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  • कानपुर में छेड़छाड़ पर युवती का पलटवार, युवक की जीभ काटकर अलग की

    कानपुर में छेड़छाड़ पर युवती का पलटवार, युवक की जीभ काटकर अलग की

    कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां छेड़छाड़ की घटना के दौरान एक युवती ने आत्मरक्षा में ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। बिल्हौर क्षेत्र के दरियापुर गांव में एक युवक द्वारा जबरन किस करने के प्रयास पर युवती ने उसकी जीभ अपने दांतों से काटकर अलग कर दी। गंभीर रूप से घायल युवक को कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर किया गया है। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    बिल्हौर थाना प्रभारी अशोक कुमार सरोज के मुताबिक, दरियापुर निवासी 35 वर्षीय चंपी का गांव की एक युवती से प्रेम प्रसंग चल रहा था। लेकिन हाल ही में युवती की शादी कहीं और तय हो जाने के बाद उसने युवक से दूरी बना ली थी। इसी बात से नाराज और परेशान चंपी लगातार उससे मिलने की कोशिश कर रहा था।

    सोमवार की दोपहर युवती चूल्हा बनाने के लिए तालाब किनारे चिकनी मिट्टी लेने गई थी। मौके का फायदा उठाकर चंपी वहां पहुंच गया और युवती से जबरन छेड़छाड़ शुरू कर दी। विरोध करने पर वह नहीं माना और जोर-जबरदस्ती करते हुए जबरन किस करने लगा। संघर्ष के दौरान युवक की जीभ युवती के दांतों के बीच आ गई और युवती ने बिना देर किए उसे तेज दबाव से काट दिया, जिससे जीभ का एक हिस्सा कटकर अलग हो गया।

    चीख–पुकार सुनकर वहां से गुजर रहे ग्रामीण मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को देखा और तुरंत युवक के परिजनों को सूचना दी। परिजन चंपी और कटे हुए जीभ के हिस्से को लेकर पहले सीएचसी पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने हालत नाजुक देखते हुए उसे हैलट अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।पुलिस ने युवती की तहरीर पर छेड़छाड़, जबरदस्ती और मारपीट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि युवती ने आत्मरक्षा में कदम उठाया, क्योंकि युवक काफी समय से उसे परेशान कर रहा था।यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और महिलाओं की सुरक्षा तथा आत्मरक्षा के महत्व पर भी नई बहस पैदा कर रही है।

  • कानपुर देहात: दबंगों ने की रामकली मौसी की पिटाई, सामाजिक कार्यों के लिए CM योगी भी कर चुके हैं सराहना

    कानपुर देहात: दबंगों ने की रामकली मौसी की पिटाई, सामाजिक कार्यों के लिए CM योगी भी कर चुके हैं सराहना

    कानपुर देहात। जिले में एक बार फिर दबंगों का आतंक सामने आया है। क्षेत्र की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता रामकली मौसी पर दबंगों द्वारा की गई पिटाई का मामला तेजी से वायरल हो रहा है। रामकली मौसी पिछले कई वर्षों से समाजसेवा में सक्रिय हैं और उनके कार्यों की सराहना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल भी सार्वजनिक मंचों पर कर चुके हैं। ऐसे में उनके साथ हुई यह घटना स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रही है।

    घटना के अनुसार, इलाके में रहने वाले कुछ दबंगों ने किसी विवाद को लेकर रामकली मौसी के साथ मारपीट की। बताया जा रहा है कि उन्होंने न सिर्फ दुर्व्यवहार किया, बल्कि उन्हें गंभीर चोटें भी आईं। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है।

    रामकली मौसी लंबे समय से महिलाओं की सुरक्षा, गरीबों की सहायता और सामाजिक न्याय के लिए काम करती रही हैं। उनके कई अभियानों को सरकार स्तर पर भी सम्मानित किया गया है। यही वजह है कि उनके साथ हुई मारपीट की यह घटना पूरे क्षेत्र में आक्रोश का कारण बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दबंग काफी समय से इलाके में उत्पात मचा रहे हैं, लेकिन पुलिस की निष्क्रियता के कारण उनके हौंसले बुलंद हैं।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई अभी भी धीमी है और आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। लोगों ने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

    सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से ट्रेंड कर रहा है। हजारों लोग रामकली मौसी को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों ने भी आगे आकर प्रशासन से सुरक्षा उपलब्ध कराने की अपील की है।फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। जिले में बढ़ते दबंगई के मामलों को देखते हुए सवाल यह है कि क्या प्रशासन ऐसे मामलों पर तुरंत और कठोर कार्रवाई करेगा या फिर पीड़ितों को न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।

  • Scariest movie on Netflix- Netflix पर आई सबसे डरावनी फिल्म ‘Sumala’! जुड़वां बहनों की कहानी से दहशत फैल गई

    Scariest movie on Netflix- Netflix पर आई सबसे डरावनी फिल्म ‘Sumala’! जुड़वां बहनों की कहानी से दहशत फैल गई

    Scariest movie on Netflix – अगर आप हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं और स्क्रीन पर ऐसा खौफ देखना चाहते हैं जो दिल की धड़कनें तेज कर दे, तो इंडोनेशिया की सुपरनैचुरल फिल्म ‘Sumala’ इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। लगभग 1 घंटा 52 मिनट की इस फिल्म को देखने के बाद दर्शकों ने दावा किया है कि एक हफ्ते तक डर और अंधेरे की छाया दिमाग से नहीं निकलती। सोशल मीडिया पर फिल्म का नाम लगातार ट्रेंड कर रहा है और कई व्यूअर्स ने इसे अब तक की सबसे डरावनी फिल्मों में से एक बताया है।

    फिल्म की कहानी एक छोटे से गांव से शुरू होती है, जहां रात होते ही मौत का साया मंडराने लगता है। गांव के लोग डर और खौफ में जीने को मजबूर हैं क्योंकि यहां अंधेरा सिर्फ अंधेरा नहीं… बल्कि मौत का खेल बन चुका है। कहानी के केंद्र में दो जुड़वां बहनें हैं—समाला और कुमाला, जिनका किरदार पूरी फिल्म में दर्शकों की रूह कपा देता है।

    फिल्म के डायरेक्टर रिजाल मंतोवान्ती, जो हॉरर शैली के जाने-माने नाम हैं, ने इस कहानी को इतने तीखे और भयानक अंदाज में पेश किया है कि दर्शक कई सीन पर हनुमान चालीसा याद करने लगते हैं। फिल्म की स्टारकास्ट में दारियस सिनाथ्रिया, लूना माया, माकायला रोज हिली, डेनी रहमान और इवोने दलर जैसे कलाकार शामिल हैं, जिन्होंने अपने अभिनय से कहानी में असली खौफ भर दिया है।

    कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब यह खुलासा होता है कि जुड़वां बहनों में से एक बहन फिजीकली कमजोर है और दूसरी की मौत हो चुकी है। मरी हुई बहन की आत्मा पूजा-पाठ के दौरान सक्रिय हो जाती है और घर में अलौकिक शक्तियों का प्रवेश होता है। इसके बाद शुरू होता है बदले की वह श्रृंखला, जिसमें आत्मा लोगों के सिर तन से अलग कर देती है।

    फिल्म का क्लाइमेक्स इतना चौंकाने वाला है कि दर्शक अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पाते। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इसके सीन वायरल हो रहे हैं और लोग इसे “Risk लेकर देखने वाली फिल्म” बता रहे हैं।

    IMDb ने Sumala को 5.8/10 रेटिंग दी है और यह फिल्म Netflix पर हिंदी में भी उपलब्ध है, जिससे भारत में इसके व्यूअर्स तेजी से बढ़ रहे हैं।

    अगर आप हॉरर फिल्मों को confidently देख लेते हैं और डर का असली अनुभव पाना चाहते हैं, तो ‘Sumala’ जरूर देखें… लेकिन अपने रिस्क पर!

  • Benefits of Turmeric Milk: सर्दियों में हल्दी वाला दूध पीना क्यों है जरूरी? डाइटिशियन ने बताए बड़े फायदे

    Benefits of Turmeric Milk: सर्दियों में हल्दी वाला दूध पीना क्यों है जरूरी? डाइटिशियन ने बताए बड़े फायदे

    Benefits of Drinking Turmeric Milk: सर्दियों का मौसम अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं लेकर आता है—सर्दी-जुकाम, खांसी, थकान और कमजोरी इनमें सबसे आम हैं। ऐसे मौसम में शरीर को गर्माहट और सुरक्षा देने के लिए कई घरेलू उपाय अपनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक है हल्दी वाला दूध, जिसे आयुर्वेद में सोने का दूध भी कहा जाता है। मशहूर डाइटिशियन शिल्पा अरोड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर कर हल्दी दूध के कुछ खास फायदे बताए हैं, जिन्हें अपनाकर आप पूरे सीजन में अपनी इम्युनिटी को मजबूत रख सकते हैं।


    हल्दी वाला दूध क्यों पिएं? Benefits of Turmeric Milk

    1. इम्युनिटी को मजबूत बनाता है

    डाइटिशियन शिल्पा अरोड़ा बताती हैं कि हल्दी में मौजूद कर्क्यूमिन (Curcumin) एक शक्तिशाली एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सिडेंट कंपाउंड है। यह शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को खत्म करता है और सर्दी-जुकाम जैसी मौसमी बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है।हल्दी दूध नियमित रूप से पीने पर इम्युनिटी बेहतर होती है और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

    2. बेहतर नींद में मदद

    दूध में मौजूद ट्रिप्टोफैन दिमाग को शांत करता है और रिलैक्सेशन बढ़ाता है। वहीं हल्दी शरीर को हल्की गर्माहट देती है। दोनों का यह संयोजन नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।
    शिल्पा अरोड़ा के मुताबिक, जिन्हें अनिद्रा या रात में बार-बार नींद टूटने की समस्या हो, वे सोने से 30 मिनट पहले हल्दी वाला दूध जरूर पिएं।

    3. पाचन को सुधारता है

    हल्दी के एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं। हल्दी वाला दूध गैस, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याओं से राहत देता है। सर्दियों में भारी भोजन के बाद भी यह पाचन को आसान बनाता है।

    4. जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत

    ठंड के मौसम में जोड़ों की जकड़न और दर्द आम समस्या है। हल्दी का करक्यूमिन सूजन कम करता है और दर्द में राहत पहुंचाता है। बुजुर्गों और बुजुर्ग-देखभाल में यह विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है।

  • कानपुर: लुटेरी दुल्हन दिव्यांशी के कारनामे उजागर , दरोगा की शिकायत से खुली करोड़ों की ब्लैकमेलिंग गैंग की परतें

    कानपुर: लुटेरी दुल्हन दिव्यांशी के कारनामे उजागर , दरोगा की शिकायत से खुली करोड़ों की ब्लैकमेलिंग गैंग की परतें

    कानपुर : उत्तर प्रदेश में एक लुटेरी दुल्हन ने अपने जाल में दो बैंक मैनेजर, तीन सरकारी कर्मचारी और दो दरोगाओं समेत 12 से अधिक लोगों को फंसाकर करोड़ों रुपये हड़प लिए। इस हाई-प्रोफाइल ब्लैकमेलिंग रैकेट का मास्टरमाइंड बताई जा रही दिव्यांशी की गिरफ्तारी ने पुलिस विभाग में भी सनसनी मचा दी है।पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कानपुर के ग्वालटोली थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर आदित्य कुमार लोचव ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। दिव्यांशी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

    प्यार का जाल, फिर फर्जी रेप केस , ब्लैकमेलिंग का पूरा खेल

    पुलिस जांच में सामने आया कि दिव्यांशी पहले पुरुषों से संबंध बनाती थी, फिर उन पर फर्जी रेप केस दर्ज कराकर भारी रकम वसूलती थी। पुलिस रिकॉर्ड बताता है कि उसने दो बैंक मैनेजरों से शादी की और दोनों पर रेप केस दर्ज करायादोनों मामलों में बाद में कोर्ट में अपने बयान से पलट गई मेरठ में तैनात एक दरोगा से शादी कर उस पर भी रेप का केस दर्ज कराया तीन सरकारी कर्मचारियों को भी इसी तरीके से ब्लैकमेल किया ज्यादातर केस बाद में समझौते के बदले रकम लेकर खत्म किए गए

    दरोगा आदित्य से शादी के बाद बढ़ा शक

    बुलंदशहर निवासी 2019 बैच के दरोगा आदित्य की शादी दिव्यांशी से 17 फरवरी 2024 को हुई थी। शादी के बाद वह घर में नहीं रुकती थी और पढ़ाई का बहाना बनाकर बार-बार गायब रहती थी।आदित्य की गैरमौजूदगी में वह गूगल पे, फोन पे जैसे UPI ऐप डिलीट कर देती थी, जिससे किसी लेन-देन का रिकॉर्ड न रहे।

    मोबाइल चेक किया तो खुल गया करोड़ों का खेल

    एक दिन छुट्टी पर आए आदित्य ने जब उसका मोबाइल देखा तो वह बेचैन हो गई। जबरन UPI ऐप डाउनलोड कराने पर दस से ज्यादा खातों में करोड़ों के ट्रांजैक्शन मिले।सच उजागर होते ही वह घर छोड़कर मायके चली गई और 25 नवंबर 2024 को कानपुर कमिश्नरेट ऑफिस में हंगामा कर दिया। उसने आदित्य पर प्रताड़ना के झूठे आरोप लगाए और समझौते के नाम पर 1 करोड़ रुपये की मांग की।झूठे आरोपों और उत्पीड़न से परेशान दरोगा आदित्य दो बार आत्महत्या का प्रयास कर चुके थे।फिलहाल पुलिस दिव्यांशी से जुड़े सभी मामलों की पुनः जांच कर रही है। यह संभव है कि इस गिरोह के और भी सदस्य सामने आएं।

  • Azam Khan News : दो PAN कार्ड मामले में आज़म खान और बेटे अब्दुल्ला दोषी, कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सज़ा

    Azam Khan News : दो PAN कार्ड मामले में आज़म खान और बेटे अब्दुल्ला दोषी, कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सज़ा

    Azam Khan News: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री आज़म खान तथा उनके बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आज़म खान को कोर्ट ने दो पैनकार्ड मामले में दोषी करार दिया है। एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) के न्यायाधीश शोभित बंसल ने दोनों को सात साल की सज़ा सुनाई है। फ़ैसला सुनने के तुरंत बाद दोनों को हिरासत में ले लिया गया

    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज की गई उस प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आज़म ने दो अलग-अलग जन्मतिथि के आधार पर दो PAN कार्ड बनवाए।

    • पहले PAN कार्ड में जन्मतिथि — 1 जनवरी 1993
    • दूसरे PAN कार्ड में जन्मतिथि — 30 सितंबर 1990

    विधायक ने आरोप लगाया था कि कूटरचित और असत्य दस्तावेजों का उपयोग करके पैन कार्ड बनवाया गया और सरकारी प्रक्रियाओं में प्रस्तुत किया गया। पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल कर दिया था, जिसके बाद मामला स्पेशल कोर्ट में विचाराधीन था।

    कचहरी में बढ़ी हलचल

    फ़ैसले को लेकर कचहरी परिसर में सुबह से ही हलचल बढ़ गई थी। बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और सपा समर्थक कचहरी पहुंचने लगे थे। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए। पुलिस बल तैनात रहा और पूरे परिसर में सतर्कता बढ़ाई गई।

    सज़ा सुनते ही हिरासत

    कई दिनों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म को दोषी पाते हुए सज़ा सुना दी। दोनों को बांदा और सीतापुर जेल भेजे जाने की तैयारी चल रही है।

  • योगी सरकार का बड़ा फैसला: यूपी में अब 10 दिन बिना बैग के जाएंगे बच्चे, शुरू हुआ Bagless School Program

    योगी सरकार का बड़ा फैसला: यूपी में अब 10 दिन बिना बैग के जाएंगे बच्चे, शुरू हुआ Bagless School Program

    योगी सरकार का बड़ा फैसला -उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के लाखों बच्चों के लिए एक बड़ा और नवाचारपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए 10 दिन का Bagless School Program लागू कर दिया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कम करना और उन्हें तनावमुक्त, अनुभवात्मक और कौशल आधारित सीखने की ओर प्रेरित करना है।

    NEP 2020 के तहत बड़ा बदलाव

    यह पहल नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुसार शुरू की गई है, जिसमें कहा गया है कि बच्चों को केवल किताबों और कॉपी पर निर्भर न रखते हुए उन्हें गतिविधियों, प्रयोग, खेल और वास्तविक जीवन के अनुभवों के आधार पर सीखने के अवसर दिए जाएँ।यूपी सरकार का यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

    क्या होगा Bagless Day में?

    इन 10 बैगलेस दिनों में छात्र किसी भी प्रकार का स्कूल बैग नहीं लाएंगे किताब-कॉपी लाने की कोई बाध्यता नहीं होगीकक्षा में रोचक गतिविधियों आधारित शिक्षण कराया जाएगा विज्ञान, कला, संगीत, खेल, लोककला, स्थानीय उद्योग, प्रकृति भ्रमण और कौशल शिक्षा पर जोर होगाबच्चों को व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए स्थानीय कारीगर, खेल प्रशिक्षक, कलाकार और विशेषज्ञ बुलाए जा सकते हैं शिक्षा विभाग का कहना है कि इस कार्यक्रम से बच्चों में रचनात्मकता, सामाजिक कौशल, टीमवर्क, आत्मविश्वास और प्रैक्टिकल नॉलेज बढ़ेगा।

    माता-पिता और शिक्षकों में उत्साह

    बैगलेस दिनों की घोषणा के बाद शिक्षकों और अभिभावकों में भी उत्साह देखा जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह योजना बच्चों को पारंपरिक रटने वाली शिक्षा प्रणाली से निकालकर आधुनिक, लर्निंग-बाय-डूइंग मॉडल की ओर ले जाएगी।उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल देशभर में एक मॉडल के रूप में देखी जा रही है।

  • शेख हसीना को मौत की सजा: बांग्लादेश ICT ने मानवता के खिलाफ अपराध में दोषी ठहराया

    शेख हसीना को मौत की सजा: बांग्लादेश ICT ने मानवता के खिलाफ अपराध में दोषी ठहराया

    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है। जस्टिस गुलाम मुर्तजा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने 400 पन्नों में फैला ऐतिहासिक फैसला छह हिस्सों में सुनाया। इस मामले में शेख हसीना के साथ पूर्व गृह मंत्री और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (IGP) को भी फांसी की सजा दी गई है।

    फैसला आने के बाद ढाका समेत कई शहरों में तनाव बढ़ गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने कई इलाकों में धारा 144 लागू कर दी है और राजधानी को सैन्य सुरक्षा घेरे में रखा गया है। ICT ने अपने निर्णय में कहा कि हसीना के शासनकाल के दौरान विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया गया, मनमाने ढंग से हिरासत, राजनीतिक दमन और मानवाधिकारों का उल्लंघन बड़े पैमाने पर हुआ, जिसे “मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध” की श्रेणी में रखा गया।

    हसीना ने फैसले को बताया पक्षपाती और साजिशन

    फैसले के तुरंत बाद शेख हसीना की ओर से प्रतिक्रिया आई। उन्होंने कहा“मेरे खिलाफ आया फैसला गलत, पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित है।”हसीना ने यह भी आरोप लगाया कि यह मुकदमा उन्हें राजनीति से पूरी तरह बाहर करने और सत्ताधारी समूह को मजबूत करने की रणनीति है।

    देशभर में हिंसा, आगजनी और इंटरनेट प्रतिबंध

    फैसले के चलते ढाका सहित कई जिलों में हिंसात्मक घटनाएँ बढ़ गई हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी वाहनों में आग लगा दी, जबकि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, रबर बुलेट और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ आंशिक रूप से बंद कर दी गई हैं।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और आगे की प्रक्रिया

    अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है और मामले की पारदर्शी समीक्षा की मांग की है। हसीना के वकीलों ने कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।यह फैसला बांग्लादेश की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है और आने वाले दिनों में देश की स्थिरता और कानून व्यवस्था पर गंभीर चुनौती खड़ी कर सकता है।

  • कानपुर देहात 237 पुलिस आरक्षियों का एकसाथ तबादला, जिले की कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए SP का बड़ा फैसला

    कानपुर देहात 237 पुलिस आरक्षियों का एकसाथ तबादला, जिले की कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए SP का बड़ा फैसला

    कानपुर देहात: जिले की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कानपुर देहात पुलिस अधीक्षक ने देर रात एक बड़ा प्रशासनिक reshuffle करते हुए 237 पुलिस आरक्षियों का एकसाथ तबादला कर दिया। यह निर्णय सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, कार्यक्षमता बढ़ाने और पुलिस बल में लंबे समय से एक ही जगह पर तैनात कर्मचारियों में बदलाव लाने के मकसद से लिया गया है।

    सूत्रों के अनुसार, कई आरक्षक लंबे समय से एक ही थाने, चौकी या कोतवाली क्षेत्र में कार्यरत थे। ऐसे में न केवल कार्य में एकरूपता आ रही थी, बल्कि कई मामलों में निष्पक्ष पुलिसिंग को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे थे। प्रशासन ने इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक स्तर पर तबादले की कार्रवाई की।

    नई तबादला सूची के अनुसार, जनपद के सभी प्रमुख थानों—रसूलाबाद, भोगनीपुर, मूसानगर, अकबरपुर, मैथा, झींझक, सिकंदरा, पाइपराकर आदि में तैनात आरक्षियों को दूसरे थानों में भेजा गया है। कई पुलिसकर्मियों को ग्रामीण क्षेत्रों से नगर क्षेत्रों में भेजा गया है, वहीं कुछ को शहरी इलाकों से ग्रामीण क्षेत्रों में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यह निर्णय कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने और बेहतर पुलिसिंग सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी आवश्यकतानुसार ऐसे कदम उठाए जाते रहेंगे, ताकि जिले में सुरक्षा व्यवस्था हर स्तर पर मजबूत बनी रहे।

    जानकारों का मानना है कि बड़े पैमाने पर किए गए इन तबादलों से थानों में कार्य गति में सुधार आने की उम्मीद है। नई तैनाती मिलने से पुलिसकर्मियों को भी अपने दायित्वों के प्रति नए सिरे से काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे अपराध नियंत्रण और जनता की सुरक्षा व्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

    देर रात जारी तबादला सूची ने पुलिस विभाग में हलचल मचा दी है, और आने वाले दिनों में इसका असर जिले की कानून-व्यवस्था में नजर आने की संभावना जताई जा रही है।

  • औरैया: खेतों में पराली जलाने और बिना SMS मशीन से कटाई पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

    औरैया: खेतों में पराली जलाने और बिना SMS मशीन से कटाई पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

    रिपोर्टर – अमित शर्मा | बिधूना, औरैया औरैया जिले में किसानों द्वारा लगातार पराली जलाने और बिना एसएमएस (SMS) फिटिंग के हार्वेस्टिंग मशीन से धान की कटाई किए जाने पर प्रशासन सख्त हो गया है। बिधूना–सहार मार्ग पर मंगलवार को बड़े पैमाने पर पराली जलती मिली, जिसके बाद मौके से गुजर रहे अपर जिला अधिकारी (ADM) औरैया अविनाश चन्द्र ने तत्‍काल कार्रवाई कराई।

    किसानों ने खेतों में जलाई पराली, बढ़ा प्रदूषण

    सरकार बार-बार पराली न जलाने और उसे गौशालाओं में भेजने की अपील कर रही है। इसके बदले खाद के रूप में गोबर उपलब्ध कराने की योजना भी चलाई जा रही है, लेकिन इसके बावजूद कई किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे। क्षेत्र में लगातार पराली जलने से लोगों को धुएं और प्रदूषण का दंश झेलना पड़ रहा है।

    हार्वेस्टिंग मशीनें बिना SMS के चलती मिलीं

    ADM अविनाश चन्द्र जब बिधूना सहार रोड से गुजर रहे थे, तभी उन्होंने खेतों में पराली जलती देखी। इसी दौरान दो कम्पेन हार्वेस्टिंग मशीनें धान की कटाई करती मिलीं, जिनमें SMS मशीनरी नहीं लगी थी। यह देखकर प्रशासन मौके पर सक्रिय हो गया।ADM के संकेत पर तहसीलदार और राजस्व टीम ने मशीनों को रोकने की कोशिश की, लेकिन मशीन चालक वाहन लेकर भागने लगे। कर्मचारियों ने खेतों में दौड़ लगाकर दोनों मशीनों को रोक लिया।

    ADM ने मौके पर ही दी कार्रवाई की चेतावनी

    मौके पर मौजूद ADM अविनाश चन्द्र ने पुलिस बुलाकर दोनों मशीनों को कब्जे में लेकर थाने भेजने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए। पराली जलाकर प्रदूषण फैलाने वाले किसानों पर भी रिपोर्ट दर्ज करने को कहा गया।

    ADM अविनाश चन्द्र का बयान

    “खेतों में पराली जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। बिना SMS के मशीन चलाना भी नियम विरुद्ध है। आज जो भी मशीनें और किसान दोषी पाए गए हैं, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा रही है।” अविनाश चन्द्र, अपर जिला अधिकारी, औरैया

    स्थानीय प्रशासन सख्त, आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई

    प्रशासन ने साफ किया है कि जिले में पराली जलाने पर किसी तरह की रियायत नहीं मिलेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसान और मशीन मालिकों पर आगे भी इसी तरह कार्रवाई होती रहेगी।

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