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  • बाराबंकी : मधुमक्खियों से बचने को लगाई आग बनी मौत का कारण, बाराबंकी में बुजुर्ग जिंदा जले

    बाराबंकी : मधुमक्खियों से बचने को लगाई आग बनी मौत का कारण, बाराबंकी में बुजुर्ग जिंदा जले

    संवाददाता मुन्ना सिंह उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां मधुमक्खियों के हमले से बचने के लिए लगाई गई आग एक बुजुर्ग की मौत का कारण बन गई। यह दर्दनाक हादसा त्रिवेदीगंज क्षेत्र के रौनी पंचायत स्थित गोतवन पुरवा में हुआ, जहां 65 वर्षीय राम औतार केवट की जिंदा जलकर मौत हो गई।

    मधुमक्खियों से बचने को लगाई आग बनी मौत का कारण, बाराबंकी में बुजुर्ग जिंदा जले
    मधुमक्खियों से बचने को लगाई आग बनी मौत का कारण, बाराबंकी में बुजुर्ग जिंदा जले

    मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम राम औतार केवट त्रिवेदीगंज बाजार से अपने गांव गोतवन पुरवा लौट रहे थे। जैसे ही वे रौनी गांव के पास पहुंचे, अचानक मधुमक्खियों के एक झुंड ने उन पर हमला कर दिया। मधुमक्खियों के हमले से घबराए राम औतार ने खुद को बचाने के लिए पास में खड़े सूखे खर-पतवार में आग लगा दी, ताकि धुएं से मधुमक्खियां दूर हो जाएं।

    हालांकि, यह प्रयास उनके लिए घातक साबित हुआ। आग लगाने के बावजूद मधुमक्खियों का हमला नहीं रुका। लगातार डंक मारने से राम औतार की हालत बिगड़ने लगी और वे बेहोश होकर वहीं गिर पड़े। दुर्भाग्यवश, वे जलते हुए खर-पतवार की आग में गिर गए, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।घटना के बाद राम औतार देर शाम तक घर नहीं लौटे। जब परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की, तो उन्हें घटनास्थल पर जला हुआ शव मिला। यह दृश्य देखकर परिजन बदहवास हो गए और गांव में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला दुर्घटना का प्रतीत होता है, लेकिन हर पहलू से जांच की जा रही है। ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है और घटनास्थल का निरीक्षण भी किया गया है।इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में मधुमक्खियों के हमलों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मधुमक्खियों के हमले की स्थिति में आग लगाना बेहद खतरनाक हो सकता है, खासकर जब आसपास सूखी घास या ज्वलनशील पदार्थ मौजूद हों। ऐसे हालात में जमीन पर लेट जाना, कपड़े से चेहरा ढंकना या धीरे-धीरे वहां से दूर हटना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

    ग्रामीणों का कहना है कि इस इलाके में पहले भी मधुमक्खियों के हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन कभी इतनी भयावह घटना नहीं हुई। प्रशासन से मांग की जा रही है कि गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि लोग ऐसी परिस्थितियों में सही कदम उठा सकें।

    राम औतार केवट की मौत से पूरे गांव में मातम पसरा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वह परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य थे और उनकी मौत से परिवार पर आर्थिक संकट भी गहरा गया है।फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • अमेठी में अधिवक्ताओं के विरोध के बीच SDM के समर्थन में उतरे सैकड़ों फरियादी

    अमेठी में अधिवक्ताओं के विरोध के बीच SDM के समर्थन में उतरे सैकड़ों फरियादी

    संवाददाता नितेश अमेठी जिले की मुसाफिरखाना तहसील में बीते पांच दिनों से चल रहे अधिवक्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। अधिवक्ताओं के आंदोलन के विपरीत अब सैकड़ों फरियादी और ग्राम प्रधान एसडीएम की कार्यशैली के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। यह समर्थन तहसील दिवस के दौरान उस समय देखने को मिला, जब मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) द्वारा जनसुनवाई की जा रही थी।

    तहसील दिवस की जनसुनवाई में दिखा जनसमर्थन

    तहसील दिवस में पहुंचे सैकड़ों फरियादियों और ग्राम प्रधानों ने एक स्वर में कहा कि एसडीएम आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुन रहे हैं और न्याय दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। फरियादियों का कहना है कि एसडीएम की कार्यशैली निष्पक्ष और जनहित में है, इसलिए उनके खिलाफ हो रहे विरोध को वे सही नहीं मानते।जनसुनवाई के दौरान कई ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखते हुए यह भी कहा कि वे दूर-दराज के गांवों से न्याय की उम्मीद लेकर तहसील आते हैं और एसडीएम के स्तर पर उन्हें राहत मिलती है।

    फरियादियों का आरोप: तारीख पर तारीख से नहीं मिल रहा न्याय

    फरियादियों ने अधिवक्ताओं के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अधिकारी न्याय करना चाहते हैं, तब कुछ मामलों में केवल तारीख पर तारीख दी जाती है, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि वकीलों के विरोध के चलते कई दिनों से तहसील का कामकाज प्रभावित हो रहा है और उन्हें न्याय पाने में देरी हो रही है।कुछ फरियादियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिवक्ताओं के आंदोलन की वजह से उनकी शिकायतों की सुनवाई रुक गई है, जिससे गरीब और ग्रामीण वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।

    मुसाफिरखाना तहसील में 5 दिन से जारी है विरोध

    गौरतलब है कि इससे पहले लेखपालों के समर्थन में भी फरियादी सामने आ चुके हैं और अब एसडीएम के पक्ष में सैकड़ों लोग उतर आए हैं। मुसाफिरखाना तहसील में अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन लगातार पांच दिनों से जारी है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पूरे मामले पर उच्च अधिकारियों की नजर बनी हुई है और स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं फरियादियों की मांग है कि न्याय प्रक्रिया बाधित न हो और तहसील में नियमित रूप से जनसुनवाई जारी रहे।

  • “बहुत आगे तक जाएंगे…” सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का आशीर्वाद, बिहार राजनीति में बढ़ी हलचल

    “बहुत आगे तक जाएंगे…” सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का आशीर्वाद, बिहार राजनीति में बढ़ी हलचल

    बिहार की राजनीति में उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुले मंच से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की जमकर सराहना की। मौका था बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शकुनी चौधरी के 90वें जन्मदिन का, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं उनके आवास पहुंचे और उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।इस दौरान नीतीश कुमार ने न सिर्फ शकुनी चौधरी के राजनीतिक योगदान को याद किया, बल्कि उनकी मौजूदगी में सम्राट चौधरी के कामकाज की भी तारीफ की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्राट चौधरी मेहनती नेता हैं और “बहुत आगे तक जाएंगे”, यह कहते हुए उन्होंने उनके उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य की कामना करते हुए आशीर्वाद भी दिया।

    सम्राट चौधरी के लिए खास रहा यह पल

    डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के लिए यह मौका बेहद खास माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में नीतीश कुमार के इस बयान को सिर्फ तारीफ नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। नीतीश कुमार का इस तरह खुले मंच से सम्राट चौधरी का समर्थन करना आने वाले समय में बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।

    शकुनी चौधरी के आवास पर जुटे दिग्गज

    पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शकुनी चौधरी के 90वें जन्मदिन पर कई वरिष्ठ नेता और समर्थक मौजूद रहे। नीतीश कुमार ने उन्हें स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शकुनी चौधरी का सामाजिक और राजनीतिक योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

    सियासी मायने क्या हैं?

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह बयान केवल औपचारिक नहीं है। सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का आशीर्वाद ऐसे समय पर आया है जब बिहार में राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं। यह बयान यह भी दर्शाता है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की भूमिका और नेतृत्व क्षमता को लेकर आश्वस्त हैं।

    विपक्ष की भी बढ़ी नजर

    इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों की नजर भी इस बयान पर टिक गई है। सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कई लोग इसे भविष्य की राजनीति का संकेत मान रहे हैं।कुल मिलाकर, शकुनी चौधरी के जन्मदिन समारोह में नीतीश कुमार द्वारा दिया गया यह बयान बिहार की राजनीति में एक नया संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस आशीर्वाद का राजनीतिक असर कितना गहरा पड़ता है।

  • Pradosh Vrat 2026 Date And Time: साल 2026 में कब-कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत?

    Pradosh Vrat 2026 Date And Time: साल 2026 में कब-कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत?

    Pradosh Vrat 2026 Date And Time: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ व्रत माना जाता है। यह व्रत प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई शिव पूजा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि शिव भक्त पूरे वर्ष Pradosh Vrat 2026 Date And Time जानने के लिए उत्सुक रहते हैं।

    प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं और अपने भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं। इस समय की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। प्रदोष व्रत रखने से स्वास्थ्य, धन, पारिवारिक सुख और मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही यह व्रत पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

    साल 2026 में प्रदोष व्रत कब-कब पड़ेगा?

    नीचे जनवरी और फरवरी 2026 के प्रदोष व्रत की तिथियां दी गई हैं जनवरी 2026 के प्रदोष व्रत 02 जनवरी 2026, गुरुवार – गुरु प्रदोष व्रत 16 जनवरी 2026, शुक्रवार – शुक्र प्रदोष व्रत,30 जनवरी 2026, शुक्रवार – शुक्र प्रदोष व्रत

    फरवरी 2026 के प्रदोष व्रत

    • 14 फरवरी 2026, शनिवार – शनि प्रदोष व्रत
    • 28 फरवरी 2026, शनिवार – शनि प्रदोष व्रत

    हर प्रदोष व्रत का अलग-अलग फल बताया गया है। जैसे गुरु प्रदोष व्रत से ज्ञान और करियर में उन्नति होती है, शुक्र प्रदोष व्रत वैवाहिक जीवन और प्रेम संबंधों को मजबूत करता है, जबकि शनि प्रदोष व्रत शनि दोष और आर्थिक परेशानियों से राहत दिलाता है।

    प्रदोष व्रत की पूजा विधि

    प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती कर भगवान शिव से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।

    प्रदोष व्रत रखने से होने वाले लाभ

    • मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति
    • धन, नौकरी और व्यापार में उन्नति
    • वैवाहिक और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति
    • रोग, दोष और बाधाओं का नाश
  • Agra Cold Wave : शीतलहर और घने कोहरे की चादर में लिपटा ताजमहल, आगरा में ठंड ने बढ़ाई मुश्किलें

    Agra Cold Wave : शीतलहर और घने कोहरे की चादर में लिपटा ताजमहल, आगरा में ठंड ने बढ़ाई मुश्किलें

    Agra Cold Wave : उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में शीतलहर के साथ घने कोहरे ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। विश्व धरोहर ताजमहल भी इस समय कोहरे की मोटी चादर में ढका नजर आ रहा है। ताज व्यू पॉइंट से सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि कोहरे के कारण ताजमहल धुंधला दिखाई दे रहा है, जिससे पर्यटकों को इसकी पूरी खूबसूरती देखने में परेशानी हो रही है।

    पिछले कुछ दिनों से आगरा सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। शीतलहर के चलते सुबह और देर रात ठंड का असर और तेज हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार, न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है, वहीं दृश्यता (विजिबिलिटी) कई इलाकों में 50 से 100 मीटर तक सिमट गई है।घना कोहरा न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है। सुबह के समय सड़कें, हाईवे और रेलवे ट्रैक कोहरे की वजह से दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है। आगरा-दिल्ली हाईवे पर वाहन रेंगते नजर आए, वहीं कई ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ा है।

    ताजमहल देखने पहुंचे देशी और विदेशी पर्यटकों का कहना है कि ठंड और कोहरे के बावजूद ताजमहल का आकर्षण कम नहीं होता। हालांकि, कोहरे के कारण स्मारक का पूरा दृश्य साफ नजर नहीं आ पा रहा है। कई पर्यटकों को फोटो और वीडियो लेने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के कारण शीतलहर का प्रभाव बढ़ा है। आने वाले कुछ दिनों तक आगरा और आसपास के इलाकों में घना कोहरा बने रहने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही ठंड से राहत मिलने के आसार फिलहाल कम हैं।

    प्रशासन की ओर से लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को ठंड से बचाव के लिए घर से बाहर कम निकलने की अपील की गई है। कोहरे के दौरान वाहन चलाते समय फॉग लाइट का इस्तेमाल करने और गति नियंत्रित रखने के निर्देश दिए गए हैं।ठंड बढ़ने के कारण शहर में अलाव जलाने की संख्या भी बढ़ा दी गई है। नगर निगम और प्रशासन की टीमें प्रमुख चौराहों और रैन बसेरों पर अलाव की व्यवस्था कर रही हैं ताकि जरूरतमंद लोगों को राहत मिल सके।

    ताजमहल पर छाया कोहरा एक ओर जहां सर्द मौसम की गंभीरता को दर्शा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह दृश्य पर्यटकों के लिए एक अलग ही अनुभव भी बन रहा है। हालांकि, लगातार बढ़ती ठंड और कोहरे ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है।मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी सुबह और रात के समय घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम अपडेट पर नजर रखें और आवश्यक सावधानियां जरूर अपनाएं।

  • औरैया: विद्यालय के वार्षिकोत्सव में पहुंचे राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर दिया जोर

    औरैया: विद्यालय के वार्षिकोत्सव में पहुंचे राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर दिया जोर

    औरैया | रिपोर्टर: अमित शर्मा औरैया जनपद में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने शुक्रवार को बी. बी. एस. स्मृति विद्यापीठ, आशानगर (जालौन रोड) में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित अभिभावकों और अतिथियों का मन मोह लिया।

    बच्चों के प्रदर्शन से अभिभावकों को गर्व

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम देखकर अभिभावकों को गर्व और खुशी का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उनके भीतर छिपी प्रतिभा को निखारने का कार्य करते हैं।

    सर्वांगीण विकास में सहायक हैं ऐसे आयोजन

    मंत्री ने कहा कि विद्यालयों में होने वाले वार्षिकोत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों की समझ भी ऐसे आयोजनों से विकसित होती है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की।

    होमगार्ड्स भर्ती पर स्पष्ट संदेश

    मीडिया से बातचीत के दौरान राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने होमगार्ड्स भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि योग्य अभ्यर्थियों को उनका हक जरूर मिलेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    बांग्लादेश हिंसा पर मंत्री की प्रतिक्रिया

    बांग्लादेश में हालिया हिंसा को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। बातचीत और शांति के रास्ते से ही किसी भी विवाद का हल निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि हिंसा से केवल नुकसान होता है, चाहे वह किसी भी देश में हो।

    कार्यक्रम में दिखा उत्साह

    वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में विद्यालय के बच्चों ने नृत्य, गीत, नाटक और देशभक्ति से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर तालियों से गूंज उठा। अभिभावकों ने बच्चों के प्रदर्शन की जमकर सराहना की।कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन की ओर से राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

  • कानपुर गंगा में 350 किलो की डॉल्फिन की मौत:लोग बोले- प्रदूषण से जान गई

    कानपुर गंगा में 350 किलो की डॉल्फिन की मौत:लोग बोले- प्रदूषण से जान गई

    कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में गंगा नदी के किनारे उस समय हड़कंप मच गया, जब करीब 350 किलो वजनी डॉल्फिन का शव पानी में तैरता हुआ दिखाई दिया। यह दृश्य देखने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए। लोगों ने डॉल्फिन के शव को रस्सियों से बांधकर करीब 10 लोगों की मदद से किनारे तक खींचा, जिसके बाद वन विभाग और प्रशासन को सूचना दी गई।

    गंगा में डॉल्फिन की मौत से मचा हड़कंप

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डॉल्फिन काफी समय से मृत प्रतीत हो रही थी और उसके शरीर से दुर्गंध आ रही थी। गंगा में डॉल्फिन का यूं मृत पाया जाना न सिर्फ दुर्लभ है, बल्कि यह नदी की सेहत और जलीय जीवों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। मौके पर मौजूद लोगों ने आशंका जताई कि गंगा में बढ़ते प्रदूषण के कारण ही डॉल्फिन की मौत हुई होगी

    10 लोगों ने मिलकर खींचा शव

    डॉल्फिन का वजन अत्यधिक होने के कारण उसे बाहर निकालना आसान नहीं था। स्थानीय लोगों ने रस्सी का इंतजाम किया और करीब 10 लोगों ने मिलकर कड़ी मशक्कत के बाद शव को किनारे लाया। इस दौरान आसपास लोगों की भीड़ लग गई और घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे।

    प्रदूषण पर उठे गंभीर सवाल

    स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानपुर क्षेत्र में गंगा नदी लंबे समय से औद्योगिक और घरेलू कचरे से प्रदूषित है। चमड़ा उद्योगों, नालों और रासायनिक अपशिष्ट के कारण पानी की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए होते, तो ऐसी घटना टाली जा सकती थी।एक स्थानीय निवासी ने कहा,“जब इंसानों के लिए गंगा का पानी सुरक्षित नहीं है, तो डॉल्फिन जैसे संवेदनशील जीव कैसे जिंदा रहेंगे?”

    वन विभाग और प्रशासन की जांच

    सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और डॉल्फिन के शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी। प्रारंभिक जांच में उम्रदराज या बीमारी की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया है, लेकिन प्रदूषण की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    डॉल्फिन: गंगा की पहचान और जैव विविधता

    गौरतलब है कि गंगा डॉल्फिन भारत की राष्ट्रीय जलीय जीव (National Aquatic Animal) है। यह जीव साफ और ऑक्सीजन युक्त पानी में ही जीवित रह सकती है। डॉल्फिन की मौजूदगी को नदी के स्वास्थ्य का संकेत माना जाता है। ऐसे में उसकी मौत यह दर्शाती है कि गंगा का इकोसिस्टम खतरे में है

  • वेनेजुएला में भीषण धमाके, अमेरिका पर सैन्य हमले का आरोप, राष्ट्रपति मादुरो ने घोषित की नेशनल इमरजेंसी

    वेनेजुएला में भीषण धमाके, अमेरिका पर सैन्य हमले का आरोप, राष्ट्रपति मादुरो ने घोषित की नेशनल इमरजेंसी

    कराकस (वेनेजुएला): दक्षिण अमेरिका का देश वेनेजुएला एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तनाव के केंद्र में आ गया है। वेनेजुएला की सरकार ने अमेरिका पर अपने नागरिक और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले का गंभीर आरोप लगाया है। राजधानी कराकस समेत कई राज्यों में हुए धमाकों के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने देश में नेशनल इमरजेंसी घोषित कर दी है

    कराकस समेत कई राज्यों में धमाके

    शनिवार तड़के वेनेजुएला की राजधानी कराकस में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इसके अलावा मिरांडा, अरगुआ और ला गुइरा राज्यों में भी बम धमाके होने की खबरें सामने आई हैं। धमाकों के बाद कई इलाकों में बिजली गुल हो गई और लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए।न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, कम ऊंचाई पर उड़ते विमानों ने कराकस के ऊपर बम गिराए, जिससे इमारतें हिल गईं और आसमान में धुएं का गुबार उठता नजर आया। राजधानी के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक बड़े सैन्य अड्डे के आसपास धमाके के बाद पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया।

    कम से कम सात धमाकों की पुष्टि

    एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, कराकस में कम से कम सात धमाके सुने गए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में धमाकों के बाद उठता धुआं, दहशत में भागते लोग और आसमान में उड़ते सैन्य विमान साफ देखे जा सकते हैं। हालांकि सरकार ने अब तक हताहतों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है।

    मादुरो सरकार का अमेरिका पर सीधा आरोप

    वेनेजुएला सरकार ने इन हमलों को “अमेरिकी सैन्य आक्रामकता” करार दिया है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अपने संबोधन में कहा,“वेनेजुएला को डराने और धमकाने के अमेरिकी प्रयास कभी सफल नहीं होंगे। हमारा देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।”सरकार का कहना है कि हमलों का मकसद वेनेजुएला में अस्थिरता फैलाना और सरकार को कमजोर करना है।

    नेशनल इमरजेंसी का ऐलान

    लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए राष्ट्रपति मादुरो ने देशभर में नेशनल इमरजेंसी लागू करने की घोषणा कर दी है। इसके तहत सैन्य और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है सीमाओं और हवाई क्षेत्र की निगरानी कड़ी कर दी गई हैसरकार ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

    अमेरिका की ओर से चुप्पी

    इन गंभीर आरोपों के बावजूद अमेरिका ने अब तक हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है और न ही इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि इससे लैटिन अमेरिका में भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।

  • औरैया में गली विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो पक्षों में जमकर मारपीट, आधा दर्जन से अधिक घायल

    औरैया में गली विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो पक्षों में जमकर मारपीट, आधा दर्जन से अधिक घायल

    रिपोर्टर अमित शर्मा औरैया (उत्तर प्रदेश):औरैया जिले के अछल्दा थाना क्षेत्र अंतर्गत सलेमपुर गांव में शनिवार सुबह एक मामूली विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। गली में मवेशी बांधने को लेकर दो पक्षों में जमकर मारपीट हो गई, जिसमें आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    सुबह 11 बजे भड़का विवाद

    जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 11 बजे सलेमपुर गांव में गली में मवेशी बांधने को लेकर कहासुनी शुरू हुई। देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और विवाद हाथापाई से बढ़ते हुए लाठी-डंडों की मारपीट में बदल गया। ग्रामीणों ने जब स्थिति बिगड़ती देखी तो तत्काल पुलिस को सूचना दी।

    पुलिस ने संभाला मोर्चा

    सूचना मिलते ही उपनिरीक्षक राजेन्द्र सिंह और उपनिरीक्षक राशिद खान पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने हालात पर काबू पाया और सभी घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया।

    ये लोग हुए घायल

    मारपीट में घायल हुए लोगों में प्रदीप सक्सेना,संतोष सक्सेना,लवकुश सक्सेना,गोविन्द सक्सेना (सभी पुत्र रामऔतार),शिवपाल तोमर,सोहन,नितेन्द्र शामिल हैं।

    दो की हालत गंभीर, सैफई रेफर

    सीएचसी में तैनात डॉ. गौरव ने प्राथमिक उपचार के बाद प्रदीप सक्सेना की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वहीं नितेन्द्र को चिचोली रेफर किया गया। अन्य घायलों का मौके पर ही इलाज किया गया।

    गली में मवेशी बांधने को लेकर था विवाद

    अछल्दा थानाप्रभारी पंकज मिश्रा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विवाद गली में मवेशी बांधने को लेकर हुआ था। दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो बाद में मारपीट में बदल गई। पुलिस के अनुसार, फिलहाल घायलों का इलाज चल रहा है। दोनों पक्षों से तहरीर मिलने के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क है और किसी भी तरह की दोबारा घटना न हो, इसके लिए निगरानी रखी जा रही है।

  • दिल्ली: बंदरों को भगाने के लिए PWD ने निकाली भर्ती, लंगूर की आवाज में काम करेंगे कर्मी

    दिल्ली: बंदरों को भगाने के लिए PWD ने निकाली भर्ती, लंगूर की आवाज में काम करेंगे कर्मी

    दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बंदरों की बढ़ती समस्या को देखते हुए PWD (Public Works Department) ने एक अनोखी पहल की है। अब बंदरों को भगाने के लिए लोगों की भर्ती निकाली गई है। इस भर्ती में चयनित कर्मी लंगूर की आवाज निकालकर बंदरों को भगाने का काम करेंगे।

    क्यों निकली भर्ती?

    दिल्ली के कई इलाके जैसे कि साउथ दिल्ली, रोहिणी, और पुरानी कॉलोनियों में बंदरों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। ये बंदर न केवल सड़क पर और पार्कों में परेशान कर रहे हैं बल्कि घरों और दुकानों में भी घुसपैठ कर रहे हैं। इससे न केवल लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है बल्कि खाद्य सामग्री और घरों की सुरक्षा भी खतरे में है।PWD ने टेंडर जारी करते हुए कहा कि भर्ती किए जाने वाले कर्मी 8 घंटे की शिफ्ट में काम करेंगे और उनका मुख्य कार्य बंदरों को भगाना होगा। इसके लिए कर्मी को लंगूर की आवाज की नकल करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस तरह की पहल पहली बार दिल्ली में लागू की जा रही है।

    भर्ती की शर्तें

    • भर्ती केवल उन लोगों के लिए है, जो लंगूर की आवाज़ की सही नकल कर सकते हैं
    • हर कर्मी को 8 घंटे की शिफ्ट में काम करना होगा।
    • कर्मी शहर के ऐसे इलाकों में तैनात किए जाएंगे, जहां बंदरों की संख्या अधिक है।
    • PWD ने इस काम के लिए विशेष टेंडर जारी कर आवेदन आमंत्रित किए हैं।

    क्या है उद्देश्य?

    PWD का कहना है कि बंदरों से निपटने के लिए पारंपरिक उपाय जैसे जाल और रबर की गोली पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए लंगूर की आवाज़ निकालने वाले कर्मियों की तैनाती करने का निर्णय लिया गया है। इस तकनीक के जरिए बंदर समझेंगे कि इलाके में बड़े लंगूर मौजूद हैं और वे खुद ही जगह छोड़ देंगे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह इको-फ्रेंडली और मानव-सुरक्षित तरीका है, क्योंकि इसमें बंदरों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाता। इसके अलावा, इससे लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

    दिल्ली में बंदरों की समस्या

    दिल्ली में बंदर अक्सर पेड़ों, तारों और खुले इलाकों में घूमते नजर आते हैं। लोग इनसे परेशान हैं क्योंकि बंदर खाने-पीने की वस्तुएं चोरी करते हैं और कभी-कभी झगड़े भी बढ़ा देते हैं। PWD का यह कदम शहरवासियों के लिए राहत भरा साबित होगा।

    आने वाले दिनों में क्या होगा?

    PWD जल्द ही टेंडर की प्रक्रिया पूरी करके लंगूर आवाज कर्मियों की भर्ती शुरू करेगा। भर्ती के बाद ये कर्मी निर्धारित क्षेत्रों में तैनात होंगे और बंदरों को भगाने का काम करेंगे। इस पहल से उम्मीद है कि शहर में बंदरों की बढ़ती दिक्कत कम होगी और लोग सुरक्षित रह सकेंगे।