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  • SC REPRIMANDS VIJAY SHAH: मंत्री होकर कैसी भाषा बोलते हो? कर्नल सोफिया पर टिप्पणी पर विजय शाह को फटकार

    SC REPRIMANDS VIJAY SHAH: मंत्री होकर कैसी भाषा बोलते हो? कर्नल सोफिया पर टिप्पणी पर विजय शाह को फटकार

    भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री विजय शाह (SC REPRIMANDS VIJAY SHAH) एक बार फिर विवादों में हैं. इस बार कारण है उनका कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ दिया गया बयान, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंत्री विजय शाह को फटकार लगाते हुए कहा, “आप मंत्री हैं, इस पद की गरिमा समझते हैं? ऐसी भाषा क्या शोभा देती है?”

    सोफिया कुरैशी पर विवादास्पद टिप्पणी- SC REPRIMANDS VIJAY SHAH

    दरअसल, विजय शाह ने एक सार्वजनिक मंच से कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसे लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में काफी आलोचना हुई. उनके बयान को लेकर महू तहसील स्थित मानपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी. यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की तीन धाराओं – 152, 196(1)(b) और 197(1)(c) के तहत दर्ज की गई.

    SC REPRIMANDS VIJAY SHAH- विजय शाह ने दी थी एफआईआर को चुनौती

    इस एफआईआर को चुनौती देने के लिए विजय शाह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. उन्होंने कोर्ट से एफआईआर पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. सुनवाई के दौरान जब उनके वकील ने कहा कि मीडिया ने बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया है और उनके मुवक्किल ने माफी मांग ली है, तो सीजेआई ने सख्ती से पूछा, “आप जानते हैं कि आप कौन हैं?”

    सीजेआई ने टिप्पणी की कि जब देश संवेदनशील परिस्थितियों से गुजर रहा हो, तो जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों से मर्यादित भाषा की अपेक्षा की जाती है. “हम यह नहीं मान सकते कि मंत्री जैसे पद पर बैठे लोग इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना भाषा का प्रयोग करें,” – CJI बी आर गवई ने कहा.

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाएगा. कोर्ट ने कहा कि विजय शाह हाईकोर्ट में अपनी बात रख सकते हैं. “हम कल इस मामले में आगे सुनवाई करेंगे, लेकिन 24 घंटे में कोई आपात स्थिति नहीं बन रही,” – अदालत ने कहा.

    विजय शाह के बयान से सियासी पारा चढ़ा

    विजय शाह के विवादित बयान के बाद राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है. विपक्षी दलों ने मंत्री के बयान को शर्मनाक बताते हुए मुख्यमंत्री से उनकी बर्खास्तगी की मांग की है. वहीं, कई सैन्य पृष्ठभूमि के लोग भी इस टिप्पणी पर नाराज़गी जाहिर कर चुके हैं.

    कर्नल सोफिया कुरैशी, जो देश की पहली महिला अधिकारी हैं जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व किया, उनके सम्मान में पहले भी कई बार राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो चुकी है. विजय शाह द्वारा इस तरह की टिप्पणी ने न केवल सेना बल्कि समाज में महिलाओं के सम्मान को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं.

    हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह ने मीडिया से बातचीत करते हुए माफी मांगी. उन्होंने कहा, “मैं सपने में भी सोफिया बहन के बारे में गलत नहीं सोच सकता. उन्होंने देश की सेवा जाति और धर्म से ऊपर उठकर की है. अगर जोश में मुझसे कोई गलत बात निकल गई हो, तो मैं उसके लिए माफी मांगता हूं.”

    विजय शाह ने यह भी कहा कि उनका पारिवारिक बैकग्राउंड सेना से जुड़ा रहा है और उनका इरादा किसी का अपमान करने का नहीं था, बल्कि उन शहीद परिवारों की पीड़ा को सामने लाना था, जिनके परिवार के सदस्य आतंकियों के कारण मारे गए.

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्तियों के शब्दों की जिम्मेदारी होती है और उन्हें मर्यादित भाषा का ही उपयोग करना चाहिए. कोर्ट की टिप्पणी ने यह संकेत भी दिया है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को बयानबाजी से पहले कई बार सोचना चाहिए.

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    SOURCE- NDTV INDIA, ABP NEWS

  • BSF JAWAN RETURN: भारत की सख्ती पर झुका पाकिस्तान, 20 दिन बाद लौटाया BSF जवान पूर्णम कुमार

    BSF JAWAN RETURN: भारत की सख्ती पर झुका पाकिस्तान, 20 दिन बाद लौटाया BSF जवान पूर्णम कुमार

    नई दिल्ली: भारत की दृढ़ता रंग लाई और पाकिस्तान ने 20 दिन बाद आखिरकार बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार (BSF JAWAN RETURN) को भारत को सौंप दिया. अटारी-वाघा बॉर्डर से लौटे जवान का देशभर में स्वागत हुआ. यह घटना भारत-पाक के बीच बढ़ते तनाव के बीच राहत देने वाली खबर बनकर सामने आई है.

    कैसे पहुंचे पाकिस्तान?

    बीएसएफ के कॉन्स्टेबल पूर्णम कुमार शॉ, जो कि पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में तैनात थे, गलती से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान में घुस गए थे. पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें 20 दिन पहले हिरासत में लिया था. इस बीच भारत-पाक संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए, विशेषकर 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके जवाब में भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद.

    22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में एक भयावह आतंकी हमला हुआ, जिसमें नागरिकों और पर्यटकों को निशाना बनाया गया. भारत सरकार ने इसे मुंबई हमले के बाद सबसे घातक हमला माना और तुरंत कड़ी कार्रवाई की घोषणा की.

    ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि

    7 मई को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय वायुसेना, थलसेना और नौसेना ने एक साथ मिलकर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया. इस ऑपरेशन का उद्देश्य स्पष्ट था — आतंकी गतिविधियों का समूल नाश.

    पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई और सीमा पर तनाव

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने 7-8 मई की रात को भारत के कई सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले की कोशिश की. लक्ष्य थे श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट और अमृतसर जैसे संवेदनशील क्षेत्र. लेकिन भारतीय सेना के सतर्क और समन्वित प्रयासों से ये हमले विफल कर दिए गए.

    भारतीय नौसेना ने अपने Carrier Battle Group के माध्यम से समुद्री क्षेत्र में पाकिस्तान की हवाई घुसपैठ की योजना को पूरी तरह नाकाम कर दिया. वहीं, भारतीय वायुसेना और थलसेना ने भी संयुक्त संचालन करते हुए भारत की सुरक्षा को सुनिश्चित किया.

    पूर्णम कुमार की वापसी: भारतीय प्रयासों का नतीजा

    जब पूर्णम कुमार पाकिस्तान में थे, तब उनके परिवार और खासकर पत्नी राजनी की चिंता लगातार बढ़ रही थी. राजनी ने मीडिया से बात करते हुए उम्मीद जताई थी कि डीजीएमओ (DGMO) स्तर की बातचीत में उनके पति का मुद्दा उठाया जाएगा.

    राजनी ने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें फोन कर हरसंभव मदद का आश्वासन दिया. उन्होंने उनके ससुराल वालों को स्वास्थ्य सेवा देने की बात भी कही.

    भारतीय सेना द्वारा 3 मई को एक पाकिस्तानी रेंजर को राजस्थान सीमा से हिरासत में लिए जाने के बाद उम्मीद जगी कि शायद उसके बदले पूर्णम को भी रिहा किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हालांकि भारत के निरंतर कूटनीतिक और सैन्य प्रयासों के चलते अंततः 13 मई को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान ने पूर्णम कुमार को भारत को सौंप दिया.

    देशभर में राहत और खुशी की लहर

    पूर्णम कुमार की वापसी के बाद सोशल मीडिया से लेकर संसद तक हर जगह इस फैसले की सराहना हुई. एक ओर जहां भारत की सख्त और निर्णायक नीति की तारीफ हुई, वहीं दूसरी ओर जवानों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल भी खड़े हुए हैं.

    रक्षा विश्लेषकों की राय

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्णम कुमार की वापसी केवल मानवीय मामला नहीं था, बल्कि यह भारत की कूटनीतिक और सैन्य दृढ़ता का भी परिणाम है. अगर भारत ने आतंकी हमलों पर जवाब नहीं दिया होता, तो शायद पाकिस्तान भी इस तरह झुकने को मजबूर नहीं होता.

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  • PM MODI VISITS ADAMPUR AIRBASE: PM मोदी ने वायुसेना के जवानों से मुलाकात, बढ़ाया हौसला

    PM MODI VISITS ADAMPUR AIRBASE: PM मोदी ने वायुसेना के जवानों से मुलाकात, बढ़ाया हौसला

    जालंधर/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार सुबह पंजाब के आदमपुर एयरबेस (PM MODI VISITS ADAMPUR AIRBASE) का दौरा किया, जहां उन्होंने भारतीय वायुसेना के जवानों से मुलाकात की. यह दौरा न केवल एक साधारण औपचारिकता था, बल्कि पाकिस्तान के उस दावे का करारा जवाब भी था जिसमें उसने भारत के आदमपुर एयरबेस को ‘हमले में तबाह करने’ का झूठा प्रचार किया था.

    पीएम मोदी सुबह 7 बजे दिल्ली के पालम एयरपोर्ट से रवाना हुए और जालंधर के पास स्थित आदमपुर एयरबेस पर सफलतापूर्वक उतरे. वह वहां लगभग 1 घंटे तक रहे और एयरफोर्स के अधिकारियों तथा जवानों के साथ बातचीत की. इस दौरान प्रधानमंत्री जवानों का उत्साह बढ़ाते नजर आए.

    तस्वीरों में दिखा आत्मविश्वास

    जवानों के साथ पीएम मोदी की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उसमें वह बेहद आत्मविश्वास से भरे और मुस्कुराते नजर आए. यह सिर्फ एक साधारण दौरा नहीं था बल्कि एक संदेश था—देश की सुरक्षा अडिग है और पाकिस्तान की दुष्प्रचार नीति का कोई असर नहीं पड़ता.

    पाकिस्तान का झूठा प्रचार उजागर

    हाल ही में पाकिस्तान की ओर से यह झूठा दावा किया गया था कि उन्होंने भारत के आदमपुर एयरबेस को निशाना बनाकर तबाह कर दिया है. इस दावे के तुरंत बाद जब प्रधानमंत्री का विमान उसी एयरबेस पर सफलतापूर्वक लैंड हुआ, तो पाकिस्तान की कहानी झूठ साबित हो गई. पीएम मोदी का वहां पहुंचना यह सिद्ध करता है कि भारत का सैन्य ढांचा पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत है.

    सैनिकों का मनोबल बढ़ाने की कोशिश

    पीएम मोदी अक्सर अवसर मिलने पर जवानों से मिलते रहे हैं. चाहे वह सियाचिन हो या अरुणाचल, प्रधानमंत्री हमेशा सेना के मनोबल को ऊंचा रखने के प्रयास करते आए हैं. इस दौरे में भी वह जवानों के साथ बातचीत करते हुए नजर आए और उनकी बहादुरी व समर्पण की सराहना की.

    सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है आदमपुर एयरबेस

    आदमपुर एयरबेस भारतीय वायुसेना के लिए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह न केवल पंजाब बल्कि पूरे उत्तरी क्षेत्र में हवाई सुरक्षा की दृष्टि से अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में यहां प्रधानमंत्री का दौरा, भारत की सैन्य शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है.

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  • CBSE 12TH RESULT 2025 जारी: 88.39% छात्र पास, नई ग्रेडिंग प्रणाली लागू

    CBSE 12TH RESULT 2025 जारी: 88.39% छात्र पास, नई ग्रेडिंग प्रणाली लागू

    नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा 2025 के परिणाम (CBSE 12TH RESULT 2025) आज घोषित कर दिए हैं. इस वर्ष कुल 88.39 प्रतिशत छात्र सफल हुए हैं, जो कि एक उल्लेखनीय प्रदर्शन है, हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इसमें थोड़ी कमी देखी गई है. छात्र अपने परिणाम cbse.gov.in, cbseresults.nic.in और results.cbse.nic.in पर जाकर चेक कर सकते हैं.

    इस बार बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या 44 लाख से अधिक थी, जिनमें से कक्षा 12वीं की परीक्षा 15 फरवरी से 4 अप्रैल 2025 के बीच आयोजित की गई थी. इस बार छात्राओं ने एक बार फिर से बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले छात्रों का प्रदर्शन भी शहरों से कम नहीं रहा.

    CBSE 12TH RESULT 2025- लड़कियों ने मारी बाजी

    CBSE 12वीं के परिणाम में इस बार भी छात्राओं ने बाजी मारी है. उनका पास प्रतिशत लड़कों की तुलना में अधिक रहा है. CBSE ने यह भी बताया कि केरल, दिल्ली और तमिलनाडु जैसे राज्यों के छात्र पूरे देश में अव्वल रहे हैं.

    नया बदलाव: ‘Relative Grading’ प्रणाली लागू

    CBSE ने इस वर्ष से एक नया कदम उठाया है- Relative Grading System. अब छात्रों को फिक्स ग्रेडिंग (जैसे 91–100 अंक = A1) की बजाय, उनके सहपाठियों के औसत प्रदर्शन के आधार पर ग्रेड दिए जाएंगे. इस बदलाव का उद्देश्य शैक्षणिक दबाव कम करना और प्रतिस्पर्धा को संतुलित बनाना है.

    यह नई प्रणाली छात्रों को बेहतर समझ और संतुलित मूल्यांकन प्रदान करती है. CBSE का मानना है कि यह बदलाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डालेगा.

    डिजिलॉकर और SMS से भी मिलेगा रिजल्ट

    CBSE ने छात्रों के लिए रिजल्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया को और आसान बना दिया है. छात्र अपनी डिजिटल मार्कशीट और प्रमाणपत्र DigiLocker ऐप से भी प्राप्त कर सकते हैं. इसके लिए बोर्ड द्वारा छात्र के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर DigiLocker लॉगिन ID और एक्सेस कोड भेजा जाएगा. छात्र UMANG ऐप और SMS सेवा के माध्यम से भी परिणाम देख सकते हैं.

    ऐसे देखें अपना रिजल्ट (Steps to Check)

    Step 1: आधिकारिक वेबसाइट results.cbse.nic.in या cbse.gov.in पर जाएं.
    Step 2: “CBSE 12th Result 2025 Direct Link” पर क्लिक करें.
    Step 3: अपना रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें.
    Step 4: आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा.
    Step 5: भविष्य के लिए डिजिटल कॉपी सेव कर लें.

  • PM MODI ADDRESS TO NATION: ऑपरेशन सिंदूर को भारत की हर बेटी, बहन, मां के नाम- पीएम मोदी

    PM MODI ADDRESS TO NATION: ऑपरेशन सिंदूर को भारत की हर बेटी, बहन, मां के नाम- पीएम मोदी

    नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच 7 मई से 10 मई तक चले तनावपूर्ण हालातों के बाद अब दोनों देशों के बीच (PM MODI ADDRESS TO NATION) युद्धविराम की स्थिति बनी है. यह युद्धविराम ऐसे समय आया है जब भारत ने पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के जवाब में “ऑपरेशन सिंदूर” को अंजाम दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पूरे घटनाक्रम के बाद राष्ट्र को संबोधित किया और भारतीय सेना के पराक्रम और संयम की भूरी-भूरी प्रशंसा की.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र को संबोधन

    ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा: “हम सभी ने बीते दिनों में देश का सामर्थ्य और उसका संयम दोनों देखा. हमारे वीर सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए असीम शौर्य का प्रदर्शन किया है. मैं उनकी वीरता, उनके साहस, उनके पराक्रम को आज हमारे देश की हर माता, बहन और बेटी को समर्पित करता हूं.”

    उन्होंने इस ऑपरेशन को देश की सामूहिक भावना, न्याय की प्रतिज्ञा और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि 6 मई की रात और 7 मई की सुबह को पूरी दुनिया ने देखा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ किस स्तर तक जा सकता है.

    आतंकी हमले का जवाब: पूर्ण अधिकार के साथ

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से झकझोर कर रख दिया. उन्होंने बताया कि कैसे निर्दोष पर्यटकों को धार्मिक आधार पर पहचान कर उनके परिवार के सामने मार डाला गया। यह आतंक का वीभत्स चेहरा था, जो भारत के सद्भाव को चोट पहुँचाने की कोशिश कर रहा था.

    प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि “भारतीय सशस्त्र बलों को पूर्ण अधिकार दिए गए हैं. जो भी भारत की बेटियों की गरिमा और गौरव को ठेस पहुंचाने की कोशिश करेगा, उसे इसका परिणाम भुगतना होगा.”

    अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई देशों ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है. अमेरिका, फ्रांस और जापान जैसे देशों ने इस कार्रवाई को आत्मरक्षा की श्रेणी में रखते हुए भारत के संयम की सराहना की है. वहीं, पाकिस्तान में अंदरूनी राजनीतिक हलचल और सेना पर बढ़ता दबाव देखने को मिल रहा है.

    एक राष्ट्र, एक स्वर

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि इस आतंकी हमले के बाद पूरा राष्ट्र एक स्वर में आतंकवाद के खिलाफ खड़ा हो गया. चाहे राजनीतिक दल हों या सामाजिक संगठन, हर किसी ने कठोर जवाब की मांग की थी, जिसे सेना ने पूरी ईमानदारी और बहादुरी से अंजाम दिया.

    भारत की नई सैन्य नीति का संकेत

    ऑपरेशन सिंदूर एक बार फिर इस बात को स्पष्ट करता है कि भारत अब केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं बल्कि निर्णायक और रणनीतिक सैन्य दृष्टिकोण अपनाता है. यह कार्रवाई भारत की New Rules of Engagement का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें सीमित समय में, सटीक हमला और आतंक के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की नीति प्रमुख है.

    जन भावना से जुड़ा अभियान

    प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक नाम नहीं है, ये देश की करोड़ों जनता की भावना है. यह एक न्याय की अखंड प्रतिज्ञा है, जिसे हर भारतवासी ने महसूस किया है.’ उन्होंने कहा कि ये ऑपरेशन हमारी बेटियों, माताओं और बहनों की रक्षा के लिए था.

    ऑपरेशन सिंदूर: आतंक पर करारा वार

    7 मई की सुबह भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान के भीतर लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाकर “ऑपरेशन सिंदूर” शुरू किया. इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने ड्रोन और मिसाइल हमलों के ज़रिए 9 प्रमुख आतंकी अड्डों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया. इसमें 100 से अधिक आतंकवादियों के मारे जाने की खबर है.

    इनमें से कई ठिकाने बहावलपुर और मुरीदके जैसे इलाकों में स्थित थे, जो लंबे समय से आतंकवाद का वैश्विक गढ़ माने जाते हैं। यह पहली बार नहीं है जब भारत ने सर्जिकल और एयर स्ट्राइक के माध्यम से जवाब दिया हो, लेकिन इस बार की कार्रवाई और रणनीति कहीं अधिक व्यापक, तीव्र और सफल रही.

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  • INDIAN DEFENSE REVOLUTION- हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल और ब्रह्मोस-2: भविष्य की युद्ध तकनीक से पाक-चीन के उड़े होश

    INDIAN DEFENSE REVOLUTION- हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल और ब्रह्मोस-2: भविष्य की युद्ध तकनीक से पाक-चीन के उड़े होश

    नई दिल्ली: भारत अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत करने के लिए लगातार नई तकनीकियों और हथियार प्रणालियों का विकास (INDIAN DEFENSE REVOLUTION) कर रहा है. पिछले कुछ वर्षों में किए गए कई सैन्य अभियानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब अपनी रक्षा व्यवस्था को उच्चतम स्तर तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है. हाल के अभियानों जैसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने ब्रह्मोस-1 की ताकत को साबित किया, और अब ब्रह्मोस-2 और हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) जैसे अत्याधुनिक हथियार भारत की सैन्य शक्ति को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाले हैं.

    ब्रह्मोस-2: हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल का अगला कदम -INDIAN DEFENSE REVOLUTION

    ब्रह्मोस-2, भारत और रूस के संयुक्त प्रयास से विकसित एक हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो ब्रह्मोस-1 का उन्नत संस्करण है. ब्रह्मोस-2 की गति मैक 7 से 8 (लगभग 8,600-9,800 किमी/घंटा) तक हो सकती है, जो इसे दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज मिसाइल बनाती है. यह मिसाइल, अपनी तेज़ी और स्टील्थ क्षमताओं के कारण, किसी भी दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणालियों को चकमा दे सकती है और जल्दी से लक्ष्य को भेद सकती है.

    विशेषताएँ:-

    • गति: ब्रह्मोस-2 की गति मैक 7-8 के बीच होती है, जो ब्रह्मोस-1 से दोगुना तेज है.
    • रेंज: इसकी रेंज 1,500 किलोमीटर तक हो सकती है, जो पाकिस्तान और चीन के अंदरूनी क्षेत्रों तक प्रभाव डालने में सक्षम है.
    • स्टील्थ क्षमता: इसकी उन्नत स्टील्थ तकनीक इसे दुश्मन के रडार प्रणालियों से बचने में मदद करती है.
    • लॉन्च प्लेटफॉर्म: ब्रह्मोस-2 को जमीन, समुद्र, पनडुब्बी और हवा से लॉन्च किया जा सकता है.

    हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV): भविष्य की युद्ध तकनीक

    हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) एक उन्नत तकनीक है, जो ध्वनि की गति से 5 गुना तेज़ (मैक 5+) गति से उड़ने में सक्षम है. यह मिसाइल रडार से बचते हुए लक्ष्य को सटीकता से नष्ट कर सकती है, जिससे इसकी पकड़ना लगभग असंभव हो जाता है. DRDO के हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है, और भारत इसके माध्यम से युद्ध की तकनीकी क्षमताओं में एक क्रांति ला रहा है.

    विशेषताएँ:

    • गति: HGV की गति मैक 6 से मैक 12 तक हो सकती है, जिससे दुश्मन को प्रतिक्रिया का समय लगभग शून्य हो जाता है.
    • रेंज: इसकी रेंज 1,500-2,000 किलोमीटर तक हो सकती है, जिससे पाकिस्तान और चीन के अधिकांश हिस्से में इसकी पहुंच हो.
    • मार्गदर्शन: HGV पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह एक निश्चित प्रक्षेपवक्र पर नहीं उड़ता. यह उड़ान के दौरान दिशा बदल सकता है, जिससे इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है.
    • पेलोड: यह पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के वॉरहेड्स लेकर चलने में सक्षम है, जिससे यह सामरिक और रणनीतिक दोनों उद्देश्यों के लिए उपयुक्त है.

    भारत का वैश्विक सैन्य प्रभाव: पाकिस्तान और चीन पर असर

    जैसे-जैसे भारत अपनी सैन्य शक्ति को उन्नत करता जा रहा है, उसका प्रभाव पाकिस्तान और चीन जैसे देशों पर भी पड़ेगा. ब्रह्मोस-2 और HGV जैसी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियां न केवल भारतीय सेना के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए सामरिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण साबित होंगी. ये हथियार न केवल पाकिस्तान और चीन की सीमाओं के भीतर गहरे तक पहुंच सकते हैं, बल्कि इनकी रडार-धारिता और स्टील्थ क्षमता से उनके रक्षा प्रणालियों को लगभग निष्क्रिय कर दिया जाएगा.

    पाकिस्तान के लिए खतरा:-

    ब्रह्मोस-2 और HGV जैसे हथियार पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक क्षेत्रों को निशाना बना सकते हैं. पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली के लिए यह एक बड़ा खतरा है, क्योंकि इन हथियारों की गति और गतिशीलता उन्हें ट्रैक करना असंभव बना देती है.

    चीन के लिए चुनौती:-

    चीन की S-400 और HQ-9 जैसी उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियां भी इन हथियारों के सामने बेज़ार होंगी. ब्रह्मोस-2 और HGV की रेंज और गति इन्हें चीनी सैन्य ठिकानों, नौसैनिक जहाजों और विमान वाहक पोतों को निशाना बनाने में सक्षम बनाती है.

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    SOURCE- NDTV INDIA, AAJ TAK

  • OPERATION SINDOOR: भारत ने 4 दिन लिखी तबाही की पटकथा, 11 एयरबेस उड़े, 100 आतंकी ढेर, तब मांगी सीजफायर की भीख!

    OPERATION SINDOOR: भारत ने 4 दिन लिखी तबाही की पटकथा, 11 एयरबेस उड़े, 100 आतंकी ढेर, तब मांगी सीजफायर की भीख!

    नई दिल्ली: पाकिस्तान द्वारा भारत के विरुद्ध आक्रामक रुख अपनाने के बाद भारतीय सेना (OPERATION SINDOOR) ने महज चार दिनों में जो जवाबी कार्रवाई की है, उसने न केवल पड़ोसी मुल्क को सामरिक स्तर पर झकझोर दिया है, बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी उसे बर्बादी की राह पर ला खड़ा किया है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान के 11 प्रमुख एयरबेस, आतंकियों के लॉन्चपैड और उसके सामरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है. इस अभियान में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने और अरबों रुपये के सैन्य नुकसान की पुष्टि हुई है.

    OPERATION SINDOOR: पाकिस्तान की वायु शक्ति को करारा झटका

    भारतीय वायुसेना की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 11 एयरबेस को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया. इनमें नूर खान/चकलाला एयरबेस (रावलपिंडी), रफीकी बेस (शोरकोट), मुरीद बेस, सियालकोट एयरबेस, स्कार्दू, पसरूर, भोलारी और जैकोबाबाद जैसे सामरिक दृष्टि से अहम केंद्र शामिल हैं.

    विशेषज्ञों के मुताबिक, इन एयरबेस पर हुए हमलों से पाकिस्तान की वायुसेना लगभग पंगु हो गई है. फाइटर जेट्स की तैनाती और उड़ान संचालन में बाधा उत्पन्न हो चुकी है. इन ठिकानों की मरम्मत और पुनर्निर्माण में महीनों लग सकते हैं.

    पाकिस्तानी AWACS विमान जमींदोज

    ऑपरेशन के दौरान भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के सबसे अहम एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) विमान को भी निशाना बनाया. यह विमान पाकिस्तानी पंजाब क्षेत्र में उड़ान भर रहा था, जब उसे ध्वस्त कर दिया गया. इस विमान की अनुमानित कीमत ₹5,845 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिससे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है.

    ☠️ आतंकियों के 9 ठिकानों पर धावा, 100 आतंकी ढेर

    जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नामक सैन्य कार्रवाई की शुरुआत की. इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकियों के 9 बड़े ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया.

    इस अभियान में मारे गए आतंकियों में पाकिस्तान के टॉप-5 खूंखार आतंकी भी शामिल हैं:

    • मुदस्सर खादियान
    • हाफिज मुहम्मद जमील
    • मोहम्मद यूसुफ अजहर
    • खालिद उर्फ अबू अक्शा
    • मोहम्मद हसन खान

    इनमें से कई मसूद अजहर जैसे मोस्ट वांटेड आतंकियों के करीबी माने जाते थे. भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इनकी मौत से आतंकियों के नेटवर्क को तगड़ा झटका लगा है.

    आतंक के लॉन्चपैड और हेडक्वार्टर नेस्तनाबूद

    एलओसी के निकट स्थित पाकिस्तान के आतंकी लॉन्चपैड, हथियार भंडारण और प्रशिक्षण केंद्र पूरी तरह बर्बाद कर दिए गए हैं. इन केंद्रों को फिर से खड़ा करना पाकिस्तान के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि यह भारी निवेश और समय मांगता है.

    भारतीय सेना की विशेष इकाइयों द्वारा की गई इन कार्रवाइयों ने पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क को गंभीर नुकसान पहुंचाया है और PoK में भर्ती प्रक्रिया भी लगभग ठप हो गई है.

    महिला अधिकारियों की भूमिका: रणनीति से लेकर हमले तक

    ऑपरेशन सिंदूर में महिला सैन्य अधिकारियों की भूमिका भी सराहनीय रही. सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी और वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने ऑपरेशन के दौरान रणनीतिक दिशा-निर्देशों और मिशन को अंजाम देने में सक्रिय सहभागिता की.

    कर्नल कुरैशी ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली को जड़ से हिलाना और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करना था. “हमने मुख्य रूप से रडार स्टेशनों, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और हथियार डिपो को निशाना बनाया,” उन्होंने कहा.

    📉 7,900 करोड़ का आर्थिक नुकसान

    एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, भारत से हुई इस जवाबी कार्रवाई के कारण पाकिस्तान को करीब ₹7,900 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है. इसमें शामिल हैं:

    • वायुसेना के बेस और विमानों का नुकसान
    • मिसाइल और हथियार भंडारण का नाश
    • आतंकियों की मौत और प्रशिक्षण केंद्रों का विनाश
    • आर्थिक गतिविधियों पर असर

    यह नुकसान पाकिस्तान की पहले से ही जर्जर अर्थव्यवस्था को और डगमगाने वाला साबित हो सकता है.

    भारत का स्पष्ट संदेश: हमला बर्दाश्त नहीं

    इस ऑपरेशन से भारत ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंक और सैन्य दुस्साहस के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी. प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, भारत भविष्य में भी ऐसे किसी हमले का जवाब सटीक, तीव्र और निर्णायक तरीके से देगा.

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  • भारत का पाकिस्तान पर अब तक का सबसे बड़ा सैन्य प्रहार, कई मायनों में ऐतिहासिक रहा ‘ऑपरेशन सिंदूर’- OPERATION SINDOOR

    भारत का पाकिस्तान पर अब तक का सबसे बड़ा सैन्य प्रहार, कई मायनों में ऐतिहासिक रहा ‘ऑपरेशन सिंदूर’- OPERATION SINDOOR

    नई दिल्ली: भारत ने 7 मई को आतंकवाद के खिलाफ इतिहास रचते हुए पाकिस्तान के (OPERATION SINDOOR) अंदर अब तक का सबसे बड़ा और सबसे गहरा सैन्य प्रहार किया. इस साहसिक और सटीक अभियान को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया, जो केवल एक जवाबी हमला नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई रणनीतिक सोच, तकनीकी ताकत और त्रिस्तरीय सैन्य समन्वय का प्रतीक बन गया.

    पहलगाम हमले का प्रतिशोध था OPERATION SINDOOR

    22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था. इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 1 नेपाली नागरिक भी शामिल था, जबकि 17 लोग घायल हुए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी समय देश से वादा किया था कि इस हमले के दोषियों को दंड मिलेगा. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ उसी वादे को निभाने का निर्णायक प्रमाण बन गया.

    थलसेना, वायुसेना और नौसेना की संयुक्त कार्रवाई

    1971 के बाद पहली बार भारत की तीनों सेनाओं—थलसेना, वायुसेना और नौसेना—ने मिलकर पाकिस्तान के भीतर गहराई तक एक साथ सैन्य कार्रवाई की. यह एक ऐतिहासिक कदम था, जिसने भारतीय सेना की एकजुटता, रणनीतिक सोच और तकनीकी दक्षता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित किया.

    बहावलपुर और मुरिदके के आतंकी अड्डे तबाह

    ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मुरिदके, बहावलपुर, और सियालकोट जैसे आतंकी गढ़ों को निशाना बनाया गया. यहां मौजूद जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के प्रशिक्षण शिविरों, मुख्यालयों और लॉजिस्टिक सपोर्ट ठिकानों पर मिसाइल और हवाई हमले किए गए. इस कार्रवाई में 9 बड़े आतंकी अड्डों को पूरी तरह ध्वस्त किया गया.

    अत्याधुनिक हथियारों का प्रयोग

    भारत ने इस ऑपरेशन में पहली बार अपने आधुनिकतम हथियारों का खुला प्रयोग किया. इसमें शामिल थे:

    • SCALP क्रूज मिसाइलें
    • HAMMER स्मार्ट बम
    • लॉइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन

    इन हथियारों ने पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली को अप्रभावी बना दिया और लक्ष्यों पर सटीक प्रहार किया.

    आतंकी नेटवर्क की कमर टूटी

    इस ऑपरेशन के तहत दर्जनों आतंकवादियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है. इनमें वे आतंकी भी शामिल हैं जो 2001 संसद हमला, 26/11 मुंबई हमला और 2025 पहलगाम हमले में शामिल रहे हैं. भारत ने पहली बार केवल ढांचे को नहीं, बल्कि लीडरशिप टारगेटिंग की रणनीति अपनाई, जिसमें आतंकी संगठनों के शीर्ष नेतृत्व को समाप्त करना प्राथमिकता रही.

    आतंकियों के संरक्षकों को खुली चेतावनी

    ऑपरेशन सिंदूर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला राष्ट्र नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीति के साथ आतंक के स्रोत पर सर्जिकल प्रहार करेगा—चाहे वह दुश्मन की जमीन पर कितनी भी गहराई में हो. यह पहली बार है जब किसी देश ने एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के भीतर खुले रूप में इतनी गहराई तक सफल सैन्य कार्रवाई की.

    प्रधानमंत्री मोदी का वादा निभा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहलगाम हमले के बाद देशवासियों से जो वादा किया था, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने उसे बखूबी निभाया. यह केवल एक जवाबी सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति, रणनीतिक आत्मनिर्भरता और सशक्त सैन्य दृष्टिकोण की घोषणा बन गया है.

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    SOURCE- NDTV INDIA, DAINIK BHASKAR

  • ऑपरेशन सिंदूर: भारत की एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान में तबाही, यूसुफ अजहर समेत पांच टॉप आतंकी ढेर- JeM LeT TERRORISTS KILLED

    ऑपरेशन सिंदूर: भारत की एयर स्ट्राइक से पाकिस्तान में तबाही, यूसुफ अजहर समेत पांच टॉप आतंकी ढेर- JeM LeT TERRORISTS KILLED

    नई दिल्ली: भारतीय सेना ने 7 मई को सुबह 1:30 बजे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत (JeM LeT TERRORISTS KILLED) पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित नौ आतंकी शिविरों पर एक साथ हमला किया. यह कार्रवाई हालिया आतंकी हमलों के जवाब में की गई थी और इसमें लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के कई शीर्ष आतंकी मारे गए. खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन में करीब 100 आतंकियों के मारे जाने की संभावना है.

    हमले में मारे गए पांच खतरनाक आतंकी (JeM LeT TERRORISTS KILLED)

    1- मुदस्सर खादियान खास उर्फ अबू जुंदाल
    मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के हेडक्वार्टर मरकज तैयबा का प्रभारी मुदस्सर खादियान खास पाकिस्तान के लिए विशेष महत्व रखता था. उसकी मौत के बाद पाकिस्तानी सेना ने उसे गार्ड ऑफ ऑनर दिया और नमाज एक सरकारी स्कूल में पढ़ी गई, जिसमें सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज भी शामिल हुए. यह इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान की सरकार और सेना आतंकियों को खुलेआम सम्मान देती है.

    2- हाफिज मुहम्मद जमील
    जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हाफिज मुहम्मद जमील, मसूद अजहर का सबसे बड़ा साला था. वह बहावलपुर में स्थित मरकज सुभान अल्लाह का प्रभारी था. वह युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें फिदायीन बनाता और संगठन के लिए फंड जुटाता था. भारतीय सेना ने उसके ठिकाने को ऑपरेशन सिंदूर में पूरी तरह तबाह कर दिया.

    3- मोहम्मद यूसुफ अजहर
    यूसुफ अजहर, जिसे उस्ताद जी और मोहम्मद सलीम के नाम से भी जाना जाता था, IC-814 विमान अपहरण कांड में भारत का वांछित आतंकवादी था. वह जैश के लिए हथियार प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभालता था और जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों की योजना बनाता था. उसकी मौत से जैश को गहरा झटका लगा है.

    4- खालिद उर्फ अबू अकाशा
    लश्कर का यह आतंकी जम्मू-कश्मीर में कई हमलों में संलिप्त रहा था और अफगानिस्तान से हथियारों की तस्करी में भी भूमिका निभाता था. उसका अंतिम संस्कार फैसलाबाद में हुआ, जिसमें पाकिस्तानी सेना के अधिकारी और डिप्टी कमिश्नर शामिल हुए.

    5- मोहम्मद हसन खान
    जैश का यह ऑपरेशनल कमांडर, मुफ्ती असगर खान कश्मीरी का बेटा था. वह पीओके से भारत में हमलों के समन्वयन में सक्रिय भूमिका निभाता था. उसकी मौत जैश की कमांड संरचना के लिए बड़ा झटका है.

    एयर स्ट्राइक के निशाने पर कौन-कौन से आतंकी ठिकाने थे?

    ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय वायुसेना ने कुल 9 लोकेशन पर 24 से अधिक हमले किए. इनमें चार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में और पांच पीओके में स्थित थे.

    पाकिस्तान में निशाने पर रहे स्थान:

    • बहावलपुर का जैश मुख्यालय मरकज सुभान अल्लाह
    • मुरीदके का लश्कर मुख्यालय मरकज तैयबा
    • सियालकोट का जैश कैंप सरजल
    • हिजबुल का महमूना कैंप

    पीओके में नष्ट किए गए शिविर:

    • कोटली का बॉम्बर कैंप
    • गुलपुर कैंप
    • मुजफ्फराबाद का सवाई कैंप
    • जैश का बिलाल कैंप
    • भीमबेर का बरनाला टेरर कैंप

    पाकिस्तान की दोहरी नीति उजागर

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद जिस तरह से पाकिस्तान के सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी मारे गए आतंकियों के जनाजों में शामिल हुए, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान का दावा कि वह आतंक का समर्थन नहीं करता—पूरी तरह से झूठा है. यह कार्रवाई भारत के लिए सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक जीत भी है.

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    ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में भड़का दुश्मन, पाकिस्तान की गोलाबारी में शहीद हुए DDC राज कुमार थापा- OPERATION SINDOOR INDIA

    लखनऊ/राजौरी: भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जवाब में पाकिस्तान की तरफ से की गई कायराना गोलाबारी ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में एक बड़ा प्रशासनिक नुकसान (OPERATION SINDOOR INDIA) पहुंचाया है. इस हमले में जिले के अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त (ADC) डॉ. राजकुमार थापा शहीद हो गए. वह जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा के अनुभवी अधिकारी थे और इससे पहले डॉक्टर भी रह चुके थे.

    शनिवार तड़के पाकिस्तान ने राजौरी सहित कई सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन और मिसाइल अटैक किए. राजौरी में तैनात डॉ. राजकुमार थापा अपने घर में मौजूद थे, तभी एक गोला उनके घर पर गिरा. शुरुआती धमाके के बाद वे बाहर निकले, फिर लौटकर अपने कमरे में गए, तभी दूसरा गोला सीधे उनके कमरे पर आ गिरा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया.

    OPERATION SINDOOR INDIA- कौन थे डॉ. राजकुमार थापा?

    डॉ. राजकुमार थापा का जन्म 28 अप्रैल 1971 को हुआ था. उनके पिता का नाम दुर्गा दास है. थापा ने एमबीबीएस की पढ़ाई की थी और उसके बाद 2001 में जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए. 2010 में वे IAS स्तर पर पदोन्नत हुए और वर्तमान में वे राजौरी में ADC के रूप में कार्यरत थे. उनका प्रशासनिक और चिकित्सा सेवा का अनुभव उन्हें एक उत्कृष्ट अधिकारी बनाता था.

    सीएम उमर अब्दुल्ला ने दी श्रद्धांजलि

    जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने थापा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और स्वयं उनके परिजनों से मुलाकात की. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “डॉ. राजकुमार थापा (JKAS, ADC राजौरी) के परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना है. उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा. सरकार उनके परिवार के साथ खड़ी है.”

    घायल हुए अन्य कर्मचारी

    इस हमले में थापा के साथ दो और कर्मचारी भी घायल हुए हैं, जिनकी हालत गंभीर बताई जा रही है. अस्पताल में उनका इलाज जारी है. सरकार ने उनके उपचार की पूरी व्यवस्था की है.

    इलाके में शोक की लहर

    राजौरी जिले में थापा की शहादत के बाद से शोक की लहर है. स्थानीय नागरिकों और अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और सोशल मीडिया पर उनके प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं. उनका योगदान न केवल प्रशासनिक क्षेत्र में, बल्कि मानवीय सेवा के क्षेत्र में भी अनुकरणीय था.

    सरकार ने की निंदा

    केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन ने पाकिस्तान की इस हरकत की कड़ी निंदा की है. इसे एक कायरतापूर्ण हमला बताते हुए कहा गया कि भारत ऐसी किसी भी कार्रवाई का करारा जवाब देगा.

    ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
    गौरतलब है कि भारत ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए थे. इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान बौखला गया है और सीमाओं पर तनाव बढ़ गया है.

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