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Category: बागपत

  • बागपत : डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का सपा पर तीखा हमला, बोले– मुस्लिम साथ छोड़ दें तो चुनाव भी नहीं जीत पाएगी सपा

    बागपत : डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का सपा पर तीखा हमला, बोले– मुस्लिम साथ छोड़ दें तो चुनाव भी नहीं जीत पाएगी सपा

    बागपत। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बागपत दौरे के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सपा की चुनावी ताकत पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मुस्लिम समुदाय का समर्थन सपा से हट जाए, तो पार्टी प्रधानी का चुनाव तक नहीं जीत पाएगी।डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का यह बयान आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल को और गर्म करता नजर आ रहा है।

    जाति और धर्म की राजनीति पर साधा निशाना

    ब्रजेश पाठक ने कहा कि सपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां जाति के आधार पर राजनीति करती हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों के पास जनता के बीच जाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए ये बार-बार समाज को बांटने की राजनीति कर रही हैं।उन्होंने कहा,“बीजेपी विकास, सुशासन और जनकल्याण के मुद्दों पर चुनाव लड़ती है, जबकि सपा-कांग्रेस सिर्फ जाति और तुष्टिकरण की राजनीति में उलझी हुई हैं।”

    अखिलेश यादव के 2027 वाले बयान पर पलटवार

    डिप्टी सीएम ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के 2027 में सरकार बनाने के दावे पर भी तंज कसा।ब्रजेश पाठक ने कहा“अखिलेश यादव दिन में सपने देख रहे हैं। प्रदेश की जनता सब देख रही है और समझ चुकी है कि कौन विकास कर रहा है और कौन सिर्फ भ्रम फैला रहा है।”उन्होंने दावा किया कि 2027 में भी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी

    बीजेपी बनाम सपा की सियासी जंग तेज

    ब्रजेश पाठक के इस बयान के बाद सपा और बीजेपी के बीच जुबानी जंग और तेज होने की संभावना है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे 2027 के चुनाव नजदीक आएंगे, ऐसे तीखे बयान और ज्यादा देखने को मिलेंगे। और यूपी की राजनीति में फिर दिखेगा नया रंग

  • बागपत में खाप पंचायत का फरमान: बच्चों के स्मार्टफोन पर रोक, ड्रेस कोड भी तय

    बागपत में खाप पंचायत का फरमान: बच्चों के स्मार्टफोन पर रोक, ड्रेस कोड भी तय

    बागपत।उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में खाप पंचायत ने एक बार फिर अपने सख्त फैसलों को लेकर सुर्खियां बटोरी हैं। पंचायत ने बच्चों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही लड़के और लड़कियों के हाफ-पैंट पहनने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।खाप पंचायत का कहना है कि यह निर्णय पश्चिमी प्रभाव से बचाव और पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से लिया गया है। पंचायत के अनुसार, बच्चों में मोबाइल फोन की बढ़ती लत से पढ़ाई, सामाजिक व्यवहार और पारिवारिक संस्कारों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

    बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर चिंता

    पंचायत के सदस्यों का कहना है कि स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से बच्चे अपने परिवार और समाज से कटते जा रहे हैं। इसी वजह से गांव स्तर पर यह फैसला लिया गया कि नाबालिग बच्चों को स्मार्टफोन नहीं दिया जाएगा। पंचायत ने अभिभावकों से भी इस नियम का सख्ती से पालन कराने की अपील की है।

    पहनावे को लेकर भी सख्ती

    खाप पंचायत ने आदेश दिया है कि गांव में लड़के और लड़कियां हाफ-पैंट नहीं पहनेंगे। पंचायत का तर्क है कि आधुनिक पहनावा भारतीय संस्कृति और ग्रामीण मर्यादाओं के खिलाफ है। पंचायत ने कहा कि पारंपरिक और सादे वस्त्रों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    शादी को लेकर भी नया नियम

    खाप पंचायत ने विवाह समारोह को लेकर भी अहम फैसला लिया है। पंचायत के आदेश के मुताबिक, शादी केवल गांव या घर में ही आयोजित की जाएगी, मैरिज हॉल या बाहरी स्थानों पर शादी की अनुमति नहीं होगी। पंचायत का कहना है कि इससे फिजूलखर्ची रुकेगी और सामाजिक समानता बनी रहेगी।

    समाज में मिली-जुली प्रतिक्रिया

    इस फैसले के बाद गांव और आसपास के इलाकों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे संस्कृति संरक्षण की दिशा में सही कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता में दखल मान रहे हैं।फिलहाल खाप पंचायत ने साफ किया है कि इन आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सामाजिक स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।

  • बागपत: सगाई में 21 लाख का दहेज लौटा युवक, दहेज प्रथा को किया चुनौती

    बागपत: सगाई में 21 लाख का दहेज लौटा युवक, दहेज प्रथा को किया चुनौती

    बागपत: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत कस्बे से एक प्रेरक खबर सामने आई है। यहाँ के एक युवक ने अपनी सगाई के दौरान दहेज की सदियों पुरानी प्रथा को चुनौती देते हुए ससुराल पक्ष द्वारा तिलक में दिए जा रहे ₹21 लाख का चेक लौटा दिया।जानकारी के अनुसार, यह घटना 22 नवंबर को हुई। युवक ने समारोह में सभी मौजूद लोगों के सामने यह चेक लौटा दिया और स्पष्ट कर दिया कि वह दहेज स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका मकसद समाज में व्याप्त दहेज प्रथा को समाप्त करने और इसे बंद कराने के लिए एक संदेश देना है।

    युवक ने यह भी कहा कि वह दहेज में सिर्फ 1 रुपये स्वीकार करेंगे, ताकि यह प्रतीकात्मक रूप से दिखाया जा सके कि शादी के लिए पैसे या दहेज की आवश्यकता नहीं है। इस साहसिक कदम ने समारोह में मौजूद सभी मेहमानों को हैरान कर दिया।स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने युवक के इस कदम की सराहना की है। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण समाज में जागरूकता फैलाने और दहेज प्रथा को खत्म करने में मदद करेंगे। युवा पीढ़ी को इस तरह के कदमों से यह सीखने को मिलेगा कि शादी का मूल्य सिर्फ प्यार और आपसी समझदारी में निहित है, न कि धन-दौलत में।

    इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी युवक के कदम की काफी चर्चा हो रही है। लोग उसे साहसी और समाज सुधारक के रूप में देख रहे हैं। कई सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें युवक की सादगी और साहस को प्रदर्शित किया गया है।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार साबित होंगे। दहेज प्रथा के खिलाफ यह एक प्रेरक संदेश है और आने वाले समय में और भी लोग इस दिशा में कदम उठा सकते हैं।

  • बागपत: बाइक पर ‘I Love Muhammad’ स्टिकर लगाने पर पुलिस ने काटा चालान, वीडियो वायरल

    बागपत: बाइक पर ‘I Love Muhammad’ स्टिकर लगाने पर पुलिस ने काटा चालान, वीडियो वायरल

    बागपत उत्तर प्रदेश। बागपत में एक युवक को बाइक पर ‘I Love Muhammad’ स्टिकर लगाने के कारण पुलिस ने चालान काट दिया। इस घटना का वीडियो युवक ने बनाया और सोशल मीडिया पर साझा किया, जो तेजी से वायरल हो गया।

    वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस अधिकारी स्टिकर को आपत्तिजनक बताकर युवक से पूछताछ कर रहे हैं। युवक ने अपने अधिकारों के अनुसार स्टिकर लगाने का कारण बताया, लेकिन पुलिस ने नियमों का हवाला देते हुए चालान काट दिया। इस घटना ने सोशल मीडिया पर विवाद और आक्रोश फैला दिया।

    सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और धार्मिक प्रतीकों के प्रति सम्मान दोनों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। कई लोगों ने प्रशासन से मामले की जांच करने और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।

    स्थानीय पुलिस प्रशासन ने कहा कि वायरल वीडियो की पुष्टि की जा रही है और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी भी मामले में कानून सभी के लिए समान है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ नियमों का पालन भी आवश्यक है।

    बागपत की यह घटना उत्तर प्रदेश में व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और धार्मिक प्रतीकों के प्रयोग को लेकर चर्चा का विषय बन गई है। वीडियो वायरल होने के बाद नागरिकों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसे लेकर बहस तेज हो गई है।