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Category: राजनीति

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  • ROHIT SHARMA MEETS CM FADNAVIS: क्या राजनीति में कदम रखने वाले हैं रोहित शर्मा? 11 महीने में दूसरी बार की CM फडणवीस से मुलाकात

    ROHIT SHARMA MEETS CM FADNAVIS: क्या राजनीति में कदम रखने वाले हैं रोहित शर्मा? 11 महीने में दूसरी बार की CM फडणवीस से मुलाकात

    मुंबई: भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान और देश के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक रोहित शर्मा (ROHIT SHARMA MEETS CM FADNAVIS) ने हाल ही में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी. उनके इस निर्णय के बाद क्रिकेट जगत से लेकर आम जनता तक, हर किसी ने उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं. लेकिन अब संन्यास के कुछ ही दिनों बाद रोहित एक बार फिर सुर्खियों में हैं- और इस बार वजह है उनकी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से दूसरी बार मुलाकात.

    यह मुलाकात केवल शिष्टाचार के दायरे में नहीं देखी जा रही है, बल्कि राजनीतिक हलकों में इसे संभावित राजनीतिक एंट्री के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. आइए जानें इस मुलाकात के मायने क्या हो सकते हैं, और क्या रोहित सचमुच राजनीति में कदम रखने की तैयारी कर रहे हैं?

    मुख्यमंत्री से दूसरी बार ‘वर्षा’ में मुलाकात

    रोहित शर्मा ने मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ पर मुलाकात की. इस बैठक की तस्वीरें खुद सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया पर साझा कीं. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा—

    “भारतीय क्रिकेटर रोहित शर्मा का मेरे निवास स्थान पर स्वागत करना मेरे लिए गर्व की बात है. मैंने उन्हें टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं.”

    ROHIT SHARMA MEETS CM FADNAVIS
    रोहित शर्मा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस (PHOTO- Devendra Fadnvis X Account)

    ध्यान देने वाली बात यह है कि यह मुलाकात पिछले 11 महीनों में दूसरी बार हुई है. इससे पहले रोहित 29 जून 2024 को टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद 5 जुलाई 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी ‘वर्षा’ में मिले थे.

    क्या राजनीति में आने की तैयारी?

    ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी क्रिकेटर के राजनीति में प्रवेश को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं. इससे पहले गौतम गंभीर, नवजोत सिंह सिद्धू, मोहम्मद अजहरुद्दीन, कीर्ति आज़ाद जैसे कई खिलाड़ी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं.

    अब जब रोहित शर्मा लगातार महाराष्ट्र के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं, तो यह सवाल उठना लाजमी है—क्या रोहित राजनीति में आने की भूमिका तैयार कर रहे हैं?

    विशेषज्ञ मानते हैं कि महाराष्ट्र में रोहित की लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा या अन्य दल उन्हें अपने पाले में लाना चाहेंगे. मुंबई में जन्मे और पले-बढ़े रोहित को यदि राजनीति में उतारा जाए, तो वह एक मजबूत ‘सेलिब्रिटी फेस’ साबित हो सकते हैं.

    रोहित-फडणवीस मुलाकात की तस्वीरों ने बढ़ाई हलचल

    मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा साझा की गई तस्वीरों में दोनों नेता एक-दूसरे से मुस्कुराते हुए बात कर रहे हैं. रोहित फॉर्मल कपड़ों में नजर आए, जो मुलाकात को औपचारिक और गंभीर संकेत देती है.

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस तरह की मुलाकातें सिर्फ औपचारिक नहीं होतीं. इनमें भविष्य की रणनीति, समाज सेवा के मार्ग, या पार्टी में भूमिका की संभावनाओं पर बातचीत संभव होती है. हालांकि, अब तक रोहित या उनके परिवार की ओर से राजनीति को लेकर कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया है.

    रोहित शर्मा का टेस्ट करियर – एक नजर

    रोहित शर्मा ने 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ कोलकाता में टेस्ट डेब्यू किया था. उन्होंने अपने पहले ही दो टेस्ट मैचों में शतक जमाकर खुद को साबित किया. हालांकि विदेशी दौरों में उनका प्रदर्शन स्थिर नहीं रहा, जिसके कारण उन्हें कई बार टीम से अंदर-बाहर होना पड़ा.

    • कुल टेस्ट मैच: 67
    • कुल रन: 4301
    • शतक: 12
    • अर्धशतक: 18
    • उच्चतम स्कोर: 212

    टेस्ट के अलावा रोहित वनडे और टी20 में भी एक शानदार करियर के लिए जाने जाते हैं. उनकी कप्तानी में भारत ने टी20 वर्ल्ड कप 2024 जीता था, जो उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है.

    सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

    सोशल मीडिया पर रोहित की इस मुलाकात को लेकर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है:

    • एक यूज़र ने लिखा, “अब रोहित मैदान से संसद की पिच पर नजर आएंगे?”
    • दूसरे ने लिखा, “फडणवीस से मुलाकात राजनीति की नई शुरुआत हो सकती है.”
    • वहीं कुछ फैंस चाहते हैं कि रोहित अभी क्रिकेट से पूरी तरह संन्यास न लें.

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    SOURCE- HINDUSTAN TIMES

  • आपरेशन सिंदूरः एक्शन अभी बाकी हैः राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री

    आपरेशन सिंदूरः एक्शन अभी बाकी हैः राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री

    नई दिल्ली भारत में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बड़ा राजनीतिक समर्थन देखने को मिल रहा है।
    सभी राजनीतिक दलों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की इस साहसिक कार्रवाई की सराहना की है।


    नई दिल्ली में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, जिसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन किया।
    इस बैठक में रक्षामंत्री ने सभी दलों के शीर्ष नेताओं को जानकारी दी कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है और भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों पर जोरदार प्रहार किया है।
    उन्होंने बताया कि मंगलवार रात हुए इन हमलों में लगभग 100 आतंकी मारे गए हैं।

    बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और अन्य प्रमुख दलों के शीर्ष नेता मौजूद थे।
    रक्षामंत्री ने यह भी साफ कर दिया कि अगर पाकिस्तान ने कोई और नापाक हरकत की, तो भारत उसे और भी कड़ा जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।

    यह सर्वदलीय समर्थन एक बार फिर दर्शाता है कि देश की सुरक्षा के मुद्दे पर पूरा भारत एकजुट है

  • लखनऊ: नेपाल सीमा से सटे जिलों में अवैध कब्जों और धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई- ACTION AGAINST MADRASAS

    लखनऊ: नेपाल सीमा से सटे जिलों में अवैध कब्जों और धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई- ACTION AGAINST MADRASAS

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने नेपाल सीमा से सटे जिलों में अवैध कब्जों और धार्मिक स्थलों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई (ACTION AGAINST MADRASAS) शुरू कर दी है. प्रदेश सरकार द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान में बहराइच, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती, पीलीभीत और महाराजगंज के जिलों में कई अवैध निर्माण सील किए गए हैं. इसके साथ ही अवैध धार्मिक संस्थानों पर भी कड़ी कार्रवाई की गई है.

    खासकर, बलरामपुर में 20 मदरसे चिन्हित (ACTION AGAINST MADRASAS) किए गए हैं, जो बिना किसी वैध दस्तावेज़ के संचालित हो रहे थे. इसी तरह बहराइच में 143 अतिक्रमण हटाए गए और 6 मदरसे सील किए गए हैं. सिद्धार्थनगर में 17 मदरसों और एक अवैध धार्मिक स्थल पर कार्रवाई की गई है. श्रावस्ती में 53 मदरसे सील किए गए और 151 पर बेदखली की कार्रवाई की गई. इसके अलावा, एक अवैध धार्मिक स्थल को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है. पीलीभीत जिले में 7 अवैध मदरसे और 77 अवैध धार्मिक स्थल मिले हैं, जिन पर कार्रवाई की गई है.

    कार्यवाही का उद्देश्य
    प्रदेश सरकार का यह कदम अवैध कब्जों और धार्मिक स्थलों के खिलाफ है, जो न केवल वक्फ कानून के खिलाफ हैं, बल्कि इनका अवैध निर्माण समाज में असामान्यता और सुरक्षा संबंधी समस्याएं उत्पन्न करता है. नेपाल सीमा से सटे इलाकों में इन अवैध निर्माणों के होने से सीमा सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने में भी खतरा पैदा हो रहा था. ऐसे में सरकार ने इसे रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की योजना बनाई है.

    अतिक्रमण हटाओ अभियान
    अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत इन जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर अवैध कब्जों को हटाया और अवैध निर्माणों को सील किया. इस अभियान के दौरान, सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया था. इसके अलावा, अधिकारियों ने सुनिश्चित किया कि किसी भी प्रकार के अन्य अवैध निर्माणों को ना बनने दिया जाए.

    धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई
    धार्मिक स्थलों की अवैध गतिविधियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है. प्रशासन ने उन मदरसों और धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई की, जो बिना किसी कानूनी स्वीकृति के चल रहे थे. ये कार्रवाई न केवल कानून की पालना सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थी, बल्कि समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण थी.

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  • इकदिल नगर पंचायत उपचुनाव: शांतिपूर्ण माहौल में 49% मतदान संपन्न, सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम- IKDIL NAGAR PANCHAYAT BYPOLL

    इकदिल नगर पंचायत उपचुनाव: शांतिपूर्ण माहौल में 49% मतदान संपन्न, सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम- IKDIL NAGAR PANCHAYAT BYPOLL

    इटावा: इकदिल नगर पंचायत में शुक्रवार को अध्यक्ष पद के लिए हुए उपचुनाव (IKDIL NAGAR PANCHAYAT BYPOLL) में कुल 49 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. सुबह मौसम खराब होने के कारण मतदान धीमी गति से शुरू हुआ, लेकिन जैसे ही मौसम में सुधार हुआ, मतदाताओं का उत्साह बढ़ा और मतदान केंद्रों पर भीड़ बढ़ती गई. बता दें, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष फूलन देवी के निधन के बाद यह सीट खाली हो गई थी, जिसको भरने के लिए इस उपचुनाव का आयोजन किया गया था. इस उपचुनाव में चार प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनके भाग्य का फैसला अब मतपेटियों में बंद हो गया है.

    शांतिपूर्ण और निष्पक्ष हुआ मतदान
    नगर पंचायत क्षेत्र में 14,202 पंजीकृत मतदाताओं के लिए प्रशासन ने 8 मतदान केंद्रों पर 17 बूथ बनाए थे. चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त सुरक्षा इंतजाम किए थे. सीसीटीवी निगरानी, मजिस्ट्रेटों की तैनाती और पुलिस बल की चाक-चौबंद व्यवस्था ने किसी भी तरह की अव्यवस्था को पनपने नहीं दिया.

    जिलाधिकारी ने लिया मतदान केंद्रों का जायजा
    जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल और पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्था का जायज़ा लिया और लोगों से निर्भय होकर मतदान करने की अपील की. उनके साथ कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर उपस्थित रहे.

    महिलाओं और युवाओं में दिखा उत्साह
    इस चुनाव की एक खास बात यह रही कि महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं में मतदान को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला. कई बूथों पर महिलाओं की लंबी कतारें नजर आईं, जो लोकतंत्र के प्रति लोगों की जागरूकता को दर्शाता है.

    चुनावी मुद्दे और प्रत्याशियों की रणनीति
    उपचुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के अलावा एक निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं. सभी प्रत्याशियों ने सफाई व्यवस्था, जल आपूर्ति, सड़क निर्माण, स्ट्रीट लाइट और स्थानीय प्रशासनिक समस्याओं को अपने प्रचार अभियान का हिस्सा बनाया. सोशल मीडिया के साथ-साथ घर-घर जनसंपर्क और नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास किया गया.

    मतपेटियां स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित
    मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के तुरंत बाद सभी ईवीएम और मतपेटियों को कड़ी सुरक्षा के बीच निर्धारित स्ट्रॉन्ग रूम में पहुंचा दिया गया है. इन पर 24 घंटे सुरक्षा बलों की निगरानी रहेगी. जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, मतगणना की तारीख और स्थान की जानकारी शीघ्र सार्वजनिक की जाएगी.

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  • एयर फोर्स का शक्ति प्रदर्शन: शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेस वे पर उतारे लड़ाकू विमान; मिराज, राफेल और जगुआर गरजे- INDIAN AIR FORCE

    एयर फोर्स का शक्ति प्रदर्शन: शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेस वे पर उतारे लड़ाकू विमान; मिराज, राफेल और जगुआर गरजे- INDIAN AIR FORCE

    शाहजहांपुर: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाक सीमा पर तनाव है. इस बीच भारतीय एयर फोर्स (INDIAN AIR FORCE) ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में शक्ति प्रदर्शन किया है. इंडियन एयरफोर्स ने शुक्रवार (2 मई) को गंगा एक्सप्रेस-वे पर बनी 3.5 किमी लंबी हवाई पट्टी पर राफेल, मिराज और जगुआर जैसे लड़ाकू विमानों की लैंडिंग कराई. इस दौरान
    गंगा एक्सप्रेस-वे पर एक ऐतिहासिक और रोमांचक दृश्य देखने को मिला. पहली बार इस एक्सप्रेस-वे पर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने सफलतापूर्वक लैंडिंग और टेक-ऑफ कर अपनी सामरिक ताकत और तकनीकी कुशलता का प्रदर्शन किया.

    गंगा एक्सप्रेस वे पर बनी है एयर स्ट्रिप
    यह ऐतिहासिक अभ्यास शाहजहांपुर जिले की जलालाबाद तहसील के पीरू गांव के पास, गंगा एक्सप्रेस-वे पर बनाई गई 3.5 किलोमीटर लंबी एयर स्ट्रिप पर हुआ. सुबह से ही हजारों लोगों की निगाहें आकाश की ओर थीं, जहां वायुसेना के लड़ाकू विमान आसमान को चीरते हुए अपने शौर्य का प्रदर्शन कर रहे थे. हालांकि, मौसम में थोड़ी रुकावट रही, जिससे कार्यक्रम देर से शुरू हुआ, लेकिन लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई.

    गंगा एक्सप्रेस-वे: विकास और रक्षा का संगम
    594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेस-वे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है. यह राज्य की आर्थिक और सामाजिक विकास यात्रा में एक मील का पत्थर है. वहीं, अब यह एक्सप्रेस-वे सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो गया है. अडानी ग्रुप द्वारा निर्मित यह हवाई पट्टी न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए सुरक्षा की दृष्टि से अहम साबित हो सकती है.

    https://twitter.com/UPGovt/status/1918207514539376863

    वैकल्पिक एयरबेस की तरह हो सकेगा इस्तेमाल
    विशेषज्ञों के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर यह रनवे वायुसेना के विमानों के लिए वैकल्पिक एयरबेस की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. खास बात यह है कि यह हवाई पट्टी चीन सीमा से मात्र 250 किलोमीटर दूर है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और भी बढ़ जाती है.

    राफेल, मिराज और हरक्यूलिस ने दिखाया दम
    इस ऐतिहासिक मौके पर वायुसेना के राफेल, मिराज और जगुआर जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया. इसके अलावा हरक्यूलिस और कैरियर एयरक्राफ्ट्स ने भी रनवे पर टच एंड गो लैंडिंग कर अपने संचालन कौशल का प्रदर्शन किया. आकाश में हुए करतब देखकर जनता रोमांचित हो उठी.

    स्कूली बच्चों समेत वीवीआईपी भी रहे मौजूद
    इस दौरान स्कूली बच्चे, स्थानीय जनप्रतिनिधि और कई वीवीआईपी भी मौजूद रहे. लोगों के बीच देशभक्ति की भावना और आत्मविश्वास झलक रहा था. यह दृश्य ऐसा था, जिसने न केवल उपस्थित जनसमूह को गर्व से भर दिया, बल्कि इस एक्सप्रेस-वे को राष्ट्रीय सुरक्षा के नक्शे पर भी स्थापित कर दिया.

    सुरक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर की नई परिभाषा
    यह पहली बार है जब उत्तर प्रदेश के किसी नवनिर्मित एक्सप्रेस-वे पर वायुसेना के युद्धाभ्यास को देखा गया है. यह इस बात का प्रमाण है कि अब भारत अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को सैन्य दृष्टिकोण से भी सुदृढ़ बना रहा है. आने वाले समय में इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल सैन्य अभ्यास के साथ-साथ आपदा राहत जैसे कार्यों में भी किया जा सकता है.

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  • नेशनल हेराल्ड केस: कोर्ट ने सोनिया-राहुल समेत 5 को भेजा नोटिस, 8 मई को होगी अगली सुनवाई- NATIONAL HERALD CASE

    नेशनल हेराल्ड केस: कोर्ट ने सोनिया-राहुल समेत 5 को भेजा नोटिस, 8 मई को होगी अगली सुनवाई- NATIONAL HERALD CASE

    नई दिल्ली: नेशनल हेराल्ड मामले में शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट (NATIONAL HERALD CASE) में अहम सुनवाई हुई. प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दाखिल चार्जशीट के आधार पर कोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और अन्य दो व्यक्तियों को नोटिस जारी किया है. इस चार्जशीट में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप शामिल हैं. कोर्ट ने यह नोटिस इसलिए जारी किया है ताकि यह तय किया जा सके कि चार्जशीट को स्वीकार किया जाए या नहीं.

    अधिकारियों को सुनना जरूरी: कोर्ट
    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चार्जशीट पर संज्ञान लेने से पहले आरोपियों का पक्ष सुनना जरूरी है. कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी आरोपी को अपना पक्ष रखने का अधिकार छीना नहीं जा सकता.

    ED ने जताई सहमति
    प्रवर्तन निदेशालय ने भी अदालत के इस फैसले का समर्थन किया और कहा कि उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है. ईडी ने बताया कि वह चाहती है कि मामले की सुनवाई निष्पक्ष रूप से हो. एजेंसी ने उदाहरण के रूप में कोयला घोटाले का मामला भी पेश किया, जहां सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को सुने बिना समन जारी करने पर निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी.

    8 मई को अगली सुनवाई
    अब कोर्ट 8 मई को अगली सुनवाई में तय करेगा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा शुरू किया जाए या नहीं. इस सुनवाई में सिर्फ नोटिस का जवाब और वकीलों की दलीलें सुनी जाएंगी, मामले की मेरिट्स पर अभी बहस नहीं होगी.

    क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?
    यह मामला कांग्रेस पार्टी से जुड़ी एक पुरानी कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से जुड़ा है, जो नेशनल हेराल्ड अखबार की मालिक है. प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने एक निजी कंपनी ‘यंग इंडियन’ के जरिए AJL की 99 फीसदी हिस्सेदारी केवल 50 लाख रुपये में हासिल कर ली, जबकि उस कंपनी की संपत्ति करीब 2000 करोड़ रुपये की थी.

    ED का दावा है कि इस सौदे के पीछे साजिश रची गई थी ताकि AJL की संपत्ति का लाभ निजी तौर पर उठाया जा सके. एजेंसी का यह भी कहना है कि यंग इंडियन कंपनी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नियंत्रण में है और इसका मकसद सिर्फ संपत्ति हड़पना था.

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  • लखनऊ: समाजवादी पार्टी के नए पोस्टर से राजनीति गरमाई, सड़कों पर उतरे भाजपाई- Akhilesh Yadav Poster Controversy

    लखनऊ: समाजवादी पार्टी के नए पोस्टर से राजनीति गरमाई, सड़कों पर उतरे भाजपाई- Akhilesh Yadav Poster Controversy

    लखनऊ: समाजवादी पार्टी के कार्यालय के बाहर लगे एक पोस्टर को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा हो गया है. लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यालय के बाहर लगे एक होर्डिंग (Akhilesh Yadav Poster Controversy) ने प्रदेश की सियासी फिजाओं को गरमा दिया है. इस पोस्टर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की आधी तस्वीर हटाकर उनकी जगह सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर लगा दी गई है. इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने कड़ा विरोध जताया है.

    सोमवार सुबह जब लोगों ने सपा कार्यालय के बाहर यह पोस्टर देखा, तो सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक विरोध की लहर फैल गई. बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने राजधानी लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया. बड़ी संख्या में कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए अखिलेश यादव से माफी की मांग कर रहे हैं. बीजेपी के नगर अध्यक्ष और विधायक नीरज बोरा के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए हैं. उनके हाथों में बैनर और पोस्टर हैं, जिन पर अखिलेश यादव के खिलाफ जमकर नारे लिखे हैं.

    एक महिला बीजेपी कार्यकर्ता ने कहा, “यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, हमारे संविधान और दलित सम्मान पर हमला है. अखिलेश यादव को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए.” वहीं एक अन्य कार्यकर्ता ने कहा कि सपा जानबूझकर दलित प्रतीकों का अपमान कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

    बसपा ने जताई कड़ी आपत्ति
    विवाद को और हवा तब मिली जब बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर डॉ. अंबेडकर के नाम और तस्वीरों का राजनीतिक इस्तेमाल बंद नहीं किया गया तो बसपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे. मायावती ने ट्वीट कर कहा, “डॉ. अंबेडकर की छवि से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी.”

    उधर, समाजवादी पार्टी ने पूरे विवाद को “राजनीतिक साजिश” करार दिया है. सपा प्रवक्ता का कहना है कि पोस्टर किसी आम समर्थक द्वारा लगाया गया है और पार्टी की इसमें कोई भूमिका नहीं है. उन्होंने कहा कि भाजपा और बसपा जानबूझकर इस मुद्दे को तूल दे रही हैं ताकि सपा की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके.

    यह विवाद न सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच टकराव को बढ़ा रहा है, बल्कि जातिगत भावनाओं को भी उकसा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले ऐसे मुद्दे राजनीतिक एजेंडों को धार देने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं. फिलहाल, लखनऊ में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है और पुलिस प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

  • नेपाल सीमा से सटे जिलों में योगी सरकार का बड़ा एक्शन, अवैध कब्जों और संस्थानों पर कार्रवाई तेज- YOGI GOVERNMENT ACTION

    नेपाल सीमा से सटे जिलों में योगी सरकार का बड़ा एक्शन, अवैध कब्जों और संस्थानों पर कार्रवाई तेज- YOGI GOVERNMENT ACTION

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने नेपाल सीमा से सटे जिलों में अवैध कब्जों और बिना मान्यता संचालित धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई (yogi government action) शुरू कर दी है. सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 25 से 27 अप्रैल के बीच विशेष अभियान चलाकर कई जिलों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटवाए गए. नेपाल सीमा के 10 किलोमीटर दायरे में किसी भी तरह के अवैध निर्माण को लेकर सरकार ने साफ संदेश दिया है कि अब कोई भी अनधिकृत कब्जा या गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

    बहराइच: सरकारी जमीन से कब्जे हटाए गए
    बहराइच जिले की नानपारा तहसील के अंतर्गत भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के 10 किलोमीटर क्षेत्र में सरकारी भूमि पर 227 अवैध अतिक्रमण के मामले चिन्हित किए गए थे. इनमें से पहले से हटाए गए 63 अतिक्रमणों के अलावा 25 से 27 अप्रैल के बीच 26 और अतिक्रमण हटवाए गए. अब तक कुल 89 अवैध कब्जेदारों से जमीन को मुक्त कराया जा चुका है. राहत की बात यह रही कि यहां किसी भी अतिक्रमित स्थल पर धार्मिक या शैक्षणिक संरचना नहीं मिली.

    श्रावस्ती: अवैध मदरसों पर कार्रवाई
    श्रावस्ती जिले में बिना मान्यता के संचालित 17 मदरसों पर कार्रवाई की गई है. तहसील जमुनहा में सात और भिनगा में 10 मदरसों को वैध कागजात न होने के कारण बंद करवा दिया गया. इसके अलावा भारत-नेपाल सीमा से सटे 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र में अस्थाई और स्थाई अवैध कब्जों के 119 मामलों में भी राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत कार्रवाई जारी है.

    सिद्धार्थनगर और महाराजगंज: धार्मिक ढांचों पर नजर
    सिद्धार्थनगर जिले के नौगढ़ तहसील क्षेत्र में पांच स्थानों पर अवैध अतिक्रमण के तहत मस्जिद और मदरसे के निर्माण की पुष्टि हुई है. उच्चाधिकारियों के निर्देश पर यहां जांच और आगे की कार्रवाई जारी है. वहीं, शोहरतगढ़ तहसील में छह स्थानों पर अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं.

    बलरामपुर: स्वतः कब्जा हटाने की पहल
    बलरामपुर जिले में सात अवैध कब्जे चिन्हित किए गए. इनमें बलरामपुर तहसील में पांच और तुलसीपुर तहसील में दो कब्जे शामिल हैं. इनमें से दो अवैध कब्जेदारों ने स्वतः कब्जा हटा लिया, जबकि बाकी मामलों में प्रशासन द्वारा राजस्व संहिता के तहत बेदखली की कार्रवाई की जा रही है.

    लखीमपुर खीरी: अवैध मस्जिद निर्माण रोका गया
    लखीमपुर खीरी जिले के तहसील पलिया के कृष्णा नगर कॉलोनी में खसरा नंबर 222 पर अनाधिकृत रूप से नमाज पढ़ी जा रही थी और मस्जिद बनाए जाने की योजना थी. प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस अवैध निर्माण को हटा दिया है. जिले के अन्य स्थानों पर भी लगातार चिन्हीकरण और कार्रवाई का सिलसिला जारी है.

    सख्ती का संदेश
    योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि नेपाल सीमा से सटे संवेदनशील इलाकों में किसी भी प्रकार के अतिक्रमण, धार्मिक या शैक्षणिक संस्थान के अवैध संचालन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सभी जिलों के प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि चिन्हित अवैध कब्जों को शीघ्रता से हटाकर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें. यह सख्ती न केवल सुरक्षा कारणों से उठाई गई है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से भी यह अभियान चलाया जा रहा है.