, डाउन पेमेंट, EMI और माइलेज | जानें पूरी डिटेल

    Tata Sierra SUV की कीमत, डाउन पेमेंट, EMI और माइलेज | जानें पूरी डिटेल

    Tata Sierra SUV : टाटा मोटर्स ने भारतीय बाजार में अपनी मोस्ट-अवेटेड SUV Tata Sierra SUV को लॉन्च कर दिया है। दमदार लुक, आधुनिक फीचर्स और भरोसेमंद ब्रांड वैल्यू के साथ यह SUV ग्राहकों के बीच तेजी से चर्चा में है। अगर आप भी Tata Sierra SUV खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इसके कीमत, डाउन पेमेंट, EMI और माइलेज की जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है।

    Tata Sierra की कीमत और ऑन-रोड प्राइस

    Tata Sierra SUV के बेस मॉडल की एक्स-शोरूम कीमत 11.49 लाख रुपये से शुरू होती है, जबकि इसके टॉप वेरिएंट की कीमत 18.49 लाख रुपये तक जाती है। दिल्ली में Tata Sierra Smart Plus 1.5 पेट्रोल बेस मॉडल की ऑन-रोड कीमत करीब 13.44 लाख रुपये है। इसमें RTO चार्ज, इंश्योरेंस और अन्य खर्च शामिल हैं। अलग-अलग शहरों में टैक्स स्ट्रक्चर के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है।

    Tata Sierra कितनी डाउन पेमेंट में मिलेगी

    अगर आप Tata Sierra SUV को फाइनेंस पर खरीदना चाहते हैं, तो आपको कम से कम 2 लाख रुपये की डाउन पेमेंट करनी होगी। इसके बाद आपका लोन अमाउंट लगभग 11.44 लाख रुपये का रहेगा। यह डाउन पेमेंट बैंक, डीलर और आपकी क्रेडिट प्रोफाइल के अनुसार कम या ज्यादा भी हो सकती है।

    Tata Sierra की EMI कितनी बनेगी

    यदि आपको 9 फीसदी की ब्याज दर पर 5 साल (60 महीने) का कार लोन मिलता है, तो Tata Sierra SUV की अनुमानित EMI करीब 23,751 रुपये प्रति माह होगी। बैंक की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और लोन टेन्योर के हिसाब से EMI में थोड़ा बदलाव संभव है।

    Tata Sierra का इंजन और माइलेज

    Tata Sierra SUV में 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो 105 bhp की पावर और 145 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। इसमें 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स मिलता है। यह इंजन शहर और हाईवे दोनों के लिए संतुलित ड्राइविंग अनुभव देता है। माइलेज की बात करें तो Tata Sierra SUV लगभग 18.2 kmpl तक का माइलेज देती है, जो इस सेगमेंट में अच्छा माना जाता है। इसके अलावा टर्बो-पेट्रोल और टर्बो-डीजल इंजन का विकल्प भी उपलब्ध है।

    Tata Sierra के राइवल्स

    भारतीय बाजार में Tata Sierra SUV का मुकाबला Hyundai Creta, Kia Seltos और Renault Duster जैसी लोकप्रिय SUVs से है। कीमत और फीचर्स के लिहाज से यह गाड़ी इन सभी को कड़ी टक्कर देती है।

  • IndianRailways Update: रेल यात्रा हुई महंगी, 215 किमी से ज्यादा दूरी पर प्रति किमी 2 पैसे किराया बढ़ा

    IndianRailways Update: रेल यात्रा हुई महंगी, 215 किमी से ज्यादा दूरी पर प्रति किमी 2 पैसे किराया बढ़ा

    IndianRailways Update: नई दिल्ली।रेल से सफर करने वाले यात्रियों के लिए आज से यात्रा महंगी हो गई है। भारतीय रेलवे ने 26 दिसंबर से ट्रेन टिकट के किराए में बढ़ोतरी लागू कर दी है, जिसके तहत 215 किलोमीटर से अधिक दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को प्रति किलोमीटर 2 पैसे अतिरिक्त किराया देना होगा।

    नए नियम के अनुसार, यदि कोई यात्री 215 किलोमीटर से ज्यादा दूरी का सफर करता है, तो उसे बढ़े हुए किराए पर ही टिकट बुक कराना होगा। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई यात्री 1000 किलोमीटर की यात्रा करता है, तो उसे करीब 20 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। रेलवे के इस फैसले का असर लंबी दूरी के यात्रियों पर अधिक पड़ेगा।

    हालांकि रेलवे ने यात्रियों को एक बड़ी राहत भी दी है। 26 दिसंबर से पहले बुक किए गए टिकटों पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। ऐसे यात्रियों के टिकट पर संशोधित किराया नहीं दिखेगा और उन्हें पुरानी दरों पर ही यात्रा करने की अनुमति होगी।रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि आज या इसके बाद ट्रेन या स्टेशन पर TTE के माध्यम से टिकट बनवाने पर बढ़ा हुआ किराया लागू होगा। यानी ऑन-स्पॉट टिकट या यात्रा के दौरान टिकट लेने वाले यात्रियों को नई दरों के अनुसार भुगतान करना होगा।

    वहीं, रेलवे ने यह भी साफ किया है कि 215 किलोमीटर से कम दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके अलावा, मंथली सीजन टिकट (पास) और डेली पास होल्डर्स को भी इस बढ़ोतरी से राहत दी गई है। उनके किराए में किसी तरह की वृद्धि नहीं की गई है।

    रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस किराया वृद्धि से रेलवे को सालाना लगभग 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होने का अनुमान है। रेलवे ने इस फैसले की घोषणा 21 दिसंबर को की थी, जिसे अब लागू कर दिया गया है।

    रेलवे का कहना है कि यह कदम परिचालन लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के मद्देनज़र उठाया गया है। हालांकि, बढ़ती महंगाई के बीच किराया बढ़ने से आम यात्रियों की जेब पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

  • चांदी के भाव में जबरदस्त उछाल, 2 लाख के पार पहुंची कीमत, सोना भी महंगा

    चांदी के भाव में जबरदस्त उछाल, 2 लाख के पार पहुंची कीमत, सोना भी महंगा

    सर्राफा बाजार में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। चांदी के भाव लगातार उछाल पर बने हुए हैं और मंगलवार 22 दिसंबर को चांदी की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर बनी हुई है। चांदी की इस रिकॉर्ड तेजी ने निवेशकों और कारोबारियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

    बाजार जानकारों के मुताबिक औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और डॉलर में उतार-चढ़ाव की वजह से कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। खासतौर पर चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और अन्य उद्योगों में बढ़ने से इसकी मांग मजबूत बनी हुई है, जिसका सीधा असर दामों पर पड़ रहा है।

    वहीं सोने के दामों में भी आज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने की मांग बढ़ने से इसकी कीमतें ऊपर की ओर गई हैं। वैश्विक बाजार में कमजोर डॉलर और ब्याज दरों को लेकर असमंजस की स्थिति भी सोने की कीमतों को सहारा दे रही है।

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    सर्राफा बाजार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि शादी-विवाह के सीजन और आने वाले त्योहारों को देखते हुए घरेलू बाजार में भी खरीदारी बढ़ी है। इसका असर सोने और चांदी दोनों की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। निवेशक भी महंगाई और बाजार की अस्थिरता से बचाव के लिए कीमती धातुओं में निवेश को सुरक्षित मान रहे हैं।

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    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर आर्थिक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले दिनों में चांदी के भाव और सोने की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा बना रहता है, इसलिए निवेश से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी माना जा रहा है।कुल मिलाकर, मौजूदा समय में सर्राफा बाजार में तेजी का माहौल है और इसका सीधा फायदा उन निवेशकों को मिल रहा है, जिन्होंने पहले से ही सोने-चांदी में निवेश किया हुआ है।

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  • Rupee Future: SBI रिसर्च ने किया बड़ा दावा, 6 महीने में आ सकती तेजी

    Rupee Future: SBI रिसर्च ने किया बड़ा दावा, 6 महीने में आ सकती तेजी

    Rupee Future: नई दिल्ली: भारतीय रुपये (INR) की लगातार गिरावट ने निवेशकों और आम जनता के बीच चिंता बढ़ा दी है। इस बीच SBI रिसर्च ने एक नई रिपोर्ट में भविष्य को लेकर अहम अनुमान पेश किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपया फिलहाल डीवैल्यूएशन के तीसरे चरण से गुजर रहा है, लेकिन अगले 6 महीनों में इसमें तेजी देखने को मिल सकती है।

    डॉलर की मजबूती और रुपया कमजोर

    रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी डॉलर (USD) की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आयातित दबाव के कारण रुपये में गिरावट आई है। SBI रिसर्च ने बताया कि वैश्विक तेल की कीमतें और अन्य कमोडिटी दरें भी रुपये पर दबाव डाल रही हैं। हालांकि, अगले छह महीनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों में सुधार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की नीतियों के चलते रुपये में स्थिरता और सुधार देखने को मिल सकता है।

    डीवैल्यूएशन के तीसरे चरण का असर

    SBI रिसर्च के मुताबिक, रुपये का तीसरा चरण डीवैल्यूएशन वह समय है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले INR की कमजोरी बढ़ती है, लेकिन इसमें अगले 6 महीनों में निवेशकों को वापसी की संभावना बनी रहती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय धैर्य और सही रणनीति अपनाना निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है।

    निवेशकों के लिए संदेश

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय फॉरेक्स और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हड़बड़ी न करें, बल्कि बाजार के संकेतकों का अध्ययन करें। SBI रिसर्च ने सुझाव दिया है कि रुपये की गिरावट अस्थायी हो सकती है और नियंत्रित निवेश और सुनियोजित बचत से भविष्य में लाभ कमाया जा सकता है। SBI रिसर्च की रिपोर्ट में साफ किया गया है कि रुपये की गिरावट फिलहाल चिंता का विषय है, लेकिन अगले छह महीनों में भले ही डॉलर मजबूत रहे, INR में सुधार की उम्मीद है। निवेशकों और व्यापारियों को इसे ध्यान में रखते हुए रणनीति बनानी चाहिए।

  • चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, MCX पर भाव फिसलकर ₹1.92 लाख प्रति किलो

    चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, MCX पर भाव फिसलकर ₹1.92 लाख प्रति किलो

    बिज़नेस डेस्क।कीमती धातुओं के बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। हाल ही में पहली बार दो लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंचने के बाद अब चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मार्च 2026 एक्सपायरी वाली चांदी ₹1,92,784 प्रति किलो पर कारोबार करती नजर आई। इसी के साथ MCX पर सोना और चांदी दोनों की कीमतों में दबाव देखने को मिला है।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे एक नहीं बल्कि कई वैश्विक और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार से आया है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती के संकेत मिले हैं, जिससे सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बनता है। आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर निवेशक कमोडिटी से दूरी बनाते हैं, क्योंकि यह अन्य मुद्राओं के मुकाबले महंगी हो जाती है।

    इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हल्की बढ़त ने भी सोने और चांदी की चमक को फीका किया है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशक सुरक्षित और निश्चित रिटर्न वाले विकल्पों की ओर शिफ्ट होते हैं, जिससे कीमती धातुओं में बिकवाली बढ़ जाती है।एक अन्य अहम वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर अनिश्चितता है। अभी तक यह साफ नहीं है कि फेड आगे ब्याज दरों में कटौती करेगा या सख्त रुख बनाए रखेगा। इस अनिश्चितता का सीधा असर कमोडिटी बाजार पर पड़ा है और निवेशक सतर्क रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।

    वहीं, चांदी के ऊपरी स्तरों पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) भी की है। जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती हैं, तो बड़े निवेशक मुनाफा निकालने लगते हैं, जिससे अचानक गिरावट देखने को मिलती है। यही स्थिति इस बार चांदी के साथ भी देखने को मिली।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में चांदी और सोने की कीमतें वैश्विक संकेतों, डॉलर की चाल और फेड की नीतियों पर निर्भर रहेंगी। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का मौका भी साबित हो सकती है, लेकिन शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।