भागलपुर (बिहार) –बिहार के भागलपुर जिले से एक हैरान कर देने वाली प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है। यहां एक 18 वर्षीय युवक ने 50 वर्षीय महिला से भागकर शादी कर ली है। हैरानी की बात यह है कि महिला के चार बच्चे और नाती-नातिन भी हैं।
कैसे शुरू हुई यह लव स्टोरी? Real Love Story Bihar
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवक और महिला के बीच पहले दोस्ती हुई, फिर धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई। दोनों के बीच उम्र का लंबा फासला होने के बावजूद उनका रिश्ता मजबूत होता चला गया। परिवार वालों के विरोध और सामाजिक तानों की परवाह किए बिना, दोनों ने एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का फैसला कर लिया।
परिवार को चकमा देकर भागे और कर ली शादी Real Love Story Bihar
परिवार वालों को इस रिश्ते पर आपत्ति थी, लेकिन दोनों ने घर से भागकर शादी कर ली। इस मामले की जानकारी मिलते ही गांव में हलचल मच गई। युवक के परिजन ने इसे गुमराह करने का मामला बताया है, जबकि महिला का कहना है कि यह दोनों की आपसी सहमति से हुआ प्रेम विवाह है।
सोशल मीडिया पर मचा बवाल Real Love Story Bihar
इस लव स्टोरी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। कोई इसे “सच्चा प्यार” बता रहा है, तो किसी ने इसे “पागलपन” कहा है। तमाम सोशल मीडिया यूजर्स की इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया है।
सामाजिक दृष्टिकोण और सवाल Real Love Story Bihar
इस प्रेम कहानी ने समाज में उम्र और रिश्तों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या उम्र वाकई सिर्फ एक नंबर है? क्या समाज अब ऐसे रिश्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार है?
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों आसने-सामने आ गए है बिहार विधानसभा का मानसून सत्र आज उस समय गर्मा गया जब एक बहस के दौरान मंत्री विजय कुमार चौधरी के बयान में आए ‘बाप’ शब्द को लेकर विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया। विपक्ष का आरोप है कि मंत्री ने सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया।
क्या कहा मंत्री ने? बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
विजय कुमार चौधरी ने अपने वक्तव्य के दौरान एक उदाहरण पेश करते हुए “बाप को भी समझाना पड़ता है” जैसी टिप्पणी की। इस पर राजद और कांग्रेस के विधायकों ने कड़ी आपत्ति जताई और वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी।
विपक्ष का आरोप बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
विपक्ष का कहना है कि यह भाषा सदन की मर्यादा के खिलाफ है और मंत्री को तुरंत माफी मांगनी चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस तरह के शब्दों से न सिर्फ सदन की गरिमा गिरती है, बल्कि जनता में गलत संदेश जाता है।
सत्ता पक्ष की सफाई बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
सत्तारूढ़ जनता दल (यू) और भाजपा के विधायकों ने मंत्री का समर्थन करते हुए कहा कि मंत्री ने किसी को अपमानित करने की मंशा से नहीं, बल्कि एक सामान्य उदाहरण देते हुए यह शब्द इस्तेमाल किया। बयान को जानबूझकर राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।
स्पीकर की टिप्पणी का इंतजार बिहार विधानसभा में ‘बाप’ शब्द पर बड़ा बवाल
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि पूरे प्रकरण की कार्यवाही की समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता होने पर उचित टिप्पणी दी जाएगी। फिलहाल सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित की गई।
Paras Hospital Murder: बिहार (Bihar) में अभी कुछ ही समय में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और उससे पहले हर कुछ दिनों में वहां आपराधिक घटनाएं घट रही इसी बीच पटना में हैरान कर देने वाली एक और घटना घट गई है। आज ही पटना के पारस अस्पताल में एक कैदी की हत्या कर दी गई। इसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें नजर आता है कि कैसे शूटरों ने उस कैदी की हत्या की।
पारस अस्पताल (Paras Hospital Murder) में लगे CCTV कैमरे में यह पूरी घटना कैद हो गई जिसमें नजर आता है कि कैसे एक साथ 5-5 शूटर उस अस्पताल के कमरा नबंर 209 के अंदर पहुंचते हैं। उस वीडियो दिखता है कि सभी के पास एक-एक पिसतल थी जिसे वो कमरे में घुसने से पहले बाहर निकालते हैं और बारी-बारी करके वो सभी कमरे के अंदर घुसते हैं। कमरे में घुसते ही वो सभी फायरिंग करने लगते हैं और उस कैदी की हत्या कर देते हैं। उसकी हत्या करने के तुरंत बाद सभी शूटर से फरार हो जाते हैं। यह पूरी घटना उस कैमरे में कैद हो गई।
आपको बता दें कि चंदन मिश्रा नाम का एक आरोपी इलाज के लिए पारस अस्पताल (Paras Hospital ) में लाया गया था। चंदन मिश्रा मूल रूप से बक्सर का रहने वाला है और वो वहां के केसरी हत्याकांड में नामजद आरोपी था। वो अभी बेउर जेल में बंद था और इलाज के लिए पैरोल पर उसे पारस अस्पताल लाया गया था, जहां पर 5 शूटरों ने उसकी हत्या कर दी। इसके तुरंत बाद वो सभी शूटर वहां से भाग गए। इसके घटना बाद पुलिस मामले की जांच में लगी हुई है।
Bihar Assembly Election 2025: बिहार की सियासत में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एक बड़ा ट्विस्ट देखने को मिल रहा है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। इस पेशकश ने बिहार के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर और तेजस्वी यादव से संपर्क साधकर इस गठबंधन की संभावनाओं को तलाशने की कोशिश की है। हालांकि, अभी तक RJD की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। इस बीच, सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह ओवैसी का सियासी मास्टरस्ट्रोक है या फिर केवल एक रणनीतिक दांव?
AIMIM का सियासी दांव: महागठबंधन में शामिल होने की पेशकश- Bihar Assembly Election 2025
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। AIMIM ने इस बार एक चौंकाने वाला कदम उठाया है और खुद को INDIA ब्लॉक का हिस्सा बनाने की पेशकश की है। इस कदम ने महागठबंधन के मौजूदा सहयोगी दलों में खलबली मचा दी है। महागठबंधन में पहले से ही छह दल शामिल हैं, जिनमें RJD, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिबरेशन), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय राष्ट्रीय लीग, और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शामिल हैं। इसके अलावा, मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) भी गठबंधन का हिस्सा बन चुकी है।
अब AIMIM की इस पेशकश और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की 12-13 सीटों की मांग ने सीट बंटवारे की चुनौतियों को और जटिल कर दिया है। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं, और गठबंधन के सहयोगी दलों की डिमांड पहले ही 196 सीटों तक पहुंच चुकी है। कांग्रेस 70, VIP 60, माले 42, और CPI 24 सीटों की मांग कर रही है, जबकि RJD खुद 138 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। ऐसे में AIMIM को शामिल करना गठबंधन के लिए आसान नहीं होगा।
ओवैसी का पत्र: सेक्युलर वोटों को एकजुट करने की अपील- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने 2 जुलाई को लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई। पत्र में उन्होंने 2020 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी पार्टी पहले भी गठबंधन में शामिल होने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बार AIMIM ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर सेक्युलर वोटों को एकजुट किया जाए तो बिहार में NDA को सत्ता से बेदखल किया जा सकता है।
ईमान ने कहा, “हमारी पार्टी NDA को हराने के लिए गंभीर है। अगर महागठबंधन हमें साथ लेता है, तो हम सेक्युलर वोटों का बिखराव रोक सकते हैं।” AIMIM ने RJD और कांग्रेस के कुछ विधायकों से भी संपर्क साधा है और इस प्रस्ताव को विचाराधीन बताया है। हालांकि, RJD और कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं आया है। Bihar Assembly Election 2025
महागठबंधन की दुविधा: AIMIM को शामिल करें या नहीं?- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM की इस पेशकश ने महागठबंधन के सामने एक बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है। एक तरफ, AIMIM को साथ लेने से मुस्लिम वोटों की मजबूत पकड़ मिल सकती है, खासकर सीमांचल क्षेत्र में, जहां AIMIM का प्रभाव है। दूसरी तरफ, सीट बंटवारे की पहले से ही जटिल स्थिति और AIMIM के ‘कट्टरपंथी’ टैग की आशंका गठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। Bihar Assembly Election 2025
RJD और कांग्रेस लंबे समय से AIMIM को BJP की ‘B टीम’ कहकर निशाना साधते रहे हैं। तेजस्वी यादव ने कई मौकों पर ओवैसी पर NDA के लिए वोट काटने का आरोप लगाया है। ऐसे में AIMIM को गठबंधन में शामिल करना RJD के लिए जोखिम भरा हो सकता है। अगर AIMIM को शामिल नहीं किया गया, तो सीमांचल में मुस्लिम वोटों का बिखराव NDA को फायदा पहुंचा सकता है। Bihar Assembly Election 2025
सीमांचल में AIMIM की ताकत- Bihar Assembly Election 2025
बिहार की सियासत में सीमांचल का इलाका मुस्लिम वोटों के लिहाज से बेहद अहम है। 2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा और 5 सीटों (अमौर, बहादुरगंज, बैसी, जोकीहाट, और कोचाधामन) पर जीत हासिल की। पार्टी को कुल 5,23,279 वोट (1.24% वोट शेयर) मिले थे। हालांकि, बाद में AIMIM के चार विधायक RJD में शामिल हो गए थे, लेकिन सीमांचल में पार्टी की जमीनी पकड़ बनी रही। Bihar Assembly Election 2025
2024 के लोकसभा चुनाव में AIMIM ने 8 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 3,82,660 वोट (0.9% वोट शेयर) हासिल किए। ओवैसी ने हाल ही में किशनगंज दौरे पर कहा था कि उनकी पार्टी 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और 24 सीटें जीतने का लक्ष्य रखेगी। यह बयान तेजस्वी यादव के लिए एक खुली चुनौती माना जा रहा है। Bihar Assembly Election 2025
ओवैसी की रणनीति: हिस्सेदारी या दिखावा?- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM की इस पेशकश को सियासी जानकार दो तरह से देख रहे हैं। कुछ का मानना है कि ओवैसी वाकई NDA को हराने के लिए महागठबंधन के साथ गंभीरता से काम करना चाहते हैं। दूसरी ओर, कुछ इसे एक रणनीतिक दांव मान रहे हैं, जिससे ओवैसी ‘BJP की B टीम’ के आरोपों से बच सकें। अगर AIMIM को गठबंधन में शामिल नहीं किया गया, तो ओवैसी इसका इस्तेमाल विपक्ष को घेरने के लिए कर सकते हैं। Bihar Assembly Election 2025
ओवैसी ने कहा, “हम हिस्सेदारी चाहते हैं, गुलामी नहीं। मुस्लिम वोटर अब सिर्फ वोट ट्रांसफर का जरिया नहीं बनना चाहते।” यह बयान RJD और तेजस्वी यादव के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि AIMIM सत्ता में बराबर की भागीदारी चाहती है।
महागठबंधन में दरारें- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM की पेशकश के बीच महागठबंधन के भीतर पहले से ही तनाव दिख रहा है। JMM ने 12-13 सीटों की मांग की है और इस बात से नाराज है कि उसे अब तक किसी बैठक में शामिल नहीं किया गया। कांग्रेस ने भी स्पष्ट किया है कि AIMIM ने उन्हें कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने कहा, “ओवैसी ने हमें कोई ऑफर नहीं दिया। यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए।” Bihar Assembly Election 2025
वहीं, RJD नेता मृत्यंजय तिवारी ने कहा, “AIMIM का ट्रैक रिकॉर्ड BJP की B टीम का रहा है, लेकिन अब जब उन्होंने महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है, तो इसका फैसला लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव लेंगे।” Bihar Assembly Election 2025
महागठबंधन के सामने अब यह सवाल है कि क्या AIMIM को शामिल करना फायदेमंद होगा। सीमांचल में AIMIM की मौजूदगी से मुस्लिम वोटों को एकजुट किया जा सकता है, जो NDA के खिलाफ एक मजबूत रणनीति हो सकती है। लेकिन अगर सीट बंटवारे में असंतुलन हुआ, तो गठबंधन के सहयोगी दलों में नाराजगी बढ़ सकती है।
दूसरी तरफ, अगर AIMIM अकेले चुनाव लड़ती है, तो वह सीमांचल की 24-30 सीटों पर प्रभाव डाल सकती है, जिससे RJD और कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। 2020 में AIMIM की वजह से RJD को सीमांचल में कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले AIMIM की पेशकश ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। ओवैसी की यह रणनीति महागठबंधन के लिए एक अवसर और चुनौती दोनों है। अगर गठबंधन AIMIM को शामिल करता है, तो मुस्लिम वोटों की एकजुटता से NDA को कड़ी टक्कर दी जा सकती है। लेकिन अगर AIMIM को दरकिनार किया गया, तो वोटों का बिखराव गठबंधन की हार का कारण बन सकता है। अब गेंद लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के पाले में है। क्या वे इस सियासी दांव को स्वीकार करेंगे या इसे ठुकराकर अपनी रणनीति पर कायम रहेंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।