नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 28 मई 2025 को किसानों और बुनियादी ढांचे को (MSP PRICE HIKE UPDATE) मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए. इनमें खरीफ फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की ब्याज सब्सिडी योजना को आगे बढ़ाना और रेलवे व सड़क परियोजनाओं को मंजूरी शामिल है. ये कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेंगे, बल्कि देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नई गति देंगे. आइए, इन फैसलों को विस्तार से समझते हैं. MSP PRICE HIKE UPDATE
Another important step of PM @narendramodi Ji's government in the interest of Farmers.
खरीफ फसलों की MSP में बढ़ोतरी- MSP PRICE HIKE UPDATE
केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन की 14 फसलों की MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है. यह फैसला किसानों को बाजार की अनिश्चितताओं से बचाने और उनकी आय को स्थिर करने के लिए लिया गया है. केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि धान की नई MSP 2,369 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है, जो पिछले साल की तुलना में 69 रुपये अधिक है. कपास की दो किस्मों की MSP भी बढ़ाई गई है—एक की 7,710 रुपये और दूसरी की 8,110 रुपये प्रति क्विंटल, जो 589 रुपये की वृद्धि दर्शाती है. MSP PRICE HIKE UPDATE
1. Significant increase in MSP – ensuring dignity, stability, and prosperity for our Annadatas.
✅Union Cabinet chaired by PM @narendramodi Ji has approved the increase in Minimum Support Prices (MSP) for the kharif marketing season 2025–26. pic.twitter.com/SDYNkhWMLY
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) May 28, 2025
इसके अलावा, सोयाबीन, अरहर, मूंग, उड़द और मक्का जैसी अन्य खरीफ फसलों की MSP में भी वृद्धि की गई है. सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि MSP फसल की लागत से कम से कम 50% अधिक हो, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले. इस बढ़ोतरी से सरकार पर 2 लाख 7 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो पिछले सीजन की तुलना में 7,000 करोड़ रुपये अधिक है. MSP PRICE HIKE UPDATE
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह गारंटीड कीमत है, जो सरकार किसानों को उनकी फसलों के लिए देती है, भले ही बाजार में कीमतें कम हों। इसका उद्देश्य किसानों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करना और बाजार की अनिश्चितताओं से उनकी रक्षा करना है। MSP का निर्धारण कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइजेज (CACP) की सिफारिशों के आधार पर किया जाता है। यह एक तरह की बीमा पॉलिसी की तरह काम करता है, जो बम्पर पैदावार के कारण कीमतें गिरने पर भी किसानों को न्यूनतम आय सुनिश्चित करता है.
खरीफ सीजन 2025-26 के लिए फसलों की नई MSP (रुपये/क्विंटल)
फसल का नाम
2024-25 की MSP (₹/क्विंटल)
2025-26 की MSP (₹/क्विंटल)
वृद्धि (₹)
मक्का
2,225
2,400
175
मूंग
8,682
8,768
86
बाजरा
2,625
2,775
150
कपास (लंबा रेशा)
7,521
8,110
589
धान (सामान्य)
2,300
2,369
69
कपास (मध्यम रेशा)
7,121
7,710
589
सूरजमुखी
7,280
7,721
441
ज्वार (हाइब्रिड)
3,371
3,699
328
ज्वार (मालदांडी)
3,421
3,749
328
तुअर/अरहर
7,550
8,000
450
उड़द
7,400
7,800
400
रागी
4,290
4,886
596
सोयाबीन (पीला)
4,892
5,328
436
तिल
9,267
9,846
579
रामतिल
8,717
9,537
820
मूंगफली (शुद्ध)
6,783
7,263
480
धान (A ग्रेड)
2,320
2,389
69
MSP के तहत 23 फसलों को शामिल किया गया है, जिनमें 7 अनाज (धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार, रागी, जौ), 5 दालें (चना, अरहर, मूंग, उड़द, मसूर), 7 तिलहन (रेपसीड-सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, कुसुम, निगरसीड) और 4 व्यावसायिक फसलें (कपास, गन्ना, खोपरा, कच्चा जूट) शामिल हैं. खरीफ फसलें, जैसे धान, मक्का, कपास, सोयाबीन आदि, जून-जुलाई में बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर में उनकी कटाई होती है.
#UnionCabinet has approved Minimum Support Prices (MSP) for 14 Kharif Crops for Marketing Season 2025-26, including Nigerseed, Ragi, Bajra, Maize, and Tur.
The increase in MSP for Kharif Crops for Marketing Season 2025-26 is in line with the Union Budget 2018-19 announcement of… pic.twitter.com/pliMxnjGuq
— Ministry of Information and Broadcasting (@MIB_India) May 28, 2025
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ब्याज सब्सिडी योजना
केंद्र सरकार ने किसानों को सस्ते लोन उपलब्ध कराने के लिए KCC की ब्याज सब्सिडी योजना (Modified Interest Subvention Scheme – MISS) को वित्त वर्ष 2025-26 तक बढ़ाने का फैसला किया है. इस योजना के तहत किसान 3 लाख रुपये तक का लोन 7% की ब्याज दर पर ले सकते हैं. समय पर लोन चुकाने वाले किसानों को 3% की अतिरिक्त ब्याज छूट मिलती है, जिससे उनकी प्रभावी ब्याज दर केवल 4% रह जाती है.
पशुपालन और मछली पालन के लिए भी 2 लाख रुपये तक के लोन पर यह लाभ उपलब्ध है. इस योजना के लिए सरकार ने पर्याप्त फंड आवंटित किया है, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके. यह कदम छोटे और मध्यम किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण साबित होगा.
रेलवे और सड़क परियोजनाओं को मंजूरी
किसानों के साथ-साथ, सरकार ने देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी बड़े कदम उठाए हैं. कैबिनेट ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में रेलवे की दो मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इनमें रतलाम-नागदा के बीच तीसरी और चौथी लाइन और वर्धा-बल्हारशाह के बीच चौथी लाइन शामिल है. इन परियोजनाओं की कुल लागत 3,399 करोड़ रुपये है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य है. ये परियोजनाएं रेल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएंगी और माल ढुलाई को गति देंगी.
इसके अलावा, आंध्र प्रदेश में बडवेल-नेल्लोर के बीच 108 किलोमीटर लंबे फोर-लेन हाईवे को मंजूरी दी गई है. इस परियोजना की लागत 3,653 करोड़ रुपये है. यह हाईवे कृष्णापटनम पोर्ट और नेशनल हाईवे-67 को जोड़ेगा, जिससे पोर्ट कनेक्टिविटी में सुधार होगा. यह सड़क तीन प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोर—विशाखापट्टनम-चेन्नई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (VCIC), हैदराबाद-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (HBIC) और चेन्नई-बेंगलुरु इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (CBIC)—के नोड्स को भी जोड़ेगी.
इन फैसलों का प्रभाव
MSP में बढ़ोतरी से किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी. KCC ब्याज सब्सिडी योजना का विस्तार छोटे और सीमांत किसानों को सस्ता लोन उपलब्ध कराएगा, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी. साथ ही, रेलवे और सड़क परियोजनाएं देश के परिवहन नेटवर्क को बेहतर बनाएंगी, जिससे व्यापार और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा.
औरैया: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले की ग्राम पंचायत अयाना में बसा भूरेपुर खुर्द गांव यमुना नदी के किनारे अपनी (KALPVRIKSHA TREE IN INDIA) ऐतिहासिक और पौराणिक कहानियों के लिए जाना जाता है. इस छोटे से गांव में प्रकृति का एक अनमोल रत्न छिपा है—कल्पवृक्ष, जो न केवल स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अद्वितीय है. गांव के निवासियों का कहना है कि औरैया में शायद ही कहीं और ऐसा वृक्ष देखने को मिले. उत्तर प्रदेश में यह पेड़ कुछ ही स्थानों जैसे प्रयागराज, हमीरपुर, और बाराबंकी में पाया जाता है, जबकि राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है. आइए, इस लेख में हम इस रहस्यमयी वृक्ष की कहानी, इसके पौराणिक महत्व, वैज्ञानिक पहलुओं, और औषधीय गुणों को विस्तार से जानते हैं. KALPVRIKSHA TREE IN INDIA
यमुना नदी के किनारे बसे भूरेपुर खुर्द गांव में कल्पवृक्ष का रहस्य. (Photo Credit- Nation Now Samachar)
कल्पवृक्ष का पौराणिक महत्व- KALPVRIKSHA TREE IN INDIA
हिंदू धर्म में कल्पवृक्ष को स्वर्ग का विशेष वृक्ष माना जाता है. पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान 14 रत्नों में से एक के रूप में कल्पवृक्ष की उत्पत्ति हुई थी. इसे देवराज इंद्र को भेंट किया गया था, जिन्होंने इसे हिमालय के उत्तरी क्षेत्र में ‘सुरकानन वन’ में स्थापित किया. पद्मपुराण में इसे परिजात वृक्ष के रूप में भी पहचाना गया है. मान्यता है कि इस वृक्ष के नीचे सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है, क्योंकि यह अपार सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है. KALPVRIKSHA TREE IN INDIA
स्थानीय लोग बताते हैं कि भूरेपुर खुर्द का यह कल्पवृक्ष न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह गांव की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी हिस्सा है. श्रद्धालु इसकी छाया में बैठकर प्रार्थना करते हैं और अपनी इच्छाओं को पूर्ण होने की उम्मीद रखते हैं. इसकी शाखाएं और पत्तियां भी लोगों के लिए पवित्र मानी जाती हैं.
वैज्ञानिक पहलू: ओलिया कस्पिडाटा और बंबोकेसी- KALPVRIKSHA TREE IN INDIA
कल्पवृक्ष का वैज्ञानिक नाम ओलिया कस्पिडाटा (Adansonia digitata) है, और यह ओलिएसी कुल का हिस्सा है. भारत में इसे वानस्पतिक रूप से बंबोकेसी के नाम से जाना जाता है. इस वृक्ष को पहली बार 1775 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक माइकल अडनसन ने अफ्रीका के सेनेगल में खोजा था, जिसके बाद इसका नाम अडनसोनिया टेटा रखा गया. इसे बाओबाब वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है. यह पेड़ यूरोप के फ्रांस और इटली, दक्षिण अफ्रीका, और ऑस्ट्रेलिया में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. KALPVRIKSHA TREE IN INDIA
भूरेपुर खुर्द गांव में कल्पवृक्ष आकर्षण का केंद्र बना. (Photo Credit – Nation Now Samachar)
भारत में यह वृक्ष दुर्लभ है और केवल कुछ चुनिंदा स्थानों जैसे रांची, अल्मोड़ा, काशी, नर्मदा नदी के किनारे, कर्नाटक, और उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, हमीरपुर और अब औरैया में देखने को मिलता है. भूरेपुर खुर्द का यह वृक्ष अपनी विशालता और लंबी आयु के लिए प्रसिद्ध है. कार्बन डेटिंग के अनुसार, इस तरह के वृक्षों की आयु 2,000 से 6,000 वर्ष तक हो सकती है. KALPVRIKSHA TREE IN INDIA
कल्पवृक्ष की अनोखी विशेषताएं- KALPVRIKSHA TREE IN INDIA
कल्पवृक्ष की संरचना इसे अन्य वृक्षों से अलग बनाती है. इसकी लकड़ी में पानी की मात्रा लगभग 79% होती है, जिसके कारण यह सीधा और मजबूत रहता है. इसका तना मोटा और खोखला होता है, जो इसे 1 लाख लीटर से अधिक पानी संग्रह करने की क्षमता देता है. यही कारण है कि इसे ‘जीवन का वृक्ष’ भी कहा जाता है. इसकी छाल से रंगरेज रंजक (डाई) बनाते हैं, और इसका उपयोग चीजों को सघन करने में भी किया जाता है.
इसके अलावा, यह वृक्ष औषधीय गुणों से भरपूर है. इसकी पत्तियों को धोकर या उबालकर खाया जा सकता है, जबकि छाल, फल, और फूलों का उपयोग आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने में होता है. इसमें संतरे से छह गुना अधिक विटामिन सी और गाय के दूध से दोगुना कैल्शियम पाया जाता है, जो इसे एक औषधीय खजाना बनाता है.
भूरेपुर खुर्द में कल्पवृक्ष का महत्व- KALPVRIKSHA TREE IN INDIA
भूरेपुर खुर्द के निवासियों के लिए यह वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं बल्कि उनकी आस्था और गर्व का प्रतीक है. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस वृक्ष की मौजूदगी ने गांव को एक विशेष पहचान दी है. यमुना नदी के किनारे बसे इस गांव में आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इस वृक्ष को देखने और इसके नीचे ध्यान लगाने के लिए आते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि इसकी सकारात्मक ऊर्जा न केवल मन को शांति देती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है.
संरक्षण की जरूरत- KALPVRIKSHA TREE IN INDIA
कल्पवृक्ष जैसी दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण आज के समय में अत्यंत आवश्यक है. भूरेपुर खुर्द का यह वृक्ष न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि पर्यावरण और जैव-विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण है. वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को इसके संरक्षण के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए. अनुसंधान केंद्रों के माध्यम से इस प्रजाति को अन्य क्षेत्रों में भी रोपित करने की पहल होनी चाहिए, ताकि यह विलुप्त होने से बचे.
अन्य क्षेत्रों में कल्पवृक्ष
उत्तर प्रदेश के अलावा, भारत में यह वृक्ष रांची के दोरांडा क्षेत्र, ग्वालियर के कोलारस, और राजस्थान के मांगलियावास जैसे स्थानों पर पाया जाता है। बाराबंकी के बोरोलिया में मौजूद परिजात वृक्ष को भी कल्पवृक्ष माना जाता है, जिसकी आयु 5,000 वर्ष से अधिक बताई गई है। इन सभी स्थानों पर यह वृक्ष श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
बरेली. उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग (BAREILLY FAKE POLICE INSPECTOR) को गिरफ्तार किया है, जो खुद को दरोगा बताकर लोगों को विदेश भेजने का झांसा देता था और अब तक करीब 20 लाख रुपये की ठगी कर चुका है. आरोपी हूटर और फ्लैशर से सजी महिंद्रा XUV गाड़ी में घूमता था, वर्दी पहनकर पुलिस अधिकारी की तरह रौब झाड़ता और लोगों को ठगने का काम करता था. BAREILLY FAKE POLICE INSPECTOR
नकली वर्दी, असली ठगी- BAREILLY FAKE POLICE INSPECTOR
फरीदपुर थाना पुलिस की त्वरित कार्रवाई में इस फर्जी दरोगा की पोल खुल गई. पुलिस को उसके पास से एक फर्जी आईडी कार्ड, पुलिस जैसी वर्दी और महिंद्रा XUV गाड़ी बरामद हुई है. पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी नशे का आदी है और नशे की हालत में ही लोगों को धमकाकर ठगी करता था.
🟥 ब्रेकिंग | बरेली में फर्जी दरोगा गिरफ्तार, 20 लाख की ठगी का खुलासा 🟥 🔴 हूटर-फ्लैशर लगी SUV से घूमता था फर्जी दरोगा 🔴 लोगों को विदेश भेजने के नाम पर ठगे 20 लाख रुपये 🔴 महिंद्रा XUV, फर्जी आईडी और पुलिस वर्दी बरामद 🔴 नशे का आदी था आरोपी, धौंस दिखाकर करता था ठगी 🔴 फरीदपुर… pic.twitter.com/LyHWwhQgGA
🔍 कैसे करता था ठगी? – BAREILLY FAKE POLICE INSPECTOR
आरोपी खुद को पुलिस का अधिकारी बताकर लोगों से कहता था कि वह विदेश भेजने में मदद कर सकता है. इस बहाने वह हर व्यक्ति से लाखों रुपये वसूलता. गाड़ी में हूटर और पुलिस फ्लैशर होने के कारण लोग उस पर आसानी से भरोसा कर लेते. उसकी गाड़ी और वर्दी देखकर किसी को उस पर शक नहीं होता था. BAREILLY FAKE POLICE INSPECTOR
🚔 पुलिस की सक्रियता से खुली पोल- BAREILLY FAKE POLICE INSPECTOR
फरीदपुर थाना प्रभारी की टीम ने आरोपी की हरकतों की खबर मिलने पर उसे पकड़ने के लिए जाल बिछाया. जांच में पाया गया कि उसके पास कोई वैध पुलिस पहचान पत्र नहीं था और उसकी पूरी पहचान फर्जी थी. उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है.
सीओ फरीदपुर संदीप सिंह ने बताया, “यह मामला लोगों के लिए सबक है कि हर वर्दी पर आंख मूंद कर भरोसा न करें. कोई भी व्यक्ति पुलिस अधिकारी है या नहीं, इसकी पुष्टि जरूर करें.”
📌 ये सबक भी जरूरी है:
इस घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि सिर्फ वर्दी, हूटर और रौब देखकर किसी पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है. आम नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए और पुलिस से जुड़ी किसी भी सेवाओं का लाभ लेने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच जरूर करनी चाहिए.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मौसम का मिज़ाज एक बार फिर (UP RAIN ALERT) बदलता नजर आ रहा है. बीते 24 घंटों में कहीं हल्की फुहारें तो कहीं तेज़ हवाओं ने लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत तो दी, लेकिन उमस भरी गर्मी ने फिर से बेहाल कर दिया. राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में तेज धूप और वातावरण में नमी के कारण लोगों का हाल खराब रहा. UP RAIN ALERT
मौसम विज्ञान विभाग ने प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में तेज़ बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है. विभाग के अनुसार, अगले 5 दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का यही रुख बना रहेगा.
राजधानी लखनऊ में मंगलवार को सुबह से ही आसमान साफ रहा और सूरज ने अपनी तेज किरणों से लोगों को जमकर तपाया. हालांकि अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया जो सामान्य से 2 डिग्री कम रहा, लेकिन उमस ने गर्मी का अहसास और बढ़ा दिया. न्यूनतम तापमान 27 डिग्री दर्ज किया गया. UP RAIN ALERT
यूपी चार-पांच दिन भारी बारिश का अलर्ट- (Photo Credit- Social media)
बुधवार को मौसम विभाग ने दिनभर आसमान में बादलों की आंशिक आवाजाही और बीच-बीच में तेज धूप रहने की संभावना जताई है. अधिकतम तापमान 38 और न्यूनतम 28 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है. UP RAIN ALERT
30 जिलों में मौसम विभाग का अलर्ट– UP RAIN ALERT
मौसम विभाग ने जिन जिलों के लिए चेतावनी जारी की है उनमें शामिल हैं – सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संतकबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, फर्रुखाबाद, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर और बदायूं.
इन जिलों में तेज़ बारिश, बिजली गिरने और हवाओं की गति 30-50 किलोमीटर प्रति घंटे तक होने की संभावना जताई गई है.
मौसम विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है, खासकर खुले स्थानों पर बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए. तेज हवाएं भी कई क्षेत्रों में चल सकती हैं, जिससे पेड़ों के गिरने या अन्य नुकसान की संभावना बनी हुई है.
लखनऊ में मौसम का हाल- UP RAIN ALERT
राजधानी लखनऊ में मंगलवार को सुबह से ही आसमान साफ रहा और तेज धूप ने लोगों को परेशान किया. नमी के कारण उमस भरी गर्मी का असर बढ़ा, जिससे दिनभर लोग पसीने से तर-बतर रहे. मंगलवार को लखनऊ का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2 डिग्री कम है, जबकि न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
— India Meteorological Department (@Indiametdept) May 28, 2025
मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार को लखनऊ में मौसम का मिजाज कुछ हद तक मिला-जुला रहेगा. दिन में आसमान ज्यादातर साफ रहेगा, लेकिन बीच-बीच में बादलों की आवाजाही हो सकती है. तेज धूप के साथ उमस भरी गर्मी बरकरार रहेगी. अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है.
अगले 5 दिनों का मौसम पूर्वानुमान- UP RAIN ALERT
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अतुल सिंह के अनुसार, अगले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है. इसके बाद तापमान में फिर से 2 से 3 डिग्री की कमी देखने को मिलेगी. अगले पांच दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवाएं, और बिजली गिरने की संभावना बनी रहेगी.
उत्तर प्रदेश में मौसम का प्रभाव
मौसम का यह बदलाव न केवल लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि कृषि और अन्य क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ रहा है. बारिश से कुछ किसानों को राहत मिल सकती है, लेकिन बिजली गिरने और तेज हवाओं से फसलों को नुकसान का खतरा भी है. मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने खेतों की निगरानी करें और फसलों को सुरक्षित रखने के लिए उचित कदम उठाएं.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीजेपी का दबदबा बना हुआ है. योगी आदित्यनाथ (UP POLITICS 2027) की सख्त प्रशासनिक छवि, हिंदुत्व का एजेंडा और विकास कार्यों ने बीजेपी को मजबूत आधार दिया है. हालाँकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन (इंडिया गठबंधन) से कड़ी चुनौती मिली. फैजाबाद (अयोध्या) जैसी महत्वपूर्ण सीट पर सपा की जीत ने बीजेपी के हिंदुत्व कार्ड को झटका दिया. इसके अलावा, बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असंतोष जैसे मुद्दे विपक्ष के लिए अवसर बन रहे हैं.
सपा और कांग्रेस गठबंधन ने 2024 के उपचुनावों में भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे विपक्ष का मनोबल बढ़ा है. दूसरी ओर, बसपा का प्रभाव कमजोर हुआ है, और पार्टी हाशिए पर नजर आ रही है. छोटे दल, जैसे निषाद पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), भी अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हैं. सामाजिक समीकरणों, खासकर पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक वोटों की गतिशीलता, 2027 के लिए निर्णायक होगी. UP POLITICS 2027
योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश (Photo Credit- Social Media)
बीजेपी की रणनीति: हिंदुत्व, विकास और सामाजिक समीकरण
बीजेपी 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है. पार्टी का मुख्य फोकस हिंदुत्व और विकास के दोहरे एजेंडे पर है. 2025 में अहिल्याबाई होल्कर जन्मशती अभियान शुरू करके बीजेपी पिछड़े समुदायों को साधने की कोशिश कर रही है. यह अभियान 2.7 लाख कार्यकर्ताओं के साथ 8,135 न्याय पंचायतों में चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण स्तर पर संगठन को मजबूत करना है. UP POLITICS 2027
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भी बीजेपी की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. सपा के ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक’ (पीडीए) फॉर्मूले का जवाब देने के लिए आरएसएस हिंदू एकता और शाखाओं के विस्तार पर जोर दे रहा है. योगी सरकार के कार्यों, जैसे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे, को विकास के प्रतीक के रूप में प्रचारित किया जा रहा है. साथ ही, बीजेपी अपने विधायकों और मंत्रियों के कामकाज का ऑडिट कर रही है ताकि जनता में असंतोष को कम किया जा सके. UP POLITICS 2027
हालाँकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा-कांग्रेस गठबंधन की सफलता ने बीजेपी को सतर्क कर दिया है. पार्टी अब सवर्ण, गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है. निषाद पार्टी जैसे सहयोगियों के साथ संबंधों को संभालना भी बीजेपी के लिए चुनौती है, क्योंकि संजय निषाद ने 200 सीटों पर प्रभाव का दावा किया है. UP POLITICS 2027
अखिलेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश (Photo Credit- Social Media)
समाजवादी पार्टी: पीडीए और युवा जोश- UP POLITICS 2027
समाजवादी पार्टी, अखिलेश यादव के नेतृत्व में, 2027 में सत्ता वापसी के लिए पूरी ताकत लगा रही है. सपा का ‘पीडीए’ फॉर्मूला—पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक—2024 के लोकसभा और उपचुनावों में प्रभावी साबित हुआ. अखिलेश यादव ने दावा किया है कि 2027 में सपा के नेतृत्व में पीडीए की सरकार बनेगी. पार्टी जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और गठबंधन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है. UP POLITICS 2027
सपा की रणनीति में यादव और मुस्लिम वोटों का पारंपरिक आधार तो है ही, साथ ही गैर-यादव ओबीसी और दलित वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश हो रही है. 2024 में फैजाबाद सीट पर अवधेश प्रसाद की जीत ने सपा को दलित समुदाय में पैठ बनाने का मौका दिया. इसके अलावा, सपा बेरोजगारी, महंगाई और संविधान-आरक्षण जैसे भावनात्मक मुद्दों को उठाकर युवाओं और अल्पसंख्यकों को लुभाने की कोशिश कर रही है.UP POLITICS 2027
कांग्रेस के साथ गठबंधन सपा की रणनीति का केंद्र है. 2024 के उपचुनावों में दोनों दलों ने मिलकर बीजेपी को कड़ी टक्कर दी, और यह गठबंधन 2027 में भी जारी रहने की संभावना है. हालाँकि, सपा को गठबंधन में सीट बँटवारे और नेतृत्व के मुद्दों को सुलझाना होगा. UP POLITICS 2027
अजय राय, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस (Photo Credit- Social Media)
कांग्रेस: पुनर्जनन की राह- UP POLITICS 2027
कांग्रेस, जो लंबे समय से उत्तर प्रदेश में हाशिए पर रही, अब धीरे-धीरे अपनी स्थिति सुधार रही है. प्रियंका गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने 2022 के चुनावों में संगठन को मजबूत करने की कोशिश की थी, और 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा के साथ गठबंधन ने इसे नया जीवन दिया. कांग्रेस अब युवा नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है. UP POLITICS 2027
कांग्रेस की रणनीति सपा के साथ गठबंधन को बनाए रखने और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जोर देने की है. पार्टी दलित, अल्पसंख्यक और गरीब वर्ग को लुभाने के लिए सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, जैसे बेरोजगारी और शिक्षा, पर फोकस कर रही है. साथ ही, राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जैसे अभियानों का प्रभाव भी उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है. UP POLITICS 2027
हालाँकि, कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठनात्मक कमजोरी और बड़े चेहरों की कमी है. प्रियंका गांधी की सक्रियता से पार्टी को कुछ हद तक मजबूती मिली है, लेकिन 2027 में वह कितनी सीटें जीत पाएगी, यह गठबंधन की रणनीति पर निर्भर करेगा.
मायावती, पूर्व सीएम, उत्तर प्रदेश (Photo Credit- Social Media)
बहुजन समाज पार्टी: अस्तित्व की लड़ाई
बसपा, जो कभी उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज थी, अब कमजोर स्थिति में है. 2024 के उपचुनावों में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, और यह सियासी हाशिए पर चली गई है. मायावती के नेतृत्व में बसपा अब आकाश आनंद जैसे युवा चेहरों को आगे लाकर नई ऊर्जा लाने की कोशिश कर रही है. UP POLITICS 2027
बसपा की रणनीति दलित वोटों को एकजुट करने और गैर-जाटव दलित समुदायों को आकर्षित करने पर केंद्रित है. पार्टी सवर्ण और ओबीसी वोटरों को लुभाने के लिए भी नए गठबंधन तलाश रही है. हालाँकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में बसपा का खाता न खुलना और उपचुनावों में कमजोर प्रदर्शन इसकी चुनौतियों को दर्शाता है. 2027 में बसपा के लिए सत्ता की राह मुश्किल है, लेकिन अगर मायावती प्रभावी गठबंधन बना पाएँ, तो वह कुछ सीटों पर आश्चर्यजनक प्रदर्शन कर सकती है.
क्या 2027 में बीजेपी की राजनीति बदलेगी?
बीजेपी की रणनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों में मिली चुनौती ने पार्टी को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है. पहले जहाँ बीजेपी का फोकस केवल हिंदुत्व पर था, अब वह सामाजिक समीकरणों को साधने और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है. अहिल्याबाई जन्मशती अभियान और आरएसएस की सक्रियता इस बदलाव का हिस्सा है.
बीजेपी को गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटों को बनाए रखने की चुनौती है, क्योंकि सपा का पीडीए फॉर्मूला इन समुदायों को आकर्षित कर रहा है. इसके अलावा, निषाद पार्टी जैसे सहयोगियों की बढ़ती माँगें और छोटे दलों की सक्रियता बीजेपी के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर सकती हैं.
फिर सत्ता पर कबिज होंगे योगी आदित्यनाथ!
योगी आदित्यनाथ की सख्त प्रशासनिक छवि और हिंदुत्व के प्रतीक के रूप में उनकी लोकप्रियता बीजेपी के लिए सबसे बड़ा हथियार है. 2022 में बीजेपी ने उनके नेतृत्व में 255 सीटें जीतीं, जो दर्शाता है कि जनता में उनकी स्वीकार्यता बनी हुई है. बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि 2027 का चुनाव भी योगी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा.
हालाँकि, योगी के सामने कई चुनौतियाँ हैं. 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी की सीटों में कमी और सपा-कांग्रेस गठबंधन की मजबूती ने सवाल उठाए हैं. अगर बीजेपी 2027 में बहुमत हासिल करती है, तो योगी का फिर से मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है, क्योंकि उनकी छवि और संगठन पर पकड़ मजबूत है. लेकिन अगर बीजेपी की सीटें कम होती हैं और गठबंधन सरकार बनती है, तो सहयोगियों की माँगों के चलते नेतृत्व पर विचार हो सकता है.
सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, जैसे बेरोजगारी और महंगाई, का असर भी योगी की छवि पर पड़ सकता है. फिर भी, उनके विकास कार्य, कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण और हिंदुत्व की अपील उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है. संभावना है कि अगर बीजेपी जीतती है, तो योगी 70-80% संभावना के साथ फिर से मुख्यमंत्री बन सकते हैं.
मुंबई: 27 मई 2025 को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव (STOCK MARKET NEWS) देखने को मिला. सेंसेक्स में करीब 1,000 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 81,250 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. निफ्टी भी 250 अंकों की कमी के साथ 24,750 के स्तर पर रहा. इस गिरावट के पीछे उच्च वैल्यूएशन और वैश्विक बाजारों की कमजोरी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का सुनहरा अवसर हो सकती है.
सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन– STOCK MARKET NEWS
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 26 में गिरावट देखी गई, जबकि केवल 4 शेयरों ने तेजी दिखान. अल्ट्राटेक सीमेंट का शेयर 2.50% नीचे रहा, और ITC, NTPC जैसे शेयरों में भी 2% तक की कमी देखी गई. दूसरी ओर, इंडसइंड बैंक ने लगभग 3% की उछाल दर्ज की, जिसने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया.
निफ्टी के 50 शेयरों में से 39 में गिरावट और 11 में तेजी रही. NSE के IT इंडेक्स में 0.93%, ऑटो इंडेक्स में 0.60%, और प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 0.73% की कमी देखी गई. हालांकि, मीडिया, मेटल, फार्मा, और रियल्टी जैसे सेक्टरों में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जिसने बाजार को कुछ राहत प्रदान की. STOCK MARKET NEWS
उच्च वैल्यूएशन का दबाव- STOCK MARKET NEWS
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी के विजयकुमार ने बताया कि भारतीय शेयर बाजार अब एक समेकन चरण (कॉन्सोलिडेशन फेज) में प्रवेश कर सकता है. उच्च वैल्यूएशन के कारण बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ रहा है. फिर भी, म्यूचुअल फंड्स के पास उपलब्ध नकदी की वजह से किसी भी बड़ी गिरावट में खरीदारी की संभावना बनी हुई है. यह स्थिति उन निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकती है, जो दीर्घकालिक निवेश की तलाश में हैं. STOCK MARKET NEWS
वैश्विक बाजारों का असर- STOCK MARKET NEWS
वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में कमजोरी का माहौल रहा. जापान का निक्केई इंडेक्स 100 अंकों की गिरावट के साथ 37,440 पर और कोरिया का कोस्पी 13 अंकों की कमी के साथ 2,631 पर कारोबार कर रहा था. हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.31% नीचे 23,209 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट 11 अंकों की गिरावट के साथ 3,335 पर रहा.
23 मई को अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट देखी गई थी. डाउ जोन्स 256 अंकों की कमी के साथ 41,603 पर, नैस्डेक 188 अंकों की गिरावट के साथ 18,737 पर, और S&P 500 39 अंकों की कमी के साथ 5,802 पर बंद हुआ. वैश्विक बाजारों की यह कमजोरी भारतीय बाजार पर भी असर डाल रही है.
निवेशकों की गतिविधियां- STOCK MARKET NEWS
26 मई को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 1,745.72 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 135.98 करोड़ रुपये की खरीदारी की. मई महीने में अब तक DIIs ने 36,243.28 करोड़ रुपये और FIIs ने 12,327.59 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की है. अप्रैल में DIIs ने 28,228.45 करोड़ रुपये और FIIs ने 2,735.02 करोड़ रुपये का निवेश किया था. यह मजबूत निवेश बाजार में निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है.
‘द लीला’ होटल्स का IPO- STOCK MARKET NEWS
लग्जरी होटल चेन ‘द लीला’ की पैरेंट कंपनी श्लॉस बैंगलोर लिमिटेड का IPO 26 मई से निवेश के लिए खुला है और 28 मई 2025 तक खुला रहेगा. कंपनी इस IPO के जरिए 3,500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है, जिसमें 2,500 करोड़ रुपये के नए शेयर और 1,000 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल शामिल है. यह रिटेल निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर हो सकता है.
निवेशकों के लिए रणनीति
बाजार की मौजूदा अस्थिरता के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आर्थिक बुनियाद और घरेलू निवेशकों की सक्रियता बाजार को सहारा दे सकती है. निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाएं, गुणवत्ता वाले शेयरों पर ध्यान दें, और बाजार की हर गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखें. दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाने से जोखिम को कम किया जा सकता है.
नई दिल्ली: भारत में कोविड-19 के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक (CORONA CASES RISE IN INDIA) देश में कुल मामलों की संख्या 1047 हो गई है. इसमें सबसे ज्यादा 430 सक्रिय केस केरल से हैं. इसके बाद महाराष्ट्र में 208, दिल्ली में 104, गुजरात में 83 और कर्नाटक में 80 केस दर्ज किए गए हैं. बेंगलुरु में ही कर्नाटक के कुल 73 केस हैं.
मौतों की बात करें तो महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कुल 11 मरीजों की जान जा चुकी है. पिछले एक हफ्ते में 9 मौतें दर्ज की गई हैं. महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 5 मौतें हुई हैं. ठाणे जिले में सोमवार को एक महिला की जान चली गई. CORONA CASES RISE IN INDIA
CORONA CASES RISE IN INDIA- एक सप्ताह में 787 नए केस
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक बीते सात दिनों में 787 नए कोविड केस सामने आए हैं. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के निदेशक डॉ. राजीव बहल ने जानकारी दी कि भारत में अब तक चार नए कोविड वैरिएंट सामने आए हैं – LF.7, XFG, JN.1 और NB.1.8.1. CORONA CASES RISE IN INDIA
CORONA CASES RISE IN INDIA- कोविड से मौतें: प्रमुख आंकड़े
राज्य
मौतों की संख्या
प्रमुख क्षेत्र
महाराष्ट्र
5
ठाणे, मुंबई
कर्नाटक
1
बेंगलुरु
राजस्थान
1
जयपुर
मध्य प्रदेश
2
जानकारी नहीं
पश्चिम बंगाल
2
जानकारी नहीं
जयपुर में सोमवार को दो मरीजों की मौत हुई, जिसमें से एक रेलवे स्टेशन पर मृत मिला था. उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई. दूसरा मरीज 26 साल का था, जिसे पहले से टीबी थी. CORONA CASES RISE IN INDIA
ठाणे में मौतें महाराष्ट्र के ठाणे में रविवार 25 मई को एक 21 वर्षीय युवक की मौत हुई. उसका 22 मई से इलाज चल रहा था. वहीं एक महिला मरीज की इलाज के दौरान जान गई. CORONA CASES RISE IN INDIA
बेंगलुरु में बुजुर्ग की मौत 17 मई को कर्नाटक के बेंगलुरु में 84 वर्षीय बुजुर्ग की मल्टी ऑर्गन फेल्योर के कारण मौत हुई. उनकी रिपोर्ट 24 मई को पॉजिटिव आई थी. केरल में भी दो लोगों की कोविड से जान गई है.
भारत में मिले 4 नए वैरिएंट ICMR ने बताया कि दक्षिण और पश्चिम भारत में सीक्वेंसिंग के दौरान LF.7, XFG, JN.1 और NB.1.8.1 वैरिएंट मिले हैं. ये सभी WHO द्वारा “निगरानी में रखे गए वैरिएंट” के रूप में वर्गीकृत हैं. फिलहाल इन्हें चिंताजनक नहीं माना गया है. CORONA CASES RISE IN INDIA
NB.1.8.1 वैरिएंट की विशेषताएं
इसमें A435S, V445H, और T478I जैसे स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन हैं.
यह वैरिएंट तेजी से फैलता है.
इम्यून सिस्टम की बनी हुई प्रतिरोधक क्षमता इस पर असर नहीं डाल पाती.
सबसे आम वैरिएंट: JN.1 भारत में सबसे ज्यादा JN.1 वैरिएंट देखने को मिल रहा है.
वैरिएंट
प्रसार प्रतिशत
JN.1
50%+
BA.2
26%
अन्य ओमिक्रॉन
20%
JN.1 के लक्षण और खतरे
यह ओमिक्रॉन के BA.2.86 का स्ट्रेन है.
इसमें करीब 30 म्यूटेशन्स हैं.
इम्यूनिटी को कमजोर कर सकता है.
WHO ने दिसंबर 2023 में इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया था.
डॉक्टरों की सलाह ICMR के अनुसार, फिलहाल स्थिति गंभीर नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है. डॉक्टरों का कहना है कि लक्षण लंबे समय तक बने रह सकते हैं. ऐसे मामलों में लॉन्ग कोविड की आशंका हो सकती है.
निष्कर्ष कोरोना वायरस का खतरा भले ही पहले जैसा भयावह नहीं रहा, लेकिन इसकी वापसी से लापरवाही नहीं की जा सकती। नए वैरिएंट्स की पहचान और सतर्कता ही इससे निपटने का उपाय है.
कोरोना की पिछली लहर
भारत में कोरोना की आखिरी बड़ी लहर वर्ष 2022 के अंत से 2023 की शुरुआत तक देखी गई थी, जो मुख्य रूप से Omicron वैरिएंट के सब-वैरिएंट्स जैसे BF.7, XBB.1.5 और JN.1 के कारण फैली थी, हालांकि इस लहर की तीव्रता डेल्टा लहर जितनी घातक नहीं थी, फिर भी बुजुर्गों और को-मॉर्बिडिटी वाले मरीजों के लिए यह गंभीर साबित हुई.
नई दिल्ली: भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए (AMCA Fighter Jet) एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी रूप से विकसित किए जा रहे फिफ्थ जनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम के कार्यान्वयन मॉडल को हरी झंडी दे दी है. यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में स्वदेशी हथियारों की सफलता ने भारत की सैन्य क्षमता का प्रदर्शन दुनिया के सामने रखा है.
AMCA Fighter Jet- स्वदेशी तकनीक से होगा निर्माण
इस परियोजना को एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) और भारतीय उद्योगों की साझेदारी में लागू किया जाएगा. AMCA का निर्माण पूरी तरह स्वदेशी तकनीक और विशेषज्ञता के साथ किया जा रहा है, जिससे भारत के एयरोस्पेस सेक्टर में आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा. AMCA Fighter Jet
AMCA क्या है?
AMCA फाइटर जेट भारत का पहला स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का विमान है, जिसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) और विभिन्न उद्योगों की साझेदारी में विकसित किया जा रहा है. यह स्टील्थ फाइटर जेट अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है, जिसमें रडार से बचने की क्षमता, उन्नत सेंसर, और शक्तिशाली हथियार प्रणाली शामिल हैं. इसका डिज़ाइन 25 टन वजन वाली मध्यम श्रेणी का है, जिसमें दो इंजन और 6.5 टन की ईंधन क्षमता होगी. यह विमान 55,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम होगा और 1,864 मील की युद्धक रेंज रखेगा. AMCA Fighter Jet
🚨 AMCA, India's 5th generation fighter jet model, is displayed at the India Pavilion in Aero India 2025. pic.twitter.com/Qw8RfKCMX9
AMCA की खासियत यह है कि यह न केवल हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें ले जा सकता है, बल्कि 1.5 टन तक के हथियारों को आंतरिक हथियार खंड में ले जाने की क्षमता रखता है. यह इसे स्टील्थ मोड में दुश्मन के रडार से बचकर सटीक हमले करने में सक्षम बनाता है. साथ ही, यह विमान गैर-स्टील्थ मोड में अपने पंखों पर अतिरिक्त हथियार ले जा सकता है, जो इसे बहुमुखी बनाता है. AMCA Fighter Jet
AMCA परियोजना भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देना है (Photo Credit- Defence Matrix)
AMCA Fighter Jet- स्वदेशी रक्षा तकनीक का प्रतीक
AMCA परियोजना भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इस परियोजना को 2024 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने मंजूरी दी थी, जिसके तहत पांच प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए 15,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए. DRDO और ADA के नेतृत्व में, इस विमान का पहला प्रोटोटाइप 2026-27 तक तैयार होने की उम्मीद है, और पहली उड़ान 2028 में होगी। 2034 तक इसे भारतीय वायुसेना में शामिल करने की योजना है.
यह परियोजना न केवल तकनीकी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूत करती है. AMCA में 75% स्वदेशी सामग्री होगी, जिसे बाद में 85% तक बढ़ाया जाएगा. यह भारतीय उद्योगों, विशेष रूप से निजी क्षेत्र, को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा. AMCA Fighter Jet
AMCA की तकनीकी विशेषताएं
AMCA फाइटर जेट में कई अत्याधुनिक तकनीकें शामिल की जाएंगी, जो इसे विश्व के सर्वश्रेष्ठ स्टील्थ विमानों के समकक्ष बनाएंगी। इनमें शामिल हैं:
AI-पावर्ड इलेक्ट्रॉनिक पायलट: यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर आधारित सिस्टम पायलट के कार्यभार को कम करता है और जटिल युद्ध परिस्थितियों में स्वचालित निर्णय लेने में सहायता करता है।
नेटसेंट्रिक वॉरफेयर सिस्टम: यह वास्तविक समय में युद्ध समन्वय को सक्षम बनाता है, जिससे AMCA मानव रहित ड्रोन के साथ मिलकर काम कर सकता है।
इंटीग्रेटेड व्हीकल हेल्थ मैनेजमेंट: यह सिस्टम विमान की स्थिति की निगरानी करता है और रखरखाव को और प्रभावी बनाता है।
इन विशेषताओं के साथ, AMCA न केवल भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि इसे भविष्य के युद्धों के लिए तैयार करेगा.
AMCA Fighter Jet- क्षेत्रीय चुनौतियों का जवाब
हाल के वर्षों में, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हैं. खासकर, पाकिस्तान द्वारा चीन से J-35A स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने की खबरें और चीन द्वारा अपने J-20 विमानों को भारत की सीमाओं के पास तैनात करने ने भारत को अपनी रक्षा रणनीति को और मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है. इसके जवाब में, AMCA का विकास भारत की रक्षा स्वायत्तता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. AMCA Fighter Jet
वैश्विक स्तर पर, अमेरिका और रूस जैसे देश भारत को अपने F-35 और Su-57 स्टील्थ विमानों को बेचने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, AMCA परियोजना के साथ, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी स्वदेशी तकनीक पर निर्भर रहेगा. यह न केवल लागत को कम करेगा, बल्कि भारत को विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता से मुक्त करेगा.
AMCA Fighter Jet- भविष्य की राह
AMCA परियोजना भारत के रक्षा क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू कर रही है. 2035 तक, जब यह विमान पूरी तरह से भारतीय वायुसेना में शामिल होगा, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट हैं. इसके अलावा, AMCA में छठी पीढ़ी की तकनीकों को शामिल करने की योजना है, जैसे कि उन्नत सेंसर और मॉड्यूलर डिज़ाइन, जो इसे भविष्य के लिए प्रासंगिक बनाएंगे.
एयरो इंडिया 2025 में AMCA का पूर्ण-आकार मॉडल प्रदर्शित किया गया, जिसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा. यह मॉडल भारत की तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है.
India is developing fifth-gen AMCA Fighter Jet will place India in a elite club (US, China, and Russia)
India’s fifth-gen AMCA Programme What is AMCA? Timeline and Development of AMCA Key Features of AMCA pic.twitter.com/F6N8qBN2KU
भारत का यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि पाकिस्तान चीन से जे-31 जैसे फिफ्थ जनरेशन फाइटर खरीदने की तैयारी में है. दूसरी ओर भारत पर अमेरिका या रूस से ऐसे विमान खरीदने का दबाव रहा है। लेकिन अब भारत ने साफ संकेत दे दिया है कि वह खुद अपनी तकनीक पर भरोसा करते हुए आत्मनिर्भर बनेगा.
वैश्विक मंच पर भारत की ताकत
AMCA परियोजना से भारत न केवल अपनी सेनाओं को अत्याधुनिक बनाएगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भी अपनी एक अलग पहचान बनाएगा. इसके अलावा, यह कार्यक्रम भारतीय स्टार्टअप्स और रक्षा उद्योगों को भी विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज इन दिनों पूरी तरह से बदला हुआ (UP RAIN ALERT) नजर आ रहा है. जहां एक ओर तराई वाले जिलों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर बुंदेलखंड और मध्य यूपी के जिलों में लू जैसे हालात बने हुए हैं. यह दोहरी मौसमीय स्थिति न केवल आम जनजीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि किसानों की चिंता और राहत दोनों का कारण बन रही है.
Realised Maximum/Minimum Temperature and Departure from Normal (In Last 24 Hours) pic.twitter.com/7S6m6YExDQ
24 जिलों में बिजली-बारिश की चेतावनी- UP RAIN ALERT
मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के 24 जिलों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ तेज बारिश की चेतावनी जारी की है. जिन जिलों में चेतावनी दी गई है, उनमें बांदा, चित्रकूट, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, वाराणसी, देवरिया, गोरखपुर, बहराइच, बलरामपुर, कुशीनगर, मऊ, बलिया, चंदौली, गाजीपुर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत रविदास नगर, महोबा, ललितपुर, गोंडा, श्रावस्ती, महाराजगंज शामिल हैं.
इन जिलों में आने वाले दिनों में बिजली गिरने, आंधी और मध्यम से तेज बारिश की संभावना है. इसके साथ ही कई स्थानों पर तेज रफ्तार हवाएं (30 से 50 किमी/घंटा) भी चल सकती हैं. UP RAIN ALERT
जहां एक तरफ कुछ इलाकों में बारिश राहत दे रही है, वहीं बुंदेलखंड और मध्य उत्तर प्रदेश के ज़िलों में उमस भरी गर्मी और तेज धूप लोगों को बेहाल कर रही है. मौसम विभाग के अनुसार, इन क्षेत्रों में नमी और धूप के कारण हीट इंडेक्स काफी बढ़ गया है, जिससे लू जैसे हालात बन रहे हैं. UP RAIN ALERT
बांदा जिले में सोमवार को अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक रहा. वहीं, बरेली का न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2 डिग्री कम है. UP RAIN ALERT
— India Meteorological Department (@Indiametdept) May 27, 2025
राजधानी लखनऊ का मौसम- UP RAIN ALERT
लखनऊ में सोमवार को आसमान साफ रहा और दिनभर तेज धूप खिली रही. अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को लखनऊ में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन दिन में तेज धूप निकलने की संभावना है. UP RAIN ALERT
— India Meteorological Department (@Indiametdept) May 27, 2025
फर्रुखाबाद में बारिश से किसानों को राहत
फर्रुखाबाद जिले में सोमवार को तेज हवा के साथ हुई बारिश ने मौसम को बदला और लोगों को गर्मी से राहत दी. हालांकि, बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या भी सामने आई, जिससे स्थानीय लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
किसानों के लिए यह बारिश फायदेमंद साबित हुई. किसान अजय ने बताया कि इस समय खरीफ की फसलों की बुवाई की तैयारी चल रही है और बारिश से खेतों में नमी आ गई है, जिससे बुवाई की प्रक्रिया तेज होगी. उन्होंने कहा कि बिना पलेवा के खेत की जुताई होना संभव नहीं था, लेकिन अब धान की पौध रोपाई की तैयारी भी हो सकेगी.
अगले 72 घंटे: गर्मी और बारिश का मिश्रण रहेगा जारी
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 72 घंटों के भीतर अधिकतम तापमान में 2 डिग्री तक बढ़ोतरी होगी, जिसके बाद इसमें फिर से गिरावट दर्ज की जाएगी. न्यूनतम तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होगा. उन्होंने बताया कि 31 मई तक कई जिलों में बिजली गिरने, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है.
किसानों को सलाह
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो आने वाली बारिश खरीफ फसल की बुवाई के लिए अनुकूल साबित होगी, लेकिन उन्हें सावधानी भी बरतनी होगी. जलभराव वाले खेतों में फसलों की सड़न हो सकती है. इसलिए जल निकासी की उचित व्यवस्था करना आवश्यक है.
भुज (गुजरात): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात के भुज में भव्य रोड शो (PM MODI BHUJ ROADSHOW) किया और ₹53,400 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया. इस दौरान जनसमूह ने मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया और पूरे शहर में उत्सव का माहौल देखने को मिला. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि “भुज की विकास गाथा प्रेरणादायक है. आज शुरू की गई परियोजनाएं पावर, रिन्यूएबल एनर्जी, पोर्ट और अन्य बुनियादी ढांचे में नई गति लाएंगी.” PM MODI BHUJ ROADSHOW
मेगा प्रोजेक्ट्स से होगा विकास को बढ़ावा
प्रधानमंत्री द्वारा जिन प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया गया, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:-
खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क से उत्पन्न होने वाली पवन और सौर ऊर्जा को ले जाने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क
कांडला पोर्ट पर विस्तारीकरण कार्य
तापी जिले में अत्याधुनिक अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट यूनिट
राज्य सरकार की सड़क, जल आपूर्ति और सौर ऊर्जा परियोजनाएं
जब भी मैं कच्छ के विकास को गति देने आता हूं तो मुझे लगता है कि मैं और कुछ करूंगा, कुछ नया करूंगा, और कुछ नया करूंगा… मन रुकने का नाम नहीं करता है।
आज यहां विकास से जुड़े 50 हजार करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि ये योजनाएं न सिर्फ गुजरात, बल्कि देश के ऊर्जा भविष्य के लिए भी निर्णायक साबित होंगी. PM MODI BHUJ ROADSHOW
ऑपरेशन सिंदूर पर कड़ा संदेश- PM MODI BHUJ ROADSHOW
भुज से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के दाहोद में एक जनसभा को भी संबोधित किया. वहां उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सरकार की रणनीति पर खुलकर बात की और हाल ही में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए सख्त संदेश दिया.
कच्छ के लोग,यहां के लोगों का आत्मविश्वास अभावों के बीच भी आत्मविश्वास से भरे हुए लोग… ये हमेशा हमेशा मेरे जीवन को दिशा देते रहे हैं।
जो पुरानी पीढ़ी के लोग हैं वो जानते हैं, वर्तमान पीढ़ी को शायद पता नहीं है, आज तो यहां का जीवन बहुत आसान हो गया है, लेकिन तब हालात कुछ और हुआ… pic.twitter.com/8j2Lmqe0Aw
PM मोदी ने कहा, “जब कोई हमारी बहनों के सिंदूर को मिटाता है, तो उसका भी मिटना तय हो जाता है।” उन्होंने इसे केवल एक सैन्य ऑपरेशन नहीं, बल्कि भारतीय भावनाओं और मूल्यों का प्रतीक बताया.
आज कच्छ व्यापार, कारोबार और टूरिज्म का बड़ा सेंटर है.
आतंकवाद के प्रति ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति- PM MODI BHUJ ROADSHOW
पुलवामा और हाल ही में पहलगाम जैसे आतंकी हमलों के जवाब में भारत की जवाबी कार्रवाई को लेकर मोदी सरकार की नीति स्पष्ट रही है। ऑपरेशन सिंदूर को इसी दृष्टिकोण का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें भारत ने सीमा पार आतंक के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है.
मोदी ने कहा, “हमारे सैनिकों ने यह दिखा दिया है कि भारत अब सहने वाला देश नहीं है, जवाब देने वाला राष्ट्र बन चुका है.”
जनता से जबरदस्त जुड़ाव
भुज के रोड शो में हजारों लोगों ने मोदी के समर्थन में हाथ हिलाकर उनका स्वागत किया. पूरे रास्ते को फूलों और बैनरों से सजाया गया था. मोदी के इस दौरे को लोकसभा चुनावों से पहले एक मजबूत राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है.