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Category: लखनऊ

लखनऊ जिला उत्तर प्रदेश की राजधानी है, जो अपनी ऐतिहासिक धरोहर, समृद्ध संस्कृति और आधुनिकता के लिए प्रसिद्ध है। लखनऊ समाचार

 

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  • लखनऊ: गायिका नेहा सिंह राठौर ने हजरतगंज कोतवाली में बयान दर्ज कराया

    लखनऊ: गायिका नेहा सिंह राठौर ने हजरतगंज कोतवाली में बयान दर्ज कराया

    लखनऊ: गायिका नेहा सिंह राठौर सोमवार को सुबह 11 बजे हजरतगंज कोतवाली पहुंचीं और वहां बयान दर्ज कराया। यह मामला उनके द्वारा गाए गए गाने ‘चौकीदारवा कायर बा’ से जुड़ा हुआ है, जो उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया पर प्रस्तुत किया था। इस गाने को लेकर प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर कार्रवाई की गई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने नेहा की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई हुई है, जिससे उनकी सुरक्षा और कानूनी अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं। इस अंतरिम रोक के चलते नेहा सुरक्षित रूप से कोतवाली में अपने बयान दर्ज कराने पहुंची। गायिका ने बयान में अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि उनका गाना केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया थी, जिसका उद्देश्य किसी विशेष व्यक्ति या समुदाय को निशाना बनाना नहीं था।

    हजरतगंज कोतवाली में उनका आगमन सुबह से ही मीडिया और पुलिस के लिए महत्वपूर्ण रहा। पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और कोतवाली में भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त जवान तैनात किए गए। नेहा सिंह राठौर ने अधिकारियों के सवालों का उत्तर दिया और मामले की जांच में सहयोग किया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के मामले में बयान दर्ज करना कानूनी प्रक्रिया का अहम हिस्सा होता है। बयान में गायक या कलाकार से उनकी प्रतिक्रिया और नजरिया पूछा जाता है, ताकि मामले को निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ाया जा सके। नेहा ने भी पूरी ईमानदारी और सहयोग के साथ बयान दिया।

    सोशल मीडिया पर नेहा की सुरक्षा और उनकी कानूनी स्थिति को लेकर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। उनके फैंस ने उन्हें समर्थन दिया है और कहा कि गायक को अपने भावनाओं को व्यक्त करने का अधिकार है। वहीं कुछ आलोचक इस मामले को लेकर कड़ा रुख अपनाए हुए हैं।

    इस बयान दर्ज करने के बाद पुलिस और प्रशासन मामले की आगे की जांच कर रहे हैं। जांच में सोशल मीडिया पोस्ट, गाने के वीडियो और उनकी प्रतिक्रिया को भी शामिल किया जाएगा। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करें।

    कुल मिलाकर, नेहा सिंह राठौर का बयान दर्ज कराना कानूनी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है। सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक और सुरक्षा उपायों के तहत गायिका ने अपना बयान दिया और मामले की निष्पक्ष जांच में सहयोग किया। यह घटना हिंदी संगीत जगत और कानूनी प्रक्रिया दोनों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • UP Railway News : राजधानी और तेजस ट्रेन में बम की अफवाह, यूपी में स्टेशन अलर्ट, जांच तेज

    UP Railway News : राजधानी और तेजस ट्रेन में बम की अफवाह, यूपी में स्टेशन अलर्ट, जांच तेज

    UP Railway News : उत्तर प्रदेश से होकर गुजरने वाली कई प्रमुख ट्रेनों में बम होने की अफवाह के बाद रेलवे सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हो गईं। राजधानी एक्सप्रेस, तेजस ट्रेन और कालिंदी एक्सप्रेस में संदिग्ध वस्तु होने की सूचना मिलने से रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। सुरक्षा कारणों से ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोका गया और गहन जांच अभियान चलाया गया।

    जानकारी के अनुसार, राजेंद्र नगर–नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस, पटना राजधानी एक्सप्रेस और कालिंदी एक्सप्रेस में बम होने की अफवाह सामने आई थी। सूचना मिलते ही जीआरपी, आरपीएफ, स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। यूपी के कई रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई और यात्रियों की आवाजाही नियंत्रित की गई।

    सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रेन के प्रत्येक कोच की बारीकी से तलाशी ली। यात्रियों के सामान की भी जांच की गई और संदिग्ध वस्तुओं को विशेष रूप से चेक किया गया। जांच के दौरान यात्रियों को कुछ समय के लिए ट्रेनों से उतारकर सुरक्षित स्थान पर रोका गया, जिससे किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

    करीब कई घंटों तक चली जांच के बाद सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी ट्रेन में कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। इसके बाद अधिकारियों ने इसे महज अफवाह करार दिया और यात्रियों को राहत की सांस मिली। जांच पूरी होने के बाद ट्रेनों को अपने गंतव्य की ओर रवाना किया गया।

    रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बम की अफवाह को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए हर सूचना की गंभीरता से जांच की जाती है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह फैलाने से बचें, क्योंकि इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि आम यात्रियों को भी परेशानी होती है।

    फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह अफवाह कहां से और किसने फैलाई। रेलवे और पुलिस प्रशासन ने चेतावनी दी है कि झूठी सूचना फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • Prateek Aparna Divorce: प्रतीक यादव ने अपर्णा यादव से तलाक का किया ऐलान, इंस्टाग्राम पोस्ट से मचा हड़कंप

    Prateek Aparna Divorce: प्रतीक यादव ने अपर्णा यादव से तलाक का किया ऐलान, इंस्टाग्राम पोस्ट से मचा हड़कंप

    Prateek Aparna Divorce: सपा प्रमुख अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी अपर्णा यादव से तलाक लेने का फैसला किया है। इस फैसले की जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा कर दी, जिसके बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। प्रतीक यादव के इस बयान से राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही हलकों में हलचल मच गई है।

    प्रतीक यादव ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में अपर्णा यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि वह जल्द से जल्द इस “स्वार्थी महिला” से तलाक लेने जा रहे हैं। पोस्ट में प्रतीक ने आरोप लगाया कि अपर्णा यादव ने उनके पारिवारिक रिश्तों को बर्बाद कर दिया और उनकी मानसिक स्थिति को भी प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी का एकमात्र लक्ष्य केवल मशहूर और प्रभावशाली बनना है, जबकि उनके मानसिक हालात की उन्हें कोई परवाह नहीं है।

    प्रतीक यादव ने अपने पोस्ट में भावनात्मक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि उन्होंने कभी ऐसी “बुरी आत्मा” नहीं देखी और यह उनका दुर्भाग्य था कि उन्होंने उनसे शादी की। इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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    गौरतलब है कि अपर्णा यादव और प्रतीक यादव की शादी साल 2012 में हुई थी। इससे पहले दोनों की सगाई 2011 में हुई थी। यह शादी उत्तर प्रदेश की सबसे हाई प्रोफाइल शादियों में गिनी जाती है। शादी समारोह में बॉलीवुड और राजनीति की कई नामचीन हस्तियां शामिल हुई थीं, जिनमें अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और उद्योगपति अनिल अंबानी जैसे दिग्गजों के नाम शामिल हैं।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतीक यादव और अपर्णा यादव की पहली मुलाकात साल 2001 में एक बर्थडे पार्टी के दौरान हुई थी। बताया जाता है कि प्रतीक ने उसी दौरान अपर्णा की ईमेल आईडी ली थी और वहीं से दोनों के बीच बातचीत और फिर रिश्ता शुरू हुआ। लगभग 10 साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया था।

    फिलहाल इस पूरे मामले पर अपर्णा यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, प्रतीक यादव का यह पोस्ट राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में इस विवाद पर दोनों पक्षों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • KGMU विवाद: अपर्णा यादव से झड़प के बाद डॉक्टर और कर्मचारी आर-पार, हड़ताल और OPD बंद करने की चेतावनी

    KGMU विवाद: अपर्णा यादव से झड़प के बाद डॉक्टर और कर्मचारी आर-पार, हड़ताल और OPD बंद करने की चेतावनी

    KGMU विवाद : राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में चल रहा महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और लव जिहाद का मामला अब और गंभीर होता नजर आ रहा है। KGMU विवाद ने सोमवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष अपर्णा यादव की टीम और यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों व कर्मचारियों के बीच तीखी झड़प और बहस हो गई। इस घटना के बाद केजीएमयू में तनाव का माहौल है और डॉक्टरों ने हड़ताल पर जाने के साथ ही ओपीडी सेवाएं बंद करने की चेतावनी दे दी है।

    यह पूरा विवाद डॉक्टर रमीज से जुड़े कथित धर्मांतरण प्रकरण से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, केजीएमयू की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद द्वारा इस मामले पर आयोजित की जाने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले अपर्णा यादव के समर्थकों और केजीएमयू के डॉक्टरों व कर्मचारियों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई। इस घटना से पूरे मेडिकल कैंपस में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि बाहरी हस्तक्षेप से संस्थान की गरिमा और स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका आरोप है कि संवेदनशील मामले में बिना समन्वय के दबाव बनाने की कोशिश की गई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। KGMU विवाद को लेकर डॉक्टर संगठनों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों और आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो वे हड़ताल और ओपीडी सेवाएं बंद करने जैसे कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

    वहीं दूसरी ओर, यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता दिख रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम में ‘फेवरेट’ बनने की कोशिश से जुड़ा है। अपर्णा यादव, जो समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की बहू हैं, ने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थामा था। हालांकि, पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें न तो लोकसभा चुनाव में टिकट मिला और न ही महिला आयोग की अध्यक्ष जैसे किसी संवैधानिक पद पर नियुक्ति हुई।

    अब 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि KGMU विवाद जैसे संवेदनशील मामलों में हुई झड़प और बयानबाजी अपर्णा यादव की राजनीतिक छवि और महत्वाकांक्षा पर असर डाल सकती है। फिलहाल, पूरे मामले पर प्रशासन और सरकार की नजर बनी हुई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की जा रही है।

  • Hijab Controversy India: “हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री बनेगी, ये दिवास्वप्न है”, ओवैसी की बेटी पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का तीखा बयान

    Hijab Controversy India: “हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री बनेगी, ये दिवास्वप्न है”, ओवैसी की बेटी पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का तीखा बयान

    Hijab Controversy India : देश के प्रसिद्ध कथावाचक और संस्कृत विद्वान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की बेटी को लेकर दिए गए एक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ओवैसी की हिजाब पहनने वाली बेटी के भविष्य में देश की प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं को “दिवास्वप्न” करार दिया है। उनका यह बयान सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं और सामाजिक चेतना बिल्कुल स्पष्ट हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अगर भविष्य में कोई महिला प्रधानमंत्री बनेगी, तो वह साड़ी पहनने वाली भारतीय महिला होगी। उनके इस बयान को सीधे तौर पर हिजाब और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखा जा रहा है।

    बयान से मचा राजनीतिक घमासान

    रामभद्राचार्य के इस बयान के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। कुछ लोग इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं कुछ इसे व्यक्तिगत आस्था और पहनावे पर टिप्पणी मानकर आलोचना कर रहे हैं।जगद्गुरु रामभद्राचार्य का कहना है कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति में बसती है और देश का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति को उसी परंपरा का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में महिला सशक्तिकरण का रास्ता परंपरा और आधुनिकता के संतुलन से होकर गुजरता है।

    ओवैसी परिवार पर टिप्पणी

    AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की बेटी को लेकर यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में राजनीतिक उत्तराधिकार, अल्पसंख्यक राजनीति और महिला नेतृत्व को लेकर चर्चाएं लगातार चल रही हैं। हालांकि ओवैसी या उनकी पार्टी की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर जबरदस्त बहस छिड़ गई है।

    सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं

    जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लोग दो धड़ों में बंट गए हैं। एक वर्ग जहां इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान की बात बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे महिला की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहा है।कुछ यूज़र्स का कहना है कि प्रधानमंत्री बनने की योग्यता पहनावे से नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता से तय होती है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि भारत की परंपराओं का सम्मान करना भी नेतृत्व का अहम हिस्सा है।

  • यूपी में स्मार्ट मीटर यूजर्स को बड़ी राहत, 900 रुपये तक मिलेगा डिस्काउंट

    यूपी में स्मार्ट मीटर यूजर्स को बड़ी राहत, 900 रुपये तक मिलेगा डिस्काउंट

    लखनऊ | उत्तर प्रदेश नए साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब राज्य में नया बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर पर 900 रुपये तक का डिस्काउंट मिलेगा। इसके तहत जहां पहले स्मार्ट मीटर के लिए 2800 रुपये चुकाने पड़ते थे, अब उपभोक्ताओं को केवल 1900 रुपये देने होंगे।

    थ्री फेज मीटर पर भी मिलेगा लाभ

    सिर्फ स्मार्ट मीटर ही नहीं, बल्कि4100 रुपये की कीमत वाले थ्री फेज मीटर पर भी 900 रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगीयह राहत केंद्र सरकार की RDSS (Revamped Distribution Sector Scheme) के तहत दी जा रही है।

    बिजली अधिनियम 2003 का हवाला

    उपभोक्ता परिषद के अनुसार, बिजली अधिनियम 2003 में स्पष्ट प्रावधान है किसरकार से मिलने वाली सब्सिडी का पूरा लाभ उपभोक्ताओं को दिया जाना चाहिए।इसी आधार पर स्मार्ट मीटर पर मिलने वाली केंद्रीय सब्सिडी को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया है।

    RDSS की अवधि बढ़ी

    कंज्यूमर काउंसिल के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि RDSS योजना पहले 31 दिसंबर 2026 तक लागू थीअब इसे बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक कर दिया गया है उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार हर स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर 900 रुपये का अनुदान दे रही है।

    स्लैब सिस्टम से मिलेगा छुटकारा

    अवधेश वर्मा के अनुसार,40 मीटर से कम दूरी पर कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को पहले स्लैब सिस्टम के कारण नुकसान हो रहा था अब इस व्यवस्था में बदलाव से छोटे उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिलेगी। इस संबंध में उपभोक्ता परिषद ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भी भेजा है।

  • नेहा सिंह राठौर ने हजरतगंज पुलिस में दिया बयान, कहा – जांच में सहयोग कर रही हूं

    नेहा सिंह राठौर ने हजरतगंज पुलिस में दिया बयान, कहा – जांच में सहयोग कर रही हूं

    लोकगायक नेहा सिंह राठौर मंगलवार को हजरतगंज पुलिस स्टेशन पहुंचीं और पहलगाम आतंकी हमले पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी भी तरह से गिरफ्तार नहीं किया गया है और वे पूरी तरह से जांच में सहयोग कर रही हैं।पुलिस सूत्रों के अनुसार, नेहा सिंह राठौर ने अपने बयान में कहा कि उनका इरादा किसी भी समुदाय या घटना के खिलाफ नहीं था। उन्होंने मीडिया और अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि जांच में वह पूरी तरह से सहयोग करेंगी और किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर करने के लिए तैयार हैं।

    हजरतगंज पुलिस ने बताया कि मामले की जांच अभी चल रही है और बयान दर्ज करने के बाद अगले कानूनी कदम तय किए जाएंगे। यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय भी बना हुआ है, जहां लोगों ने नेहा के बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी।इस मामले में पुलिस की प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बयान के संदर्भ और सन्दर्भ को ध्यान में रखते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लोकगायक ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें जांच प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग देने में कोई आपत्ति नहीं है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक हस्तियों के बयान अक्सर सामाजिक और राजनीतिक संवेदनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा बयान दर्ज करना और मामले की जांच करना जरूरी होता है। नेहा सिंह राठौर के सहयोग से पुलिस को मामले की जांच में आसानी हो रही है और जल्द ही सटीक निष्कर्ष सामने आने की संभावना है।

    लोकगायक ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं किसी भी विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहती। मेरा उद्देश्य सिर्फ अपने पक्ष को स्पष्ट करना और जांच में सहयोग करना है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में सोशल मीडिया पर बयान देने में और सावधानी बरती जाएगी।अधिकारियों ने भी यह स्पष्ट किया कि नेहा सिंह राठौर के सहयोग से मामले में जल्द निष्कर्ष निकलने की संभावना है और जांच में किसी प्रकार की देरी नहीं होगी। अब पुलिस पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ा रही है।

  • Late Major Bipin Chandra Bhatt -सीएम योगी की सख्ती से मेजर की बेटी को 24 घंटे में मिला अपना घर, भूमाफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति

    Late Major Bipin Chandra Bhatt -सीएम योगी की सख्ती से मेजर की बेटी को 24 घंटे में मिला अपना घर, भूमाफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति

    Late Major Bipin Chandra Bhatt-   लखनऊ – लखनऊ में नये साल का पहला दिन मेजर की बेटी अंजना के लिए खुशियों का संदेश लेकर आया। अंजना के पिता स्व. मेजर बिपिन चंद्र भट्ट थे और उनके निधन के बाद अंजना अकेली रह गई थी। पिछले कुछ समय से अंजना मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों से जूझ रही थीं और उन्हें सीजोफ्रेनिया के कारण रिहैब सेंटर में रखा गया था।हाल ही में अंजना के मकान पर चंदौली के बलवंत कुमार यादव और उनके सहयोगी मनोज कुमार यादव ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा कर लिया था।

    अंजना ने इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और उन्होंने 24 घंटे के भीतर न्याय दिलाने का भरोसा दिया।मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद लखनऊ पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गुरुवार दोपहर तक अंजना को उनके मकान में कब्जा दिला दिया। मकान में प्रवेश करते ही अंजना भावुक हो उठीं और आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा, “थैंक्यू योगी अंकल! गॉड ब्लेस यू।”

    अंजना के पिता मेजर बिपिन चंद्र भट्ट का निधन 1994 में हुआ था। उनके परिवार में एक बेटा और दो बेटियां थीं, जिनमें से केवल अंजना जीवित रहीं। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें 2016 में निर्वाण रिहैब सेंटर में भर्ती कराया गया।हाल ही में मकान पर कब्जा किए जाने के बाद अंजना ने स्थानीय पुलिस को सूचना दी थी। उनके मकान पर बलवंत कुमार यादव और मनोज कुमार यादव ने फर्जी दस्तावेज और बोर्ड लगा दिया था। अंजना ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपने दुख और समस्याओं को साझा किया, जिसके तुरंत बाद न्याय की प्रक्रिया शुरू हुई।

    पुलिस और प्रशासन की तेज कार्रवाई

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद पुलिस ने आरोपी बलवंत कुमार यादव और मनोज कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया। एसीपी गाजीपुर अनिंद्य विक्रम सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों को तत्काल गिरफ्तारी के बाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।अंजना के मकान में प्रवेश के समय पुलिस, सेना अधिकारी और स्थानीय प्रशासन मौजूद थे। अंजना ने हर कमरे में जाकर दीवारों को चूमा और घर के अंदर पुराने दिनों की यादों को ताजा किया। उन्होंने नारियल फोड़ा, दीप प्रज्ज्वलित किया और आसपास की महिलाओं के साथ भावुक क्षण साझा किए।

    मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता

    इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई ने अंजना को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आदेश दिए कि भूमि विवाद का समाधान तुरंत किया जाए और अंजाना को उनके अधिकारों से वंचित न किया जाए।अंजना की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सरकार और प्रशासन की सक्रियता और संवेदनशीलता नागरिकों को न्याय दिलाने में कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।

  • लखनऊ में दर्दनाक मामला: बहनों की आत्महत्या के बाद पालतू कुत्ते टोनी की भी मौत

    लखनऊ में दर्दनाक मामला: बहनों की आत्महत्या के बाद पालतू कुत्ते टोनी की भी मौत

    लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। पालतू कुत्ते की बीमारी से मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने वाली दो सगी बहनों के मामले के बाद अब उसी पालतू कुत्ते ‘टोनी’ की भी मौत हो गई है। इस घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है।जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले लखनऊ में रहने वाली दो सगी बहनों ने अपने पालतू कुत्ते टोनी की गंभीर बीमारी से अत्यधिक मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या कर ली थी। दोनों बहनों का अपने पालतू कुत्ते से गहरा भावनात्मक लगाव था। कुत्ते की बिगड़ती हालत को देखकर वे लगातार अवसाद में थीं।

    बीमारी से जूझ रहा था पालतू कुत्ता

    बताया जा रहा है कि पालतू कुत्ता टोनी लंबे समय से बीमार चल रहा था और उसका इलाज भी कराया जा रहा था। बहनों की मौत के बाद टोनी की हालत और बिगड़ती चली गई। पशु चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद आखिरकार टोनी ने भी दम तोड़ दिया।

    इलाके में शोक की लहर

    बहनों और अब उनके पालतू कुत्ते की मौत के बाद मोहल्ले में शोक और सन्नाटे का माहौल है। स्थानीय लोग इस घटना को बेहद दर्दनाक और भावनात्मक बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह मामला मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक लगाव की गंभीरता को दर्शाता है।

    मानसिक स्वास्थ्य पर उठे सवाल

    यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि मानसिक तनाव और भावनात्मक जुड़ाव किस हद तक इंसान को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तरह के गहरे तनाव की स्थिति में समय पर काउंसलिंग और परामर्श बेहद जरूरी है।फिलहाल पुलिस ने पहले से दर्ज मामले में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। प्रशासन की ओर से भी लोगों से अपील की गई है कि मानसिक दबाव की स्थिति में परिवार, मित्रों या विशेषज्ञों से मदद जरूर लें।

  • ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर सपा का हमला, योगी सरकार पर जातीय राजनीति का आरोप

    ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर सपा का हमला, योगी सरकार पर जातीय राजनीति का आरोप

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जातीय सियासत तेज होती नजर आ रही है। ब्राह्मण विधायकों की बैठक को लेकर समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। सपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर “ठाकुरवादी सोच” को बढ़ावा देने और एक जाति विशेष को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि अब इस कथित जातिवादी रवैये के खिलाफ ब्राह्मण समाज भी खुलकर सामने आ गया है।

    समाजवादी पार्टी का कहना है कि अब तक दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय इस राजनीति के शिकार होते रहे हैं, लेकिन अब ब्राह्मण समाज की नाराजगी भाजपा के लिए नई चुनौती बन गई है। सपा नेताओं ने दावा किया कि ब्राह्मण समाज की यह नाराजगी 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता से विदाई का कारण बनेगी।

    ब्राह्मण विधायकों की बैठक यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। सत्र के तीसरे दिन मंगलवार शाम कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर यह बैठक आयोजित हुई। इस बैठक को ‘सहभोज’ का नाम दिया गया था।

    इस सहभोज में पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र के करीब 45 से 50 ब्राह्मण विधायक शामिल हुए। बैठक के बाद सियासी गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। विपक्ष ने इसे भाजपा के भीतर जातिगत संतुलन साधने की कवायद बताया है।

    सपा नेताओं का आरोप है कि भाजपा अब अंदरूनी असंतोष को दबाने के लिए इस तरह की बैठकें कर रही है। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों से नाराज ब्राह्मण समाज अब सवाल उठाने लगा है और यही कारण है कि इस बैठक ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।

    हालांकि भाजपा की ओर से इस बैठक को सामान्य सामाजिक आयोजन बताया जा रहा है, लेकिन ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।