Nation Now Samachar

Category: Latest

Latest

  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कैसे बने मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने खोले राज़

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कैसे बने मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने खोले राज़

    नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री बनने की कहानी राजनीतिक गलियारों में हमेशा चर्चा का विषय रही है।

    अब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस विषय पर कुछ अहम और गुप्त पहलुओं का खुलासा किया है।

    पीयूष गोयल के अनुसार, योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री बनने की प्रक्रिया में सत्तारूढ़ पार्टी के संगठनात्मक निर्णय, राजनीतिक समीकरण और जन समर्थन का मिश्रण निर्णायक साबित हुआ। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि समाज और राजनीति में सक्रिय संगठनकर्ता के रूप में थी, जो चुनावी जीत और प्रशासनिक दक्षता दोनों में सक्षम थे।

    गुप्त पहलू और राजनीतिक रणनीति

    पीयूष गोयल ने बताया कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने में पार्टी नेतृत्व की गहन रणनीति शामिल थी। यह केवल लोकप्रियता का मामला नहीं था, बल्कि पार्टी की नीति, संगठनात्मक मजबूती और उत्तर प्रदेश की सामाजिक-राजनीतिक संरचना को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया।उन्होंने यह भी खुलासा किया कि मुख्यमंत्री पद के लिए योगी का चयन सुरक्षित और निर्णायक विकल्प माना गया था। उनका दृष्टिकोण और प्रशासनिक क्षमता, साथ ही जनता के बीच मजबूत पकड़, उन्हें पार्टी नेतृत्व के लिए सबसे भरोसेमंद उम्मीदवार बनाती थी।

    उत्तर प्रदेश में बदलाव की दिशा

    पीयूष गोयल के अनुसार, योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने कई क्षेत्रों में विकास की नई दिशा देखी। कानून-व्यवस्था में सुधार, निवेश आकर्षण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल था।गोयल ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री बनने की कहानी राजनीतिक रणनीति और जनता के समर्थन का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो यह साबित करता है कि सत्तारूढ़ पार्टी में निर्णय लेने की प्रक्रिया में सिर्फ राजनीतिक समीकरण ही नहीं, बल्कि जन-विश्वास और नेतृत्व क्षमता भी निर्णायक होती है।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हुआ उत्तराखंड का राकेश, परिवार में मचा कोहराम

    रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हुआ उत्तराखंड का राकेश, परिवार में मचा कोहराम

    देहरादून/उत्तराखंड। रूस-यूक्रेन युद्ध से एक और दर्दनाक खबर सामने आई है। उत्तराखंड का रहने वाला युवक राकेश इस युद्ध में शहीद हो गया है। अधिकारियों द्वारा फोन के माध्यम से शहादत की सूचना मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया है। गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और हर आंख नम है।परिजनों के मुताबिक, राकेश पढ़ाई के उद्देश्य से विदेश गया था, लेकिन हालात ऐसे बने कि वह युद्ध की चपेट में आ गया। जैसे ही शहादत की खबर मिली, परिवार सदमे में चला गया। घर पर मातम पसरा हुआ है और आसपास के लोग ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।

    अधिकारियों ने फोन पर दी शहादत की सूचना

    परिवार को यह दुखद जानकारी सरकारी अधिकारियों द्वारा फोन के जरिए दी गई। बताया गया कि राकेश रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मारा गया है। फिलहाल उसके पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। प्रशासन की ओर से परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया गया है।

    पिता का दर्द छलका

    राकेश के पिता का दर्द शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने रोते हुए कहा,
    “मेरा बेटा पढ़ने गया था, उसे बंदूक थमा दी गई। हमने उसे किताबों के साथ भेजा था, लेकिन वह युद्ध में झोंक दिया गया।”
    पिता का कहना है कि राकेश का युद्ध से कोई लेना-देना नहीं था और वह अपने भविष्य को संवारने विदेश गया था।

    गांव और प्रदेश में शोक

    राकेश की शहादत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि परिवार के घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। उत्तराखंड से पहले भी कई युवाओं के विदेशों में फंसे होने और युद्ध क्षेत्रों में जाने की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिससे परिजन लगातार चिंता में रहते हैं।

    सरकार से मदद की मांग

    परिवार ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि राकेश के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाया जाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा व सहायता दी जाए। साथ ही, विदेशों में पढ़ाई या काम के नाम पर गए युवाओं की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने की भी अपील की गई है।

    रूस-यूक्रेन युद्ध लगातार कई निर्दोष जिंदगियों को निगल रहा है। उत्तराखंड के राकेश की शहादत ने एक बार फिर इस युद्ध की भयावहता को उजागर कर दिया है।

  • बहराइच में भेड़ियों का आतंक: आंगन से मासूम को उठा ले गया आदमखोर, पीछा करने पर झाड़ी में छोड़कर भागा

    बहराइच में भेड़ियों का आतंक: आंगन से मासूम को उठा ले गया आदमखोर, पीछा करने पर झाड़ी में छोड़कर भागा

    बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में आदमखोर भेड़ियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। कैसरगंज इलाके से एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां देर शाम घर के आंगन में खेल रही 3 साल की मासूम बच्ची को भेड़िया उठा ले गया। गनीमत रही कि परिजनों ने साहस दिखाते हुए शोर मचाया और भेड़िए का पीछा किया, जिससे घबराकर भेड़िया बच्ची को पास की झाड़ियों में घायल अवस्था में छोड़कर भाग गया।घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। बच्ची को गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची के शरीर पर भेड़िए के दांतों और नाखूनों के गहरे निशान हैं।

    घरों तक पहुंचा आदमखोर

    ग्रामीणों का कहना है कि भेड़िए अब जंगलों से निकलकर सीधे आबादी वाले इलाकों में घुस रहे हैं। पहले ये घटनाएं खेतों या रास्तों पर होती थीं, लेकिन अब घर के आंगन तक मासूम सुरक्षित नहीं हैं। कैसरगंज क्षेत्र में बीते कुछ हफ्तों से लगातार भेड़ियों की गतिविधियां देखी जा रही हैं।

    पहले भी बन चुका है मासूम शिकार

    बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह भी इसी इलाके में एक मासूम बच्चा भेड़िए का शिकार बन चुका है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं और बच्चों को घर से बाहर निकलने नहीं दे रहे।

    वन विभाग का सर्च ऑपरेशन जारी

    वन विभाग ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। ड्रोन कैमरों, ट्रैप कैमरों और पिंजरे लगाकर आदमखोर भेड़ियों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। विभाग का दावा है कि जल्द ही भेड़ियों को पकड़ लिया जाएगा, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब तक की कार्रवाई नाकाफी साबित हो रही है।

    ग्रामीणों में गुस्सा, सुरक्षा की मांग

    ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में अतिरिक्त वनकर्मी और पुलिस बल तैनात किया जाए। साथ ही रात के समय गश्त बढ़ाने और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं। लोगों का कहना है कि जब तक भेड़ियों को पकड़ा नहीं जाता, तब तक भय का माहौल बना रहेगा।बहराइच में लगातार हो रहे भेड़िया हमले प्रशासन और वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक मासूम इन आदमखोरों का शिकार बनते रहेंगे?

  • India Afghanistan Relations: भारत अफगानिस्तान के मुश्किल वक्त में बना मजबूत साझेदार, तालिबान के बावजूद रिश्ते कायम

    India Afghanistan Relations: भारत अफगानिस्तान के मुश्किल वक्त में बना मजबूत साझेदार, तालिबान के बावजूद रिश्ते कायम

    India Afghanistan Relations: भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दोस्ती सिर्फ सत्ता या राजनीति से नहीं, बल्कि इंसानियत से निभाई जाती है। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद भी भारत और अफगानिस्तान के रिश्ते पहले से कहीं ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहे हैं।

    अफगानिस्तान के मंत्री लगातार भारत का दौरा

    अफगानिस्तान के कई बड़े मंत्री और उच्च अधिकारी लगातार भारत का दौरा कर रहे हैं। इन दौरों का मकसद केवल राजनीतिक बैठकें नहीं, बल्कि विकास, मदद और अफगानिस्तान के आम लोगों के लिए सहयोग सुनिश्चित करना है। भारत ने सभी क्षेत्रों में सहायता और मानवीय मदद जारी रखी है, जिससे अफगानिस्तान में आम लोगों का जीवन आसान बन सके।

    तालिबान के बावजूद सहयोग जारी

    तालिबान शासन के बावजूद भारत अफगानिस्तान के साथ अपने मजबूत रिश्तों को कायम रखने में जुटा है। भारत ने राहत कार्यों, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक सहायता के जरिए अफगानिस्तान को संकट के इस दौर में सहारा दिया है।

    पड़ोसी देशों की चिंता

    भारत-अफगानिस्तान के बढ़ते सहयोग को लेकर पड़ोसी पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर भारत और तालिबान के मधुर रिश्तों की तस्वीरें देखकर आश्चर्यचकित हैं। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीति से ऊपर उठकर इंसानियत के आधार पर दोस्ती निभाई जा सकती है।

    मानवीय दृष्टिकोण और रणनीति

    भारत का यह कदम केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय दृष्टिकोण और क्षेत्रीय स्थिरता का परिचायक भी है। अफगानिस्तान के नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए भारत निरंतर पहल कर रहा है।इस तरह, भारत ने साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियों में दोस्ती निभाना और मजबूत करना ही असली कूटनीतिक ताकत है।

  • कानपुर देहात: गौतस्करी के आरोपी और पुलिस की मुठभेड़, दो गिरफ्तार

    कानपुर देहात: गौतस्करी के आरोपी और पुलिस की मुठभेड़, दो गिरफ्तार

    रिपोर्ट संदीप कुशवाहा कानपुर देहात। थाना शिवली क्षेत्र में पुलिस और गौतस्करों के बीच मुठभेड़ की खबर सामने आई है। इस कार्रवाई में पुलिस ने दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।

    मुठभेड़ का घटनाक्रम

    पुलिस ने क्षेत्र में सघन चेकिंग अभियान चलाया हुआ था। इसी दौरान मोटरसाइकिल सवार संदिग्धों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों अभियुक्तों के पैर में गोली लगी। घायल आरोपियों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    गौतस्करी में संलिप्तता की पुष्टि

    गिरफ्तार अभियुक्तों ने 11 दिसंबर को हुई गौतस्करी की घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। पुलिस ने उनके पास से दो तमंचे, कारतूस, मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल बरामद किया।

    पुलिस की कार्रवाई जारी

    पुलिस ने बताया कि मामले में विधिक कार्रवाई जारी है और आगे भी जांच की जाएगी। क्षेत्र में इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है।थाना शिवली की पुलिस ने कहा कि किसी भी प्रकार के गौतस्करी और अपराध के मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी और आरोपी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।यह कार्रवाई न केवल गौतस्करी की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आम जनता में सुरक्षा और विश्वास बनाए रखने में भी सहायक है।

  • डिंपल यादव का केंद्र पर तीखा हमला “नाम बदलने वाली सरकार पहले मनरेगा के आंकड़े पेश करे”

    डिंपल यादव का केंद्र पर तीखा हमला “नाम बदलने वाली सरकार पहले मनरेगा के आंकड़े पेश करे”

    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने केंद्र सरकार को लेकर एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार सिर्फ योजनाओं और संस्थानों के नाम बदलने में व्यस्त है, जबकि ग्रामीण रोजगार और मजदूरी जैसे अहम मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। मनरेगा को लेकर डिंपल यादव ने सरकार से सीधे सवाल पूछते हुए पिछले 10 वर्षों के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है।

    डिंपल यादव ने कहा,“यह नाम बदलने वाली सरकार है। पहले सरकार बताए कि पिछले 10 सालों में मनरेगा के तहत कितनी मजदूरी दी गई है। आंकड़े पेश करें, तभी सच्चाई सामने आएगी।”उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को कमजोर कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ रही है, मजदूरी समय पर नहीं मिल रही और काम के दिनों में कटौती की जा रही है। इसके बावजूद सरकार जमीनी हकीकत पर चर्चा करने के बजाय सिर्फ प्रचार और ब्रांडिंग में लगी है।

    सपा सांसद ने कहा कि मनरेगा देश के करोड़ों गरीब, किसान और मजदूर परिवारों की जीवनरेखा है। यह योजना सिर्फ रोजगार नहीं देती, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। लेकिन मौजूदा सरकार के कार्यकाल में मजदूरी भुगतान में देरी, बजट कटौती और काम के अवसर घटने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

    डिंपल यादव ने यह भी कहा कि अगर सरकार वाकई गरीबों और मजदूरों के हित में काम कर रही है, तो उसे मनरेगा से जुड़े भुगतान, काम के दिन और मजदूरी दर के पूरे आंकड़े देश के सामने रखने चाहिए। केवल योजनाओं के नाम बदलने से जनता की समस्याएं हल नहीं होंगी।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनावों के बाद विपक्ष अब रोजगार, महंगाई और ग्रामीण विकास को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है। मनरेगा जैसे मुद्दे को उठाकर समाजवादी पार्टी ने ग्रामीण और पिछड़े वर्गों को साधने की रणनीति अपनाई है।डिंपल यादव के इस बयान के बाद अब सभी की नजर केंद्र सरकार के जवाब पर है। सवाल साफ है—क्या सरकार मनरेगा के पिछले 10 सालों के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करेगी, या यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा?

  • विराट कोहली और अनुष्का शर्मा फिर पहुंचे प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम, सर्दी में भी दिखी अटूट आस्था

    विराट कोहली और अनुष्का शर्मा फिर पहुंचे प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम, सर्दी में भी दिखी अटूट आस्था

    वृंदावन। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा एक बार फिर आध्यात्मिक आस्था की मिसाल पेश करते नजर आए। हर साल की तरह इस बार भी सर्दियों के मौसम में दोनों प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम पहुंचे। ठंड के बावजूद उनकी श्रद्धा और भक्ति में कोई कमी नहीं दिखी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में विराट और अनुष्का जाड़े के कपड़ों में, माथे पर टीका लगाए, पूरी विनम्रता के साथ महाराज जी के सामने नीचे बैठकर उनसे बातचीत करते दिखाई दिए।

    बताया जा रहा है कि विराट कोहली और अनुष्का शर्मा लंबे समय से प्रेमानंद जी महाराज के अनुयायी हैं। दोनों अक्सर अपने व्यस्त कार्यक्रमों से समय निकालकर वृंदावन पहुंचते हैं और आध्यात्मिक शांति की तलाश में बाबा जी का आशीर्वाद लेते हैं। इस बार भी दोनों की मौजूदगी ने आश्रम में मौजूद श्रद्धालुओं का ध्यान खींच लिया, हालांकि कपल ने पूरी सादगी के साथ दर्शन किए और किसी भी तरह की औपचारिकता या दिखावे से दूर रहे।

    विराट और अनुष्का की यह आध्यात्मिक यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन दर्शन को भी दर्शाती है। दोनों कई बार सार्वजनिक मंचों पर यह कह चुके हैं कि आध्यात्मिकता ने उन्हें मानसिक शांति, संतुलन और सकारात्मक सोच दी है। क्रिकेट के मैदान पर दबाव और फिल्मी दुनिया की चकाचौंध के बीच यह दंपती अपने जीवन में सादगी और संतुलन बनाए रखने के लिए आध्यात्मिक मार्ग को अहम मानता है।

    आश्रम सूत्रों के अनुसार, दोनों ने महाराज जी से व्यक्तिगत बातचीत की और जीवन, कर्म और साधना से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी सादगीपूर्ण रही और किसी तरह की वीआईपी संस्कृति देखने को नहीं मिली। यही वजह है कि प्रशंसक विराट और अनुष्का की इस विनम्रता की सराहना कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर फैंस उनकी तस्वीरें साझा कर इसे “आस्था और सादगी की मिसाल” बता रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि प्रसिद्धि और सफलता के शिखर पर होने के बावजूद विराट कोहली और अनुष्का शर्मा का जमीन से जुड़ा रहना प्रेरणादायक है। उनकी यह यात्रा एक बार फिर साबित करती है कि सच्ची आस्था मौसम, हालात और व्यस्तताओं से परे होती है।

  • Tata Sierra Booking Started: नए साल पर इस तारीख से मिलेगी डिलीवरी जानिए कीमत, फीचर्स और खासियत

    Tata Sierra Booking Started: नए साल पर इस तारीख से मिलेगी डिलीवरी जानिए कीमत, फीचर्स और खासियत

    Tata Sierra Booking Started | New Year Delivery | Price, Features & Full Details नई दिल्ली। टाटा मोटर्स ने अपनी आइकॉनिक SUV Tata Sierra को एक बार फिर नए अवतार में पेश करने की तैयारी पूरी कर ली है। कंपनी ने Tata Sierra की बुकिंग शुरू कर दी है और ग्राहकों को नए साल में इसकी डिलीवरी मिलने वाली है। लंबे समय से चर्चा में रही यह SUV अब मॉडर्न डिजाइन, दमदार फीचर्स और इलेक्ट्रिक/ICE ऑप्शन के साथ बाजार में उतरने को तैयार है।

    कब से मिलेगी डिलीवरी?

    कंपनी से मिली जानकारी के मुताबिक, जनवरी 2026 के पहले हफ्ते से Tata Sierra की डिलीवरी शुरू होने की संभावना है। बुकिंग करने वाले ग्राहकों को प्राथमिकता के आधार पर गाड़ियां सौंपी जाएंगी।

    संभावित कीमत Tata Sierra Booking Started

    Tata Sierra Booking Started की एक्स-शोरूम कीमत करीब 20 लाख रुपये से शुरू होकर 30 लाख रुपये (वेरिएंट के अनुसार) तक जा सकती है। इलेक्ट्रिक वर्जन (Sierra EV) की कीमत थोड़ी ज्यादा हो सकती है ICE (पेट्रोल/डीजल) मॉडल अपेक्षाकृत किफायती रह सकता है


    Tata Sierra की खासियतें

    नई Tata Sierra को पूरी तरह मॉडर्न और प्रीमियम लुक के साथ डिजाइन किया गया है, लेकिन इसमें पुराने Sierra की झलक भी देखने को मिलेगी। पैनोरमिक ग्लास साइड पैनल (आइकॉनिक लुक) चौड़ा फ्रंट ग्रिल और LED लाइट बार स्पोर्टी SUV स्टांस

    🔹 फीचर्स

    • बड़ा टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम
    • डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर
    • पैनोरमिक सनरूफ
    • ADAS सेफ्टी फीचर्स
    • 6 से 7 एयरबैग
    • 360 डिग्री कैमरा

    पावरट्रेन

    • Tata Sierra EV: एक बार चार्ज करने पर करीब 500 KM तक रेंज
    • ICE वर्जन: पेट्रोल और डीजल इंजन ऑप्शन

    Tata Sierra में कंपनी का खास फोकस सेफ्टी पर रहेगा। इसमें:

    • ADAS टेक्नोलॉजी
    • मजबूत बॉडी स्ट्रक्चर
    • 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग का दावा

    किनसे होगा मुकाबला?

    Tata Sierra का मुकाबला सीधे तौर पर इन SUVs से होगा:

    • Mahindra XUV700
    • Hyundai Tucson
    • MG Hector Plus
    • आने वाली Maruti eVX
  • बांदा DM जे. रीभा का सख्त एक्शन: गैरहाजिर अधिकारियों, शिक्षकों और मेडिकल स्टाफ का वेतन रोका

    बांदा DM जे. रीभा का सख्त एक्शन: गैरहाजिर अधिकारियों, शिक्षकों और मेडिकल स्टाफ का वेतन रोका

    संवाददाता -मोहित पाल बांदा।बांदा की जिलाधिकारी जे. रीभा अपने तेज-तर्रार और ज़मीनी प्रशासनिक अंदाज़ को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में किए गए विकास भवन और जिला महिला चिकित्सालय के औचक निरीक्षण के दौरान भारी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, जिस पर डीएम ने बिना किसी संकोच के सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। इस दौरान 35 कर्मचारियों और 11 अधिकारियों का एक दिन का वेतन रोकने के साथ ही सभी से 24 घंटे में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

    विकास भवन में गैरहाजिरी पर कड़ा रुख

    निरीक्षण के दौरान डीएम जे. रीभा ने पाया कि कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी समय में नदारद थे। इसे जनसमस्याओं के निस्तारण में लापरवाही मानते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल वेतन रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोहराई गई तो और कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

    शिक्षक भी कार्रवाई के दायरे में

    डीएम का सख्त रुख सिर्फ दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा। कुछ सरकारी स्कूलों के निरीक्षण में सामने आया कि छात्र सरल हिंदी कविता तक नहीं सुना पाए। इसे शैक्षणिक लापरवाही मानते हुए संबंधित प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। डीएम ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    महिला चिकित्सालय में औचक निरीक्षण

    जिलाधिकारी ने जिला महिला चिकित्सालय का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पीएनसी वार्ड, एसएनसीयू वार्ड, लेबर रूम और ओपीडी की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।निरीक्षण में पीएनसी वार्ड में नवप्रसूताओं की केस शीट न मिलना और स्टाफ नर्स का अनुपस्थित होना गंभीर लापरवाही मानी गई। इसके बाद संबंधित स्टाफ नर्स का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए।इसके अलावा निरीक्षण के समय 06 डॉक्टर, 02 लैब टेक्नीशियन और 08 अन्य कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए, जिनका भी एक दिन का वेतन काटने का आदेश दिया गया। डीएम ने मेडिकल स्टाफ का ड्यूटी चार्ट बनाकर डिस्प्ले बोर्ड पर लगाने, तथा प्रसव के बाद नवप्रसूताओं को कम से कम 48 घंटे अस्पताल में रखने के निर्देश दिए।

    सादगी और सख्ती का संगम

    डीएम जे. रीभा की कार्यशैली को लेकर जिले में चर्चा है न घमंड, न लाव-लश्कर, न वीआईपी दिखावा, बल्कि सीधी बात और जवाबदेही।उनका स्पष्ट संदेश है कि सरकारी सेवा का मतलब जिम्मेदारी है, लापरवाही नहीं

  • कानपुर देहात में सड़क हादसों पर सख्ती,ओवरलोड डंपरों पर चला प्रशासन का डंडा

    कानपुर देहात में सड़क हादसों पर सख्ती,ओवरलोड डंपरों पर चला प्रशासन का डंडा

    कानपुर देहात।जनपद में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं और तेज रफ्तार के कहर पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेन्द्र पाण्डेय के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में परिवहन विभाग द्वारा कानपुर–झांसी नेशनल हाईवे पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान का नेतृत्व एआरटीओ सोमलता यादव ने किया, जिन्होंने अपनी टीम के साथ सुबह से ही हाईवे पर मोर्चा संभाल लिया।

    ओवरलोड डंपर बने कार्रवाई का मुख्य निशाना

    अभियान के दौरान प्रशासन का फोकस खास तौर पर ओवरलोड डंपरों और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों पर रहा। चेकिंग के दौरान कुल सात डंपर ऐसे पाए गए जो तय मानकों से अधिक भार लेकर चल रहे थे या नियमों की अनदेखी कर रहे थे।इनमें से तीन डंपरों को मौके पर ही सीज कर विधिक कार्रवाई के लिए संबंधित थाने भेज दिया गया, जबकि चार अन्य डंपरों पर भारी जुर्माने के साथ चालान की कार्रवाई की गई। अचानक हुई इस कार्रवाई से हाईवे पर चल रहे वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टरों में हड़कंप मच गया।

    https://nationnowsamachar.com/delhi/dimple-yadav-mnrega-statement-government-data-demand/

    सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश

    कार्रवाई के साथ-साथ परिवहन विभाग की टीम ने मौके पर मौजूद वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक भी किया। एआरटीओ सोमलता यादव ने साफ शब्दों में कहा कि सड़क सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उन्होंने चालकों को चेतावनी देते हुए कहा कि ओवरलोडिंग न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि यह सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। ओवरलोड वाहनों से ब्रेक फेल, टायर फटना और वाहन के असंतुलित होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ती है।

    आगे भी जारी रहेगा अभियान

    परिवहन विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में भी इसी सख्ती के साथ चेकिंग जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।प्रशासन की इस सख्ती से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई है कि इससे सड़क हादसों में कमी आएगी और हाईवे अधिक सुरक्षित बनेंगे।