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  • कानपुर में ऑटो गैंग का भंडाफोड़: 48 घंटे में 6 लुटेरे गिरफ्तार, लाखों की बरामदगी

    कानपुर में ऑटो गैंग का भंडाफोड़: 48 घंटे में 6 लुटेरे गिरफ्तार, लाखों की बरामदगी

    कानपुर।कानपुर से बड़ी खबर सामने आई है, जहां सेंट्रल जोन की सर्विलांस टीम और स्वरूपनगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ऑटो गैंग द्वारा की जा रही लूट की घटनाओं का खुलासा किया है। पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर लूट में शामिल 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है।पुलिस के अनुसार, यह गैंग ऑटो का इस्तेमाल कर सेल्समैन और व्यापारियों को निशाना बनाता था। बीती 25 तारीख को आरोपियों ने एक सेल्समैन के साथ लूट की वारदात को अंजाम दिया था, जिसमें स्कूटी समेत 3 लाख 90 हजार रुपये नकद लूट लिए गए थे।

    बरामदगी में नकदी और वाहन शामिल

    पुलिस टीम ने गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से 1 लाख 73 हजार रुपये नकद, एक स्कूटी, मोबाइल फोन, एक ऑटो और एक बुलेरो गाड़ी बरामद की है। जांच में सामने आया है कि लूट में शामिल कई अभियुक्तों के खिलाफ पहले से ही अपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

    ऑटो गैंग का तरीका

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ऑटो के जरिए संभावित शिकार की रेकी करते थे और मौका पाकर लूट की घटना को अंजाम देते थे। वारदात के बाद ये लोग तेजी से इलाके से फरार हो जाते थे, जिससे इनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता था।

    पुलिस टीम को मिलेगा इनाम

    इस सफल कार्रवाई पर डीसीपी सेंट्रल श्रवण कुमार सिंह ने पुलिस टीम की सराहना करते हुए 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ इस तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।पुलिस फिलहाल आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस गैंग ने शहर में और कितनी वारदातों को अंजाम दिया है। कानपुर पुलिस की इस कार्रवाई से शहरवासियों में सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ा है।

  • लखनऊ में दर्दनाक मामला: बहनों की आत्महत्या के बाद पालतू कुत्ते टोनी की भी मौत

    लखनऊ में दर्दनाक मामला: बहनों की आत्महत्या के बाद पालतू कुत्ते टोनी की भी मौत

    लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। पालतू कुत्ते की बीमारी से मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने वाली दो सगी बहनों के मामले के बाद अब उसी पालतू कुत्ते ‘टोनी’ की भी मौत हो गई है। इस घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है।जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले लखनऊ में रहने वाली दो सगी बहनों ने अपने पालतू कुत्ते टोनी की गंभीर बीमारी से अत्यधिक मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या कर ली थी। दोनों बहनों का अपने पालतू कुत्ते से गहरा भावनात्मक लगाव था। कुत्ते की बिगड़ती हालत को देखकर वे लगातार अवसाद में थीं।

    बीमारी से जूझ रहा था पालतू कुत्ता

    बताया जा रहा है कि पालतू कुत्ता टोनी लंबे समय से बीमार चल रहा था और उसका इलाज भी कराया जा रहा था। बहनों की मौत के बाद टोनी की हालत और बिगड़ती चली गई। पशु चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद आखिरकार टोनी ने भी दम तोड़ दिया।

    इलाके में शोक की लहर

    बहनों और अब उनके पालतू कुत्ते की मौत के बाद मोहल्ले में शोक और सन्नाटे का माहौल है। स्थानीय लोग इस घटना को बेहद दर्दनाक और भावनात्मक बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह मामला मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक लगाव की गंभीरता को दर्शाता है।

    मानसिक स्वास्थ्य पर उठे सवाल

    यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि मानसिक तनाव और भावनात्मक जुड़ाव किस हद तक इंसान को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तरह के गहरे तनाव की स्थिति में समय पर काउंसलिंग और परामर्श बेहद जरूरी है।फिलहाल पुलिस ने पहले से दर्ज मामले में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। प्रशासन की ओर से भी लोगों से अपील की गई है कि मानसिक दबाव की स्थिति में परिवार, मित्रों या विशेषज्ञों से मदद जरूर लें।

  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले की गाड़ी ने DSP को पीछे से मारी टक्कर

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले की गाड़ी ने DSP को पीछे से मारी टक्कर

    दीदारगंज।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कारकेड से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें सुरक्षा काफिले में शामिल एक स्कॉर्पियो वाहन ने ड्यूटी पर तैनात DSP को टक्कर मार दी। गनीमत रही कि इस घटना में कोई गंभीर हादसा नहीं हुआ, लेकिन यह घटना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।यह पूरा मामला दीदारगंज इलाके का बताया जा रहा है, जहां से घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मुख्यमंत्री के कारकेड में शामिल एक स्कॉर्पियो अचानक आगे बढ़ती है और सामने मौजूद DSP को टक्कर मार देती है। टक्कर लगते ही मौके पर अफरा-तफरी मच जाती है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना बेहद गंभीर हो सकती थी, लेकिन समय रहते संतुलन बनने से DSP की जान बच गई। घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद अन्य सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को संभाला और कारकेड को आगे बढ़ाया गया।इस पूरे घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में चूक को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि जब मुख्यमंत्री का काफिला गुजर रहा था, तो इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, स्कॉर्पियो चालक की लापरवाही या गलत अनुमान के चलते यह टक्कर हुई।

    फिलहाल इस मामले में पुलिस स्तर पर जांच की बात कही जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि वाहन चालक ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया या नहीं। घटना में शामिल वाहन और ड्राइवर की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को शेयर करते हुए मुख्यमंत्री की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे बड़ी चूक बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।हालांकि, इस घटना में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह साफ है कि थोड़ी सी चूक बड़े हादसे में बदल सकती थी

  • बांग्लादेश हिंसा पर जान्हवी कपूर का बयान, दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग को बताया कत्लेआम

    बांग्लादेश हिंसा पर जान्हवी कपूर का बयान, दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग को बताया कत्लेआम

    मुंबई।बॉलीवुड एक्ट्रेस जान्हवी कपूर ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग का जिक्र करते हुए इसे खुलकर “कत्लेआम” करार दिया है। जान्हवी कपूर का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है।

    जान्हवी कपूर ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर अंग्रेजी भाषा में पोस्ट साझा किया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, “दीपू चंद्र दास… यह कत्लेआम है और यह कोई अकेली घटना नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर लोगों को इस युवक की बेरहमी से की गई मॉब लिंचिंग के बारे में जानकारी नहीं है, तो उन्हें इस विषय में पढ़ना चाहिए और सच्चाई जाननी चाहिए।

    अपने संदेश में जान्हवी कपूर ने केवल घटना की निंदा ही नहीं की, बल्कि लोगों से जागरूक होने और सवाल उठाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे मामलों में चुप नहीं रहना चाहिए और सांप्रदायिक भेदभाव के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी चाहिए।जान्हवी कपूर ने यह भी संकेत दिया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा कोई एकल घटना नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर और लगातार सामने आ रही समस्या है। उनका कहना था कि इस तरह की घटनाओं पर आंखें मूंद लेना भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

    एक्ट्रेस के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स ने उनके साहसिक रुख की सराहना की है, जबकि कुछ लोगों ने इस मुद्दे पर और कड़े अंतरराष्ट्रीय कदम उठाने की मांग की है। जान्हवी कपूर का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है।

    फिलहाल, जान्हवी कपूर के इस बयान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सेलेब्रिटीज की आवाज सामाजिक और मानवीय मुद्दों पर बड़ी भूमिका निभा सकती है।

  • हार्दिक पांड्या के साथ फैन की बदतमीजी, कहा- “भाड़ में जाओ”, खिलाड़ी ने नहीं दी प्रतिक्रिया

    हार्दिक पांड्या के साथ फैन की बदतमीजी, कहा- “भाड़ में जाओ”, खिलाड़ी ने नहीं दी प्रतिक्रिया

    नई दिल्ली।भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनके खेल से नहीं बल्कि एक फैन के व्यवहार से जुड़ी है। हाल ही में हार्दिक पांड्या के साथ एक फैन ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए बदतमीजी की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    बताया जा रहा है कि घटना के दौरान एक फैन ने हार्दिक पांड्या से बेहद आपत्तिजनक तरीके से बात करते हुए कहा, “भाड़ में जाओ”। इस अप्रत्याशित और असभ्य टिप्पणी से मौके पर मौजूद लोग भी हैरान रह गए। हालांकि, हार्दिक पांड्या ने पूरे संयम के साथ इस टिप्पणी को नजरअंदाज किया और कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।हार्दिक का यह शांत और परिपक्व रवैया सोशल मीडिया पर सराहना बटोर रहा है। कई यूजर्स का कहना है कि एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी होने के नाते उन्हें अक्सर इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन हार्दिक ने जिस तरह खुद पर नियंत्रण रखा, वह काबिल-ए-तारीफ है।

    यह पहली बार नहीं है जब किसी खिलाड़ी को फैन की बदतमीजी का सामना करना पड़ा हो। लोकप्रियता के साथ-साथ क्रिकेटरों को आलोचना और नकारात्मक प्रतिक्रियाओं का भी सामना करना पड़ता है। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर फैन कल्चर और खिलाड़ियों के निजी सम्मान को लेकर बहस छेड़ दी है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर कुछ लोग फैन के व्यवहार की निंदा कर रहे हैं, वहीं कई लोग हार्दिक पांड्या के संयम और प्रोफेशनल रवैये की तारीफ कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खिलाड़ियों को भी सम्मान मिलना चाहिए और फैंस को अपनी सीमाएं समझनी चाहिए।

    फिलहाल, इस पूरे मामले पर हार्दिक पांड्या की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन जिस तरह उन्होंने बिना प्रतिक्रिया दिए स्थिति को संभाला, वह युवा खिलाड़ियों और फैंस दोनों के लिए एक सकारात्मक संदेश माना जा रहा है।

  • समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी को राष्ट्रपति ने दिया बाल पुरस्कार, बोलीं- ये तो शुरुआत है

    समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी को राष्ट्रपति ने दिया बाल पुरस्कार, बोलीं- ये तो शुरुआत है

    समस्तीपुर।बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले वैभव सूर्यवंशी के लिए यह दिन गर्व और सम्मान का रहा, जब उन्हें राष्ट्रपति बाल पुरस्कार से नवाजा गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह के दौरान महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वैभव को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वैभव सूर्यवंशी की सराहना करते हुए कहा, “यह तो केवल शुरुआत है। आने वाले समय में देश के बाकी बच्चे आपको फॉलो करेंगे।” राष्ट्रपति के इन शब्दों ने न केवल वैभव, बल्कि देशभर के बच्चों को प्रेरणा देने का काम किया।राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि आज के बच्चे ही कल का भारत हैं और उनकी प्रतिभा को पहचानकर प्रोत्साहित करना देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि वैभव सूर्यवंशी जैसे प्रतिभाशाली बच्चे यह साबित करते हैं कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

    वैभव सूर्यवंशी बाल पुरस्कार मिलने के बाद उनके परिवार, शिक्षकों और जिले के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। समस्तीपुर में लोगों ने इस उपलब्धि को पूरे जिले के लिए गर्व का क्षण बताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वैभव की सफलता अन्य बच्चों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभाशाली बच्चों को भी सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति ने सभी पुरस्कार विजेताओं से समाज और देश के लिए सकारात्मक योगदान देने का आह्वान किया।

    वैभव सूर्यवंशी की इस उपलब्धि को बिहार के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। शिक्षा और प्रतिभा के क्षेत्र में यह सम्मान राज्य के बच्चों को आगे बढ़ने का हौसला देगा। राष्ट्रपति के शब्दों में कहा जाए तो यह सम्मान वैभव के लिए मंज़िल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है।

  • सीतापुर के परसेंडी ब्लॉक में मनरेगा भ्रष्टाचार, 5 मजदूर मौके पर 70 कागजों में

    सीतापुर के परसेंडी ब्लॉक में मनरेगा भ्रष्टाचार, 5 मजदूर मौके पर 70 कागजों में

    संवाददाता शिवाकांत दीक्षित उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से मनरेगा में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। विकासखंड परसेंडी की ग्राम पंचायत धरनाग में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीनी हकीकत और सरकारी रिकॉर्ड में भारी अंतर देखने को मिल रहा है।

    मौके की स्थिति यह है कि कार्यस्थल पर केवल 5 श्रमिक काम करते हुए पाए जाते हैं, जबकि ऑनलाइन और कागजी रिकॉर्ड में 65 से 70 श्रमिकों की उपस्थिति लगातार दर्ज की जा रही है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सीतापुर मनरेगा भ्रष्टाचार के तहत फर्जी मजदूर दिखाकर सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है।

    आरोप है कि इस पूरे मामले में खंड विकास अधिकारी (BDO), ग्राम सचिव, तकनीकी सहायक, ग्राम प्रधान और डीसी मनरेगा की मिलीभगत से सरकार के साथ आंख मिचौली का खेल खेला जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह भ्रष्टाचार केवल धरनाग पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि सीतापुर जिले के अन्य विकासखंडों में भी इसी तरह की गतिविधियां सामने आ रही हैं।

    जानकारी के अनुसार हरगांव विकासखंड की ग्राम पंचायत सिकंदरपुर में भी मनरेगा के तहत इसी तरह का भ्रष्टाचार अंजाम दिया जा रहा है। आरोप यह भी है कि जिला स्तर के कुछ सक्षम अधिकारियों की सहमति से इस पूरे सिस्टम को संरक्षण मिल रहा है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

    जब इस मामले में विकासखंड स्तर के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। वहीं, जिला स्तरीय डीसी मनरेगा से बात करने का प्रयास भी असफल रहा। अधिकारियों की यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और आरोपों को और मजबूती देती है।

    मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में इस तरह का भ्रष्टाचार न केवल सरकार की मंशा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि ग्रामीण मजदूरों के हक पर भी डाका डालता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शासन स्तर पर इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।

  • अटल बिहारी वाजपेयी का विश्वास और सिद्धांत, जन्मदिन पर जानिए घर के पते से जुड़ा किस्सा

    अटल बिहारी वाजपेयी का विश्वास और सिद्धांत, जन्मदिन पर जानिए घर के पते से जुड़ा किस्सा

    भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि विश्वास, सिद्धांत और सादगी की मिसाल थे। उनके जन्मदिन के अवसर पर उनसे जुड़ा एक ऐसा किस्सा सामने आता है, जो आज भी राजनीति और समाज दोनों के लिए प्रेरणा देता है। यह कहानी उनके घर के पते से जुड़ी है, लेकिन इसके मायने बहुत गहरे हैं।

    अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी के लिए जाना गया। कहा जाता है कि जब वह सक्रिय राजनीति में थे, तब उनके नाम से आने वाले पत्रों और दस्तावेजों में उनके घर का पता बेहद साधारण तरीके से लिखा जाता था। एक बार अधिकारियों ने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए उनके आवास का पता औपचारिक और भव्य रूप में दर्ज किया जाए। लेकिन अटल जी ने इसे विनम्रता से ठुकरा दिया।

    उन्होंने साफ कहा कि घर का पता बदलने से व्यक्ति की पहचान नहीं बदलती। उनका मानना था कि पद अस्थायी होते हैं, लेकिन सिद्धांत और विश्वास स्थायी होते हैं। यही कारण था कि उन्होंने कभी अपने पद का उपयोग व्यक्तिगत सुविधा या दिखावे के लिए नहीं किया।

    अटल बिहारी वाजपेयी जन्मदिन किस्सा यह भी बताता है कि वह सत्ता को सेवा का माध्यम मानते थे। उनके लिए राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति नहीं, बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी थी। यही वजह है कि उनके निर्णयों में व्यक्तिगत लाभ के बजाय राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा।

    अटल जी की सादगी उनके पूरे जीवन में झलकती रही। चाहे पहनावा हो, रहन-सहन हो या फिर व्यवहार—हर जगह उनकी सरलता लोगों को प्रभावित करती थी। उनके इसी स्वभाव ने उन्हें विरोधियों के बीच भी सम्मान दिलाया।

    आज के राजनीतिक दौर में अटल बिहारी वाजपेयी का यह किस्सा हमें याद दिलाता है कि सच्चा नेता वही होता है जो सिद्धांतों से कभी समझौता न करे। उनके जन्मदिन पर यह कहानी सिर्फ स्मरण नहीं, बल्कि एक सीख है कि विश्वास और ईमानदारी ही किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान होती है।

  • छिबरामऊ में धूमधाम से मना यूपी उद्योग व्यापार मंडल का 52वां स्थापना दिवस

    छिबरामऊ में धूमधाम से मना यूपी उद्योग व्यापार मंडल का 52वां स्थापना दिवस

    संवाददाता जय गुप्ता छिबरामऊ, कन्नौज में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल का स्थापना दिवस धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। विशुनगढ़ रोड स्थित लिटिल स्टार मैरिज लॉन में आयोजित इस समारोह में संगठन के 52 वर्षों के गौरवशाली इतिहास, संघर्ष और उपलब्धियों को याद किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में व्यापारी, पदाधिकारी और संगठन से जुड़े लोग मौजूद रहे।

    इस अवसर पर प्रदेश कार्य समिति सदस्य एवं नगर पालिका अध्यक्ष मनोज दुबे ने कहा कि उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल का 52 वर्षों का सफर संघर्ष, विश्वास और व्यापारियों के स्वाभिमान की कहानी है। उन्होंने कहा कि संगठन ने हर दौर में व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए मजबूती से आवाज उठाई है।

    वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष एवं खाटू श्याम सेवा समिति के अध्यक्ष विवेक गुप्ता ने कहा कि यह संगठन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक आंदोलन और एक परिवार है, जिस पर प्रदेश के लाखों व्यापारियों का अटूट विश्वास है। उन्होंने संगठन की एकजुटता और मजबूती पर जोर दिया।

    नगर अध्यक्ष शैलेंद्र गुप्ता लालू ने कहा कि अपनी स्थापना से लेकर अब तक संगठन ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन व्यापारियों के सम्मान और स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया। चाहे इंस्पेक्टर राज के खिलाफ संघर्ष हो, कर सुधारों की मांग हो या व्यापारियों पर हो रहे उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठानी हो, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल हमेशा एक मजबूत ढाल बनकर खड़ा रहा है।

    किराना एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने संगठन को प्रदेश का सबसे पुराना, सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली व्यापारी संगठन बताया। उन्होंने कहा कि इसकी जड़ें प्रदेश के हर जिले, तहसील और कस्बे तक फैली हुई हैं, जिससे यह व्यापारियों की आवाज को मजबूती प्रदान करता है।

    कार्यक्रम के दौरान विधिक बाट-माप विज्ञान विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली और समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। व्यापारियों ने अपनी समस्याएं रखीं और उनके समाधान की मांग की।

    इस अवसर पर बृजेश गुप्ता, वेद प्रकाश राठौर, सत्यनारायण वर्मा, आनंद गुप्ता, नरेश गुप्ता गोल्डी, प्रभाकर गुप्ता, अनिल यादव, अमित भारतीय, अनुपम वर्मा, प्रियांशु गुप्ता, रामू गुप्ता, दीपक किराना, इमरान खान सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।

  • विजय हजारे ट्रॉफी में ईशन किशन का तूफानी शतक, 33 गेंदों में रचा इतिहास

    विजय हजारे ट्रॉफी में ईशन किशन का तूफानी शतक, 33 गेंदों में रचा इतिहास

    विजय हजारे ट्रॉफी में ईशन किशन का शतक भारतीय घरेलू क्रिकेट में चर्चा का विषय बन गया है। झारखंड के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशन किशन ने कर्नाटक के खिलाफ मात्र 33 गेंदों में शतक जड़कर नया इतिहास रच दिया। यह मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया, जहां किशन ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

    ईशन किशन ने मैच की शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने कर्नाटक के गेंदबाजों पर कोई रहम नहीं दिखाया और मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट्स लगाए। उनकी इस पारी में चौकों और छक्कों की भरमार देखने को मिली। केवल 33 गेंदों में शतक पूरा कर उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी के इतिहास में दूसरा सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया।

    विजय हजारे ट्रॉफी में ईशन किशन का शतक इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह पारी दबाव भरे मुकाबले में आई। कर्नाटक जैसी मजबूत टीम के खिलाफ किशन ने जिस आत्मविश्वास और आक्रामकता के साथ बल्लेबाजी की, उसने मैच की दिशा ही बदल दी। उनकी पारी की बदौलत झारखंड की टीम बड़े स्कोर की ओर तेजी से बढ़ी।

    नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने ईशन किशन की बल्लेबाजी का जमकर आनंद लिया। हर बाउंड्री और छक्के के साथ स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पारियां घरेलू क्रिकेट के स्तर को और ऊंचा उठाती हैं।

    इस शतक के साथ ईशन किशन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वह सीमित ओवरों के प्रारूप में कितने खतरनाक बल्लेबाज हैं। उनकी यह पारी आने वाले समय में चयनकर्ताओं का भी ध्यान आकर्षित कर सकती है। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन से किशन ने अपनी दावेदारी मजबूत की है।

    कुल मिलाकर, विजय हजारे ट्रॉफी में ईशन किशन का शतक न सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारतीय घरेलू क्रिकेट के लिए भी एक यादगार पल बन गया है।