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  • दिल्ली में शुरू हुई अटल कैंटीन, अब ₹5 में मिलेगा भरपेट पौष्टिक भोजन

    दिल्ली में शुरू हुई अटल कैंटीन, अब ₹5 में मिलेगा भरपेट पौष्टिक भोजन

    दिल्ली में आज से अटल कैंटीन की औपचारिक शुरुआत हो गई है, जहां आम लोगों को मात्र ₹5 में भरपेट और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इस जनकल्याणकारी पहल का शुभारंभ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर किया गया है।

    इस योजना का मुख्य उद्देश्य राजधानी दिल्ली में श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों, जरूरतमंदों और कम आय वर्ग के लोगों को सस्ता और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराना है। अटल कैंटीन में परोसा जाने वाला भोजन संतुलित आहार पर आधारित होगा, जिससे लोगों को पोषण भी मिल सके।

    सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अटल कैंटीन योजना को चरणबद्ध तरीके से दिल्ली के विभिन्न इलाकों में शुरू किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद लोग इसका लाभ उठा सकें। कैंटीनों में साफ-सफाई और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

    इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी का पूरा जीवन गरीबों और आम जनता के कल्याण को समर्पित रहा है। उनकी जयंती पर इस तरह की योजना शुरू करना उनके विचारों और आदर्शों को सच्ची श्रद्धांजलि है।

    स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है और कहा है कि महंगाई के दौर में ₹5 में भरपेट भोजन मिलना गरीब और मेहनतकश वर्ग के लिए बड़ी राहत साबित होगा। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह योजना दिल्ली के सामाजिक ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • चांदी के भाव में जबरदस्त उछाल, 2 लाख के पार पहुंची कीमत, सोना भी महंगा

    चांदी के भाव में जबरदस्त उछाल, 2 लाख के पार पहुंची कीमत, सोना भी महंगा

    सर्राफा बाजार में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। चांदी के भाव लगातार उछाल पर बने हुए हैं और मंगलवार 22 दिसंबर को चांदी की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर बनी हुई है। चांदी की इस रिकॉर्ड तेजी ने निवेशकों और कारोबारियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

    बाजार जानकारों के मुताबिक औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और डॉलर में उतार-चढ़ाव की वजह से कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। खासतौर पर चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और अन्य उद्योगों में बढ़ने से इसकी मांग मजबूत बनी हुई है, जिसका सीधा असर दामों पर पड़ रहा है।

    वहीं सोने के दामों में भी आज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने की मांग बढ़ने से इसकी कीमतें ऊपर की ओर गई हैं। वैश्विक बाजार में कमजोर डॉलर और ब्याज दरों को लेकर असमंजस की स्थिति भी सोने की कीमतों को सहारा दे रही है।

    https://nationnowsamachar.com/bollywood-news/kartik-aaryan-ananya-panday-airport-look-spotted/

    सर्राफा बाजार से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि शादी-विवाह के सीजन और आने वाले त्योहारों को देखते हुए घरेलू बाजार में भी खरीदारी बढ़ी है। इसका असर सोने और चांदी दोनों की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। निवेशक भी महंगाई और बाजार की अस्थिरता से बचाव के लिए कीमती धातुओं में निवेश को सुरक्षित मान रहे हैं।

    https://nationnowsamachar.com/uttar-pradesh/rapid-rail-ashleel-harkat-students-identified-ghaziabad-fir/

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर आर्थिक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले दिनों में चांदी के भाव और सोने की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा बना रहता है, इसलिए निवेश से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी माना जा रहा है।कुल मिलाकर, मौजूदा समय में सर्राफा बाजार में तेजी का माहौल है और इसका सीधा फायदा उन निवेशकों को मिल रहा है, जिन्होंने पहले से ही सोने-चांदी में निवेश किया हुआ है।

    https://nationnowsamachar.com/other/amroha-hindu-sangathan-protest-bangladesh-hatya/
  • इंडिगो कर्मचारी से बदसलूकी पर बवाल, “अब्दुल-अब्दुल्ला” बयान पर राजनीति तेज

    इंडिगो कर्मचारी से बदसलूकी पर बवाल, “अब्दुल-अब्दुल्ला” बयान पर राजनीति तेज

    देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो एक बार फिर विवादों में है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो में एक महिला यात्री को इंडिगो कर्मचारी से बदसलूकी करते हुए देखा गया, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में महिला कथित तौर पर कर्मचारी से कहती नजर आती है कि “पूरा देश परेशान है अब्दुल और अब्दुल्ला से”, जिस पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

    इस घटना के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कई यूजर्स ने इसे न सिर्फ कर्मचारी का अपमान बताया, बल्कि समाज में फैलती नफरत और असहिष्णुता का उदाहरण भी करार दिया। लोगों का कहना है कि यात्रियों की शिकायतों को लेकर एयरलाइन कर्मचारियों पर इस तरह की भाषा और व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

    मामले में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस सांसद इमरान ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी ज़हरीली मानसिकता के खिलाफ इंडिगो को खुद आगे आकर अपने कर्मचारी के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एयरलाइन स्टाफ कठिन परिस्थितियों में यात्रियों की सेवा करता है और उन्हें सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए।

    इमरान ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान या नाम को लेकर इस तरह की टिप्पणी समाज को बांटने का काम करती है। उन्होंने इंडिगो प्रबंधन से अपेक्षा जताई कि कंपनी अपने कर्मचारियों के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए सख्त रुख अपनाएगी।

    इस इंडिगो कर्मचारी से बदसलूकी के मामले ने एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विमानन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यात्रियों के अनुचित व्यवहार पर कड़े नियम और त्वरित कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल इंडिगो की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

  • New Year 2026: 5 Best Destinations for Last Minute Trip: नए साल पर घूमने की बेस्ट जगहें

    New Year 2026: 5 Best Destinations for Last Minute Trip: नए साल पर घूमने की बेस्ट जगहें

    New Year 2026 5 Best Destinations for Last Minute Trip की तलाश में हैं और नया साल कहीं खास अंदाज में मनाना चाहते हैं, तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। नए साल में कुछ ही दिन बचे हैं और अगर आपने अब तक कोई ट्रैवल प्लान नहीं बनाया है, तो भी आप कम समय और सीमित बजट में शानदार छुट्टियां मना सकते हैं। खास बात यह है कि ये सभी जगहें दिल्ली-NCR के आसपास हैं और लास्ट मिनट ट्रिप के लिए परफेक्ट ऑप्शन मानी जाती हैं।

    1. जयपुर, राजस्थान

    दिल्ली से करीब 5–6 घंटे की दूरी पर स्थित जयपुर कल्चर, हेरिटेज और सेलिब्रेशन का बेहतरीन कॉम्बिनेशन है। यहां जगमगाते महल, हेरिटेज होटल्स में न्यू ईयर डिनर और हवा महल के आसपास शाम की सैर आपके ट्रिप को खास बना देती है। पहाड़ी इलाकों की तुलना में यहां भीड़ भी अपेक्षाकृत कम रहती है।

    2. ऋषिकेश, उत्तराखंड

    अगर आप नए साल की शुरुआत शांति और सुकून के साथ करना चाहते हैं, तो ऋषिकेश एक शानदार विकल्प है। योग रिट्रीट, गंगा आरती और नदी किनारे बिताया गया वक्त मानसिक शांति का अनुभव कराता है। 5 Best Destinations for Last Minute Trip में ऋषिकेश को सबसे सुकूनभरी जगहों में गिना जाता है।

    3. लैंसडाउन, उत्तराखंड

    मसूरी और नैनीताल की भीड़ से दूर लैंसडाउन शांत माहौल पसंद करने वालों के लिए परफेक्ट है। चीड़ के जंगल, ठंडी हवा और पुरानी छावनी की खूबसूरती इस जगह को खास बनाती है। कपल्स और छोटे ग्रुप के लिए यह आदर्श डेस्टिनेशन है।

    4. आगरा, उत्तर प्रदेश

    अगर कम समय में ट्रिप प्लान करना चाहते हैं, तो आगरा एक अच्छा विकल्प है। ताजमहल, आगरा किला और स्थानीय खानपान के साथ आपका न्यू ईयर ट्रिप यादगार बन सकता है।

    5. कसौली, हिमाचल प्रदेश

    छोटा और शांत हिल स्टेशन कसौली भी 5 Best Destinations for Last Minute Trip में शामिल है। यहां की ठंडी हवा, पहाड़ी नज़ारे और शांत वातावरण नए साल के स्वागत के लिए बेहतरीन हैं।

  • मनरेगा से बापू का नाम हटाने पर जयंत चौधरी का बयान, बोले लोकतंत्र में बदलाव स्वाभाविक

    मनरेगा से बापू का नाम हटाने पर जयंत चौधरी का बयान, बोले लोकतंत्र में बदलाव स्वाभाविक

    नई दिल्ली। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से गांधीजी का नाम हटाए जाने को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि किसी भी चीज़ को “पत्थर की लकीर” नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में समय और जनता की भावनाओं के अनुसार परिवर्तन होना स्वाभाविक है।

    जयंत चौधरी ने कहा, “कोई भी चीज पत्थर की लकीर नहीं होती। लोकतंत्र के मायने होते हैं। जनता की भावनाओं के अनुरूप कार्यक्रमों में बदलाव होता है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा किए जा रहे बदलाव को केवल नाम बदलने तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे व्यावहारिक कारण भी हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने कृषि क्षेत्र से जुड़ी दिक्कतों का हवाला देते हुए कहा कि कृषि सीजन के दौरान मनरेगा योजना कई बार समस्याएं खड़ी करती थी। किसानों की लगातार शिकायतें आ रही थीं कि खेतों में काम के समय उन्हें मजदूर नहीं मिल पाते थे, क्योंकि बड़ी संख्या में मजदूर मनरेगा के तहत काम करने चले जाते थे। इससे खेती प्रभावित होती थी और फसल की समय पर बुवाई व कटाई में परेशानी होती थी।जयंत चौधरी के अनुसार, “अब कृषि सीजन योजना से बाहर है। किसानों की शिकायत रहती थी कि मजदूर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में सरकार को संतुलन बनाना जरूरी था, ताकि ग्रामीण रोजगार भी मिले और खेती भी प्रभावित न हो।” उन्होंने इशारों में कहा कि नया ढांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि, दोनों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

    गौरतलब है कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर विपक्षी दल सरकार पर लगातार हमला बोल रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यह राष्ट्रपिता का अपमान है और गरीबों की सबसे बड़ी रोजगार योजना की मूल भावना से छेड़छाड़ की जा रही है। वहीं सरकार और उसके सहयोगी दल इसे प्रशासनिक सुधार और व्यावहारिक जरूरत बता रहे हैं।

    जयंत चौधरी के बयान को सरकार के पक्ष में एक संतुलित तर्क के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने भावनाओं के साथ-साथ जमीनी हकीकत का भी जिक्र किया। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सियासी गलियारों तक और ज्यादा गरमाने की संभावना है।

  • 5 लाख हादसे, युद्ध से ज्यादा सड़कों पर मर रहे…रोड एक्सिडेंट से मौतों पर संसद में नितिन गडकरी का छलक गया दर्द

    5 लाख हादसे, युद्ध से ज्यादा सड़कों पर मर रहे…रोड एक्सिडेंट से मौतों पर संसद में नितिन गडकरी का छलक गया दर्द

    भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या बन चुकी हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए बताया कि हर साल देश में करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें 1 लाख 80 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से 67 प्रतिशत मृतक 18 से 34 वर्ष की उम्र के युवा होते हैं, जो देश की सबसे सक्रिय और उत्पादक आबादी माने जाते हैं।

    नितिन गडकरी ने कहा कि सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या कम करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने एम्स (AIIMS) की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि अगर दुर्घटना के शिकार लोगों को समय पर इलाज मिल जाए, तो हर साल करीब 50 हजार जानें बचाई जा सकती हैं। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोग अक्सर घायल की मदद करने से हिचकिचाते हैं।

    मदद करने से डरते हैं लोग

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आम लोगों को डर रहता है कि अगर वे घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाएंगे, तो उन्हें पुलिस और कानूनी झंझटों में फंसना पड़ सकता है। इसी डर के कारण कई बार घायल व्यक्ति को समय पर इलाज नहीं मिल पाता और उसकी जान चली जाती है।

    ‘राहवीर’ योजना: मदद पर इनाम

    इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने एक नई पहल शुरू की है। नितिन गडकरी ने बताया कि अब सड़क हादसे में घायल व्यक्ति की मदद करने वालों को डरने की नहीं, बल्कि आगे आने की जरूरत है। ऐसे मददगार लोगों को सरकार ने ‘राहवीर’ की संज्ञा दी है।उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी सड़क दुर्घटना में घायल को अस्पताल पहुंचाता है, तो उसे सरकार की ओर से 25 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य लोगों को प्रोत्साहित करना है ताकि वे बिना किसी भय के मानवता का परिचय देते हुए घायलों की मदद कर सकें।

    युवाओं की मौत सबसे बड़ी चिंता

    गडकरी ने कहा कि सड़क हादसों में युवाओं की बड़ी संख्या में मौत देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सरकार सड़क सुरक्षा, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज इलाज व्यवस्था और जनजागरूकता के जरिए इन आंकड़ों को कम करने की दिशा में काम कर रही है।सरकार को उम्मीद है कि ‘राहवीर योजना’ से न सिर्फ घायलों को समय पर इलाज मिलेगा, बल्कि हजारों लोगों की जान भी बचाई जा सकेगी

  • मनरेगा की जगह लेने वाला ‘जी राम जी’ बिल लोकसभा में पास, विपक्ष का जोरदार हंगामा

    मनरेगा की जगह लेने वाला ‘जी राम जी’ बिल लोकसभा में पास, विपक्ष का जोरदार हंगामा

    महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लाने वाला ‘जी राम जी’ बिल आज सुबह लोकसभा में विपक्ष के भारी विरोध के बीच पारित कर दिया गया। बिल के पास होते ही संसद का माहौल गरमा गया और विपक्षी सांसदों ने वेल में उतरकर जमकर हंगामा किया।

    विपक्ष की मांग थी कि इस अहम बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए ताकि इसके हर पहलू पर विस्तार से चर्चा हो सके। विरोध के दौरान कई सांसदों ने बिल की कॉपियां फाड़ दीं, जिस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “कानून पर पहले ही विस्तार से चर्चा हो चुकी है। जनता आपको कागज फाड़ने के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने के लिए भेजती है।” अब यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा

    विपक्ष ने क्यों किया विरोध?

    कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, डीएमके सांसद टीआर बालू और समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने बिल को गरीब-विरोधी बताया। विपक्ष का कहना है कि इस कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना राष्ट्रपिता का अपमान है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि नया कानून राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालता है, जबकि कई राज्य पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

    सरकार का जवाब क्या रहा?

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक योजनाओं के नाम केवल नेहरू-गांधी परिवार से जोड़े और अब नाम बदलने पर सवाल उठा रही है। चौहान ने आरोप लगाया कि MGNREGA भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका था और नया कानून सभी स्टेकहोल्डर्स से चर्चा के बाद लाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार नाम नहीं, काम की राजनीति करती है।

    प्रियंका गांधी का तीखा बयान

    सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मीडिया से कहा कि यह बिल ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को धीरे-धीरे खत्म कर देगा। उन्होंने कहा, “यह योजना सबसे गरीब लोगों का सहारा है। राज्यों के पास फंड नहीं है और सरकार उन पर बोझ डाल रही है। यह बिल साफ तौर पर गरीब विरोधी है।”

    कागज फाड़ने पर सरकार की आपत्ति

    केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने संसद के भीतर कागज फाड़ने की घटना की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस तरह के व्यवहार की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बिल पर देर रात तक चर्चा की और यह कानून जनहित में है।

  • दिल्ली में वायु प्रदूषण पर बड़ा फैसला, 50% वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य, निर्माण कार्य बंद

    दिल्ली में वायु प्रदूषण पर बड़ा फैसला, 50% वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य, निर्माण कार्य बंद

    दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंचता जा रहा है। राजधानी के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 500 से ऊपर दर्ज किया गया है, जो गंभीर स्वास्थ्य संकट का संकेत है। बिगड़ते हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए कई अहम फैसले लिए हैं।

    सरकार के आदेश के अनुसार, दिल्ली के सभी सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम (WFH) अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मकसद सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाना और प्रदूषण को नियंत्रित करना है। आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को इससे छूट दी गई है, लेकिन बाकी संस्थानों को हाइब्रिड वर्क सिस्टम अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

    निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक

    प्रदूषण की एक बड़ी वजह माने जाने वाले धूल और मलबे को रोकने के लिए दिल्ली में सभी तरह के निर्माण कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसमें सरकारी और निजी दोनों तरह की निर्माण परियोजनाएं शामिल हैं। सरकार का कहना है कि निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल हवा की गुणवत्ता को और खराब कर रही है।हालांकि, कुछ अत्यावश्यक परियोजनाओं को नियमों के तहत सशर्त छूट दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए संबंधित विभागों से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

    निर्माण मजदूरों को आर्थिक राहत

    निर्माण कार्य बंद होने से सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने रजिस्टर्ड और वेरिफाइड निर्माण मजदूरों के बैंक खातों में 10,000 रुपये की सहायता राशि सीधे ट्रांसफर करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम मजदूरों और उनके परिवारों को इस कठिन समय में आर्थिक सहारा देने के लिए उठाया गया है।

    स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता

    डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने, मास्क पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। सांस, आंखों और त्वचा से जुड़ी समस्याओं के मामलों में भी इजाफा देखा जा रहा है।सरकार ने साफ किया है कि यदि प्रदूषण का स्तर कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में और सख्त पाबंदियां लागू की जा सकती हैं। दिल्लीवासियों से अपील की गई है कि वे नियमों का पालन करें और प्रदूषण कम करने में प्रशासन का सहयोग करें।

  • डिंपल यादव का केंद्र पर तीखा हमला “नाम बदलने वाली सरकार पहले मनरेगा के आंकड़े पेश करे”

    डिंपल यादव का केंद्र पर तीखा हमला “नाम बदलने वाली सरकार पहले मनरेगा के आंकड़े पेश करे”

    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने केंद्र सरकार को लेकर एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार सिर्फ योजनाओं और संस्थानों के नाम बदलने में व्यस्त है, जबकि ग्रामीण रोजगार और मजदूरी जैसे अहम मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। मनरेगा को लेकर डिंपल यादव ने सरकार से सीधे सवाल पूछते हुए पिछले 10 वर्षों के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है।

    डिंपल यादव ने कहा,“यह नाम बदलने वाली सरकार है। पहले सरकार बताए कि पिछले 10 सालों में मनरेगा के तहत कितनी मजदूरी दी गई है। आंकड़े पेश करें, तभी सच्चाई सामने आएगी।”उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को कमजोर कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ रही है, मजदूरी समय पर नहीं मिल रही और काम के दिनों में कटौती की जा रही है। इसके बावजूद सरकार जमीनी हकीकत पर चर्चा करने के बजाय सिर्फ प्रचार और ब्रांडिंग में लगी है।

    सपा सांसद ने कहा कि मनरेगा देश के करोड़ों गरीब, किसान और मजदूर परिवारों की जीवनरेखा है। यह योजना सिर्फ रोजगार नहीं देती, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। लेकिन मौजूदा सरकार के कार्यकाल में मजदूरी भुगतान में देरी, बजट कटौती और काम के अवसर घटने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

    डिंपल यादव ने यह भी कहा कि अगर सरकार वाकई गरीबों और मजदूरों के हित में काम कर रही है, तो उसे मनरेगा से जुड़े भुगतान, काम के दिन और मजदूरी दर के पूरे आंकड़े देश के सामने रखने चाहिए। केवल योजनाओं के नाम बदलने से जनता की समस्याएं हल नहीं होंगी।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनावों के बाद विपक्ष अब रोजगार, महंगाई और ग्रामीण विकास को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है। मनरेगा जैसे मुद्दे को उठाकर समाजवादी पार्टी ने ग्रामीण और पिछड़े वर्गों को साधने की रणनीति अपनाई है।डिंपल यादव के इस बयान के बाद अब सभी की नजर केंद्र सरकार के जवाब पर है। सवाल साफ है—क्या सरकार मनरेगा के पिछले 10 सालों के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करेगी, या यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा?

  • बिहार में NDA की बंपर जीत के बाद पीएम मोदी ने सांसदों को दिया विशेष डिनर,पीएम ने साझा की तस्वीरें

    बिहार में NDA की बंपर जीत के बाद पीएम मोदी ने सांसदों को दिया विशेष डिनर,पीएम ने साझा की तस्वीरें

    बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की ऐतिहासिक जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात अपने आवास पर NDA के सभी सांसदों के लिए विशेष डिनर का आयोजन किया। यह आयोजन सिर्फ एक औपचारिक भोज नहीं बल्कि राजनीतिक मजबूती, टीम भावना और भविष्य की रणनीति का प्रतीक माना जा रहा है। पीएम मोदी ने स्वयं डिनर की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जिनमें सांसदों के साथ उनकी बातचीत और विभिन्न राज्यों के स्वादिष्ट व्यंजन दिखाई दे रहे हैं।

    पूरे देश की झलक दिखाता मेन्यू

    इस खास डिनर की सबसे बड़ी चर्चा इसका मेन्यू रहा, जिसमें देश के विविध राज्यों की पारंपरिक डिशें शामिल थीं।

    • आंध्र प्रदेश के मसालेदार व्यंजन,
    • बंगाल के मीठे व्यंजन,
    • कश्मीर का यखनी और दम आलू,
    • केरल का अप्पम और स्ट्यू,
    • गुजरात की खांडवी, ढोकला और हैंडवो,
    • महाराष्ट्र की पूरन पोली और मिसल,
    • साथ ही कई उत्तर भारतीय राज्यों के पारंपरिक पकवान भी मेन्यू में जोड़े गए थे।

    यह मेन्यू NDA की विविधता, समावेशिता और पूरे देश के प्रतिनिधित्व को दर्शाने का प्रतीक भी माना जा रहा है।

    पीएम मोदी और सांसदों के बीच अनौपचारिक बातचीत

    डिनर के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों के साथ अनौपचारिक और सकारात्मक बातचीत की। उन्होंने बिहार में मिली जीत को जनता के विश्वास का परिणाम बताया और कहा कि यह जीत टीम NDA के एकजुट प्रयासों का नतीजा है। पीएम ने सांसदों को आगे भी जनहित से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहने, विकास योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाने और लोगों से जुड़ाव बनाए रखने की सलाह दी।

    बिहार की जीत और आगे की रणनीति

    सूत्रों के अनुसार, डिनर के दौरान बिहार की जीत के बाद भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा हुई। केंद्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल, जनहित योजनाओं के क्रियान्वयन और संगठन को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी विचार किया गया।

    पीएम ने सोशल मीडिया पर शेयर कीं तस्वीरें

    पीएम मोदी द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में सांसदों के चेहरों पर उत्साह और जीत का आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। डिनर टेबल पर विभिन्न राज्यों के व्यंजनों की सजावट ने पूरे आयोजन को खास बना दिया।गौरतलब है कि बिहार की इस बंपर जीत ने न सिर्फ NDA का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है। यह डिनर उसी जीत का उत्सव और आगे की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।