सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थित जिला अस्पताल (Sonbhadra Crime) से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। 2 जून 2025 को दिनदहाड़े प्रसूता वार्ड से एक चार दिन के नवजात शिशु की चोरी ने न केवल अस्पताल प्रशासन को हिलाकर रख दिया, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सीसीटीवी फुटेज में एक अज्ञात महिला बच्चे को गोद में लेकर अस्पताल से बाहर निकलती दिखाई दे रही है। इस घटना ने माता-पिता और परिजनों में दहशत और गुस्सा पैदा कर दिया है, जबकि पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। Sonbhadra Crime
क्या है पूरा मामला?
चंदौली जिले के नौगढ़ निवासी पूनम, पत्नी सुदामा, को 27 मई 2025 को प्रसव पीड़ा के कारण सोनभद्र के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सर्जरी के बाद पूनम ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। जच्चा-बच्चा दोनों को प्रसूता वार्ड में रखा गया था। इसी दौरान एक अज्ञात महिला ने पिछले कुछ दिनों से वार्ड में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उसने पूनम और उनके परिजनों से दोस्ताना व्यवहार बनाया और दावा किया कि उसकी रिश्तेदार भी उसी वार्ड में भर्ती है। वह अक्सर नवजात को गोद में लेकर प्यार जताती थी, जिससे किसी को शक नहीं हुआ। Sonbhadra Crime
🔴 ब्रेकिंग न्यूज़ | सोनभद्र से सनसनीखेज मामला 🚨 मेडिकल कॉलेज के प्रसूता वार्ड से दिनदहाड़े नवजात चोरी 🧕 CCTV में बच्चा लेकर जाती दिखी संदिग्ध महिला 🔸 जिला अस्पताल परिसर स्थित प्रसूता वार्ड से नवजात चोरी 🔸 सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर वारदात को अंजाम 🔸 CCTV फुटेज में महिला… pic.twitter.com/Fm5y6PXGaQ
2 जून की सुबह, मौका देखकर इस महिला ने बच्चे के पिता सुदामा को जलेबी लाने के लिए बाहर भेज दिया। उस समय पूनम बेडशीट बदलने में व्यस्त थी और बच्चा पास के बेड पर लेटा था। मौका पाकर महिला नवजात को लेकर फरार हो गई। जब पूनम ने बच्चे को गायब पाया, तो अस्पताल में हड़कंप मच गया। परिजनों ने तुरंत अस्पताल प्रशासन से शिकायत की, लेकिन शुरू में कर्मचारियों ने मामले को दबाने की कोशिश की और परिजनों पर ही लापरवाही का आरोप लगाया। Sonbhadra Crime
सीसीटीवी फुटेज ने खोला राज
अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि एक महिला बच्चे को गोद में लेकर प्रसूता वार्ड से बाहर निकल रही है। यह फुटेज अब पुलिस जांच का आधार बन चुकी है। रॉबर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और संदिग्ध महिला की तलाश में कई टीमें गठित की हैं। अपर पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) अनिल कुमार ने बताया कि फुटेज के आधार पर जांच तेज कर दी गई है और जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा। Sonbhadra Crime
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
सोनभद्र मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे, गेट पर पुलिस चौकी, और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद इस तरह की घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बी. सागर ने इस मामले में पुलिस को सूचित करने की बात कही, लेकिन शुरू में उनकी ओर से पत्रकारों से बात करने में हिचकिचाहट दिखी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल कर्मियों की लापरवाही के कारण यह घटना हुई। सवाल यह है कि इतने बड़े परिसर में, जहां हर कदम पर निगरानी का दावा किया जाता है, एक नवजात को इतनी आसानी से चुराया कैसे जा सका?
परिजनों का दर्द और पुलिस की कार्रवाई
पूनम और सुदामा इस घटना से गहरे सदमे में हैं। पूनम की मां, जो उस समय खाना लाने घर गई थी, ने बताया कि यह उनके लिए ममता पर कुठाराघात है। परिजनों ने पुलिस से जल्द से जल्द बच्चे को ढूंढने की गुहार लगाई है। सोनभद्र पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और आसपास के इलाकों में छानबीन शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर भी यह घटना चर्चा में है, जहां लोग अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। आगे क्या?
यह घटना न केवल सोनभद्र मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि अस्पतालों में नवजातों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ सकती है। पुलिस की जांच और सीसीटीवी फुटेज इस मामले में अहम साबित होंगे। उम्मीद है कि जल्द ही नवजात अपने माता-पिता के पास सुरक्षित लौट आएगा। तब तक यह घटना हर किसी के लिए एक सबक है कि अस्पतालों में सुरक्षा और सतर्कता को और मजबूत करने की जरूरत है।
बरेली: शहर की सड़कें अब पहले जैसी नहीं रहीं। कभी व्यवस्थित और सुगम मानी जाने वाली ये सड़कें अब अतिक्रमण (Bareilly Roads Encroachment) की चपेट में हैं, जो नगरवासियों के लिए एक बड़ी समस्या बन चुकी है। फरीदपुर, बरेली के मुख्य मार्गों पर अतिक्रमण का यह दंश अब इतना गहरा हो चुका है कि यह न केवल यातायात को प्रभावित कर रहा है, बल्कि आम लोगों का रोजमर्रा का जीवन भी दूभर कर रहा है। दुकानदारों द्वारा सड़कों पर सामान फैलाने, फल ठेलों की कतारों और टेंपो चालकों की मनमानी ने हालात को और बदतर बना दिया है। इस सबके बीच, नगर पालिका प्रशासन की उदासीनता और ढुलमुल रवैया इस समस्या को और जटिल बना रहा है।
Bareilly Roads Encroachment- अतिक्रमण का बढ़ता दायरा
बरेली के मेंन बाजार से लेकर बीसलपुर मोड़ तक, सड़कों के दोनों ओर अतिक्रमण ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। कामिल के बाग, स्टेशन रोड, बुखारा रोड, पडेरा रोड और बीसलपुर रोड जैसे प्रमुख मार्ग अब अतिक्रमण के कारण संकरे हो चुके हैं। दुकानदार अपने सामान को सड़क तक फैला रहे हैं, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। फल और सब्जी के ठेले सड़कों पर अवैध रूप से कब्जा जमाए हुए हैं, जिसके कारण रोजाना जाम की स्थिति बन रही है। स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने बताया, “रोज़ाना सुबह और शाम को बाजार में इतना जाम लगता है कि घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। प्रशासन को शिकायत करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल रहा।” Bareilly Roads Encroachment
बरेली की सड़कों पर हो रहे अतिक्रमण से जनता त्रस्त (फोटो- नेशन नाव समाचार )
नगर पालिका की निष्क्रियता- Bareilly Roads Encroachment
नगर पालिका प्रशासन हर साल अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाने का दावा करता है। इन अभियानों की शुरुआत बड़े जोर-शोर से होती है, लेकिन कुछ ही दिनों में यह कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती है। अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया में न तो कोई स्थायी नीति अपनाई जाती है और न ही दीर्घकालिक योजना बनाई जाती है। एक दिन की औपचारिक कार्रवाई के बाद, अतिक्रमणकारी फिर से सड़कों पर कब्जा जमा लेते हैं। यह स्थिति प्रशासन की गंभीरता पर सवाल उठाती है। स्थानीय व्यापारी संगठन, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल, ने भी कई बार इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन उनकी मांगें केवल कागजी कार्रवाइयों तक सीमित रह जाती हैं। Bareilly Roads Encroachment
यातायात व्यवस्था पर असर- Bareilly Roads Encroachment
अतिक्रमण के कारण सड़कों पर जाम की समस्या अब स्थायी हो चुकी है। खासकर, मेंन बाजार और बीसलपुर रोड जैसे व्यस्त क्षेत्रों में सुबह और शाम के समय जाम की स्थिति आम बात हो गई है। टेंपो और ऑटो चालकों द्वारा सड़क पर ही सवारी बैठाने की प्रथा ने यातायात व्यवस्था को और बिगाड़ दिया है। पैदल यात्रियों के लिए सड़कों पर जगह नहीं बची है, जिसके कारण लोग असुरक्षित महसूस करते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक है।
नागरिकों की बढ़ती परेशानी
अतिक्रमण का सबसे ज्यादा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। बाजार में खरीदारी करने वालों को न केवल जाम का सामना करना पड़ता है, बल्कि पैदल चलने की जगह न होने के कारण उन्हें सड़क पर वाहनों के बीच चलना पड़ता है। स्थानीय निवासी शालिनी वर्मा कहती हैं, “बाजार में पैदल चलना अब खतरे से खाली नहीं है। दुकानदारों ने सड़क पर इतना सामान फैला रखा है कि रास्ता ही नहीं मिलता। प्रशासन को इस पर सख्ती करनी चाहिए।”
क्या है समाधान?
अतिक्रमण की इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन को ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाने की जरूरत है। कुछ संभावित समाधान इस प्रकार हो सकते हैं:- Bareilly Roads Encroachment
नियमित निगरानी और सख्ती: नगर पालिका को अतिक्रमण पर नजर रखने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन करना चाहिए, जो नियमित रूप से सड़कों की जांच करे और उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करे।
वैकल्पिक व्यवस्था: फल और सब्जी ठेलों के लिए नगर में विशिष्ट बाजार क्षेत्र या हाट बनाए जा सकते हैं, ताकि सड़कों पर अतिक्रमण कम हो।
जागरूकता अभियान: दुकानदारों और नागरिकों को अतिक्रमण के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा सकते हैं।
कानूनी कार्रवाई: बार-बार अतिक्रमण करने वालों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगे।
प्रशासन की जिम्मेदारी- Bareilly Roads Encroachment
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि नगर पालिका प्रशासन इस गंभीर समस्या के प्रति इतना उदासीन है। अतिक्रमण केवल सड़कों की समस्या नहीं है, बल्कि यह नगर की सुंदरता, व्यवस्था और सुरक्षा को भी प्रभावित कर रहा है। प्रशासन को केवल दिखावटी कार्रवाइयों से आगे बढ़कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना होगा। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह अतिक्रमण और भी विकराल रूप ले सकता है, जिसका खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ेगा।
गाजियाबाद: मोदीनगर क्षेत्र में निवाडी थाना पुलिस ने एक साहसिक कार्रवाई (Ghaziabad Crime) करते हुए दो अंतरराज्यीय लुटेरों को मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया है। यह घटना शुक्रवार को सुरविन स्कूल के पास हुई, जब पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि दो संदिग्ध अपराधी काले रंग की अपाचे मोटरसाइकिल पर नहरपुल निवाडी की ओर आ रहे हैं। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और कुशैडी रोड पर सघन चेकिंग शुरू कर दी। Ghaziabad Crime
🔴 BIG BREAKING | गाजियाबाद 🔹 मोदीनगर के निवाड़ी थाना क्षेत्र में पुलिस और लुटेरों के बीच मुठभेड़ 🔹 मुठभेड़ के दौरान 2 अंतर्राज्यीय लुटेरे गिरफ्तार 🔹 पुलिस फायरिंग में दोनों बदमाश घायल, अस्पताल में भर्ती 🔹 बदमाशों के कब्जे से 2 अवैध तमंचे, ₹4800 नकद व लूट में प्रयुक्त अपाचे… pic.twitter.com/OZ4tNbxSgj
चेकिंग के दौरान, पुलिस ने मोटरसाइकिल सवार दो व्यक्तियों को रुकने का इशारा किया। लेकिन बदमाशों ने भागने की कोशिश की और उनकी बाइक फिसलकर गिर गई। घिरने के डर से दोनों ने पुलिस पर जानलेवा हमला करते हुए फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जिससे दोनों बदमाश घायल हो गए। Ghaziabad Crime
गिरफ्तार बदमाशों की पहचान राशिद (निवासी ईदगाह कॉलोनी, फरूखनगर, थाना टीला मोड़, हाल पता मुरादनगर) और धनंजय (निवासी सुंदर नगरी, नई दिल्ली, हाल पता गरिमा गार्डन, शालीमार गार्डन) के रूप में हुई। पुलिस ने उनके कब्जे से दो अवैध तमंचे (.315 बोर), दो जिंदा कारतूस, दो खोखा कारतूस, एक मोटरसाइकिल, और 4800 रुपये नकद बरामद किए। घायल बदमाशों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। Ghaziabad Crime
Ghaziabad Crime- मुठभेड़ में दो अंतरराज्यीय लुटेरे गिरफ्तार
एसीपी मोदीनगर ज्ञान प्रकाश राय ने बताया कि दोनों बदमाश अंतरराज्यीय लूट की घटनाओं में शामिल थे। पुलिस अब इनके आपराधिक इतिहास की जांच कर रही है और इनके गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी कर रही है। यह कार्रवाई गाजियाबाद पुलिस की अपराध नियंत्रण की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। Ghaziabad Crime
निवाडी पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से क्षेत्र में अपराध पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। स्थानीय लोग पुलिस की सतर्कता की सराहना कर रहे हैं, लेकिन साथ ही क्षेत्र में बढ़ते अपराध को लेकर चिंता भी जता रहे हैं। Ghaziabad Crime
सहारनपुर। जनपद के थाना चिलकाना क्षेत्र अंतर्गत भोजपुर तगा गांव में (SAHARANPUR NEWS) पुलिस और प्रशासन ने एक निर्माणाधीन अवैध मस्जिद पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे बुलडोजर चलाकर गिरा दिया। यह कार्रवाई उस वक्त की गई जब शिकायत मिलने पर पता चला कि यह निर्माण बिना किसी नक्शे की स्वीकृति के किया जा रहा था।
प्रशासन द्वारा इस मस्जिद निर्माण को लेकर पहले ही 15 दिन का नोटिस जारी किया गया था, जिसमें निर्माण कार्य को रोकने और जवाब देने को कहा गया था लेकिन निर्माणकर्ता पक्ष द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया, जिसके बाद अधिकारियों ने यह कार्रवाई अमल में लाई। SAHARANPUR NEWS
कार्रवाई के दौरान एसडीएम सदर सुबोध कुमार, तहसीलदार जितेंद्र सिंह, सीओ सदर मनोज यादव, जिला पंचायत अधिकारी समेत कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर मौजूद रही। बुलडोजर की मदद से निर्माणाधीन मस्जिद को ढहाया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार का कोई विरोध या हंगामा नहीं हुआ, जिससे कार्यवाही शांतिपूर्वक संपन्न हो सकी।SAHARANPUR NEWS
जिला प्रशासन ने अवैध निर्माण पर बुलडोजर से कार्रवाई की (फोटो- नेशन नाव समाचार)
एसडीएम सुबोध कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि यह निर्माण अवैध रूप से और नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल का निर्माण कानूनी प्रक्रिया और अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। SAHARANPUR NEWS
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे, चाहे वह किसी भी धर्म, वर्ग या संस्था से जुड़ा हो। यह कार्यवाही गांव में प्रशासन की सख्ती और पारदर्शिता का संकेत मानी जा रही है।
हमीरपुर: जनपद के भरुआ सुमेरपुर कस्बे में शुक्रवार तड़के रिमझिम इस्पात लिमिटेड फैक्ट्री में (HAMIRPUR CRIME NEWS) एक दर्दनाक हादसा हो गया। सुबह लगभग 4:30 बजे एक डंपर ने मजदूर जयनारायण (40) को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। जयनारायण बीते दस वर्षों से इसी फैक्ट्री में ठेकेदारी पर कार्यरत था। HAMIRPUR CRIME NEWS
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को फैक्ट्री की एंबुलेंस से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया। लेकिन पुलिस की इस कार्यवाही को लेकर परिजनों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। परिजनों का आरोप है कि फैक्ट्री चौकी इंचार्ज राजवीर सिंह और सिपाही दयाराम ने उन्हें बिना शव दिखाए धक्का देकर एंबुलेंस से शव को बाहर भेज दिया। HAMIRPUR CRIME NEWS
मजदूर की मौत के बाद सदमे में परिजन (फोटो- नेशन नाव समाचार)
घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई और मृतक के परिजन फैक्ट्री गेट के बाहर विरोध करने लगे। मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष अनूप सिंह ने स्थिति को संभालते हुए परिजनों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। इसके बाद माहौल थोड़ा शांत हुआ।
मृतक अपने पीछे पत्नी नीलम, बेटे राज और सत्यम, तथा बेटी सोनम को बेसहारा छोड़ गया है। बताया जा रहा है कि वह अवधेश शुक्ला की ठेकेदारी में कार्यरत था। फैक्ट्री मैनेजर मनोज गुप्ता ने बताया कि हादसा डंपर की टक्कर से हुआ और मृतक को फैक्ट्री अधिनियम के तहत मुआवजा दिया जाएगा। HAMIRPUR CRIME NEWS
नई दिल्ली: पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सेनाओं के बीच एक बार फिर हिंसक झड़प हुई। यह झड़प अफगानिस्तान के (Pak Afghan Border Conflict) बरमाचा सीमा क्षेत्र में हुई, जो पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के समानांतर स्थित है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह विवाद सीमा पर नई सैन्य चौकियों के निर्माण को लेकर भड़का।
बरमाचा में गोलीबारी: क्या है पूरा मामला?- Pak Afghan Border Conflict
सुबह शुरू हुई गोलीबारी कुछ समय के लिए थम गई थी, लेकिन दोपहर बाद स्थिति फिर बिगड़ गई। पाकिस्तान स्टैंडर्ड टाइम के अनुसार, दोपहर 4:30 बजे के बाद दोनों पक्षों ने फिर से भारी गोलीबारी शुरू कर दी। अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत के अंतरिम प्रशासन ने भी इस झड़प की पुष्टि की। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने टैंक तैनात किए और अफगान सीमा पर बनी चौकियों को भारी तोपखाने से निशाना बनाया।
यह क्षेत्र पहले भी कई बार हिंसक झड़पों का गवाह रहा है। बरमाचा, जो अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत का हिस्सा है, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह इलाका डूरंड लाइन के पास स्थित है, जो दोनों देशों के बीच सीमा को चिह्नित करती है। डूरंड लाइन को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है, और सीमा पर चौकियों का निर्माण इस तनाव को और बढ़ाता है।
TTP और अफगान तालिबान की भूमिका- Pak Afghan Border Conflict
पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच संबंध अब कट्टर दुश्मनी में बदल चुके हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), जो अफगान तालिबान का समर्थक माना जाता है, पाकिस्तान के खिलाफ लगातार हमले कर रहा है। TTP ने हाल के वर्षों में पाकिस्तान की सैन्य चौकियों पर कब्जा करने की कोशिशें तेज कर दी हैं।
लगभग पांच महीने पहले, खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले के सालारजई क्षेत्र में TTP ने एक सैन्य बेस पर कब्जा कर लिया था और वहां अपना झंडा फहराया था। इसके बाद, 28 दिसंबर 2024 को अफगान तालिबान और TTP ने मिलकर पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों पर हमला किया। इस हमले में 19 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने की खबर आई, जिसने पाकिस्तान सरकार को हिलाकर रख दिया।
TTP की बढ़ती गतिविधियां और अफगान तालिबान का समर्थन पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यह आतंकी संगठन न केवल पाकिस्तानी सेना की चौकियों को निशाना बना रहा है, बल्कि सीमा पर अस्थिरता को भी बढ़ा रहा है।
सीमा पर तनाव के कारण- Pak Afghan Border Conflict
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का प्रमुख कारण डूरंड लाइन पर सीमा बाड़ और चौकियों का निर्माण है। पाकिस्तान ने 2005 में इस सीमा पर 2,611 किलोमीटर लंबी बाड़ लगाने की योजना बनाई थी, जिसका उद्देश्य आतंकियों और तस्करों की घुसपैठ को रोकना था। हालांकि, अफगानिस्तान ने इस बाड़ को कभी स्वीकार नहीं किया और इसे अपनी संप्रभुता पर हमला माना।
हाल के वर्षों में, दोनों देशों के बीच सीमा पर कई बार गोलीबारी और हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (SATP) के आंकड़ों के अनुसार, 2007 से अब तक कम से कम 21 ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें 56 लोग मारे गए हैं। इनमें से अधिकांश पाकिस्तानी सैनिक और नागरिक थे।
वर्तमान स्थिति और प्रभाव- Pak Afghan Border Conflict
बरमाचा में गुरुवार की झड़प ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। हेलमंद प्रांत के स्थानीय निवासियों ने बताया कि गोलीबारी के कारण कई परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर गए। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने अपनी सीमा पर सैन्य उपस्थिति को और मजबूत कर लिया है।
इस संघर्ष का असर क्षेत्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। टोरखम और चमन जैसे प्रमुख सीमा क्रॉसिंग पॉइंट्स पहले ही कई बार बंद हो चुके हैं, जिससे अफगानिस्तान में खाद्य और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हुई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अफगानिस्तान में लाखों लोग भुखमरी के कगार पर हैं, और सीमा बंद होने से यह संकट और गहरा सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से सैन्य संयम बरतने की अपील की है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर क्षेत्र में शांति और स्थिरता की वकालत की।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 28 मई 2025 को किसानों और बुनियादी ढांचे को (MSP PRICE HIKE UPDATE) मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए. इनमें खरीफ फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की ब्याज सब्सिडी योजना को आगे बढ़ाना और रेलवे व सड़क परियोजनाओं को मंजूरी शामिल है. ये कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेंगे, बल्कि देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नई गति देंगे. आइए, इन फैसलों को विस्तार से समझते हैं. MSP PRICE HIKE UPDATE
Another important step of PM @narendramodi Ji's government in the interest of Farmers.
खरीफ फसलों की MSP में बढ़ोतरी- MSP PRICE HIKE UPDATE
केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन की 14 फसलों की MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है. यह फैसला किसानों को बाजार की अनिश्चितताओं से बचाने और उनकी आय को स्थिर करने के लिए लिया गया है. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि धान की नई MSP 2,369 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, जो पिछले साल की तुलना में 69 रुपये अधिक है. कपास की दो किस्मों की MSP भी बढ़ाई गई है—एक की 7,710 रुपये और दूसरी की 8,110 रुपये प्रति क्विंटल, जो 589 रुपये की वृद्धि दर्शाती है. MSP PRICE HIKE UPDATE
1. Significant increase in MSP – ensuring dignity, stability, and prosperity for our Annadatas.
✅Union Cabinet chaired by PM @narendramodi Ji has approved the increase in Minimum Support Prices (MSP) for the kharif marketing season 2025–26. pic.twitter.com/SDYNkhWMLY
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) May 28, 2025
इसके अलावा, सोयाबीन, अरहर, मूंग, उड़द और मक्का जैसी अन्य खरीफ फसलों की MSP में भी वृद्धि की गई है. सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि MSP फसल की लागत से कम से कम 50% अधिक हो, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले. इस बढ़ोतरी से सरकार पर 2 लाख 7 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो पिछले सीजन की तुलना में 7,000 करोड़ रुपये अधिक है. MSP PRICE HIKE UPDATE
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह गारंटीड कीमत है, जो सरकार किसानों को उनकी फसलों के लिए देती है, भले ही बाजार में कीमतें कम हों। इसका उद्देश्य किसानों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करना और बाजार की अनिश्चितताओं से उनकी रक्षा करना है। MSP का निर्धारण कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेज (CACP) की सिफारिशों के आधार पर किया जाता है। यह एक तरह की बीमा पॉलिसी की तरह काम करता है, जो बम्पर पैदावार के कारण कीमतें गिरने पर भी किसानों को न्यूनतम आय सुनिश्चित करता है.
खरीफ सीजन 2025-26 के लिए फसलों की नई MSP (रुपये/क्विंटल)
फसल का नाम
2024-25 की MSP (₹/क्विंटल)
2025-26 की MSP (₹/क्विंटल)
वृद्धि (₹)
मक्का
2,225
2,400
175
मूंग
8,682
8,768
86
बाजरा
2,625
2,775
150
कपास (लंबा रेशा)
7,521
8,110
589
धान (सामान्य)
2,300
2,369
69
कपास (मध्यम रेशा)
7,121
7,710
589
सूरजमुखी
7,280
7,721
441
ज्वार (हाइब्रिड)
3,371
3,699
328
ज्वार (मालदांडी)
3,421
3,749
328
तुअर/अरहर
7,550
8,000
450
उड़द
7,400
7,800
400
रागी
4,290
4,886
596
सोयाबीन (पीला)
4,892
5,328
436
तिल
9,267
9,846
579
रामतिल
8,717
9,537
820
मूंगफली (शुद्ध)
6,783
7,263
480
धान (A ग्रेड)
2,320
2,389
69
MSP के तहत 23 फसलों को शामिल किया गया है, जिनमें 7 अनाज (धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार, रागी, जौ), 5 दालें (चना, अरहर, मूंग, उड़द, मसूर), 7 तिलहन (रेपसीड-सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, कुसुम, निगरसीड) और 4 व्यावसायिक फसलें (कपास, गन्ना, खोपरा, कच्चा जूट) शामिल हैं. खरीफ फसलें, जैसे धान, मक्का, कपास, सोयाबीन आदि, जून-जुलाई में बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर में उनकी कटाई होती है.
#UnionCabinet has approved Minimum Support Prices (MSP) for 14 Kharif Crops for Marketing Season 2025-26, including Nigerseed, Ragi, Bajra, Maize, and Tur.
The increase in MSP for Kharif Crops for Marketing Season 2025-26 is in line with the Union Budget 2018-19 announcement of… pic.twitter.com/pliMxnjGuq
— Ministry of Information and Broadcasting (@MIB_India) May 28, 2025
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ब्याज सब्सिडी योजना
केंद्र सरकार ने किसानों को सस्ते लोन उपलब्ध कराने के लिए KCC की ब्याज सब्सिडी योजना (Modified Interest Subvention Scheme – MISS) को वित्त वर्ष 2025-26 तक बढ़ाने का फैसला किया है. इस योजना के तहत किसान 3 लाख रुपये तक का लोन 7% की ब्याज दर पर ले सकते हैं. समय पर लोन चुकाने वाले किसानों को 3% की अतिरिक्त ब्याज छूट मिलती है, जिससे उनकी प्रभावी ब्याज दर केवल 4% रह जाती है.
पशुपालन और मछली पालन के लिए भी 2 लाख रुपये तक के लोन पर यह लाभ उपलब्ध है. इस योजना के लिए सरकार ने पर्याप्त फंड आवंटित किया है, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके. यह कदम छोटे और मध्यम किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण साबित होगा.
रेलवे और सड़क परियोजनाओं को मंजूरी
किसानों के साथ-साथ, सरकार ने देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं. कैबिनेट ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में रेलवे की दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इनमें रतलाम-नागदा के बीच तीसरी और चौथी लाइन और वर्धा-बल्हारशाह के बीच चौथी लाइन शामिल है. इन परियोजनाओं की कुल लागत 3,399 करोड़ रुपये है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य है. ये परियोजनाएं रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएंगी और माल ढुलाई को गति देंगी.
इसके अलावा, आंध्र प्रदेश में बडवेल-नेल्लोर के बीच 108 किलोमीटर लंबे फोर-लेन हाईवे को मंजूरी दी गई है. इस परियोजना की लागत 3,653 करोड़ रुपये है. यह हाईवे कृष्णापटनम पोर्ट और नेशनल हाईवे-67 को जोड़ेगा, जिससे पोर्ट कनेक्टिविटी में सुधार होगा. यह सड़क तीन प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोर—विशाखापट्टनम-चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (VCIC), हैदराबाद-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (HBIC) और चेन्नई-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (CBIC)—के नोड्स को भी जोड़ेगी.
इन फैसलों का प्रभाव
MSP में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी. KCC ब्याज सब्सिडी योजना का विस्तार छोटे और सीमांत किसानों को सस्ता लोन उपलब्ध कराएगा, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी. साथ ही, रेलवे और सड़क परियोजनाएं देश के परिवहन नेटवर्क को बेहतर बनाएंगी, जिससे व्यापार और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीजेपी का दबदबा बना हुआ है. योगी आदित्यनाथ (UP POLITICS 2027) की सख्त प्रशासनिक छवि, हिंदुत्व का एजेंडा और विकास कार्यों ने बीजेपी को मजबूत आधार दिया है. हालाँकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन (इंडिया गठबंधन) से कड़ी चुनौती मिली. फैजाबाद (अयोध्या) जैसी महत्वपूर्ण सीट पर सपा की जीत ने बीजेपी के हिंदुत्व कार्ड को झटका दिया. इसके अलावा, बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असंतोष जैसे मुद्दे विपक्ष के लिए अवसर बन रहे हैं.
सपा और कांग्रेस गठबंधन ने 2024 के उपचुनावों में भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे विपक्ष का मनोबल बढ़ा है. दूसरी ओर, बसपा का प्रभाव कमजोर हुआ है, और पार्टी हाशिए पर नजर आ रही है. छोटे दल, जैसे निषाद पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), भी अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हैं. सामाजिक समीकरणों, खासकर पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक वोटों की गतिशीलता, 2027 के लिए निर्णायक होगी. UP POLITICS 2027
योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश (Photo Credit- Social Media)
बीजेपी की रणनीति: हिंदुत्व, विकास और सामाजिक समीकरण
बीजेपी 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है. पार्टी का मुख्य फोकस हिंदुत्व और विकास के दोहरे एजेंडे पर है. 2025 में अहिल्याबाई होल्कर जन्मशती अभियान शुरू करके बीजेपी पिछड़े समुदायों को साधने की कोशिश कर रही है. यह अभियान 2.7 लाख कार्यकर्ताओं के साथ 8,135 न्याय पंचायतों में चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण स्तर पर संगठन को मजबूत करना है. UP POLITICS 2027
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भी बीजेपी की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. सपा के ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक’ (पीडीए) फॉर्मूले का जवाब देने के लिए आरएसएस हिंदू एकता और शाखाओं के विस्तार पर जोर दे रहा है. योगी सरकार के कार्यों, जैसे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे, को विकास के प्रतीक के रूप में प्रचारित किया जा रहा है. साथ ही, बीजेपी अपने विधायकों और मंत्रियों के कामकाज का ऑडिट कर रही है ताकि जनता में असंतोष को कम किया जा सके. UP POLITICS 2027
हालाँकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा-कांग्रेस गठबंधन की सफलता ने बीजेपी को सतर्क कर दिया है. पार्टी अब सवर्ण, गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है. निषाद पार्टी जैसे सहयोगियों के साथ संबंधों को संभालना भी बीजेपी के लिए चुनौती है, क्योंकि संजय निषाद ने 200 सीटों पर प्रभाव का दावा किया है. UP POLITICS 2027
अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश (Photo Credit- Social Media)
समाजवादी पार्टी: पीडीए और युवा जोश- UP POLITICS 2027
समाजवादी पार्टी, अखिलेश यादव के नेतृत्व में, 2027 में सत्ता वापसी के लिए पूरी ताकत लगा रही है. सपा का ‘पीडीए’ फॉर्मूला—पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक—2024 के लोकसभा और उपचुनावों में प्रभावी साबित हुआ. अखिलेश यादव ने दावा किया है कि 2027 में सपा के नेतृत्व में पीडीए की सरकार बनेगी. पार्टी जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और गठबंधन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है. UP POLITICS 2027
सपा की रणनीति में यादव और मुस्लिम वोटों का पारंपरिक आधार तो है ही, साथ ही गैर-यादव ओबीसी और दलित वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश हो रही है. 2024 में फैजाबाद सीट पर अवधेश प्रसाद की जीत ने सपा को दलित समुदाय में पैठ बनाने का मौका दिया. इसके अलावा, सपा बेरोजगारी, महंगाई और संविधान-आरक्षण जैसे भावनात्मक मुद्दों को उठाकर युवाओं और अल्पसंख्यकों को लुभाने की कोशिश कर रही है.UP POLITICS 2027
कांग्रेस के साथ गठबंधन सपा की रणनीति का केंद्र है. 2024 के उपचुनावों में दोनों दलों ने मिलकर बीजेपी को कड़ी टक्कर दी, और यह गठबंधन 2027 में भी जारी रहने की संभावना है. हालाँकि, सपा को गठबंधन में सीट बँटवारे और नेतृत्व के मुद्दों को सुलझाना होगा. UP POLITICS 2027
अजय राय, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस (Photo Credit- Social Media)
कांग्रेस: पुनर्जनन की राह- UP POLITICS 2027
कांग्रेस, जो लंबे समय से उत्तर प्रदेश में हाशिए पर रही, अब धीरे-धीरे अपनी स्थिति सुधार रही है. प्रियंका गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने 2022 के चुनावों में संगठन को मजबूत करने की कोशिश की थी, और 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा के साथ गठबंधन ने इसे नया जीवन दिया. कांग्रेस अब युवा नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है. UP POLITICS 2027
कांग्रेस की रणनीति सपा के साथ गठबंधन को बनाए रखने और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जोर देने की है. पार्टी दलित, अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग को लुभाने के लिए सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, जैसे बेरोजगारी और शिक्षा, पर फोकस कर रही है. साथ ही, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जैसे अभियानों का प्रभाव भी उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है. UP POLITICS 2027
हालाँकि, कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक कमजोरी और बड़े चेहरों की कमी है. प्रियंका गांधी की सक्रियता से पार्टी को कुछ हद तक मजबूती मिली है, लेकिन 2027 में वह कितनी सीटें जीत पाएगी, यह गठबंधन की रणनीति पर निर्भर करेगा.
मायावती, पूर्व सीएम, उत्तर प्रदेश (Photo Credit- Social Media)
बहुजन समाज पार्टी: अस्तित्व की लड़ाई
बसपा, जो कभी उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज थी, अब कमजोर स्थिति में है. 2024 के उपचुनावों में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, और यह सियासी हाशिए पर चली गई है. मायावती के नेतृत्व में बसपा अब आकाश आनंद जैसे युवा चेहरों को आगे लाकर नई ऊर्जा लाने की कोशिश कर रही है. UP POLITICS 2027
बसपा की रणनीति दलित वोटों को एकजुट करने और गैर-जाटव दलित समुदायों को आकर्षित करने पर केंद्रित है. पार्टी सवर्ण और ओबीसी वोटरों को लुभाने के लिए भी नए गठबंधन तलाश रही है. हालाँकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में बसपा का खाता न खुलना और उपचुनावों में कमजोर प्रदर्शन इसकी चुनौतियों को दर्शाता है. 2027 में बसपा के लिए सत्ता की राह मुश्किल है, लेकिन अगर मायावती प्रभावी गठबंधन बना पाएँ, तो वह कुछ सीटों पर आश्चर्यजनक प्रदर्शन कर सकती है.
क्या 2027 में बीजेपी की राजनीति बदलेगी?
बीजेपी की रणनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली चुनौती ने पार्टी को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है. पहले जहाँ बीजेपी का फोकस केवल हिंदुत्व पर था, अब वह सामाजिक समीकरणों को साधने और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है. अहिल्याबाई जन्मशती अभियान और आरएसएस की सक्रियता इस बदलाव का हिस्सा है.
बीजेपी को गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों को बनाए रखने की चुनौती है, क्योंकि सपा का पीडीए फॉर्मूला इन समुदायों को आकर्षित कर रहा है. इसके अलावा, निषाद पार्टी जैसे सहयोगियों की बढ़ती माँगें और छोटे दलों की सक्रियता बीजेपी के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर सकती हैं.
फिर सत्ता पर कबिज होंगे योगी आदित्यनाथ!
योगी आदित्यनाथ की सख्त प्रशासनिक छवि और हिंदुत्व के प्रतीक के रूप में उनकी लोकप्रियता बीजेपी के लिए सबसे बड़ा हथियार है. 2022 में बीजेपी ने उनके नेतृत्व में 255 सीटें जीतीं, जो दर्शाता है कि जनता में उनकी स्वीकार्यता बनी हुई है. बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि 2027 का चुनाव भी योगी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा.
हालाँकि, योगी के सामने कई चुनौतियाँ हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की सीटों में कमी और सपा-कांग्रेस गठबंधन की मजबूती ने सवाल उठाए हैं. अगर बीजेपी 2027 में बहुमत हासिल करती है, तो योगी का फिर से मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है, क्योंकि उनकी छवि और संगठन पर पकड़ मजबूत है. लेकिन अगर बीजेपी की सीटें कम होती हैं और गठबंधन सरकार बनती है, तो सहयोगियों की माँगों के चलते नेतृत्व पर विचार हो सकता है.
सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, जैसे बेरोजगारी और महंगाई, का असर भी योगी की छवि पर पड़ सकता है. फिर भी, उनके विकास कार्य, कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण और हिंदुत्व की अपील उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है. संभावना है कि अगर बीजेपी जीतती है, तो योगी 70-80% संभावना के साथ फिर से मुख्यमंत्री बन सकते हैं.
मुंबई: 27 मई 2025 को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (STOCK MARKET NEWS) देखने को मिला. सेंसेक्स में करीब 1,000 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 81,250 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. निफ्टी भी 250 अंकों की कमी के साथ 24,750 के स्तर पर रहा. इस गिरावट के पीछे उच्च वैल्यूएशन और वैश्विक बाजारों की कमजोरी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का सुनहरा अवसर हो सकती है.
सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन– STOCK MARKET NEWS
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 26 में गिरावट देखी गई, जबकि केवल 4 शेयरों ने तेजी दिखान. अल्ट्राटेक सीमेंट का शेयर 2.50% नीचे रहा, और ITC, NTPC जैसे शेयरों में भी 2% तक की कमी देखी गई. दूसरी ओर, इंडसइंड बैंक ने लगभग 3% की उछाल दर्ज की, जिसने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया.
निफ्टी के 50 शेयरों में से 39 में गिरावट और 11 में तेजी रही. NSE के IT इंडेक्स में 0.93%, ऑटो इंडेक्स में 0.60%, और प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 0.73% की कमी देखी गई. हालांकि, मीडिया, मेटल, फार्मा, और रियल्टी जैसे सेक्टरों में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जिसने बाजार को कुछ राहत प्रदान की. STOCK MARKET NEWS
उच्च वैल्यूएशन का दबाव- STOCK MARKET NEWS
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी के विजयकुमार ने बताया कि भारतीय शेयर बाजार अब एक समेकन चरण (कॉन्सोलिडेशन फेज) में प्रवेश कर सकता है. उच्च वैल्यूएशन के कारण बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ रहा है. फिर भी, म्यूचुअल फंड्स के पास उपलब्ध नकदी की वजह से किसी भी बड़ी गिरावट में खरीदारी की संभावना बनी हुई है. यह स्थिति उन निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकती है, जो दीर्घकालिक निवेश की तलाश में हैं. STOCK MARKET NEWS
वैश्विक बाजारों का असर- STOCK MARKET NEWS
वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में कमजोरी का माहौल रहा. जापान का निक्केई इंडेक्स 100 अंकों की गिरावट के साथ 37,440 पर और कोरिया का कोस्पी 13 अंकों की कमी के साथ 2,631 पर कारोबार कर रहा था. हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.31% नीचे 23,209 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट 11 अंकों की गिरावट के साथ 3,335 पर रहा.
23 मई को अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट देखी गई थी. डाउ जोन्स 256 अंकों की कमी के साथ 41,603 पर, नैस्डेक 188 अंकों की गिरावट के साथ 18,737 पर, और S&P 500 39 अंकों की कमी के साथ 5,802 पर बंद हुआ. वैश्विक बाजारों की यह कमजोरी भारतीय बाजार पर भी असर डाल रही है.
निवेशकों की गतिविधियां- STOCK MARKET NEWS
26 मई को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 1,745.72 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 135.98 करोड़ रुपये की खरीदारी की. मई महीने में अब तक DIIs ने 36,243.28 करोड़ रुपये और FIIs ने 12,327.59 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की है. अप्रैल में DIIs ने 28,228.45 करोड़ रुपये और FIIs ने 2,735.02 करोड़ रुपये का निवेश किया था. यह मजबूत निवेश बाजार में निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है.
‘द लीला’ होटल्स का IPO- STOCK MARKET NEWS
लग्जरी होटल चेन ‘द लीला’ की पैरेंट कंपनी श्लॉस बैंगलोर लिमिटेड का IPO 26 मई से निवेश के लिए खुला है और 28 मई 2025 तक खुला रहेगा. कंपनी इस IPO के जरिए 3,500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है, जिसमें 2,500 करोड़ रुपये के नए शेयर और 1,000 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल शामिल है. यह रिटेल निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर हो सकता है.
निवेशकों के लिए रणनीति
बाजार की मौजूदा अस्थिरता के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आर्थिक बुनियाद और घरेलू निवेशकों की सक्रियता बाजार को सहारा दे सकती है. निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाएं, गुणवत्ता वाले शेयरों पर ध्यान दें, और बाजार की हर गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखें. दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाने से जोखिम को कम किया जा सकता है.
नई दिल्ली: भारत में कोविड-19 के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक (CORONA CASES RISE IN INDIA) देश में कुल मामलों की संख्या 1047 हो गई है. इसमें सबसे ज्यादा 430 सक्रिय केस केरल से हैं. इसके बाद महाराष्ट्र में 208, दिल्ली में 104, गुजरात में 83 और कर्नाटक में 80 केस दर्ज किए गए हैं. बेंगलुरु में ही कर्नाटक के कुल 73 केस हैं.
मौतों की बात करें तो महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कुल 11 मरीजों की जान जा चुकी है. पिछले एक हफ्ते में 9 मौतें दर्ज की गई हैं. महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 5 मौतें हुई हैं. ठाणे जिले में सोमवार को एक महिला की जान चली गई. CORONA CASES RISE IN INDIA
CORONA CASES RISE IN INDIA- एक सप्ताह में 787 नए केस
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक बीते सात दिनों में 787 नए कोविड केस सामने आए हैं. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के निदेशक डॉ. राजीव बहल ने जानकारी दी कि भारत में अब तक चार नए कोविड वैरिएंट सामने आए हैं – LF.7, XFG, JN.1 और NB.1.8.1. CORONA CASES RISE IN INDIA
CORONA CASES RISE IN INDIA- कोविड से मौतें: प्रमुख आंकड़े
राज्य
मौतों की संख्या
प्रमुख क्षेत्र
महाराष्ट्र
5
ठाणे, मुंबई
कर्नाटक
1
बेंगलुरु
राजस्थान
1
जयपुर
मध्य प्रदेश
2
जानकारी नहीं
पश्चिम बंगाल
2
जानकारी नहीं
जयपुर में सोमवार को दो मरीजों की मौत हुई, जिसमें से एक रेलवे स्टेशन पर मृत मिला था. उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई. दूसरा मरीज 26 साल का था, जिसे पहले से टीबी थी. CORONA CASES RISE IN INDIA
ठाणे में मौतें महाराष्ट्र के ठाणे में रविवार 25 मई को एक 21 वर्षीय युवक की मौत हुई. उसका 22 मई से इलाज चल रहा था. वहीं एक महिला मरीज की इलाज के दौरान जान गई. CORONA CASES RISE IN INDIA
बेंगलुरु में बुजुर्ग की मौत 17 मई को कर्नाटक के बेंगलुरु में 84 वर्षीय बुजुर्ग की मल्टी ऑर्गन फेल्योर के कारण मौत हुई. उनकी रिपोर्ट 24 मई को पॉजिटिव आई थी. केरल में भी दो लोगों की कोविड से जान गई है.
भारत में मिले 4 नए वैरिएंट ICMR ने बताया कि दक्षिण और पश्चिम भारत में सीक्वेंसिंग के दौरान LF.7, XFG, JN.1 और NB.1.8.1 वैरिएंट मिले हैं. ये सभी WHO द्वारा “निगरानी में रखे गए वैरिएंट” के रूप में वर्गीकृत हैं. फिलहाल इन्हें चिंताजनक नहीं माना गया है. CORONA CASES RISE IN INDIA
NB.1.8.1 वैरिएंट की विशेषताएं
इसमें A435S, V445H, और T478I जैसे स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन हैं.
यह वैरिएंट तेजी से फैलता है.
इम्यून सिस्टम की बनी हुई प्रतिरोधक क्षमता इस पर असर नहीं डाल पाती.
सबसे आम वैरिएंट: JN.1 भारत में सबसे ज्यादा JN.1 वैरिएंट देखने को मिल रहा है.
वैरिएंट
प्रसार प्रतिशत
JN.1
50%+
BA.2
26%
अन्य ओमिक्रॉन
20%
JN.1 के लक्षण और खतरे
यह ओमिक्रॉन के BA.2.86 का स्ट्रेन है.
इसमें करीब 30 म्यूटेशन्स हैं.
इम्यूनिटी को कमजोर कर सकता है.
WHO ने दिसंबर 2023 में इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया था.
डॉक्टरों की सलाह ICMR के अनुसार, फिलहाल स्थिति गंभीर नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है. डॉक्टरों का कहना है कि लक्षण लंबे समय तक बने रह सकते हैं. ऐसे मामलों में लॉन्ग कोविड की आशंका हो सकती है.
निष्कर्ष कोरोना वायरस का खतरा भले ही पहले जैसा भयावह नहीं रहा, लेकिन इसकी वापसी से लापरवाही नहीं की जा सकती। नए वैरिएंट्स की पहचान और सतर्कता ही इससे निपटने का उपाय है.
कोरोना की पिछली लहर
भारत में कोरोना की आखिरी बड़ी लहर वर्ष 2022 के अंत से 2023 की शुरुआत तक देखी गई थी, जो मुख्य रूप से Omicron वैरिएंट के सब-वैरिएंट्स जैसे BF.7, XBB.1.5 और JN.1 के कारण फैली थी, हालांकि इस लहर की तीव्रता डेल्टा लहर जितनी घातक नहीं थी, फिर भी बुजुर्गों और को-मॉर्बिडिटी वाले मरीजों के लिए यह गंभीर साबित हुई.