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Category: स्वास्थ्य

“स्वास्थ्य से जुड़ी नवीनतम जानकारियाँ, रोगों की पहचान से लेकर इलाज तक। फिटनेस, डाइट और जीवनशैली से जुड़े टिप्स भी पढ़ें, हमारी हेल्थ कैटेगरी में।”

  • Lohri 2026: लोहड़ी पर तिल, मूंगफली और गुड़ क्यों खाते हैं? जानें साइंस

    Lohri 2026: लोहड़ी पर तिल, मूंगफली और गुड़ क्यों खाते हैं? जानें साइंस

    Lohri 2026 का त्योहार हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है और इस दिन उत्तर भारत में खास तौर पर आग जलाकर, ढोल-नगाड़ों के साथ नाच-गाना किया जाता है। लोहड़ी का नाम आते ही तिल, मूंगफली और गुड़ की खुशबू हर घर में फैल जाती है। अधिकतर लोग इसे सिर्फ परंपरा मानकर निभाते हैं, लेकिन असल में इसके पीछे दादी-नानी का ऐसा साइंस छिपा है, जो आज भी पूरी तरह सही साबित होता है।जनवरी के मध्य में जब ठंड अपने चरम पर होती है, तब शरीर को ज्यादा ऊर्जा, अंदरूनी गर्माहट और मजबूत पाचन की जरूरत होती है। Lohri 2026 पर खाया जाने वाला पारंपरिक भोजन इसी जरूरत को ध्यान में रखकर चुना गया है।

    तिल खाने के फायदे

    तिल की तासीर गर्म होती है। इसमें हेल्दी फैट, कैल्शियम और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। सर्दियों में तिल खाने से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है और शरीर को अंदर से गर्माहट मिलती है। यही वजह है कि लोहड़ी पर तिल के लड्डू और रेवड़ी खास तौर पर बनाए जाते हैं।

    मूंगफली क्यों है जरूरी

    मूंगफली को एनर्जी बूस्टर माना जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और अच्छे फैट होते हैं, जो सर्द मौसम में शरीर को ताकत देते हैं। ठंड में जब शरीर ज्यादा कैलोरी खर्च करता है, तब मूंगफली उसे संतुलित रखने में मदद करती है। Lohri 2026 के मौके पर मूंगफली खाना शरीर की ऊर्जा जरूरत को पूरा करता है।

    गुड़ क्यों माना जाता है सुपरफूड

    गुड़ आयरन से भरपूर होता है और पाचन को मजबूत करता है। यह शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करता है। सर्दियों में गुड़ खाने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और ठंड से लड़ने की ताकत मिलती है। यही कारण है कि लोहड़ी पर तिल-गुड़ का खास महत्व है।

    दादी-नानी का साइंस कितना सही?

    बिना किसी लैब रिसर्च के हमारे पूर्वजों ने यह समझ लिया था कि मौसम के अनुसार खानपान बदलना जरूरी है। Lohri 2026 पर खाया जाने वाला पारंपरिक भोजन आज के न्यूट्रिशन साइंस के अनुसार भी पूरी तरह सही बैठता है। यह त्योहार सिर्फ खुशियां मनाने का नहीं, बल्कि शरीर को मौसम के अनुसार संतुलित रखने का भी संदेश देता है।इसलिए लोहड़ी पर तिल, मूंगफली और गुड़ खाना सिर्फ रिवाज नहीं, बल्कि सेहत का एक नेचुरल फॉर्मूला है।

  • Roasted Chana Aur Gud: सेहत का देसी सुपरफूड, जानिए भुने चने और गुड़ खाने के जबरदस्त फायदे

    Roasted Chana Aur Gud: सेहत का देसी सुपरफूड, जानिए भुने चने और गुड़ खाने के जबरदस्त फायदे

    Roasted Chana Aur Gud : भुने चने को पोषण का खजाना कहा जाए तो गलत नहीं होगा। चना प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है और जब इसे गुड़ के साथ खाया जाता है, तो इसका पोषण कई गुना बढ़ जाता है। भुने चने और गुड़ का कॉम्बिनेशन स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह पाचन सुधारने, खून की कमी दूर करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार हो सकता है।

    भुने चने के पोषक तत्व (Nutritional Value of Roasted Gram)

    भुने चनों में पाए जाते हैं प्रोटीन, फाइबर,आयरन,मैग्नीशियम,जिंक,कैल्शियम,फोलेट,कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट,एंटीऑक्सीडेंट्स

    गुड़ के पोषक तत्व (Nutrients of Jaggery)

    गुड़ में मौजूद होते हैं कार्बोहाइड्रेट और सुक्रोज,आयरन,कैल्शियम,मैग्नीशियम,पोटैशियम,फास्फोरस,विटामिन A, C और E, जिंक, कॉपर, मैंगनीज


    भुने चने और गुड़ खाने के फायदे (Bhune Chane Gud Khane Ke Fayde)

    1. इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार

    भुने चने और गुड़ का सेवन शरीर की कमजोर इम्यूनिटी को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स संक्रमण से बचाव में मदद करते हैं।

    2. हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत

    भुने चने कैल्शियम, फास्फोरस और प्रोटीन से भरपूर होते हैं। गुड़ के साथ सेवन करने पर हड्डियां मजबूत होती हैं और मांसपेशियों को भी ताकत मिलती है।

    3. खून की कमी दूर करने में सहायक

    गुड़ और चने दोनों ही आयरन से भरपूर होते हैं। नियमित सेवन से हीमोग्लोबिन बढ़ाने और एनीमिया की समस्या में राहत मिल सकती है।

    4. पाचन तंत्र को रखे दुरुस्त

    भुने चने में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है। वहीं गुड़ कब्ज की समस्या को दूर करने में मदद करता है।

    5. वजन कंट्रोल में सहायक

    भुने चने और गुड़ लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव होता है।

    6. एनर्जी बूस्टर

    यह देसी सुपरफूड शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, इसलिए इसे सुबह या वर्कआउट से पहले खाना फायदेमंद माना जाता है।

  • लहसुन के माउथवॉश के फायदे: मुंह के बैक्टीरिया और मसूड़ों की सुरक्षा

    लहसुन के माउथवॉश के फायदे: मुंह के बैक्टीरिया और मसूड़ों की सुरक्षा

    आज के समय में माउथवॉश का इस्तेमाल मुंह की सफाई और फ्रेशनिंग के लिए आम हो गया है। बाजार में पुदीना, नींबू और अन्य फ्लेवर्ड माउथवॉश उपलब्ध हैं। लेकिन क्या आपने कभी लहसुन का माउथवॉश इस्तेमाल करने के बारे में सोचा है? हां, लहसुन का पानी या गार्लिक माउथवॉश भी मुंह के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है।

    लहसुन के माउथवॉश के फायदे

    1. मुंह के बैक्टीरिया कम करें
    लहसुन में मौजूद एलिसिन नामक सक्रिय कंपाउंड पावरफुल एंटीमाइक्रोबियल एजेंट है। यह मुंह के बैक्टीरिया को कम करने में मदद करता है और दांतों और मसूड़ों को संक्रमण से बचाता है।

    2. मसूड़ों की सूजन घटाएं
    यदि मसूड़ों में सूजन या दर्द की समस्या है तो लहसुन का माउथवॉश इसके लिए राहत दे सकता है। नियमित कुल्ला करने से मसूड़ों में सूजन और लालिमा कम होने लगती है।

    3. मुंह के संक्रमण से बचाव
    एलिसिन के एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को नियंत्रित करते हैं। इससे दांतों और मसूड़ों के आसपास संक्रमण कम होता है और सांस भी ताजगी भरी रहती है।

    घर पर लहसुन का माउथवॉश कैसे बनाएं

    सामग्री और तैयारी:

    • 1-2 लहसुन की कलियां
    • 1 कप पानी

    लहसुन को अच्छी तरह कूटकर पानी में डालें। इसे 1-2 मिनट उबालकर गुनगुना कर लें।

    इस्तेमाल करने का तरीका:

    • कुल्ला करने के लिए गुनगुने लहसुन के पानी को मुंह में डालें।
    • इसे 30 सेकंड तक अच्छी तरह घुमाएं और थूक दें।
    • कुल्ला करने के बाद दांतों को ब्रश करें।

    ध्यान रखें कि इसे ज्यादा देर तक मुंह में न रखें क्योंकि इससे मसूड़ों में इरिटेशन हो सकती है। सप्ताह में 2-3 बार लहसुन के माउथवॉश का इस्तेमाल करना मुंह के स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त है। लहसुन का माउथवॉश एक सस्ता, प्राकृतिक और प्रभावी उपाय है जो बैक्टीरिया कम करने, मसूड़ों की सूजन घटाने और मुंह की ताजगी बनाए रखने में मदद करता है। इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है और नियमित इस्तेमाल से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं

  • Cold Coffee vs Hot Coffee: मौसम और स्वाद के हिसाब से कौन है बेहतर विकल्प?

    Cold Coffee vs Hot Coffee: मौसम और स्वाद के हिसाब से कौन है बेहतर विकल्प?

    Cold Coffee vs Hot Coffee: कॉफी प्रेमियों के बीच यह सवाल हमेशा बना रहता है कि कोल्ड कॉफी बेहतर है या हॉट कॉफी। खासकर जब मौसम बदलता है कभी तेज़ गर्मी तो कभी कड़ाके की ठंड तो कॉफी की पसंद भी बदल जाती है। दरअसल, दोनों ही कॉफी की अपनी-अपनी खासियतें हैं और यह पूरी तरह आपके मूड, मौसम और स्वाद पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं विस्तार से कि किस मौसम में कौन-सी कॉफी आपके लिए ज्यादा बेहतर साबित हो सकती है।

    कोल्ड कॉफी: गर्मियों में ठंडक और ताजगी का अहसास

    गर्मियों के मौसम में जब तापमान 40 डिग्री के पार चला जाता है, तब कोल्ड कॉफी एक परफेक्ट ड्रिंक बन जाती है। बर्फ के टुकड़ों, दूध और क्रीमी फ्लेवर से तैयार की गई कोल्ड कॉफी न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है, बल्कि तुरंत ताजगी का एहसास भी कराती है।कोल्ड कॉफी उन लोगों के लिए खास होती है जिन्हें मीठा और स्मूद फ्लेवर पसंद है। इसमें चॉकलेट, वनीला या कैरामेल जैसे फ्लेवर जोड़कर इसे और भी स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। इसके शीतल प्रभाव से मानसिक थकान भी कम होती है और गर्मी में एनर्जी लेवल बना रहता है। यही वजह है कि युवा वर्ग और ऑफिस जाने वाले लोग गर्मियों में कोल्ड कॉफी को ज्यादा पसंद करते हैं।

    हॉट कॉफी: सर्दियों में गर्माहट और सुकून

    वहीं सर्दियों की सुबह या ठंडी शाम में हॉट कॉफी का मज़ा ही कुछ और होता है। एक कप गर्म कॉफी न सिर्फ शरीर को अंदर से गर्म रखती है, बल्कि दिमाग को भी रिलैक्स करती है।हॉट कॉफी का स्वाद अधिक गहरा और स्ट्रॉन्ग होता है, खासकर अगर आप ब्लैक कॉफी या बिना चीनी वाली कॉफी पसंद करते हैं। सर्दियों में हॉट कॉफी पीने से सुस्ती कम होती है और काम करने की ऊर्जा मिलती है। यही कारण है कि ठंड के मौसम में लोग चाय की जगह हॉट कॉफी को प्राथमिकता देने लगे हैं।

    आखिर कौन-सी कॉफी है बेहतर?

    सच यह है कि कोल्ड और हॉट कॉफी दोनों ही अपने-अपने मौसम की हीरो हैं।गर्मियों में ताजगी और ठंडक के लिए कोल्ड कॉफी सर्दियों में गर्माहट और आराम के लिए हॉट कॉफीआखिरकार, यह फैसला आपके मूड, मौसम और स्वाद पर निर्भर करता है। सही समय पर सही कॉफी चुनें और हर घूंट का आनंद लें।

  • Sardiyon Me Amrud Khane Ke Fayde: सर्दियों में अमरूद खाने के 10 बड़े फायदे जो सेहत के लिए वरदान हैं

    Sardiyon Me Amrud Khane Ke Fayde: सर्दियों में अमरूद खाने के 10 बड़े फायदे जो सेहत के लिए वरदान हैं

    Sardiyon Me Amrud Khane Ke Fayde:सर्दियों का मौसम आते ही बाज़ार में एक खास फल की भरमार हो जाती है, और वो है अमरूद (Guava). यह स्वादिष्ट और कुरकुरा फल न केवल खाने में मज़ेदार होता है, बल्कि सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. हालांकि अमरूद पूरे साल मिलता है, लेकिन सर्दियों में आने वाला अमरूद स्वाद और गुणों में लाजवाब होता है. अगर आप जानना चाहते हैं कि ठंड के मौसम में अमरूद क्यों खाना चाहिए और इसके क्या-क्या फायदे हैं, तो यह लेख आपके लिए है. हम आसान और बोलचाल की भाषा में अमरूद खाने के फ़ायदों (Amrud Khane Ke Fayde) के बारे में बात करेंगे.

    1. इम्यूनिटी को बनाता है सुपर स्ट्रॉन्ग

    अमरूद विटामिन C का बेहतरीन स्रोत है। मज़े की बात यह है कि एक अमरूद में संतरे से भी 4 गुना ज़्यादा विटामिन C पाया जाता है। यह सर्दियों में होने वाले सर्दी-जुकाम, वायरल इंफेक्शन और फ्लू से बचाने में बेहद मददगार है। रोज़ाना एक अमरूद खाने से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है।

    2. पाचन और कब्ज़ की समस्या में बेहद फायदेमंद

    सर्दियों में ज्यादातर लोगों का पाचन धीमा हो जाता है। अमरूद में मौजूद डाइटरी फाइबर पेट को साफ रखता है, कब्ज़ दूर करता है और पाचन बेहतर बनाता है। गैस, एसिडिटी, अपच जैसी समस्याओं में यह बेहद लाभकारी है।

    3. ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करे

    अमरूद डायबिटीज़ रोगियों के लिए भी बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसमें प्राकृतिक फाइबर और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, जो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करता है। सर्दियों में मीठा खाने का मन ज़्यादा करता है, ऐसे में अमरूद एक हेल्दी विकल्प है।

    4. वजन घटाने में मदद

    अमरूद कैलोरी में कम और पोषण में ज़्यादा होता है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और अनहेल्दी स्नैकिंग की आदत को कम करता है। इसलिए सर्दियों में वजन घटाने के लिए यह एक बेहतरीन फल है।

    5. त्वचा और चेहरे पर ग्लो लाए

    अमरूद में मौजूद विटामिन C, A और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री-रैडिकल्स से बचाते हैं। यह स्किन को टाइट करता है, झुर्रियां कम करता है और चेहरे पर प्राकृतिक ग्लो लाता है। ठंड में रूखी त्वचा से राहत पाने के लिए इसका सेवन बेहद लाभकारी है।

    6. दिल को स्वस्थ रखे

    अमरूद में लाइकोपीन, पोटेशियम और फाइबर दिल की सेहत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह कोलेस्ट्रॉल कम करता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है और हार्ट अटैक के जोखिम को कम करता है।

    7. एनीमिया से बचाए

    अमरूद में आयरन और फोलेट की मात्रा भी अच्छी होती है, जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है। सर्दियों में थकान और कमजोरी से जूझ रहे लोगों के लिए यह पौष्टिक फल वरदान है।

    8. आंखों की रोशनी बढ़ाए

    अमरूद में विटामिन A पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी बरकरार रखने में मदद करता है। यह रात में दिखने में आने वाली समस्या (Night Blindness) से भी बचाता है।

    9. मेटाबॉलिज़्म को तेज करे

    सर्दियों में शरीर का मेटाबॉलिज़्म थोड़ा धीमा पड़ जाता है। अमरूद में मौजूद पोषक तत्व मेटाबॉलिज़्म को एक्टिव और तेज रखते हैं।

    10. कैंसर से बचाने में सहायक

    अमरूद में एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे लाइकोपीन और विटामिन C कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में मदद करते हैं। यह शरीर को हाई ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से भी बचाता है।

  • LiceTreatment : सिर की जूं से छुटकारा पाने के 3 असरदार घरेलू नुस्खे, योग गुरु ने बताए आसान उपाय

    LiceTreatment : सिर की जूं से छुटकारा पाने के 3 असरदार घरेलू नुस्खे, योग गुरु ने बताए आसान उपाय

    नई दिल्ली: सिर में जूं (Lice) होना सिर्फ बच्चों में ही नहीं, बल्कि बड़ों में भी परेशानी का कारण बन सकता है। इससे स्कैल्प में खुजली, इरिटेशन और बालों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। बाजार में मिलने वाले एंटी-लाइस प्रोडक्ट्स तुरंत राहत तो देते हैं, लेकिन लंबे समय तक असर नहीं करते। ऐसे में घरेलू नुस्खे बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। योग गुरु और लेखिका हंसाजी योगेन्द्र ने अपने यूट्यूब चैनल पर 3 ऐसे प्राकृतिक उपाय बताए हैं, जिनसे जूं और उनके अंडों को प्रभावी रूप से हटाया जा सकता है।

    1. नीम के पत्तों से हेयर रिन्स (Neem Water Hair Rinse)

    नीम अपने एंटीबैक्टीरियल और एंटीपैरासिटिक गुणों के लिए जाना जाता है। यह जूं को खत्म करने का एक प्राकृतिक उपाय है।
    इसके लिए कुछ ताजे नीम के पत्तों को पानी में उबाल लें। पानी ठंडा होने के बाद इससे बालों को धोएं।
    नीम से जूं ढीली पड़ जाती हैं और स्कैल्प की गंदगी भी साफ होती है। यह बालों को मजबूत और हेल्दी बनाने में भी मदद करता है।

    2. लहसुन और नींबू का हेयर पैक (Garlic & Lemon Hair Pack)

    लहसुन में प्राकृतिक कीटनाशक गुण पाए जाते हैं, जो जूं को मारने में असरदार होते हैं।
    कुछ लहसुन की कलियों को पीसकर उसका पेस्ट तैयार करें और इसमें एक चम्मच नींबू का रस मिलाएं।
    इस मिश्रण को स्कैल्प पर लगाकर 30 मिनट तक छोड़ दें, फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लें।
    हंसाजी के अनुसार, यह पैक जूं को कमजोर कर बालों से हटाने में काफी लाभदायक है।

    3. कंडीशनिंग और कॉम्बिंग (Conditioning & Combing Method)

    यह तरीका जूं और उनके अंडों को फिजिकल तरीके से हटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।पहले बालों को गीला करें और कंडीशनर लगाएं। इसके बाद एक बारीक दांतों वाली कंघी से जड़ों से लेकर बालों के सिरों तक कंघी करें।कंडीशनर जूं को स्लिपरी बनाता है, जिससे वे आसानी से बाहर निकल जाती हैं।यह तरीका खासकर बच्चों में बेहद प्रभावी माना जाता है।विशेषज्ञों का कहना है कि इन प्राकृतिक उपायों का नियमित रूप से इस्तेमाल करने पर जूं पूरी तरह खत्म हो सकती हैं और बालों की सेहत भी बेहतर होती है।

  • Can you eat radishes leaves: मूली और शलजम के पत्ते कैसे खाएं? हार्ट हेल्थ से इम्यूनिटी तक,जानें इन हरी पत्तियों के बड़े फायदे

    Can you eat radishes leaves: मूली और शलजम के पत्ते कैसे खाएं? हार्ट हेल्थ से इम्यूनिटी तक,जानें इन हरी पत्तियों के बड़े फायदे

    Can you eat radishes leaves: सर्दियों के मौसम में बाजार ताजी हरी सब्जियों से भर जाता है। इन्हीं में से दो महत्वपूर्ण सब्जियां हैं मूली और शलजम। लोग इन्हें बड़े स्वाद से खाते हैं, लेकिन इन दोनों सब्जियों के पत्ते अक्सर कूड़े में चले जाते हैं। जबकि डाइटीशियन मानते हैं कि मूली और शलजम के पत्ते पोषण का खज़ाना हैं, जो सर्दियों में शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं। हाल ही में डाइटीशियन श्रेया गोयल ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में बताया कि ये पत्ते क्यों और कैसे खाने चाहिए।

    इम्यूनिटी बढ़ाने में बेहद असरदार

    डाइटीशियन श्रेया गोयल के अनुसार, मूली के पत्तों में विटामिन A, विटामिन C, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा काफी अधिक होती है। ये तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। सर्दियों में जब सर्दी-जुकाम तेजी से फैलता है, ऐसे में मूली और शलजम के पत्ते इम्यूनिटी को बूस्ट कर शरीर को मौसम के संक्रमणों से बचाते हैं।

    खून की कमी में फायदेमंद

    इन पत्तों में मौजूद आयरन एनीमिया यानी खून की कमी को दूर करने में मदद करता है। खासकर महिलाओं के लिए ये पत्ते बेहद उपयोगी माने जाते हैं, क्योंकि नियमित सेवन से हीमोग्लोबिन का स्तर बेहतर होता है।

    पाचनतंत्र को बनाते हैं मजबूत

    मूली और शलजम के पत्ते फाइबर का बेहतरीन स्रोत हैं। फाइबर कब्ज से राहत देने के साथ पेट को साफ रखता है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। गैस, एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या वाले लोगों के लिए ये पत्ते प्राकृतिक दवा की तरह काम करते हैं।

    हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद

    इन हरी पत्तियों में पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं, जो दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। ये खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम करते हैं, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखते हैं और धमनियों में जमा चर्बी को घटाने में भी सहायक होते हैं। दिल के रोगियों के लिए इन पत्तों को डाइट में शामिल करना बेहद फायदेमंद माना जाता है।

    त्वचा और बालों के लिए नेचुरल टॉनिक

    मूली और शलजम के पत्तों में मौजूद विटामिन A और C त्वचा की नमी बनाए रखते हैं, जिससे झुर्रियां कम होती हैं और स्किन ग्लोइंग बनती है। यह बालों की जड़ों को मजबूत कर हेयर फॉल कम करते हैं।

    कैसे खाएं ये पत्ते?

    • मूली के पत्तों का स्वादिष्ट साग बनाकर खाएं
    • इन्हें दाल में मिलाकर पकाएं
    • परांठा, थूपका, या स्टफ्ड रोटी में इस्तेमाल कर सकते हैं
    • बारीक काटकर सूप में भी डाला जा सकता है

    यह पत्ते न केवल किफायती हैं, बल्कि सर्दियों में शरीर को अंदर से पोषण देकर मजबूत बनाते हैं। इसलिए अगली बार मूली या शलजम खरीदें, तो उनके पत्ते जरूर संभालकर रखें।

  • Laziness & Fatigue: क्यों आती है सुबह-सुबह नींद? डॉक्टर ने बताई इन दो विटामिन की कमी

    Laziness & Fatigue: क्यों आती है सुबह-सुबह नींद? डॉक्टर ने बताई इन दो विटामिन की कमी

    Laziness & Fatigue: आजकल अनहेल्दी लाइफस्टाइल, जंक फूड और कम सक्रिय दिनचर्या के कारण लोग अक्सर दिनभर थकान और आलस महसूस करते हैं। कई लोग रात में अच्छी नींद लेने के बावजूद सुबह उठते ही कमजोरी और सुस्ती महसूस करते हैं। आमतौर पर लोग इसे नींद पूरी न होने का कारण मान लेते हैं, लेकिन यह हर बार सही नहीं होता। कई बार शरीर में कुछ महत्वपूर्ण विटामिन की कमी भी लगातार आलस्य और थकान का कारण बनती है।

    इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. सुजॉय मुखर्जी के अनुसार, शरीर में दो मुख्य विटामिन विटामिन D और विटामिन B12 की कमी सीधे तौर पर नींद, ऊर्जा स्तर और मानसिक सक्रियता को प्रभावित करती है।


    Laziness & Fatigue: विटामिन D की कमी क्यों बढ़ाती है आलस्य?

    शरीर में विटामिन D की कमी होने पर नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इससे शरीर में लगातार थकान, कमजोरी और दिनभर उनींदापन बना रहता है। विटामिन D की कमी से

    • हड्डियों में दर्द
    • इम्यूनिटी कमजोर
    • मांसपेशियों में कमजोरी
    • मूड स्विंग
      जैसी समस्याएँ भी बढ़ने लगती हैं।

    Skin exposure के जरिए सूरज की रोशनी से शरीर प्राकृतिक रूप से विटामिन D बनाता है। इसके अलावा विटामिन D-युक्त भोजन और डॉक्टर द्वारा सुझाए गए सप्लीमेंट भी मदद करते हैं।

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    Laziness & Fatigue: विटामिन B12 की कमी और ज्यादा नींद का रिश्ता

    विटामिन B12 की कमी से शरीर की न्यूरोलॉजिकल क्रियाओं पर असर पड़ता है। इससे

    • लगातार नींद आना
    • ध्यान न लगना
    • शरीर में भारीपन
    • मानसिक थकान
      जैसी समस्याएँ होने लगती हैं।

    B12 की कमी लंबे समय तक रहने पर मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है। यह विटामिन मुख्य रूप से नॉन-वेज, डेयरी उत्पादों और सप्लीमेंट्स में पाया जाता है।


    Laziness & Fatigue: सुबह आलस दूर करने के आसान उपाय

    • रोज 20–25 मिनट धूप लें
    • हेल्दी फूड, खासकर प्रोटीन और विटामिन-युक्त भोजन खाएँ
    • पर्याप्त पानी पीएँ
    • सुबह हल्का व्यायाम करें
    • जरूरत हो तो डॉक्टर से विटामिन D या B12 की जांच करवाएँ
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  • Benefits of Turmeric Milk: सर्दियों में हल्दी वाला दूध पीना क्यों है जरूरी? डाइटिशियन ने बताए बड़े फायदे

    Benefits of Turmeric Milk: सर्दियों में हल्दी वाला दूध पीना क्यों है जरूरी? डाइटिशियन ने बताए बड़े फायदे

    Benefits of Drinking Turmeric Milk: सर्दियों का मौसम अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है—सर्दी-जुकाम, खांसी, थकान और कमजोरी इनमें सबसे आम हैं। ऐसे मौसम में शरीर को गर्माहट और सुरक्षा देने के लिए कई घरेलू उपाय अपनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक है हल्दी वाला दूध, जिसे आयुर्वेद में सोने का दूध भी कहा जाता है। मशहूर डाइटिशियन शिल्पा अरोड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर कर हल्दी दूध के कुछ खास फायदे बताए हैं, जिन्हें अपनाकर आप पूरे सीजन में अपनी इम्युनिटी को मजबूत रख सकते हैं।


    हल्दी वाला दूध क्यों पिएं? Benefits of Turmeric Milk

    1. इम्युनिटी को मजबूत बनाता है

    डाइटिशियन शिल्पा अरोड़ा बताती हैं कि हल्दी में मौजूद कर्क्यूमिन (Curcumin) एक शक्तिशाली एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सिडेंट कंपाउंड है। यह शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को खत्म करता है और सर्दी-जुकाम जैसी मौसमी बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है।हल्दी दूध नियमित रूप से पीने पर इम्युनिटी बेहतर होती है और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

    2. बेहतर नींद में मदद

    दूध में मौजूद ट्रिप्टोफैन दिमाग को शांत करता है और रिलैक्सेशन बढ़ाता है। वहीं हल्दी शरीर को हल्की गर्माहट देती है। दोनों का यह संयोजन नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।
    शिल्पा अरोड़ा के मुताबिक, जिन्हें अनिद्रा या रात में बार-बार नींद टूटने की समस्या हो, वे सोने से 30 मिनट पहले हल्दी वाला दूध जरूर पिएं।

    3. पाचन को सुधारता है

    हल्दी के एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं। हल्दी वाला दूध गैस, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याओं से राहत देता है। सर्दियों में भारी भोजन के बाद भी यह पाचन को आसान बनाता है।

    4. जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत

    ठंड के मौसम में जोड़ों की जकड़न और दर्द आम समस्या है। हल्दी का करक्यूमिन सूजन कम करता है और दर्द में राहत पहुंचाता है। बुजुर्गों और बुजुर्ग-देखभाल में यह विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है।

  • Parenting Tips सर्दियों में बच्चों को नहलाने में माता-पिता करते हैं 3 बड़ी गलतियां, पेरेंटिंग कोच अर्चना मलिक ने बताए सही टिप्स

    Parenting Tips सर्दियों में बच्चों को नहलाने में माता-पिता करते हैं 3 बड़ी गलतियां, पेरेंटिंग कोच अर्चना मलिक ने बताए सही टिप्स

    How to give a bath to a baby in winter Parenting Tips: सर्दियों में बच्चों की देखभाल माता-पिता के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होती। खासकर नहलाने के मामले में कई पैरेंट्स अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो बच्चे की त्वचा और सेहत दोनों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। पेरेंटिंग कोच अर्चना मलिक ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने ठंड के मौसम में बच्चों को सुरक्षित तरीके से नहलाने के सही नियम बताए हैं। उनके अनुसार, लगभग 90% माता-पिता तीन बड़ी गलतियां करते हैं, जिनसे बचना बेहद जरूरी है।

    1. बच्चों को ज्यादा गर्म पानी से नहलाना

    अर्चना मलिक का कहना है कि अधिकतर माता-पिता मानते हैं कि गर्म पानी से नहलाने पर बच्चे को ठंड नहीं लगेगी। लेकिन यह सोच गलत है। बच्चों की स्किन बड़ों की तुलना में तीन गुना ज्यादा पतली और संवेदनशील होती है। बहुत गर्म पानी त्वचा को जला सकता है, उसे लाल कर सकता है और अत्यधिक ड्राईनेस पैदा कर सकता है।
    इसलिए: बच्चे को हमेशा हल्के गुनगुने पानी से ही नहलाएं। पानी का तापमान ऐसा हो कि बच्चे को आराम मिले, लेकिन वह गर्माहट से परेशान न हो।

    2. गलत समय पर नहलाना

    सर्दियों में बच्चे को किसी भी समय नहलाना उचित नहीं है। सुबह-सुबह या देर शाम का समय तापमान के लिहाज से बेहद ठंडा होता है। इस दौरान नहलाने से बच्चे को अचानक मौसम के बदलाव का सामना करना पड़ता है, जिससे सर्दी-जुकाम या फ्लू का खतरा बढ़ जाता है।
    अर्चना मलिक की सलाह है कि ठंड के मौसम में सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच नहलाना सबसे बेहतर समय है। इस दौरान तापमान थोड़ा ऊंचा होता है और प्राकृतिक धूप भी बच्चों को आराम देती है।

    3. नहलाने के बाद तुरंत कपड़े न पहनाना

    अक्सर देखा जाता है कि नहलाने के बाद माता-पिता बच्चे को तौलिए में लपेटकर काफी देर रखते हैं या कपड़े पहनाने में समय लगा देते हैं। इससे शरीर में नमी बनी रहती है और बच्चे को ठंड लग सकती है।

    ध्यान रखें: नहलाने के तुरंत बाद बच्चे के शरीर को अच्छी तरह पोंछें और गर्म, मुलायम कपड़े पहनाएं इन छोटे लेकिन जरूरी पेरेंटिंग टिप्स को अपनाकर सर्दियों में बच्चे की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही पानी का तापमान, सही समय और सही देखभाल बच्चे को पूरे सीजन स्वस्थ रख सकती है।