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Category: उत्तर प्रदेश

  • बागपत : डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का सपा पर तीखा हमला, बोले– मुस्लिम साथ छोड़ दें तो चुनाव भी नहीं जीत पाएगी सपा

    बागपत : डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का सपा पर तीखा हमला, बोले– मुस्लिम साथ छोड़ दें तो चुनाव भी नहीं जीत पाएगी सपा

    बागपत। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बागपत दौरे के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सपा की चुनावी ताकत पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मुस्लिम समुदाय का समर्थन सपा से हट जाए, तो पार्टी प्रधानी का चुनाव तक नहीं जीत पाएगी।डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का यह बयान आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल को और गर्म करता नजर आ रहा है।

    जाति और धर्म की राजनीति पर साधा निशाना

    ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां जाति के आधार पर राजनीति करती हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों के पास जनता के बीच जाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए ये बार-बार समाज को बांटने की राजनीति कर रही हैं।उन्होंने कहा,“बीजेपी विकास, सुशासन और जनकल्याण के मुद्दों पर चुनाव लड़ती है, जबकि सपा-कांग्रेस सिर्फ जाति और तुष्टिकरण की राजनीति में उलझी हुई हैं।”

    अखिलेश यादव के 2027 वाले बयान पर पलटवार

    डिप्टी सीएम ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के 2027 में सरकार बनाने के दावे पर भी तंज कसा।ब्रजेश पाठक ने कहा“अखिलेश यादव दिन में सपने देख रहे हैं। प्रदेश की जनता सब देख रही है और समझ चुकी है कि कौन विकास कर रहा है और कौन सिर्फ भ्रम फैला रहा है।”उन्होंने दावा किया कि 2027 में भी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी

    बीजेपी बनाम सपा की सियासी जंग तेज

    ब्रजेश पाठक के इस बयान के बाद सपा और बीजेपी के बीच जुबानी जंग और तेज होने की संभावना है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे 2027 के चुनाव नजदीक आएंगे, ऐसे तीखे बयान और ज्यादा देखने को मिलेंगे। और यूपी की राजनीति में फिर दिखेगा नया रंग

  • अमर शहीद हेमू कल्याणी को दी गई श्रद्धांजलि,शहीदों के बलिदान की याद और प्रेरणा

    अमर शहीद हेमू कल्याणी को दी गई श्रद्धांजलि,शहीदों के बलिदान की याद और प्रेरणा

    कानपुर।उत्तर प्रदेश के कानपुर में आज 21 जनवरी 2026 को अमर शहीद हेमू कल्याणी की पुण्यतिथि बड़ी श्रद्धा और भावनाओं के साथ मनाई गई। यह दिन उनके शहादत दिवस के रूप में याद किया गया। आयोजन श्री झूलेलाल शिव मंदिर (ब्लाक 13, गोबिंदनगर) में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में समाज के कई गणमान्य नागरिकों ने हिस्सा लिया और शहीद को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

    हेमू कल्याणी: देशभक्ति की जीवंत मिसाल

    अमर शहीद हेमू कल्याणी का जन्म 23 मार्च, 1923 को सुकुर सिंध प्रांत, अखंड भारत में हुआ था। बचपन से ही उनमें देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के दौरान उन्होंने अपनी बहादुरी का परिचय दिया।जब अंग्रेजों की हथियारों से भरी ट्रेन उनके क्षेत्र से गुजर रही थी, तब हेमू कल्याणी ने रेल की पटरियां उखाड़कर विरोध किया। इसी साहसिक कदम के कारण ब्रिटिश शासन ने उन्हें गिरफ्तार कर 21 जनवरी 1943 को फांसी पर लटका दिया। शहीद हेमू कल्याणी ने देश के लिए हंसते-हंसते बलिदान दिया।

    श्रद्धांजलि कार्यक्रम में समाज ने जताया सम्मान

    आज के कार्यक्रम में शहीद हेमू कल्याणी की प्रतिमा पर मनोज तलरेजा, बंटी सिधवानी, मनोज लालवानी, बलराम कटारिया सहित समाज के कई गणमान्य लोगों ने माल्यार्पण किया। इस अवसर पर पूरा झूलेलाल मंदिर प्रांगण “अमर शहीद हेमू कल्याणी अमर रहे, अमर रहे, अमर रहे” के उद्घोष से गूंज उठा।मुख्य अतिथियों में श्यामलाल मूलचंदानी (अध्यक्ष), सुरेश कटारिया, महेश मनचंदा, डॉ. सुरेश मदान, डॉ. सुरेश आहूजा, बंटी सिधवानी, संजू डाबरानी, नरेश फूलवानी, चंद्रभान मोहनानी, मुरारी लाल चुग और कई अन्य शामिल रहे। उन्होंने शहीद की शहादत को याद किया और उनके बलिदान को देशवासियों के लिए प्रेरणा बताया।

    शहीदों के बलिदान की याद

    इस अवसर पर उपस्थित नागरिकों ने कहा कि शहीदों की चिताओं पर हर वर्ष मेले लगेंगे और देश पर मर मिटने वालों का यही निशान रहेगा। हेमू कल्याणी जैसे सपूतों की शहादत देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनकी कहानी हमें हमेशा याद रहेगी।इस कार्यक्रम में युवाओं और बच्चों को शहीदों के महत्व के बारे में बताया गया और उन्हें देशभक्ति का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने एकजुट होकर शहीद हेमू कल्याणी को नमन किया और उनके बलिदान को हमेशा याद रखने का संकल्प लिया।

  • संभल : CJM के ट्रांसफर पर बवाल, वकीलों का प्रदर्शन“योगी जब-जब डरता है, पुलिस को आगे करता है”

    संभल : CJM के ट्रांसफर पर बवाल, वकीलों का प्रदर्शन“योगी जब-जब डरता है, पुलिस को आगे करता है”

    संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर के तबादले को लेकर जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है। CJM के ट्रांसफर के विरोध में जिले के वकील सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने आरोप लगाया कि सरकार न्यायिक फैसलों में हस्तक्षेप कर रही है, जो लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरनाक है।

    क्यों भड़के वकील?

    दरअसल, संभल हिंसा मामले में CO अनुज चौधरी समेत कई पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का आदेश CJM विभांशु सुधीर ने दिया था। इस आदेश के बाद अचानक उनका तबादला सुल्तानपुर कर दिया गया, जिससे वकील समुदाय में भारी नाराजगी है। वकीलों का कहना है कि यह तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि दबाव में लिया गया फैसला है।

    नारेबाजी से गूंजा कचहरी परिसर

    CJM के ट्रांसफर की खबर सामने आते ही संभल कचहरी परिसर में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हाथों में तख्तियां लेकर वकील सरकार के खिलाफ नारे लगाते नजर आए। प्रदर्शन के दौरान नारे लगाए गए“योगी जब–जब डरता है, पुलिस को आगे करता है”,“न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला नहीं सहेगा हिंदुस्तान”।वकीलों का कहना है कि अगर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR का आदेश देने वाले जज का इस तरह तबादला किया जाएगा, तो भविष्य में कोई न्यायिक अधिकारी निष्पक्ष निर्णय लेने का साहस नहीं करेगा।

    न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल

    वकीलों ने आरोप लगाया कि यह तबादला न्यायपालिका पर कार्यपालिका के दबाव को दर्शाता है। उनका कहना है कि CJM ने कानून के दायरे में रहते हुए फैसला दिया था, लेकिन सरकार को यह फैसला रास नहीं आया। इसी वजह से उन्हें जिले से बाहर कर दिया गया।

    आंदोलन की चेतावनी

    प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि CJM विभांशु सुधीर का ट्रांसफर वापस नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। जरूरत पड़ी तो प्रदेश स्तर पर भी वकीलों को लामबंद किया जाएगा। वकीलों ने साफ कहा कि यह लड़ाई किसी एक जज की नहीं, बल्कि न्याय और संविधान की रक्षा की लड़ाई है।

    प्रशासन की चुप्पी

    फिलहाल इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि न्यायपालिका की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जा सके।

  • महोबा : सिंचाई विभाग की लापरवाही से किसानों की तबाही, नहर का पानी छोड़ने से 12 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न

    महोबा : सिंचाई विभाग की लापरवाही से किसानों की तबाही, नहर का पानी छोड़ने से 12 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न

    REPORT- चन्द्रशेखर नामदेव महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के कबरई विकासखंड से सिंचाई विभाग की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। बरीपुरा मौजा में नहर का पानी अनियंत्रित रूप से छोड़े जाने के कारण एक दर्जन से अधिक किसानों की कई बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई। किसानों का आरोप है कि पूर्व ग्राम प्रधान ने अपने निजी स्वार्थ के चलते नहर को जरूरत से ज्यादा खुलवा दिया, जिससे खेत तालाब में तब्दील हो गए।

    अनियंत्रित नहर बनी किसानों के लिए आफत

    जानकारी के अनुसार, बरीपुरा नहर से अचानक अत्यधिक मात्रा में पानी छोड़ा गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि नहर का पानी आसपास के खेतों में घुस गया। देखते ही देखते किसानों की लगभग 12 बीघा गेहूं की खड़ी फसल पानी में डूब गई। कई खेतों में पानी का स्तर चार फीट तक पहुंच गया, जिससे फसल के पूरी तरह बर्बाद होने की आशंका जताई जा रही है।

    पूर्व प्रधान पर गंभीर आरोप

    डढ़हत माफ गांव के किसानों ने आरोप लगाया है कि पूर्व ग्राम प्रधान ने अपने फायदे के लिए नहर के फाटक क्षमता से अधिक खुलवा दिए। किसानों का कहना है कि पानी छोड़ने से पहले न तो कोई सूचना दी गई और न ही हालात का आकलन किया गया। इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ा, जिनकी महीनों की मेहनत कुछ ही घंटों में बर्बाद हो गई।

    शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई

    पीड़ित किसानों ने बताया कि जैसे ही खेतों में पानी भरना शुरू हुआ, उन्होंने तुरंत सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। कई बार फोन करने और मौके पर पहुंचने की मांग के बावजूद कोई अधिकारी समय पर नहीं पहुंचा। विभागीय उदासीनता और लापरवाही के चलते हालात और बिगड़ते चले गए।

    किसानों की उम्मीदों पर फिरा पानी

    आशाराम, मनसुख, सुमेरा, लखनलाल, केसरदास और राधारानी सहित कई किसान आज अपने खेतों के किनारे खड़े होकर बर्बाद फसल को देखने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि यही गेहूं की फसल उनके परिवार की आजीविका और कर्ज चुकाने का सहारा थी। फसल डूबने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    मुआवजे और कार्रवाई की मांग

    पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही किसानों ने नहर संचालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते पानी रोका जाता, तो इस भारी नुकसान से बचा जा सकता था।

    प्रशासन की भूमिका पर सवाल

    इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और किसानों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन पीड़ित किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • IIT Kanpur suicide: IIT कानपुर में Ph.D. छात्र की आत्महत्या: 18 घंटे में क्या बदला? कैंपस में फिर उठा मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल

    IIT Kanpur suicide: IIT कानपुर में Ph.D. छात्र की आत्महत्या: 18 घंटे में क्या बदला? कैंपस में फिर उठा मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल

    IIT Kanpur suicide: कानपुर। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में गिने जाने वाले IIT कानपुर से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। डिपार्टमेंट ऑफ अर्थ साइंस के 28 वर्षीय Ph.D. छात्र रामस्वरुप ईशराम ने मंगलवार दोपहर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पूरे IIT कैंपस में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है। साथी छात्रों ने शाम को कैंडल मार्च निकालकर मृतक को श्रद्धांजलि दी।

    18 घंटे पहले तक सब सामान्य था

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मौत से कुछ घंटे पहले तक रामस्वरुप की मानसिक स्थिति को लेकर कोई बड़ा खतरा नहीं बताया गया था। IIT कानपुर के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आलोक बाजपेई के अनुसार, मंगलवार शाम 4 बजे उनका अपॉइंटमेंट तय था। इतना ही नहीं, मौत से पहले रामस्वरुप की काउंसलर से भी बातचीत हुई थी, जिसमें सेल्फ हार्म का रिस्क बेहद कम बताया गया था।

    मेधावी छात्र, फिर भी क्यों टूटा हौसला?

    रामस्वरुप ईशराम एक मेधावी शोध छात्र थे और अपनी रिसर्च को लेकर आगे की योजना बना रहे थे। वह जल्द ही IIT कानपुर से बाहर जाकर अपना करियर आगे बढ़ाना चाहते थे। हालांकि, वे पिछले कुछ समय से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी इलाज भी करा रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार छात्र अंदर ही अंदर दबाव झेलते रहते हैं, जो अचानक घातक रूप ले सकता है।

    25 महीनों में 9 आत्महत्याएं, सिस्टम पर सवाल

    यह घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पिछले 25 महीनों में IIT कानपुर कैंपस में आत्महत्या का यह 9वां मामला है।
    सिर्फ पिछले एक महीने में यह दूसरी आत्महत्या है, जिसने प्रशासन और काउंसलिंग सिस्टम दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

    IIT कानपुर के आत्महत्या मामलों की सूची

    • दिसंबर 2023: शोध सहायक डॉ. पल्ल्वी चिल्का
    • जनवरी 2024: M.Tech छात्र विकास मीना
    • जनवरी 2024: Ph.D. छात्रा प्रियंका जायसवाल
    • अक्टूबर 2024: Ph.D. छात्रा प्रगति
    • फरवरी 2025: रिसर्च स्कॉलर अंकित यादव
    • अगस्त 2025: सॉफ्टवेयर डेवलपर दीपक चौधरी
    • अक्टूबर 2025: B.Tech छात्र धीरज सैनी
    • दिसंबर 2025: B.Tech छात्र जय सिंह मीना
    • जनवरी 2026: Ph.D. छात्र रामस्वरुप ईशराम

    प्रशासन और विशेषज्ञ क्या कहते हैं

    IIT कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि छात्रों के लिए 24 घंटे काउंसलिंग सुविधा उपलब्ध है, लेकिन छात्र अपनी परेशानियाँ खुलकर साझा नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, मनोचिकित्सक डॉ. आलोक बाजपेई का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्या कोई कमजोरी नहीं, बल्कि समय पर बातचीत और सहयोग से हर समस्या का समाधान संभव है।

    बड़ा सवाल

    जब काउंसलिंग, अपॉइंटमेंट और बातचीत सब मौजूद थी, तो फिर आखिर वह कौन-सा दबाव था जिसने एक होनहार छात्र को यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया?

  • Mahoba Teacher Suspended News : कक्षा में ग्रामीण से पैर दबवाने और छात्राओं से मिड-डे मील का काम करवाने वाला शिक्षक निलंबित

    Mahoba Teacher Suspended News : कक्षा में ग्रामीण से पैर दबवाने और छात्राओं से मिड-डे मील का काम करवाने वाला शिक्षक निलंबित

    Mahoba Teacher Suspended News उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। चरखारी विकासखंड के कम्पोजिट उच्च विद्यालय छानी खुर्द में तैनात एक शिक्षक द्वारा कक्षा के भीतर ग्रामीण से पैर दबवाने और छात्राओं से मध्यान्ह भोजन (Mid Day Meal) से जुड़े कार्य करवाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने कड़ा एक्शन लिया है।वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) राहुल मिश्रा ने आरोपी शिक्षक जगदीश प्रसाद को निलंबित कर दिया है। साथ ही मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।


    वायरल वीडियो से मचा था हड़कंप

    सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में साफ तौर पर देखा गया कि शिक्षक कक्षा के भीतर कुर्सी पर बैठा है और एक ग्रामीण उससे पैर दबवा रहा है। वहीं, दूसरे वीडियो में छात्राएं मध्यान्ह भोजन के लिए सब्जी काटती दिखाई दे रही हैं, जबकि एक व्यक्ति बनियान और अगोंछा पहने विद्यालय परिसर में घूमता नजर आ रहा है।यह दृश्य न केवल विद्यालय अनुशासन के विरुद्ध था, बल्कि छात्रों की गरिमा और अधिकारों पर भी सवाल खड़े करता है।

    नोटिस के बावजूद नहीं मिला संतोषजनक जवाब

    मामला सामने आने के बाद बीएसए राहुल मिश्रा ने शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। लेकिन शिक्षक द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर विभाग ने तत्काल प्रभाव से शिक्षक को निलंबित कर दिया।


    बीएसए ने क्या कहा?

    बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल मिश्रा ने बताया कि“विद्यालय में कक्षा के दौरान किसी ग्रामीण से पैर दबवाना मानवीय गरिमा के खिलाफ है। छात्राओं से मध्यान्ह भोजन से जुड़े कार्य करवाना भी विद्यालय नियमों का उल्लंघन है। जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।”


    विभागीय जांच के आदेश, शिक्षकों में हड़कंप

    शिक्षक के निलंबन के साथ ही पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोष सिद्ध होने पर और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।बीएसए की इस सख्ती के बाद महोबा जिले के अन्य विद्यालयों में तैनात लापरवाह शिक्षकों में भी हड़कंप मच गया है।


    शिक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

    यह मामला एक बार फिर सरकारी स्कूलों में अनुशासन, निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करता है। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • रायबरेली पुलिस का मानवीय चेहरा, घरेलू हिंसा से त्रस्त विवाहिता ज़हर खाकर थाने पहुंची, इंस्पेक्टर की तत्परता से बची जान

    रायबरेली पुलिस का मानवीय चेहरा, घरेलू हिंसा से त्रस्त विवाहिता ज़हर खाकर थाने पहुंची, इंस्पेक्टर की तत्परता से बची जान

    रायबरेली।उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से पुलिस की संवेदनशीलता और मानवता की एक मिसाल सामने आई है। घरेलू हिंसा से परेशान एक विवाहिता ज़हर खाकर अपनी तीन नाबालिग बेटियों के साथ थाने पहुंच गई। समय रहते पुलिस की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई से महिला की जान बचा ली गई, जबकि उसकी बच्चियों की भी देखभाल की गई।यह मामला खीरों थाना क्षेत्र के बहादुरगढ़ गांव का है। यहां की रहने वाली 28 वर्षीय सोनी देवी घरेलू हिंसा से मानसिक रूप से इतनी टूट चुकी थी कि उसने आत्महत्या का प्रयास कर लिया।

    रायबरेली में पुलिस का मानवीय चेहरा: घरेलू हिंसा से त्रस्त विवाहिता ज़हर खाकर थाने पहुंची, इंस्पेक्टर की तत्परता से बची जान
    रायबरेली में पुलिस का मानवीय चेहरा: घरेलू हिंसा से त्रस्त विवाहिता ज़हर खाकर थाने पहुंची, इंस्पेक्टर की तत्परता से बची जानरायबरेली में पुलिस का मानवीय चेहरा: घरेलू हिंसा से त्रस्त विवाहिता ज़हर खाकर थाने पहुंची, इंस्पेक्टर की तत्परता से बची जान

    थाने के बाहर मंदिर पर बैठाईं तीन मासूम बेटियां

    जानकारी के मुताबिक, सोनी देवी ज़हर खाने के बाद सीधे खीरों थाने पहुंची। थाने के सामने स्थित मंदिर पर उसने अपनी तीनों नाबालिग बेटियों को बैठा दिया और वहां ड्यूटी पर तैनात सिपाही से कहा कि उसने ज़हर खा लिया है। यह सुनते ही सिपाही ने बिना देर किए थाना प्रभारी इंस्पेक्टर संतोष सिंह को सूचना दी।

    “मेरी बच्चियों का ख्याल रखना…” कहकर रो पड़ी महिला

    सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर संतोष सिंह मौके पर पहुंचे। महिला की हालत बिगड़ रही थी। उसने इंस्पेक्टर से कहा“मैंने ज़हर खा लिया है, अब नहीं बचूंगी… मेरी तीन बच्चियों का ख्याल रखना।”महिला की हालत गंभीर देख इंस्पेक्टर संतोष सिंह ने बिना किसी औपचारिकता के तत्काल एंबुलेंस बुलवाई और उसे सीएचसी खीरों पहुंचाया।


    बच्चियों के लिए पुलिस ने की खाने-पीने की व्यवस्था

    महिला को अस्पताल भेजने के बाद पुलिस ने उसकी तीनों बेटियों को अकेला नहीं छोड़ा। पुलिसकर्मियों ने बच्चियों के लिए बिस्किट, दालमोट और खाने-पीने की व्यवस्था करवाई और उन्हें सुरक्षित स्थान पर बैठाया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया।


    सास और ननद पर गंभीर आरोप

    पीड़िता सोनी देवी का आरोप है कि उसका पति गाजियाबाद में नौकरी करता है और घर पर मौजूद नहीं रहता। इस दौरान उसकी सास और ननद उसे लगातार प्रताड़ित करती थीं। महिला का कहना है कि उसके साथ बेलन से मारपीट की जाती थी और मानसिक रूप से भी प्रताड़ना दी जाती थी। इसी घरेलू हिंसा से तंग आकर उसने यह कदम उठाया।


    जिला अस्पताल रेफर, हालत खतरे से बाहर

    सीएचसी खीरों में प्राथमिक उपचार के बाद महिला की स्थिति को देखते हुए उसे जिला अस्पताल रायबरेली रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, फिलहाल महिला की हालत खतरे से बाहर है और उसका इलाज जारी है।


    पुलिस का बयान

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिला के बयान दर्ज किए जाएंगे।“पीड़िता से तहरीर मिलते ही घरेलू हिंसा के मामले में नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

  • बाराबंकी : प्रधान प्रतिनिधि राजन सिंह ने पिता की पुण्यतिथि पर बांटे हजारों कंबल, जरूरतमंदों को मिली राहत

    बाराबंकी : प्रधान प्रतिनिधि राजन सिंह ने पिता की पुण्यतिथि पर बांटे हजारों कंबल, जरूरतमंदों को मिली राहत

    सवांददाता मुन्ना सिंह बाराबंकी। जिले के हैदरगढ़ क्षेत्र स्थित ओहरामऊ गांव में प्रधान प्रतिनिधि राजन सिंह ने अपने पिता स्वर्गीय भानु सिंह की पांचवीं पुण्यतिथि पर एक विशाल कंबल वितरण समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर गांव सहित आसपास के इलाकों से आए हजारों जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए गए, जिससे कड़ाके की ठंड में उन्हें बड़ी राहत मिली।

    राजन सिंह ने बताया कि वे बीते 16 वर्षों से लगातार जरूरतमंदों की सहायता करते आ रहे हैं और यह कार्य उनके पिता के सपनों को साकार करने का माध्यम है। पहले यह कार्यक्रम मकर संक्रांति पर किया जाता था, लेकिन पिछले पांच वर्षों से इसे पिता की पुण्यतिथि पर आयोजित किया जा रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान समाज के संभ्रांत व्यक्तियों और पत्रकारों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। राजन सिंह ने समाज के सक्षम लोगों से अपील की कि वे अपनी क्षमता अनुसार गरीब और असहाय लोगों की मदद करें, क्योंकि जरूरतमंदों की सेवा से ईश्वर प्रसन्न होते हैं।

    कंबल पाकर बुजुर्गों, महिलाओं और गरीब परिवारों के चेहरों पर राहत साफ नजर आई। लोगों ने ग्राम पंचायत और राजन सिंह का आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं पुलिस समाजसेवी रणविजय सिंह उर्फ पिंकू सिंह, सपा के पूर्व ब्लॉक प्रमुख दिनेश प्रताप सिंह उर्फ बबलू सहित क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति और पत्रकार मौजूद रहे।

  • रायबरेली :राहुल गांधी को सौंपा गया दादा फिरोज गांधी का ड्राइविंग लाइसेंस, मां को भेजी तस्वीर

    रायबरेली :राहुल गांधी को सौंपा गया दादा फिरोज गांधी का ड्राइविंग लाइसेंस, मां को भेजी तस्वीर

    रायबरेली। कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद राहुल गांधी अपने रायबरेली दौरे के दौरान उस वक्त भावुक हो गए, जब एक स्थानीय परिवार ने उन्हें उनके दादा फिरोज गांधी का दुर्लभ ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा। बताया जा रहा है कि यह परिवार लंबे समय से इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजकर रखे हुए था।

    राहुल गांधी भुएमऊ गेस्ट हाउस से निकलकर आईटीआई के पास स्थित राजीव गांधी स्टेडियम पहुंचे थे, जहां वे रायबरेली प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इसी दौरान मंच पर पहुंचे एक परिवार ने गांधी परिवार से जुड़ी यह नायाब विरासत उन्हें सौंपी।ड्राइविंग लाइसेंस हाथ में लेते ही राहुल गांधी काफी भावुक नजर आए। उन्होंने काफी देर तक लाइसेंस को उलट-पलट कर देखा और तुरंत उसकी तस्वीर अपनी मां सोनिया गांधी को व्हाट्सऐप के जरिए भेजी।

    इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि मंच पर मौजूद अमेठी सांसद किशोरी लाल शर्मा ने की। उन्होंने बताया कि यह क्षण राहुल गांधी के लिए बेहद भावनात्मक था और यह गांधी परिवार के इतिहास से जुड़ा एक विशेष पल बन गया।

    कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों ने भी इस दृश्य को बेहद भावुक और ऐतिहासिक बताया।

  • सोनभद्र में रिश्ते की तलाश बना विवाद की वजह, बेटी के लिए रिश्ता देखने निकला पिता तीसरी शादी कर लौटा

    सोनभद्र में रिश्ते की तलाश बना विवाद की वजह, बेटी के लिए रिश्ता देखने निकला पिता तीसरी शादी कर लौटा

    उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है। यहां एक व्यक्ति अपनी बेटी के लिए रिश्ता देखने के बहाने घर से निकला था, लेकिन कुछ दिनों बाद वह तीसरी शादी करके घर लौट आया। जब घर में मौजूद बच्चों और दूसरी पत्नी ने एक नई महिला को देखा, तो परिवार में भारी हंगामा खड़ा हो गया।जानकारी के अनुसार, व्यक्ति ने परिजनों को बताया था कि वह बेटी के लिए उपयुक्त वर की तलाश में जा रहा है। इसी दौरान उसने दूसरी जगह जाकर एक महिला से शादी कर ली और उसे पत्नी बताकर घर ले आया। जैसे ही दूसरी पत्नी और बच्चों को इस बात की जानकारी हुई, घर में विवाद शुरू हो गया।

    परिवार परामर्श केंद्र तक पहुंचा मामला

    विवाद बढ़ने के बाद मामला परिवार परामर्श केंद्र तक पहुंच गया। वहां हुई सुनवाई के दौरान पूरी कहानी सामने आई, जिसे सुनकर काउंसलिंग में मौजूद लोग भी हैरान रह गए। दूसरी पत्नी ने आरोप लगाया कि पति ने बिना किसी जानकारी या सहमति के तीसरी शादी कर ली, जो उसके अधिकारों का उल्लंघन है।

    दूसरी पत्नी का कहना है कि पति की इस हरकत से न सिर्फ उसे मानसिक पीड़ा हुई है, बल्कि बच्चों पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। परिवार में तनाव का माहौल है और आपसी विश्वास पूरी तरह टूट चुका है।

    महिला थाने में दर्ज कराई शिकायत

    मामले की गंभीरता को देखते हुए दूसरी पत्नी ने महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों की बात सुनी जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    समाज में उठे सवाल

    यह मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में भी कई सवाल खड़े कर रहा है। लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि पारिवारिक जिम्मेदारियों से जुड़ा ऐसा फैसला बिना संवाद और सहमति के कैसे लिया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पारिवारिक संवाद और कानून की जानकारी बेहद जरूरी है।

    फिलहाल मामला जांच के अधीन है और परिवार परामर्श केंद्र के साथ-साथ पुलिस स्तर पर भी समाधान की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस प्रकरण में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।