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Category: बरेली

बरेली जिला, उत्तर प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर, जो नाथ नगरी और बरेली शरीफ के नाम से प्रसिद्ध है. नवीनतम समाचार, मौसम और सरकारी जानकारी यहाँ देखें. बरेली समाचार

  • बरेली लापरवाही की कीमत – सड़क पर तड़पते-तड़पते गोवंश की मौत

    बरेली लापरवाही की कीमत – सड़क पर तड़पते-तड़पते गोवंश की मौत

    संवाददाता: प्रमोद शर्मा
    स्थान: बरेली
    थाना फरीदपुर क्षेत्र के कंजेवाली जरत पर मंगलवार को एक अज्ञात वाहन की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हुआ गोवंश घंटों सड़क पर तड़पता रहा, लेकिन संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मानो बेखबर बने रहे। बरेली लापरवाही की कीमत – सड़क पर तड़पते-तड़पते गोवंश की मौत

    स्थानीय निवासी शैलेश सिंह ने घटना की जानकारी मिलते ही गौ रक्षक विकास सिंह और सत्यम गौड़ को बुलाया। पशु चिकित्सा अधिकारी मौके पर आए, लेकिन घायल गोवंश को किसी भी पशु चिकित्सालय या आश्रय में भर्ती करने से साफ इंकार कर दिया, केवल एक इंजेक्शन लगाकर चले गए। बरेली लापरवाही की कीमत – सड़क पर तड़पते-तड़पते गोवंश की मौत

    एसडीएम फरीदपुर को व्हाट्सएप पर सूचना भेजी गई, लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गौ रक्षक विकास सिंह का आरोप है कि अधिकारियों ने उनके नंबर ब्लैकलिस्ट कर रखे हैं, जिससे आपात स्थिति में भी मदद नहीं मिल पाती।

    आखिरकार मेनका गांधी ट्रस्ट, चौबारी से मदद मंगाई गई, लेकिन जब तक गाड़ी पहुंची, घायल गोवंश ने दम तोड़ दिया। बाद में नगर पालिका और पुलिस उप निरीक्षक उज्जवल गंभीर की मदद से जेसीबी मशीन से गड्ढा खुदवाकर अंतिम संस्कार कराया गया। बरेली लापरवाही की कीमत – सड़क पर तड़पते-तड़पते गोवंश की मौत

    यह घटना सवाल खड़े करती है—

    • जब पशु चिकित्सा अधिकारी मौके पर मौजूद थे, तो भर्ती करने से इनकार क्यों?
    • एसडीएम और प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल निर्णय क्यों नहीं लिया?

    अगर समय पर इलाज और परिवहन की व्यवस्था होती, तो शायद गोवंश की जान बच सकती थी। यह मामला केवल एक जानवर की मौत का नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक संवेदनहीनता का सबूत है, जिसमें तंत्र तब तक नहीं जागता, जब तक तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल न हो जाएं। बरेली लापरवाही की कीमत – सड़क पर तड़पते-तड़पते गोवंश की मौत

  • फरीदपुर बुखारा–बदायूँ रोड रेलवे क्रॉसिंग दो दिन के लिए बंद, यातायात ठप

    फरीदपुर बुखारा–बदायूँ रोड रेलवे क्रॉसिंग दो दिन के लिए बंद, यातायात ठप

    संवाददाता: प्रमोद शर्मा
    स्थान: बरेली बरेली जनपद के फरीदपुर नगर में बुखारा–बदायूँ रोड पर स्थित रेलवे क्रॉसिंग संख्या 352 सी पर मरम्मत कार्य के कारण यातायात दो दिन के लिए पूरी तरह बाधित हो गया है। रेलवे विभाग ने मंगलवार सुबह 9 बजे से बुधवार शाम 6 बजे तक क्रॉसिंग बंद रखने का आदेश जारी किया है। फरीदपुर बुखारा–बदायूँ रोड रेलवे क्रॉसिंग दो दिन के लिए बंद

    रेल विभाग के जूनियर इंजीनियर राहुल के नेतृत्व में करीब दो दर्जन कर्मचारी पटरियों की खोदाई, रबर पैड लगाने और नया पत्थर भरने का कार्य कर रहे हैं ताकि पटरियों को ऊंचा उठाया जा सके। विभाग का दावा है कि शेष कार्य बुधवार शाम तक पूरा कर क्रॉसिंग चालू कर दी जाएगी। फरीदपुर बुखारा–बदायूँ रोड रेलवे क्रॉसिंग दो दिन के लिए बंद

    हालांकि, बिना पूर्व सूचना के क्रॉसिंग बंद होने के कारण वाहन चालक और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई वाहन चालक क्रॉसिंग तक पहुंचकर वापस लौटने को मजबूर हुए। मरम्मत कार्य की सूचना न तो मीडिया में दी गई और न ही सोशल मीडिया पर, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त कष्ट सहना पड़ा।फरीदपुर बुखारा–बदायूँ रोड रेलवे क्रॉसिंग दो दिन के लिए बंद

  • बरेली में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के तहत पुलिस और प्रशासन ने निकला गया फ्लैग मार्च।

    बरेली में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के तहत पुलिस और प्रशासन ने निकला गया फ्लैग मार्च।

    संवाददाता: प्रमोद शर्मा
    लोकेशन: बरेली स्वतंत्रता दिवस की उलटी गिनती शुरू होते ही बरेली की सड़कों पर आज सुरक्षा का एक सशक्त प्रदर्शन देखने को मिला। पुलिस और प्रशासन ने मिलकर शहर के कोने-कोने में फ्लैग मार्च और पैदल गश्त निकाली, जो केवल औपचारिकता नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था की ठोस तैयारी का प्रतीक था।

    अपर पुलिस महानिदेशक रमित शर्मा, जिलाधिकारी अविनाश सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य और एसपी सिटी मानुस पारिक खुद फोर्स के साथ मैदान में उतरे। इनके साथ घुड़सवार दस्ते, महिला पुलिस बल, पैदल जवान और बुलेटप्रूफ जैकेट में लैस पुलिसकर्मी मौजूद थे। बरेली में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के तहत पुलिस और प्रशासन ने निकला गया फ्लैग मार्च।

    इस्लामिया ग्राउंड से शुरू हुई सुरक्षा यात्रा में ड्रोन कैमरों ने आसमान से नजर रखी, वहीं जमीन पर पुलिस जवानों की सतर्कता ने हर गली और मोड़ को सख्त संदेश दिया— “हम चौकस हैं”। बिहारीपुर से श्री गंगा महारानी मंदिर और सिटी स्टेशन रोड से चौपला चौराहा तक का रूट मार्च अनुशासन और तैयारी का जीवंत प्रदर्शन बन गया।

    मार्च के दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए राहगीरों और व्यापारियों से संवाद कर उन्हें भरोसा दिलाया। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहारों में एक-दूसरे के धर्म और भावनाओं का सम्मान करें, और भाईचारे तथा शांति का परचम लहराएं। बरेली में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के तहत पुलिस और प्रशासन ने निकला गया फ्लैग मार्च।

    आज का यह फ्लैग मार्च पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी का मात्र शो-पीस नहीं, बल्कि बरेली में अमन-चैन पर किसी भी तरह की आंच नहीं आने देने का स्पष्ट संदेश था। जो भी शांति भंग करने की कोशिश करेगा, वह कानून के कठोर शिकंजे में होगा। बरेली में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के तहत पुलिस और प्रशासन ने निकला गया फ्लैग मार्च।

  • बरेली: फूलन देवी जयंती पर कश्यप राजनीति में नई हुंकार,“अपनी ताकत पहचानो” -रामनिवास कश्यप

    बरेली: फूलन देवी जयंती पर कश्यप राजनीति में नई हुंकार,“अपनी ताकत पहचानो” -रामनिवास कश्यप

    बरेली।-बरेली के ग्राम मैंनी का रविवार सिर्फ स्मृति दिवस नहीं, बल्कि कश्यप राजनीति में नई हुंकार का दिन बन गया। वीरांगना और पूर्व सांसद फूलन देवी कश्यप की 62वीं जयंती और फूलन जनता पार्टी के तृतीय स्थापना दिवस पर प्रदेश उपाध्यक्ष रामनिवास कश्यप ने मंच से कश्यप समाज को स्पष्ट संदेश दिया-“किसी के बहकावे में मत आओ, अपनी ताकत पहचानो और एकजुट हो जाओ।”यह संदेश महज़ भावनात्मक अपील नहीं था, बल्कि आने वाले चुनावी मौसम में कश्यप राजनीति के स्वरूप को बदलने का इशारा भी माना जा रहा है। बरेली: फूलन देवी जयंती पर कश्यप राजनीति में नई हुंकार

    कार्यक्रम में जुटे प्रमुख चेहरे बरेली: फूलन देवी जयंती पर कश्यप राजनीति में नई हुंकार

    मंच पर मौजूद मंडल अध्यक्ष अखिलेश शर्मा, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के साबिर खान, जिला कार्यकारिणी सदस्य जगपाल कश्यप, जिला महासचिव किरण यादव, प्रधान मुंशीलाल कश्यप, रविंद्र कश्यप, अवनीश कश्यप, सत्यवीर कश्यप, धर्मवीर कश्यप समेत तमाम कार्यकर्ता इस संदेश के वाहक बने।
    क्षेत्र पंचायत सदस्य राजकुमार कश्यप, लटूरी कश्यप और पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

    राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दिया संदेश

    कार्यक्रम की गूंज सिर्फ मैंनी तक सीमित नहीं रही। राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू भैया निषाद ने दूर से ही संदेश भेजते हुए कहा“फूलन की जयंती, हमारा गर्व; स्थापना दिवस, हमारी ताकत।” बरेली: फूलन देवी जयंती पर कश्यप राजनीति में नई हुंकार

  • बरेली : नगर पालिका अध्यक्ष पर नाले पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप, मोहल्ला बना ‘खुला सीवर’

    बरेली : नगर पालिका अध्यक्ष पर नाले पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप, मोहल्ला बना ‘खुला सीवर’

    फरीदपुर, बरेली: जब जनता पानी में डूबी हो और जनप्रतिनिधि सत्ता के मद में डूबे हों, तब लोकतंत्र की नालियां नहीं, नीयतें चोक हो जाती हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद के फरीदपुर नगर पालिका क्षेत्र से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है।

    आरोप — नाले की दिशा बदल दी गई बरेली: नगर पालिका अध्यक्ष पर नाले पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप

    स्थानीय निवासियों ने नगर पालिका अध्यक्ष शराफत जरीवाला पर सार्वजनिक नाले पर अवैध कब्जा और निर्माण कार्य कराने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। आरोप यह भी है कि कब्जा इतना ठोस है कि नाले की दिशा ही गुम हो गई और बारिश होते ही पूरा मोहल्ला एक खुले सीवर में तब्दील हो जाता है।

    लोगों का आक्रोश सड़कों और सोशल मीडिया पर बरेली : नगर पालिका अध्यक्ष पर नाले पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप

    निवासियों का कहना है —

    • “पहले 2 घंटे में पानी निकल जाता था, अब 2 दिन तक कीचड़ और सड़ांध में जीना पड़ता है।”
    • “यह सामान्य अतिक्रमण नहीं, जनता के हितों का खुला अपमान है।”

    प्रशासन हरकत में आया बरेली : नगर पालिका अध्यक्ष पर नाले पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप

    मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद एसडीएम फरीदपुर मालिका नैन ने नायब तहसीलदार अजय सिंह के नेतृत्व में जांच टीम गठित कर मौके पर भेजा।

    • नायब तहसीलदार ने कहा — “नाले पर अवैध कब्जे की शिकायत की जांच की जा रही है, पैमाइश के बाद रिपोर्ट तैयार होगी और उसी के आधार पर कार्रवाई होगी।”
    • एसडीएम ने स्पष्ट किया कि यदि अतिक्रमण साबित हुआ तो निर्माण ध्वस्त किया जाएगा और आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज हो सकता है।

    चुप्पी ने बढ़ाया विवाद बरेली : नगर पालिका अध्यक्ष पर नाले पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप

    गंभीर आरोपों के बावजूद अध्यक्ष शराफत जरीवाला की चुप्पी ने लोगों के गुस्से में आग में घी डालने का काम किया है।

    बड़े सवाल

    • क्या इस बार जिला प्रशासन दबाव में आएगा या निष्पक्ष कार्रवाई करेगा?
    • क्या नाले पर बनी दीवार गिरेगी या भरोसे की नींव यूं ही ढहती रहेगी?
  • फरीदपुर नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार और बदसलूकी के आरोप, सभासदों का विरोध तेज

    फरीदपुर नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार और बदसलूकी के आरोप, सभासदों का विरोध तेज

    बरेली | जनपद बरेली की नगर पालिका परिषद फरीदपुर इन दिनों विवादों के घेरे में है। अध्यक्ष पर वित्तीय गड़बड़ियों के गंभीर आरोप लगे हैं, वहीं लाइट पटल प्रभारी बाबू प्रदीप कुमार पर सभासदों के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप है।

    सभासदों का आरोप है कि विकास कार्यों की फाइलें जानबूझकर रोकी जा रही हैं और ठेकेदारों से मिलीभगत कर भुगतान प्रक्रिया में गड़बड़ी की जा रही है। नगर में जलभराव, खराब स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था बदहाल है।

    सभासद नन्हे अंसारी ने आरोप लगाया कि “भुगतान प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हैं, जनता का पैसा ठेकेदारों की जेब में जा रहा है।” वहीं राजकुमार राठौर ने कहा कि “शिकायत करना अब रस्म बन गई है, लेकिन समाधान कहीं नहीं दिखता।”

    ज्ञापन की मुख्य मांगें फरीदपुर नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार और बदसलूकी के आरोप

    • लाइट पटल प्रभारी प्रदीप कुमार का पटल तुरंत बदला जाए
    • लंबित फाइलों और भुगतानों की निष्पक्ष जांच
    • सफाई और लाइट व्यवस्था में ठोस सुधार

    ज्ञापन सौंपने वालों में संजीव शुक्ला, देवेंद्र सिंह टोनी, अजीम मियां, राजकुमार राठौर, ताजुद्दीन, नन्हे अंसारी, चंदन शुक्ला समेत कई जनप्रतिनिधि शामिल रहे। फरीदपुर नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार और बदसलूकी के आरोप

    सभासदों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई में देरी हुई तो वे जनता के साथ सड़कों पर उतरेंगे। उनका कहना है कि यह समस्या केवल फरीदपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती और जवाबदेही की कमी का नतीजा है।

  • Kanwar Yatra Bareilly: कांवड़ियों की टोली पहुंची शिवधाम, जलाभिषेक से महक उठा हर मंदिर

    Kanwar Yatra Bareilly: कांवड़ियों की टोली पहुंची शिवधाम, जलाभिषेक से महक उठा हर मंदिर

    संवाददाता – प्रमोद शर्मा
    Kanwar Yatra Bareilly: श्रावण मास का आगाज होते ही बरेली के फरीदपुर और आसपास के इलाकों में आस्था, भक्ति और समर्पण का अनूठा संगम बन गया है। सुबह की पहली किरण के साथ ही “बम-बम भोले” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से समूचा वातावरण गूंज उठता है। मंदिरों के घंट-घड़ियाल, ढोल-नगाड़े और शिवभक्तों की टोलियों की हर दिशा में उपस्थिति ने माहौल को पूरी तरह शिवमय बना दिया।

    बीते रविवार की बात करें तो शाम के समय मोहल्ला परा स्थित साईं बाबा मंदिर से महंत राहुल पाठक के नेतृत्व में कांवड़ यात्रा का शुभारंभ हुआ। जत्था रामगंगा के कछला घाट पहुंचा, जहां से भक्तों ने पवित्र गंगाजल भरकर सोमवार भोर में वापसी की और सिमरा बोरीपुर के गोपाल सिद्ध मंदिर, पहलऊ शिव मंदिर व पचौमी पंचेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया।

    🙏 भक्ति, अनुशासन और सेवा का संगम- Kanwar Yatra Bareilly

    इस कांवड़ यात्रा में गौरव पांडे, अभिषेक, हर्षित, श्याम वंश, अनुराग पाठक, नितिन, विकास समेत दर्जनों युवाओं ने भाग लिया। इन शिवभक्तों के चेहरों पर तप और श्रद्धा की झलक स्पष्ट दिख रही थी। कांवड़ यात्रा महज एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि एक सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन बन गई जिसमें युवा वर्ग की ऊर्जा, अनुशासन और आस्था झलक रही थी।

    👮 प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा रही चाकचौबंद- Kanwar Yatra Bareilly

    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और बढ़ते जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय रहा। फरीदपुर सीओ संदीप सिंह स्वयं क्षेत्र में निरीक्षण करते नजर आए। कोतवाली प्रभारी राधेश्याम ने अपनी टीम के साथ विभिन्न मंदिरों और मार्गों पर निगरानी रखी। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए स्वयंसेवी संगठनों ने भी श्रद्धालुओं की सेवा में भरपूर योगदान दिया।

    🛕 शिवमंदिरों में उमड़ा जनसैलाब- Kanwar Yatra Bareilly

    नगर के प्रमुख शिवालयों—शिव मंदिर, महादेव मंदिर, मौनी महादेव मंदिर और पचौमी मंदिर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में पहलऊ नाथ और बाबा भोलेनाथ मंदिरों पर भी सुबह से भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने बिल्वपत्र, धतूरा, गंगाजल और भांग अर्पित कर भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया।

    🌸 समाजिक समरसता का प्रतीक

    श्रावण सोमवार की यह पावन शुरुआत केवल भक्ति का स्वरूप नहीं थी, बल्कि यह भारतीय समाज में समरसता, संयम और सेवा का आदर्श उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही थी। युवा कांवड़ियों की भक्ति, प्रशासन का अनुशासन और समाज की सहभागिता ने फरीदपुर को श्रद्धा और प्रबंधन का उत्कृष्ट केंद्र बना दिया।

    https://nationnowsamachar.com/uttar-pradesh/etah/etah-jain-idol-discovery-asi-archaeological-findings/
  • Bareilly Illegal land encroachment: सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा, 10 माह से प्रशासन मौन; ग्राम प्रधान की गुहार अब भी अनसुनी

    Bareilly Illegal land encroachment: सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा, 10 माह से प्रशासन मौन; ग्राम प्रधान की गुहार अब भी अनसुनी

    बरेली | प्रमोद शर्मा
    Bareilly Illegal land encroachment: उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद की फरीदपुर तहसील स्थित ग्राम गौसगंज सराय में सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध कब्ज़े का मामला अब प्रशासनिक निष्क्रियता का प्रतीक बन गया है। ग्राम प्रधान यासीन खाँ द्वारा लगभग 10 महीने पूर्व की गई स्पष्ट शिकायत आज भी केवल फाइलों में सजी धरी है, जबकि सरकारी ज़मीन पर अवैध निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ चुका है। Bareilly Illegal land encroachment

    🧾 तहसील समाधान दिवस में उठी थी आवाज– Bareilly Illegal land encroachment

    ग्राम प्रधान ने यह मामला तहसील समाधान दिवस में गंभीरता से उठाया था। तत्कालीन तहसीलदार द्वारा निर्माण कार्य रुकवाया गया और कागज़ी कार्यवाही भी की गई। लेकिन इसके बाद की कहानी प्रशासन की विलंबशीलता और टालमटोल का उदाहरण बनकर रह गई।

    📉 10 महीने में सिर्फ “पैमाइश का आदेश” Bareilly Illegal land encroachment

    यह विडंबना ही है कि 10 महीनों में कार्यवाही के नाम पर प्रशासन ने केवल यह कहने तक खुद को सीमित रखा कि “पैमाइश का आदेश दे दिया गया है“। न पैमाइश हुई, न ज़मीन मुक्त हुई और न ही दोषियों पर कोई दंडात्मक कार्यवाही की गई। यह लचर रवैया प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। Bareilly Illegal land encroachment

    🧱 कॉलोनाइज़र का अड़ियल जवाब और चेतावनी– Bareilly Illegal land encroachment

    जब प्रशासन ने कब्जेदार कॉलोनाइज़र को नोटिस भेजा तो उन्होंने न केवल उल्टा जवाब भेजा बल्कि प्रशासन को छवि खराब करने की चेतावनी भी दे डाली। कॉलोनाइज़र का यह रुख बताता है कि उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का कोई भय नहीं है।

    उनका तर्क था कि यदि जमीन वाकई सरकारी है तो पहले उसकी पुख्ता पैमाइश करवाई जाए, फिर कार्यवाही हो। लेकिन प्रशासन की चुप्पी और निष्क्रियता ने इस तर्क को और भी साहसिक बना दिया।

    ⚠️ प्रशासन की भूमिका पर उठते सवाल– Bareilly Illegal land encroachment

    जब शिकायतकर्ता स्वयं निर्वाचित ग्राम प्रधान हों, तो उनकी शिकायत को महीनों तक लटकाना एक गहरा संदेह पैदा करता है। क्या तहसील प्रशासन किसी राजनीतिक या आर्थिक दबाव में है? या फिर कहीं भूमाफियाओं से अंदरूनी सांठगांठ तो नहीं?

    📣 SDM का एक ही उत्तर: “पैमाइश का आदेश दिया गया है”

    फरीदपुर की एसडीएम मल्लिका नयन से जब पत्रकारों ने लगातार इस विषय में जानकारी चाही, तो उनका उत्तर बार-बार यही रहा — “हमने पैमाइश का आदेश दे दिया है।” लेकिन यह आदेश एक माह पहले का है, जबकि आज तक कोई सर्वे या कार्रवाई नहीं हुई। Bareilly Illegal land encroachment

    🚨 क्या चल रहा है फरीदपुर में ज़मीन के नाम पर कोई ‘खेल’?

    यह सवाल अब केवल पत्रकारिता का नहीं, जनचेतना का प्रश्न बन चुका है। जब अवैध कब्ज़े का मामला स्पष्ट हो, शिकायतकर्ता की पहचान निर्वाचित प्रतिनिधि हो, और फिर भी प्रशासन चुप्पी साधे बैठे, तो यह स्थिति संविधानिक व्यवस्था के मूलभूत सिद्धांतों पर ही सवाल बन जाती है।

    जनता की मांग: निष्पक्ष जांच और कार्रवाई

    अब जनता को चाहिए—

    पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सार्वजनिक हो

    तत्काल पैमाइश कर वास्तविक स्थिति उजागर की जाए

    कब्जेदारों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाए

    दोषी अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाए
    https://nationnowsamachar.com/uttar-pradesh/bareilly/bareilly-ramleela-ground-encroachment-threatens-cultural-heritage/
  • Bareilly Ramleela Ground: धरोहर पर दस्तक देता अतिक्रमण; क्या हम रामलीला मैदान को भी खो देंगे?

    Bareilly Ramleela Ground: धरोहर पर दस्तक देता अतिक्रमण; क्या हम रामलीला मैदान को भी खो देंगे?

    Bareilly Ramleela Ground: बरेली जिले के फरीदपुर क्षेत्र में स्थित प्राचीन श्री रामलीला मैदान न केवल एक ऐतिहासिक स्थल है, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का भी केंद्र रहा है। बीते दो सौ वर्षों से यह मैदान हर वर्ष रामायण के अद्भुत मंचन का गवाह बनता आया है। लेकिन वर्तमान में यह भूमि नाले के निर्माण, जलभराव, प्रशासनिक उपेक्षा और अतिक्रमण की समस्या से जूझ रही है।

    क्या यह कल्पना भी विचलित नहीं करती कि जहां कभी श्रीराम और रावण के युद्ध का मंचन होता था, वहां अब कीचड़ और बदबू फैली है? क्या इस आस्था स्थल की कीमत इतनी कम हो गई है कि उसे विकास के नाम पर मिटा दिया जाए? Bareilly Ramleela Ground

    🧱 तीन एकड़ की जमीन या आस्था का गढ़?– Bareilly Ramleela Ground

    श्रीरामलीला मैदान केवल एक भूखंड नहीं, हजारों लोगों की भावनाओं और परंपराओं का जीवित प्रतीक है। यहां रामलीला सिर्फ नाटक नहीं, एक जीवन दर्शन बनकर प्रस्तुत होती है। यह वह स्थल है जहां धार्मिकता, कला और लोक परंपराएं एक साथ जीवित होती हैं। लेकिन अफसोस, आज वह अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।

    ⚠️ नाले का निर्माण या सांस्कृतिक हत्या?– Bareilly Ramleela Ground

    स्थानीय समिति का आरोप है कि ग्राम पंचायत और निर्माण एजेंसी ने बिना सांस्कृतिक और सामाजिक अध्ययन के नाले का निर्माण प्रारंभ कर दिया। अवैध अतिक्रमण और जलनिकासी की अव्यवस्था ने पूरे मैदान को कीचड़ का ढेर बना दिया है। यदि यह कार्य बिना विवेक के जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में रामलीला का मंचन असंभव हो जाएगा।

    📩 प्रशासन को चेतावनी या पुकार?

    समिति द्वारा जिलाधिकारी को भेजा गया पत्र केवल सूचना नहीं, एक चेतावनी और सामाजिक पुकार है। यह मैदान बरेली की पहचान का प्रतीक है, और उसकी उपेक्षा केवल एक स्थल की उपेक्षा नहीं, बल्कि संस्कृति की अनदेखी है।

    https://nationnowsamachar.com/international/india-greece-missile-deal-india-lr-lacm-missile/

    🏗️ योजनागत विफलता और प्रशासनिक असंवेदनशीलता– Bareilly Ramleela Ground

    यदि कोई निर्माण योजना किसी भी क्षेत्र में हो रही है, तो यह आवश्यक है कि उसमें उस क्षेत्र की सांस्कृतिक महत्ता का भी मूल्यांकन किया जाए। दुर्भाग्यवश, यहां ऐसा नहीं हुआ। यह दर्शाता है कि योजनाओं में धरातल की समझ की कमी है और जनता की भावनाओं की कद्र नहीं की जा रही।

    🛑 आज रामलीला मैदान, कल कोई मंदिर या गुरुद्वारा?– Bareilly Ramleela Ground

    यदि रामलीला मैदान पर अतिक्रमण हो सकता है, तो कोई मंदिर, मस्जिद, मजार या गिरजाघर भी सुरक्षित नहीं रहेगा। यही समय है जब समाज को जागना चाहिए और प्रशासन को भी यह समझना चाहिए कि धरोहरों को सिर्फ भूमि नहीं, भावनाओं का प्रतीक मानकर ही योजनाएं बनाई जानी चाहिए। Bareilly Ramleela Ground

    📢 समाधान की मांग: सीमांकन, सौंदर्यीकरण और संरक्षण

    समिति और स्थानीय लोगों की मांग है कि—

    • मैदान का पुनः सीमांकन किया जाए
    • नाले की दिशा बदली जाए
    • सौंदर्यीकरण और समतलीकरण की कार्यवाही हो
    • जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि स्वयं निरीक्षण करें
    • निर्माण एजेंसियों की जिम्मेदारी तय हो

    यह केवल मांग नहीं, संस्कृति को बचाने का आह्वान है।

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  • Bareilly BJP controversy: भाजपा युवा मोर्चा में अनुशासन की दरार, वायरल ऑडियो से खुली सत्ता-प्रशासन की साजिश, जिम्मेदार चुप

    Bareilly BJP controversy: भाजपा युवा मोर्चा में अनुशासन की दरार, वायरल ऑडियो से खुली सत्ता-प्रशासन की साजिश, जिम्मेदार चुप

    Bareilly BJP controversy: भारतीय जनता पार्टी को हमेशा उसकी संगठित कार्यप्रणाली, अनुशासन और भ्रष्टाचार विरोधी छवि के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन बरेली जिले के फरीदपुर में युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष प्रदीप यादव से जुड़ा एक मामला इन तमाम दावों पर सवालिया निशान खड़े करता है।

    वायरल ऑडियो और सत्ता-प्रशासन की सांठगांठ– Bareilly BJP controversy

    हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हुआ है, जिसमें प्रदीप यादव कहते सुने जा रहे हैं—

    “अध्यक्ष जी, विधायक जी, सीओ, पुलिस अफसर सबको एक-एक लाख देने होंगे।”

    इस क्लिप ने सत्ता और प्रशासनिक तंत्र की संभावित सांठगांठ को बेनकाब कर दिया है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की आवाज नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहां राजनीतिक रसूख, पैसे और दबाव की त्रिकोणीय ताकत लोकतंत्र की नींव को खोखला कर रही है।- Bareilly BJP controversy

    अनुशासनहीनता पर संगठन की सख्ती, लेकिन सवाल बाकी

    भाजपा आंवला के जिलाध्यक्ष आदेश प्रताप सिंह ने इस प्रकरण के बाद तत्काल प्रभाव से प्रदीप यादव को पद से हटाने की घोषणा की। यह कदम प्रशंसनीय है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ऐसे व्यक्ति को संगठन में पद क्यों और कैसे मिला? क्या यह चयन प्रक्रिया की चूक थी या फिर जानबूझकर की गई अनदेखी?

    पीड़िता के आरोपों से और गहराया मामला– Bareilly BJP controversy

    इस मामले में सबसे चिंता का विषय पीड़िता नीतू यादव के गंभीर आरोप हैं, जिनमें अपहरण, मारपीट और यौन उत्पीड़न के प्रयास का उल्लेख है। लेकिन दर्ज की गई एफआईआर में इन धाराओं का उल्लेख नहीं है। उलटे पीड़िता को लगातार धमकियाँ मिलती रहीं और आरोपी राजनीतिक रसूख का खुलेआम प्रदर्शन करता रहा।

    यह दर्शाता है कि प्रशासन कितना निष्क्रिय या दबाव में है। क्या यह केवल एक व्यक्ति की मनमानी थी, या फिर पूरी व्यवस्था की मौन सहमति?

    मीडिया पर भी हमलावर हुआ आरोपी– Bareilly BJP controversy

    प्रदीप यादव ने वायरल ऑडियो में पत्रकारों को लेकर अपमानजनक और अभद्र टिप्पणी की है। यह न केवल प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि लोकतंत्र के उस स्तंभ की अवमानना है जो सत्ता को जवाबदेह बनाने का कार्य करता है।

    पत्रकार किसी दल या विचारधारा के नहीं, समाज के प्रहरी होते हैं। यदि उन्हें डराने और धमकाने की भाषा में बात की जाती है, तो यह संविधान और सामाजिक चेतना दोनों के लिए खतरे की घंटी है।

    भाजपा और प्रशासन की चुप्पी – रणनीति या सहमति?

    अब तक भाजपा के शीर्ष नेतृत्व या प्रशासन की ओर से इस पर कोई ठोस बयान नहीं आया है। यह चुप्पी जनता के बीच अनेक संदेह खड़े कर रही है। क्या यह रणनीतिक चुप्पी है या फिर सत्ताधारी दल द्वारा अपने कार्यकर्ता को बचाने की कोशिश?

    जनता के विश्वास और लोकतंत्र की परीक्षा– Bareilly BJP controversy

    यह घटना महज एक अनुशासनहीन नेता का मामला नहीं, बल्कि एक महिला की अस्मिता, पत्रकारों की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की गरिमा की परीक्षा है। भाजपा और प्रशासन के पास अब मौका है कि वे इसे व्यक्तिगत गलती न मानते हुए इसे एक संस्थागत संकट की तरह लें और पारदर्शी व कठोर कार्रवाई करें। Bareilly BJP controversy

    यदि ऐसा नहीं होता, तो यह केवल एक महिला या कुछ पत्रकारों का अपमान नहीं होगा, बल्कि पूरे समाज की चेतना और लोकतंत्र की आत्मा का अपहरण कहलाएगा।