UP HEAVY RAIN ALERT: उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है और इस बार बरसात औसत से 14 फीसदी अधिक दर्ज की गई है। पूरे राज्य में मौसम का मिजाज नम और बदलता हुआ नजर आ रहा है। मौसम विभाग ने अगले 5 दिनों तक भारी से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। इसके अलावा, 48 जिलों में बिजली चमकने और गिरने का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 12 जिलों के लिए भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है।
महोबा और हमीरपुर में आकाशीय बिजली का कहर- UP HEAVY RAIN ALERT
बारिश जहां राहत का संकेत बनकर आई है, वहीं आकाशीय बिजली कई जिलों में जानलेवा बनती जा रही है।
महोबा जिले के कुलपहाड़ कोतवाली क्षेत्र में रेलवे स्टेशन के पास आकाशीय बिजली गिरने से एक ही परिवार के चार बच्चे झुलस गए, जिसमें एक मासूम की मौत हो गई जबकि तीन का इलाज चल रहा है।
हमीरपुर जिले के सुमेरपुर थाना क्षेत्र के भौरा गांव में खेत में भैंस चरा रहे एक किसान की मौत आकाशीय बिजली गिरने से हो गई।
Realised Maximum/Minimum Temperature and Departure from Normal (In Last 24 Hours) pic.twitter.com/wQNg5Y1NBZ
— India Meteorological Department (@Indiametdept) July 5, 2025
भारी वर्षा की चेतावनी इन 12 जिलों में- UP HEAVY RAIN ALERT
भारी वर्षा की चेतावनी जिन जिलों में दी गई है, वे हैं: बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और लखीमपुर खीरी। यहां लोगों को सलाह दी गई है कि खुले में न जाएं, बिजली से सावधान रहें और पानी से भरी जगहों से बचकर निकलें।
राजधानी लखनऊ का मौसम
लखनऊ में शुक्रवार को बादलों की आवाजाही बनी रही, साथ ही दिनभर रुक-रुक कर हल्की बारिश होती रही। मौसम के इस बदलाव से अधिकतम तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। शहरवासियों ने गर्मी से राहत की सांस ली।
मौसम वैज्ञानिक की भविष्यवाणी
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अतुल सिंह के अनुसार,
“अगले 5 दिनों तक उत्तर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में अच्छी बारिश जारी रहेगी। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई विशेष वृद्धि नहीं होगी। दक्षिण-पश्चिमी मानसून की सक्रियता बनी रहेगी।”
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि
मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखें
बिजली गिरने के समय खुले मैदानों और पेड़ों से दूर रहें
संवाददाता: प्रमोद शर्मा Bareilly village roads crisis: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की तहसील सदर अंतर्गत ग्राम पंचायत क्यारा के गांव मँझा और पीपल गौटिया के हालात किसी आपदा क्षेत्र से कम नहीं हैं। यहाँ की सड़कों पर कीचड़ और गंदगी की भरमार है, जिससे होकर नन्हे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं रोज़ाना गुज़रने को मजबूर हैं। विकास के नाम पर वर्षों से झूठे वादों और फाइलों में सड़ा पड़ा सिस्टम, अब लोगों के सब्र की सीमा को तोड़ चुका है।
🔴बरेली के गांव मंझा और पीपल गौटिया में कीचड़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त 🔸 स्कूल गेट तक बना दलदल, गिरते बच्चों की रोज़ाना तस्वीरें चिंताजनक 🔸 ग्राम प्रधान: "पैसा नहीं", BDO: "जगह नहीं", SDM: "बात करिए" – समाधान शून्य 🔸 ग्रामीणों ने जताया आक्रोश, कहा – इस बार वोट नहीं देंगे! 🔸… pic.twitter.com/0FpRU5KJMR
सबसे शर्मनाक तस्वीर गांव के प्राथमिक विद्यालय के बाहर देखने को मिलती है। स्कूल गेट के सामने गंदा पानी और दलदल का अंबार बच्चों के भविष्य को कीचड़ में घसीट रहा है। यहां पढ़ने वाले मासूम छात्र-छात्राएं हर रोज इसी दलदल से होकर स्कूल आते हैं। शिक्षक भी इसी नरकीय रास्ते से होकर आते हैं, जिससे उनकी ड्यूटी करना एक चुनौती बन गया है।
कीचड़ से हो निकलते राहगीर
न नाली, न निकासी – बस जलजमाव और बदबू
गांववासियों – रामसिंह, विनोद सिंह गुर्जर, झंडू सिंह, केशराम सिंह, सुखपाल आर्य समेत दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि सड़क के दोनों ओर नालियों का अभाव और जलनिकासी की कोई योजना न होने के कारण बरसात का पानी, घरों का गंदा पानी और सीवर मिलकर पूरे गांव को दलदल में बदल देते हैं। हालत ये हो गई है कि माँ काली और शनिदेव मंदिर तक में गंदा पानी भर चुका है, पूजा-पाठ तक रुक गया है।
अखिकारियों की अनदेखी के कारण गांव के हालात बदतर
चुनाव से पहले ‘मिट्टी’ का दिखावा
ग्रामीणों का आरोप है कि लोकसभा चुनाव से पहले सिर्फ दिखावे के लिए मिट्टी डलवाई गई थी, लेकिन बारिश की पहली बौछार में सब बह गया। आज फिर वहीं हालात हैं – हर गली में कीचड़, हर घर में बदबू, हर कोने में मच्छरों का आतंक और बीमारी का डर।
प्रशासनिक जवाबदेही: बयानबाज़ी और जिम्मेदारी से पल्ला
जब इस मसले पर एसडीएम सदर बरेली से बात की गई, तो उन्होंने सारा मामला बीडीओ और डीपीआरओ पर डालते हुए खुद को जिम्मेदारी से अलग कर लिया। बीडीओ क्यारा – ओमप्रकाश का कहना है कि,
“जैसे ही जगह मिलेगी, पानी निकासी करा देंगे।” यानी फिलहाल कोई योजना नहीं। ग्राम प्रधान कृष्णपाल सिंह ने फंड की कमी की बात कही और जुलाई तक फंड आने की उम्मीद जताई।
ग्रामीणों की चेतावनी: चुनाव बहिष्कार तक की तैयारी
गांव के लोग अब सिस्टम से पूरी तरह नाराज़ हैं। वे ग्राम प्रधान से लेकर विधानसभा चुनाव तक बहिष्कार की चेतावनी दे रहे हैं। उनका कहना है कि
“जब हमें इंसान नहीं समझा गया, तो हम नेताओं को वोट क्यों दें?”
महामारी की आशंका
गांवों में सड़ी गंदगी और मच्छरों का आतंक इस हद तक बढ़ चुका है कि महामारी का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का जीवन, बच्चों की शिक्षा, धार्मिक स्थल – सब कुछ कीचड़ में डूब गया है और प्रशासन आँखें मूंदे बैठा है।
CM YOGI GUIDES PCS TRAINEE: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य प्रशासनिक सेवा (पीसीएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों को एक प्रेरक संदेश देते हुए उन्हें एक सफल, संवेदनशील और प्रभावी अधिकारी बनने का मंत्र दिया। उन्होंने ‘संवाद, संवेदनशीलता और सकारात्मकता’ को प्रशासनिक जीवन की आधारशिला बताते हुए प्रशिक्षुओं से जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया। CM YOGI GUIDES PCS TRAINEE
🔴 सीएम योगी ने पीसीएस अधिकारियों को दिया प्रशासनिक मंत्र 🔸 "संवाद, संवेदनशीलता और सकारात्मकता से बनिए प्रभावी अफसर" – @myogiadityanath 🔸 भूमि विवाद और राजस्व मामलों में तेज़ न्याय प्रक्रिया अपनाने की सलाह 🔸 जनसेवा, पारदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा को प्रशासन की रीढ़ बनाएं:… pic.twitter.com/au5XACwPTU
प्रशिक्षु अधिकारियों से सीधा संवाद- CM YOGI GUIDES PCS TRAINEE
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को पीसीएस 2022 बैच के 07 और 2023 बैच के 38 प्रशिक्षु अधिकारियों से संवाद किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उत्तर प्रदेश जैसा विशाल और विविधताओं से भरा राज्य चुनौतियों से भरा है और यहां काम करना आपके व्यक्तित्व और प्रशासनिक दक्षता की असली परीक्षा है।
मुख्यमंत्री ने कहा,
“इस राज्य की सेवा करना गौरव की बात है। प्रशिक्षण के बाद के 5-6 वर्षों की कार्यशैली भविष्य के 30-35 वर्षों की दिशा तय कर देती है। ये शुरुआती वर्ष आपका मूल बनाते हैं।”
जनता से जुड़ाव ही असली प्रशासन
सीएम योगी ने अधिकारियों को सलाह दी कि वे जनता से सीधे संवाद बनाए रखें और जनहित को सर्वोपरि मानते हुए नीतिगत फैसले लें। उन्होंने कहा कि “जनता के विश्वास को जीतना ही आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।”
सीएम ने प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करने के लिए जन-संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। उन्होंने विशेष रूप से भूमि विवाद, पैमाइश और मेड़बंदी जैसे राजस्व संबंधी मामलों में तेजी लाने पर ज़ोर दिया।
“इन मामलों में देरी लोगों में निराशा लाती है। न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के बराबर होती है। इसीलिए त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है।”
संवाद, संवेदनशीलता और सकारात्मकता: सीएम का प्रशासनिक मंत्र
योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को यह मंत्र दिया कि अगर आप अच्छे संवाद, संवेदनशील व्यवहार और सकारात्मक सोच के साथ कार्य करेंगे तो न केवल आपकी कार्यशैली प्रभावी होगी बल्कि जनता से आपका जुड़ाव भी मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि एक अधिकारी को गरीब, वंचित और पीड़ित वर्गों के प्रति विशेष संवेदनशीलता रखनी चाहिए। “सिर्फ आंकड़े नहीं, आमजन का जीवन स्तर उठाना ही आपकी उपलब्धि होनी चाहिए।”
जनहित सर्वोपरि, ईमानदारी अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से निर्णय प्रक्रिया में ईमानदारी, पारदर्शिता और निष्पक्षता बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा में जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है।
“आपका एक फैसला किसी गरीब के जीवन को बदल सकता है। यह आपकी शक्ति है, लेकिन इसका प्रयोग सोच-समझकर करना होगा।”
मुख्यमंत्री योगी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा,
“आपका समर्पण और नवाचार उत्तर प्रदेश को नई दिशा देगा। आपकी मेहनत और सेवा से राज्य की नीति और जनता की नियति दोनों तय होंगी। काम की पारदर्शिता और निष्ठा ही आपको आगे लेकर जाएगी।”
इस अवसर पर उप्र प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) के निदेशक व्यंकटेश्वर लू, अपर निदेशक सुनील कुमार चौधरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
Karnataka land acquisition protest: कर्नाटक के चन्नारायपटना होबली क्षेत्र के तेरह गांवों में चल रहा भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 1188 दिनों से अपने खेत-खलिहानों को बचाने की जद्दोजहद कर रहे किसानों का यह संघर्ष राज्यभर के किसान, मजदूर, दलित, महिला, छात्र संगठनों और ‘संयुक्ता होराटा कर्नाटक’ के समर्थन से अब एक जनआंदोलन में बदल चुका है।
25 जून को ‘देवनहल्ली चलो’ और पुलिसिया दमन- Karnataka land acquisition protest
भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों ने 25 जून को ‘देवनहल्ली चलो’ अभियान के तहत विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस की बर्बर कार्रवाई ने आंदोलन को और तेज कर दिया। किसानों पर हुए इस अत्याचार ने राज्यभर में रोष और एकजुटता को जन्म दिया।
फ्रीडम पार्क बना संघर्ष का नया केंद्र- Karnataka land acquisition protest
27 जून से बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो चुका है। यहां से आंदोलनकारियों ने सरकार तक अपनी आवाज़ पहुंचाने का ऐलान किया। किसानों की प्रमुख मांग है – कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (KIADB) द्वारा चन्नारायपटना और देवनहल्ली के 13 गांवों से किए जा रहे 3,077 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहण को रद्द किया जाए। Karnataka land acquisition protest
4 जुलाई को मुख्यमंत्री के साथ बैठक, 10 दिन की मोहलत
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 4 जुलाई को आंदोलनकारियों की प्रतिनिधि समिति के साथ बैठक की। समिति में ‘संयुक्ता होराटा कर्नाटक’, संघर्ष समिति और अन्य समान विचारधारा वाले संगठनों के सदस्य मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतिम अधिसूचना पहले ही जारी हो चुकी है, इसलिए कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए उन्हें 10 दिन का समय चाहिए।
हालांकि किसानों का कहना है कि यह देरी अब असहनीय होती जा रही है और सरकार को वादा निभाना ही होगा। Karnataka land acquisition protest
‘सिद्धारमैया सरकार किसानों की वजह से बनी है’ – डॉ. सुनीलम
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने कहा,
“सिद्धारमैया सरकार को किसानों ने बनाया था, इसलिए अब उन्हें अपना वादा निभाना चाहिए। ज़मीन वापस देना उनका कर्तव्य है।”
टिकैत, युद्धवीर सिंह और प्रकाश राज का समर्थन
भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और महासचिव युद्धवीर सिंह ने भी इस संघर्ष में किसानों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ ज़मीन का नहीं, आत्मसम्मान और हक़ का है। अभिनेता प्रकाश राज भी किसानों के साथ खड़े हुए और पुलिसिया कार्रवाई की निंदा की।
प्रदर्शनकारी किसानों की मांगें
13 गांवों से प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को तुरंत रद्द किया जाए।
KIADB के अधिसूचना आदेश को रद्द किया जाए।
पुलिस दमन की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो।
कृषि भूमि पर औद्योगिक ज़ोन लागू न किया जाए।
मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया वादा सार्वजनिक रूप से दोहराया जाए।
यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, एक चेतावनी है
इस आंदोलन में छात्रों, महिलाओं और मजदूर संगठनों की भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि यह केवल किसानों की लड़ाई नहीं है, बल्कि जनहित की रक्षा का युद्ध है। प्रदर्शनकारी बार-बार दोहरा रहे हैं –
"धरती हमारी मां है, उसे हम किसी की फैक्ट्री का आंगन नहीं बनने देंगे।"
Shubman Gill head injury: भारत और इंग्लैंड के बीच चल रहे एजबेस्टन टेस्ट के तीसरे दिन भारतीय कप्तान शुभमन गिल के साथ एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। मैच के पहले दो दिन गिल ने बल्ले से ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए दोहरा शतक जड़ा, लेकिन तीसरे दिन फील्डिंग के दौरान उनके सिर पर गेंद लग गई। राहत की बात यह रही कि गेंद उनकी आंख से महज एक इंच की दूरी पर लगी और कोई गंभीर चोट नहीं आई।
गिल के दोहरे शतक के चर्चे- Shubman Gill head injury
शुभमन गिल इस मैच की पहली पारी में पूरी तरह छाए रहे। उन्होंने 208 रनों की जबरदस्त पारी खेली, जिसमें 25 चौके और 4 छक्के शामिल थे। यह गिल के टेस्ट करियर का पहला दोहरा शतक रहा और उन्होंने यह पारी बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में खेली। उनके इस प्रदर्शन से भारत ने पहली पारी में 445 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। Shubman Gill head injury
तीसरे दिन का खतरनाक मोड़- Shubman Gill head injury
4 जुलाई को मैच के तीसरे दिन इंग्लैंड ने 77/2 से अपनी पारी को आगे बढ़ाया। भारतीय गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने दो जल्दी विकेट निकालकर दबाव बनाया, लेकिन हैरी ब्रूक और जेमी स्मिथ ने तेजी से रन बनाते हुए भारत को बैकफुट पर डाल दिया।
इसी बीच रवींद्र जडेजा के 37वें ओवर में हैरी ब्रूक ने एक ताकतवर कट शॉट खेला जो बल्ले के किनारे से निकलकर सीधे स्लिप में खड़े कप्तान शुभमन गिल की ओर गया। गिल ने कैच लपकने की कोशिश की, लेकिन गेंद इतनी तेज थी कि वह उनके सिर के बाईं ओर जाकर लगी। Shubman Gill head injury
दर्दनाक टक्कर, लेकिन राहत की खबर
गेंद सीधे गिल के सिर पर लगी और वह दर्द से चीख उठे। गेंद और उनकी बाईं आंख के बीच महज 1 से 1.5 इंच की दूरी रही, जिसने बड़ी अनहोनी को टाल दिया। अगर गेंद सीधी आंख पर लगती तो गिल को गंभीर चोट पहुंच सकती थी, जो उनके करियर पर असर डाल सकती थी। Shubman Gill head injury
चोट लगते ही भारतीय टीम के फिजियो तुरंत मैदान पर पहुंचे और गिल की कनकशन जांच की गई। जांच में गिल फिट पाए गए और उन्होंने दोबारा मैदान पर फील्डिंग शुरू कर दी, जिससे फैंस और टीम प्रबंधन ने राहत की सांस ली।
कनकशन टेस्ट और सुरक्षा
गिल की चोट को गंभीर मानते हुए ICC की प्रोटोकॉल के तहत कनकशन टेस्ट किया गया। गनीमत रही कि गिल को किसी प्रकार की थकान, चक्कर या भ्रम की शिकायत नहीं थी। उनकी आंखें भी पूरी तरह सुरक्षित पाई गईं।
कप्तान की हिम्मत को सलाम
इस पूरे हादसे के बावजूद गिल का मैदान पर बने रहना और टीम के लिए डटे रहना उनकी कप्तानी और जज्बे को दर्शाता है। भारतीय फैंस ने सोशल मीडिया पर गिल की हिम्मत की जमकर सराहना की।
नई दिल्ली | स्पोर्ट्स डेस्क Chess Rapid Blitz 2025: भारतीय शतरंज प्रेमियों के लिए एक और गौरवपूर्ण क्षण तब सामने आया, जब ग्रैंडमास्टर डी. गुकेश ने एक बार फिर दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हरा दिया। यह जीत सुपर यूनाइटेड रैपिड और ब्लिट्ज टूर्नामेंट के रैपिड वर्ग में आई है, जहां गुकेश लगातार अपने शानदार प्रदर्शन से सबको चौंका रहे हैं।
छठे राउंड में गुकेश ने काले मोहरों से खेलते हुए कार्लसन को शिकस्त दी। यह उनकी कार्लसन पर लगातार दूसरी जीत है। इससे पहले, उन्होंने नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट के क्लासिकल प्रारूप में भी कार्लसन को पराजित किया था। Chess Rapid Blitz 2025
🔴 ब्रेकिंग | शतरंज दुनिया से बड़ी खबर ▪️ डी. गुकेश ने रैपिड ब्लिट्ज टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को फिर दी शिकस्त ▪️ गुकेश की टूर्नामेंट में लगातार पांचवीं जीत, 10 अंकों के साथ शीर्ष पर ▪️ हार के बाद बोले कार्लसन- "अब शतरंज… pic.twitter.com/03695SZSkt
🔸 टूर्नामेंट में शानदार बढ़त- Chess Rapid Blitz 2025
गुकेश की यह जीत इस टूर्नामेंट में उनकी लगातार पांचवीं जीत है और अब उनके कुल 12 में से 10 अंक हो चुके हैं। वह पोलैंड के खिलाड़ी डुडा जान क्रिस्टोफ से दो अंक आगे चल रहे हैं। रैपिड वर्ग में अब सिर्फ तीन मुकाबले शेष हैं, ऐसे में गुकेश खिताब के प्रबल दावेदार बन चुके हैं। Chess Rapid Blitz 2025
🔸 कार्लसन की निराशा छलकी- Chess Rapid Blitz 2025
हार के बाद मैग्नस कार्लसन काफी निराश नजर आए। उन्होंने कहा,
"ईमानदारी से कहूं तो मुझे अब शतरंज खेलने में मजा नहीं आ रहा है। जब मैं खेल रहा हूं, तो प्रवाह महसूस नहीं हो रहा। मेरा खेल लगातार बिगड़ता जा रहा है।"
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि गुकेश का खेल शानदार है और लगातार पांच जीत दर्ज करना आसान नहीं होता। यह बयान इस बात का संकेत है कि कार्लसन का आत्मविश्वास डगमगा गया है। Chess Rapid Blitz 2025
🔸 गुकेश की उपलब्धियां- Chess Rapid Blitz 2025
गुकेश ने हाल ही में विश्व शतरंज चैंपियनशिप के लिए उम्मीदवार बनने का गौरव भी हासिल किया था। वह इस समय भारतीय शतरंज का नया चेहरा बनते जा रहे हैं। कार्लसन जैसे खिलाड़ी को हराकर उन्होंने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारत में शतरंज की नई पीढ़ी तैयार है, जो दुनिया को चुनौती देने में सक्षम है।
Krishna Janmbhoomi case: मथुरा के बहुचर्चित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। हिंदू पक्ष की ओर से मस्जिद को “विवादित ढांचा” घोषित करने की याचिका को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया है।
🔴 ब्रेकिंग | मथुरा जन्मभूमि मामला ▪️ श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद में हिंदू पक्ष को झटका ▪️ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की ▪️ मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित करने की याचिका नामंजूर ▪️ कोर्ट ने कहा- तथ्यों के आधार पर नहीं कहा जा सकता विवादित ▪️ अगली सुनवाई की तारीख… pic.twitter.com/JuVISgScjQ
इस फैसले को हिंदू पक्ष के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि याचिका में मांग की गई थी कि जैसे बाबरी मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित किया गया था, वैसे ही शाही ईदगाह को भी घोषित किया जाए। Krishna Janmbhoomi case
🔹 हाईकोर्ट ने क्या कहा? –Krishna Janmbhoomi case
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि “मौजूद तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित ढांचा नहीं माना जा सकता।”
2 अगस्त 2025 को इस मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की गई है। इससे पहले 5 मार्च 2025 को हिंदू पक्ष ने यह याचिका दाखिल की थी, जिस पर 23 मई को बहस पूरी होने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा गया था।
🔹 हिंदू पक्ष का क्या कहना था? –Krishna Janmbhoomi case
हिंदू पक्ष के वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया था कि ईदगाह मस्जिद का निर्माण श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बने प्राचीन मंदिर को तोड़कर किया गया था, जो ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से गलत है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष इस बात का आज तक कोई प्रामाणिक सबूत पेश नहीं कर सका कि वहां कभी मस्जिद थी। Krishna Janmbhoomi case
🔹 मुस्लिम पक्ष का पक्ष- Krishna Janmbhoomi case
मुस्लिम पक्ष लगातार यह कहता आया है कि ईदगाह मस्जिद वैध रूप से अस्तित्व में है और उसे तोड़े गए किसी मंदिर की जमीन पर नहीं बनाया गया। वे 1968 में हुए समझौते का हवाला देते हैं, जिसमें जन्मभूमि ट्रस्ट और ईदगाह कमेटी के बीच सहमति से भूमि का विभाजन किया गया था। Krishna Janmbhoomi case
🔹 क्या है विवाद की जड़?- Krishna Janmbhoomi case
यह विवाद मथुरा के कटरा केशव देव क्षेत्र की 13.37 एकड़ भूमि को लेकर है, जिसमें श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही ईदगाह दोनों स्थित हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि 1670 में मुगल शासक औरंगजेब ने श्रीकृष्ण मंदिर को तुड़वाकर उसकी जगह मस्जिद बनवाई थी। वे पूरी भूमि को श्रीकृष्ण जन्मस्थान बताते हैं। Krishna Janmbhoomi case
वहीं मुस्लिम पक्ष इस दावे को सिरे से खारिज करता है और दोनों धार्मिक स्थलों के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व की बात करता है। Krishna Janmbhoomi case
यह मामला पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टिकोण से अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। अयोध्या राम मंदिर फैसले के बाद इस मुद्दे पर हिंदू संगठनों की सक्रियता बढ़ी है, लेकिन अदालतें अब तक मौजूद तथ्यों के आधार पर निर्णय ले रही हैं।
Bihar Assembly Election 2025: बिहार की सियासत में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एक बड़ा ट्विस्ट देखने को मिल रहा है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। इस पेशकश ने बिहार के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर और तेजस्वी यादव से संपर्क साधकर इस गठबंधन की संभावनाओं को तलाशने की कोशिश की है। हालांकि, अभी तक RJD की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। इस बीच, सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह ओवैसी का सियासी मास्टरस्ट्रोक है या फिर केवल एक रणनीतिक दांव?
AIMIM का सियासी दांव: महागठबंधन में शामिल होने की पेशकश- Bihar Assembly Election 2025
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। AIMIM ने इस बार एक चौंकाने वाला कदम उठाया है और खुद को INDIA ब्लॉक का हिस्सा बनाने की पेशकश की है। इस कदम ने महागठबंधन के मौजूदा सहयोगी दलों में खलबली मचा दी है। महागठबंधन में पहले से ही छह दल शामिल हैं, जिनमें RJD, कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिबरेशन), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय राष्ट्रीय लीग, और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शामिल हैं। इसके अलावा, मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) भी गठबंधन का हिस्सा बन चुकी है।
अब AIMIM की इस पेशकश और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की 12-13 सीटों की मांग ने सीट बंटवारे की चुनौतियों को और जटिल कर दिया है। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं, और गठबंधन के सहयोगी दलों की डिमांड पहले ही 196 सीटों तक पहुंच चुकी है। कांग्रेस 70, VIP 60, माले 42, और CPI 24 सीटों की मांग कर रही है, जबकि RJD खुद 138 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। ऐसे में AIMIM को शामिल करना गठबंधन के लिए आसान नहीं होगा।
ओवैसी का पत्र: सेक्युलर वोटों को एकजुट करने की अपील- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने 2 जुलाई को लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई। पत्र में उन्होंने 2020 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी पार्टी पहले भी गठबंधन में शामिल होने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बार AIMIM ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर सेक्युलर वोटों को एकजुट किया जाए तो बिहार में NDA को सत्ता से बेदखल किया जा सकता है।
ईमान ने कहा, “हमारी पार्टी NDA को हराने के लिए गंभीर है। अगर महागठबंधन हमें साथ लेता है, तो हम सेक्युलर वोटों का बिखराव रोक सकते हैं।” AIMIM ने RJD और कांग्रेस के कुछ विधायकों से भी संपर्क साधा है और इस प्रस्ताव को विचाराधीन बताया है। हालांकि, RJD और कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं आया है। Bihar Assembly Election 2025
महागठबंधन की दुविधा: AIMIM को शामिल करें या नहीं?- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM की इस पेशकश ने महागठबंधन के सामने एक बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है। एक तरफ, AIMIM को साथ लेने से मुस्लिम वोटों की मजबूत पकड़ मिल सकती है, खासकर सीमांचल क्षेत्र में, जहां AIMIM का प्रभाव है। दूसरी तरफ, सीट बंटवारे की पहले से ही जटिल स्थिति और AIMIM के ‘कट्टरपंथी’ टैग की आशंका गठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। Bihar Assembly Election 2025
RJD और कांग्रेस लंबे समय से AIMIM को BJP की ‘B टीम’ कहकर निशाना साधते रहे हैं। तेजस्वी यादव ने कई मौकों पर ओवैसी पर NDA के लिए वोट काटने का आरोप लगाया है। ऐसे में AIMIM को गठबंधन में शामिल करना RJD के लिए जोखिम भरा हो सकता है। अगर AIMIM को शामिल नहीं किया गया, तो सीमांचल में मुस्लिम वोटों का बिखराव NDA को फायदा पहुंचा सकता है। Bihar Assembly Election 2025
सीमांचल में AIMIM की ताकत- Bihar Assembly Election 2025
बिहार की सियासत में सीमांचल का इलाका मुस्लिम वोटों के लिहाज से बेहद अहम है। 2020 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा और 5 सीटों (अमौर, बहादुरगंज, बैसी, जोकीहाट, और कोचाधामन) पर जीत हासिल की। पार्टी को कुल 5,23,279 वोट (1.24% वोट शेयर) मिले थे। हालांकि, बाद में AIMIM के चार विधायक RJD में शामिल हो गए थे, लेकिन सीमांचल में पार्टी की जमीनी पकड़ बनी रही। Bihar Assembly Election 2025
2024 के लोकसभा चुनाव में AIMIM ने 8 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 3,82,660 वोट (0.9% वोट शेयर) हासिल किए। ओवैसी ने हाल ही में किशनगंज दौरे पर कहा था कि उनकी पार्टी 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और 24 सीटें जीतने का लक्ष्य रखेगी। यह बयान तेजस्वी यादव के लिए एक खुली चुनौती माना जा रहा है। Bihar Assembly Election 2025
ओवैसी की रणनीति: हिस्सेदारी या दिखावा?- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM की इस पेशकश को सियासी जानकार दो तरह से देख रहे हैं। कुछ का मानना है कि ओवैसी वाकई NDA को हराने के लिए महागठबंधन के साथ गंभीरता से काम करना चाहते हैं। दूसरी ओर, कुछ इसे एक रणनीतिक दांव मान रहे हैं, जिससे ओवैसी ‘BJP की B टीम’ के आरोपों से बच सकें। अगर AIMIM को गठबंधन में शामिल नहीं किया गया, तो ओवैसी इसका इस्तेमाल विपक्ष को घेरने के लिए कर सकते हैं। Bihar Assembly Election 2025
ओवैसी ने कहा, “हम हिस्सेदारी चाहते हैं, गुलामी नहीं। मुस्लिम वोटर अब सिर्फ वोट ट्रांसफर का जरिया नहीं बनना चाहते।” यह बयान RJD और तेजस्वी यादव के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि AIMIM सत्ता में बराबर की भागीदारी चाहती है।
महागठबंधन में दरारें- Bihar Assembly Election 2025
AIMIM की पेशकश के बीच महागठबंधन के भीतर पहले से ही तनाव दिख रहा है। JMM ने 12-13 सीटों की मांग की है और इस बात से नाराज है कि उसे अब तक किसी बैठक में शामिल नहीं किया गया। कांग्रेस ने भी स्पष्ट किया है कि AIMIM ने उन्हें कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने कहा, “ओवैसी ने हमें कोई ऑफर नहीं दिया। यह सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए।” Bihar Assembly Election 2025
वहीं, RJD नेता मृत्यंजय तिवारी ने कहा, “AIMIM का ट्रैक रिकॉर्ड BJP की B टीम का रहा है, लेकिन अब जब उन्होंने महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है, तो इसका फैसला लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव लेंगे।” Bihar Assembly Election 2025
महागठबंधन के सामने अब यह सवाल है कि क्या AIMIM को शामिल करना फायदेमंद होगा। सीमांचल में AIMIM की मौजूदगी से मुस्लिम वोटों को एकजुट किया जा सकता है, जो NDA के खिलाफ एक मजबूत रणनीति हो सकती है। लेकिन अगर सीट बंटवारे में असंतुलन हुआ, तो गठबंधन के सहयोगी दलों में नाराजगी बढ़ सकती है।
दूसरी तरफ, अगर AIMIM अकेले चुनाव लड़ती है, तो वह सीमांचल की 24-30 सीटों पर प्रभाव डाल सकती है, जिससे RJD और कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। 2020 में AIMIM की वजह से RJD को सीमांचल में कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले AIMIM की पेशकश ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। ओवैसी की यह रणनीति महागठबंधन के लिए एक अवसर और चुनौती दोनों है। अगर गठबंधन AIMIM को शामिल करता है, तो मुस्लिम वोटों की एकजुटता से NDA को कड़ी टक्कर दी जा सकती है। लेकिन अगर AIMIM को दरकिनार किया गया, तो वोटों का बिखराव गठबंधन की हार का कारण बन सकता है। अब गेंद लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के पाले में है। क्या वे इस सियासी दांव को स्वीकार करेंगे या इसे ठुकराकर अपनी रणनीति पर कायम रहेंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।
सोनभद्र/मनोज कुमार SONBHADRA CONGRESS PROTESTS: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे विद्यालयों के विलय कार्यक्रम के खिलाफ अब विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। इसी क्रम में 4 जुलाई को सोनभद्र में कांग्रेस पार्टी ने ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन जिला अध्यक्ष रामराज गोंड़ के नेतृत्व में हुआ, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय में सौंपा। SONBHADRA CONGRESS PROTESTS
🔴 सोनभद्र से बड़ी खबर
🔴 कांग्रेस का प्रदर्शन, 🔴 विद्यालयों के विलय के खिलाफ कलेक्ट्रेट में नारेबाजी, 🔴 राज्यपाल के नाम सौंपा गया ज्ञापन, 🔴 सरकार के फैसले को बताया शिक्षा विरोधी, 🔴 मिड-डे मील कर्मचारियों की नौकरी पर संकट का आरोप, 🔴 विलय का फैसला वापस लेने की मांग पर… pic.twitter.com/GRC06KLu0i
कांग्रेस का विरोध: संविधान और अधिकारों के खिलाफ़- SONBHADRA CONGRESS PROTESTS
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह निर्णय संविधान की मूल भावना और बच्चों के शिक्षा के अधिकार के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों के विलय से न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी, बल्कि इससे जुड़े मिड डे मील कर्मचारियों, शिक्षकों और अभिभावकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। SONBHADRA CONGRESS PROTESTS
कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामराज गोंड़ ने कहा –
"सरकार का यह फैसला शिक्षा के क्षेत्र में भारी अव्यवस्था और असमानता को जन्म देगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही सुविधाओं की कमी है, और अब स्कूलों को बंद कर बच्चों को दूर भेजा जा रहा है।"
🔹 मिड-डे-मील व रोजगार पर संकट
प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि विद्यालयों के विलय से मिड-डे-मील योजना में कार्यरत हजारों रसोइयों और सहयोगियों की नौकरी खतरे में पड़ गई है। कई स्कूलों में ताले लग चुके हैं और कर्मचारियों को हटाया जा रहा है। वहीं ग्रामीण इलाके के छात्रों को स्कूल पहुंचने में दूरी, सुरक्षा और सुविधा से समझौता करना पड़ रहा है।
वक्ताओं ने मांग की कि सरकार को यह फैसला तत्काल वापस लेना चाहिए और इसकी जगह नए स्कूल खोलकर शिक्षा को सुलभ बनाया जाना चाहिए।
🔹 मांग पत्र में शामिल प्रमुख बिंदु:-
प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों के विलय का निर्णय रद्द किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में नये स्कूल खोले जाएं।
मिड डे मील से जुड़े कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित की जाए।
शिक्षा के अधिकार को प्रभावित करने वाले निर्णयों को लोकतांत्रिक संवाद के माध्यम से लिया जाए।
🔹 शांतिपूर्ण प्रदर्शन, भारी सुरक्षा
प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से नारेबाजी की और सरकार के फैसले की आलोचना की।
जिलाधिकारी कार्यालय में ओएसडी के माध्यम से राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें स्पष्ट रूप से सरकार के निर्णय को वापस लेने की अपील की गई।
FARRUKHABAD MINING BAN: उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में प्रशासन ने गंगा और अन्य नदियों में हो रहे खनन कार्यों पर पूर्ण रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 1 जुलाई से 30 सितंबर 2025 तक प्रभावी रहेगा। ADM अरुण कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि इस अवधि में किसी भी प्रकार का खनन अवैध माना जाएगा और ऐसा करने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
🔴 ब्रेकिंग न्यूज़ | फर्रुखाबाद 📍 गंगा और अन्य नदियों में खनन पर तीन महीने की रोक ▪️ 1 जुलाई से 30 सितंबर तक खनन पर पूर्ण प्रतिबंध ▪️ ADM अरुण कुमार सिंह ने की सख्त चेतावनी ▪️ सभी खनन व भंडारण पट्टों का काम किया गया बंद ▪️ अवैध खनन रोकने के लिए टास्क फोर्स टीम गठित ▪️ खनन… pic.twitter.com/2SR6x7y1Ew
ADM ने बताया कि वर्तमान में जिले में तीन खनन पट्टे और दो भंडारण पट्टे सक्रिय हैं। लेकिन अब सभी प्रकार की खनन गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। इसके साथ ही खनन टास्क फोर्स टीम का गठन कर दिया गया है, जो जिलेभर में अवैध खनन की निगरानी करेगी। FARRUKHABAD MINING BAN
टास्क फोर्स की जिम्मेदारी और संरचना
खनन रोकने के उद्देश्य से गठित टास्क फोर्स में शामिल किए गए हैं:-
खनन अधिकारी
एआरटीओ (प्रवर्तन)
सभी एसडीएम और सीओ
पुलिस और प्रशासन के अन्य अधिकारी
इन सभी को उनके-अपने क्षेत्रों में अवैध खनन को रोकने की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी सौंपी गई है। ADM ने कहा कि “यदि कहीं से भी खनन की शिकायत मिलती है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।”
ADM ने दी सख्त चेतावनी– FARRUKHABAD MINING BAN
ADM अरुण कुमार सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि खनन पट्टेदार या भंडार पट्टेदार यदि किसी भी रूप में खनन करते पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ प्रशासनिक, आर्थिक और कानूनी कार्यवाही की जाएगी। यह आदेश पर्यावरण संरक्षण और नदी संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है।
पर्यावरणीय दृष्टिकोण से निर्णय जरूरी– FARRUKHABAD MINING BAN
गंगा और अन्य नदियों में लगातार हो रहे खनन कार्यों से न केवल नदी की गहराई और प्रवाह पर असर पड़ रहा था, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र भी प्रभावित हो रहा था। यही वजह है कि शासन स्तर पर जुलाई से सितंबर तक खनन पर रोक का निर्णय लिया गया है।
भविष्य में लगातार निगरानी
ADM ने बताया कि भविष्य में भी अवैध खनन को रोकने के लिए ड्रोन सर्विलांस, चेकिंग अभियान, और स्थानीय पुलिस की मदद से गश्त बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि यदि उन्हें कहीं खनन होता दिखाई दे, तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें।