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Category: उत्तर प्रदेश

  • Ayodhya News: “गौ सेवा ही ईश्वर सेवा है” महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज ने ‘गोदान’ फिल्म को दिया आशीर्वाद

    Ayodhya News: “गौ सेवा ही ईश्वर सेवा है” महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज ने ‘गोदान’ फिल्म को दिया आशीर्वाद

    Ayodhya News: अयोध्या | गौ माता के महत्व और सनातन परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई जा रही फिल्म ‘गोदान’ को आध्यात्मिक समर्थन मिला है। फिल्म के निर्माता एवं निर्देशक विनोद कुमार चौधरी को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र एवं श्री कृष्ण जन्मभूमि न्यास के प्रमुख पूज्य महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।फिल्म ‘गोदान’ के निर्माता-निर्देशक विनोद कुमार चौधरी आज अयोध्या स्थित मणिरामदास की छावनी पहुंचे, जहां उन्होंने पूज्य महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज से भेंट कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान महाराज जी ने गौ सेवा को ईश्वर सेवा बताते हुए फिल्म की सराहना की और इसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    “गौ सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है” — महंत नृत्य गोपाल दास जी

    पूज्य महाराज ने आशीर्वचन देते हुए कहा,“गौ सेवा ही ईश्वर सेवा है। गौ माता पर आधारित यह फिल्म समाज को सही दिशा देने का कार्य करेगी। मेरी शुभकामनाएं और आशीर्वाद ‘गोदान’ फिल्म के साथ हैं। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि यह फिल्म सफलता की ओर अग्रसर हो।”उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में गौ माता के संरक्षण और उनके महत्व को लेकर जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है और ऐसे में इस विषय पर फिल्म बनाना एक सराहनीय एवं पुण्य कार्य है।

    निर्माता विनोद कुमार चौधरी के प्रयासों की प्रशंसा

    महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज ने निर्माता एवं निर्देशक विनोद कुमार चौधरी की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि गौ माता पर आधारित फिल्म बनाकर उन्होंने समाज के सामने एक सकारात्मक संदेश रखने का प्रयास किया है। यह फिल्म न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक चेतना के स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    ‘गोदान’ फिल्म से जुड़ी उम्मीदें

    फिल्म ‘गोदान’ को लेकर यह माना जा रहा है कि यह गौ माता के प्रति श्रद्धा, सेवा और संरक्षण के भाव को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगी। संत समाज के समर्थन से फिल्म को आध्यात्मिक मजबूती मिली है, जिससे दर्शकों में इसके प्रति उत्सुकता और विश्वास दोनों बढ़े हैं।

  • Kuldeep Sengar News : कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 साल की सजा निलंबन से किया इनकार

    Kuldeep Sengar News : कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 साल की सजा निलंबन से किया इनकार

    Kuldeep Sengar News नई दिल्ली: उन्नाव रेप कांड से जुड़े एक अहम मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत के मामले में दी गई 10 साल की सजा को निलंबित करने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद कुलदीप सिंह सेंगर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।

    दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है और इसमें सजा निलंबन के लिए कोई ठोस आधार नहीं बनता। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा प्रथम दृष्टया उचित प्रतीत होती है।

    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला वर्ष 2018 का है, जब उन्नाव रेप पीड़िता के पिता को पुलिस ने अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद उनकी हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआत में पुलिस ने इसे सामान्य घटना बताने की कोशिश की, लेकिन बाद में जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि पीड़िता के पिता के साथ पुलिस कस्टडी में मारपीट की गई थी, जिसके चलते उनकी मौत हुई। मामले में आरोप लगा कि तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर पूरी साजिश रची।

    निचली अदालत का फैसला

    मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद निचली अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी। अदालत ने माना था कि सेंगर की भूमिका प्रत्यक्ष न होते हुए भी साजिश में अहम रही और उन्होंने अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया।

    हाईकोर्ट में याचिका खारिज

    सजा के खिलाफ सेंगर ने दिल्ली हाईकोर्ट में सजा निलंबन की याचिका दाखिल की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता, पीड़ित परिवार के अधिकार और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए याचिका को खारिज कर दिया।कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में नरमी न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए सेंगर को कोई अंतरिम राहत नहीं दी जा सकती।

    पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद

    हाईकोर्ट के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। यह फैसला एक बार फिर यह संदेश देता है कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, वह जवाबदेही से बच नहीं सकता।

  • Prayagraj Magh Mela: संतों के अपमान का आरोप, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे, कंप्यूटर बाबा भी समर्थन में उतरे

    Prayagraj Magh Mela: संतों के अपमान का आरोप, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे, कंप्यूटर बाबा भी समर्थन में उतरे

    Prayagraj Magh Mela: प्रयागराज: माघ मेले के दौरान प्रयागराज में उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम नोज जाने से रोक दिया गया। इस घटना के बाद संतों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मौके पर ही धरना शुरू कर दिया।शंकराचार्य का आरोप है कि BJP सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में संतों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संतों को उनके धार्मिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

    संगम नोज जाने को लेकर बढ़ा विवाद

    दरअसल, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ प्रयागराज संगम नोज जाना चाहते थे। लेकिन प्रशासन ने वहां अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी। इसी को लेकर उनके अनुयायियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई।झड़प के बाद शंकराचार्य नाराज हो गए और उन्होंने धरने पर बैठने का फैसला किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

    कंप्यूटर बाबा भी समर्थन में उतरे

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में कंप्यूटर बाबा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने संतों के सम्मान को लेकर नाराजगी जताते हुए जमीन पर लेटकर धरना दिया। कंप्यूटर बाबा ने कहा कि संत समाज के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है और यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    प्रशासन ने की समझाने की कोशिश

    धरने की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और संतों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने कहा कि संगम नोज पर भीड़ अत्यधिक होने के कारण सुरक्षा के मद्देनजर यह फैसला लिया गया था और इसका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था।हालांकि, संतों की नाराजगी देर तक बनी रही और काफी समय तक धरना चलता रहा। इस पूरे घटनाक्रम ने माघ मेले की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    सियासी बयानबाजी तेज

    इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। संत समाज और विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं और संतों की सुरक्षा सर्वोपरि है।फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन माघ मेले के दौरान यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • मणिकर्णिका घाट विवाद: सांसद संजय सिंह और पप्पू यादव की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस का 72 घंटे का अल्टीमेटम

    मणिकर्णिका घाट विवाद: सांसद संजय सिंह और पप्पू यादव की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस का 72 घंटे का अल्टीमेटम

    वाराणसी: काशी के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले मणिकर्णिका घाट को लेकर फैले विवाद ने अब सियासी रूप ले लिया है। घाट पर मूर्तियों को तोड़े जाने की अफवाह और कथित फेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्यसभा सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेता पप्पू यादव समेत कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।पुलिस ने सभी नामजद आरोपियों को 72 घंटे के भीतर बयान दर्ज कराने का नोटिस जारी किया है। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि यदि तय समय सीमा में बयान दर्ज नहीं कराया गया, तो आगे की कानूनी कार्रवाई और सख्त की जा सकती है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था कथित वीडियो

    दरअसल, मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण कार्य को लेकर कुछ वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें दावा किया गया कि घाट पर प्राचीन मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है। इन वीडियो के सामने आने के बाद धार्मिक भावनाएं भड़कने लगीं और माहौल तनावपूर्ण हो गया।जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि वायरल वीडियो भ्रामक और तथ्यों से परे हैं। पुलिस के अनुसार, इन वीडियो का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना और जनता को गुमराह करना था।

    नेताओं की भूमिका की हो रही जांच

    पुलिस का कहना है कि जांच में यह सामने आया है कि कुछ राजनीतिक नेताओं ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए सोशल मीडिया पर इन वीडियो और दावों को साझा किया, जिससे अफवाहों को और बल मिला। इसी आधार पर आईटी एक्ट और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।वाराणसी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या बड़ा राजनीतिक चेहरा। अफवाह फैलाने और धार्मिक भावनाएं भड़काने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।

    प्रशासन ने की शांति बनाए रखने की अपील

    इस पूरे मामले के बीच जिला प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी या वीडियो पर विश्वास न करें और अफवाहों से दूर रहें। प्रशासन का कहना है कि मणिकर्णिका घाट पर हो रहा कार्य पूरी तरह नियमों और परंपराओं के अनुरूप है।पुलिस अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। मणिकर्णिका घाट विवाद अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि कानूनी और राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।

  • VaranasiNews: इंग्लिशिया लाइन किसान मंडी में नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, अवैध दुकानें सील

    VaranasiNews: इंग्लिशिया लाइन किसान मंडी में नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, अवैध दुकानें सील

    VaranasiNews: संवाददाता मनीष पटेल वाराणसी: जिले की सबसे बड़ी किसान मंडी के रूप में जानी जाने वाली इंग्लिशिया लाइन स्थित फुल मंडी में नगर निगम ने अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कई दुकानों को सील कर दिया।

    यह कार्रवाई किसानों को अनावश्यक कर वसूली और शोषण से राहत दिलाने के उद्देश्य से की गई है।नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, फुल मंडी में लंबे समय से कुछ ठेकेदार अवैध रूप से दुकानों पर कब्जा जमाए हुए थे।

    इन कब्जों के कारण न केवल मंडी की व्यवस्था प्रभावित हो रही थी, बल्कि किसानों से जबरन वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने पहले ही मामले की सुनवाई कर संबंधित ठेकेदारों को दुकानों को खाली करने के निर्देश दिए थे।

    नगर निगम की चेतावनी के बाद भी नहीं हटे कब्जे

    कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद नगर निगम एसडीएम सुनील यादव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि संबंधित ठेकेदारों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए थे कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अवैध कब्जा हटा लें। इसके बावजूद जब आदेशों की अवहेलना की गई, तो नगर निगम को विधिसम्मत कार्रवाई करनी पड़ी।उन्होंने बताया कि शुक्रवार को नगर निगम की टीम पुलिस बल के साथ फुल मंडी पहुंची और चिन्हित अवैध दुकानों को सील कर दिया गया। यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।

    कार्रवाई के दौरान हंगामा, पुलिस ने संभाला मोर्चा

    सीलिंग की कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने विरोध करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने की कोशिश की। हालात बिगड़ते देख मौके पर मौजूद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को हिरासत में लिया और उन्हें सिगरा थाने भेज दिया गया।नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि किसी भी कीमत पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी इस तरह की जांच और कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

    किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

    प्रशासन का मानना है कि इस कार्रवाई से मंडी में पारदर्शिता और व्यवस्था बेहतर होगी। अवैध कब्जे हटने से किसानों को राहत मिलेगी और उनसे होने वाली अतिरिक्त कर वसूली पर रोक लगेगी। साथ ही मंडी का संचालन नियमों के अनुरूप किया जा सकेगा।नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि आगे भी ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी और सरकारी संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाएगा।

  • लखनऊ: गायिका नेहा सिंह राठौर ने हजरतगंज कोतवाली में बयान दर्ज कराया

    लखनऊ: गायिका नेहा सिंह राठौर ने हजरतगंज कोतवाली में बयान दर्ज कराया

    लखनऊ: गायिका नेहा सिंह राठौर सोमवार को सुबह 11 बजे हजरतगंज कोतवाली पहुंचीं और वहां बयान दर्ज कराया। यह मामला उनके द्वारा गाए गए गाने ‘चौकीदारवा कायर बा’ से जुड़ा हुआ है, जो उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया पर प्रस्तुत किया था। इस गाने को लेकर प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर कार्रवाई की गई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने नेहा की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई हुई है, जिससे उनकी सुरक्षा और कानूनी अधिकार सुनिश्चित किए गए हैं। इस अंतरिम रोक के चलते नेहा सुरक्षित रूप से कोतवाली में अपने बयान दर्ज कराने पहुंची। गायिका ने बयान में अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि उनका गाना केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया थी, जिसका उद्देश्य किसी विशेष व्यक्ति या समुदाय को निशाना बनाना नहीं था।

    हजरतगंज कोतवाली में उनका आगमन सुबह से ही मीडिया और पुलिस के लिए महत्वपूर्ण रहा। पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और कोतवाली में भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त जवान तैनात किए गए। नेहा सिंह राठौर ने अधिकारियों के सवालों का उत्तर दिया और मामले की जांच में सहयोग किया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के मामले में बयान दर्ज करना कानूनी प्रक्रिया का अहम हिस्सा होता है। बयान में गायक या कलाकार से उनकी प्रतिक्रिया और नजरिया पूछा जाता है, ताकि मामले को निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ाया जा सके। नेहा ने भी पूरी ईमानदारी और सहयोग के साथ बयान दिया।

    सोशल मीडिया पर नेहा की सुरक्षा और उनकी कानूनी स्थिति को लेकर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। उनके फैंस ने उन्हें समर्थन दिया है और कहा कि गायक को अपने भावनाओं को व्यक्त करने का अधिकार है। वहीं कुछ आलोचक इस मामले को लेकर कड़ा रुख अपनाए हुए हैं।

    इस बयान दर्ज करने के बाद पुलिस और प्रशासन मामले की आगे की जांच कर रहे हैं। जांच में सोशल मीडिया पोस्ट, गाने के वीडियो और उनकी प्रतिक्रिया को भी शामिल किया जाएगा। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करें।

    कुल मिलाकर, नेहा सिंह राठौर का बयान दर्ज कराना कानूनी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम है। सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक और सुरक्षा उपायों के तहत गायिका ने अपना बयान दिया और मामले की निष्पक्ष जांच में सहयोग किया। यह घटना हिंदी संगीत जगत और कानूनी प्रक्रिया दोनों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • महाराजगंज में BJP जिलामंत्री का नोटों के बंडल संग वीडियो वायरल, तंत्र-मंत्र बताकर दी सफाई

    महाराजगंज में BJP जिलामंत्री का नोटों के बंडल संग वीडियो वायरल, तंत्र-मंत्र बताकर दी सफाई

    उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिलामंत्री गौतम तिवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में गौतम तिवारी नोटों के बंडल के साथ नजर आ रहे हैं, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। वीडियो सामने आते ही विपक्ष ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है, वहीं पार्टी के भीतर भी इस मामले को लेकर असहजता देखी जा रही है।

    सोशल मीडिया पर मचा बवाल

    वायरल वीडियो में कथित तौर पर भाजपा जिलामंत्री के सामने बड़ी मात्रा में नकदी दिखाई दे रही है। वीडियो के सामने आते ही यह फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सऐप ग्रुप्स पर तेजी से फैल गया। लोग वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे पैसों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स इसे भ्रष्टाचार से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे साजिश बता रहे हैं।

    नेता ने दी अजीबोगरीब सफाई

    वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा जिलामंत्री गौतम तिवारी ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए एक चौंकाने वाली सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला जादू-टोना और तंत्र-मंत्र से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, कुछ तंत्र-मंत्र करने वाले लोगों ने उन्हें साजिश के तहत जाल में फंसाया है और यह वीडियो उसी साजिश का हिस्सा है।

    गौतम तिवारी का कहना है कि वीडियो को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और इसका उद्देश्य उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाना है। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है और वे जल्द ही सच्चाई सामने लाएंगे।

    विपक्ष का हमला तेज

    इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा पर जोरदार हमला बोला है। विपक्ष का कहना है कि भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन उनके ही नेता नोटों के बंडल के साथ वीडियो में नजर आ रहे हैं। विपक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और सवाल उठाया है कि अगर नेता निर्दोष हैं, तो वीडियो में नकदी कहां से आई।

    पार्टी की बढ़ी मुश्किलें

    वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा संगठन की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। फिलहाल पार्टी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने चर्चा तेज है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो यह मामला आगामी चुनावों में पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

    जांच की मांग

    स्थानीय लोगों और राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले पर नजर रखी जा रही है।

    कुल मिलाकर, महाराजगंज में भाजपा जिलामंत्री गौतम तिवारी का नोटों के बंडल के साथ वायरल वीडियो अब सिर्फ एक सोशल मीडिया विवाद नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है, जिस पर आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।

  • UP Railway News : राजधानी और तेजस ट्रेन में बम की अफवाह, यूपी में स्टेशन अलर्ट, जांच तेज

    UP Railway News : राजधानी और तेजस ट्रेन में बम की अफवाह, यूपी में स्टेशन अलर्ट, जांच तेज

    UP Railway News : उत्तर प्रदेश से होकर गुजरने वाली कई प्रमुख ट्रेनों में बम होने की अफवाह के बाद रेलवे सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हो गईं। राजधानी एक्सप्रेस, तेजस ट्रेन और कालिंदी एक्सप्रेस में संदिग्ध वस्तु होने की सूचना मिलने से रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। सुरक्षा कारणों से ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोका गया और गहन जांच अभियान चलाया गया।

    जानकारी के अनुसार, राजेंद्र नगर–नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस, पटना राजधानी एक्सप्रेस और कालिंदी एक्सप्रेस में बम होने की अफवाह सामने आई थी। सूचना मिलते ही जीआरपी, आरपीएफ, स्थानीय पुलिस और बम निरोधक दस्ते को मौके पर बुलाया गया। यूपी के कई रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई और यात्रियों की आवाजाही नियंत्रित की गई।

    सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रेन के प्रत्येक कोच की बारीकी से तलाशी ली। यात्रियों के सामान की भी जांच की गई और संदिग्ध वस्तुओं को विशेष रूप से चेक किया गया। जांच के दौरान यात्रियों को कुछ समय के लिए ट्रेनों से उतारकर सुरक्षित स्थान पर रोका गया, जिससे किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

    करीब कई घंटों तक चली जांच के बाद सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी ट्रेन में कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। इसके बाद अधिकारियों ने इसे महज अफवाह करार दिया और यात्रियों को राहत की सांस मिली। जांच पूरी होने के बाद ट्रेनों को अपने गंतव्य की ओर रवाना किया गया।

    रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बम की अफवाह को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए हर सूचना की गंभीरता से जांच की जाती है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह फैलाने से बचें, क्योंकि इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि आम यात्रियों को भी परेशानी होती है।

    फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह अफवाह कहां से और किसने फैलाई। रेलवे और पुलिस प्रशासन ने चेतावनी दी है कि झूठी सूचना फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • Prateek Aparna Divorce: प्रतीक यादव ने अपर्णा यादव से तलाक का किया ऐलान, इंस्टाग्राम पोस्ट से मचा हड़कंप

    Prateek Aparna Divorce: प्रतीक यादव ने अपर्णा यादव से तलाक का किया ऐलान, इंस्टाग्राम पोस्ट से मचा हड़कंप

    Prateek Aparna Divorce: सपा प्रमुख अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी अपर्णा यादव से तलाक लेने का फैसला किया है। इस फैसले की जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा कर दी, जिसके बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। प्रतीक यादव के इस बयान से राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही हलकों में हलचल मच गई है।

    प्रतीक यादव ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में अपर्णा यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि वह जल्द से जल्द इस “स्वार्थी महिला” से तलाक लेने जा रहे हैं। पोस्ट में प्रतीक ने आरोप लगाया कि अपर्णा यादव ने उनके पारिवारिक रिश्तों को बर्बाद कर दिया और उनकी मानसिक स्थिति को भी प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी का एकमात्र लक्ष्य केवल मशहूर और प्रभावशाली बनना है, जबकि उनके मानसिक हालात की उन्हें कोई परवाह नहीं है।

    प्रतीक यादव ने अपने पोस्ट में भावनात्मक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि उन्होंने कभी ऐसी “बुरी आत्मा” नहीं देखी और यह उनका दुर्भाग्य था कि उन्होंने उनसे शादी की। इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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    गौरतलब है कि अपर्णा यादव और प्रतीक यादव की शादी साल 2012 में हुई थी। इससे पहले दोनों की सगाई 2011 में हुई थी। यह शादी उत्तर प्रदेश की सबसे हाई प्रोफाइल शादियों में गिनी जाती है। शादी समारोह में बॉलीवुड और राजनीति की कई नामचीन हस्तियां शामिल हुई थीं, जिनमें अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और उद्योगपति अनिल अंबानी जैसे दिग्गजों के नाम शामिल हैं।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतीक यादव और अपर्णा यादव की पहली मुलाकात साल 2001 में एक बर्थडे पार्टी के दौरान हुई थी। बताया जाता है कि प्रतीक ने उसी दौरान अपर्णा की ईमेल आईडी ली थी और वहीं से दोनों के बीच बातचीत और फिर रिश्ता शुरू हुआ। लगभग 10 साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया था।

    फिलहाल इस पूरे मामले पर अपर्णा यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, प्रतीक यादव का यह पोस्ट राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में इस विवाद पर दोनों पक्षों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

  • अमेठी:  खिचड़ी भोज व कंबल वितरण, सती महारानी ट्रस्ट का सेवा संगम के द्वारा कराया गया

    अमेठी: खिचड़ी भोज व कंबल वितरण, सती महारानी ट्रस्ट का सेवा संगम के द्वारा कराया गया

    संवाददाता नितेश तिवारी अमेठी के स्वामी परमहंस आश्रम, अमेयमाफी की पावन धरती पर मानवता, करुणा और निःस्वार्थ सेवा का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला। सती महारानी जन कल्याण ट्रस्ट एवं परमार्थ सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अमेठी खिचड़ी भोज कंबल वितरण कार्यक्रम ने समाज के जरूरतमंद वर्ग के चेहरों पर मुस्कान ला दी।

    इस सेवा आयोजन में बड़ी संख्या में असहाय, वृद्ध और जरूरतमंद लोगों को खिचड़ी भोज कराया गया तथा ठंड से राहत देने के उद्देश्य से कंबलों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री प्रकाश जी (विभाग प्रचारक) और श्री पवन जी (जिला प्रचारक) उपस्थित रहे। आयोजन का नेतृत्व सती महारानी जन कल्याण ट्रस्ट की अध्यक्ष बहुरानी शाम्भवी सिंह एवं पूर्व विधायक महारानी गरिमा सिंह के सुपुत्र युवराज श्री अनंत विक्रम सिंह ने किया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बहुरानी शाम्भवी सिंह ने कहा कि सेवा किसी पहचान या पद की मोहताज नहीं होती। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत और सम्मान नहीं पहुंचता, तब तक सेवा का उद्देश्य अधूरा रहता है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का लक्ष्य पीड़ा और अभाव से जूझ रहे लोगों के लिए निरंतर सेवा कार्य करना है।

    वहीं युवराज अनंत विक्रम सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा सेवा, त्याग और समर्पण में निहित है। खिचड़ी भोज और कंबल वितरण जैसे कार्यक्रम समाज में अपनत्व, समरसता और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करते हैं। जब समाज एकजुट होकर जरूरतमंदों का सहारा बनता है, तभी सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव होता है।

    कार्यक्रम में पूर्व मंडल अध्यक्ष अमेठी त्रियुगी नारायण शुक्ल, भेटुवा मंडल अध्यक्ष निमिषा त्रिपाठी, सहित अनेक समाजसेवी और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। सभी ने सेवा कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाई और आयोजन की सराहना की।

    ठंड के मौसम में जरूरतमंदों को कंबल मिलने से उन्हें न केवल शारीरिक राहत मिली, बल्कि समाज से जुड़ाव और सम्मान की अनुभूति भी हुई। आयोजन के अंत में आयोजकों ने सभी सहयोगियों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे जनकल्याणकारी कार्यक्रम जारी रखने का संकल्प दोहराया।