कानपुर: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले में 26 भारतीयों की जान जाने के बाद भारतीय सेना (OPERATION SINDOOR) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर जबरदस्त हवाई हमले किए. इस कार्रवाई को “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया है, जिसे लेकर पूरे देश में गर्व और भावुकता की लहर दौड़ पड़ी है.
इस ऑपरेशन की गूंज कानपुर तक सुनाई दी, जहां पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले शुभम द्विवेदी के परिवार ने इसे “न्याय” बताया. शुभम की पत्नी एशान्या, भाई सौरभ, और माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. उनका कहना है कि सेना ने शुभम के “सिंदूर” का बदला ले लिया. (OPERATION SINDOOR)
भावुक हुआ कानपुर, परिवार ने जताया गर्व कानपुर निवासी शहीद शुभम द्विवेदी के परिजनों के लिए यह क्षण गर्व और संतोष का संगम लेकर आया. जैसे ही भारतीय सेना की कार्रवाई की जानकारी मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आई, शुभम के घर में देशभक्ति के नारे गूंज उठे.
शुभम की पत्नी एशन्या ने कहा, “मुझे भरोसा था कि भारतीय सेना बदला जरूर लेगी. उन्होंने मेरे सिंदूर का बदला लिया है. ये सिर्फ मेरी नहीं, पूरे देश की जीत है.” उन्होंने सरकार से शुभम को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग की.
शुभम के परिजनों से मिलने घर पहुंचे सतीश महाना सुबह होते ही उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना शुभम के परिजनों से मिलने पहुंचे. उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाते हुए कहा, “सेना ने पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक कर न सिर्फ पहलगाम, बल्कि 26/11 और पुलवामा जैसे कायराना हमलों का भी हिसाब चुकता किया है.” साथ ही उन्होंने कहा कि देश का हर नागरिक शहीदों का ऋणी है और उनके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा.
शुभम द्विवेदी के परिजनों से मिलने पहुंचे सतीश महाना. (फोटो- Nation Now Samachar)
शुभम के भाई सौरभ ने कहा – ‘ये सिर्फ शुरुआत है’ शौर्य और दुख के इस मौके पर शुभम के भाई सौरभ ने कहा: “शुभम अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन आज उसकी आत्मा को सुकून मिला होगा. ये कार्रवाई हर भारतीय के मन में छिपे दर्द को आवाज देती है. ये सिर्फ शुरुआत है. आतंक का अंत होना बाकी है.”
लोगों ने मनाया जश्न कानपुर शहर में कई स्थानों पर लोगों ने आतिशबाजी और मिठाई बांटकर सेना की कार्रवाई का स्वागत किया. सोशल मीडिया पर शुभम के नाम के साथ #OperationSindoor, #JusticeForMartyrs, और #ShubhamDwivedi जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे.
अमेठी: अमेठी के जगदीशपुर स्थित इंडोरामा फैक्ट्री में सोमवार को एक आपातकालीन मॉक ड्रिल (UP MOCK DRIL) का आयोजन किया गया. इसका उद्देश्य किसी भी आकस्मिक घटना, विशेषकर आगजनी या आतंकी हमले जैसी स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखना और तंत्र की प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना था.
मॉक ड्रिल की शुरुआत फैक्ट्री परिसर में अचानक आग (UP MOCK DRIL) लगने की सूचना से हुई. इसके बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर तेजी से आग पर काबू पाया. आग से प्रभावित क्षेत्र से कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. साथ ही ड्रिल में यह भी दर्शाया गया कि कैसे घायल कर्मचारियों को तत्काल एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया जाता है ताकि समय रहते चिकित्सा सहायता दी जा सके.
अमेठी में मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारी (फोटो- Nation Now Samachar)
इस पूरे अभ्यास के दौरान अमेठी की पुलिस अधीक्षक (SP) अपर्णा रजत कौशिक और जिलाधिकारी (DM) संजय चौहान स्वयं मौके पर मौजूद रहे और स्थिति का जायज़ा लिया. दोनों अधिकारियों ने मॉक ड्रिल की तैयारियों और निष्पादन पर संतोष जताया और कहा कि इस प्रकार के अभ्यास से आपात स्थिति में त्वरित और समुचित प्रतिक्रिया देना संभव होता है. (UP MOCK DRIL)
#amethipolice जनपद के थानों की एन्टी रोमियो टीम द्वारा स्कूल/कॉलेज के आसपास व स्कूल/कॉलेज के रास्तों पर सक्रिय रहते हुए मनचलों, शोहदों द्वारा छेड़छाड़ व महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु सतत निगरानी करते हुए संदिग्धों की चेकिंग की गयी । #MissionShaktipic.twitter.com/cKfPPu0CAK
राष्ट्रीय सुरक्षा की पृष्ठभूमि में बढ़ती सक्रियता उल्लेखनीय है कि हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए देशभर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है. इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में प्रशासनिक सहयोग से सरकारी व निजी संस्थानों में मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही हैं. इंडोरामा फैक्ट्री में आयोजित यह ड्रिल भी इसी योजना का हिस्सा थी, जिसका लक्ष्य कर्मचारियों की सुरक्षा, रेस्क्यू ऑपरेशन और संकट प्रबंधन में सुधार करना है.
लखनऊ: भारतीय सेना द्वारा चलाए गए “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था (DGP ISSUED GUIDELINES) को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार ने सभी जिलों, पुलिस कमिश्नरेट्स और विशेष इकाइयों को विस्तृत और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों का उद्देश्य प्रदेश में कानून-व्यवस्था को बनाए रखना, सामरिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को सुदृढ़ करना, और नागरिकों को हर प्रकार के खतरे से बचाना है.
सुरक्षा के 14 बिंदुओं पर कार्रवाई का निर्देश डीजीपी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में कुल 14 महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं, जो पूरे राज्य में लागू किए जाएंगे.
महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी महत्वपूर्ण Critical Infrastructure and Vital Installations की सुरक्षा को सुदृढ़ और उन्नत किया जाए . भौतिक सुरक्षा, निगरानी प्रणाली और परिधि सुरक्षा को मजबूत किया जाए.
आंतरिक सुरक्षा अभ्यास आंतरिक सुरक्षा योजना के तहत मॉक ड्रिल आयोजित की जाए . पूरी तैयारी के साथ पूर्व ब्रीफिंग और बाद की डिब्रीफिंग की व्यवस्था की जाए . संबंधित सभी सुरक्षा इकाइयों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए.
पुलिस परिसरों और संसाधनों का ऑडिट सभी पुलिस परिसरों जैसे: पुलिस लाइन, कार्यालय, डिपो, पुलिस यूनिट्स और नियंत्रण कक्ष को सुरक्षित किया जाए. एक संपूर्ण संसाधन ऑडिट किया जाए और कमी पाए जाने पर शीघ्र समाधान किया जाए. पुलिस वेबसाइट और पुलिस सर्वर के साथ-साथ साइबर सुरक्षा सुदृढ़ की जाए.
महत्त्वपूर्ण स्थानों पर प्रवेश नियंत्रण महत्त्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर प्रवेश नियंत्रण व्यवस्था को कड़ा किया जाए . पहचान पत्रों की जांच और सत्यापन सुनिश्चित की जाए.
एजेंसियों के साथ समन्वय निम्नलिखित के साथ नज़दीकी समन्वय स्थापित किया जाए. सेना, वायुसेना, नागरिक सुरक्षा, खुफिया इकाइयां और अन्य सम्बंधित एजेंसियां. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी समन्वय की जिम्मेदारी लें.
सामरिक आवागमन की व्यवस्था निम्नलिखित की सुरक्षित और गोपनीय आवाजाही सुनिश्चित की जाए. राजमार्गों और रेलवे पर सैन्य काफिले की सुरक्षित करना. वायुसेना के लिए एटीएफ / ईंधन की आपूर्ति. रेलवे पुलों और ट्रैकों की सुरक्षा की जाए . सभी मूवमेंट को “नीड टू नो” आधार पर गोपनीय रखा जाए .
सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर सतर्कता सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जिलों को उच्च सतर्कता पर रखा जाए. संवेदनशील क्षेत्रों में बल की तैनाती बढ़ाई जाए. आरक्षित बलों को त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार रखा जाए.
प्रमुख सेवाओं की सुरक्षा निम्नलिखित को विशेष सुरक्षा प्रदान की जाए. तेल पाइपलाइन . संचार टावर और ओएफसी केबल लाइनें. जलापूर्ति प्रणालियाँ और भंडारण. बिजली सब-स्टेशन और ताप विद्युत संयंत्र.
खुफिया जानकारी और Sabotage की रोकथाम संवेदनशील और निषिद्ध क्षेत्रों में संभावित Sabotage और Information Leak की घटनाओं पर सतर्क दृष्टि रखी जाए. खुफिया तंत्र को सक्रिय किया जाए और समुचित सुरक्षा व्यवस्था की जाए.
सोशल मीडिया की निगरानी 24×7 सोशल मीडिया मॉनिटरिंग साइबर सेल द्वारा की जाए. अफवाह फैलाने और भ्रामक सूचनाओं के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
नियंत्रण कक्ष और मोबाइल वाहन सतर्क जिला नियंत्रण कक्ष को उच्च सतर्कता पर रखा जाए . 112 आपातकालीन वाहनों को Tactical Location पर तैनात किया जाए.
नेतृत्व और समन्वय वरिष्ठ अधिकारी: जिला प्रशासन, नागरिक सुरक्षा, सेना, वायुसेना और सभी हितधारकों के साथ सक्रिय समन्वय करें. सभी कर्मियों को पुलिस युद्ध निर्देशों की जानकारी दें.
हवाई अड्डा क्षेत्र की सुरक्षा सभी हवाई अड्डों के फनल क्षेत्रों की जाँच की जाए. हवाई सुरक्षा इकाइयों के साथ संयुक्त कार्यवाही की जाए.
भारत नेपाल सीमा पर निरंतर चौकसी बरतते हुए, अन्य सुरक्षा बलों के साथ समन्वय स्थापित रखते हुए नियमित गश्त की जाय.
सार्वजनिक सहयोग की अपील पुलिस विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें और अफवाहों पर ध्यान न दें. यह सुनिश्चित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि प्रदेश की शांति और सुरक्षा बनी रहे.
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले का जवाब भारत ने (OPERATION SINDOOR) निर्णायक तरीके से दिया है. भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना की संयुक्त कार्रवाई में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल स्ट्राइक की गई है. इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया, जो अब तक की सबसे साहसिक सैन्य कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है.
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की हत्या कर दी गई थी. इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF)’ ने ली थी. हमले की क्रूरता ने पूरे देश को झकझोर दिया था और भारत सरकार ने जवाबी कार्रवाई का फैसला लिया.
ऑपरेशन सिंदूर: एक सुनियोजित सैन्य रणनीति विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मीडिया को जानकारी दी कि ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह से भारतीय सुरक्षा बलों की योजना के अनुसार अंजाम दिया गया. इस अभियान में विशेष भूमिका निभाने वाली दो महिला अधिकारी — लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह — ने ऑपरेशन के ब्योरे साझा किए.
OPERATION SINDOOR:
INDIAN ARMED FORCES CARRIED OUT PRECISION STRIKE AT TERRORIST CAMPS
➡️The Indian Armed Forces launched ‘OPERATION SINDOOR’, hitting terrorist infrastructure in Pakistan and Pakistan-occupied Jammu and Kashmir from where terrorist attacks against India have… pic.twitter.com/BNaC0qg9pT
कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया कि ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य उन आतंकी ठिकानों को तबाह करना था जहां से भारत के खिलाफ आतंक की साजिशें रची जा रही थीं. उन्होंने बताया कि PoK और पाकिस्तान में स्थित 9 ठिकानों को टारगेट किया गया जिनमें लॉन्चपैड, ट्रेनिंग सेंटर्स और हथियारों के गोदाम शामिल थे.
विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने बताया कि इस ऑपरेशन के तहत आतंकियों के लॉन्चपैड और प्रशिक्षण केंद्रों को सटीक रूप से निशाना बनाया गया. यह कार्रवाई देर रात 1:05 से 1:30 बजे के बीच अंजाम दी गई. उन्होंने बताया कि सबसे पहले निशाना बना मुजफ्फराबाद स्थित सवाई नाला, जहां लश्कर-ए-तैयबा का बड़ा ट्रेनिंग सेंटर था. यहीं से सोनमर्ग, गुलमर्ग और पहलगाम में हमला करने वाले आतंकी प्रशिक्षित हुए थे.
इसके अलावा, सैयदना बिलाल कैंप में आतंकियों को हथियारों के उपयोग, विस्फोटकों की हैंडलिंग और जंगलों में जीवित रहने की ट्रेनिंग दी जाती थी. एक अन्य महत्वपूर्ण ठिकाना था कोटली गुरपुर कैंप, जहां 2023 में पुंछ में श्रद्धालुओं पर हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों को तैयार किया गया था.
तबाह हुए प्रमुख आतंकी ठिकाने
सवाई नाला, मुजफ्फराबाद – लश्कर-ए-तैयबा का ट्रेनिंग कैंप जहां सोनमर्ग, गुलमर्ग और पहलगाम हमलों के आतंकी प्रशिक्षित हुए.
सैयदना बिलाल कैंप, मुजफ्फराबाद – हथियार, विस्फोटक और जंगल सर्वाइवल की ट्रेनिंग दी जाती थी.
कोटली गुरपुर कैंप – पुंछ हमले के आतंकी यहां से प्रशिक्षित हुए थे.
मरकज सुभान अल्लाह, बहावलपुर – जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय, जिसे मिसाइल हमले में निशाना बनाया गया.
रात के सन्नाटे में गरजीं भारतीय मिसाइलें यह ऑपरेशन देर रात 1:05 बजे से लेकर 1:30 बजे के बीच अंजाम दिया गया. सटीक टारगेटिंग और तकनीकी विशेषज्ञता के साथ भारत ने इन ठिकानों को पूरी तरह से तबाह कर दिया. सेना ने इन हमलों के वीडियो भी जारी किए हैं जिसमें साफ दिखाई देता है कि कैसे PoK और पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकाने ध्वस्त हुए.
मसूद अजहर के परिवार को बड़ा झटका भारत की इस कार्रवाई का असर जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर के परिवार पर भी पड़ा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में उसके परिवार के 10 सदस्य और चार करीबी सहयोगी मारे गए हैं. खुद मसूद अजहर ने इस बात की पुष्टि की है और कहा कि “काश मैं भी इस हमले में मारा जाता.”
इस हमले में उसकी बड़ी बहन, मौलाना कशफ का पूरा परिवार, मुफ्ती अब्दुल रऊफ के पोते-पोतियां और सबसे बड़ी बेटी के चार बच्चे घायल हुए हैं. यह भारत की सैन्य रणनीति की सफलता का स्पष्ट संकेत है.
Markaz Subhan Allah, Bahawalpur (Punjab, Pakistan) was the headquarters of Jaish-e-Mohammad.
This facility was a key hub for orchestrating terror operations, including the Pulwama attack on Feb 14, 2019. The perpetrators of the bombing were trained at this very site.… pic.twitter.com/meg8qo0yaG
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि मजबूत विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा और मानवता की रक्षा के लिए की गई है. उन्होंने कहा कि भारत ने पहले दुनिया को आतंकवाद के बारे में आगाह किया था और अब उसने अपने नागरिकों की रक्षा के लिए यह निर्णायक कदम उठाया है.
इस ऑपरेशन की सराहना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों और सामरिक मामलों के जानकारों द्वारा की जा रही है. कई देशों ने भारत के आत्मरक्षात्मक अधिकार को सही ठहराया है और पाकिस्तान से आतंकवाद को समर्थन बंद करने की अपील की है.
महिला शक्ति की भूमिका इस ऑपरेशन में दो महिला अफसरों – लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह – की अहम भूमिका रही. कर्नल सोफिया ने जहां रणनीतिक टारगेटिंग का नेतृत्व किया, वहीं विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने एयरस्ट्राइक में अहम तकनीकी भूमिका निभाई. ये दोनों महिलाएं भारतीय सेना में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनकर सामने आई हैं.
मेरठ: पाकिस्तान में छिपे आतंकियों के खिलाफ भारतीय सेना की कार्रवाई (INDIA PAKISTAN WAR) के बाद पूरे देश में जोश और उत्साह की लहर है. मेरठ में भी सेना की इस कार्रवाई पर लोगों ने जमकर खुशी जताई. शहर की सड़कों से लेकर मोहल्लों तक भारत माता की जय और मोदी जिंदाबाद के नारे गूंज उठे.
सेना की ओर से आतंकियों के ठिकानों पर की गई कार्रवाई के बाद मेरठ के लोगों ने मिठाइयां बांटी और पटाखे चलाकर खुशी जाहिर की. विशेष रूप से ई-रिक्शा चालक संघ के लोगों ने शहर के विभिन्न इलाकों में मिठाइयां बांटकर सेना को धन्यवाद कहा. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सबसे पहले है और जो देश के दुश्मनों को पनाह देता है, उस पर कार्रवाई ज़रूरी थी.
भारतीय सेना पर गर्व स्थानीय लोगों का कहना है कि हमें अपनी सेना पर गर्व है. मेरठ निवासी रामप्रकाश शर्मा ने कहा, “जब भी देश की रक्षा की बात आती है, हमारी सेना पीछे नहीं हटती. हमें ऐसे सटीक और कड़े एक्शन की जरूरत थी.”
पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश सेना की कार्रवाई के बाद लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा भी देखने को मिला. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार आतंकियों को शरण देता आया है और अब उसे उसकी भाषा में जवाब दिया जाना चाहिए.
ई-रिक्शा संचालकों ने बांटी मिठाई मेरठ के ई-रिक्शा चालक संघ के सदस्य राजू ने बताया कि उन्होंने अपने स्तर पर यह तय किया कि सेना की इस बहादुरी पर मिठाइयां बांटी जाएं और लोगों को जागरूक किया जाए कि देश की सुरक्षा के लिए सेना किस हद तक जाती है.
नारे और जोश से गूंजा मेरठ शहर के कई इलाकों में युवाओं ने हाथों में तिरंगा लेकर रैलियां निकालीं और ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘मोदी जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाए. इस दौरान लोगों ने एक स्वर में कहा कि आतंक के खिलाफ कार्रवाई जारी रहनी चाहिए और सेना का मनोबल और ऊंचा किया जाना चाहिए.
मेरठ: ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) के खिलाफ एयरस्ट्राइक की है. भारत की इस हमले में में 90 आतंकी ढेर हो गए हैं. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अवीमुक्तेश्वरानंद ने (SHANKARACHARYA ON PAKISTAN ATTACK) पाकिस्तान में छिपे आतंकियों के खिलाफ भारत के हमले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यह एक साहसिक कदम है, लेकिन अभी और कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है. उन्होंने सरकार से अपेक्षा जताई कि आगे की रणनीति ऐसी होनी चाहिए जिससे पाकिस्तान 100 साल पीछे चला जाए.
आतंकियों पनाह देता है पाकिस्तान- शंकराचार्य शंकराचार्य ने नेशनल नाउ समाचार से बातचीत में कहा, “आतंकियों को पनाह देने वाला पाकिस्तान खुद भी गुनहगार है. ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि दुबारा कोई भारत के खिलाफ साजिश करने की हिम्मत न कर सके.”
आतंकियों की खोपड़ी पर चढ़ेगा सिंदूर- शंकराचार्य उन्होंने कहा कि जो लोग मांग का सिंदूर उजाड़ते हैं, अब उनकी खोपड़ी पर सिंदूर चढ़ेगा. यह वाक्य उनके बयान का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया है. उन्होंने यह भी बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम सोच-समझकर दिया गया है. इससे यह स्पष्ट होता है कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य भावनात्मक और राष्ट्रीय दोनों दृष्टिकोण से मजबूत है.
शंकराचार्य अवीमुक्तेश्वरानंद का मानना है कि भारत के नागरिक लंबे समय से ऐसी कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे थे. “अब समय आ गया है कि सरकार आतंकियों और उन्हें समर्थन देने वालों को ऐसा सबक सिखाए, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखें,” उन्होंने कहा कि उन्होंने सरकार की रणनीतिक सोच की सराहना की और सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों की प्रशंसा की. उन्होंने यह भी कहा कि इस समय देश को एकजुट रहने और सरकार का साथ देने की जरूरत है.
नई दिल्ली: पाकिस्तान पर 7 मई 2025 को हुई भारतीय एयर स्ट्राइक के बाद केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट (BLACKOUT MOCKDRILL IN UP) पर हैं. केंद्र सरकार ने सुरक्षा समीक्षा के बाद देशभर के 244 जिलों में मॉक ड्रिल आयोजित करने का निर्णय लिया है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इसकी शुरुआत मंगलवार को हुई, जहां युद्ध जैसी स्थिति में राहत और बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया. गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश जारी किए हैं कि वे युद्ध या आतंकी हमलों जैसे हालात में तत्काल प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहें. इस आदेश के तहत उत्तर प्रदेश के 19 जिलों में 7 मई को ब्लैकआउट मॉक ड्रिल की जाएगी. राज्य के डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि ड्रिल के दौरान कुछ देर के लिए बिजली की आपूर्ति और सार्वजनिक स्थानों की लाइटें बंद कर दी जाएंगी.
सायरन बजते ही राहत टीमें हुईं एक्टिव लखनऊ की पुलिस लाइन में हुए मॉक ड्रिल के दौरान सायरन बजते ही सिविल डिफेंस, एंबुलेंस, दमकल और पुलिस टीमों ने तत्काल हरकत में आकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और भीड़भाड़ वाली जगहों को खाली कराया गया. इस ड्रिल का उद्देश्य केवल अभ्यास नहीं, बल्कि एक रियल-टाइम रेस्पॉन्स सिस्टम को परखना है, ताकि वास्तविक आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. (BLACKOUT MOCKDRILL IN UP)
ब्लैकआउट की तैयारी, 19 जिलों में रात को बिजली बंद डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि 7 मई की रात को गोरखपुर, कानपुर, आगरा, वाराणसी, लखनऊ, मेरठ समेत 19 जिलों में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल होगी. इन जिलों को गृह मंत्रालय ने A, B, और C कैटेगरी में बांटा है, जिसमें सुरक्षा की गंभीरता के आधार पर गतिविधियां निर्धारित की गई हैं. विशेष सतर्कता नेपाल सीमा से लगे जिलों सिद्धार्थनगर, बहराइच और महाराजगंज में बरती जा रही है. इन जिलों में मॉक ड्रिल के दौरान एयर रेड सायरन, ब्लैकआउट, कैमोफ्लाज प्रोटोकॉल, नागरिकों का प्रशिक्षण और छात्र-अभियान आयोजित होंगे. (BLACKOUT MOCKDRILL IN UP)
गोरखपुर में 7 से 8 बजे होगा ब्लैकआउट गोरखपुर में सिविल डिफेंस और जिला प्रशासन के सहयोग से मॉक ड्रिल का आयोजन शहर के प्रमुख स्थानों पर होगा. शाम 7 से 8 बजे तक शहर में ब्लैकआउट रहेगा. सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन डॉ. संजीव गुलाटी ने बताया कि 500 प्रशिक्षित कार्यकर्ता लोगों को युद्ध जैसी स्थिति से बचने का प्रशिक्षण देंगे. साथ ही नागरिकों को एयर रेड सायरन की पहचान, अफवाहों से बचाव और नजदीकी शरणस्थलों की जानकारी देने का भी अभ्यास कराया जाएगा.
राष्ट्र सुरक्षा में भागीदारी हमारी जिम्मेदारी!
7 मई को उत्तर प्रदेश में गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। इस दौरान सायरन बजेंगे और युद्ध या आतंकी हमलों जैसी आपात स्थितियों में सुरक्षा के उपायों का अभ्यास किया जाएगा।
सोनभद्र में अधिकारियों ने बनाई रणनीति सोनभद्र जिले में मॉक ड्रिल को लेकर डीएम बद्रीनाथ सिंह और एसपी अशोक कुमार मीणा की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई. बैठक में औद्योगिक संस्थानों की सुरक्षा, आपातकालीन यातायात प्रबंधन, ब्लैकआउट की प्रक्रिया, और धार्मिक स्थलों के लाउडस्पीकर से अलर्ट जारी करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई. 7 मई को सुबह 9 से 11 बजे तक जिले के विभिन्न स्थानों पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी. औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया गया है.
आगरा में 8 स्थानों पर मॉक ड्रिल, 5 मिनट का ब्लैकआउट आगरा के डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने बताया कि जिले में 8 से 10 लोकेशन्स पर मॉक ड्रिल की योजना बनाई गई है. बुधवार रात 8 बजे 5 मिनट के लिए ब्लैकआउट किया जाएगा. इस दौरान सायरन बजाया जाएगा और सभी नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे पैनिक न करें और इसे युद्ध न समझें. रामकृष्णा कन्या महाविद्यालय, बल्केश्वर में माइक्रो मॉक ड्रिल भी होगी, जिसमें आपात स्थिति में घायलों के इलाज का प्रशिक्षण दिया जाएगा.
देशभर की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर गृह मंत्रालय ने कहा है कि मॉक ड्रिल के जरिये यह देखा जाएगा कि किसी भी संभावित युद्ध या आतंकी हमले के समय प्रशासन और नागरिकों की प्रतिक्रिया कितनी प्रभावी है. सभी राज्य, जिला और स्थानीय प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे हर सेक्टर में तैयारियां सुनिश्चित करें और ड्रिल को वास्तविक हालात जैसा बनाएं.
नई दिल्ली: 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के 15वें दिन भारत ने जवाबी कार्रवाई (INDIA PAKISTAN WAR) करते हुए “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए. भारत की यह सैन्य कार्रवाई इजरायल की सैन्य रणनीति की तरह मानी जा रही है, जिसमें सीमित लेकिन घातक हमलों के जरिए दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया जाता है.
पहलगाम हमले के बाद भारत की आक्रामक रणनीति पहलगाम में हुए आत्मघाती हमले में कई सुरक्षाबलों की शहादत के बाद देश में रोष फैल गया था. भारत ने 7 मई, 2025 को पाकिस्तान के भीतर बहावलपुर, मुरीदके, गुलपुर, कोटली और मुजफ्फराबाद जैसे आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर नौ अलग-अलग लोकेशनों पर मिसाइल स्ट्राइक की. इन हमलों को “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया, जो भारत की बदलती सैन्य नीति का प्रतीक है. (INDIA PAKISTAN WAR)
इजरायली रणनीति से प्रेरित भारत की स्ट्राइक भारत की इस कार्रवाई की तुलना इजरायल की सैन्य रणनीति से की जा रही है. इजरायल वर्षों से सीमित, सटीक और खुफिया-आधारित हमलों के लिए जाना जाता है, जिससे बड़े युद्ध की स्थिति टलती है, लेकिन दुश्मन को गहरा झटका मिलता है. भारत ने भी 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक में इसी शैली का पालन किया था.
कैसे हुआ ऑपरेशन सिंदूर? भारत ने इस ऑपरेशन में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया. सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन, और नेट्रा AWACS जैसी प्रणाली से दुश्मन के ठिकानों को पहले लॉक किया गया, फिर सुपरसोनिक ब्रह्मोस और रुद्रम-1 मिसाइलों से हमला किया गया. RISAT-2BR1 सैटेलाइट और अन्य निगरानी प्रणालियों ने टारगेट की स्थिति और गतिविधियों पर निगरानी रखी. यह पूरी तरह से इजरायल की टारगेट लॉकिंग और प्री-स्ट्राइक इंटेलिजेंस मॉडल से मेल खाता है.
पाकिस्तान का HQ-9 एयर डिफेंस हुआ फेल भारत की मिसाइलें पाकिस्तान के आधुनिक माने जाने वाले चीनी HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर अपने टारगेट पर सटीक वार कर पाईं. HQ-9 भले ही 100 टारगेट को ट्रैक करने और 6 को एकसाथ नष्ट करने की क्षमता रखता है, लेकिन ब्रह्मोस की तेज गति और कम ऊंचाई पर उड़ान के चलते यह उसे रोक नहीं सका. HQ-9 की रडार क्षमताएं भारत के S-400 सिस्टम के मुकाबले कमजोर हैं. यही कारण था कि पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था इन हमलों को रोकने में असफल रही.
Proud of our armed forces.#OperationSindoor is Bharat’s response to the brutal killing of our innocent brothers in Pahalgam.
The Modi government is resolved to give a befitting response to any attack on India and its people. Bharat remains firmly committed to eradicating…
SEAD रणनीति का इस्तेमाल भारत ने SEAD (Suppression of Enemy Air Defenses) रणनीति का उपयोग करते हुए पाकिस्तान के एयर डिफेंस को निष्क्रिय किया. सुखोई-30 MKI विमानों से Kh-31P और रुद्रम-1 मिसाइलों का इस्तेमाल कर रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को पहले नष्ट किया गया. भारत ने इस ऑपरेशन में केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे आम नागरिकों को नुकसान न पहुंचे. यह भी इजरायली शैली की खासियत है कि हमले सटीक और सीमित होते हैं.
नई दिल्ली: भारत ने बुधवार तड़के आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकवादी संगठनों के (INDIA PAKISTAN WAR) नौ ठिकानों पर मिसाइल हमले किए. इन हमलों में लश्कर-ए-तैयबा का गढ़ मुरीदके और जैश-ए-मोहम्मद का मुख्य अड्डा बहावलपुर भी शामिल था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में 90 से ज्यादा आतंकवादियों के मारे जाने की खबर है.
पहलगाम पर भारत का पैग़ाम – छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं।
प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा भारत की आत्मा पर हमला करने वालो को कड़ी सज़ा मिलेगी।
भारत आतंकवाद को उसकी जड़ से उखाड़ फेकने में सक्षम भी है और संकल्प बद्ध भी है।
खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय वायुसेना ने इन हमलों को अंजाम दिया. रक्षा सूत्रों ने बताया कि ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद के चार, लश्कर-ए-तैयबा के20तीन और हिज्बुल मुजाहिदीन के दो आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. मुरीदके में करीब 30 आतंकवादी मारे गए हैं, जबकि अन्य ठिकानों पर भी दर्जनों आतंकवादियों के मारे जाने की पुष्टि की जा रही है. हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
इस ऑपरेशन को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले का जवाब माना जा रहा है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “भारत माता की जय”, जो इस ऑपरेशन की सफलता और उसके संदेश को दर्शाता है.
इस बीच, पाकिस्तान की सेना ने नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास भारी गोलाबारी की. रक्षा सूत्रों ने बताया कि मंगलवार रात को पाकिस्तान की तरफ से तोपों और छोटे हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिससे जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में भय का माहौल बन गया है और वहां से बड़े पैमाने पर लोगों के पलायन की खबरें भी सामने आ रही हैं.
हमलों और सीमा पर तनाव के चलते हवाई क्षेत्र में भी असर पड़ा है. स्पाइसजेट और इंडिगो जैसी प्रमुख एयरलाइनों ने अमृतसर, जम्मू, श्रीनगर, लेह, धर्मशाला और चंडीगढ़ जाने वाली कई उड़ानों को रद्द कर दिया है. स्पाइसजेट ने एक्स पर लिखा, “अमृतसर जाने वाली दो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को दिल्ली डायवर्ट किया गया है. इस अप्रत्याशित व्यवधान के कारण हुई असुविधा के लिए खेद है.”
इंडिगो ने कहा कि उत्तर भारत में हवाई क्षेत्र की स्थिति लगातार बदल रही है, जिससे कई उड़ानों पर असर पड़ा है. एयर इंडिया ने भी स्थिति को देखते हुए दोपहर तक जम्मू, श्रीनगर, लेह, जोधपुर, अमृतसर, भुज, जामनगर, चंडीगढ़ और राजकोट के लिए अपनी सभी उड़ानों को रद्द कर दिया है.
सरकार और सेना की तरफ से इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम बताया जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह ऑपरेशन भारतीय नीति में एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाता है, जिसमें अब सीमापार बैठकर भारत पर हमले की साजिश रचने वालों को उनकी जमीन पर ही निशाना बनाया जा रहा है.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार (YOGI GOVERNMENT) ने राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है. राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में मंगलवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिसके तहत सरकार ने 1600 मेगावाट की तापीय परियोजना से 1500 मेगावाट बिजली 25 वर्षों तक सस्ती दर पर खरीदने का फैसला किया है. यह निर्णय उत्तर प्रदेश को दीर्घकालिक ऊर्जा संकट से राहत देने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी भारी लाभ दिलाएगा.
निजी कंपनी से होगी बिजली की खरीद बिजली खरीद की यह पूरी प्रक्रिया बिडिंग के माध्यम से की गई है, जिसमें सबसे कम टैरिफ (5.38 रुपये प्रति यूनिट) देने वाली एक निजी कंपनी को चुना गया है. इस डील के तहत यूपी पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को 25 वर्षों में करीब 2958 करोड़ रुपये की बचत होगी. यह सौदा उत्तर प्रदेश में मौजूदा और प्रस्तावित तापीय परियोजनाओं की तुलना में कहीं अधिक किफायती है.
2030-31 से मिलने लगेगी बिजली सरकार की योजना के मुताबिक यह परियोजना वित्तीय वर्ष 2030-31 तक चालू हो जाएगी और उसी समय से 1500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति शुरू हो जाएगी. यह बिजली 6.10 रुपये प्रति यूनिट की दर से मिलेगी, जो जवाहरपुर, ओबरा, घाटमपुर और पनकी जैसी परियोजनाओं की तुलना में काफी सस्ती होगी, जहां बिजली की दरें 6.60 रुपये से लेकर 9 रुपये प्रति यूनिट तक हैं.
सार्वजनिक संयंत्रों से भी सस्ती बिजली ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि यह सौदा न केवल निजी कंपनियों की पिछली डील्स से सस्ता है, बल्कि उत्तर प्रदेश के सार्वजनिक पावर प्लांट्स से खरीदी जा रही बिजली से भी किफायती है. उन्होंने बताया कि बिजली की दरें पहले की तुलना में काफी कम होंगी और यह राज्य के उद्योगों और उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात होगी.
DBFOO मॉडल के तहत परियोजना इस पूरी परियोजना को DBFOO मॉडल के तहत लागू किया जाएगा. DBFOO का मतलब है Design, Build, Finance, Own और Operate. इस मॉडल के तहत परियोजना का निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और स्वामित्व निजी कंपनी के पास रहेगा, जबकि सरकार कोयला लिंक देती है और बिजली खरीदती है. इस मॉडल से सरकारी निवेश की जरूरत नहीं होती, और राज्य को कम कीमत पर बिजली मिलती है.
बिडिंग प्रक्रिया का विवरण ऊर्जा विभाग द्वारा जुलाई 2024 में रिक्वेस्ट फॉर क्वालीफिकेशन जारी किया गया था, जिसमें 7 कंपनियों ने भाग लिया. इसके बाद 5 कंपनियों ने फाइनेंशियल बिड में हिस्सा लिया, जिनमें से सबसे कम दर वाली कंपनी को चुना गया. इस कंपनी ने फिक्स्ड चार्ज 3.727 रुपये और फ्यूल चार्ज 1.656 रुपये प्रति यूनिट तय किया, जिससे कुल टैरिफ 5.38 रुपये प्रति यूनिट बनता है.
2033-34 तक बढ़ेगी बिजली की मांग केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्ययन के अनुसार, राज्य को वर्ष 2033-34 तक लगभग 10,795 मेगावाट अतिरिक्त तापीय ऊर्जा की जरूरत होगी. इसके अलावा, 23,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के लिए भी एक रोडमैप तैयार किया गया है.
क्या होगा लाभ? इस नई नीति से उत्तर प्रदेश में उद्योगों को निर्बाध और किफायती बिजली मिल सकेगी. इससे राज्य की औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी. वहीं, आम नागरिकों को भी बिजली की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है.