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Category: अध्यात्म

  • पुरी जगन्नाथ मंदिर के 4 द्वार और 22 सीढ़ियों का रहस्य, जानें पूरा इतिहास

    पुरी जगन्नाथ मंदिर के 4 द्वार और 22 सीढ़ियों का रहस्य, जानें पूरा इतिहास

    पुरी, ओडिशा में स्थित जगन्नाथ मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान जगन्नाथ को समर्पित है, जिन्हें भगवान विष्णु का एक स्वरूप माना जाता है। हर साल यहां देश-विदेश से लाखों-करोड़ों श्रद्धालु प्रभु के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पुरी जगन्नाथ मंदिर रहस्य अपनी भव्यता, रथ यात्रा और आध्यात्मिक मान्यताओं के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।

    पुरी जगन्नाथ मंदिर का धार्मिक महत्व

    जगन्नाथ मंदिर को चारधामों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि इसके निर्माण, पूजा पद्धति और संरचना से जुड़े कई रहस्य आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं।

    जगन्नाथ मंदिर के चार मुख्य द्वार

    जगन्नाथ मंदिर में चार प्रमुख द्वार हैं, जो चारों दिशाओं में स्थित हैं और प्रत्येक का अपना अलग आध्यात्मिक महत्व है।

    सिंह द्वार (पूर्व):
    यह मंदिर का मुख्य द्वार है, जिसका मुख पूर्व दिशा की ओर है। इसी द्वार के सामने अरुण स्तंभ स्थित है। सिंह द्वार को मोक्ष का प्रतीक माना जाता है और अधिकतर श्रद्धालु इसी द्वार से मंदिर में प्रवेश करते हैं।

    अश्व द्वार (दक्षिण):
    दक्षिण दिशा में स्थित इस द्वार का प्रतीक घोड़ा है। इसे विजय द्वार भी कहा जाता है। मान्यता है कि प्राचीन समय में योद्धा यहां से प्रवेश कर युद्ध में जीत की कामना करते थे। (अन्य द्वारों का भी धार्मिक महत्व बताया जाता है, जो मंदिर की संरचना को पूर्ण बनाते हैं।)

    22 सीढ़ियों का आध्यात्मिक रहस्य

    पुरी जगन्नाथ मंदिर रहस्य में सबसे रहस्यमयी मानी जाती हैं 22 सीढ़ियां, जिन्हें ‘बैसी पहाचा’ कहा जाता है। मान्यता है कि ये सीढ़ियां मानव जीवन की 22 बुराइयों या कमजोरियों का प्रतीक हैं। इन पर विजय प्राप्त करने के बाद ही व्यक्ति मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।इन सीढ़ियों में तीसरी सीढ़ी को ‘यम शिला’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस सीढ़ी पर पैर रखने से यमलोक के दर्शन होते हैं, इसलिए विशेष रूप से मंदिर से बाहर निकलते समय श्रद्धालु इस पर पैर रखने से बचते हैं। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि इस पर पैर रखने से अर्जित पुण्य नष्ट हो सकते हैं।हालांकि वर्तमान समय में मंदिर में केवल 18 सीढ़ियां दिखाई देती हैं, लेकिन परंपरा और मान्यताओं में आज भी 22 सीढ़ियों का उल्लेख मिलता है।

    जगन्नाथ मंदिर का प्रारंभिक इतिहास

    जगन्नाथ मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने करवाया था। मंदिर की एक अनूठी परंपरा यह है कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की लकड़ी की मूर्तियां हर 12 से 19 वर्षों में बदली जाती हैं, जिसे ‘नवकलेवर’ कहा जाता है।पुरी जगन्नाथ मंदिर रहस्य आज भी श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के लिए आस्था, विज्ञान और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम बने हुए हैं।

  • Baba Vanga Predictions 2026: क्या दुनिया एक और महायुद्ध की ओर बढ़ रही है? जानिए डराने वाली भविष्यवाणियां

    Baba Vanga Predictions 2026: क्या दुनिया एक और महायुद्ध की ओर बढ़ रही है? जानिए डराने वाली भविष्यवाणियां

    Baba Vanga Predictions 2026: बाबा वेंगा (Baba Vanga) का नाम आते ही दुनिया भर में चिंता और जिज्ञासा दोनों बढ़ जाती हैं। साल 2026 को लेकर उनकी कथित भविष्यवाणियां एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। समर्थकों का दावा है कि यह वर्ष राजनीति, पर्यावरण और तकनीक तीनों मोर्चों पर भारी उथल-पुथल लेकर आ सकता है। कई रिपोर्ट्स इस दौर को अस्थिरता, संघर्ष और अनिश्चितता से जोड़कर देख रही हैं।

    कौन थीं बाबा वेंगा?

    बाबा वेंगा बुल्गारिया की एक दृष्टिहीन भविष्यवक्ता थीं, जिनका असली नाम वांगेलिया पांडेवा गुश्तेरोवा था। माना जाता है कि बचपन में एक हादसे के बाद उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी, लेकिन इसके बाद उनमें भविष्य देखने की शक्ति आ गई। उनके अनुयायी दावा करते हैं कि उन्होंने 9/11 हमले, सोवियत संघ का पतन और कई प्राकृतिक आपदाओं की पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी।इसी वजह से हर नए साल में बाबा वेंगा की भविष्यवाणियों पर बहस तेज हो जाती है और 2026 को लेकर भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।


    तीसरे विश्व युद्ध की आशंका

    2026 से जुड़ी सबसे डरावनी भविष्यवाणी तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) को लेकर मानी जा रही है। कहा जाता है कि इस वर्ष बड़ी वैश्विक शक्तियां आमने-सामने आ सकती हैं। यह संघर्ष सिर्फ सीमित देशों तक नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर कई महाद्वीपों तक फैल सकता है।विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात रूस-यूक्रेन युद्ध मिडिल ईस्ट में तनाव चीन और पश्चिमी देशों के बीच टकराव इन दावों को और गंभीर बना देते हैं। हालांकि, इन भविष्यवाणियों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।


    पर्यावरणीय संकट भी बन सकता है बड़ी चुनौती

    बाबा वेंगा की कथित भविष्यवाणियों में 2026 को पर्यावरण के लिए भी खतरनाक वर्ष बताया गया है। समर्थकों का दावा है कि इस दौरान भीषण गर्मी जल संकट प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि देखने को मिल सकती है। जलवायु परिवर्तन पहले ही पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है और 2026 में इसके प्रभाव और गहरे हो सकते हैं।

    तकनीक में बड़ा बदलाव

    2026 को लेकर यह भी कहा जाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन मानव जीवन को पूरी तरह बदल सकते हैं। कई नौकरियां खत्म हो सकती हैं, जबकि नई तकनीकों से समाज में असंतुलन भी पैदा हो सकता है।

    भविष्यवाणियों पर कितना भरोसा?

    यह साफ है कि बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित नहीं हैं। ये दावे मुख्य रूप से लोककथाओं, अनुयायियों और मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए सामने आते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य डर से नहीं, बल्कि सही निर्णय और वैश्विक सहयोग से तय होता है। 2026 को लेकर बाबा वेंगा की भविष्यवाणियां डर जरूर पैदा करती हैं, लेकिन इन्हें अंतिम सच मानना सही नहीं। इतिहास गवाह है कि मानवता ने हर संकट से निकलने का रास्ता खोजा है। आने वाला समय चुनौतियों के साथ-साथ नए अवसर भी ला सकता है।

  • Pradosh Vrat 2026 Date And Time: साल 2026 में कब-कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत?

    Pradosh Vrat 2026 Date And Time: साल 2026 में कब-कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत?

    Pradosh Vrat 2026 Date And Time: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ व्रत माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई शिव पूजा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि शिव भक्त पूरे वर्ष Pradosh Vrat 2026 Date And Time जानने के लिए उत्सुक रहते हैं।

    प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं और अपने भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं। इस समय की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। प्रदोष व्रत रखने से स्वास्थ्य, धन, पारिवारिक सुख और मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही यह व्रत पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

    साल 2026 में प्रदोष व्रत कब-कब पड़ेगा?

    नीचे जनवरी और फरवरी 2026 के प्रदोष व्रत की तिथियां दी गई हैं जनवरी 2026 के प्रदोष व्रत 02 जनवरी 2026, गुरुवार – गुरु प्रदोष व्रत 16 जनवरी 2026, शुक्रवार – शुक्र प्रदोष व्रत,30 जनवरी 2026, शुक्रवार – शुक्र प्रदोष व्रत

    फरवरी 2026 के प्रदोष व्रत

    • 14 फरवरी 2026, शनिवार – शनि प्रदोष व्रत
    • 28 फरवरी 2026, शनिवार – शनि प्रदोष व्रत

    हर प्रदोष व्रत का अलग-अलग फल बताया गया है। जैसे गुरु प्रदोष व्रत से ज्ञान और करियर में उन्नति होती है, शुक्र प्रदोष व्रत वैवाहिक जीवन और प्रेम संबंधों को मजबूत करता है, जबकि शनि प्रदोष व्रत शनि दोष और आर्थिक परेशानियों से राहत दिलाता है।

    प्रदोष व्रत की पूजा विधि

    प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती कर भगवान शिव से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।

    प्रदोष व्रत रखने से होने वाले लाभ

    • मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति
    • धन, नौकरी और व्यापार में उन्नति
    • वैवाहिक और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति
    • रोग, दोष और बाधाओं का नाश
  • पूजा करते समय न करें ये भूल, जान लें जरूरी नियम, वरना अधूरी रह सकती है आपकी पूजा

    पूजा करते समय न करें ये भूल, जान लें जरूरी नियम, वरना अधूरी रह सकती है आपकी पूजा

    हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व माना गया है। श्रद्धा और नियमों के साथ की गई पूजा न केवल मन को शांति देती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शुभ फल भी प्रदान करती है। लेकिन कई बार अनजाने में की गई छोटी-सी गलती पूजा के पूर्ण फल को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए।

    क्या आपकी पूजा का पूरा फल मिल रहा है?

    अक्सर लोग रोज़ाना पूजा तो करते हैं, लेकिन यह नहीं जानते कि कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं, जिन्हें एक बार भगवान को अर्पित करने के बाद दोबारा उपयोग में लाना धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्जित माना गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि पूजा में अर्पित की गई वस्तुएं अपनी सकारात्मक ऊर्जा देवताओं को समर्पित कर देती हैं। इसलिए उनका पुनः प्रयोग पूजा की शुद्धता को कम कर सकता है।

    पूजा में किन चीज़ों को दोबारा इस्तेमाल न करें?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में निम्नलिखित वस्तुओं को दोबारा उपयोग में लाने से बचना चाहिए—

    1. चढ़ाए गए फूल
    भगवान को अर्पित किए गए फूल पूजा के बाद दोबारा पूजा में इस्तेमाल नहीं करने चाहिए। इन्हें पवित्र स्थान पर विसर्जित करना या पौधों की जड़ों में डालना शुभ माना जाता है।

    2. जली हुई अगरबत्ती
    अगरबत्ती का उपयोग एक बार ही करना चाहिए। आधी जली अगरबत्ती को अगली पूजा में दोबारा जलाना अशुद्ध माना जाता है।

    3. जला हुआ दीपक, तेल या बाती
    पूजा में जलाई गई बाती या दीपक का बचा हुआ तेल फिर से प्रयोग नहीं करना चाहिए। यह पूजा की पवित्रता को प्रभावित करता है।

    क्यों माना जाता है यह नियम जरूरी?

    मान्यता है कि पूजा के दौरान ये वस्तुएं अपनी सकारात्मक और सात्विक ऊर्जा भगवान को अर्पित कर देती हैं। जब इन्हें दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, तो वह ऊर्जा वापस सांसारिक प्रयोग में आ जाती है, जिससे पूजा का प्रभाव कम हो सकता है। यही कारण है कि शास्त्रों में नई और शुद्ध सामग्री से पूजा करने पर ज़ोर दिया गया है।

    पूजा को फलदायी बनाने के लिए अपनाएं ये उपाय

    • हमेशा साफ-सुथरी और नई पूजा सामग्री का प्रयोग करें
    • पूजा से पहले और बाद में हाथ-पैर धोएं
    • मन को शांत रखकर पूरे विश्वास के साथ पूजा करें
    • अर्पित सामग्री का सम्मानपूर्वक निस्तारण करें

    यदि आप चाहते हैं कि आपकी पूजा वास्तव में फलदायी हो, घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहे, तो इन नियमों को जरूर जानें और अपनी दिनचर्या में शामिल करें। छोटी-छोटी सावधानियां आपकी पूजा को पूर्ण और प्रभावशाली बना सकती हैं।

  • Karwa Chauth Vrat Katha in Hindi: करवा चौथ व्रत की कथा, इसके पाठ किए बिना पूरा नहीं होगा आपका व्रत

    Karwa Chauth Vrat Katha in Hindi: करवा चौथ व्रत की कथा, इसके पाठ किए बिना पूरा नहीं होगा आपका व्रत

    Karwa Chauth Vrat Katha in Hindi: करवा चौथ व्रत भारतीय संस्कृति में विवाहिता महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए किया जाने वाला प्रमुख व्रत है। इसकी उत्पत्ति और महात्म्य का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। सबसे पहले भगवान शिव ने माता पार्वती को इसकी कथा सुनाई थी, जबकि द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को यह व्रत और उसकी कथा बताई।

    महाभारत के युद्ध आरंभ होने से पहले, जब अर्जुन नीलगिरी पर्वत पर तपस्या करने गए थे और लंबे समय तक लौटे नहीं, तो द्रौपदी चिंतित हुई। तब भगवान कृष्ण ने उन्हें करवा चौथ का व्रत रखने और इसके महात्म्य को जानने की सलाह दी। कृष्ण ने द्रौपदी को बताया कि यह व्रत पति की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए अत्यंत फलदायी है।

    करवा चौथ कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन गणेश जी, भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय का पूजन किया जाता है। विशेष रूप से गेहूं का करवा भरकर पूजा जाता है और विवाहित महिलाओं के घरों में पीहर से चीनी के करवे भेजे जाते हैं। व्रत की प्रक्रिया में महिलाएं कथा सुनकर और चाँद को अर्घ्य देकर उपवास खोलती हैं।

    करवा चौथ व्रत कथा

    एक नगर में एक साहूकार के सात बेटे और एक लड़की थी। साहूकार की बहुएँ और बेटी करवा चौथ का व्रत रखती थीं। रात्रि को जब बेटे भोजन करने लगे, तो उन्होंने अपनी बहन से कहा कि भोजन कर लो। बहन ने उत्तर दिया कि “भाई! अभी चाँद नहीं निकला है, निकलते ही अर्घ्य देकर भोजन करूंगी।”

    भाइयों ने उसे धोखा देने का विचार किया। उन्होंने नगर से बाहर जाकर अग्नि जलाई और छलनी से प्रकाश दिखाकर बहन से कहा, “भाई! चाँद निकल आया, अब भोजन करो।” बहन ने अपनी भाभियों से भी कहा कि आओ, चाँद को अर्घ्य दो। लेकिन भाभियों ने उत्तर दिया कि अभी चाँद नहीं निकला, तुम्हारे भाई छलनी से प्रकाश दिखा रहे हैं।

    इस कथा से यह संदेश मिलता है कि करवा चौथ का व्रत भक्ति, समर्पण और पति के प्रति विश्वास का प्रतीक है। आज भी महिलाएँ इस व्रत को बड़ी श्रद्धा और भक्ति से निभाती हैं।

  • Neem Karoli Baba: क्या हनुमान जी के अवतार थे नीम करौली बाबा ? जानें पूरी कहानी

    Neem Karoli Baba: क्या हनुमान जी के अवतार थे नीम करौली बाबा ? जानें पूरी कहानी

    नीम करौली बाबा – देश भर में नीम करौली बाबा, जिन्हें भक्त “महाराज जी” के नाम से भी जानते हैं, 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध संतों में से एक थे। उनका आश्रम उत्तराखंड के कैंची धाम में स्थित है, जहां आज भी लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। माना जाता है कि बाबा का जीवन चमत्कारों और आध्यात्मिक घटनाओं से भरा हुआ था।गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज, स्टीव जॉब्स और फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग जैसे कई बड़े नाम बाबा की प्रेरणा से जुड़े रहे हैं। यही कारण है कि बाबा की ख्याति न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व में है।

    नीम करौली बाबा और हनुमान भक्ति

    नीम करौली बाबा का जीवन हनुमान जी की भक्ति में समर्पित था। वे अपने शिष्यों को हमेशा हनुमान चालीसा पढ़ने और भक्ति में लीन रहने की प्रेरणा देते थे।कैंची धाम सहित उनके अन्य आश्रमों में हनुमान जी की मूर्तियां और मंदिर बने हुए हैं। बाबा के अनुयायी मानते हैं कि जब भी वे बाबा का नाम लेते हैं, तो उन्हें हनुमान जी की कृपा का आशीर्वाद मिलता है।

    बाबा के चमत्कार और श्रद्धालुओं की आस्था

    नीम करौली बाबा के जीवन से जुड़े कई चमत्कार आज भी चर्चा में रहते हैं। कहा जाता है कि उन्होंने बीमारों को ठीक किया, भूखों को भोजन दिया और भक्तों की कठिनाइयों को बिना कहे समझ लिया।यही कारण है कि बाबा को लोग केवल संत ही नहीं बल्कि “चमत्कारी पुरुष” मानते हैं। कई श्रद्धालु यह मानते हैं कि ऐसे चमत्कार हनुमान जी के अवतार में ही संभव हो सकते हैं।

    नीम करौली बाबा ने अपने अनुयायियों को हमेशा सरल जीवन जीने और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास रखने की सीख दी। उनके मुख्य संदेश थे:

    • सभी प्राणियों के प्रति प्रेम और करुणा रखें।
    • सेवा का मार्ग अपनाएँ और दूसरों की मदद करें।
    • भगवान के नाम का स्मरण और भक्ति जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है।

    बाबा का हनुमान भक्ति में गहरा विश्वास था। उनके आश्रम में हनुमान जी के मंदिर प्रमुख रूप से बने हैं और बाबा हमेशा शिष्यों को हनुमान चालीसा का पाठ करने और भक्ति में लीन रहने की प्रेरणा देते थे।


    नीम करौली बाबा के चमत्कार

    बाबा के जीवन में कई अद्भुत और चमत्कारिक घटनाएँ हुईं, जो उनकी दिव्यता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण हैं।

    1. बीमारों को ठीक करना – बाबा अपने भक्तों और आसपास के लोगों की बीमारी का तुरंत समाधान करते थे। कहा जाता है कि उनकी एक झलक से रोगी स्वस्थ हो जाते थे।
    2. भूखों और गरीबों की मदद – बाबा के आश्रम में हमेशा भोजन और जरूरत की वस्तुएँ उपलब्ध रहती थीं। वे खुद गरीबों और यात्रियों को खाना खिलाते और उनकी हर समस्या सुनते थे।
    3. भक्तों की कठिनाइयों का समाधान – बाबा अपने भक्तों की मानसिक और भौतिक कठिनाइयों को समझते और उन्हें सही दिशा दिखाते थे। कई लोग मानते हैं कि बाबा की सलाह और आशीर्वाद से उनके जीवन में बड़े बदलाव आए।
    4. प्रकृति और चमत्कार – कहा जाता है कि बाबा ने कई बार प्राकृतिक आपदाओं और संकटों में चमत्कारिक रूप से लोगों की रक्षा की।

    इन चमत्कारों और भक्ति के कारण बाबा को न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी श्रद्धालु मानते हैं। उनके आश्रम में स्टीव जॉब्स, लैरी पेज और मार्क जुकरबर्ग जैसे विश्व प्रसिद्ध लोगों ने बाबा से प्रेरणा ली।भक्तों के बीच यह मान्यता है कि बाबा हनुमान जी के अनन्य भक्त थे। उनके जीवन में हनुमान भक्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी। हालांकि जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने स्पष्ट किया कि बाबा को हनुमान जी का सीधा अवतार कहना शास्त्रानुसार उचित नहीं है। फिर भी, बाबा की शक्ति, करुणा और भक्तों के प्रति उनकी भक्ति उन्हें हनुमान जी का जीवंत रूप मानने का अधिकार देती है।कैंची धाम, बाबा का प्रमुख आश्रम है, जो उत्तराखंड में स्थित है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। बाबा ने अपने अनुयायियों को जीवन में सेवा, भक्ति और प्रेम के महत्व को समझाया।उनकी शिक्षाएँ आज भी उनके आश्रम और शिष्यों के माध्यम से लोगों तक पहुँच रही हैं। बाबा का जीवन यह सिखाता है कि भक्ति और सेवा से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से समृद्ध हो सकता है।

  • GURU PURNIMA 2025: गुरु पूर्णिमा पर चमकेगा बक मून; 10 जुलाई को रात आसमान में दिखेगा बड़ा और चमकीला चंद्रमा

    GURU PURNIMA 2025: गुरु पूर्णिमा पर चमकेगा बक मून; 10 जुलाई को रात आसमान में दिखेगा बड़ा और चमकीला चंद्रमा

    GURU PURNIMA 2025: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज रात आसमान एक विशेष खगोलीय घटना का गवाह बनेगा। यह घटना है — ‘बक मून’, यानी जुलाई माह की पूर्णिमा को दिखाई देने वाला विशेष और बड़ा चंद्रमा, जो आम दिनों की तुलना में अधिक चमकीला और विशाल नजर आता है। GURU PURNIMA 2025

    🌌 क्या है बक मून?– GURU PURNIMA 2025

    वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामंडल), गोरखपुर के खगोल वैज्ञानिक अमर पाल सिंह के अनुसार, जुलाई महीने में दिखाई देने वाले इस पूर्ण चंद्रमा को ‘बक मून’ कहा जाता है। यह नाम नेटिव अमेरिकन परंपरा से लिया गया है, जहां ‘बक’ शब्द का अर्थ है नर हिरण। यह वह समय होता है जब नर हिरणों की नई सींगें पूरी तरह से विकसित हो जाती हैं, और इस प्राकृतिक घटना से जुड़ाव के चलते इस चंद्रमा को बक मून कहा जाता है।

    GURU PURNIMA 2025:

    🌠 गुरु पूर्णिमा पर खगोलीय संयोग– GURU PURNIMA 2025

    इस वर्ष, बक मून का उदय 10 जुलाई की रात को होगा और यह पूरी रात आसमान में अपनी अद्भुत छटा बिखेरता रहेगा। भारतीय समयानुसार, यह चंद्रमा 11 जुलाई की सुबह 2:08 AM IST पर अपने चरम बिंदु पर होगा।

    खगोल विद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दौरान चंद्रमा क्षितिज के करीब रहेगा, जिससे उसका आकार काफी बड़ा नजर आएगा। स्पष्ट आसमान और कम रोशनी वाले क्षेत्रों से इसे नंगी आंखों से ही देखा जा सकता है। GURU PURNIMA 2025

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    🌍 सांस्कृतिक विविधता में बक मून– GURU PURNIMA 2025

    अमर पाल सिंह के अनुसार, बक मून को विभिन्न संस्कृतियों में अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है।

    • भारत में यह दिन गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है, जो गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक है।
    • अमेरिका में कुछ जनजातियां इसे Thunder Moon (तूफानी चंद्रमा) कहती हैं क्योंकि जुलाई में बड़े तूफानों की संभावना अधिक होती है।
    • अन्य नामों में Salmon Moon, Raspberry Moon, Mead Moon, Hay Moon और Herb Moon भी शामिल हैं।

    इस नामकरण की जानकारी प्राचीन अमेरिकी पत्रिका Old Farmer’s Almanac में भी दर्ज है, जो बताता है कि यह नाम अमेरिकी मूल जनजातियों की परंपराओं से आया है।

    🔭 कैसे देखें बक मून?– GURU PURNIMA 2025

    बक मून को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है।
    खगोलविदों की सलाह:

    • आकाश स्पष्ट और बादल रहित हो
    • प्रकाश प्रदूषण कम हो
    • खुले मैदान या ऊंचे स्थान से देखना बेहतर
    • इसे साधारण आंखों से सीधे देखा जा सकता है

    भारत के हर हिस्से से यह खगोलीय दृश्य पूरी रात स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

    बक मून का प्रतीकात्मक महत्व– GURU PURNIMA 2025

    बक मून को सिर्फ खगोलीय नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी खास माना जाता है। कई लोग इसे

    • नए संकल्पों की शुरुआत
    • के प्रतीक के रूप में मानते हैं।
    • नवीनता
    • शक्ति और ऊर्जा का संचार
    https://nationnowsamachar.com/uttar-pradesh/hamirpur/hamirpur-heavy-rain-destroys-houses-in-harsudi-village/
  • Kanpur Jagannath Temple: बाबा जगन्नाथ का ये मंदिर करता है मानसून की भविष्यवाणी, पत्थर बताते हैं कैसी होगी बारिश ?

    Kanpur Jagannath Temple: बाबा जगन्नाथ का ये मंदिर करता है मानसून की भविष्यवाणी, पत्थर बताते हैं कैसी होगी बारिश ?

    कानपुर नगर: उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में घाटमपुर तहसील के बेहटा बुजुर्ग गांव में स्थित (Kanpur Jagannath Temple) भगवान जगन्नाथ का प्राचीन मंदिर न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह अपने अनोखे चमत्कार के लिए भी विश्व भर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर, जिसे स्थानीय लोग “मानसून मंदिर” भी कहते हैं, हर साल मानसून की सटीक भविष्यवाणी करता है। मंदिर के गुंबद पर लगा एक विशेष पत्थर मानसून के आगमन से 15-20 दिन पहले पानी की बूंदें टपकाने लगता है, जो बारिश की मात्रा और तीव्रता का संकेत देता है। 2025 में इस पत्थर से बूंदें पहले से ही अच्छी मात्रा में गिर रही हैं, जिससे इस साल सामान्य से अधिक बारिश की उम्मीद जताई जा रही है। Kanpur Jagannath Temple

    मंदिर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व- Kanpur Jagannath Temple

    कानपुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी संरचना के लिए भी जाना जाता है। यह उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर से भिन्न है और बौद्ध स्तूप की तरह गोल गुंबद वाला है। मंदिर की शिल्पकला नागर शैली में है, और माना जाता है कि इसे 11वीं या 12वीं सदी में बनाया गया था। हालांकि, समय के साथ यह मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसकी मरम्मत स्थानीय जमींदारों द्वारा कराई गई। मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की काले पत्थर से बनी मूर्तियां स्थापित हैं। हर साल यहां पुरी की तर्ज पर रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

    Kanpur Jagannath Temple
    जगन्नाथ मंदिर में पत्थर की बूंदों का अनसुलझा रहस्य (फोटो- नेशन नाव समाचार)

    मंदिर के बाहर मोर का निशान और चक्र बना हुआ है, जो इसे ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से और भी खास बनाता है। पुरातत्व विभाग के अधीन यह मंदिर अपनी प्राचीनता और रहस्यमयी विशेषताओं के कारण शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा है।

    पत्थर की बूंदों का रहस्य- Kanpur Jagannath Temple

    मंदिर के गर्भगृह के शिखर पर लगा पत्थर साल भर सूखा रहता है, लेकिन मई के अंत या जून की शुरुआत में, जब चिलचिलाती गर्मी अपने चरम पर होती है, इस पत्थर से पानी की बूंदें टपकने लगती हैं। यह प्रक्रिया मानसून के आगमन से ठीक पहले शुरू होती है और बारिश शुरू होते ही पत्थर पूरी तरह सूख जाता है। मंदिर के पुजारी कुड़हा प्रसाद शुक्ला के अनुसार, बूंदों का आकार और मात्रा मानसून की तीव्रता का संकेत देती है। यदि बूंदें छोटी और कम होती हैं, तो बारिश कमजोर रहती है, और यदि बूंदें बड़ी और अधिक होती हैं, तो अच्छी बारिश की उम्मीद की जा सकती है। Kanpur Jagannath Temple

    Kanpur Jagannath Temple

    2025 में पत्थर से बड़ी बूंदें टपक रही हैं, और पुजारी का कहना है कि यह संकेत है कि इस साल मानसून समय पर आएगा और बारिश सामान्य से अधिक होगी। सीएसए कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी भी इस भविष्यवाणी से सहमत हैं। उन्होंने बताया कि 41 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी में भी पत्थर से बूंदें टपक रही थीं, जो सामान्य से अधिक वर्षा का संकेत देती हैं। Kanpur Jagannath Temple

    Kanpur Jagannath Temple
    यहां होती है बाबा जगन्नाथ की पूजा. (फोटो- नेशन नाव समाचार)

    वैज्ञानिकों की जिज्ञासा और अनसुलझा रहस्य- Kanpur Jagannath Temple

    इस मंदिर के पत्थर के चमत्कार ने देश-विदेश के वैज्ञानिकों को भी हैरान किया है। कई वैज्ञानिक और पुरातत्वविद इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन अभी तक यह समझ नहीं पाए कि गर्मी के मौसम में पत्थर से पानी की बूंदें कैसे बनती हैं। कुछ का मानना है कि मंदिर की संरचना ऐसी है कि यह वातावरण की नमी को अवशोषित कर बूंदों के रूप में छोड़ती है। हालांकि, यह प्रक्रिया केवल मानसून से पहले क्यों होती है, इसका कोई वैज्ञानिक जवाब नहीं मिला है।

    स्थानीय लोग इसे भगवान जगन्नाथ का चमत्कार मानते हैं और इस भविष्यवाणी पर पूरा भरोसा करते हैं। मंदिर के 50-60 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले किसान बूंदों को देखकर अपनी फसलों की बुआई और कटाई की योजना बनाते हैं। वे मानते हैं कि यह मंदिर उनकी खेती और आजीविका का मार्गदर्शक है।

    स्थानीय लोगों और किसानों की आस्था- Kanpur Jagannath Temple

    बेहटा बुजुर्ग और आसपास के गांवों के लोग इस मंदिर को अपनी आस्था का केंद्र मानते हैं। मई के अंतिम सप्ताह में जब पत्थर से बूंदें टपकने लगती हैं, तो किसान मंदिर में विशेष पूजा-पाठ शुरू कर देते हैं। वे अच्छी फसल और समृद्धि की कामना करते हैं। 2025 में बूंदों की अच्छी मात्रा ने किसानों में उत्साह जगाया है। उनका मानना है कि इस साल फसल की पैदावार बढ़ेगी और खेती को लाभ होगा।

    मानसून 2025 की भविष्यवाणी- Kanpur Jagannath Temple

    इस साल मंदिर के पत्थर से टपक रही बूंदें स्थानीय लोगों और मौसम विज्ञानियों दोनों के लिए सकारात्मक संकेत दे रही हैं। पुजारी के अनुसार, पत्थर पूरी तरह भीगा हुआ है और बूंदों की गति तेज है, जो 10-15 दिनों में मानसून के आगमन और अच्छी बारिश का संकेत है। मौसम विज्ञानियों ने भी इस साल सामान्य से अधिक वर्षा की भविष्यवाणी की है, जो मंदिर की भविष्यवाणी के साथ मेल खाती है।

    मंदिर का पर्यटन और धार्मिक महत्व

    यह मंदिर न केवल मानसून की भविष्यवाणी के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल भी है। हर साल रथ यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर की अनूठी संरचना और चमत्कारी पत्थर इसे पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनाते हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित इस मंदिर का रखरखाव नियमित रूप से किया जाता है, ताकि इसकी प्राचीनता बरकरार रहे।

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    सोर्स- TOI

  • WEEKLY RASHIFAL: जानिए इस हफ्ते कैसा रहेगा आपके सितारों का साथ?

    WEEKLY RASHIFAL: जानिए इस हफ्ते कैसा रहेगा आपके सितारों का साथ?

    इस सप्ताह का राशिफल जानें- सभी 12 राशियों के लिए प्रेम, करियर, स्वास्थ्य (WEEKLY RASHIFAL) और वित्त से जुड़ी भविष्यवाणिया. जानिए शुभ अंक, शुभ रंग और किस अक्षर से शुरू होने वाले नाम वालों के लिए क्या रहेगा खास.

    ♈ मेष (Aries)
    (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)
    यह सप्ताह आपके आत्मबल और दृढ़ संकल्प को मजबूती देगा। करियर में उत्साहजनक मौके मिल सकते हैं। किसी पुराने मित्र से मुलाकात आनंददायक रहेगी। छात्रों को मेहनत के अनुरूप सफलता मिल सकती है। जीवनसाथी के साथ समय बिताने से रिश्ते और गहरे होंगे। पेट संबंधी कष्टों से बचने के लिए खानपान पर ध्यान दें।
    शुभ अंक: 9
    शुभ रंग: लाल

    ♉ वृषभ (Taurus)
    (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)

    आर्थिक मामलों में सुधार की संभावना है, रुके हुए पैसे मिल सकते हैं। घर में कोई मांगलिक कार्य या आयोजन संभव है। कार्यक्षेत्र में आपके सुझावों को सराहा जाएगा। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी, पर जल्दबाजी से बचें। शत्रु पक्ष कमजोर रहेगा, आप मजबूत स्थिति में रहेंगे। वाहन चलाते समय सावधानी आवश्यक है।
    शुभ अंक: 6
    शुभ रंग: सफेद

    ♊ मिथुन (Gemini)
    (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)

    इस सप्ताह मानसिक शांति बनी रहेगी, और रचनात्मक विचारों में वृद्धि होगी। कामकाज में नई योजना का शुभारंभ हो सकता है। भाई-बहनों से सहयोग प्राप्त होगा। छात्रों के लिए समय चुनौतिपूर्ण हो सकता है, फोकस बनाएं रखें। यात्राएं लाभदायक रहेंगी, खासकर व्यावसायिक। स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी लापरवाही नुकसान पहुँचा सकती है।
    शुभ अंक: 5
    शुभ रंग: हरा

    ♋ कर्क (Cancer)
    (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)

    आर्थिक रूप से सप्ताह अच्छा रहेगा, आय के नए स्रोत बन सकते हैं। पुराने रिश्तों में फिर से संवाद की संभावना है। परिवार में किसी की तबीयत को लेकर चिंता हो सकती है। सरकारी कार्यों में रुकावट आ सकती है, धैर्य रखें। बच्चों के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा। भावनाओं में बहने से बचें, ठोस निर्णय लें।
    शुभ अंक: 2
    शुभ रंग: सिल्वर

    ♌ सिंह (Leo)
    (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)

    नई जिम्मेदारियाँ मिल सकती हैं, जो आगे सफलता दिलाएंगी। साहस और आत्मविश्वास के बल पर लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। पारिवारिक मामलों में समझदारी से काम लें। प्रेमीजन से मुलाकात हो सकती है, पर भावनात्मक असंतुलन से बचें। व्यर्थ के विवादों से दूरी बनाना बेहतर रहेगा। वाहन या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में दिक्कत आ सकती है।
    शुभ अंक: 1
    शुभ रंग: सुनहरा

    ♍ कन्या (Virgo)
    (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)

    सप्ताह की शुरुआत थोड़ी धीमी हो सकती है लेकिन धीरे-धीरे प्रगति दिखेगी। आर्थिक मामलों में सतर्कता आवश्यक है। सामाजिक कार्यों में भागीदारी से मान-सम्मान बढ़ेगा। संतान से जुड़ी कोई चिंता मन को विचलित कर सकती है। कार्यक्षेत्र में ईमानदारी का फल मिलेगा। पुराने रोग उभर सकते हैं, चिकित्सा में लापरवाही न करें।
    शुभ अंक: 7
    शुभ रंग: हरा

    ♎ तुला (Libra)
    (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
    इस सप्ताह व्यापारिक मामलों में लाभ की स्थिति बन सकती है। वैवाहिक जीवन में तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा। कोई पुराना विवाद निपट सकता है जिससे मानसिक राहत मिलेगी। विद्यार्थियों को पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखनी होगी। मित्रों से सहयोग मिलेगा। हड्डियों या जोड़ों में परेशानी हो सकती है।
    शुभ अंक: 6
    शुभ रंग: क्रीम

    ♏ वृश्चिक (Scorpio)
    (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)

    सप्ताह उत्साह और उमंग से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी और सहयोगियों का समर्थन मिलेगा। पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी। प्रेम संबंधों में नयापन आएगा। जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में प्रगति होगी। शत्रु सक्रिय रह सकते हैं, सतर्क रहें।
    शुभ अंक: 8
    शुभ रंग: लाल

    ♐ धनु (Sagittarius)
    (ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)

    आपका आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा, जिससे हर काम में सफलता मिलेगी। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में राहत मिल सकती है। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। छात्रों को परीक्षा में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। जीवनसाथी से भावनात्मक सहयोग मिलेगा। सिरदर्द या माइग्रेन जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
    शुभ अंक: 3
    शुभ रंग: पीला

    ♑ मकर (Capricorn)
    (भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)

    नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई भूमिका मिल सकती है। घर में किसी धार्मिक आयोजन की संभावना है। धन की स्थिति सामान्य रहेगी, फालतू खर्च से बचें। बच्चों की प्रगति से प्रसन्नता होगी। निजी रिश्तों में पारदर्शिता जरूरी होगी। थकान या रक्तचाप की समस्या हो सकती है।
    शुभ अंक: 4
    शुभ रंग: नीला

    ♒ कुम्भ (Aquarius)
    (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)

    इस सप्ताह नई योजनाओं की शुरुआत के लिए समय अनुकूल है। प्रोफेशनल मामलों में सफलता मिलेगी। जीवनसाथी के साथ संबंधों में सुधार आएगा। किसी पुराने मित्र से सहयोग मिल सकता है। बुजुर्गों की सेहत पर ध्यान देना होगा। मन कभी-कभी विचलित रहेगा, ध्यान या योग लाभकारी रहेगा।
    शुभ अंक: 8
    शुभ रंग: बैंगनी

    ♓ मीन (Pisces)
    (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)

    इस सप्ताह पारिवारिक और व्यक्तिगत दोनों ही क्षेत्रों में संतुलन बना रहेगा। आय के नए स्रोत बन सकते हैं, धन लाभ के योग हैं। विद्यार्थियों को विदेश से संबंधित अवसर मिल सकते हैं। रचनात्मक कामों में मन लगेगा। संतान पक्ष से सुख मिलेगा। मौसम के अनुसार स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना होगा।
    शुभ अंक: 2
    शुभ रंग: गुलाबी

  • साप्ताहिक राशिफल: 5 मई से 11 मई 2025 तक का ज्योतिषीय मार्गदर्शन, मेष राषि वालों को मिलेगी नई जिम्मेदारी- WEEKLY HOROSCOPE

    साप्ताहिक राशिफल: 5 मई से 11 मई 2025 तक का ज्योतिषीय मार्गदर्शन, मेष राषि वालों को मिलेगी नई जिम्मेदारी- WEEKLY HOROSCOPE

    लखनऊ/कानपुर देहात: यह सप्ताह उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत के लिए मौसम में बदलाव और राशियों के लिए नई संभावनाएं लेकर आ रहा है. कुछ राशियों को (WEEKLY HOROSCOPE) करियर में उन्नति, तो कुछ को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. प्रेम और पारिवारिक संबंधों में संतुलन ज़रूरी रहेगा. स्वास्थ्य और निवेश से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लेने होंगे.

    मेष (Aries)
    यह सप्ताह आपके लिए आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरपूर रहेगा. नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है. व्यापार में किसी नए निवेश के लिए समय अनुकूल है, लेकिन सोच-समझकर ही निर्णय लें. परिवार में किसी सदस्य की सेहत को लेकर थोड़ी चिंता हो सकती है. छात्रों के लिए यह सप्ताह मेहनत का फल देने वाला रहेगा. मानसिक तनाव से बचने के लिए ध्यान और योग का सहारा लें.
    शुभ अंक: 9
    शुभ रंग: लाल

    वृषभ (Taurus)
    वृषभ राशि के जातकों को इस सप्ताह वित्तीय मामलों में सावधानी बरतनी होगी. कोई पुराना उधार सिरदर्द बन सकता है. परिवार का सहयोग मिलेगा लेकिन वैवाहिक जीवन में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. किसी पुराने मित्र से मुलाकात संभव है जो आपको नया अवसर दिला सकता है. संपत्ति से जुड़े विवादों का समाधान हो सकता है. स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, पर खानपान पर विशेष ध्यान दें.
    शुभ अंक: 6
    शुभ रंग: सफेद

    मिथुन (Gemini)
    मिथुन राशि के लोगों को इस सप्ताह अपनी संचार शैली पर विशेष ध्यान देना होगा. ऑफिस में आप अपने विचारों से लोगों को प्रभावित करेंगे. व्यापार में नए संपर्क लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं. घर में किसी धार्मिक आयोजन की संभावना है. संतान से संबंधित कोई शुभ समाचार मिल सकता है. यात्रा के योग हैं, लेकिन सतर्क रहें. प्रेम संबंधों में पारदर्शिता बनाए रखें.
    शुभ अंक: 5
    शुभ रंग: हरा

    कर्क (Cancer)
    यह सप्ताह आपके लिए भावनात्मक रूप से उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है. किसी पुराने रिश्ते को लेकर मन में उलझन रह सकती है. कार्यस्थल पर मेहनत का उचित फल मिलेगा. पारिवारिक वातावरण अच्छा रहेगा लेकिन बुजुर्गों की सेहत को लेकर सतर्क रहना होगा. आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी, फिजूल खर्ची से बचें. छात्रों को मेहनत का परिणाम मिलेगा.
    शुभ अंक: 2
    शुभ रंग: सफेद

    सिंह (Leo)
    सिंह राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह आत्मविश्लेषण और सुधार का है. आप अपनी कार्यशैली में बदलाव कर सकते हैं. नौकरी में बदलाव के संकेत मिल सकते हैं. धन आगमन होगा लेकिन साथ में खर्च भी बढ़ेगा. प्रेम संबंधों में मधुरता रहेगी. पारिवारिक मामलों में आपकी सलाह महत्वपूर्ण साबित होगी. स्वास्थ्य सामान्य रहेगा. ध्यान और प्रकृति के संपर्क में रहना फायदेमंद होगा.
    शुभ अंक: 1
    शुभ रंग: सुनहरा

    कन्या (Virgo)
    कन्या राशि वालों को इस सप्ताह अपने कार्यों में अनुशासन और समयबद्धता बनाए रखनी होगी. करियर में कोई अच्छी खबर मिल सकती है. सरकारी कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है. परिवार में खुशी का माहौल बना रहेगा. प्रेम संबंधों में दूरी महसूस हो सकती है, लेकिन बातचीत से सुलझेगा. सेहत अच्छी रहेगी लेकिन थकान से बचें.
    शुभ अंक: 4
    शुभ रंग: नीला

    तुला (Libra)
    इस सप्ताह तुला राशि वालों को संतुलन बनाए रखना होगा. करियर में सफलता मिलने की संभावना है, लेकिन सहयोगियों से मतभेद हो सकते हैं. व्यापार में पुराने निवेश से लाभ मिलेगा. जीवनसाथी के साथ समय बिताने से तनाव कम होगा. प्रेमीजन के साथ मनमुटाव दूर होंगे. स्वास्थ्य अच्छा रहेगा लेकिन आंखों की समस्या से सतर्क रहें.
    शुभ अंक: 7
    शुभ रंग: गुलाबी

    वृश्चिक (Scorpio)
    वृश्चिक राशि वालों को इस सप्ताह अपने क्रोध और आवेग पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा. धन संबंधी मामलों में सुधार होगा. अचानक कोई शुभ समाचार मिल सकता है. पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं. दोस्तों का सहयोग मिलेगा. नौकरी में स्थानांतरण के योग हैं. स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें, खासकर रक्तचाप से पीड़ित लोग सावधान रहें.
    शुभ अंक: 8
    शुभ रंग: लाल

    धनु (Sagittarius)
    धनु राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह नई योजनाओं को शुरू करने के लिए अनुकूल है. करियर में तरक्की के योग हैं. आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति रहेगी. सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी. पारिवारिक जीवन में सामंजस्य बना रहेगा. विद्यार्थियों के लिए यह समय पढ़ाई के लिए अत्यंत उपयुक्त है. यात्रा के योग भी बन रहे हैं.
    शुभ अंक: 3
    शुभ रंग: पीला

    मकर (Capricorn)
    इस सप्ताह मकर राशि के लोग भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देंगे. नौकरी में बदलाव का विचार कर सकते हैं. पुराने अधूरे काम पूरे होंगे. धन संबंधित मामलों में कोई शुभ समाचार मिल सकता है. पारिवारिक रिश्ते मजबूत होंगे. कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलेगा. शत्रु सक्रिय रह सकते हैं, सावधानी रखें. स्वास्थ्य ठीक रहेगा लेकिन व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें.
    शुभ अंक: 8
    शुभ रंग: भूरा

    कुंभ (Aquarius)
    कुंभ राशि के लोगों के लिए यह सप्ताह सोच-समझकर निर्णय लेने का है. कार्यक्षेत्र में व्यस्तता रहेगी लेकिन परिश्रम सफल होगा. धन संबंधित मामलों में लाभ मिलने की संभावना है. पारिवारिक जीवन में कोई शुभ कार्य हो सकता है. मित्रों से लाभ होगा. प्रेम संबंधों में विश्वास बनाए रखें. त्वचा और आंखों से जुड़ी समस्या हो सकती है.
    शुभ अंक: 6
    शुभ रंग: नीला

    मीन (Pisces)
    मीन राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह भावनात्मक और रचनात्मक ऊर्जा से भरा रहेगा. करियर में प्रगति के नए अवसर मिल सकते हैं. धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी. आर्थिक मामलों में सुधार होगा, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है. दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी. सेहत के लिहाज से यह सप्ताह ठीक रहेगा. यात्रा से लाभ मिलेगा.
    शुभ अंक: 3
    शुभ रंग: हल्का हरा

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