I Love Muhammad Controversy: बरेली में जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौलाना तौकीर रजा खान को सख्त चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “यूपी में कानून और व्यवस्था की अपनी जगह है, जो भी कानून तोड़ेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
बरेली में नमाज के बाद माहौल बिगड़ने पर पुलिस ने तुरंत कड़ी सुरक्षा बरती और हिंसा को काबू में किया। मुख्यमंत्री योगी ने सभी धार्मिक संगठनों से अपील की कि शांति और सौहार्द बनाए रखें, किसी भी तरह की провокация समाज में अशांति पैदा कर सकती है।
इस मामले में जिला प्रशासन और पुलिस बल मौके पर सक्रिय हैं और भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है।हालांकि, मौलाना तौकीर रजा खान ने स्थानीय समुदाय को उकसाने वाले बयान दिए थे, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि कानून सबके लिए समान है और किसी भी समुदाय को विशेष छूट नहीं दी जाएगी।
#BREAKING यूपी के बरेली हिंसा में 8 आरोपी गिरफ्तार 24 से ज्यादा आरोपी हिरासत में लिए गए 1700 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज पुलिस ने इलाके में बढ़ाई सुरक्षा और फ्लैग मार्च किया जांच जारी, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी@BareillyPolice @DM_Bareilly @Uppolice… pic.twitter.com/Yi3tAoymAL
सुरक्षा व्यवस्था और लोगों की चेतना पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “यूपी में किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और जो भी कानून तोड़ेगा, उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होगी।”इस चेतावनी के बाद बरेली में शांति कायम है और प्रशासन ने कहा कि हर नागरिक कानून का पालन करे और किसी भी तरह की भड़काऊ गतिविधि से बचे।
कानपुर देहात कानपुर देहात में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जीएसटी सुधार और मोदी सरकार की दूरदर्शिता पर प्रकाश डाला। मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जीएसटी के दरों में व्यापक कमी की गई है। 12% जीएसटी में आने वाले उत्पादों की 99% तक दर घटाई गई है, जबकि 28% जीएसटी वाले उत्पादों में 90% तक छूट दी गई है। मंत्री ने कहा कि यह जनता के लिए एक बड़ा उपहार है और लोगों को इसका लाभ तुरंत मिलना चाहिए।
संजय निषाद ने मोदी सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब सरकार सत्ता में आई थी, तब देश की आंतरिक व्यवस्थाएं कमजोर थीं। जीएसटी को लागू कर देश ने वित्तीय और औद्योगिक ढांचे को मजबूत किया। रक्षा, स्वास्थ्य, सड़क परिवहन, मैन्युफैक्चरिंग हब, आईटी और शिक्षा क्षेत्रों में सुधारों के बाद आम जनता को राहत दी गई। उन्होंने कहा कि सरकार का मंत्र है ‘गरीब ऊपर आए, अमीर टैक्स चुकाए’।मंत्री ने मछुआरों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि मछुआरों के लिए ₹1,500 प्रतिमाह सहायता की मांग सरकार को भेजी जाएगी। जीएसटी कटौती का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचाना ही सरकार का उद्देश्य है।
इसके बाद संजय निषाद ने रनिया कस्बे में लगभग 1 किलोमीटर पैदल मार्च किया और व्यापारियों से सीधे संवाद किया। कार्यकर्ताओं और व्यापारियों ने “घटी जीएसटी, मिला उपहार, धन्यवाद मोदी सरकार” के नारे लगाए। इस दौरान मंत्री ने बउवा मोटर में राजेश नामक ग्राहक को मोटरसाइकिल की चाबी प्रदान की, जिसमें जीएसटी में कटौती के कारण 12,000 रुपये की छूट मिली।इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष सुनील शर्मा, राहुल मिश्रा, अभिषेक सिंह, पुष्पेंद्र प्रजापति और केशव त्रिपाठी भी मौजूद रहे। संजय निषाद ने व्यापारियों को जागरूक करते हुए कहा कि जीएसटी कटौती से जनता को वास्तविक लाभ मिलना चाहिए और इसे अपनाना जरूरी है।
रिपोर्टर नितेश तिवारी अमेठी- जिले के मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। बुधवार (24 सितंबर) को यहां इलाज के दौरान 18 वर्षीय युवक कपिल सरोज की मौत हो गई। मृतक बलभद्रपुर मजरे कौहार, गौरीगंज क्षेत्र का रहने वाला था। मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर लापरवाही और फर्जी वसूली का गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
परिजनों का आरोप
मृतक के परिजनों ने बताया कि कपिल को हृदय रोग की समस्या थी, जिसके चलते उसे भर्ती किया गया था। डॉक्टरों ने कार्डियो थोरैसिक सर्जरी की सलाह दी। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान ही कपिल की मौत हो गई थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने यह तथ्य छुपाया और इलाज का बहाना बनाकर करीब 3 लाख रुपये की वसूली कर ली।परिजनों के अनुसार जब उन्हें शक हुआ और वे ऑपरेशन थिएटर के नज़दीक पहुंचे तो देखा कि कपिल मृत अवस्था में पड़ा हुआ था। इस खुलासे के बाद परिजन भड़क उठे और अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।
अस्पताल में हंगामा और झड़प
मामला बढ़ने पर परिजनों और अस्पताल के सुरक्षा गार्डों के बीच झड़प और हाथापाई भी हो गई। इसमें कुछ परिजन घायल हो गए। देखते ही देखते बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी अस्पताल पहुंच गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
अस्पताल पर पहले भी लगे आरोप
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पहला मौका नहीं है जब संजय गांधी अस्पताल पर लापरवाही और फर्जीवाड़े के आरोप लगे हों। करीब एक साल पहले भी मरीज की मौत के बाद इस अस्पताल को सील किया गया था। तब भी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगे थे।स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में मनमाने तरीके से पैसे वसूले जाते हैं। यहां तक कि मरीजों को छोड़ने आए वाहनों से भी 20 रुपये वसूले जाते हैं, चाहे वाहन तुरंत वापस क्यों न चला जाए।
#अमेठी मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल पर फिर लगा गंभीर आरोप। अस्पताल आये दिन विवादों में घिरा रहता है। इलाज के दौरान 18 वर्षीय नवयुवक की मौत से नाराज़ परिजनों ने अस्पताल गेट पर किया हंगामा। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल सूचना… pic.twitter.com/yaH7z6bQ6v
घटना की सूचना मिलते ही गौरीगंज सीओ अखिलेश कुमार वर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और अस्पताल परिसर में अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी गई। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम और पंचायतनामा की कार्यवाही की जा रही है। अभी तक परिजनों ने कोई लिखित तहरीर नहीं दी है। तहरीर मिलते ही सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
सीएमओ का बयान
इस मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) अमेठी, डॉ. अंशुमान सिंह ने कहा कि कपिल का हृदय वॉल्व खराब था, जिसके चलते उसकी कार्डियो थोरैसिक सर्जरी की गई थी। ऑपरेशन के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अभी तक परिजनों ने कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया है। प्रार्थना पत्र मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी और यदि लापरवाही पाई गई तो अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुरादाबाद उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। थाना नागफनी क्षेत्र में चार साल पहले हुई एक शादी अब दहेज हत्या के आरोपों के चलते चर्चा में आ गई है। ठाकुरद्वारा निवासी युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद परिजनों ने पति और उसके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि दहेज में कार न मिलने की वजह से बेटी को लगातार प्रताड़ित किया गया और आखिरकार जहर देकर उसकी हत्या कर दी गई।
जानकारी के अनुसार, मृतका की शादी करीब चार साल पहले नागफनी थाना क्षेत्र के निवासी युवक से हुई थी। विवाह के बाद से ही पति और ससुरालवालों द्वारा दहेज में कार की मांग की जाती रही। परिजनों ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उनकी बेटी को गाली-गलौज और मारपीट का सामना करना पड़ा।
संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
परिजनों के मुताबिक, 25 अगस्त को युवती की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। उस समय दोनों परिवारों की सहमति से शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। लेकिन अब युवती के मायके पक्ष ने दावा किया कि यह मौत प्राकृतिक नहीं, बल्कि योजनाबद्ध हत्या थी।
जिलाधिकारी के आदेश पर कब्र से निकाला गया शव
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अनुज कुमार ने प्रशासनिक आदेश जारी कर कब्रिस्तान से शव निकलवाने के निर्देश दिए। प्रशासन ने कब्रिस्तान में गड्ढा खुदवाकर शव बाहर निकाला और पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
परिजनों की तहरीर के आधार पर पुलिस ने पति समेत पूरे परिवार के 10 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया है। एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि मामला बेहद संवेदनशील है और जांच में कोई भी ढिलाई नहीं बरती जाएगी। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
न्याय की गुहार और समाज के लिए सबक
यह मामला न केवल मुरादाबाद बल्कि पूरे प्रदेश में सनसनी का विषय बन गया है। दहेज प्रथा जैसी कुरीति ने एक बार फिर समाज को झकझोर दिया है। युवती के परिजन इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं और चाहते हैं कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।यह घटना इस बात की कड़वी हकीकत है कि दहेज प्रथा आज भी हमारे समाज में जहर बनकर घुली हुई है। शिक्षित समाज और बदलते समय में भी दहेज की मांग ने कितनी ही जिंदगियां तबाह कर दी हैं।
औरैया। थाना सहायल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया, जो इलाके में चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अरविन्द दोहरे और पंकज दोहरे के रूप में हुई है। दोनों आरोपी ग्राम गहेसर थाना दिबियापुर क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर चोरी की रकम ₹25,000 बरामद की। इसके अलावा, घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली गई है। यह चोरी की वारदात 19 सितंबर को हुई थी, जब वादी हरिश्चन्द्र के बैग से ₹25,000 चोरी हो गई थी।
थाना सहायल पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया और उन्हें कानूनी कार्रवाई के लिए रिमांड पर भेजा गया। पुलिस टीम की इस सफलता की सराहना भी की गई।
यह कार्रवाई यह साबित करती है कि औरैया पुलिस क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की इस कार्रवाई की प्रशंसा की और कहा कि इससे इलाके में अपराधियों में डर और आम जनता में सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा।
पुलिस विभाग ने कहा कि वह आने वाले समय में ऐसे अपराधियों पर कड़ी निगरानी रखेगा और किसी भी तरह की अपराधिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा।
भोपाल/गांधी सागर। मध्यप्रदेश के गांधी सागर अभ्यारण्य में प्रोजेक्ट चीता के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कूनो अभ्यारण्य में मादा चीता ‘धीरा’ को शिफ्ट किया गया, जिससे यहां अब चीतों की संख्या तीन हो गई। इससे पहले अप्रैल में दो नर चीतों को कूनो में छोड़ा गया था।
धीरा की यात्रा और सुरक्षा
धीरा को कूनो अभ्यारण्य में पहुंचाने के लिए लगभग 7 घंटे की यात्रा की गई। इस दौरान वन्यजीव विभाग की टीम ने सुनिश्चित किया कि धीरा को किसी भी तरह की चोट या तनाव न हो। उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़े जाने के बाद तुरंत उसकी निगरानी शुरू कर दी गई।
निगरानी और देखभाल
वन्यजीव विभाग ने बताया कि धीरा को शिफ्ट करने के बाद अगले तीन महीनों तक सीसीटीवी और ऑन-ग्राउंड टीम द्वारा उसकी पूरी निगरानी की जाएगी। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि धीरा नए पर्यावरण में सुरक्षित और सहज रहे। इसके साथ ही, यह अन्य चीतों के साथ मेलजोल और प्रजनन की प्रक्रिया को भी आसान बनाएगा।
प्रोजेक्ट चीता भारत में चीतों की संख्या बढ़ाने और उनकी जैविक विविधता को सुरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। कूनो अभ्यारण्य में धीरा के आने के बाद चीतों की संख्या तीन हो गई है, जो प्रजनन और प्रजाति संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है।वन्यजीव विभाग ने सभी पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे चीता संरक्षण और सुरक्षा नियमों का पालन करें, ताकि प्रोजेक्ट चीता के तहत किए जा रहे प्रयास सफल हों।
स्पोर्ट्स डेस्क। एशिया कप 2025 में पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने ऐसा ड्रामा किया, जिससे पूरे क्रिकेट जगत में हलचल मच गई। दरअसल, पाकिस्तान ने मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट (Andy Pycroft) को हटाने की मांग की, लेकिन ICC ने इस मांग को सख्ती से ठुकरा दिया। इस फैसले के बाद पाकिस्तान ने मैदान पर उतरने से इनकार कर दिया और होटल छोड़ने से मना कर दिया।
पाकिस्तान की टीम का कहना था कि जब तक पाइक्रॉफ्ट को मैच रेफरी की जिम्मेदारी से हटाया नहीं जाएगा, वे मैदान में नहीं उतरेंगे। टीम प्रबंधन ने आईसीसी पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन आईसीसी अपने फैसले पर कायम रहा। इसी कारण यूएई के खिलाफ होने वाला ग्रुप मैच काफी देर से शुरू हुआ और भारतीय समयानुसार रात 9 बजे टॉस हो सका।
आखिर क्यों पाकिस्तान ने किया विरोध?
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और कुछ खिलाड़ियों को एंडी पाइक्रॉफ्ट के फैसलों पर आपत्ति थी। टीम का आरोप है कि पिछली कुछ सीरीज़ में रेफरी ने पाकिस्तान के खिलाफ पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया था। इसी वजह से उन्होंने एशिया कप के अहम मुकाबले से पहले उन्हें हटाने की मांग रखी।
हालांकि, आईसीसी ने साफ कर दिया कि किसी भी टीम की ऐसी मांग पर अमल नहीं होगा। रेफरी का चयन आईसीसी के नियमों और प्रक्रियाओं के तहत होता है।
देर से शुरू हुआ मैच
ड्रामा बढ़ने के बाद क्रिकेट फैंस में भी नाराजगी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की इस हरकत को खेल भावना के खिलाफ बताया गया। कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी इस व्यवहार की आलोचना की और कहा कि खेल में रेफरी के फैसले को सम्मान देना चाहिए।
मुरादाबाद/देहरादून। उत्तराखंड की शांत वादियों में तबाही का ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने मुरादाबाद जनपद को झकझोर दिया। बिलारी थाना क्षेत्र के ग्राम मुड़िया के मजदूरों का एक दल काम करने के लिए देवभूमि गया था, लेकिन पहाड़ों के बीच अचानक आई प्राकृतिक आपदा उनकी जिंदगी छीन ले गई।
हरिद्वार से देहरादून की ओर बढ़ रहे ग्रामीणों पर अचानक बादल फटने की घटना ने कहर बरपा दिया। भीषण गर्जना के बाद पानी और मलबे की तेज धाराओं ने सब कुछ बहा दिया। ग्रामीणों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे बाढ़ की रौद्र लहरों में समा गए।इस त्रासदी में मुड़िया गांव के छह लोगों मदन, नरेश, हरचरण, सोमवती, हिना और किरण की मौत हो गई। जबकि तीन लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
प्रशासन लगातार खोजबीन में जुटा है। गांव में घटना की खबर पहुंचते ही मातम छा गया। हर गली से चीख-पुकार की आवाजें सुनाई देने लगीं।एसडीएम बिलारी विनय कुमार ने छह मौतों की पुष्टि की है। भाजपा नेता सुरेश सैनी ने बताया कि मृतक सभी मजदूर वर्ग से थे और खनन कार्य के लिए जा रहे थे।
इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हृदय विदारक घटना पर गहरा शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
देवभूमि की यह त्रासदी मुरादाबाद के मुड़िया गांव के लिए एक ऐसी काली रात बन गई है, जिसे भुलाना आसान नहीं होगा।
75 साल के पीएम, यादें बेमिसाल .. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75वां जन्मदिन केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि एक ऐसी यात्रा का प्रतीक है जिसमें भारत की प्रशासनिक, सामाजिक और विकासात्मक सोच में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है। 2014 में जब उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तब वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक परिवर्तन के सूत्रधार बनकर सामने आए। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) आज यानी 17 सितंबर 2025 को अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं. उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात (Gujarat) के वडनगर में दामोदर दास मूलचंद मोदी और हीराबेन के घर हुआ था. पीएम मोदी (PM Modi) अपने 5 भाई-बहनों में दूसरे नंबर की संतान हैं.
बचपन में मोदी जी को नरिया कहकर पुकारा जाता था. कहा जाता है कि बचपन में नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) साधु-संतों से खासा प्रभावित हुए थे और वो बचपन से ही संन्यासी बनना चाहते थे. इतना ही नहीं बचपन से ही वे आरएसएस (RSS) से जुड़ गए थे. पीएम मोदी हमेशा किसी भी काम की शुरुआत करने से पहले अपनी मां का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते हैं
नीतियों से परे: अमल की दिशा में ठोस कदम
भारत की राजनीति में नीतियाँ बनाना नई बात नहीं है, लेकिन उन्हें ज़मीन पर उतारना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। नरेंद्र मोदी ने इस खाई को पाटने का काम किया। उनकी सोच स्पष्ट थी—“योजना सिर्फ फाइलों में नहीं, लोगों की ज़िंदगी में दिखनी चाहिए।”उदाहरण के लिए, स्वच्छ भारत मिशन केवल सफाई अभियान नहीं रहा; यह एक जन आंदोलन (Jan Andolan) बन गया। लोगों ने शौचालय निर्माण को सामाजिक सम्मान से जोड़ा, स्कूलों में बच्चे साफ‑सफाई के ब्रांड एंबेसडर बने और ग्रामीण भारत में व्यवहार परिवर्तन की एक नई लहर चली। यह सब संभव हुआ एक मजबूत नेतृत्व, लगातार संवाद और जमीनी निगरानी के चलते।
नौकरशाही की कार्यशैली में क्रांतिकारी बदलाव
मोदी सरकार ने भारत की नौकरशाही को पारंपरिक ‘फाइलों के बोझ’ से निकालकर ‘प्रभावी डिलीवरी सिस्टम’ की ओर अग्रसर किया। उन्होंने डिजिटल इंडिया के ज़रिए प्रशासन को जवाबदेह (accountable) और पारदर्शी (transparent) बनाने पर जोर दिया। कुछ अहम पहलें:
JAM ट्रिनिटी (Jan Dhan, Aadhaar, Mobile) ने सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित की, जिससे लीकेज में भारी कमी आई। DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुँची।
National Single Window System (NSWS) ने उद्योगों और व्यवसायों के लिए सरकारी अनुमोदन की प्रक्रिया को एकीकृत किया—अब 30+ मंत्रालयों की सेवाएँ एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध हैं।
Karmayogi योजना के तहत सरकारी कर्मचारियों को निरंतर डिजिटल प्रशिक्षण मिल रहा है ताकि वे समयानुकूल सेवाएँ दे सकें।
सरकारी योजनाओं को बना दिया जन भागीदारी का मंच
मोदी के शासन में कई योजनाएँ सिर्फ सरकारी घोषणाएँ नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने जनता की भागीदारी से एक आंदोलन का रूप ले लिया
विकसित भारत संकल्प यात्रा – एक अनूठा प्रयास जिसके तहत गाँव‑गाँव “मोदी की गारंटी वाहन” गए, और करोड़ों नागरिकों को सरकारी योजनाओं की जानकारी, सहायता और लाभ मिला।
प्रधानमंत्री आवास योजना – अब तक 4 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को पक्के घर मिल चुके हैं। लाभार्थियों की भागीदारी से निर्माण कार्य में पारदर्शिता और लागत‑नियंत्रण हुआ।
जन औषधि परियोजना (PMBJP) – 10,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से आम लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ मिल रही हैं।
‘सबका साथ, सबका विकास’ से ‘सबका प्रयास’ तक
मोदी की सबसे बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक उपलब्धि यह रही कि उन्होंने विकास को सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी बना दिया। इसका प्रभाव यह हुआ कि योजनाओं के प्रति जनता की ‘उपेक्षा’ की जगह ‘उत्साह’ ने ले ली।अब सरकारी योजनाओं को लोग अपने अधिकार के रूप में नहीं, बल्कि अपने योगदान के रूप में देख रहे हैं।
75 वर्ष की आयु में पीएम मोदी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि जन सहभागिता और प्रशासनिक दक्षता के प्रतीक बन चुके हैं। उन्होंने साबित किया कि योजनाएँ तब ही सफल होती हैं जब सरकार, नौकरशाही और जनता—तीनों एक साथ मिलकर चलें। मोदी की यही सोच उन्हें पारंपरिक नेताओं से अलग बनाती है—वह सिर्फ घोषणा नहीं करते, अमल करवाते हैं।
मां की मुश्किलों से निकली प्रेरणा: पीएम मोदी की योजनाओं को मिली नई दिशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन केवल राजनीतिक या प्रशासनिक यात्रा नहीं, बल्कि अनुभवों से उपजी नीतियों की एक जीवंत गाथा है। इस गाथा में सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है उनकी मां ।उनकी मां की संघर्षशील छवि—जो मिट्टी के चूल्हे पर खाना पकाती थीं, हर रोज़ ज़रूरतों से समझौता करती थीं—पीएम मोदी के मन में गहराई से बसी रही। यही वजह है कि जब उन्हें देश की बागडोर मिली, तो उन्होंने सबसे पहले उन गृहिणियों की सुध ली, जो आज भी धुएं में खाना बनाने को मजबूर थीं।
उज्ज्वला योजना: मां के अनुभव से देश की माताओं तक
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि सम्मान की लौ है। इसका विचार तब आया जब पीएम मोदी ने अपनी मां को चूल्हे के धुएं में काम करते देखा। उनके इसी निजी अनुभव ने उन्हें प्रेरित किया कि हर गरीब महिला को गैस चूल्हा और सिलिंडर मिलना चाहिए। नतीजा – करोड़ों महिलाओं को स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिली और उनका जीवन आसान हुआ।
महिला सशक्तिकरण की नींव – घर से लेकर संसद तक
मोदी सरकार ने महिला सशक्तिकरण को केवल नारा नहीं, नीतियों का केंद्र बनाया जन धन योजना के तहत करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खुले, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान ने सामाजिक सोच में बदलाव लाया—अब बेटियों को बोझ नहीं, भविष्य माना जा रहा है।महिला आरक्षण विधेयक, जिसे दशकों से ठंडे बस्ते में डाला जा रहा था, मोदी सरकार में संसद में पारित हुआ।सुकन्या समृद्धि योजना के माध्यम से बेटियों के नाम पर बचत को प्रोत्साहन मिला।ये सभी कदम सिर्फ घोषणाएँ नहीं थे, बल्कि जमीन पर लागू होने वाली योजनाएँ बनीं।
महिलाओं का बढ़ता भरोसा: साइलेंट वोटर की ताकत
पीएम मोदी का कहना है कि महिलाएं उनकी “साइलेंट वोटर” हैं। वे प्रचार नहीं करतीं, लेकिन वोट देने ज़रूर आती हैं। बिहार विधानसभा चुनावों के बाद पीएम मोदी ने खासतौर पर महिलाओं का आभार जताया—क्योंकि महिला वोटरों की संख्या कई जगह पुरुषों से ज्यादा हो गई थी। इसका कारण साफ है: योजनाओं की प्रत्यक्ष लाभार्थी महिलाएं बनीं।
नीतियों की बुनियाद में निजी अनुभव
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में काम करने वाले अधिकारी बताते हैं कि पीएम मोदी सिर्फ योजना बनाने तक सीमित नहीं रहते। उनकी प्राथमिकता रहती है कि योजना की गहराई से समीक्षा की जाए—क्या यह वास्तव में लागू की जा सकती है? क्या ज़मीनी तंत्र इसके लिए तैयार है?यही कारण है कि मोदी सरकार की अधिकांश योजनाएँ महज़ सरकारी विज्ञापन नहीं रहीं, बल्कि लाभार्थियों तक पहुँचीं और उनका जीवन बदला।
अनुभवों से नीतियाँ, और नीतियों से बदलाव
पीएम मोदी की मां का संघर्ष केवल एक पारिवारिक कहानी नहीं रही, बल्कि एक राष्ट्र-निर्माण की प्रेरणा बन गई। उन्होंने अपनी मां के अनुभवों को देश की करोड़ों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव में बदला। यही वो दृष्टिकोण है, जो पीएम मोदी को अन्य नेताओं से अलग करता है—वे कागज़ों में नहीं, ज़मीन पर काम करते हैं।
Indian Railways Updateदिल्ली- भारतीय रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्रणाली में बड़े बदलाव की घोषणा की है। 1 अक्टूबर 2025 से रिजर्वेशन टिकट बुकिंग के पहले 15 मिनट केवल वही यात्री कर पाएंगे, जिनका आधार कार्ड (Aadhaar) से वेरिफिकेशन हो चुका है। इसका उद्देश्य टिकट बुकिंग में हो रही धांधली और बोट बुकिंग को रोकना है।
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह नियम IRCTC की वेबसाइट और मोबाइल ऐप दोनों पर लागू होगा। यानी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर टिकट बुक करने के इच्छुक यात्रियों को आधार नंबर से अपनी पहचान सत्यापित करवानी होगी। इसके बिना शुरुआती 15 मिनट के लिए बुकिंग करना संभव नहीं होगा।
रेल मंत्रालय के अनुसार, इस बदलाव से यात्रियों के लिए फेयर बुकिंग सुनिश्चित होगी और टिकट के लिए कंप्यूटराइज्ड बोट्स द्वारा बुकिंग की घटनाओं पर रोक लगेगी। इसके अलावा, यात्रियों की सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन को भी ध्यान में रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय रेलवे के डिजिटलाइजेशन प्रयास को मजबूत करेगा और यात्री सुविधा में सुधार लाएगा। यात्री अब समय पर अपनी यात्रा सुनिश्चित करने के लिए अपने आधार को IRCTC अकाउंट से लिंक करना अनिवार्य होगा।
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे समय रहते अपना आधार वेरिफिकेशन कर लें, ताकि टिकट बुकिंग के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।