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Category: उत्तर प्रदेश

  • कानपुर में 2.86 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, बाबा बिरयानी का मालिक विवादों में घिरा

    कानपुर में 2.86 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप, बाबा बिरयानी का मालिक विवादों में घिरा

    कानपुर से एक चर्चित और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां शहर के मशहूर बाबा बिरयानी प्रतिष्ठान के मालिक पर 2 करोड़ 86 लाख रुपये की धोखाधड़ी और एक लेदर कारोबारी को धमकाने का गंभीर आरोप लगा है। मामले के सामने आने के बाद व्यापारिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई है।

    क्या है पूरा मामला?

    जानकारी के अनुसार, पीड़ित लेदर कारोबारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि बाबा बिरयानी के मालिक ने व्यापारिक साझेदारी और लेन-देन के नाम पर उससे 2.86 करोड़ रुपये हड़प लिए। आरोप है कि रकम वापस मांगने पर कारोबारी को जान से मारने की धमकी दी गई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

    पीड़ित का दावा है कि उसने विश्वास के आधार पर बड़ी रकम निवेश की थी, लेकिन तय समय पर न तो पैसा लौटाया गया और न ही किसी तरह का हिसाब दिया गया। जब उसने सख्ती से अपना पैसा मांगना शुरू किया, तो आरोपी ने दबाव बनाने और धमकाने का रास्ता अपनाया।

    पुलिस में दर्ज हुआ मामला

    लेदर कारोबारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और धमकी से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है और सभी दस्तावेजों व लेन-देन की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

    आरोपी की तरफ से क्या कहा गया?

    फिलहाल बाबा बिरयानी के मालिक की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, आरोपी पक्ष आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है और इसे आपसी व्यापारिक विवाद करार दे रहा है। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच का दावा कर रही है।

    शहर में चर्चा का विषय बना मामला

    बाबा बिरयानी कानपुर में एक जाना-पहचाना नाम है और ऐसे में इस प्रतिष्ठान के मालिक पर इतने बड़े आर्थिक घोटाले का आरोप लगना लोगों के लिए चौंकाने वाला है। व्यापारियों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे कारोबारी विश्वास पर गहरा असर पड़ेगा।पुलिस का कहना है कि जांच के बाद आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी भी की जा सकती है। वहीं, पीड़ित लेदर कारोबारी ने न्याय की मांग करते हुए कहा है कि उसे उसकी मेहनत की कमाई वापस चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कैसे बने मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने खोले राज़

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कैसे बने मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने खोले राज़

    नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री बनने की कहानी राजनीतिक गलियारों में हमेशा चर्चा का विषय रही है।

    अब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस विषय पर कुछ अहम और गुप्त पहलुओं का खुलासा किया है।

    पीयूष गोयल के अनुसार, योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री बनने की प्रक्रिया में सत्तारूढ़ पार्टी के संगठनात्मक निर्णय, राजनीतिक समीकरण और जन समर्थन का मिश्रण निर्णायक साबित हुआ। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि समाज और राजनीति में सक्रिय संगठनकर्ता के रूप में थी, जो चुनावी जीत और प्रशासनिक दक्षता दोनों में सक्षम थे।

    गुप्त पहलू और राजनीतिक रणनीति

    पीयूष गोयल ने बताया कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने में पार्टी नेतृत्व की गहन रणनीति शामिल थी। यह केवल लोकप्रियता का मामला नहीं था, बल्कि पार्टी की नीति, संगठनात्मक मजबूती और उत्तर प्रदेश की सामाजिक-राजनीतिक संरचना को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया।उन्होंने यह भी खुलासा किया कि मुख्यमंत्री पद के लिए योगी का चयन सुरक्षित और निर्णायक विकल्प माना गया था। उनका दृष्टिकोण और प्रशासनिक क्षमता, साथ ही जनता के बीच मजबूत पकड़, उन्हें पार्टी नेतृत्व के लिए सबसे भरोसेमंद उम्मीदवार बनाती थी।

    उत्तर प्रदेश में बदलाव की दिशा

    पीयूष गोयल के अनुसार, योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने कई क्षेत्रों में विकास की नई दिशा देखी। कानून-व्यवस्था में सुधार, निवेश आकर्षण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल था।गोयल ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री बनने की कहानी राजनीतिक रणनीति और जनता के समर्थन का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो यह साबित करता है कि सत्तारूढ़ पार्टी में निर्णय लेने की प्रक्रिया में सिर्फ राजनीतिक समीकरण ही नहीं, बल्कि जन-विश्वास और नेतृत्व क्षमता भी निर्णायक होती है।

  • बहराइच में भेड़ियों का आतंक: आंगन से मासूम को उठा ले गया आदमखोर, पीछा करने पर झाड़ी में छोड़कर भागा

    बहराइच में भेड़ियों का आतंक: आंगन से मासूम को उठा ले गया आदमखोर, पीछा करने पर झाड़ी में छोड़कर भागा

    बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में आदमखोर भेड़ियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। कैसरगंज इलाके से एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां देर शाम घर के आंगन में खेल रही 3 साल की मासूम बच्ची को भेड़िया उठा ले गया। गनीमत रही कि परिजनों ने साहस दिखाते हुए शोर मचाया और भेड़िए का पीछा किया, जिससे घबराकर भेड़िया बच्ची को पास की झाड़ियों में घायल अवस्था में छोड़कर भाग गया।घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। बच्ची को गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची के शरीर पर भेड़िए के दांतों और नाखूनों के गहरे निशान हैं।

    घरों तक पहुंचा आदमखोर

    ग्रामीणों का कहना है कि भेड़िए अब जंगलों से निकलकर सीधे आबादी वाले इलाकों में घुस रहे हैं। पहले ये घटनाएं खेतों या रास्तों पर होती थीं, लेकिन अब घर के आंगन तक मासूम सुरक्षित नहीं हैं। कैसरगंज क्षेत्र में बीते कुछ हफ्तों से लगातार भेड़ियों की गतिविधियां देखी जा रही हैं।

    पहले भी बन चुका है मासूम शिकार

    बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह भी इसी इलाके में एक मासूम बच्चा भेड़िए का शिकार बन चुका है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं और बच्चों को घर से बाहर निकलने नहीं दे रहे।

    वन विभाग का सर्च ऑपरेशन जारी

    वन विभाग ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। ड्रोन कैमरों, ट्रैप कैमरों और पिंजरे लगाकर आदमखोर भेड़ियों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। विभाग का दावा है कि जल्द ही भेड़ियों को पकड़ लिया जाएगा, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब तक की कार्रवाई नाकाफी साबित हो रही है।

    ग्रामीणों में गुस्सा, सुरक्षा की मांग

    ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में अतिरिक्त वनकर्मी और पुलिस बल तैनात किया जाए। साथ ही रात के समय गश्त बढ़ाने और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं। लोगों का कहना है कि जब तक भेड़ियों को पकड़ा नहीं जाता, तब तक भय का माहौल बना रहेगा।बहराइच में लगातार हो रहे भेड़िया हमले प्रशासन और वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक मासूम इन आदमखोरों का शिकार बनते रहेंगे?

  • IPS चारू निगम को CM योगी ने किया सम्मानित, 47वीं वाहिनी PAC गाजियाबाद बनी यूपी की सर्वश्रेष्ठ

    IPS चारू निगम को CM योगी ने किया सम्मानित, 47वीं वाहिनी PAC गाजियाबाद बनी यूपी की सर्वश्रेष्ठ

    औरैया से जुड़ी एक बड़ी और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। जिले की पूर्व पुलिस अधीक्षक (SP) रह चुकीं IPS अधिकारी चारू निगम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘चल वैजयन्ती ट्रॉफी’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान उत्तर प्रदेश पुलिस की सभी वाहिनियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाता है। वर्ष 2024-25 के मूल्यांकन में 47वीं वाहिनी PAC गाजियाबाद को प्रदेश की सर्वोत्तम वाहिनी घोषित किया गया, जिसके बाद यह प्रतिष्ठित ट्रॉफी दी गई।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं कार्यक्रम में IPS चारू निगम को ट्रॉफी प्रदान करते हुए बधाई दी और उनके नेतृत्व की सराहना की। वर्तमान में चारू निगम 47वीं वाहिनी PAC गाजियाबाद में सेनानायक (Commandant) के पद पर तैनात हैं। उनके नेतृत्व में वाहिनी ने अनुशासन, प्रशिक्षण, कानून-व्यवस्था, दंगा नियंत्रण, आपदा प्रबंधन और ऑपरेशनल दक्षता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जिसके चलते यह उपलब्धि हासिल हुई।

    चल वैजयन्ती ट्रॉफी उत्तर प्रदेश पुलिस में एक अत्यंत सम्मानजनक पुरस्कार माना जाता है, जो हर वर्ष सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली PAC वाहिनी को दिया जाता है। इस चयन में जवानों का प्रशिक्षण स्तर, अनुशासन, आधुनिक तकनीक का उपयोग, फील्ड ड्यूटी में दक्षता और प्रशासनिक प्रबंधन जैसे कई मानकों को परखा जाता है।

    सर्वोत्तम वाहिनी का खिताब मिलने के बाद 47वीं वाहिनी PAC गाजियाबाद में खुशी का माहौल है। जवानों और अधिकारियों ने इस सफलता को टीम वर्क और मजबूत नेतृत्व का परिणाम बताया। सेनानायक चारू निगम ने भी वाहिनी के सभी अधिकारियों और जवानों को बधाई दी और कहा कि यह सम्मान पूरे दल की मेहनत, समर्पण और अनुशासन का प्रमाण है।

    गौरतलब है कि IPS चारू निगम इससे पहले औरैया जिले की SP के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं, जहां उनके कार्यकाल को सख्त कानून व्यवस्था, संवेदनशील पुलिसिंग और प्रभावी प्रशासन के लिए जाना जाता है। उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता का असर अब PAC में भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।यह उपलब्धि न सिर्फ 47वीं वाहिनी PAC गाजियाबाद के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस बल के मनोबल को भी मजबूत करती है।

  • झांसी में आबकारी इंस्पेक्टर का रिश्वत लेते वीडियो वायरल, विभाग में मचा हड़कंप

    झांसी में आबकारी इंस्पेक्टर का रिश्वत लेते वीडियो वायरल, विभाग में मचा हड़कंप

    झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक बार फिर भ्रष्टाचार से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। यहां आबकारी इंस्पेक्टर सोनीबाला जायसवाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह कथित तौर पर ठेकेदार से रिश्वत लेते हुए नजर आ रही हैं। वीडियो में फाइल आगे बढ़ाने के बदले पैसे की बातचीत और डीएम कार्यालय का जिक्र भी साफ तौर पर सुना जा सकता है, जिससे प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है।

    वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि आबकारी इंस्पेक्टर एक निजी स्थान पर ठेकेदार से बातचीत कर रही हैं। बातचीत के दौरान ठेकेदार द्वारा काम कराने के एवज में पैसों की चर्चा होती है और इंस्पेक्टर कथित रूप से रकम स्वीकार करती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में यह भी कहा जा रहा है कि फाइल को आगे बढ़ाने में डीएम कार्यालय तक सेटिंग की जरूरत है। हालांकि, वीडियो की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं की गई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है।

    पुराना बताया जा रहा वीडियो

    सूत्रों के मुताबिक, यह वीडियो पुराना बताया जा रहा है, लेकिन अब इसके अचानक सामने आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    प्रशासन की साख पर सवाल

    इस वायरल वीडियो ने एक बार फिर सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को लेकर आम जनता के बीच नाराजगी बढ़ा दी है। आबकारी विभाग जैसे संवेदनशील महकमे में इस तरह के आरोप न केवल विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि शासन-प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करते हैं। सोशल मीडिया पर लोग मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।बताया जा रहा है कि मामले को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है और जल्द ही विभागीय जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। आबकारी विभाग की ओर से यह भी कहा गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वायरल वीडियो के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या आरोपी अधिकारी पर कार्रवाई होती है या नहीं।

  • यूपी में कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज, 14 जनवरी के बाद हो सकता है बड़ा फेरबदल

    यूपी में कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज, 14 जनवरी के बाद हो सकता है बड़ा फेरबदल

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट विस्तार और मंत्रियों के विभागों में फेरबदल को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। सूत्रों के मुताबिक 14 जनवरी (मकर संक्रांति) के बाद कभी भी मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लंबे समय से खाली पड़े मंत्री पदों और कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन को लेकर समीक्षा के बाद यह कदम उठाया जा सकता है।

    राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार संगठनात्मक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और आगामी राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए यह विस्तार कर सकती है। खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और पूर्वांचल से नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जाने या उन्हें संगठन में नई जिम्मेदारी देने की भी अटकलें हैं।

    कई पद लंबे समय से खाली

    योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अब तक कैबिनेट विस्तार सीमित रहा है। ऐसे में पार्टी के भीतर से लगातार यह मांग उठ रही थी कि जमीनी स्तर पर काम कर रहे नेताओं को सरकार में प्रतिनिधित्व दिया जाए। सूत्र बताते हैं कि भाजपा नेतृत्व ने इस पर मंथन तेज कर दिया है और हाईकमान की हरी झंडी मिलते ही विस्तार की घोषणा हो सकती है।

    2027 को ध्यान में रखकर रणनीति

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी का भी हिस्सा हो सकता है। नए चेहरों को मौका देकर सरकार सामाजिक और जातीय संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है। साथ ही कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन की रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारियों में बदलाव संभव है।

    संगठन और सरकार में संतुलन

    भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल के लिए भी यह फेरबदल अहम माना जा रहा है। हाल ही में संगठनात्मक स्तर पर हुई बैठकों के बाद यह संकेत मिले हैं कि पार्टी नेतृत्व सरकार की कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाना चाहता है।हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन सूत्रों की मानें तो मकर संक्रांति के बाद लखनऊ की राजनीति में बड़ी घोषणा हो सकती है।

  • पीएसी स्थापना दिवस पर सीएम योगी बोले-2017 के बाद बदली यूपी की तस्वीर, निवेशकों की पहली पसंद बना प्रदेश

    पीएसी स्थापना दिवस पर सीएम योगी बोले-2017 के बाद बदली यूपी की तस्वीर, निवेशकों की पहली पसंद बना प्रदेश

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और आज यह प्रदेश देश के सामने एक नए, सुरक्षित और विकसित राज्य के रूप में खड़ा है। बेहतर कानून-व्यवस्था के चलते अब उत्तर प्रदेश में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और वे यहां निवेश करने के लिए उत्साहित हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को महानगर स्थित पीएवी की 35वीं बटालियन में आयोजित पीएसी स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में प्रांतीय आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (PAC) की भूमिका की सराहना की।

    सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान अपराध, अराजकता और असुरक्षा से जुड़ी हुई थी, लेकिन आज वही प्रदेश सुशासन, सुरक्षा और विकास का मॉडल बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह बदलाव बिना मजबूत पुलिस व्यवस्था और अनुशासित बल के संभव नहीं था।मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार पीएसी को और अधिक सक्षम बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। पीएसी की संख्या, क्षमता, प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधनों को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। जवानों को नवीनतम तकनीक, अत्याधुनिक हथियार और दंगा नियंत्रण के आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे हर चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

    सीएम योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित है, जिससे आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है। यही कारण है कि बड़े उद्योगपति और वैश्विक निवेशक प्रदेश में निवेश के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने इसे प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत बताया।

    पीएसी स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने जवानों के अनुशासन, सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पीएसी न केवल प्रदेश में, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी आपदा, चुनाव और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाकर अपनी विश्वसनीयता साबित कर चुकी है।

    समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने पीएसी के जवानों से आह्वान किया कि वे जनसुरक्षा और कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश की विकास यात्रा में अपनी भूमिका निभाते रहें।

  • कानपुर देहात: गौतस्करी के आरोपी और पुलिस की मुठभेड़, दो गिरफ्तार

    कानपुर देहात: गौतस्करी के आरोपी और पुलिस की मुठभेड़, दो गिरफ्तार

    रिपोर्ट संदीप कुशवाहा कानपुर देहात। थाना शिवली क्षेत्र में पुलिस और गौतस्करों के बीच मुठभेड़ की खबर सामने आई है। इस कार्रवाई में पुलिस ने दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।

    मुठभेड़ का घटनाक्रम

    पुलिस ने क्षेत्र में सघन चेकिंग अभियान चलाया हुआ था। इसी दौरान मोटरसाइकिल सवार संदिग्धों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों अभियुक्तों के पैर में गोली लगी। घायल आरोपियों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    गौतस्करी में संलिप्तता की पुष्टि

    गिरफ्तार अभियुक्तों ने 11 दिसंबर को हुई गौतस्करी की घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। पुलिस ने उनके पास से दो तमंचे, कारतूस, मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल बरामद किया।

    पुलिस की कार्रवाई जारी

    पुलिस ने बताया कि मामले में विधिक कार्रवाई जारी है और आगे भी जांच की जाएगी। क्षेत्र में इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है।थाना शिवली की पुलिस ने कहा कि किसी भी प्रकार के गौतस्करी और अपराध के मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी और आरोपी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।यह कार्रवाई न केवल गौतस्करी की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आम जनता में सुरक्षा और विश्वास बनाए रखने में भी सहायक है।

  • कन्नौज : चार बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा, पेश की समाज को मिसाल

    कन्नौज : चार बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा, पेश की समाज को मिसाल

    कन्नौज। उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से एक भावुक और समाज को सोचने पर मजबूर कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां ठठिया थाना क्षेत्र के मिश्रीपुर्वा गांव में एक किसान की मौत के बाद उसकी चार बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा देकर अंतिम संस्कार की सभी रस्में निभाईं। इस दृश्य ने न केवल गांव बल्कि पूरे इलाके में बेटियों की भूमिका और सामाजिक सोच को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    हार्ट अटैक से हुई किसान की मौत

    मिश्रीपुर्वा गांव निवासी किसान की हार्ट अटैक से अचानक मौत हो गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। किसान के कोई पुत्र नहीं थे, केवल चार बेटियां थीं। ऐसे में अंतिम संस्कार को लेकर समाज की पारंपरिक सोच के अनुसार सवाल उठने लगे, लेकिन बेटियों ने इन सभी रूढ़ियों को तोड़ते हुए खुद आगे बढ़कर पिता की अर्थी को कंधा देने का फैसला किया।

    बेटियों ने निभाया हर फर्ज

    चारों बेटियां न केवल पिता की अर्थी को कंधा देने पहुंचीं, बल्कि श्मशान घाट तक की पूरी प्रक्रिया में शामिल रहीं। उन्होंने मुखाग्नि से लेकर अन्य अंतिम संस्कार की रस्मों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। इस दौरान गांव के लोग भी भावुक नजर आए। कई लोगों ने इसे नारी सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल बताया।

    गांव और समाज में चर्चा का विषय

    इस घटना के बाद मिश्रीपुर्वा गांव में बेटियों के अधिकार और उनकी भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि आज भी समाज में यह धारणा बनी हुई है कि अंतिम संस्कार केवल बेटे ही कर सकते हैं, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी जिम्मेदारी में बेटों से कम नहीं हैं

    बदलती सोच की झलक

    स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने चारों बेटियों की सराहना की है। उनका कहना है कि यह कदम समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव को खत्म करने की दिशा में एक मजबूत संदेश देता है। बेटियों ने यह साबित कर दिया कि वे न केवल माता-पिता की सेवा में आगे रहती हैं, बल्कि उनके जाने के बाद भी हर सामाजिक और धार्मिक दायित्व निभाने में सक्षम हैं।

    यह घटना उन लोगों के लिए एक सीख है जो आज भी बेटे-बेटी में फर्क करते हैं। कन्नौज की यह तस्वीर बताती है कि समय के साथ समाज बदल रहा है और बेटियां अब हर मोर्चे पर बराबरी से खड़ी हैं

  • बांदा पुलिस लाइन का एसपी पलाश बंसल ने किया वार्षिक मुआयना, अभिलेख दुरुस्त करने के निर्देश

    बांदा पुलिस लाइन का एसपी पलाश बंसल ने किया वार्षिक मुआयना, अभिलेख दुरुस्त करने के निर्देश

    बांदा। जनपद बांदा की पुलिस लाइन में मंगलवार को पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने वार्षिक मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने पुलिस लाइन में स्थापित विभिन्न शाखाओं और कार्यालयों का गहन निरीक्षण कर अभिलेखों को अद्यावधिक और व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। एसपी ने स्पष्ट कहा कि पुलिसिंग में पारदर्शिता, समयबद्धता और गुणवत्ता सर्वोपरि होनी चाहिए।

    वार्षिक निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने वाचक कार्यालय, आईजीआरएस शाखा, अपराध शाखा, चुनाव सेल, गुमशुदा सेल, मॉनिटरिंग सेल, स्थानीय अभिसूचना इकाई, वीवीआईपी सेल, फील्ड यूनिट, एएचटीयू, साइबर क्राइम थाना, यूपी-112 कार्यालय, जिला नियंत्रण कक्ष, रेडियो शाखा, यातायात कार्यालय, साथ ही क्षेत्राधिकारी नगर और क्षेत्राधिकारी सदर कार्यालय का बारीकी से निरीक्षण किया।

    लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर जोर

    निरीक्षण के दौरान एसपी पलाश बंसल ने सभी शाखा प्रभारियों को निर्देश दिए कि लंबित प्रकरणों का शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्यालयी कार्यों को सुव्यवस्थित और जनहितकारी ढंग से संचालित करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अभिलेखों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    डायल-112 को और प्रभावी बनाने के निर्देश

    पुलिस अधीक्षक ने डायल-112 प्रभारी को आपातकालीन पुलिस सेवाओं को और अधिक संवेदनशील, प्रभावी और जन-उपयोगी बनाने के निर्देश दिए। साथ ही आमजन को डायल-112 की सेवाओं के प्रति जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि आपात स्थिति में लोगों को त्वरित सहायता मिल सके।

    कर्मचारियों की समस्याएं भी सुनीं

    निरीक्षण के दौरान एसपी ने पुलिस कर्मियों से सीधा संवाद कर उनकी व्यक्तिगत और विभागीय समस्याएं भी सुनीं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़े और कार्यक्षमता में सुधार हो।

    अधिकारी रहे मौजूद

    इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज, सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी लाइन मेविस टॉक, क्षेत्राधिकारी सदर राजवीर सिंह गौर, क्षेत्राधिकारी डायल-112/यातायात प्रतिज्ञा सिंह, प्रतिसार निरीक्षक वेलास यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।एसपी पलाश बंसल का यह निरीक्षण पुलिस व्यवस्था को और अधिक मजबूत, जवाबदेह और जनहितैषी बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    https://nationnowsamachar.com/uttar-pradesh/banda-police-line-annual-inspection-sp-palash-bansal/