Raj Thackeray Uddhav Rally: महाराष्ट्र की राजनीति ने शनिवार को एक ऐतिहासिक मोड़ लिया, जब दो दशक बाद ठाकरे परिवार के दो चचेरे भाई—राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे—एक साथ एक ही मंच पर नजर आए। ‘आवाज मराठीचा’ नामक यह महारैली मुंबई के वर्ली स्थित एनएससीआई डोम में आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य मराठी अस्मिता, भाषा और संस्कृति की एकता को सशक्त बनाना था।
VIDEO | Mumbai, Maharashtra: "We have come together to stay together," says Shiv Sena (UBT) chief Uddhav Thackeray (@uddhavthackeray) at joint rally with MNS chief Raj Thackeray.#MaharashtraPolitics#MaharashtraNews
इस रैली में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने मंच से साफ शब्दों में कहा कि,
“सरकार द्वारा थोपे जा रहे त्रिभाषा फॉर्मूले को वापस लेना मराठी अस्मिता की जीत है, और इसका श्रेय मराठी एकता को जाता है।”
उन्होंने मंच से मराठी स्वाभिमान की हुंकार भरते हुए कहा कि भाषा कोई बाधा नहीं, बल्कि पहचान है, और उसे किसी सरकारी एजेंडे के तहत दबाया नहीं जा सकता।
“महाराष्ट्र राजनीति से बड़ा है” – राज ठाकरे
राज ठाकरे ने अपने भाषण में इस रैली को भावनात्मक और वैचारिक एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा,
“मैंने पहले ही कहा था कि मेरा महाराष्ट्र किसी भी राजनीतिक लड़ाई से बड़ा है। और आज, 20 साल बाद मैं और उद्धव साथ खड़े हैं।”
राज ने चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा,
“जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो देवेंद्र फडणवीस ने कर दिखाया – हम दोनों भाइयों को एक साथ लाकर।”
इस बात पर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा और मराठी मानुष में उम्मीद की एक नई लहर दिखाई दी।
“मुंबई पर हाथ डाला तो देखो मराठी मानुष का बल”
राज ठाकरे ने अपने भाषण में केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि
“मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की कोई भी साजिश कामयाब नहीं होगी। अगर किसी ने ऐसा करने की कोशिश की, तो मराठी समाज उसका जवाब देगा।”
उन्होंने मराठी भाषा को दबाने की कोशिशों पर सवाल उठाए और कहा कि हिंदी थोपने की नीति नहीं चलेगी।
“ये एजेंडा है, प्रेम नहीं” – हिंदी पर टिप्पणी
राज ठाकरे ने कहा कि
“अचानक हिंदी को क्यों इतना बढ़ावा दिया जा रहा है? ये भाषा प्रेम नहीं, बल्कि एक एजेंडा है। हम पर हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है।”
उन्होंने दोगली राजनीति पर भी हमला बोला,
“जब हमारे बच्चे इंग्लिश मीडियम में पढ़ते हैं, तो मराठी संस्कृति पर सवाल उठाए जाते हैं। लेकिन जिन बीजेपी नेताओं ने मिशनरी स्कूलों में पढ़ाई की, उनके हिंदुत्व पर कोई सवाल नहीं उठा। ये दोहरा रवैया अब नहीं चलेगा।”
क्या बदलेगी ठाकरे भाइयों की ये एकता?
विश्लेषकों के अनुसार, यह मंच केवल सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक नहीं बल्कि मुंबई की आगामी बीएमसी चुनावों में भी एक बड़ा संकेत है। सवाल यह है कि क्या यह एकता सिर्फ एक रैली तक सीमित रहेगी या आने वाले समय में यह एक नया राजनीतिक मोर्चा बन सकती है?
Karnataka land acquisition protest: कर्नाटक के चन्नारायपटना होबली क्षेत्र के तेरह गांवों में चल रहा भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 1188 दिनों से अपने खेत-खलिहानों को बचाने की जद्दोजहद कर रहे किसानों का यह संघर्ष राज्यभर के किसान, मजदूर, दलित, महिला, छात्र संगठनों और ‘संयुक्ता होराटा कर्नाटक’ के समर्थन से अब एक जनआंदोलन में बदल चुका है।
25 जून को ‘देवनहल्ली चलो’ और पुलिसिया दमन- Karnataka land acquisition protest
भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों ने 25 जून को ‘देवनहल्ली चलो’ अभियान के तहत विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस की बर्बर कार्रवाई ने आंदोलन को और तेज कर दिया। किसानों पर हुए इस अत्याचार ने राज्यभर में रोष और एकजुटता को जन्म दिया।
फ्रीडम पार्क बना संघर्ष का नया केंद्र- Karnataka land acquisition protest
27 जून से बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो चुका है। यहां से आंदोलनकारियों ने सरकार तक अपनी आवाज़ पहुंचाने का ऐलान किया। किसानों की प्रमुख मांग है – कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (KIADB) द्वारा चन्नारायपटना और देवनहल्ली के 13 गांवों से किए जा रहे 3,077 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहण को रद्द किया जाए। Karnataka land acquisition protest
4 जुलाई को मुख्यमंत्री के साथ बैठक, 10 दिन की मोहलत
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 4 जुलाई को आंदोलनकारियों की प्रतिनिधि समिति के साथ बैठक की। समिति में ‘संयुक्ता होराटा कर्नाटक’, संघर्ष समिति और अन्य समान विचारधारा वाले संगठनों के सदस्य मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतिम अधिसूचना पहले ही जारी हो चुकी है, इसलिए कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए उन्हें 10 दिन का समय चाहिए।
हालांकि किसानों का कहना है कि यह देरी अब असहनीय होती जा रही है और सरकार को वादा निभाना ही होगा। Karnataka land acquisition protest
‘सिद्धारमैया सरकार किसानों की वजह से बनी है’ – डॉ. सुनीलम
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने कहा,
“सिद्धारमैया सरकार को किसानों ने बनाया था, इसलिए अब उन्हें अपना वादा निभाना चाहिए। ज़मीन वापस देना उनका कर्तव्य है।”
टिकैत, युद्धवीर सिंह और प्रकाश राज का समर्थन
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और महासचिव युद्धवीर सिंह ने भी इस संघर्ष में किसानों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ ज़मीन का नहीं, आत्मसम्मान और हक़ का है। अभिनेता प्रकाश राज भी किसानों के साथ खड़े हुए और पुलिसिया कार्रवाई की निंदा की।
प्रदर्शनकारी किसानों की मांगें
13 गांवों से प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को तुरंत रद्द किया जाए।
KIADB के अधिसूचना आदेश को रद्द किया जाए।
पुलिस दमन की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो।
कृषि भूमि पर औद्योगिक ज़ोन लागू न किया जाए।
मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया वादा सार्वजनिक रूप से दोहराया जाए।
यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, एक चेतावनी है
इस आंदोलन में छात्रों, महिलाओं और मजदूर संगठनों की भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि यह केवल किसानों की लड़ाई नहीं है, बल्कि जनहित की रक्षा का युद्ध है। प्रदर्शनकारी बार-बार दोहरा रहे हैं –
"धरती हमारी मां है, उसे हम किसी की फैक्ट्री का आंगन नहीं बनने देंगे।"
Bihar Assembly Election 2025: बिहार की सियासत में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एक बड़ा ट्विस्ट देखने को मिल रहा है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। इस पेशकश ने बिहार के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर और तेजस्वी यादव से संपर्क साधकर इस गठबंधन की संभावनाओं को तलाशने की कोशिश की है। हालांकि, अभी तक RJD की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। इस बीच, सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह ओवैसी का सियासी मास्टरस्ट्रोक है या फिर केवल एक रणनीतिक दांव?
AIMIM का सियासी दांव: महागठबंधन में शामिल होने की पेशकश- Bihar Assembly Election 2025
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। AIMIM ने इस बार एक चौंकाने वाला कदम उठाया है और खुद को INDIA ब्लॉक का हिस्सा बनाने की पेशकश की है। इस कदम ने महागठबंधन के मौजूदा सहयोगी दलों में खलबली मचा दी है। महागठबंधन में पहले से ही छह दल शामिल हैं, जिनमें RJD, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिबरेशन), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय राष्ट्रीय लीग, और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शामिल हैं। इसके अलावा, मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) भी गठबंधन का हिस्सा बन चुकी है।
अब AIMIM की इस पेशकश और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की 12-13 सीटों की मांग ने सीट बंटवारे की चुनौतियों को और जटिल कर दिया है। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं, और गठबंधन के सहयोगी दलों की डिमांड पहले ही 196 सीटों तक पहुंच चुकी है। कांग्रेस 70, VIP 60, माले 42, और CPI 24 सीटों की मांग कर रही है, जबकि RJD खुद 138 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। ऐसे में AIMIM को शामिल करना गठबंधन के लिए आसान नहीं होगा।
ओवैसी का पत्र: सेक्युलर वोटों को एकजुट करने की अपील- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने 2 जुलाई को लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई। पत्र में उन्होंने 2020 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी पार्टी पहले भी गठबंधन में शामिल होने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बार AIMIM ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर सेक्युलर वोटों को एकजुट किया जाए तो बिहार में NDA को सत्ता से बेदखल किया जा सकता है।
ईमान ने कहा, “हमारी पार्टी NDA को हराने के लिए गंभीर है। अगर महागठबंधन हमें साथ लेता है, तो हम सेक्युलर वोटों का बिखराव रोक सकते हैं।” AIMIM ने RJD और कांग्रेस के कुछ विधायकों से भी संपर्क साधा है और इस प्रस्ताव को विचाराधीन बताया है। हालांकि, RJD और कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं आया है। Bihar Assembly Election 2025
महागठबंधन की दुविधा: AIMIM को शामिल करें या नहीं?- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM की इस पेशकश ने महागठबंधन के सामने एक बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है। एक तरफ, AIMIM को साथ लेने से मुस्लिम वोटों की मजबूत पकड़ मिल सकती है, खासकर सीमांचल क्षेत्र में, जहां AIMIM का प्रभाव है। दूसरी तरफ, सीट बंटवारे की पहले से ही जटिल स्थिति और AIMIM के ‘कट्टरपंथी’ टैग की आशंका गठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। Bihar Assembly Election 2025
RJD और कांग्रेस लंबे समय से AIMIM को BJP की ‘B टीम’ कहकर निशाना साधते रहे हैं। तेजस्वी यादव ने कई मौकों पर ओवैसी पर NDA के लिए वोट काटने का आरोप लगाया है। ऐसे में AIMIM को गठबंधन में शामिल करना RJD के लिए जोखिम भरा हो सकता है। अगर AIMIM को शामिल नहीं किया गया, तो सीमांचल में मुस्लिम वोटों का बिखराव NDA को फायदा पहुंचा सकता है। Bihar Assembly Election 2025
सीमांचल में AIMIM की ताकत- Bihar Assembly Election 2025
बिहार की सियासत में सीमांचल का इलाका मुस्लिम वोटों के लिहाज से बेहद अहम है। 2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा और 5 सीटों (अमौर, बहादुरगंज, बैसी, जोकीहाट, और कोचाधामन) पर जीत हासिल की। पार्टी को कुल 5,23,279 वोट (1.24% वोट शेयर) मिले थे। हालांकि, बाद में AIMIM के चार विधायक RJD में शामिल हो गए थे, लेकिन सीमांचल में पार्टी की जमीनी पकड़ बनी रही। Bihar Assembly Election 2025
2024 के लोकसभा चुनाव में AIMIM ने 8 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 3,82,660 वोट (0.9% वोट शेयर) हासिल किए। ओवैसी ने हाल ही में किशनगंज दौरे पर कहा था कि उनकी पार्टी 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और 24 सीटें जीतने का लक्ष्य रखेगी। यह बयान तेजस्वी यादव के लिए एक खुली चुनौती माना जा रहा है। Bihar Assembly Election 2025
ओवैसी की रणनीति: हिस्सेदारी या दिखावा?- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM की इस पेशकश को सियासी जानकार दो तरह से देख रहे हैं। कुछ का मानना है कि ओवैसी वाकई NDA को हराने के लिए महागठबंधन के साथ गंभीरता से काम करना चाहते हैं। दूसरी ओर, कुछ इसे एक रणनीतिक दांव मान रहे हैं, जिससे ओवैसी ‘BJP की B टीम’ के आरोपों से बच सकें। अगर AIMIM को गठबंधन में शामिल नहीं किया गया, तो ओवैसी इसका इस्तेमाल विपक्ष को घेरने के लिए कर सकते हैं। Bihar Assembly Election 2025
ओवैसी ने कहा, “हम हिस्सेदारी चाहते हैं, गुलामी नहीं। मुस्लिम वोटर अब सिर्फ वोट ट्रांसफर का जरिया नहीं बनना चाहते।” यह बयान RJD और तेजस्वी यादव के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि AIMIM सत्ता में बराबर की भागीदारी चाहती है।
महागठबंधन में दरारें- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM की पेशकश के बीच महागठबंधन के भीतर पहले से ही तनाव दिख रहा है। JMM ने 12-13 सीटों की मांग की है और इस बात से नाराज है कि उसे अब तक किसी बैठक में शामिल नहीं किया गया। कांग्रेस ने भी स्पष्ट किया है कि AIMIM ने उन्हें कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने कहा, “ओवैसी ने हमें कोई ऑफर नहीं दिया। यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए।” Bihar Assembly Election 2025
वहीं, RJD नेता मृत्यंजय तिवारी ने कहा, “AIMIM का ट्रैक रिकॉर्ड BJP की B टीम का रहा है, लेकिन अब जब उन्होंने महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है, तो इसका फैसला लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव लेंगे।” Bihar Assembly Election 2025
महागठबंधन के सामने अब यह सवाल है कि क्या AIMIM को शामिल करना फायदेमंद होगा। सीमांचल में AIMIM की मौजूदगी से मुस्लिम वोटों को एकजुट किया जा सकता है, जो NDA के खिलाफ एक मजबूत रणनीति हो सकती है। लेकिन अगर सीट बंटवारे में असंतुलन हुआ, तो गठबंधन के सहयोगी दलों में नाराजगी बढ़ सकती है।
दूसरी तरफ, अगर AIMIM अकेले चुनाव लड़ती है, तो वह सीमांचल की 24-30 सीटों पर प्रभाव डाल सकती है, जिससे RJD और कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। 2020 में AIMIM की वजह से RJD को सीमांचल में कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले AIMIM की पेशकश ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। ओवैसी की यह रणनीति महागठबंधन के लिए एक अवसर और चुनौती दोनों है। अगर गठबंधन AIMIM को शामिल करता है, तो मुस्लिम वोटों की एकजुटता से NDA को कड़ी टक्कर दी जा सकती है। लेकिन अगर AIMIM को दरकिनार किया गया, तो वोटों का बिखराव गठबंधन की हार का कारण बन सकता है। अब गेंद लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के पाले में है। क्या वे इस सियासी दांव को स्वीकार करेंगे या इसे ठुकराकर अपनी रणनीति पर कायम रहेंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।
सोनभद्र/मनोज कुमार SONBHADRA CONGRESS PROTESTS: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे विद्यालयों के विलय कार्यक्रम के खिलाफ अब विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। इसी क्रम में 4 जुलाई को सोनभद्र में कांग्रेस पार्टी ने ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन जिला अध्यक्ष रामराज गोंड़ के नेतृत्व में हुआ, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय में सौंपा। SONBHADRA CONGRESS PROTESTS
🔴 सोनभद्र से बड़ी खबर
🔴 कांग्रेस का प्रदर्शन, 🔴 विद्यालयों के विलय के खिलाफ कलेक्ट्रेट में नारेबाजी, 🔴 राज्यपाल के नाम सौंपा गया ज्ञापन, 🔴 सरकार के फैसले को बताया शिक्षा विरोधी, 🔴 मिड-डे मील कर्मचारियों की नौकरी पर संकट का आरोप, 🔴 विलय का फैसला वापस लेने की मांग पर… pic.twitter.com/GRC06KLu0i
कांग्रेस का विरोध: संविधान और अधिकारों के खिलाफ़- SONBHADRA CONGRESS PROTESTS
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह निर्णय संविधान की मूल भावना और बच्चों के शिक्षा के अधिकार के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों के विलय से न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी, बल्कि इससे जुड़े मिड डे मील कर्मचारियों, शिक्षकों और अभिभावकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। SONBHADRA CONGRESS PROTESTS
कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामराज गोंड़ ने कहा –
"सरकार का यह फैसला शिक्षा के क्षेत्र में भारी अव्यवस्था और असमानता को जन्म देगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही सुविधाओं की कमी है, और अब स्कूलों को बंद कर बच्चों को दूर भेजा जा रहा है।"
🔹 मिड-डे-मील व रोजगार पर संकट
प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि विद्यालयों के विलय से मिड-डे-मील योजना में कार्यरत हजारों रसोइयों और सहयोगियों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। कई स्कूलों में ताले लग चुके हैं और कर्मचारियों को हटाया जा रहा है। वहीं ग्रामीण इलाके के छात्रों को स्कूल पहुंचने में दूरी, सुरक्षा और सुविधा से समझौता करना पड़ रहा है।
वक्ताओं ने मांग की कि सरकार को यह फैसला तत्काल वापस लेना चाहिए और इसकी जगह नए स्कूल खोलकर शिक्षा को सुलभ बनाया जाना चाहिए।
🔹 मांग पत्र में शामिल प्रमुख बिंदु:-
प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों के विलय का निर्णय रद्द किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में नये स्कूल खोले जाएं।
मिड डे मील से जुड़े कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित की जाए।
शिक्षा के अधिकार को प्रभावित करने वाले निर्णयों को लोकतांत्रिक संवाद के माध्यम से लिया जाए।
🔹 शांतिपूर्ण प्रदर्शन, भारी सुरक्षा
प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से नारेबाजी की और सरकार के फैसले की आलोचना की।
जिलाधिकारी कार्यालय में ओएसडी के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें स्पष्ट रूप से सरकार के निर्णय को वापस लेने की अपील की गई।
UP CABINET MEETING: उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में 30 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई है, जिनमें सबसे प्रमुख रोजगार प्रोत्साहन नीति और यूपी रोजगार मिशन की मंजूरी रही। यह पहली बार है जब राज्य सरकार विदेशों में भी युवाओं को रोजगार दिलाने की पहल करने जा रही है। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे, महिला सशक्तिकरण, औद्योगिक विकास, डिजिटल फाइनेंस और शिक्षा के क्षेत्र में भी कई बड़े निर्णय लिए गए हैं। UP CABINET MEETING
🔹 अब विदेशों में भी मिलेगा रोजगार, बनेगा नया रोजगार मिशन- UP CABINET MEETING
यूपी की योगी सरकार ने अब देश के साथ-साथ विदेशों में भी युवाओं को रोजगार दिलाने का बीड़ा उठाया है। श्रम और सेवायोजन विभाग के प्रस्तावों के अंतर्गत ‘यूपी रोजगार मिशन’ का गठन किया गया है, जिसके तहत हर साल 30-35 हजार बेरोजगारों को विदेशों में और करीब 1 लाख युवाओं को भारत में रोजगार दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह पहली बार है जब राज्य सरकार विदेश में नौकरी दिलाने की ज़िम्मेदारी निभाएगी। अब तक यह सुविधा केवल निजी एजेंसियों के माध्यम से ही संभव थी। UP CABINET MEETING
🔹 रोजगार प्रोत्साहन नीति: अलग-अलग उद्योगों को मिलेगी सब्सिडी- UP CABINET MEETING
कैबिनेट बैठक में रोजगार बढ़ाने की दृष्टि से नई नीति लागू की गई है। इसके तहत अलग-अलग उद्योगों को सब्सिडी दी जाएगी, जिससे प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कुछ बड़ी कंपनियों को विशेष रियायतें दी जाएंगी ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें। UP CABINET MEETING
🔹 आगरा-लखनऊ को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा लिंक रोड
सरकार ने 4776 करोड़ रुपए की लागत से 50 किलोमीटर लंबा लिंक एक्सप्रेसवे बनाने की मंजूरी दी है, जो आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। इससे पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच यातायात और कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे व्यापार और उद्योग को भी फायदा मिलेगा। UP CABINET MEETING
बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिए सरकार ने बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण को मंजूरी दी है। इसके तहत एक रेग्युलेशन पॉलिसी बनाई गई है, जिससे वहां के संसाधनों का औद्योगिक रूप से बेहतर उपयोग हो सकेगा। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर नौकरी के अवसर मिलेंगे।
🔹 महिला श्रमिकों को मिला अधिकार, 29 फैक्ट्रियों से हटा प्रतिबंध
अब महिलाएं उन 29 प्रकार की फैक्ट्रियों में भी काम कर सकेंगी, जहां पहले उनके काम करने पर रोक थी। राज्य सरकार का यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान में केवल 5% महिलाएं ही कारखानों में काम कर रही हैं। यह संख्या अब बढ़ने की उम्मीद है।
🔹 NSG को दी जाएगी अयोध्या में भूमि- UP CABINET MEETING
कैबिनेट ने अयोध्या में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) को 99 वर्षों की लीज पर भूमि देने की मंजूरी दी है। यह जमीन अयोध्या कैंट के पास नजूल भूमि के अंतर्गत आती है और इसका कुल क्षेत्रफल 8 एकड़ है।
🔹 JPNIC की जिम्मेदारी अब LDA के पास- UP CABINET MEETING
जेपी सेंटर (JPNIC) की जिम्मेदारी अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंपी गई है। इसके संचालन और मरम्मत के लिए अगले 30 वर्षों में 821 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पहले इसकी जिम्मेदारी एक सोसायटी के पास थी, जिसे अब भंग कर दिया गया है।
🔹 यूपी बजट व्यवस्था अब डिजिटल- UP CABINET MEETING
उत्तर प्रदेश में अब पूरा बजट प्रबंधन सिस्टम ऑनलाइन किया जाएगा। इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल सिस्टम के माध्यम से सरकार की वित्तीय पारदर्शिता और कार्यप्रणाली और मजबूत होगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए वन टाइम टैक्स (2.5%) की नई व्यवस्था लागू की गई है।
Mayawati on Shahuji Maharaj: लखनऊ (उत्तर प्रदेश): बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यूपी सरकार से चट्रपति शाहू जी महाराज मेडिकल यूनिवर्सिटी का नाम बहाल करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि यह यूनिवर्सिटी सपा सरकार के कार्यकाल में राजनीतिक दुर्भावना से King George Medical University नाम से पुनः नामित की गई थी, जो समाज के पिछड़े और दलित वर्गों के सम्मान के खिलाफ है।
कोल्हापुर, महाराष्ट्र रियासत में दलितों को नौकरी में आरक्षण देने का क्रान्तिकारी क़दम उठाकर भारत में आरक्षण के जनक के रूप में अमर हो जाने वाले राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज को आज उनकी जयंती पर शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित तथा उनके समस्त अनुयाइयों को हार्दिक बधाई एवं…
मायावती ने कहा कि शाहूजी महाराज ने भारत में आरक्षण की नींव रखी थी, और उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। “वे इतिहास में अमर हैं क्योंकि उन्होंने पहली बार दलितों को नौकरियों में आरक्षण देकर सामाजिक न्याय की बुनियाद रखी।” Mayawati on Shahuji Maharaj
“दलितों को फिर से बनाया जा रहा मजबूर”
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मायावती ने दावा किया कि आज भी देश में दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी की सरकार न होने और बहुसंख्यक वर्ग के हाथों सत्ता में आने से इन्हें फिर से मजबूर और बेबस बना दिया गया है।
मायावती ने यह भी कहा कि ऐसे समय में राजर्षि शाहू जी महाराज की विचारधारा को याद रखना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
“हमने शाहूजी के नाम पर जिला बनाया, मूर्तियां स्थापित कीं”
मायावती ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि बसपा सरकार ने शाहू जी महाराज के सम्मान में नया जिला, संस्थान और भव्य प्रतिमाएं स्थापित की थीं। साथ ही लखनऊ में मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना कर उसे उन्हीं के नाम पर जल्द संचालन में लाया गया था।
मायावती ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार ने जानबूझकर दलित-विरोधी रवैये से यूनिवर्सिटी का नाम बदल दिया, जबकि लखनऊ में पहले से King George Medical College मौजूद है। उन्होंने इसे “जातिवादी और दुर्भावनापूर्ण निर्णय” करार दिया।
उन्होंने बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “बीजेपी सरकार ने अब तक इस गलती को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है”।
शाहूजी की विरासत को बहाल करें: मायावती
मायावती ने जोर देकर कहा कि यदि सरकार सही मायनों में सामाजिक न्याय की बात करती है, तो उसे तत्काल प्रभाव से चट्रपति शाहू जी महाराज मेडिकल यूनिवर्सिटी का नाम बहाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी यह मांग करती रही है और आगे भी करती रहेगी।
CR PATIL PRAISES MODI: केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 11 वर्षों में हुए व्यापक और समावेशी विकास की सराहना की। उन्होंने कहा कि हर वर्ग को इस सरकार से कुछ सार्थक मिला है – चाहे वह किसान हो, महिला, युवा या वैज्ञानिक। CR PATIL PRAISES MODI
उन्होंने जोर देकर कहा कि 2014 में भारत 11वीं अर्थव्यवस्था था और अब दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, और अब चौथे पायदान की ओर बढ़ रहा है।CR PATIL PRAISES MODI
किसानों को बिना आवेदन मिला सम्मान- CR PATIL PRAISES MODI
सीआर पाटिल ने बताया कि पहले किसानों को सरकारी सहायता के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन मोदी सरकार ने पहली बार किसानों को सीधे सम्मान देने का काम किया। पीएम किसान सम्मान योजना के तहत सालाना ₹6000 सीधे बैंक खातों में पहुंच रहे हैं। CR PATIL PRAISES MODI
उन्होंने कहा, “पहले Annadata को सहायता पाने के लिए भीख मांगनी पड़ती थी, आज उन्हें बिना आवेदन सम्मानपूर्वक सहायता मिल रही है।”
विज्ञान से सुरक्षा तक, हर मोर्चे पर सफल भारत- CR PATIL PRAISES MODI
सीआर पाटिल ने चंद्रयान मिशन की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने न केवल ज़मीन पर, बल्कि अंतरिक्ष में भी विजय पताका फहराई है। उन्होंने वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि सरकार का समर्थन हमेशा उनके साथ है। CR PATIL PRAISES MODI
सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और आतंकवादियों को कड़ा संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा, “पहालगाम में हुई कार्रवाई ने साबित कर दिया कि भारत अब हर हमले का जवाब सख्ती से देता है। हम गीदड़ भभकियों से डरने वाले नहीं हैं।”
जल जीवन मिशन और जन भागीदारी
उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के लिए ₹501 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है और जल संरक्षण पर जन भागीदारी से काम किया जा रहा है। गुजरात के बनासकांठा जिले में 35 जल पुनर्स्थापना संरचनाएं जनता की मदद से बनाई गई हैं। CR PATIL PRAISES MODI
सिंधु जल संधि पर रुख साफ
जब सिंधु जल संधि पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं सीधे तौर पर इस विषय से नहीं जुड़ा हूं, लेकिन भारत सरकार जो भी फैसला लेती है, वह देशहित में ही होता है।” CR PATIL PRAISES MODI
बचपन की यादें और प्रेरणा
सीआर पाटिल ने भावुक होते हुए अपने बचपन की बात साझा की कि वो आर्किटेक्ट बनना चाहते थे, लेकिन उनके पिता ने उन्हें वकालत की राह पर आगे बढ़ाया क्योंकि स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण वह खुद वकील नहीं बन पाए थे।
रिपोर्ट: अशोक चौहान Kanpur Dehat News: उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह अपने एक दिवसीय दौरे पर कानपुर देहात पहुंचे, जहां उन्होंने नगर पंचायत अकबरपुर में नमस्ते चौराहा और बस स्टैंड का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) और अखिलेश यादव पर तीखे शब्दों में हमला बोला।
🔴 ब्रेकिंग न्यूज़ | कानपुर देहात 📍 परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह का दौरा, कई कार्यक्रमों में हुए शामिल, सपा पर बोला तीखा हमला ▪️ एक दिवसीय दौरे पर कानपुर देहात पहुंचे यूपी के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ▪️ अकबरपुर कस्बे में नमस्ते चौराहा और बस स्टैंड का किया लोकार्पण ▪️ अखिलेश यादव… pic.twitter.com/4boGwQoYGU
🏗️ कार्यक्रमों में शिरकत, विकास कार्यों का लोकार्पण– Kanpur Dehat News
दयाशंकर सिंह ने अकबरपुर नगर पंचायत में बनकर तैयार हुए नमस्ते चौराहा और बस स्टैंड का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद गांव-गांव तक यातायात और परिवहन की सुविधाएं बेहतर करना है।
🗣️ सपा प्रमुख पर निशाना– Kanpur Dehat News
अखिलेश यादव के 2027 में महिलाओं को टिकट और रोजगार देने के वादे पर कटाक्ष करते हुए मंत्री ने कहा:
“अखिलेश यादव को सबसे पहले परिवार से बाहर निकलना चाहिए। सपा में 24 सीटें परिवार के लिए रिजर्व हैं। अगर कोई और राजनीति करना चाहता है, तो 25वें नंबर से शुरुआत करनी होगी।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को पहले दो दर्जन सीटों के भीतर भी महिलाओं को टिकट देने की हिम्मत करनी चाहिए।
कानपुर देहात पहुंचे यूपी के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह (फोटो- नेशन नाउ समाचार)
तीन विधायकों के निष्कासन पर प्रतिक्रिया– Kanpur Dehat News
समाजवादी पार्टी द्वारा तीन विधायकों के निष्कासन पर परिवहन मंत्री ने कहा कि सपा अब सिमटती जा रही है।
“जो लोग मुलायम सिंह यादव के साथ संघर्ष करते हुए पार्टी में आए थे, वे अब दूसरे दलों में शामिल हो रहे हैं। यह दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी अंदर से बिखर रही है।”
सपा में टूट की ओर इशारा– Kanpur Dehat News
दयाशंकर सिंह ने आगे कहा कि सपा अब वैचारिक रूप से कमजोर हो चुकी है। पार्टी में संघर्ष करने वाले नेताओं की जगह वंशवाद हावी हो गया है, यही वजह है कि लगातार सपा के वरिष्ठ नेता और विधायक पार्टी को छोड़ रहे हैं।
अकबरपुर कस्बे में नमस्ते चौराहा और बस स्टैंड का किया लोकार्पण (फोटो- नेशन नाउ समाचार)
परिवहन विभाग की उपलब्धियां- Kanpur Dehat News
दयाशंकर सिंह ने अपने विभाग की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग ने पिछले कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया है और विभाग को लाभकारी बनाया है। ओवरलोडिंग और डग्गामारी जैसे मुद्दों पर सख्ती बरतने से विभाग ने अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया है। इसके अलावा, पीपीपी मॉडल के तहत बस स्टेशनों के कायाकल्प की योजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
कानपुर देहात के लिए भविष्य की योजनाएं- Kanpur Dehat News
मंत्री ने कानपुर देहात के लिए भविष्य की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में और अधिक परियोजनाएं शुरू की जाएंगी, जिनमें सड़क, परिवहन और बुनियादी ढांचे से संबंधित कार्य शामिल हैं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए कि सभी कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे किए जाएं।
स्थानीय लोगों ने परिवहन मंत्री के दौरे और परियोजनाओं के उद्घाटन का स्वागत किया। अकबरपुर के निवासियों का कहना है कि नमस्ते चौराहा और बस स्टैंड के शुरू होने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में सुधार होगा। एक स्थानीय निवासी, रमेश कुमार, ने कहा, “हमारे क्षेत्र में इतने बड़े स्तर पर विकास कार्य हो रहे हैं, यह देखकर खुशी होती है। मंत्री जी का दौरा और उनकी सक्रियता हमें भरोसा देती है कि सरकार हमारे साथ है।”
Akhilesh Yadav action: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने तीन प्रमुख विधायकों – अमेठी की गौरीगंज सीट से राकेश प्रताप सिंह, रायबरेली की ऊंचाहार सीट से मनोज पांडेय और अयोध्या की गोसाईगंज सीट से अभय सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह फैसला सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लिया, जिन्होंने इन विधायकों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ नजदीकी बढ़ाने का आरोप लगाया। यह कदम सपा की विचारधारा और अनुशासन को बनाए रखने की दिशा में एक मजबूत संदेश माना जा रहा है।
समाजवादी सौहार्दपूर्ण सकारात्मक विचारधारा की राजनीति के विपरीत साम्प्रदायिक विभाजनकारी नकारात्मकता व किसान, महिला, युवा, कारोबारी, नौकरीपेशा और ‘पीडीए विरोधी’ विचारधारा का साथ देने के कारण, समाजवादी पार्टी जनहित में निम्नांकित विधायकों को पार्टी से निष्कासित करती है:
बागी विधायकों की बीजेपी से बढ़ती नजदीकी- Akhilesh Yadav action
पिछले कुछ समय से ये तीनों विधायक सपा की विचारधारा से हटकर काम कर रहे थे। विशेष रूप से, 2024 के राज्यसभा चुनाव में इन विधायकों ने सपा के प्रत्याशियों के बजाय बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों को वोट दिया था। इस क्रॉस वोटिंग ने सपा के तीसरे उम्मीदवार आलोक रंजन की हार का कारण बना, जबकि बीजेपी के आठवें उम्मीदवार संजय सेठ को जीत मिली। इस घटना ने सपा के भीतर गहरी नाराजगी पैदा की थी।
इसके अलावा, हाल ही में इन तीनों विधायकों की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी थी। यह मुलाकात उस समय हुई जब बीजेपी उत्तर प्रदेश में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की रणनीति बना रही थी। सपा ने इसे पार्टी के मूल सिद्धांतों के खिलाफ माना और इन विधायकों को निष्कासित करने का फैसला लिया।
सपा का सख्त रुख: विचारधारा से कोई समझौता नहीं- Akhilesh Yadav action
समाजवादी पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर बयान जारी करते हुए कहा कि इन विधायकों ने “सांप्रदायिक, विभाजनकारी और नकारात्मक विचारधारा” का समर्थन किया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि ये विधायक किसान, महिला, युवा, कारोबारी, नौकरीपेशा और सपा की ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) विचारधारा के खिलाफ काम कर रहे थे।
सपा ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि इन विधायकों को सुधार का मौका दिया गया था, लेकिन उनकी ‘अनुग्रह अवधि’ अब समाप्त हो चुकी है। पार्टी ने यह भी कहा कि भविष्य में भी जन-विरोधी और पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
सात बागी विधायकों में से तीन पर कार्रवाई- Akhilesh Yadav action
2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के सात विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। इनमें राकेश प्रताप सिंह, मनोज पांडेय, अभय सिंह, राकेश पांडेय, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्या शामिल थे। हालांकि, सपा ने अभी केवल तीन विधायकों को निष्कासित किया है। शेष चार विधायकों – राकेश पांडेय, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्या को सपा ने उनके हाल के व्यवहार में सुधार के आधार पर अभी और समय दिया है।
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि बाकी विधायकों ने पीडीए के प्रति अपनी आस्था दिखाई है, जिसके कारण उन्हें अभी पार्टी में रखा गया है। यह कदम सपा के रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें वह अपनी विचारधारा को बनाए रखने के साथ-साथ पार्टी के भीतर एकता को भी प्राथमिकता दे रही है।
बीजेपी के साथ नजदीकी: क्या होगा अगला कदम?- Akhilesh Yadav action
इन तीनों विधायकों की बीजेपी के साथ बढ़ती नजदीकी ने सवाल उठाए हैं कि क्या ये विधायक अब बीजेपी में शामिल होंगे। मनोज पांडेय पहले ही बीजेपी में शामिल हो चुके हैं, और राकेश प्रताप सिंह व अभय सिंह भी बीजेपी नेताओं के साथ सक्रिय रूप से संपर्क में थे। हालांकि, बीजेपी ने अभी तक इन विधायकों को कोई बड़ा ऑफर नहीं दिया है, और लोकसभा चुनाव में इन विधायकों की सीटों पर बीजेपी को कोई खास फायदा भी नहीं मिला।
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी इन विधायकों को विधान परिषद या अन्य छोटे पदों पर समायोजित करने पर विचार कर सकती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि क्या ये विधायक अपनी सीटों पर फिर से जीत हासिल कर पाएंगे। अगर इनकी विधानसभा सदस्यता रद्द होती है, तो उपचुनाव की स्थिति बन सकती है, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है।
सपा की रणनीति और भविष्य- Akhilesh Yadav action
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी अपनी विचारधारा और अनुशासन के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। 2027 के विधानसभा चुनाव और 2026 के पंचायत चुनाव को देखते हुए सपा ने संगठन में बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं। हाल ही में कुशीनगर को छोड़कर सभी जिलों की कार्यकारिणी भंग की गई है, ताकि एक व्यक्ति-एक पद के सिद्धांत को लागू किया जा सके।
यह कदम सपा की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अपनी छवि को और मजबूत करना चाहती है। अखिलेश यादव ने बार-बार जोर दिया है कि सपा सामाजिक न्याय, समानता और पीडीए की विचारधारा पर आधारित है। इस निष्कासन के जरिए सपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जो भी इस विचारधारा के खिलाफ जाएगा, उसे पार्टी में जगह नहीं मिलेगी।
समाजवादी पार्टी का यह सख्त कदम न केवल बागी विधायकों के लिए एक सबक है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत भी हो सकता है। राकेश प्रताप सिंह, मनोज पांडेय और अभय सिंह का निष्कासन सपा की विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब देखना यह होगा कि ये विधायक बीजेपी के साथ अपनी सियासी राह कैसे बनाते हैं और सपा इस स्थिति का फायदा उठाकर अपनी स्थिति को और मजबूत करने में कितनी सफल होती है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीजेपी का दबदबा बना हुआ है. योगी आदित्यनाथ (UP POLITICS 2027) की सख्त प्रशासनिक छवि, हिंदुत्व का एजेंडा और विकास कार्यों ने बीजेपी को मजबूत आधार दिया है. हालाँकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन (इंडिया गठबंधन) से कड़ी चुनौती मिली. फैजाबाद (अयोध्या) जैसी महत्वपूर्ण सीट पर सपा की जीत ने बीजेपी के हिंदुत्व कार्ड को झटका दिया. इसके अलावा, बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असंतोष जैसे मुद्दे विपक्ष के लिए अवसर बन रहे हैं.
सपा और कांग्रेस गठबंधन ने 2024 के उपचुनावों में भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे विपक्ष का मनोबल बढ़ा है. दूसरी ओर, बसपा का प्रभाव कमजोर हुआ है, और पार्टी हाशिए पर नजर आ रही है. छोटे दल, जैसे निषाद पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), भी अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हैं. सामाजिक समीकरणों, खासकर पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक वोटों की गतिशीलता, 2027 के लिए निर्णायक होगी. UP POLITICS 2027
योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश (Photo Credit- Social Media)
बीजेपी की रणनीति: हिंदुत्व, विकास और सामाजिक समीकरण
बीजेपी 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है. पार्टी का मुख्य फोकस हिंदुत्व और विकास के दोहरे एजेंडे पर है. 2025 में अहिल्याबाई होल्कर जन्मशती अभियान शुरू करके बीजेपी पिछड़े समुदायों को साधने की कोशिश कर रही है. यह अभियान 2.7 लाख कार्यकर्ताओं के साथ 8,135 न्याय पंचायतों में चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण स्तर पर संगठन को मजबूत करना है. UP POLITICS 2027
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भी बीजेपी की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. सपा के ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक’ (पीडीए) फॉर्मूले का जवाब देने के लिए आरएसएस हिंदू एकता और शाखाओं के विस्तार पर जोर दे रहा है. योगी सरकार के कार्यों, जैसे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे, को विकास के प्रतीक के रूप में प्रचारित किया जा रहा है. साथ ही, बीजेपी अपने विधायकों और मंत्रियों के कामकाज का ऑडिट कर रही है ताकि जनता में असंतोष को कम किया जा सके. UP POLITICS 2027
हालाँकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा-कांग्रेस गठबंधन की सफलता ने बीजेपी को सतर्क कर दिया है. पार्टी अब सवर्ण, गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है. निषाद पार्टी जैसे सहयोगियों के साथ संबंधों को संभालना भी बीजेपी के लिए चुनौती है, क्योंकि संजय निषाद ने 200 सीटों पर प्रभाव का दावा किया है. UP POLITICS 2027
अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश (Photo Credit- Social Media)
समाजवादी पार्टी: पीडीए और युवा जोश- UP POLITICS 2027
समाजवादी पार्टी, अखिलेश यादव के नेतृत्व में, 2027 में सत्ता वापसी के लिए पूरी ताकत लगा रही है. सपा का ‘पीडीए’ फॉर्मूला—पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक—2024 के लोकसभा और उपचुनावों में प्रभावी साबित हुआ. अखिलेश यादव ने दावा किया है कि 2027 में सपा के नेतृत्व में पीडीए की सरकार बनेगी. पार्टी जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और गठबंधन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है. UP POLITICS 2027
सपा की रणनीति में यादव और मुस्लिम वोटों का पारंपरिक आधार तो है ही, साथ ही गैर-यादव ओबीसी और दलित वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश हो रही है. 2024 में फैजाबाद सीट पर अवधेश प्रसाद की जीत ने सपा को दलित समुदाय में पैठ बनाने का मौका दिया. इसके अलावा, सपा बेरोजगारी, महंगाई और संविधान-आरक्षण जैसे भावनात्मक मुद्दों को उठाकर युवाओं और अल्पसंख्यकों को लुभाने की कोशिश कर रही है.UP POLITICS 2027
कांग्रेस के साथ गठबंधन सपा की रणनीति का केंद्र है. 2024 के उपचुनावों में दोनों दलों ने मिलकर बीजेपी को कड़ी टक्कर दी, और यह गठबंधन 2027 में भी जारी रहने की संभावना है. हालाँकि, सपा को गठबंधन में सीट बँटवारे और नेतृत्व के मुद्दों को सुलझाना होगा. UP POLITICS 2027
अजय राय, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस (Photo Credit- Social Media)
कांग्रेस: पुनर्जनन की राह- UP POLITICS 2027
कांग्रेस, जो लंबे समय से उत्तर प्रदेश में हाशिए पर रही, अब धीरे-धीरे अपनी स्थिति सुधार रही है. प्रियंका गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने 2022 के चुनावों में संगठन को मजबूत करने की कोशिश की थी, और 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा के साथ गठबंधन ने इसे नया जीवन दिया. कांग्रेस अब युवा नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है. UP POLITICS 2027
कांग्रेस की रणनीति सपा के साथ गठबंधन को बनाए रखने और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जोर देने की है. पार्टी दलित, अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग को लुभाने के लिए सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, जैसे बेरोजगारी और शिक्षा, पर फोकस कर रही है. साथ ही, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जैसे अभियानों का प्रभाव भी उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है. UP POLITICS 2027
हालाँकि, कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक कमजोरी और बड़े चेहरों की कमी है. प्रियंका गांधी की सक्रियता से पार्टी को कुछ हद तक मजबूती मिली है, लेकिन 2027 में वह कितनी सीटें जीत पाएगी, यह गठबंधन की रणनीति पर निर्भर करेगा.
मायावती, पूर्व सीएम, उत्तर प्रदेश (Photo Credit- Social Media)
बहुजन समाज पार्टी: अस्तित्व की लड़ाई
बसपा, जो कभी उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज थी, अब कमजोर स्थिति में है. 2024 के उपचुनावों में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, और यह सियासी हाशिए पर चली गई है. मायावती के नेतृत्व में बसपा अब आकाश आनंद जैसे युवा चेहरों को आगे लाकर नई ऊर्जा लाने की कोशिश कर रही है. UP POLITICS 2027
बसपा की रणनीति दलित वोटों को एकजुट करने और गैर-जाटव दलित समुदायों को आकर्षित करने पर केंद्रित है. पार्टी सवर्ण और ओबीसी वोटरों को लुभाने के लिए भी नए गठबंधन तलाश रही है. हालाँकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में बसपा का खाता न खुलना और उपचुनावों में कमजोर प्रदर्शन इसकी चुनौतियों को दर्शाता है. 2027 में बसपा के लिए सत्ता की राह मुश्किल है, लेकिन अगर मायावती प्रभावी गठबंधन बना पाएँ, तो वह कुछ सीटों पर आश्चर्यजनक प्रदर्शन कर सकती है.
क्या 2027 में बीजेपी की राजनीति बदलेगी?
बीजेपी की रणनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली चुनौती ने पार्टी को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है. पहले जहाँ बीजेपी का फोकस केवल हिंदुत्व पर था, अब वह सामाजिक समीकरणों को साधने और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है. अहिल्याबाई जन्मशती अभियान और आरएसएस की सक्रियता इस बदलाव का हिस्सा है.
बीजेपी को गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों को बनाए रखने की चुनौती है, क्योंकि सपा का पीडीए फॉर्मूला इन समुदायों को आकर्षित कर रहा है. इसके अलावा, निषाद पार्टी जैसे सहयोगियों की बढ़ती माँगें और छोटे दलों की सक्रियता बीजेपी के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर सकती हैं.
फिर सत्ता पर कबिज होंगे योगी आदित्यनाथ!
योगी आदित्यनाथ की सख्त प्रशासनिक छवि और हिंदुत्व के प्रतीक के रूप में उनकी लोकप्रियता बीजेपी के लिए सबसे बड़ा हथियार है. 2022 में बीजेपी ने उनके नेतृत्व में 255 सीटें जीतीं, जो दर्शाता है कि जनता में उनकी स्वीकार्यता बनी हुई है. बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि 2027 का चुनाव भी योगी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा.
हालाँकि, योगी के सामने कई चुनौतियाँ हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की सीटों में कमी और सपा-कांग्रेस गठबंधन की मजबूती ने सवाल उठाए हैं. अगर बीजेपी 2027 में बहुमत हासिल करती है, तो योगी का फिर से मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है, क्योंकि उनकी छवि और संगठन पर पकड़ मजबूत है. लेकिन अगर बीजेपी की सीटें कम होती हैं और गठबंधन सरकार बनती है, तो सहयोगियों की माँगों के चलते नेतृत्व पर विचार हो सकता है.
सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, जैसे बेरोजगारी और महंगाई, का असर भी योगी की छवि पर पड़ सकता है. फिर भी, उनके विकास कार्य, कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण और हिंदुत्व की अपील उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है. संभावना है कि अगर बीजेपी जीतती है, तो योगी 70-80% संभावना के साथ फिर से मुख्यमंत्री बन सकते हैं.