Liver Health: फैटी लिवर (Liver Health) को ठीक करने में मददगार हैं ये 3 ड्रिंक्स, साइंस भी मानता है इनके फायदे लिवर हमारे शरीर का बेहद अहम अंग है, जो पाचन, पोषक तत्वों के अवशोषण और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन अनहेल्दी खानपान, बैठे-बैठे की लाइफस्टाइल और शराब या प्रोसेस्ड फूड्स के अधिक सेवन से फैटी लिवर(fatty liver) की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
अच्छी बात यह है कि यह बीमारी जीवनशैली में सुधार और सही खानपान से कंट्रोल की जा सकती है।एम्स, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से प्रशिक्षित गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर तीन ऐसे ड्रिंक्स बताए हैं जो लिवर की चर्बी घटाने में मदद कर सकते हैं।
1. चुकंदर का जूस (Beetroot juice)
चुकंदर एंटीऑक्सीडेंट्स और नाइट्रेट्स से भरपूर होता है, जो लिवर को डिटॉक्स करने और फैट जमने से रोकने में मदद करता है। नियमित रूप से इसका सेवन लिवर एंजाइम्स को भी संतुलित करता है।
2. ग्रीन टी (green tea)
ग्रीन टी में मौजूद कैटेचिन्स लिवर की सूजन कम करने और फैट ऑक्सीडेशन बढ़ाने में मदद करते हैं। हर दिन 1–2 कप ग्रीन टी फैटी लिवर के जोखिम को कम कर सकती है।
3. ब्लैक कॉफी ( black coffee)
ब्लैक कॉफी लिवर को फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी बीमारियों से बचाती है। इसमें मौजूद कैफीन और एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखते हैं। डॉक्टर सेठी का कहना है कि इन ड्रिंक्स को डाइट में शामिल करने के साथ एक्टिव लाइफस्टाइल, पर्याप्त नींद और संतुलित भोजन जरूरी है। यही फैटी लिवर को कम करने और लिवर हेल्थ सुधारने का सबसे असरदार तरीका है।
Clove Water Benefits in Hindi – लौंग भले ही आकार में छोटी हो, लेकिन इसके फायदे इतने बड़े हैं कि आयुर्वेद में इसे “औषधियों की रानी” कहा गया है। भारतीय रसोई से लेकर पूजा-पाठ तक इसका इस्तेमाल होता है। लेकिन अगर आप रोजाना लौंग का पानी पीते हैं, तो यह शरीर को कई बीमारियों से बचा सकता है।
कैसे बनाएं लौंग का पानी (How To Make Clove Water)
रात में दो लौंग को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर इस पानी को खौलाएं। जब पानी आधा रह जाए तो इसे छानकर गुनगुना पी लें। इसे रोज़ खाली पेट पीना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
लौंग का पानी पीने के फायदे (Clove Water Benefits)
1. पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है
लौंग का पानी पेट में गैस, बदहजमी और एसिडिटी को कम करता है। यह पाचन एंजाइम को एक्टिव करता है जिससे खाना जल्दी पचता है।
2. वजन घटाने में मददगार
लौंग में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और डिटॉक्स गुण शरीर से टॉक्सिन्स निकालते हैं और फैट बर्निंग को तेज करते हैं।
3. सर्दी-जुकाम और खांसी से राहत
लौंग में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं। इसका पानी गले की खराश और खांसी में बेहद असरदार है।
4. मुंह की दुर्गंध दूर करे
लौंग का पानी मुंह में बैक्टीरिया को खत्म करता है और सांसों को ताज़ा रखता है।
5. ब्लड शुगर को करे कंट्रोल
डायबिटीज़ पेशेंट्स के लिए लौंग का पानी फायदेमंद है। यह ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है।
6. इम्यून सिस्टम को करे मजबूत
लौंग में मौजूद विटामिन C, मैग्नीशियम और आयरन शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
7. त्वचा और बालों के लिए लाभदायक
लौंग का पानी त्वचा से टॉक्सिन निकालता है और बालों को झड़ने से रोकता है।
मोनोटास्किंग – आज की तेज़ रफ्तार और व्यस्त जीवनशैली में मल्टीटास्किंग को अक्सर अच्छी आदत माना जाता है। लोग इसे उत्पादकता बढ़ाने का तरीका समझते हैं और इसके लिए प्रोत्साहित भी किए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय में कई काम करने की यह आदत आपकी मेंटल हेल्थ पर नकारात्मक असर डाल सकती है?
साल 2023 में हुई स्टडीज़ में यह बात सामने आई कि लगातार मल्टीटास्किंग करने वाले लोगों में स्ट्रेस, थकान और मानसिक थकावट ज्यादा पाई गई। लंबे समय तक ऐसा करने से यह समस्या क्रॉनिक यानी लगातार बनी रहने वाली हो सकती है, जो डिप्रेशन और चिंता जैसे मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों का कारण बन सकती है।
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इसके मुकाबले, मोनोटास्किंग करना यानी एक समय में सिर्फ एक ही काम पर ध्यान केंद्रित करना, आपके लिए कई फायदे लेकर आता है। मोनोटास्किंग से आप बेहतर फोकस, अधिक उत्पादकता, कम स्ट्रेस और मानसिक शांति महसूस कर सकते हैं। एक समय में एक काम करने से दिमाग पर दबाव कम पड़ता है और काम की गुणवत्ता भी बढ़ती है।
अगर आप अपने मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत रखना चाहते हैं और स्ट्रेस को कम करना चाहते हैं, तो मोनोटास्किंग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना बेहद जरूरी है। छोटे-छोटे बदलाव, जैसे नोटिफिकेशन बंद करना, काम के दौरान सोशल मीडिया से दूर रहना, और काम को हिस्सों में बांटकर करना, इस प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं।इस तरह, मोनोटास्किंग न केवल आपकी मेंटल हेल्थ के लिए लाभकारी है, बल्कि आपके जीवन में सकारात्मकता और संतुलन भी लाती है।
Birth Control Pills – बर्थ कंट्रोल पिल्स, जिन्हें ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव्स भी कहा जाता है, महिलाओं के बीच गर्भधारण रोकने के लिए सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक हैं। यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या इनका सेवन महिलाओं में कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है।
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी और अन्य मेडिकल रिसर्च के अनुसार, बर्थ कंट्रोल पिल्स का इस्तेमाल कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को बदल सकता है। उदाहरण के लिए, पिल्स लेने से गर्भाशय (Endometrial) और अंडाशय (Ovarian) कैंसर का खतरा कम होता है। वहीं, स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा (Cervical) कैंसर के कुछ मामलों में रिस्क थोड़ी बढ़ सकती है, विशेषकर यदि पिल्स का उपयोग कम उम्र में शुरू किया गया हो या लंबे समय तक किया गया हो।
विशेषज्ञ बताते हैं कि रिस्क का स्तर आम तौर पर बहुत मामूली होता है और पिल्स के कई लाभ—जैसे मासिक धर्म में नियमितता, पीरियड्स के दर्द में कमी और अनचाहे गर्भधारण से सुरक्षा—इस छोटे जोखिम से कहीं अधिक हैं। इसके अलावा, पिल्स लेने वाली महिलाओं को समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए, जिसमें स्तन कैंसर और अन्य संबंधित चेकअप शामिल हैं।
महत्वपूर्ण यह है कि पिल्स पूरी तरह से कैंसर नहीं पैदा करतीं, लेकिन सावधानी और नियमित स्वास्थ्य मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है। किसी भी नई कॉन्ट्रासेप्टिव पद्धति को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।
हेल्थ डेस्क | Nation Now Samachar अगर आप अपनी सेहत को लेकर सजग हैं और सोच रहे हैं कि भीगे चने खाएं या भुने चने, तो यह लेख आपकी उलझन दूर कर देगा। दोनों ही चने पोषण से भरपूर हैं, लेकिन इनका शरीर पर असर थोड़ा अलग होता है। डाइटिशियन की राय जानकर आप खुद तय कर सकेंगे कि आपके लिए क्या बेहतर है।
भीगे चने – क्यों माने जाते हैं सुपरफूड? सेहतमंद रहने के लिए भीगे चने खाएं या भुने?
डाइटिशियन के मुताबिक, भीगे हुए चने (Soaked Chickpeas) कई मायनों में शरीर के लिए वरदान साबित होते हैं:
✅ फाइबर और प्रोटीन से भरपूर ✅ कब्ज और पाचन संबंधी समस्याओं में फायदेमंद ✅ ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मददगार ✅ वजन घटाने में सहायक ✅ आयरन और मैग्नीशियम का बेहतरीन स्रोत
खाली पेट भीगे चने खाना शरीर में ऊर्जा का संचार करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
🍲 भुने चने – हेल्दी स्नैक, लेकिन थोड़ी कम ताकत सेहतमंद रहने के लिए भीगे चने खाएं या भुने?
भुने हुए चने (Roasted Chickpeas) भी एक हेल्दी स्नैक ऑप्शन हैं, लेकिन इनका पोषण मूल्य भीगे चनों से थोड़ा कम होता है।
✅ लो कैलोरी स्नैक ✅ वजन कंट्रोल करने वालों के लिए अच्छा ✅ काम के बीच हेल्दी टाइमपास
लेकिन भुने चनों में फाइबर और कुछ मिनरल्स की मात्रा कम हो जाती है, खासकर जब उन्हें ज्यादा भून दिया जाए।
डाइटिशियन क्या कहती हैं? सेहतमंद रहने के लिए भीगे चने खाएं या भुने?
जानी-मानी डाइटिशियन डॉ. प्राची सिंह कहती हैं:
“अगर आपका मकसद डाइजेशन सुधारना, वजन घटाना या इम्यूनिटी बढ़ाना है, तो भीगे चने ज्यादा फायदेमंद हैं। भुने चने occasional snack के तौर पर ठीक हैं, लेकिन भीगे चने रोज़ाना सुबह खाएं।”
डाइट टिप: सेहतमंद रहने के लिए भीगे चने खाएं या भुने?
भीगे चने में आप अदरक, नींबू और काली मिर्च मिलाकर खा सकते हैं, जिससे उसका स्वाद और फायदे दोनों बढ़ जाते हैं।
कीवी फ्रूट, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Actinidia deliciosa कहा जाता है, स्वाद और पोषण से भरपूर एक ट्रॉपिकल फल है। इसका हरा गूदा, काले बीज और रोएंदार भूरा छिलका इसे बाकी फलों से अलग बनाते हैं। हालांकि इसका स्वाद थोड़ा खट्टा होता है, लेकिन इसके हेल्थ बेनिफिट्स जानने के बाद आप इसे जरूर अपनी डाइट में शामिल करेंगे।
🧬 कीवी में होता है कौन-सा प्रोटीन? कीवी: छोटा सा फल, बड़े फायदे
कीवी में पाया जाने वाला मुख्य प्रोटीन है एक्टिनिडिन (Actinidin) – यह एक ऐसा एंजाइम है जो भोजन को पचाने में मदद करता है, खासकर प्रोटीन युक्त भोजन को। यह प्रोटीन विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक है जिन्हें पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं।
डायटीशियन ने क्या बताया? कीवी: छोटा सा फल, बड़े फायदे
प्रसिद्ध न्यूट्रिशन एक्सपर्ट ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि:”कीवी इम्यूनिटी बूस्टर है। इसमें विटामिन C, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं।”
कीवी खाने के फायदे: कीवी: छोटा सा फल, बड़े फायदे
इम्यून सिस्टम मजबूत करता है – विटामिन C की मात्रा संतरे से भी ज्यादा होती है।
पाचन में सहायक – एक्टिनिडिन एंजाइम खाने को जल्दी पचाता है।
स्किन ग्लो करता है – एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन E से त्वचा को पोषण मिलता है।
वजन घटाने में सहायक – कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर इसे डाइट फ्रेंडली बनाते हैं।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल – इसमें मौजूद पोटैशियम हाई BP को संतुलित करता है।
कीवी क्यों नहीं खाते कुछ लोग? कीवी: छोटा सा फल, बड़े फायदे
इसका खट्टा स्वाद कुछ लोगों को रास नहीं आता।
जिनको एलर्जी या एसिडिटी की समस्या होती है, उन्हें सावधानी से खाना चाहिए।
कीवी एक सुपरफूड है जो छोटे आकार में बड़े फायदे देता है।अगर आप अपने डेली डाइट में कुछ हेल्दी और नैचुरल जोड़ना चाहते हैं, तो कीवी एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।
Running in rain benefits: बारिश के मौसम में दौड़ना एक रोमांचक और सुकून देने वाला अनुभव हो सकता है, लेकिन क्या यह सुरक्षित है? फिटनेस के शौकीनों के बीच यह सवाल अक्सर उठता है कि मानसून में आउटडोर रनिंग की जाए या नहीं। आइए जानें विशेषज्ञों की राय, रिसर्च और कुछ जरूरी सुझाव जिनसे आप बारिश में भी सुरक्षित और प्रभावी रनिंग का आनंद ले सकते हैं।
☔ बारिश और रनिंग का विज्ञान- Running in rain benefits
रनिंग एक सम्पूर्ण शरीर को सक्रिय करने वाली एक्सरसाइज है। यह हार्ट हेल्थ, स्टैमिना, वेट लॉस और मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद करता है। अब सवाल यह उठता है कि बारिश के मौसम में रनिंग करना फायदेमंद है या नहीं?
लोयोला मैरीमाउंट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. हॉली अल्मस्टेड की एक रिसर्च बताती है कि बारिश में रनिंग करने से शरीर ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है क्योंकि उसे खुद को गर्म रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। नतीजतन, बढ़ी हुई कैलोरी बर्निंग होती है, लेकिन थकावट की संभावना भी अधिक हो जाती है। Running in rain benefits
🔬 रिसर्च क्या कहती है?- Running in rain benefits
Journal of Sports Medicine & Physical Fitness में प्रकाशित एक अध्ययन में यह बात सामने आई कि कम तापमान और वर्षा की स्थिति में दौड़ने वाले प्रतिभागियों ने अधिक ऊर्जा खर्च की। इसका मतलब है कि बारिश में दौड़ना ज्यादा मेहनत तो करवाता है, लेकिन इसका फिटनेस पर सकारात्मक असर हो सकता है।
✅ बारिश में दौड़ने के फायदे
कैलोरी बर्निंग अधिक होती है
मानसिक सुकून और स्ट्रेस रिलीफ
हृदय स्वास्थ्य में सुधार
सहनशक्ति और इम्यूनिटी में वृद्धि
⚠️ बारिश में दौड़ने से पहले ध्यान रखें ये बातें- Running in rain benefits
वार्मअप अनिवार्य है: ठंडे वातावरण में दौड़ने से पहले मांसपेशियों को एक्टिव करना ज़रूरी है।
सही कपड़े पहनें: वाटरप्रूफ जैकेट और जल्दी सूखने वाले कपड़े पहनें ताकि शरीर गर्म रहे।
जूतों की ग्रिप हो मजबूत: फिसलन से बचने के लिए ऐसे जूते पहनें जिनकी सोल ग्रिप अच्छी हो।
हाइड्रेशन का ध्यान रखें: बारिश में पसीना कम दिखता है लेकिन शरीर पानी खोता है, इसलिए पानी पीते रहें।
बीमारियों से बचाव करें: भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें और स्नान कर लें ताकि वायरल संक्रमण से बचा जा सके।
❓ क्या बारिश में दौड़ना सभी के लिए सुरक्षित है?- Running in rain benefits
यदि आप अस्थमा, दिल की बीमारी या जॉइंट पेन जैसी कोई स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, तो बारिश में दौड़ने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। बुज़ुर्ग और बच्चों को भी बारिश में रनिंग से परहेज़ करना चाहिए।
📋 आउटडोर vs इनडोर रनिंग: क्या चुनें?
पहलू
आउटडोर रनिंग
इनडोर रनिंग
ताजगी और खुलापन
✔️
❌
सेफ्टी (मानसून में)
❌
✔️
मौसम की निर्भरता
✔️
❌
ज्वाइंट इम्पैक्ट
थोड़ा अधिक
कम
अगर आप फिसलन, इंफेक्शन और हाइपोथर्मिया जैसे जोखिम से बचना चाहते हैं, तो ट्रेडमिल पर रनिंग बेहतर विकल्प हो सकता है।
बारिश में दौड़ना रोमांचक और सेहतमंद हो सकता है, यदि सही सावधानियों के साथ किया जाए। यह आपके शरीर को चुनौती देने और नई ऊर्जा देने का तरीका बन सकता है, लेकिन सावधानी न बरतने पर यह खतरे का कारण भी बन सकता है। इसलिए, खुद को सुरक्षित रखते हुए, बारिश का आनंद लेते हुए फिट रहिए।
Maintain Glucose Level: मानसून का मौसम अपने साथ ठंडक और ताजगी लाता है, लेकिन डायबिटीज के मरीजों के लिए यह मौसम कुछ अतिरिक्त सावधानियों की मांग करता है। बदलता तापमान, नमी और संक्रमण का खतरा शुगर के स्तर को अस्थिर बना सकता है। ऐसे में जरूरी है कि डायबिटीज पीड़ित लोग अपनी दिनचर्या, खानपान और मेडिकल टूल्स के इस्तेमाल में समझदारी दिखाएं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक मानसून में इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है, जिससे पानी और हवा से फैलने वाले संक्रमण डायबिटीज मरीजों को अधिक प्रभावित करते हैं। आइए जानते हैं कैसे कुछ आसान उपाय अपनाकर आप इस मौसम को भी सुरक्षित तरीके से एन्जॉय कर सकते हैं। Maintain Glucose Level
✅ 1. स्मार्ट खानपान से बढ़ाएं इम्युनिटी- Maintain Glucose Level
डायबिटिक रोगियों को बारिश में स्ट्रीट फूड से दूर रहना चाहिए। इससे संक्रमण का खतरा रहता है। इसके बजाय घर का बना, गर्म और पोषण से भरपूर खाना खाएं।
विटामिन C, D और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर फल-सब्ज़ियां लें।
हरी पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित अनाज, हल्दी वाला दूध फायदेमंद है।
अधपका या कच्चा खाना खाने से बचें।
✅ 2. पैरों की देखभाल सबसे जरूरी- Maintain Glucose Level
बारिश में गीले जूते-मोजे, कीचड़ और गंदे पानी में चलना संक्रमण को न्योता दे सकता है। डायबिटिक फुट इंफेक्शन गंभीर समस्या बन सकता है।
बारिश के बाद पैरों को अच्छे से सुखाएं।
एंटीसेप्टिक से धोकर मॉइस्चराइज़र लगाएं।
गीले जूते-मोजे तुरंत बदलें और नंगे पांव न चलें।
✅ 3. ब्लड शुगर की नियमित निगरानी- Maintain Glucose Level
मानसून की नमी और तापमान इंसुलिन की क्रिया पर असर डालते हैं, जिससे ग्लूकोज लेवल में उतार-चढ़ाव होता है। ऐसे में नियमित शुगर मॉनिटरिंग जरूरी है।
Continuous Glucose Monitoring (CGM) डिवाइस जैसे FreeStyle Libre या Dexcom जैसी तकनीकें घर बैठे शुगर लेवल की निगरानी आसान बनाती हैं। Maintain Glucose Level
उंगली चुभोने की जरूरत नहीं
24×7 रियल टाइम रिपोर्ट
बारिश में डॉक्टर तक न पहुंच पाने की स्थिति में बेहद मददगार
✅ 4. घर के अंदर करें व्यायाम- Maintain Glucose Level
मानसून में बाहर जाना या पार्क में वॉक करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन घर के अंदर भी एक्टिव रहना जरूरी है।
सुबह-शाम हल्की स्ट्रेचिंग या योग करें।
घर की सफाई, सीढ़ियों पर चढ़ना भी हल्का व्यायाम हो सकता है।
रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्टिविटी जरूरी है।
✅ 5. खुद को रखें हाइड्रेटेड
बारिश के मौसम में पसीना कम आता है जिससे लोग कम पानी पीते हैं। लेकिन यह गलती ग्लूकोज मैनेजमेंट पर बुरा असर डाल सकती है।
दिनभर में कम से कम 2.5-3 लीटर पानी पिएं।
नारियल पानी, नींबू पानी और हर्बल टी लें।
कैफीन और शक्कर वाले ड्रिंक्स से बचें।
⚠️ अन्य जरूरी सुझाव:- Maintain Glucose Level
बाहर निकलते समय रेनकोट या छतरी साथ रखें
बीमार होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
हाइपरग्लाइसीमिया या हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण जैसे पसीना, चक्कर, थकान आदि को नजरअंदाज न करें
📱 तकनीक का करें स्मार्ट इस्तेमाल:
स्मार्टफोन एप्स से शुगर मॉनिटरिंग
रिमाइंडर लगाकर दवा और जांच समय पर लें
अपने डॉक्टर से टेली-कंसल्टेशन करें
डायबिटीज एक जीवनशैली जनित रोग है, जिसे सही दिनचर्या, तकनीकी मदद और सतर्कता से किसी भी मौसम में नियंत्रित रखा जा सकता है। खासतौर पर मानसून में जब संक्रमण और नमी का स्तर बढ़ता है, डायबिटीज रोगियों को खुद पर खास ध्यान देना चाहिए। यदि ऊपर बताए गए सुझावों को अपनाया जाए, तो न केवल ग्लूकोज स्तर कंट्रोल में रहेगा, बल्कि आप मानसून का आनंद भी बिना तनाव के उठा सकेंगे।
कानपुर देहात: यूपी के कानपुर देहात के छोटे से कस्बे पुखरायां (Kanpur Dehat News) में रहने वाला 16 वर्षीय पार्थ बंसल आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। इस नन्हे वैज्ञानिक ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से एक ऐसी छड़ी का आविष्कार किया है, जो पार्किंसंस रोग (न्यूरोलॉजिकल विकार) से जूझ रहे लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। भारत सरकार ने इस अनूठे आविष्कार को 20 साल के लिए पेटेंट प्रदान किया है, जो इस उम्र में एक असाधारण उपलब्धि है। आइए, जानते हैं पार्थ की इस प्रेरणादायक कहानी के बारे में और उनके आविष्कार की खासियत। Kanpur Dehat News
पार्थ का प्रेरणादायक सफर- Kanpur Dehat News
पार्थ बंसल वर्तमान में नोएडा के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में इंटरमीडिएट का छात्र है। उनके पिता संदीप बंसल एक व्यापारी हैं, जिन्होंने हमेशा पार्थ की जिज्ञासा और रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया। बचपन से ही पार्थ को विज्ञान और तकनीक के प्रति गहरा लगाव रहा है। वह चुम्बक, तार, बल्ब और सेल जैसे सामानों के साथ प्रयोग करने में घंटों बिताया करता था। खिलौनों को खोलना और उनके पुर्जों को समझना उसका पसंदीदा शौक था। लेकिन इस शौक ने तब एक मिशन का रूप ले लिया, जब उसने अपनी दादी सुषमा अग्रवाल को पार्किंसंस रोग से जूझते देखा।
16 साल के पार्थ बंसल ने बनाई जादुई छड़ी (फोटो- नेशन नाव समाचार)
पार्किंसंस रोग एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें मरीज के शरीर में कंपन, मांसपेशियों में अकड़न और चलने-फिरने में असमर्थता जैसी समस्याएं हो जाती हैं। पार्थ अपनी दादी की इस हालत को देखकर बहुत दुखी हुआ। उसने ठान लिया कि वह कुछ ऐसा बनाएगा, जो उनकी जिंदगी को आसान बनाए। यहीं से शुरू हुआ उसकी जादुई छड़ी का सफर। Kanpur Dehat News
जादुई छड़ी का आविष्कार- Kanpur Dehat News
पार्थ ने 2016 में, जब वह केवल 13 साल का था और नौवीं कक्षा में पढ़ता था, इस अनोखी छड़ी का आविष्कार किया। यह छड़ी साधारण नहीं थी। इसमें एलईडी लाइट्स, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग किया गया था, जो पार्किंसंस रोगियों को चलने में सहायता प्रदान करते हैं। इस छड़ी की खासियत यह है कि यह कंपन को नियंत्रित करने में मदद करती है और मरीजों को संतुलन बनाए रखने में सहायता देती है। इसके अलावा, इसमें लगी एलईडी लाइट्स रात के समय या कम रोशनी में भी सुरक्षित चलने में मदद करती हैं।
पार्थ बंसल को भारत सरकार से मिला पेटेंट (फोटो- नेशन नाव समाचार)
पार्थ की इस छड़ी ने उनकी दादी की जिंदगी को न केवल आसान बनाया, बल्कि दुनिया भर के पार्किंसंस रोगियों के लिए एक नई उम्मीद जगाई। इस आविष्कार ने पार्थ को रातोंरात सुर्खियों में ला दिया। उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए भारत सरकार ने इस छड़ी को पेटेंट प्रदान किया, जो 20 वर्षों तक मान्य रहेगा।
पिता संदीप बंसल ने कहा- गर्व की बात!– Kanpur Dehat News
पार्थ के पिता संदीप बंसल अपने बेटे की उपलब्धियों पर गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने बताया कि पार्थ का स्वभाव बेहद सरल और जिज्ञासु है। वह हमेशा कुछ नया सीखने और बनाने की कोशिश में रहता है। संदीप कहते हैं, “पार्थ को बचपन से ही इलेक्ट्रॉनिक सामानों के साथ खेलना पसंद था। वह खिलौनों को खोलकर उनके पुर्जे देखता और फिर कुछ नया बनाने की कोशिश करता। जब उसने अपनी दादी की तकलीफ देखी, तो उसने इस छड़ी को बनाने का फैसला किया। आज उसकी मेहनत रंग लाई है।”
पार्थ की इस उपलब्धि को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहा गया है। नवंबर 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइट अवार्ड से सम्मानित किया। इसके अलावा, हैदराबाद में उपराष्ट्रपति और पुणे में असम के राज्यपाल द्वारा सूर्यदत्त राष्ट्रीय पुरस्कार भी उन्हें प्रदान किया गया।
पार्थ की अन्य उपलब्धियां
पार्थ का यह आविष्कार उनकी प्रतिभा का केवल एक हिस्सा है। वह रोबोटिक्स, ऐप डेवलपमेंट और विज्ञान मॉडल्स बनाने में भी गहरी रुचि रखता है। वह अपने स्कूल और अन्य संस्थानों के लिए कई वेबसाइट्स और ऐप्स डिजाइन कर चुका है। उसकी जिज्ञासा और मेहनत ने उसे कम उम्र में ही एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बना दिया है।
पार्थ का सपना है कि वह भविष्य में और ऐसे आविष्कार करे, जो समाज के लिए उपयोगी हों। वह कहता है, “मैं चाहता हूं कि मेरे आविष्कार लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाएं। मेरी दादी की खुशी मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।”
भारत में युवा आविष्कारकों का भविष्य
पार्थ जैसे युवा आविष्कारक भारत के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्टार्टअप और युवा आविष्कारकों को प्रोत्साहित करने के लिए मुफ्त पेटेंट सेवाएं शुरू की हैं। यह पहल न केवल नवाचार को बढ़ावा देगी, बल्कि युवाओं को अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने लाने का अवसर भी प्रदान करेगी।
पार्थ की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को सच करने की हिम्मत रखता है। उनकी मेहनत, लगन और दादी के प्रति प्रेम ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। यह नन्हा वैज्ञानिक न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
टाइप 2 डायबिटीज और क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से (HEART HEALTH TIPS) हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ता है.
खानपान, फिजिकल एक्टिविटी और दवा के सेवन में लापरवाही न करें.
खानपान, फिजिकल एक्टिविटी और दवा के सेवन में लापरवाही न करें.
🩺 HEART HEALTH TIPS- दिल का ख्याल रखना क्यों है ज़रूरी?
आज के तेज़ रफ्तार जीवन में सेहत और खान-पान को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है. इसका असर न सिर्फ शरीर पर बल्कि मानसिक और दिल की सेहत पर भी पड़ता है. विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज और किडनी की समस्याओं से जूझ रहे लोगों को हार्ट हेल्थ पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि ये स्थितियाँ दिल की बीमारियों को न्योता देती हैं.
दरअसल, टाइप 2 डायबिटीज (T2D), क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) और हार्ट डिजीज के कई सामान्य जोखिम कारक होते हैं – जैसे हाई ब्लड शुगर, हाई ब्लड प्रेशर और शारीरिक गतिविधियों की कमी. टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में CKD और हृदय रोग होने की संभावना ज्यादा होती है. हाई ब्लड शुगर आपके दिल और किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे इन अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है.
❤️ दिल की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से उपाय करें?
खान-पान में बदलाव लाएं आपकी डाइट हार्ट हेल्थ को सीधे प्रभावित करती है. विशेषज्ञ कहते हैं कि: सोडियम की मात्रा कम करें, ताकि ब्लड प्रेशर और किडनी फंक्शन कंट्रोल में रहें. साबुत अनाज, फलियां, हरी सब्जियां और फाइबर रिच फूड्स को डाइट में शामिल करें. प्रोसेस्ड फूड और शुगर से भरपूर ड्रिंक्स से बचें. लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट जैसे एवोकाडो, ऑलिव ऑयल को शामिल करें.
फिजिकल एक्टिविटी को प्राथमिकता दें रोजाना 30 मिनट की वॉक, योग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या साइकलिंग करने से दिल की धड़कनें सामान्य बनी रहती हैं. ध्यान और ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ ब्लड प्रेशर को स्थिर रखने और तनाव कम करने में सहायक हैं.
किडनी की नियमित जांच कराएं डायबिटीज रोगियों को साल में एक बार किडनी की जांच जरूर करानी चाहिए. क्रिएटिनिन, GFR और यूरिन एलब्यूमिन टेस्ट्स से शुरुआती स्तर पर किडनी डैमेज का पता लगाया जा सकता है. यह जांचें दिल से जुड़ी संभावित समस्याओं को भी समय रहते पहचानने में मदद करती हैं.
दवा का समय पर सेवन करें डॉक्टर द्वारा दी गई ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने वाली दवाओं को नियमित लें. दवा न लेने से हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
स्मोकिंग और शराब से बचें धूम्रपान और अल्कोहल हृदय रोग का बड़ा कारण बनते हैं. यह ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं और धमनियों को संकीर्ण कर देते हैं, जिससे दिल को अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ता है. डाइट हार्ट हेल्थ को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
🧪 एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
नेशनल किडनी फाउंडेशन (NKF) और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) जैसे संस्थान सलाह देते हैं कि जो लोग डायबिटीज और किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें हार्ट हेल्थ को लेकर बेहद सतर्क रहना चाहिए. उनका मानना है कि शुरुआती जीवनशैली में सुधार और नियमित चेकअप से 60% तक दिल की बीमारियों का जोखिम कम किया जा सकता है.
नोट-
(डिस्क्लेमर: इस वेबसाइट पर प्रकाशित सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई हैं. यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं हैं. किसी भी स्वास्थ्य समस्या या दवा को शुरू या बंद करने से पहले कृपया अपने चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.)