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  • संभल : CJM के ट्रांसफर पर बवाल, वकीलों का प्रदर्शन“योगी जब-जब डरता है, पुलिस को आगे करता है”

    संभल : CJM के ट्रांसफर पर बवाल, वकीलों का प्रदर्शन“योगी जब-जब डरता है, पुलिस को आगे करता है”

    संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर के तबादले को लेकर जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है। CJM के ट्रांसफर के विरोध में जिले के वकील सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने आरोप लगाया कि सरकार न्यायिक फैसलों में हस्तक्षेप कर रही है, जो लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरनाक है।

    क्यों भड़के वकील?

    दरअसल, संभल हिंसा मामले में CO अनुज चौधरी समेत कई पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का आदेश CJM विभांशु सुधीर ने दिया था। इस आदेश के बाद अचानक उनका तबादला सुल्तानपुर कर दिया गया, जिससे वकील समुदाय में भारी नाराजगी है। वकीलों का कहना है कि यह तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि दबाव में लिया गया फैसला है।

    नारेबाजी से गूंजा कचहरी परिसर

    CJM के ट्रांसफर की खबर सामने आते ही संभल कचहरी परिसर में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हाथों में तख्तियां लेकर वकील सरकार के खिलाफ नारे लगाते नजर आए। प्रदर्शन के दौरान नारे लगाए गए“योगी जब–जब डरता है, पुलिस को आगे करता है”,“न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला नहीं सहेगा हिंदुस्तान”।वकीलों का कहना है कि अगर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR का आदेश देने वाले जज का इस तरह तबादला किया जाएगा, तो भविष्य में कोई न्यायिक अधिकारी निष्पक्ष निर्णय लेने का साहस नहीं करेगा।

    न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल

    वकीलों ने आरोप लगाया कि यह तबादला न्यायपालिका पर कार्यपालिका के दबाव को दर्शाता है। उनका कहना है कि CJM ने कानून के दायरे में रहते हुए फैसला दिया था, लेकिन सरकार को यह फैसला रास नहीं आया। इसी वजह से उन्हें जिले से बाहर कर दिया गया।

    आंदोलन की चेतावनी

    प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि CJM विभांशु सुधीर का ट्रांसफर वापस नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। जरूरत पड़ी तो प्रदेश स्तर पर भी वकीलों को लामबंद किया जाएगा। वकीलों ने साफ कहा कि यह लड़ाई किसी एक जज की नहीं, बल्कि न्याय और संविधान की रक्षा की लड़ाई है।

    प्रशासन की चुप्पी

    फिलहाल इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि न्यायपालिका की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जा सके।

  • संभल: जामा मस्जिद के पास कब्रिस्तान की जमीन पर पैमाईश, सुरक्षा के बीच अलर्ट मोड

    संभल: जामा मस्जिद के पास कब्रिस्तान की जमीन पर पैमाईश, सुरक्षा के बीच अलर्ट मोड

    संभल, उत्तर प्रदेश – संभल जिले में आज जामा मस्जिद के बराबर स्थित लगभग 8 बीघा कब्रिस्तान की जमीन की पैमाईश की जा रही है। इस जमीन को लेकर पिछले कई दशकों से विवाद चला आ रहा है और हाल ही में प्रशासन ने इसे मापने की कार्रवाई शुरू की है।स्थानीय संगठन श्री कल्कि सेना का आरोप है कि यह जमीन 1980 के दशक में टीले जैसी थी, लेकिन आज यहां मकान और दुकानों का निर्माण कर दिया गया है। उनका कहना है कि संभल हिंसा में जिन दुकानों और मकानों से पत्थर फेंके गए थे, वही आज विवाद का केंद्र बन गई हैं।

    संभल में जामा मस्जिद के पास कब्रिस्तान की जमीन पर पैमाईश, सुरक्षा के बीच अलर्ट मोड

    सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस अलर्ट

    आज की पैमाईश के दौरान संभल में छावनी जैसा माहौल देखा गया। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। संभल के कई सौ पुलिसकर्मी और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पैमाईश के दौरान शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है। सभी पक्षों से अपील की गई है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी तरह की अफवाह से बचें।

    इतिहास और विवाद

    संभल जिले में जामा मस्जिद के आसपास की जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। 1980 के दशक में यह क्षेत्र टीले जैसी था, लेकिन धीरे-धीरे यहाँ आवासीय और व्यावसायिक निर्माण शुरू हो गए। इस जमीन को लेकर कई बार स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन और तनाव की घटनाएं भी सामने आई हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि जमीन की पैमाईश और कानून के अनुसार कार्रवाई से भविष्य में किसी भी तरह के विवाद को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

    प्रशासन का संदेश

    संभल प्रशासन ने सभी समुदायों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि पैमाईश और जांच कानून के दायरे में की जा रही है और किसी के हितों के खिलाफ कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।संभल में जामा मस्जिद के पास कब्रिस्तान की जमीन की पैमाईश के चलते क्षेत्र में अलर्ट मोड देखा जा रहा है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी, शांति बनाए रखने की अपील और प्रशासनिक सतर्कता इस कार्रवाई को संयम और विधिक ढांचे में पूरा करने का संकेत देती है।

  • संभल में झाड़ियों के बीच दबा प्राचीन कुआं मिला, दोबारा खुदाई से 1978 के दंगे की कहानी फिर चर्चा में

    संभल में झाड़ियों के बीच दबा प्राचीन कुआं मिला, दोबारा खुदाई से 1978 के दंगे की कहानी फिर चर्चा में

    संभल के मोहम्मदखां सराय क्षेत्र में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एकता चौकी के पास झाड़ियों और मिट्टी के बीच दबा एक प्राचीन बंद कुआं मिलने की जानकारी सामने आई। जैसे ही स्थानीय लोगों में यह खबर फैली, प्रशासन सक्रिय हो गया और जिलाधिकारी के निर्देश पर नगर पालिका ने तत्काल कुएं की खुदाई का काम शुरू कराया

    सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार और अधिशासी अधिकारी मणिभूषण तिवारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने कार्यदायी टीम को निर्देश दिए कि खुदाई तेज गति से की जाए, लेकिन कुएं की उम्र और सतह की कमजोर स्थिति को देखते हुए पूरी सावधानी बरती जाए।खुदाई के दौरान वर्षों पुराना एक विशाल पेड़ सबसे बड़ा अवरोध बना। टीम को पेड़ को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से हटाने का आदेश दिया गया है। नगर पालिका की टीम कुएं को साफ करने और उसकी गहराई तक पहुंचने में जुटी है।

    1978 के दंगे का पुराना आरोप फिर चर्चा में

    स्थानीय लोगों के अनुसार यह कुआं कई दशक पहले बंद कर दिया गया था। इसी के साथ एक पुराना दावा भी फिर चर्चा में है बताया जाता है कि 1978 के दंगे के दौरान एक व्यापारी की हत्या कर उसके शव को इसी कुएं में फेंकने की बात कही गई थी। हालाँकि, उस समय कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।कुएं की दोबारा खुदाई शुरू होने के बाद लोग एक बार फिर उसी घटना की याद ताजा कर रहे हैं। यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या कुएं में कई दशकों पुराना कोई सच दफन है?

    पुलिस बल तैनात, क्षेत्र सील

    किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए प्रशासन ने क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। कुएं की पूरी खुदाई खत्म होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इसके अंदर क्या मौजूद है और क्या कोई पुराना राज सामने आएगा।