Banda Flood News Live– बारिश होने के दौरान गिरा कच्चा मकान गिरा, मलबे में दबने से दो बच्चों की मौत उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के चलते जहां एक तरफ गर्मी से राहत लेकर आयी हैं वहीं दूसरी तरफ कई लोगों के लिये मुस्बित बन चुकी हैं.बरसात के चलते कई मकान ढह रहे हैं तो दीवारें भी अपनी जगह छोड़ रही है. यूपी के कई जिलों में भारी बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त है. कई जिले में हो रही लगातार बारिश की वजह से भारी परेशानी भी हो रही है. यूपी के बांदा से खबरे आई हैं जिनमें दो बच्चों की मौत घर का मलबा गिरने हो गई तो कई लोगों के घायल होने की खबर है.
बांदा में भारी बारिश के चलते कच्चा मकान गिरा गया और मकान के मलबे में एक परिवार के 9 लोग दब गए जिसके बाद पुलिस ने लोगों की मदद से रेस्क्यू करके 9 लोगों को मलबे से बाहर निकलवाया और उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती करवाया जहा 2 बच्चों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया है और 7 लोगों का इलाज चल रहा है।
वही घटना के बाद जिले के अधिकारी मौके पर पहुँचकर परिवार का हाल चाल जान रहे है।घटना लगातार 24 घंटे से हो रही बारिश के चलते हुई है जब पूरा परिवार सो रहा था तभी सुबह समय अचानक कच्चा मकान गिर गया और मलबे में सभी लोग दब गए।यह घटना बाँदा जिले के बिसंडा थाना क्षेत्र के पिपरीखेरवा ओरन की है।
Paras Hospital Murder: बिहार (Bihar) में अभी कुछ ही समय में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और उससे पहले हर कुछ दिनों में वहां आपराधिक घटनाएं घट रही इसी बीच पटना में हैरान कर देने वाली एक और घटना घट गई है। आज ही पटना के पारस अस्पताल में एक कैदी की हत्या कर दी गई। इसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें नजर आता है कि कैसे शूटरों ने उस कैदी की हत्या की।
पारस अस्पताल (Paras Hospital Murder) में लगे CCTV कैमरे में यह पूरी घटना कैद हो गई जिसमें नजर आता है कि कैसे एक साथ 5-5 शूटर उस अस्पताल के कमरा नबंर 209 के अंदर पहुंचते हैं। उस वीडियो दिखता है कि सभी के पास एक-एक पिसतल थी जिसे वो कमरे में घुसने से पहले बाहर निकालते हैं और बारी-बारी करके वो सभी कमरे के अंदर घुसते हैं। कमरे में घुसते ही वो सभी फायरिंग करने लगते हैं और उस कैदी की हत्या कर देते हैं। उसकी हत्या करने के तुरंत बाद सभी शूटर से फरार हो जाते हैं। यह पूरी घटना उस कैमरे में कैद हो गई।
आपको बता दें कि चंदन मिश्रा नाम का एक आरोपी इलाज के लिए पारस अस्पताल (Paras Hospital ) में लाया गया था। चंदन मिश्रा मूल रूप से बक्सर का रहने वाला है और वो वहां के केसरी हत्याकांड में नामजद आरोपी था। वो अभी बेउर जेल में बंद था और इलाज के लिए पैरोल पर उसे पारस अस्पताल लाया गया था, जहां पर 5 शूटरों ने उसकी हत्या कर दी। इसके तुरंत बाद वो सभी शूटर वहां से भाग गए। इसके घटना बाद पुलिस मामले की जांच में लगी हुई है।
NNS Exclusive: देश की सर्वोच्च न्यायपालिका, सुप्रीम कोर्ट, इन दिनों एक फैसले को लेकर सुर्खियों में है—और यह कोई कानूनी फैसला नहीं बल्कि एक भौतिक बदलाव है, जो अब चर्चा और सवालों के घेरे में आ गया है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट परिसर में वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के निर्देश पर पांच ऐतिहासिक अदालतों के बाहर कांच की दीवारें लगाई गई थीं। दावा था कि यह आधुनिकीकरण और एयर कंडीशनिंग के लिए आवश्यक है। लेकिन यह दीवारें न तो विचारधारा में फिट बैठीं और न ही व्यवहार में। नतीजा—सालभर बाद ही इन्हें हटाने का फैसला ले लिया गया, और इस पूरी कवायद में करोड़ों रुपये खर्च हो गए। Supreme Court Glass Wall
💰 कांच लगाने और फिर हटाने में खर्च हुए 2.68 करोड़ रुपये- Supreme Court Glass Wall
RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, इन कांच की दीवारों को लगाने में कुल ₹2.59 करोड़ का खर्च आया। यह कार्य M/s बीएम गुप्ता एंड सन्स द्वारा CPWD के ई-टेंडर के माध्यम से करवाया गया था। जब इन्हें हटाने की बारी आई तो उस पर ₹8.63 लाख का अतिरिक्त खर्च हुआ। इस प्रकार कुल ₹2.68 करोड़ की सार्वजनिक धनराशि एक साल के भीतर ही पानी की तरह बहा दी गई।
🛑 बार संघों का विरोध और बढ़ती अव्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने इस फैसले का खुला विरोध किया था। उनके अनुसार,
कांच की दीवारों से गलियारों की चौड़ाई घट गई।
वकीलों और आमजनों के लिए एक कोर्ट से दूसरी कोर्ट पहुंचना मुश्किल हो गया।
फैसले में कोई परामर्श नहीं लिया गया, जिससे न्यायिक भागीदारी पर भी सवाल खड़े हुए।
🔁 बदलाव पलटा, पुरानी पहचान लौटी
CJI डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल के बाद, उनके उत्तराधिकारियों CJI संजीव खन्ना और वर्तमान CJI बीआर गवई के सामने बार एसोसिएशन ने दीवारें हटाने की मांग रखी। जून 2025 में फुल कोर्ट (सभी जजों की बैठक) ने सर्वसम्मति से तय किया कि कांच की दीवारें हटाई जाएं और सुप्रीम कोर्ट को उसके “मूल स्वरूप” में लौटाया जाए।
🇮🇳 लोगो भी वापस पुराने स्वरूप में- Supreme Court Glass Wall
सिर्फ दीवारें ही नहीं, पूर्व CJI चंद्रचूड़ द्वारा बदला गया सुप्रीम कोर्ट का लोगो भी पलटा गया है। अब फिर से केंद्र में भारत का राजचिह्न वाला पुराना लोगो बहाल कर दिया गया है।
Rudrabhishek by CM Yogi: उत्तर प्रदेश में श्रावण मास की शुरुआत आध्यात्मिक आस्था और धार्मिक उत्साह के साथ हो चुकी है। श्रावण के पहले सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में विधिवत रुद्राभिषेक और हवन कर सावन की आधिकारिक शुरुआत की। इस धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही पूरे प्रदेश में शिवभक्ति का माहौल और अधिक प्रबल हो गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न केवल प्रदेश के मुखिया हैं, बल्कि गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। उन्होंने सोमवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया। इस दौरान उन्होंने बेलपत्र, मदार पत्र, दूर्वा, कमल पुष्प, गंगाजल, दूध और विभिन्न ऋतुफलों के रस से अभिषेक किया। Rudrabhishek by CM Yogi
ब्रेकिंग – गोरखपुर / उत्तर प्रदेश CM योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में किया रुद्राभिषेक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दूध, गंगाजल और फलरस से अभिषेक सोशल मीडिया पर शेयर किया संदेश – समस्त प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना श्रावण मास के पहले दिन मंदिरों में उमड़ा भक्तों का सैलाब… pic.twitter.com/0jB5wWX9q1
राज्य सरकार द्वारा जारी बयान में बताया गया कि मुख्यमंत्री ने भगवान शिव से चराचर जगत के कल्याण और समस्त प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। हवन के दौरान वे स्वयं आचार्यगणों और पुरोहितों के साथ वैदिक मंत्रोच्चार करते नजर आए।
मुख्यमंत्री योगी ने इस शुभ अवसर पर सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
"देवाधिदेव महादेव के प्रिय श्रावण मास के प्रथम दिवस के पावन अवसर पर आज गोरखनाथ मंदिर में विधि-विधान से रुद्राभिषेक कर समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।"
🛕 गोरखनाथ मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व– Rudrabhishek by CM Yogi
गोरखनाथ मंदिर केवल गोरखपुर ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण उत्तर भारत के प्रमुख शिव धामों में से एक है। श्रावण मास में इस मंदिर की महत्ता और भी अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि यहां हर सोमवार विशेष पूजा, अभिषेक और हवन का आयोजन किया जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं और भगवान शिव के दर्शन कर जलाभिषेक करते हैं। Rudrabhishek by CM Yogi
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की धार्मिक आस्था और उनका संत परंपरा से जुड़ा होना इस पूरे आयोजन को विशेष बना देता है। वह हर साल सावन मास के पहले सोमवार को गोरखनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। यह परंपरा न केवल उनके व्यक्तिगत आस्था का परिचायक है, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। Rudrabhishek by CM Yogi
🙏 श्रावण मास में शिवभक्ति की धारा– Rudrabhishek by CM Yogi
श्रावण मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। इस पूरे महीने विशेष रूप से सोमवार को शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र अर्पित कर श्रद्धालु भगवान शिव को प्रसन्न करते हैं। इस माह में रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप का विशेष महत्व होता है।
प्रदेश के कोने-कोने में श्रद्धालुओं ने सावन के पहले दिन शिव मंदिरों में दर्शन और अभिषेक कर धार्मिक रस्में निभाईं। वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, मिर्जापुर, और चित्रकूट जैसे धार्मिक शहरों में भी सावन का स्वागत विशेष आयोजनों से किया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा रुद्राभिषेक के माध्यम से श्रावण मास की शुरुआत करना यह दर्शाता है कि प्रदेश सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सम्मान देती है और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है।
Bareilly Ramleela Ground: बरेली जिले के फरीदपुर क्षेत्र में स्थित प्राचीन श्री रामलीला मैदान न केवल एक ऐतिहासिक स्थल है, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का भी केंद्र रहा है। बीते दो सौ वर्षों से यह मैदान हर वर्ष रामायण के अद्भुत मंचन का गवाह बनता आया है। लेकिन वर्तमान में यह भूमि नाले के निर्माण, जलभराव, प्रशासनिक उपेक्षा और अतिक्रमण की समस्या से जूझ रही है।
📌 ब्रेकिंग – बरेली 200 वर्ष पुराना रामलीला मैदान अतिक्रमण और जलभराव से जूझ रहा! 🔴 ऐतिहासिक रामलीला मैदान नाले के निर्माण से जलभराव की चपेट में 🔴 कीचड़ और गंदगी से सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर खतरा मंडराया 🔴 श्रद्धालुओं ने डीएम को भेजा चेतावनी पत्र, जताई नाराज़गी 🔴 स्थानीयों ने… pic.twitter.com/d9QYo5P1by
क्या यह कल्पना भी विचलित नहीं करती कि जहां कभी श्रीराम और रावण के युद्ध का मंचन होता था, वहां अब कीचड़ और बदबू फैली है? क्या इस आस्था स्थल की कीमत इतनी कम हो गई है कि उसे विकास के नाम पर मिटा दिया जाए? Bareilly Ramleela Ground
🧱 तीन एकड़ की जमीन या आस्था का गढ़?– Bareilly Ramleela Ground
श्रीरामलीला मैदान केवल एक भूखंड नहीं, हजारों लोगों की भावनाओं और परंपराओं का जीवित प्रतीक है। यहां रामलीला सिर्फ नाटक नहीं, एक जीवन दर्शन बनकर प्रस्तुत होती है। यह वह स्थल है जहां धार्मिकता, कला और लोक परंपराएं एक साथ जीवित होती हैं। लेकिन अफसोस, आज वह अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।
⚠️ नाले का निर्माण या सांस्कृतिक हत्या?– Bareilly Ramleela Ground
स्थानीय समिति का आरोप है कि ग्राम पंचायत और निर्माण एजेंसी ने बिना सांस्कृतिक और सामाजिक अध्ययन के नाले का निर्माण प्रारंभ कर दिया। अवैध अतिक्रमण और जलनिकासी की अव्यवस्था ने पूरे मैदान को कीचड़ का ढेर बना दिया है। यदि यह कार्य बिना विवेक के जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में रामलीला का मंचन असंभव हो जाएगा।
📩 प्रशासन को चेतावनी या पुकार?
समिति द्वारा जिलाधिकारी को भेजा गया पत्र केवल सूचना नहीं, एक चेतावनी और सामाजिक पुकार है। यह मैदान बरेली की पहचान का प्रतीक है, और उसकी उपेक्षा केवल एक स्थल की उपेक्षा नहीं, बल्कि संस्कृति की अनदेखी है।
🏗️ योजनागत विफलता और प्रशासनिक असंवेदनशीलता– Bareilly Ramleela Ground
यदि कोई निर्माण योजना किसी भी क्षेत्र में हो रही है, तो यह आवश्यक है कि उसमें उस क्षेत्र की सांस्कृतिक महत्ता का भी मूल्यांकन किया जाए। दुर्भाग्यवश, यहां ऐसा नहीं हुआ। यह दर्शाता है कि योजनाओं में धरातल की समझ की कमी है और जनता की भावनाओं की कद्र नहीं की जा रही।
🛑 आज रामलीला मैदान, कल कोई मंदिर या गुरुद्वारा?– Bareilly Ramleela Ground
यदि रामलीला मैदान पर अतिक्रमण हो सकता है, तो कोई मंदिर, मस्जिद, मजार या गिरजाघर भी सुरक्षित नहीं रहेगा। यही समय है जब समाज को जागना चाहिए और प्रशासन को भी यह समझना चाहिए कि धरोहरों को सिर्फ भूमि नहीं, भावनाओं का प्रतीक मानकर ही योजनाएं बनाई जानी चाहिए। Bareilly Ramleela Ground
📢 समाधान की मांग: सीमांकन, सौंदर्यीकरण और संरक्षण
समिति और स्थानीय लोगों की मांग है कि—
मैदान का पुनः सीमांकन किया जाए
नाले की दिशा बदली जाए
सौंदर्यीकरण और समतलीकरण की कार्यवाही हो
जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि स्वयं निरीक्षण करें
निर्माण एजेंसियों की जिम्मेदारी तय हो
यह केवल मांग नहीं, संस्कृति को बचाने का आह्वान है।
Running in rain benefits: बारिश के मौसम में दौड़ना एक रोमांचक और सुकून देने वाला अनुभव हो सकता है, लेकिन क्या यह सुरक्षित है? फिटनेस के शौकीनों के बीच यह सवाल अक्सर उठता है कि मानसून में आउटडोर रनिंग की जाए या नहीं। आइए जानें विशेषज्ञों की राय, रिसर्च और कुछ जरूरी सुझाव जिनसे आप बारिश में भी सुरक्षित और प्रभावी रनिंग का आनंद ले सकते हैं।
☔ बारिश और रनिंग का विज्ञान- Running in rain benefits
रनिंग एक सम्पूर्ण शरीर को सक्रिय करने वाली एक्सरसाइज है। यह हार्ट हेल्थ, स्टैमिना, वेट लॉस और मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद करता है। अब सवाल यह उठता है कि बारिश के मौसम में रनिंग करना फायदेमंद है या नहीं?
लोयोला मैरीमाउंट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. हॉली अल्मस्टेड की एक रिसर्च बताती है कि बारिश में रनिंग करने से शरीर ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है क्योंकि उसे खुद को गर्म रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। नतीजतन, बढ़ी हुई कैलोरी बर्निंग होती है, लेकिन थकावट की संभावना भी अधिक हो जाती है। Running in rain benefits
🔬 रिसर्च क्या कहती है?- Running in rain benefits
Journal of Sports Medicine & Physical Fitness में प्रकाशित एक अध्ययन में यह बात सामने आई कि कम तापमान और वर्षा की स्थिति में दौड़ने वाले प्रतिभागियों ने अधिक ऊर्जा खर्च की। इसका मतलब है कि बारिश में दौड़ना ज्यादा मेहनत तो करवाता है, लेकिन इसका फिटनेस पर सकारात्मक असर हो सकता है।
✅ बारिश में दौड़ने के फायदे
कैलोरी बर्निंग अधिक होती है
मानसिक सुकून और स्ट्रेस रिलीफ
हृदय स्वास्थ्य में सुधार
सहनशक्ति और इम्यूनिटी में वृद्धि
⚠️ बारिश में दौड़ने से पहले ध्यान रखें ये बातें- Running in rain benefits
वार्मअप अनिवार्य है: ठंडे वातावरण में दौड़ने से पहले मांसपेशियों को एक्टिव करना ज़रूरी है।
सही कपड़े पहनें: वाटरप्रूफ जैकेट और जल्दी सूखने वाले कपड़े पहनें ताकि शरीर गर्म रहे।
जूतों की ग्रिप हो मजबूत: फिसलन से बचने के लिए ऐसे जूते पहनें जिनकी सोल ग्रिप अच्छी हो।
हाइड्रेशन का ध्यान रखें: बारिश में पसीना कम दिखता है लेकिन शरीर पानी खोता है, इसलिए पानी पीते रहें।
बीमारियों से बचाव करें: भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें और स्नान कर लें ताकि वायरल संक्रमण से बचा जा सके।
❓ क्या बारिश में दौड़ना सभी के लिए सुरक्षित है?- Running in rain benefits
यदि आप अस्थमा, दिल की बीमारी या जॉइंट पेन जैसी कोई स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, तो बारिश में दौड़ने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। बुज़ुर्ग और बच्चों को भी बारिश में रनिंग से परहेज़ करना चाहिए।
📋 आउटडोर vs इनडोर रनिंग: क्या चुनें?
पहलू
आउटडोर रनिंग
इनडोर रनिंग
ताजगी और खुलापन
✔️
❌
सेफ्टी (मानसून में)
❌
✔️
मौसम की निर्भरता
✔️
❌
ज्वाइंट इम्पैक्ट
थोड़ा अधिक
कम
अगर आप फिसलन, इंफेक्शन और हाइपोथर्मिया जैसे जोखिम से बचना चाहते हैं, तो ट्रेडमिल पर रनिंग बेहतर विकल्प हो सकता है।
बारिश में दौड़ना रोमांचक और सेहतमंद हो सकता है, यदि सही सावधानियों के साथ किया जाए। यह आपके शरीर को चुनौती देने और नई ऊर्जा देने का तरीका बन सकता है, लेकिन सावधानी न बरतने पर यह खतरे का कारण भी बन सकता है। इसलिए, खुद को सुरक्षित रखते हुए, बारिश का आनंद लेते हुए फिट रहिए।
Panchayat Rinki Kiss Scene: ‘पंचायत’ वेब सीरीज की ‘रिंकी’ यानी सांविका के एक बयान ने हाल ही में सोशल मीडिया और एंटरटेनमेंट वर्ल्ड में हलचल मचा दी। एक इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने सीरीज में किसिंग सीन करने से इनकार कर दिया था। सांविका का कहना था कि वह इस सीन को करने में असहज थीं और ऑडियंस, खासकर फैमिली दर्शकों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया। Panchayat Rinki Kiss Scene
🤔 क्यों किया सांविका ने इनकार?- Panchayat Rinki Kiss Scene
सांविका के मुताबिक, सीरीज के एक सीन में सचिव जी और रिंकी के बीच किसिंग सीक्वेंस प्लान किया गया था। लेकिन जब उन्हें इसकी जानकारी दी गई, तो उन्होंने डायरेक्टर से दो दिन का समय मांगा। उन्होंने बताया कि ‘पंचायत’ की ऑडियंस हर उम्र और वर्ग की है, और यह शो पारिवारिक दर्शकों में बेहद लोकप्रिय है। ऐसे में किसिंग सीन उन्हें असहज लगा।
🎤 सचिव जी यानी जितेंद्र कुमार का रिएक्शन- Panchayat Rinki Kiss Scene
अब इस पर सचिव जी का किरदार निभाने वाले जितेंद्र कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “सांविका की बातों को गलत तरीके से पेश किया गया है। जब सीन की बात हुई, मैंने खुद कहा था कि पहले उनकी सहमति ली जाए।” जितेंद्र ने यह भी जोड़ा कि वो किसिंग सीन से असहज नहीं होते, बशर्ते वह कहानी में फिट हो। Panchayat Rinki Kiss Scene
उन्होंने आगे कहा, “मैंने आयुष्मान खुराना के साथ फिल्म ‘शुभ मंगल ज़्यादा सावधान’ में भी ऑनस्क्रीन किस किया है। लेकिन यहां मसला यह था कि दर्शकों से जुड़ाव बना रहे और सीन को लेकर कोई विवाद न हो। इसलिए हमने इसे बाद में एक मजेदार मोड़ दिया, जहां लाइट चली जाती है और सीन अधूरा रह जाता है।”
🎬 किसिंग सीन को ऐसे बदला गया- Panchayat Rinki Kiss Scene:
डायरेक्टर ने बाद में उस सीन को बदल दिया और मजाकिया तरीके से शूट किया, जिसमें जैसे ही दोनों करीब आते हैं, बिजली चली जाती है। यह न सिर्फ दर्शकों के लिए मनोरंजक रहा बल्कि कहानी की मर्यादा भी बनी रही। Panchayat Rinki Kiss Scene
📢 पंचायती पॉपुलैरिटी और आगे की योजना
‘पंचायत’ सीरीज की पॉपुलैरिटी लगातार बढ़ती जा रही है। सीजन 4 की बड़ी सफलता के बाद मेकर्स ने सीजन 5 की घोषणा भी कर दी है, जो 2026 में रिलीज होगा। फैंस रिंकी और सचिव जी की केमिस्ट्री को लेकर खासे उत्साहित हैं। Panchayat Rinki Kiss Scene
📌 सामाजिक पहलू और सहमति की अहमियत
इस पूरे मामले में एक बात साफ है—ऑनस्क्रीन इंटिमेट सीन में सहमति सबसे जरूरी है। चाहे कलाकार पुरुष हो या महिला, कोई भी सीन बिना सहमति के नहीं किया जाना चाहिए। जितेंद्र कुमार का यह स्टैंड वाकई सराहनीय है जो आने वाले एक्टर्स के लिए एक मिसाल बन सकता है।
🔴 एक्स पोस्ट के लिए बुलेट ब्रेकिंग:
🔹 पंचायत की रिंकी ने किस सीन से किया इनकार 🔹 सांविका ने कहा- ऑडियंस को ध्यान में रखकर लिया फैसला 🔹 सचिव जी बोले- उनकी सहमति जरूरी थी 🔹 सीरीज में किस सीन को मजेदार अंदाज में बदला गया
India Greece missile deal: भारत ने हाल ही में एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए अपनी अत्याधुनिक लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LR-LACM) ग्रीस को निर्यात करने की पेशकश की है। यह फैसला ऐसे समय पर सामने आया है जब तुर्की और पाकिस्तान के रिश्तों में नजदीकी देखी गई है। तुर्की द्वारा हाल में पाकिस्तान के ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन करना भारत को नागवार गुज़रा और इसका जवाब अब एक डिप्लोमैटिक स्ट्राइक के रूप में सामने आया है।
LR-LACM मिसाइल की रेंज, सटीकता और रडार से बचने की क्षमता इसे न केवल तुर्की बल्कि नाटो देशों के लिए भी एक जियो-पॉलिटिकल चिंता का कारण बना रही है। ग्रीस के लिए यह मिसाइल न केवल सैन्य शक्ति में वृद्धि है, बल्कि तुर्की के खिलाफ एक रणनीतिक संतुलन भी स्थापित कर सकती है। India Greece missile deal
🔍 LR-LACM क्या है?– India Greece missile deal
लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LR-LACM) को DRDO द्वारा विकसित किया गया है और यह भारत की सबसे एडवांस सबसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है। इसकी पहली सफल परीक्षण उड़ान 12 नवंबर 2024 को ओडिशा के चांदीपुर से की गई थी।
⚙️ मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं– India Greece missile deal
विशेषता
विवरण
रेंज (जमीन से)
1500 किलोमीटर
रेंज (समुद्र से)
1000 किलोमीटर
गति
864 से 1111 किमी/घंटा
वॉरहेड
पारंपरिक और परमाणु दोनों
इंजन
स्वदेशी “मनिक” टर्बोफैन इंजन
लॉन्च प्लेटफॉर्म
ज़मीन, समुद्र, और एयर लॉन्च
🛰️ टेरेन-हगिंग और रडार से बचने की क्षमता– India Greece missile deal
LR-LACM मिसाइल टेरेन-हगिंग तकनीक पर आधारित है, जिससे यह दुश्मन की रडार से छिपकर कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है। यह तकनीक अमेरिका की टॉमहॉक और रूस की कैलिबर मिसाइलों की तर्ज पर विकसित की गई है।
🎯 सटीकता और सुरक्षा प्रणाली से बचाव– India Greece missile deal
यह मिसाइल पिनपॉइंट एक्यूरेसी के साथ लक्ष्य को भेदने में सक्षम है और अत्याधुनिक युद्धाभ्यास (maneuvers) कर सकती है। इसकी यह क्षमता तुर्की की S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।
🚢 लॉन्च प्लेटफॉर्म और उपयोग
LR-LACM को ज़मीन पर मोबाइल लॉन्चर और भारतीय नौसेना के 30 से अधिक युद्धपोतों पर यूनिवर्सल वर्टिकल लॉन्च मॉड्यूल (UVLM) से तैनात किया जा सकता है। भविष्य में इसे वायुसेना के फाइटर जेट्स से लॉन्च करने पर भी काम हो रहा है।
🌐 भारत का रणनीतिक संदेश
यह मिसाइल डील केवल आयुध निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत का एक स्पष्ट संदेश है कि वह अब रणनीतिक भागीदारी और वैश्विक रक्षा बाज़ार में सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है। तुर्की, जो पाकिस्तान का घनिष्ठ सहयोगी रहा है, के लिए यह डील कूटनीतिक और सैन्य चुनौती बन सकती है।
ग्रीस को क्या फायदा?– India Greece missile deal
ग्रीस और तुर्की के बीच लगातार तनाव चल रहा है, खासकर समुद्री सीमाओं और रक्षा नीति को लेकर। ऐसे में भारत की ओर से यह मिसाइल ऑफर ग्रीस के लिए एक स्ट्रैटजिक एसेट बन सकता है, जो उसे तुर्की के खिलाफ सैन्य संतुलन प्रदान करेगा।
Pilibhit SDRF mock drill: आगामी मॉनसून और संभावित बाढ़ के खतरे को ध्यान में रखते हुए, पीलीभीत जिले के सदर तहसील क्षेत्र की देवहा नदी पर SDRF और जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य था – आपातकालीन स्थिति में प्रशासन की तैयारियों की समीक्षा करना और जनता को यह संदेश देना कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। Pilibhit SDRF mock dril
🔴 पीलीभीत ब्रेकिंग | SDRF की मॉक ड्रिल से बाढ़ बचाव की तैयारी का जायज़ा • पीलीभीत में SDRF और प्रशासन ने देवहा नदी पर बाढ़ से बचाव की मॉक ड्रिल की। • मॉक ड्रिल के दौरान बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने का किया गया अभ्यास। • ADM ऋतु पुनिया और SDM श्रद्धा सिंह ने मोटर बोट से राहत… pic.twitter.com/KpXgwSgji4
👮♀️ प्रशासन रहा सक्रिय मोड में- Pilibhit SDRF mock dril
इस मॉक ड्रिल में एडीएम ऋतु पुनिया और एसडीएम श्रद्धा सिंह ने मौके पर पहुंचकर मोटरबोट के जरिए राहत कार्यों का निरीक्षण किया। ड्रिल के दौरान यह प्रदर्शित किया गया कि बाढ़ में फंसे लोगों को किस प्रकार सुरक्षित निकाला जाएगा और उन्हें राहत शिविरों तक कैसे पहुंचाया जाएगा।
SDRF की टीम ने现场 पर मौजूद अधिकारियों व कर्मचारियों को बाढ़ राहत ऑपरेशन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। मॉक ऑपरेशन के दौरान यह बताया गया कि कैसे बचाव नावों, लाइफ जैकेट्स और रस्सियों का इस्तेमाल करके पीड़ितों तक पहुंचा जाए। SDRF के एक्सपर्ट्स ने बताया कि किसी भी आपदा में “गति और समन्वय” सबसे अहम होते हैं।
🗣️ एडीएम और एसडीएम ने क्या कहा- Pilibhit SDRF mock dril
ऋतु पुनिया (एडीएम, पीलीभीत) ने कहा –
"प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। ऐसी मॉक ड्रिल से हमें वास्तविक समय पर निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है।"
एसडीएम श्रद्धा सिंह ने SDRF की कार्य प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि –
"इनका अनुभव और पेशेवर तरीका किसी भी आपदा की स्थिति में बेहद कारगर होता है।"
🚧 बाढ़ से निपटने की रणनीति
SDRF की दो टीमें संवेदनशील इलाकों की निगरानी कर रही हैं।
बाढ़ संभावित क्षेत्रों में अस्थाई राहत शिविरों की पहचान कर ली गई है।
नदी के जलस्तर की रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है।
ग्राम पंचायत स्तर पर भी बाढ़ से जुड़े दिशा-निर्देश साझा किए गए हैं।
📷 मॉक ड्रिल से भरोसे का संदेश- Pilibhit SDRF mock dril
देवहा नदी पर की गई यह मॉक ड्रिल न सिर्फ प्रशासन की तैयारियों को दर्शाती है, बल्कि आमजन को भी भरोसा दिलाती है कि किसी भी विपदा से निपटने के लिए सिस्टम पूरी तरह सजग है। पीलीभीत जैसे सीमावर्ती जनपद में बाढ़ हर साल एक बड़ी चुनौती रही है, ऐसे में यह अभ्यास अत्यंत जरूरी माना जा रहा है।
Smriti Irani First Look: टीवी की दुनिया के सबसे आइकॉनिक शो में से एक “क्योंकि सास भी कभी बहू थी” एक बार फिर से दर्शकों के बीच लौटने वाला है। एकता कपूर के इस सुपरहिट सीरियल का सीजन 2 जल्द ही ऑनएयर होने जा रहा है, जिसमें फिर से वही पुराना जादू देखने को मिलेगा—तुलसी और मिहिर की जोड़ी।
इस शो में स्मृति ईरानी एक बार फिर तुलसी वीरानी के रोल में नजर आएंगी, जबकि अमर उपाध्याय मिहिर के किरदार में दिखाई देंगे। शो की शूटिंग शुरू हो चुकी है और इसी बीच स्मृति ईरानी का फर्स्ट लुक लीक हो गया है, जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। Smriti Irani First Look
तुलसी के लुक में फिर दिखीं स्मृति ईरानी– Smriti Irani First Look
लीक हुए लुक में स्मृति ईरानी को पर्पल बॉर्डर वाली ट्रेडिशनल साड़ी में देखा गया है। उन्होंने अपने लुक को लाल बड़ी बिंदी, सिंदूर और सिल्वर-ब्लैक ट्रेडिशनल जूलरी के साथ कम्प्लीट किया है। साथ ही उनका हेयरस्टाइल क्लासिक साइड पार्टेड हेयरबन में है। इस सिंपल और शालीन अंदाज ने एक बार फिर दर्शकों को पुरानी तुलसी की याद दिला दी।
अमर उपाध्याय बोले – ‘यादें ताज़ा हो गईं’
शो के पहले दिन की शूटिंग को लेकर अमर उपाध्याय ने मीडिया से बातचीत में कहा –
"पहले दिन शूट करके बहुत अच्छा लगा। पुराने दिन फिर से याद आ गए। सेट पर वही फीलिंग आ रही है जैसे सालों पहले आती थी। हालांकि इस बार टेलीविजन में काफी बदलाव आया है, और यह बदलाव शो में भी नजर आएगा।"
2000 में शुरू हुआ था पहला सीजन– Smriti Irani First Look
“क्योंकि सास भी कभी बहू थी” का पहला सीजन 3 जुलाई 2000 को शुरू हुआ था और 2008 में अपने अंतिम एपिसोड के साथ खत्म हुआ था। इस शो ने 1833 एपिसोड्स तक लगातार दर्शकों के दिलों पर राज किया और एक नया टेलीविजन इतिहास रच दिया।
अब जबकि इसका सीजन 2 आ रहा है, फैंस के बीच उत्साह चरम पर है। सोशल मीडिया पर स्मृति ईरानी और शो से जुड़े अपडेट ट्रेंड कर रहे हैं।
क्या खास होगा नए सीजन में?
हालांकि कहानी और बाकी कलाकारों के बारे में अभी तक ज्यादा खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन एकता कपूर के प्रोडक्शन की ओर से संकेत दिए गए हैं कि इस बार तुलसी और मिहिर की नई पीढ़ी की कहानीको भी शामिल किया जाएगा।