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Kolkata Law College gangrape: पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार द्वारा संचालित साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज से एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। कॉलेज कैंपस के अंदर एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना हुई, जिसमें कॉलेज के एक पूर्व छात्र और दो वर्तमान छात्रों को आरोपी बनाया गया है। यह घटना 25 जून की शाम 7:30 से रात 10:50 बजे के बीच घटित हुई। Kolkata Law College gangrape
▪️ कोलकाता: साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज कैंपस में छात्रा से गैंगरेप ▪️ मुख्य आरोपी TMCP नेता और पूर्व छात्र मोनोजीत मिश्रा ▪️ दो अन्य छात्र भी आरोपी, तीनों गिरफ्तार ▪️ पीड़िता को मेन गेट बंद कर किया बंद, गार्ड भी नहीं आया मदद को ▪️ पीड़िता बोली: वीडियो बना धमकाया, हॉकी स्टिक से मारने… pic.twitter.com/W4fmEUUS3i
पीड़िता ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया कि कैसे तीनों आरोपियों ने उसे बंद परिसर में शारीरिक और मानसिक यातना दी। एफआईआर के अनुसार, मुख्य आरोपी मोनोजीत मिश्रा (31), जो कि कॉलेज का पूर्व छात्र है और तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (TMCP) यूनिट का अध्यक्ष भी रह चुका है, वही मुख्य साजिशकर्ता है। उसके साथ जैब अहमद (19) और प्रमित मुखर्जी (20) भी शामिल थे। Kolkata Law College gangrape
📌 घटना की पूरी जानकारी
पीड़िता 25 जून को दोपहर 12 बजे कॉलेज अपने एग्जाम फॉर्म भरने के लिए आई थी। उसे यूनियन रूम में बैठाया गया, जहां से शुरू हुआ खौफ का सिलसिला। आरोपी ने कॉलेज के मेन गेट को बंद करवा दिया और पीड़िता को सुरक्षा गार्ड के कमरे में ले जाकर बलात्कार किया।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा कि,
"मैंने विरोध किया, रोई, मिन्नतें कीं कि मुझे जाने दो, लेकिन वो नहीं माने। उन्होंने मेरे कपड़े फाड़ दिए, मेरा वीडियो बनाया और धमकी दी कि वीडियो वायरल कर देंगे।"
पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज की। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 1 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। तीनों के मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। मेडिकल जांच, फॉरेंसिक सबूत, और गवाहों के बयान के आधार पर केस की जांच की जा रही है।
📚 कॉलेज प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने कॉलेज कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि कॉलेज का गार्ड मौजूद होते हुए भी कुछ नहीं कर सका, और दरवाजा बंद कर दिया गया ताकि कोई बाहर न जा सके।
👨⚖️ वकीलों की प्रतिक्रियाएं
प्रॉसिक्यूशन वकील सौरिन घोषाल ने कहा कि,
"मेडिकल रिपोर्ट और शुरुआती जांच के आधार पर आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। हम पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
BRITISH F-35 FIGHTER PLANE: केरल के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर ब्रिटिश नेवी का अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट F-35 बी लाइटनिंग II तकनीकी खराबी के चलते 14 जून से खड़ा है। यह जेट ब्रिटिश नेवी के विमानवाहक पोत HMS Prince of Wales का हिस्सा है, जो वर्तमान में केरल तट से 100 समुद्री मील की दूरी पर तैनात है। BRITISH F-35 FIGHTER PLANE
बताया जा रहा है कि इस विमान में हाइड्रोलिक सिस्टम की गंभीर खराबी आ गई है, जिसके कारण यह उड़ान नहीं भर पा रहा है। अब ब्रिटेन से एक टो वाहन और 40 इंजीनियरों की विशेषज्ञ टीम भारत भेजी गई है, जो इस हाई-टेक वार जेट की मरम्मत करेगी।
✈️ कैसे हुई आपात लैंडिंग?– BRITISH F-35 FIGHTER PLANE
14 जून को ईंधन की कमी और खराब मौसम के चलते इस फाइटर जेट को तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आपात लैंडिंग करानी पड़ी। भारतीय वायुसेना ने सुरक्षित लैंडिंग, ईंधन और तकनीकी सहायता मुहैया कराई। लेकिन हाइड्रोलिक फेल्योर के चलते विमान उड़ान नहीं भर सका। BRITISH F-35 FIGHTER PLANE
The UK plans to buy at least a dozen F-35A fighter jets capable of carrying tactical nuclear weapons, calling it the “biggest strengthening of the UK’s nuclear posture in a generation.” https://t.co/KnY29l9dlxpic.twitter.com/0yuCZnyoZE
🛠️ ब्रिटेन से मरम्मत टीम रवाना– BRITISH F-35 FIGHTER PLANE
अब ब्रिटिश इंजीनियरों की 40 सदस्यीय टीम विशेष टो वाहन के साथ केरल के लिए रवाना हो चुकी है। एयर इंडिया के MRO (Maintenance, Repair & Overhaul) हैंगर में इस विमान की मरम्मत की जाएगी। ब्रिटिश उच्चायोग ने बताया कि भारतीय अधिकारियों का सहयोग अभूतपूर्व रहा है। BRITISH F-35 FIGHTER PLANE
🛑 हैंगर में ले जाने से पायलट की अनिच्छा– BRITISH F-35 FIGHTER PLANE
इस मामले में एक और रोचक तथ्य सामने आया है कि F-35 के पायलट पहले इसे हैंगर में ले जाने को तैयार नहीं थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि ब्रिटिश पक्ष यह नहीं चाहता कि भारतीय इंजीनियर इस एडवांस जेट की तकनीकी जानकारी देख सकें।
💸 पार्किंग चार्ज भी लग सकता है!
रिपोर्ट्स के अनुसार, तय समय से अधिक एयरपोर्ट पर खड़े रहने के कारण इस F-35 विमान पर पार्किंग शुल्क भी लग सकता है। हालांकि, यह चार्ज कितनी राशि का होगा, इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
🇮🇳 भारत-ब्रिटेन सामरिक संबंधों में गहराई
यह घटना भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक सहयोग का भी उदाहरण बन गई है, जिसमें भारत ने आपात स्थिति में एक मित्र राष्ट्र की रक्षा संपत्ति को न केवल सुरक्षित लैंडिंग दी बल्कि 24 घंटे सुरक्षा भी उपलब्ध कराई। CISF के जवान लगातार विमान की निगरानी कर रहे हैं।
Rajnath Singh China Visit: भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 25-27 जून 2025 को चीन के किंगदाओ शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की रक्षा मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अपने चीनी समकक्ष एडमिरल डोंग जून के साथ द्विपक्षीय वार्ता में भारत-चीन संबंधों को मजबूत करने और सीमा पर शांति स्थापित करने के लिए एक चार सूत्री फॉर्मूला पेश किया। साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठाकर भारत के जीरो-टॉलरेंस नीति को स्पष्ट किया। इस लेख में हम इस बैठक, चार सूत्री फॉर्मूले, 2024 के डिसएंगेजमेंट प्लान और गलवान घाटी संघर्ष की पृष्ठभूमि पर विस्तार से चर्चा करेंगे। Rajnath Singh China Visit
Held talks with Admiral Don Jun, the Defence Minister of China, on the sidelines of SCO Defence Minitsers’ Meeting in Qingdao. We had a constructive and forward looking exchange of views on issues pertaining to bilateral relations.
SCO बैठक: एक महत्वपूर्ण मंच- Rajnath Singh China Visit
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस जैसे देश शामिल हैं। 2001 में स्थापित यह संगठन क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई पर केंद्रित है। 2025 में चीन की अध्यक्षता में यह बैठक किंगदाओ में आयोजित हुई, जिसमें भारत ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता पर अपने विचार रखे बल्कि आतंकवाद और सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी खुलकर बात की। Rajnath Singh China Visit
Had an extremely productive meeting with the Chinese Defence Minister Admiral Dong Jun in Vientiane. We agreed to work together towards a roadmap for rebuilding mutual trust and understanding. pic.twitter.com/PD7E6hue1h
राजनाथ सिंह ने इस मंच का उपयोग न केवल भारत-चीन संबंधों को बेहतर करने के लिए किया बल्कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को वैश्विक मंच पर उजागर करने का भी मौका लिया। उनकी यह यात्रा 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत और चीन के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी।
चार सूत्री फॉर्मूला: भारत की रणनीति- Rajnath Singh China Visit
राजनाथ सिंह ने चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून के साथ अपनी बैठक में एक चार सूत्री फॉर्मूला प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य भारत-चीन सीमा पर स्थायी शांति और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार लाना है। यह फॉर्मूला निम्नलिखित बिंदुओं पर आधारित है:
2024 के डिसएंगेजमेंट प्लान का पालन: भारत और चीन ने अक्टूबर 2024 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर एक समझौता किया था। इस समझौते का उद्देश्य पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग जैसे क्षेत्रों में सैन्य गतिरोध को समाप्त करना था। राजनाथ सिंह ने इस प्लान के सख्ती से पालन पर जोर दिया, ताकि दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली हो।
तनाव कम करने के लिए निरंतर प्रयास: सीमा पर तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों को लगातार संवाद बनाए रखना होगा। यह बिंदु सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर नियमित बातचीत की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
सीमांकन और परिसीमन को गति देना: भारत ने सीमा पर स्पष्ट सीमांकन (Demarcation) और परिसीमन (Delimitation) के लक्ष्य को जल्द से जल्द प्राप्त करने की वकालत की। इससे LAC पर विवाद की संभावनाएं कम होंगी और भविष्य में गलवान जैसी घटनाएं टाली जा सकेंगी।
विशेष प्रतिनिधि प्रणाली का उपयोग: मतभेदों को सुलझाने और संबंधों को बेहतर बनाने के लिए मौजूदा विशेष प्रतिनिधि स्तर की प्रणाली का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा गया। यह प्रणाली भारत और चीन के बीच लंबे समय से चली आ रही है और इसका उपयोग दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के लिए किया जा सकता है।
इस फॉर्मूले का प्रस्ताव भारत की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता किए बिना पड़ोसी देशों के साथ शांति और सहयोग को प्राथमिकता दी जाती है। Rajnath Singh China Visit
2024 का डिसएंगेजमेंट प्लान: पृष्ठभूमि और महत्व- Rajnath Singh China Visit
2024 का डिसएंगेजमेंट प्लान भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में LAC पर तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने डेमचोक और देपसांग जैसे क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी और पेट्रोलिंग व्यवस्था को सामान्य करने पर सहमति जताई। यह समझौता 21 अक्टूबर 2024 को अंतिम रूप से लागू हुआ, जिसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध प्रभावी रूप से समाप्त हो गया। Rajnath Singh China Visit
इस प्लान का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत और चीन के बीच पहला ठोस कदम था, जिसने दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की प्रक्रिया शुरू की। राजनाथ सिंह ने अपनी बैठक में इस बात पर जोर दिया कि इस प्लान का पालन न केवल सीमा पर शांति सुनिश्चित करेगा बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग की नींव भी रखेगा।
गलवान घाटी संघर्ष: एक तनावपूर्ण इतिहास- Rajnath Singh China Visit
2020 में भारत और चीन के बीच संबंधों में उस समय गहरा तनाव आया, जब मई 2020 में पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील क्षेत्र में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। यह तनाव 15 जून 2020 को गलवान घाटी में और बढ़ गया, जब दोनों देशों के सैनिकों के बीच खूनी संघर्ष हुआ। इस घटना में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए, जबकि चीन ने अपने नुकसान की जानकारी साझा नहीं की। हालांकि, कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि चीन को भी भारी नुकसान हुआ था।
गलवान संघर्ष ने भारत-चीन संबंधों को चरम तनाव की स्थिति में ला दिया। इसके बाद दोनों देशों ने सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की वार्ता की, जिसके परिणामस्वरूप फरवरी 2021 में तनाव कम करने की प्रक्रिया शुरू हुई। अक्टूबर 2024 तक दोनों देशों ने डिसएंगेजमेंट प्लान को अंतिम रूप दिया, जो दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। Rajnath Singh China Visit
आतंकवाद पर भारत का कड़ा रुख
राजनाथ सिंह ने SCO बैठक में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की शाखा द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी। Rajnath Singh China Visit
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाता है और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी कार्रवाइयों के जरिए सीमा पार आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देगा। ऑपरेशन सिंदूर, जिसे 7 मई 2025 को अंजाम दिया गया, आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने और भारत की आत्मरक्षा की नीति का हिस्सा था।
SCO संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर से इनकार
SCO बैठक में एक महत्वपूर्ण घटना तब हुई, जब राजनाथ सिंह ने संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इस बयान में पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र नहीं था, जबकि बलूचिस्तान का उल्लेख कर भारत पर अप्रत्यक्ष रूप से अशांति फैलाने का आरोप लगाया गया था। भारत ने इसे आतंकवाद के मुद्दे को कमजोर करने की साजिश माना और दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने दृढ़ रुख पर कायम है और किसी भी ऐसे दस्तावेज को स्वीकार नहीं करेगा जो इस रुख को कमजोर करता हो।
कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुनरारंभ
बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के छह साल बाद फिर से शुरू होने पर खुशी जताई। यह यात्रा 2020 में कोविड-19 महामारी और गलवान संघर्ष के कारण निलंबित कर दी गई थी। इस तीर्थयात्रा का हिंदू, जैन और बौद्ध समुदायों के लिए विशेष धार्मिक महत्व है। इसका पुनरारंभ दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने का एक सकारात्मक संकेत है।
बैठक के अंत में राजनाथ सिंह ने एडमिरल डोंग जून को बिहार की पारंपरिक मधुबनी पेंटिंग भेंट की। यह पेंटिंग मिथिला कला के लिए जानी जाती है, जिसमें चमकीले रंगों और जटिल पैटर्न का उपयोग होता है। इस उपहार के जरिए भारत ने सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देने की कोशिश की, जो दोनों देशों के बीच सकारात्मक संवाद का प्रतीक है।
राजनाथ सिंह की चीन यात्रा और SCO बैठक में उनकी सक्रिय भागीदारी ने भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक ताकत को दर्शाया। चार सूत्री फॉर्मूले के जरिए भारत ने न केवल सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में ठोस कदम उठाए बल्कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति को भी मजबूती से रखा। गलवान घाटी संघर्ष के बाद तनावपूर्ण रहे भारत-चीन संबंधों में यह बैठक एक नई शुरुआत की उम्मीद जगाती है। साथ ही, कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुनरारंभ और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कदम दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
Shubhanshu Shukla ISS docking: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा अब अंतिम पड़ाव तक पहुंच चुकी है। वे Ax-4 मिशन के तहत स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल में सवार होकर 12 जून को अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे, और अब उनका यान ISS (अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) से 20 मिनट पहले ही सफलतापूर्वक डॉक हो गया है।
यह पूरा मिशन 28,000 किमी/घंटा की रफ्तार और 418 किमी की ऊंचाई पर चल रहा है। लॉन्च के बाद करीब 26 घंटे की यात्रा में ड्रैगन कैप्सूल ने कई कक्षीय बदलाव (orbital maneuvers) किए ताकि वह ISS के साथ सटीक तरीके से संरेखित हो सके।
भारतवासियों को 'अंतरिक्ष से नमस्कार'!🚀
मैं अपने साथी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ यहां आकर रोमांचित हूं, यह सिर्फ़ मेरी नहीं, हम सभी की सामूहिक मेहनत और देश के सपनों की उड़ान है, मैं यहां के नज़ारे देख रहा हूं, मज़ा ले रहा हूं और सीख रहा हूं कि इस माहौल में कैसे खाना चाहिए, मैं… pic.twitter.com/kBC6puxy4c
इस डॉकिंग प्रोसेस को स्पेसएक्स और नासा ने बेहद आधुनिक और सुरक्षित तरीके से डिज़ाइन किया है। इसमें प्रमुख 4 चरण शामिल हैं:
रेंडेजवू (Rendezvous): ड्रैगन कैप्सूल ने इंजन फायरिंग से खुद को 400 मीटर नीचे और 7 किमी पीछे से स्टार्ट कर 200 मीटर की दूरी पर पहुंचाया। इस फेज में सिस्टम की जांच हुई।
नजदीकी संपर्क (Close Approach): 200 मीटर की दूरी से ISS के साथ सीधा कम्युनिकेशन शुरू होता है और क्रू 6 घंटे तक सुरक्षित पथ पर रह सकता है।
अंतिम संपर्क (Final Approach): 20 मीटर की दूरी पर लेजर सेंसर, कैमरे और GPS की मदद से ड्रैगन, ISS के हार्मनी मॉड्यूल से जुड़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। शुभांशु शुक्ला इस दौरान यान के एवियोनिक्स, प्रणोदन और गति की बारीकी से निगरानी कर रहे थे।
सॉफ्ट और हार्ड कैप्चर:
Soft Capture: मैग्नेट्स की मदद से यान डॉकिंग पोर्ट से जुड़ता है।
Hard Capture: मैकेनिकल लैच और हुक द्वारा यान को स्थिर किया जाता है, जिससे पूर्ण सीलिंग हो जाती है।
🔧 जांच और प्रवेश
डॉकिंग के बाद, 1-2 घंटे की जांच होती है ताकि यह तय किया जा सके कि हवा का कोई रिसाव नहीं है और दबाव स्थिर है। इसके बाद शुभांशु और अन्य क्रू मेंबर ISS में प्रवेश करेंगे।
शुभांशु शुक्ला का यह मिशन केवल भारत के लिए एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की वैज्ञानिक क्षमता, रणनीतिक संकल्प और वैश्विक भागीदारी को भी दर्शाता है।
CR PATIL PRAISES MODI: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 11 वर्षों में हुए व्यापक और समावेशी विकास की सराहना की। उन्होंने कहा कि हर वर्ग को इस सरकार से कुछ सार्थक मिला है – चाहे वह किसान हो, महिला, युवा या वैज्ञानिक। CR PATIL PRAISES MODI
उन्होंने जोर देकर कहा कि 2014 में भारत 11वीं अर्थव्यवस्था था और अब दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, और अब चौथे पायदान की ओर बढ़ रहा है।CR PATIL PRAISES MODI
किसानों को बिना आवेदन मिला सम्मान- CR PATIL PRAISES MODI
सीआर पाटिल ने बताया कि पहले किसानों को सरकारी सहायता के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन मोदी सरकार ने पहली बार किसानों को सीधे सम्मान देने का काम किया। पीएम किसान सम्मान योजना के तहत सालाना ₹6000 सीधे बैंक खातों में पहुंच रहे हैं। CR PATIL PRAISES MODI
उन्होंने कहा, “पहले Annadata को सहायता पाने के लिए भीख मांगनी पड़ती थी, आज उन्हें बिना आवेदन सम्मानपूर्वक सहायता मिल रही है।”
विज्ञान से सुरक्षा तक, हर मोर्चे पर सफल भारत- CR PATIL PRAISES MODI
सीआर पाटिल ने चंद्रयान मिशन की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने न केवल ज़मीन पर, बल्कि अंतरिक्ष में भी विजय पताका फहराई है। उन्होंने वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि सरकार का समर्थन हमेशा उनके साथ है। CR PATIL PRAISES MODI
सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और आतंकवादियों को कड़ा संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा, “पहालगाम में हुई कार्रवाई ने साबित कर दिया कि भारत अब हर हमले का जवाब सख्ती से देता है। हम गीदड़ भभकियों से डरने वाले नहीं हैं।”
जल जीवन मिशन और जन भागीदारी
उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के लिए ₹501 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है और जल संरक्षण पर जन भागीदारी से काम किया जा रहा है। गुजरात के बनासकांठा जिले में 35 जल पुनर्स्थापना संरचनाएं जनता की मदद से बनाई गई हैं। CR PATIL PRAISES MODI
सिंधु जल संधि पर रुख साफ
जब सिंधु जल संधि पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं सीधे तौर पर इस विषय से नहीं जुड़ा हूं, लेकिन भारत सरकार जो भी फैसला लेती है, वह देशहित में ही होता है।” CR PATIL PRAISES MODI
बचपन की यादें और प्रेरणा
सीआर पाटिल ने भावुक होते हुए अपने बचपन की बात साझा की कि वो आर्किटेक्ट बनना चाहते थे, लेकिन उनके पिता ने उन्हें वकालत की राह पर आगे बढ़ाया क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण वह खुद वकील नहीं बन पाए थे।
CJI Gavai on Constitution: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को लेकर एक अहम बयान देते हुए कहा है कि भारत में संसद नहीं, बल्कि संविधान सर्वोच्च है। उन्होंने यह टिप्पणी अमरावती में बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक समारोह में की, जो उनका गृह नगर है।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि–
लोकतंत्र के तीनों स्तंभ - कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका - संविधान के अधीन हैं, और कोई भी अंग संविधान से ऊपर नहीं है। CJI गवई ने कहा कि कई बार यह भ्रम फैलाया जाता है कि संसद सर्वोच्च है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि भारत का संविधान ही सर्वोच्च दस्तावेज है। CJI Gavai on Constitution
उन्होंने कहा कि किसी न्यायाधीश का सरकार के खिलाफ फैसला देना ही यह सिद्ध नहीं करता कि वह स्वतंत्र है। एक न्यायाधीश को हर समय यह याद रखना चाहिए कि उसकी भूमिका सिर्फ फैसले देने की नहीं, बल्कि मौलिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों के रक्षक के रूप में भी है। CJI Gavai on Constitution
🔴 ब्रेकिंग | CJI गवई का बड़ा बयान – संविधान सर्वोच्च, संसद नहीं 🔸 अमरावती में बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में बोले मुख्य न्यायाधीश 🔸 बोले – न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका संविधान के अधीन 🔸 “सरकार के खिलाफ आदेश देने से कोई न्यायाधीश स्वतः स्वतंत्र नहीं होता” 🔸 संसद… pic.twitter.com/oNB8ED0EBJ
संविधान की मूल संरचना अटल है- CJI Gavai on Constitution
CJI गवई ने कहा कि भले ही संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार हो, लेकिन वह संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) को नहीं बदल सकती। यह बात सुप्रीम कोर्ट पहले भी अपने ऐतिहासिक फैसलों में स्पष्ट कर चुका है। इस मूल ढांचे में लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, मौलिक अधिकार और न्यायपालिका की स्वतंत्रता जैसे सिद्धांत शामिल हैं।
“बुलडोजर जस्टिस” पर दोहराया आवास अधिकार- CJI Gavai on Constitution
मुख्य न्यायाधीश ने अपने चर्चित फैसले की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्होंने “बुलडोजर जस्टिस” मामले में आवास को मौलिक अधिकार माना था। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा संविधान के साथ खड़ा रहा हूं और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की है।”
न्यायिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक राय
CJI गवई ने यह भी कहा कि न्यायाधीशों को यह सोचकर निर्णय नहीं लेना चाहिए कि जनता उनके फैसलों के बारे में क्या सोचेगी या कहेगी। उन्होंने दो टूक कहा, “फैसले संविधान के अनुसार लिए जाने चाहिए, न कि भीड़ या सोशल मीडिया के प्रभाव में।”
निजी जीवन की झलक: क्यों बने वकील?
इस समारोह में CJI गवई भावुक भी हो गए। उन्होंने बताया कि वह आर्किटेक्ट बनना चाहते थे, लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वे वकील बनें। उनके पिता स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण वकील नहीं बन पाए थे, और उनकी यह इच्छा गवई ने पूरी की।
मुख्य न्यायाधीश का यह बयान उस समय आया है जब देश में बार-बार संसद की सर्वोच्चता की चर्चा होती है। ऐसे समय में उनका यह दो टूक कहना कि संविधान ही सर्वोच्च है, लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण संदेश है। यह बयान न सिर्फ संवैधानिक मूल्यों को रेखांकित करता है, बल्कि न्यायपालिका की भूमिका को भी मजबूती से सामने रखता है। CJI Gavai on Constitution
IMD WEATHER UPDATE LIVE: देश के कई हिस्सों में मानसून का कहर कहर बरपा रहा है। गुजरात, हिमाचल और राजस्थान में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। अहमदाबाद में 12 घंटे से हो रही बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया, जिससे बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
🔴 ब्रेकिंग | मानसून ने गुजरात-हिमाचल में मचाई तबाही 🔸 अहमदाबाद में 12 घंटे की भारी बारिश, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात 🔸 ड्रेनेज में बहा बाइक सवार युवक, 9 घंटे बाद मिला शव 🔸 हिमाचल में 24 घंटे में 5 जगह बादल फटे, 2 की मौत 🔸 कुल्लू में 2000 टूरिस्ट फंसे, डैम अलर्ट जारी 🔸… pic.twitter.com/L2qf7mNZJU
अहमदाबाद में संकट: पूर्वी अहमदाबाद के मणिनगर, वटवा, सिटीएम, हाटकेश्वर, निकोल, ओधव और विराट नगर जैसे क्षेत्रों में भारी जलभराव हुआ है। तेज बहाव के कारण एक बाइक सवार युवक ड्रेनेज लाइन में बह गया, जिसे दमकल विभाग ने 9 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद 200 फीट दूर से मृत अवस्था में बरामद किया। इस सीजन में शहर में अब तक 6.03 इंच बारिश दर्ज की गई है। IMD WEATHER UPDATE LIVE
सूरत में भी हालात गंभीर: यहां तीसरे दिन भी बाढ़ जैसे हालात हैं। गीतानगर इलाका 3-4 फीट पानी में डूबा है। एक गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने पर फायर ब्रिगेड ने उसे रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया। IMD WEATHER UPDATE LIVE
#Cloudburst incidents are occurring today at three to four locations in Kullu district of #HimachalPradesh, in which 3 people are reportedly being swept away.
The floods triggered by the cloudbursts are also damaging agricultural land and sweeping away some vehicles.
— All India Radio News (@airnewsalerts) June 25, 2025
हिमाचल में तबाही: पिछले 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में बादल फटने की घटनाएं हुईं। सैंज की जीवा नाला, शिलागढ़ घाटी, स्त्रो गैलरी (मनाली), होरनगढ़ (बंजार), कांगड़ा और धर्मशाला के खनियारा में बादल फटने से तबाही मच गई। अचानक आई बाढ़ में कई लोग बह गए। दो शव बरामद किए गए हैं और राहत कार्य अब भी जारी है।
कुल्लू में खतरा और राहत: कुल्लू जिले के होरनगढ़ गांव में बादल फटने के बाद 2,000 से अधिक टूरिस्ट फंस गए हैं। NDRF की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और राहत कार्य में जुटी है। कई गाड़ियां मलबे में दब गई हैं, जिन्हें जेसीबी की मदद से निकाला जा रहा है। साथ ही, सैंज घाटी में NHPC के प्रोजेक्ट को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
Multiple cloudbursts being reported from Kullu district right now — Jibhi, Sainj, Tirthan hit. Horrific visuals coming in. Praying for everyone’s safety. Requesting people to stay alert and avoid travel in these areas.#HimachalPradesh | #Kullupic.twitter.com/jSW3Bk0KAk
डैम से पानी छोड़े जाने का अलर्ट: हिमाचल में भारी बारिश के चलते कई डैम से पानी छोड़े जाने का अलर्ट जारी किया गया है। इससे नीचे बसे गांवों और शहरों को सतर्क किया गया है।
राजस्थान में भी बारिश का असर: राजस्थान में भी मानसून सक्रिय है। बांसवाड़ा जिले में गुरुवार को सबसे ज्यादा 8 इंच बारिश दर्ज की गई, जिससे कई इलाके जलमग्न हो गए हैं।
प्रशासन सतर्क: गुजरात से लेकर हिमाचल और राजस्थान तक प्रशासन पूरी सतर्कता से राहत कार्यों में जुटा है। विशेष राहत बल, फायर ब्रिगेड और स्थानीय प्रशासन लगातार हालात पर नजर रख रहे हैं।
देश के तीन राज्यों में मानसून का यह विकराल रूप चिंता का विषय है। जहां एक ओर अहमदाबाद और सूरत जैसे बड़े शहरों में शहरी बाढ़ ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं हिमाचल में पर्यटक और स्थानीय लोग प्रकृति के कोप का सामना कर रहे हैं। ज़रूरत है कि लोग सतर्क रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
PF withdrawal via ATM: जल्द ही कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाताधारकों को PF का पैसा निकालने के लिए EPFO कार्यालयों या जटिल ऑनलाइन प्रोसेस की जरूरत नहीं पड़ेगी। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने जानकारी दी है कि EPFO अब PF अकाउंट्स को सीधे बैंक खातों से लिंक कर रहा है, जिससे कर्मचारी सीधे ATM या UPI जैसे माध्यमों से अपने PF अकाउंट से एक निश्चित राशि निकाल सकेंगे। यह सुविधा जुलाई 2025 से शुरू होने की संभावना है। PF withdrawal via ATM
PF निकासी होगी आसान और तेज़- PF withdrawal via ATM
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नई सुविधा के तहत कर्मचारियों को एक लिमिट तक की राशि निकालने की अनुमति होगी। इससे उन्हें इमरजेंसी के समय मदद मिलेगी और साथ ही PF अकाउंट में रिटायरमेंट के लिए आवश्यक राशि भी सुरक्षित रहेगी। अब तक PF निकासी के लिए लंबी प्रक्रिया और मैनुअल जांच की जरूरत होती थी, लेकिन यह नई तकनीक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना देगी। PF withdrawal via ATM
PF अकाउंट से 72 घंटे में निकाल सकेंगे ₹5 लाख- PF withdrawal via ATM
PF खाताधारक अब इमरजेंसी की स्थिति में 72 घंटे के भीतर ₹5 लाख तक निकाल सकेंगे। पहले यह सीमा केवल ₹1 लाख थी। यह घोषणा भी मंत्री मंडाविया द्वारा 24 जून को की गई थी। यह सुविधा मेडिकल, शिक्षा, शादी, मकान खरीदने या बनाने जैसे मामलों में विशेष रूप से लाभकारी होगी। PF withdrawal via ATM
ऑटो सेटलमेंट से प्रक्रिया और भी आसान- PF withdrawal via ATM
EPFO ने ऑटो सेटलमेंट की सुविधा शुरू की है जिसमें कर्मचारी के क्लेम को सॉफ्टवेयर स्वतः प्रोसेस करता है। इसमें अफसरों के हस्तक्षेप की जरूरत लगभग नहीं होती। अगर UAN, आधार, पैन और बैंक डिटेल्स KYC के साथ पूरी तरह से लिंक हैं, तो क्लेम 3-4 दिनों में अपने आप निपट जाएगा। यह सेवा शिक्षा, विवाह, मकान खरीद, और मेडिकल इमरजेंसी जैसे मामलों में लागू की गई है। PF withdrawal via ATM
मैनुअल प्रोसेस में लगता है समय
वर्तमान में, मैनुअल प्रोसेस के तहत PF निकासी में 15 से 30 दिन लग सकते हैं। इस प्रक्रिया में EPFO कर्मचारी दस्तावेजों की जांच करते हैं और यदि कोई त्रुटि होती है तो निकासी में देरी हो सकती है। बड़ी या जटिल क्लेम, जैसे फाइनल सेटलमेंट, अक्सर मैनुअल जांच की मांग करते हैं। PF withdrawal via ATM
क्या करें कर्मचारी?
EPFO की इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों को अपने UAN को आधार, पैन और बैंक खाते से लिंक करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही KYC को पूरी तरह से अपडेट रखना जरूरी है। आने वाले दिनों में EPFO इस नई सेवा के लिए दिशानिर्देश और तकनीकी विवरण जारी करेगा।
ATM और UPI के माध्यम से PF निकालना अब सिर्फ एक सपना नहीं रह जाएगा। EPFO की इस पहल से करोड़ों कर्मचारियों को राहत मिलेगी और निकासी प्रक्रिया पारदर्शी व त्वरित बनेगी।
Shubhanshu Shukla Astronaut: 25 जून 2025 की तारीख भारतीय अंतरिक्ष इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई, जब लखनऊ के युवा और भारतीय वायुसेना के जांबाज फाइटर पायलट शुभांशु शुक्ला ने Axiom-4 मिशन के तहत अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरी। यह मिशन स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से दोपहर 12:01 बजे भारतीय समयानुसार लॉन्च किया गया। यह ऐतिहासिक मिशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर बढ़ते भारत के एक और कदम का प्रतीक है।
मिशन Axiom-4 की खासियत- Shubhanshu Shukla Astronaut
Axiom-4 मिशन एक प्राइवेट अंतरिक्ष उड़ान है, जो चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर ISS की ओर रवाना हुआ। शुभांशु शुक्ला इस मिशन में पायलट की भूमिका निभा रहे हैं। उनके साथ तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं—नासा की पूर्व अंतरिक्ष यात्री और इस मिशन की कमांडर पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोज उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कपू।
Axiom-4 मिशन को खास बनाने वाली बात यह है कि यह मिशन पूरी तरह निजी कंपनी Axiom Space द्वारा आयोजित किया गया है, जिसमें तकनीकी सहायता SpaceX द्वारा दी जा रही है। Shubhanshu Shukla Astronaut
A proud moment for India!
Heartiest congratulations to Group Captain Shubhanshu Shukla, the Mission Pilot of Axiom Mission 4, on this historic achievement.
xiom-4 मिशन का अवलोकन- Shubhanshu Shukla Astronaut
Axiom-4 मिशन नासा, स्पेसएक्स, और Axiom Space के सहयोग से शुरू किया गया चौथा निजी अंतरिक्ष मिशन है। इस मिशन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रयोगों को बढ़ावा देना है। मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जिनमें शुभांशु शुक्ला पायलट की भूमिका निभा रहे हैं। अन्य तीन यात्री हैं:
पैगी व्हिटसन: नासा की पूर्व अंतरिक्ष यात्री और इस मिशन की कमांडर।
स्लावोज उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की: पोलैंड के यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के अंतरिक्ष यात्री।
टिबोर कपू: हंगरी के HUNOR प्रोग्राम के अंतरिक्ष यात्री।
यह मिशन स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान के जरिए ISS तक पहुंचेगा। लॉन्च के लगभग 28 घंटे बाद, यानी 26 जून 2025 को शाम 4:30 बजे (IST), यह यान ISS के साथ डॉक करने वाला है।
30 हजार किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान- Shubhanshu Shukla Astronaut
फाल्कन-9 रॉकेट की मदद से लॉन्च हुए इस मिशन ने लगभग 30,000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरी। उम्मीद की जा रही है कि यह यान भारतीय समयानुसार गुरुवार शाम 4:30 बजे ISS पर डॉक करेगा। नासा, स्पेसएक्स और Axiom Space की साझा निगरानी में यह मिशन पूरी तरह नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से संचालित हो रहा है। Shubhanshu Shukla Astronaut
शानदार ! Axiom 4 मिशन लांच । भारत के शुभांशु शुक्ला मिशन का हिस्सा हैं। चार एस्ट्रोनॉट स्पेस जा रहे हैं । ऐसा दृश्य हर किसी को बचपन में एस्ट्रोनॉट बनने का सपना देती है । pic.twitter.com/dh4QlarSo4
— Narendra Nath Mishra (@iamnarendranath) June 25, 2025
शुभांशु शुक्ला: एक प्रेरणादायक सफर- Shubhanshu Shukla Astronaut
लखनऊ में जन्मे शुभांशु शुक्ला की शुरुआती शिक्षा सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एम.टेक किया। साल 2006 में वह भारतीय वायुसेना में शामिल हुए और एक कुशल फाइटर पायलट के रूप में Su-30 MKI, मिग-21, मिग-29, जगुआर, डोनियर और हॉक जैसे विमानों को उड़ाया। उन्हें 2,000 घंटे से अधिक का फ्लाइंग अनुभव है।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का अंतराराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन-आईएसएस के लिए #AxiomMission4 अब कल प्रक्षेपित किया जाना तय किया गया है। नासा, एक्सिओम स्पेस और स्पेस एक्स की आईएसएस के लिए चौथे निजी अंतरिक्ष यात्री अभियान की शुरूआत कल दोपहर 12.01 पर करने की योजना है। pic.twitter.com/NpAq1UK6aN
2019 में शुभांशु ने ISRO के गगनयान मिशन के लिए आवेदन किया था, और चार अधिकारियों में से एक के रूप में चयनित हुए। उन्होंने रूस और बेंगलुरु में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिससे उनकी अंतरिक्ष यात्रा की नींव मजबूत हुई। Shubhanshu Shukla Astronaut
लॉन्चिंग में देरी के पीछे कारण- Shubhanshu Shukla Astronaut
Axiom-4 मिशन को लॉन्च किए जाने में कई बार देरी हुई। पहले खराब मौसम, फिर फाल्कन-9 रॉकेट की तकनीकी समीक्षा और अंत में ISS के रूसी मॉड्यूल में रिसाव के कारण इस मिशन को कई बार टालना पड़ा। पहले यह मिशन 29 मई को लॉन्च होना था, फिर 8 जून, 10 जून और 11 जून को संभावित तारीखें आईं, लेकिन अंततः 25 जून को लॉन्च सफल हुआ। Shubhanshu Shukla Astronaut
अंतरिक्ष मिशन का भारत पर प्रभाव- Shubhanshu Shukla Astronaut
शुभांशु की उड़ान भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता और वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग में उसकी भागीदारी का प्रमाण है। ISRO पहले ही गगनयान मिशन की दिशा में काम कर रहा है और ऐसे निजी अंतरिक्ष उड़ान अभियानों में भारतीय भागीदारी भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक- Shubhanshu Shukla Astronaut
Axiom-4 मिशन इस बात का प्रमाण है कि आज की दुनिया में अंतरिक्ष अन्वेषण सिर्फ सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रह गया है। निजी कंपनियों के सहयोग से अंतरिक्ष अनुसंधान और यात्राएं अब तेजी से संभव हो रही हैं। Axiom Space, SpaceX और NASA का यह साझेदारी मॉडल आने वाले वर्षों में और भी अधिक निजी अंतरिक्ष मिशनों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
शुभांशु के मिशन से क्या उम्मीदें हैं?
इस मिशन में वैज्ञानिक प्रयोगों से लेकर जीवन-सम्बंधी तकनीकी परीक्षण तक कई कार्य होंगे। अंतरिक्ष में 28 घंटे की यात्रा के बाद शुभांशु और उनका दल ISS में प्रवेश करेंगे, जहां वे कुछ दिन रहकर विभिन्न मिशनों को अंजाम देंगे। यह मिशन आने वाले भारतीय गगनयान मिशन के लिए भी उपयोगी अनुभव साबित होगा।
50 years of Emergency: 25 जून 1975 की वह रात भारतीय इतिहास में एक काले अध्याय की शुरुआत थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आधी रात को देश में आपातकाल (इमरजेंसी) लागू करने का ऐलान किया। यह निर्णय न केवल भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ा झटका था, बल्कि इसने देश की सियासत को भी नए रंगों में रंग दिया। इमरजेंसी के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ, हजारों लोग जेलों में बंद किए गए, और प्रेस की आजादी पर ताला लग गया। लेकिन इसके बावजूद, इस दौर ने भारतीय राजनीति में कई ऐतिहासिक बदलावों को जन्म दिया। आइए, इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने पर इसके पांच बड़े सियासी प्रभावों पर नजर डालें। 50 years of Emergency
1. जयप्रकाश नारायण: एक नए नेतृत्व का उदय- 50 years of Emergency
आजादी के बाद से भारतीय राजनीति में कांग्रेस का वर्चस्व निर्विवाद था। पंडित जवाहरलाल नेहरू और फिर इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने केंद्र और राज्यों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। लेकिन इमरजेंसी ने इस एकछत्र राज को चुनौती दी। इस दौर में जयप्रकाश नारायण, जिन्हें ‘लोकनायक’ के नाम से जाना जाता है, एक नए नेतृत्व के रूप में उभरे। 50 years of Emergency
जेपी, जैसा कि उन्हें प्यार से बुलाया जाता था, ने इमरजेंसी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू किया। उनका ‘संपूर्ण क्रांति’ का नारा युवाओं और आम जनता के बीच गूंजने लगा। इस आंदोलन ने न केवल इंदिरा गांधी के नेतृत्व को चुनौती दी, बल्कि भारतीय सियासत को नए चेहरों और विचारों से परिचित कराया। जेपी ने साबित किया कि नेतृत्व केवल सत्ता में बैठकर नहीं, बल्कि जनता के बीच रहकर भी किया जा सकता है। 50 years of Emergency
2. किंगमेकर की परंपरा की शुरुआत- 50 years of Emergency
इमरजेंसी विरोधी आंदोलन ने भारतीय राजनीति में एक नई परंपरा को जन्म दिया—‘किंगमेकर’ की। जयप्रकाश नारायण उस समय गैर-कांग्रेसी दलों के सबसे बड़े प्रतीक थे। 1977 के आम चुनाव में उन्होंने जनता पार्टी के गठन में अहम भूमिका निभाई, जो विभिन्न विचारधाराओं के दलों का गठजोड़ थी। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि जेपी ने न तो खुद चुनाव लड़ा और न ही सरकार में कोई पद स्वीकार किया। 50 years of Emergency
25 जून, 1975 भारतीय लोकतंत्र का काला दिवस है।
आज ही के दिन कांग्रेस ने देश पर आपातकाल थोपकर संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व नागरिक अधिकारों का गला घोंटने का कुत्सित कार्य किया था।
देश में लोकतंत्र की पुनर्स्थापना हेतु संघर्ष करने वाले सभी महान लोकतंत्र सेनानियों को कोटिशः… pic.twitter.com/n3QXCE6pOi
जेपी ने किंग की जगह किंगमेकर बनने को प्राथमिकता दी। यह एक ऐसी परंपरा थी, जिसने गठबंधन की सियासत को जन्म दिया। इसके बाद भारतीय राजनीति में गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ, जो आज भी देश की सियासत का एक अहम हिस्सा है। 50 years of Emergency
3. कांग्रेस के एकछत्र राज का अंत- 50 years of Emergency
आजादी के बाद से 1975 तक, कांग्रेस का भारतीय सियासत पर एकछत्र राज था। केंद्र से लेकर राज्यों तक, कांग्रेस की सरकारें थीं, और इसे चुनौती देना किसी भी दल के लिए असंभव-सा लगता था। लेकिन इमरजेंसी और इसके खिलाफ हुए आंदोलन ने इस मिथक को तोड़ दिया।
1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी ने कांग्रेस को करारी शिकस्त दी। इंदिरा गांधी स्वयं अपनी रायबरेली सीट हार गईं। इस हार ने कांग्रेस की अजेय छवि को ध्वस्त कर दिया और यह साबित किया कि भारतीय मतदाता सत्ता को बदलने की ताकत रखता है। इसने लोकतंत्र में जनता की ताकत को और मजबूत किया।
4. जनता परिवार का जन्म और विस्तार- 50 years of Emergency
इमरजेंसी विरोधी आंदोलन ने विभिन्न विचारधाराओं को एक मंच पर लाने का काम किया। समाजवादी, गांधीवादी, और जनसंघ जैसे अलग-अलग विचारों वाले दल एकजुट हुए और जनता पार्टी का गठन हुआ। 1977 के चुनाव में जनता पार्टी ने 542 में से 298 सीटें जीतकर सरकार बनाई।
हालांकि, जनता पार्टी की सरकार ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी और दो साल में ही आंतरिक मतभेदों के कारण यह बिखर गई। लेकिन इसने कई नए दलों को जन्म दिया। जनता दल, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल (यूनाइटेड), बीजू जनता दल, और राष्ट्रीय लोक दल जैसे दल इसी जनता परिवार का हिस्सा हैं। यह दौर भारतीय सियासत में बहुदलीय व्यवस्था की नींव साबित हुआ।
5. बीजेपी का उदय और दिल्ली की सत्ता तक का सफर- 50 years of Emergency
इमरजेंसी विरोधी आंदोलन ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उदय की पृष्ठभूमि तैयार की। भारतीय जनसंघ, जो जनता पार्टी का हिस्सा था, ने इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन जनता पार्टी में आंतरिक मतभेदों के बाद अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं ने 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की।
बीजेपी ने अपनी शुरुआत दो सीटों के साथ की थी, लेकिन धीरे-धीरे यह पार्टी भारतीय सियासत की मुख्यधारा में शामिल हो गई। 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी ने पहली बार केंद्र में सरकार बनाई, भले ही वह केवल 13 दिनों तक चली। इसके बाद 1998 और 1999 में बीजेपी ने पूर्णकालिक सरकारें बनाईं, और 2014 से यह पार्टी लगातार केंद्र की सत्ता पर काबिज है।
इमरजेंसी का दीर्घकालिक प्रभाव- 50 years of Emergency
इमरजेंसी का दौर भारतीय लोकतंत्र के लिए एक कठिन परीक्षा थी, लेकिन इसने कई सबक भी सिखाए। इसने जनता में लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा की और सत्ता के विकेंद्रीकरण को बढ़ावा दिया। इमरजेंसी ने यह भी साबित किया कि भारतीय मतदाता अपनी ताकत को पहचानता है और वह सत्ता को बदलने की हिम्मत रखता है।\
आज जब हम इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने की बात करते हैं, तो यह याद रखना जरूरी है कि यह दौर न केवल एक संकट था, बल्कि भारतीय सियासत को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक मोड़ भी था। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व से लेकर बीजेपी के उभार तक, इमरजेंसी ने भारतीय राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया।
इमरजेंसी का दौर भारतीय इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसने न केवल सियासत को बदला, बल्कि लोकतंत्र को और मजबूत करने में भी योगदान दिया। इसने सत्ता के एकध्रुवीय स्वरूप को तोड़ा और बहुदलीय व्यवस्था को जन्म दिया। आज, जब हम इमरजेंसी के 50 साल पूरे होने पर पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यह स्पष्ट है कि यह दौर भारतीय सियासत के लिए एक टर्निंग पॉइंट था, जिसने देश को नए नेतृत्व, नई परंपराओं, और नए दलों से परिचित कराया।