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Category: उत्तर प्रदेश

  • लखनऊ : पंकज चौधरी बने यूपी बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष, निर्विरोध हुआ चयन

    लखनऊ : पंकज चौधरी बने यूपी बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष, निर्विरोध हुआ चयन

    लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक चुनाव के तहत केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष निर्विरोध चुन लिया गया है। रविवार को हुए औपचारिक ऐलान के साथ ही 11 महीने से चल रहा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर इंतजार खत्म हो गया। पार्टी की सर्वसम्मति की परंपरा के अनुसार पंकज चौधरी ही एकमात्र उम्मीदवार थे, जिसके चलते उनका चयन निर्विरोध हुआ।प्रदेश कार्यालय, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में यह घोषणा की गई। इस दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, बीजेपी संगठन महासचिव बीएल संतोष, राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पूरे प्रदेश से विधायक, सांसद और संगठन के पदाधिकारी भी लखनऊ पहुंचे थे।

    2027 चुनाव को ध्यान में रखकर बड़ा दांव

    बीजेपी का यह फैसला पूरी तरह से 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पंकज चौधरी कुर्मी समाज से आते हैं और ओबीसी वर्ग का बड़ा चेहरा माने जाते हैं। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि इससे गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    पंकज चौधरी वर्तमान में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री हैं और महाराजगंज लोकसभा सीट से सात बार सांसद रह चुके हैं। उनका राजनीतिक सफर गोरखपुर नगर निगम में पार्षद के रूप में शुरू हुआ था। पूर्वांचल में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है, जिसका फायदा बीजेपी को आने वाले चुनावों में मिलने की उम्मीद है।

    संगठन में नई ऊर्जा की उम्मीद

    प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी ने कहा कि वह पार्टी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर संगठन को और मजबूत करेंगे और केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को हर बूथ तक पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी बीजेपी को नई ऊंचाइयों तक ले जाना उनकी प्राथमिकता होगी।

    लखनऊ में जश्न का माहौल

    पंकज चौधरी के चयन के बाद लखनऊ स्थित बीजेपी कार्यालय में जश्न का माहौल देखने को मिला। कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ मिठाइयां बांटीं और एक-दूसरे को बधाई दी। पार्टी नेताओं का कहना है कि नया नेतृत्व संगठन को नई दिशा देगा और 2027 की तैयारी को धार देगा।

  • कानपुर देहात: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 137 जोड़ों का वैदिक विधि से विवाह

    कानपुर देहात: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 137 जोड़ों का वैदिक विधि से विवाह

    कानपुर देहात।उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत शनिवार को कानपुर देहात जिले में भव्य आयोजन किया गया। अकबरपुर और भोगनीपुर तहसील क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में कुल 150 पंजीकृत जोड़ों में से 137 जोड़ों का वैदिक विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया गया। इस अवसर पर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवी संगठनों की मौजूदगी में नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया गया।

    अकबरपुर में 79 जोड़ों का हुआ सामूहिक विवाह

    अकबरपुर–मैथा विकासखंड के लिए सामूहिक विवाह कार्यक्रम अकबरपुर स्थित शांति उपवन गेस्ट हाउस में आयोजित किया गया। यहां गायत्री परिवार के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संस्कार संपन्न कराए।
    अकबरपुर क्षेत्र के 45 पंजीकृत जोड़ों में से 40 और मैथा विकासखंड के 41 में से 39 जोड़े विवाह स्थल पर पहुंचे। इस तरह अकबरपुर कार्यक्रम में कुल 79 जोड़ों ने अग्निकुंड के सात फेरे लिए। जयमाला और मंत्रोच्चार के बीच नवदंपतियों ने जीवन भर साथ निभाने का संकल्प लिया।

    भोगनीपुर तहसील में भी रहा उत्साह

    इसी क्रम में भोगनीपुर तहसील क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में जोड़े शामिल हुए। यहां भी वैदिक परंपराओं के अनुसार विवाह संपन्न कराए गए। दोनों तहसीलों को मिलाकर कुल 137 जोड़ों का विवाह कराया गया, जिससे जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिली।

    सरकार की योजना से गरीब परिवारों को सहारा

    मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक कराना है। योजना के तहत सरकार विवाह से जुड़ी आवश्यक सामग्री, उपहार और आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इससे गरीब परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होता है।

    कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि सभी जोड़ों का पहले बायोमेट्रिक सत्यापन कराया गया था। विवाह के बाद नवदंपतियों को प्रमाण पत्र और योजना के तहत मिलने वाली सामग्री भी वितरित की गई।

    सामाजिक सौहार्द का संदेश

    सामूहिक विवाह कार्यक्रम न सिर्फ आर्थिक सहयोग का माध्यम बने, बल्कि सामाजिक समरसता और सौहार्द का भी संदेश दिया। एक ही मंच पर सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में

  • औरैया फीस के अभाव में स्कूल नहीं जा रही थी छात्रा, प्रिंसिपल ने खुद पहुंचकर दिया भरोसा

    औरैया फीस के अभाव में स्कूल नहीं जा रही थी छात्रा, प्रिंसिपल ने खुद पहुंचकर दिया भरोसा

    औरैया।उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से शिक्षा और संवेदनशीलता से जुड़ी एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है। यहां एक छात्रा कई दिनों से स्कूल नहीं आ रही थी। जब इस बात की जानकारी स्कूल प्रबंधन को हुई, तो स्कूल के प्रिंसिपल ने एक जिम्मेदार शिक्षक की भूमिका निभाते हुए खुद छात्रा के घर जाकर उससे मुलाकात की।

    मुलाकात के दौरान छात्रा ने जो कारण बताया, वह चौंकाने वाला था। उसने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह स्कूल की फीस नहीं भर पा रही थी, इसी वजह से उसने स्कूल जाना बंद कर दिया। छात्रा की बात सुनते ही प्रिंसिपल ने बेहद संवेदनशील अंदाज में पूछा “तुमसे फीस किसने मांगी है?”

    प्रिंसिपल का यह जवाब सुनकर छात्रा भावुक हो गई। यह छोटा सा संवाद अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे शिक्षा के क्षेत्र में इंसानियत और जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

    प्रिंसिपल ने छात्रा को भरोसा दिलाया कि उसकी पढ़ाई फीस के अभाव में नहीं रुकेगी। उन्होंने छात्रा और उसके परिवार को समझाया कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और किसी भी हाल में आर्थिक तंगी उसकी पढ़ाई में बाधा नहीं बनेगी। इसके बाद छात्रा को नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित किया गया।

    इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में फीस और आर्थिक असमानता के मुद्दे को उजागर कर दिया है। कई परिवार आज भी आर्थिक कारणों से अपने बच्चों को स्कूल भेजने में असमर्थ हैं, जिससे बच्चों का भविष्य अधर में लटक जाता है। ऐसे में औरैया के इस स्कूल प्रिंसिपल का कदम शिक्षा जगत के लिए एक सकारात्मक संदेश देता है।

    सोशल मीडिया पर लोग इस प्रिंसिपल की जमकर सराहना कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि अगर हर शिक्षक और स्कूल प्रबंधन इसी तरह संवेदनशीलता दिखाए, तो कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित नहीं रहेगा। कई लोगों ने इसे “सच्चे गुरु” की पहचान बताया है।

    यह मामला केवल एक छात्रा की स्कूल वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को सोचने पर मजबूर करता है कि क्या फीस किसी बच्चे की शिक्षा से बड़ी हो सकती है? औरैया की यह घटना साबित करती है कि जब इंसानियत और जिम्मेदारी साथ चलें, तो शिक्षा सचमुच समाज को बदल सकती है।

  • बाँदा पुलिस की अनोखी पहल: महिला पुलिस कर्मियों के बच्चों के लिए शुरू हुआ शिशु पालन ग्रह

    बाँदा पुलिस की अनोखी पहल: महिला पुलिस कर्मियों के बच्चों के लिए शुरू हुआ शिशु पालन ग्रह

    बाँदा।महिला पुलिस कर्मियों की ड्यूटी के दौरान बच्चों की देखरेख एक बड़ी चुनौती रही है। इसी समस्या को समझते हुए बाँदा पुलिस ने एक सराहनीय और अनोखी पहल की है। स्थानीय पुलिस लाइन परिसर में महिला पुलिस कर्मचारियों के छोटे बच्चों के लिए शिशु पालन ग्रह (क्रेच) की शुरुआत की गई है, जहां बच्चों की सुरक्षा, देखभाल, पढ़ाई और खेलकूद की समुचित व्यवस्था की गई है।

    पुलिस विभाग में कार्यरत महिला कर्मियों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान बच्चों की चिंता उन्हें मानसिक रूप से परेशान करती थी। कई बार आपात ड्यूटी या लंबे समय तक चलने वाले कार्यों में बच्चों को घर पर छोड़ना मुश्किल हो जाता था। ऐसे में यह शिशु पालन ग्रह उनके लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। अब महिला पुलिसकर्मी ड्यूटी पर जाते समय अपने छोटे बच्चों को पुलिस लाइन स्थित शिशु पालन ग्रह में सुरक्षित छोड़ सकती हैं।

    शिशु पालन ग्रह में बच्चों की देखरेख के लिए दो प्रशिक्षित कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। यहां बच्चों के लिए खेलने के खिलौने, किताबें, बैठने और आराम करने की व्यवस्था के साथ-साथ उनके खान-पान का भी ध्यान रखा जाता है। बच्चों के लिए सुरक्षित और सकारात्मक माहौल तैयार किया गया है, ताकि वे खुद को सहज महसूस कर सकें।

    महिला पुलिस कर्मियों ने बताया कि इस व्यवस्था से अब वे तनावमुक्त होकर अपनी ड्यूटी कर पा रही हैं। पहले बच्चों की चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब उन्हें भरोसा है कि उनके बच्चे सुरक्षित हाथों में हैं। इससे न सिर्फ उनकी कार्यक्षमता बढ़ी है, बल्कि मानसिक संतुलन भी बेहतर हुआ है।

    इस पहल को लेकर सहायक पुलिस अधीक्षक मेविश टक ने बताया कि पुलिस की नौकरी में समय की कोई निश्चितता नहीं होती। कभी भी ड्यूटी लग सकती है, ऐसे में महिला पुलिस कर्मियों को सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों की देखभाल को लेकर होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस लाइन एवं आसपास रहने वाली महिला पुलिस कर्मियों के लिए यह शिशु पालन ग्रह शुरू किया गया है।उन्होंने बताया कि इस केंद्र का उद्देश्य केवल बच्चों की देखरेख ही नहीं, बल्कि उनकी शारीरिक और बौद्धिक क्षमता का विकास भी है। इसके लिए किताबें, खिलौने और रचनात्मक गतिविधियों की व्यवस्था की गई है।

    बाँदा पुलिस की यह पहल न सिर्फ महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।

  • अलीगढ़ होटल में शर्मनाक हरकत: तंदूर की रोटियों पर थूकता दिखा कारीगर, वीडियो वायरल

    अलीगढ़ होटल में शर्मनाक हरकत: तंदूर की रोटियों पर थूकता दिखा कारीगर, वीडियो वायरल

    उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से एक बेहद घिनौनी और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने लोगों के गुस्से को भड़का दिया है। शहर के एक होटल में काम करने वाले कारीगर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह तंदूर में रोटियां सेकने से पहले उन पर थूकता हुआ साफ नजर आ रहा है। वीडियो सामने आते ही लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है और खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

    वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि होटल का कारीगर खुलेआम रोटियों पर थूकने के बाद उन्हें तंदूर में चिपका देता है। यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैला, लोगों ने इसे स्वास्थ्य और स्वच्छता के नियमों का खुला उल्लंघन बताया। कई यूजर्स ने होटल पर सख्त कार्रवाई और आरोपी कारीगर की गिरफ्तारी की मांग की है।

    लोगों में गुस्सा, कार्रवाई की मांग

    स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की हरकत न सिर्फ ग्राहकों की सेहत के साथ खिलवाड़ है, बल्कि समाज में नफरत और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करती है। लोगों ने सवाल उठाया कि खाद्य विभाग की निगरानी आखिर कहां है और ऐसे होटल बिना जांच के कैसे चल रहे हैं।

    प्रशासन और खाद्य विभाग हरकत में

    मामला तूल पकड़ने के बाद स्थानीय प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग ने संज्ञान लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, वीडियो की जांच की जा रही है और संबंधित होटल की पहचान कर ली गई है। होटल में साफ-सफाई, लाइसेंस और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर होटल सील करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

    पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

    गौरतलब है कि इससे पहले भी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां खाने-पीने की चीजों के साथ अमानवीय और अस्वच्छ व्यवहार किया गया। ऐसे मामलों ने आम लोगों का भरोसा होटल और ढाबों से उठाने का काम किया है।

    बड़ा सवाल: ग्राहक कैसे रखें सावधानी?

    इस घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि लोग बाहर खाना खाते समय कैसे सतर्क रहें। विशेषज्ञों का कहना है कि लाइसेंस प्राप्त, साफ-सुथरे और भरोसेमंद प्रतिष्ठानों में ही भोजन करना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करनी चाहिए।

    फिलहाल, अलीगढ़ की यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

  • SIR को लेकर औरैया पहुंचे पूर्व सांसद सुब्रत पाठक, सपा पर जमकर साधा निशाना

    SIR को लेकर औरैया पहुंचे पूर्व सांसद सुब्रत पाठक, सपा पर जमकर साधा निशाना

    रिपोर्ट: अमित शर्मा औरैया उत्तर प्रदेश में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच कन्नौज लोकसभा से बीजेपी के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक औरैया जिले के अरवा कटरा ब्लॉक पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रामीणों को SIR प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला।

    सुब्रत पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी का काम हमेशा विरोध करना रहा है। उन्होंने कहा कि पहले सपा ने ईवीएम मशीनों का विरोध किया और अब SIR का कर रही है, क्योंकि इससे फर्जी और दोहरे वोटरों की पहचान हो रही है।

    पूर्व सांसद ने दावा किया कि जब मतपत्रों से चुनाव होते थे, तब सपा के गुंडे बूथों पर कब्जा कर लेते थे। ग्रामीणों को यह तक नहीं पता चलता था कि किस रंग के मतपत्र पर वोट डालना है। उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लूट कर कह दिया जाता था कि “वोट पड़ गया, घर जाओ।”

    उन्होंने 1995 के बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में हालात इतने खराब थे कि कहा जाता था “मतपेटियों से जिंद निकलेगी”, क्योंकि गुंडों ने वोट डाल दिए होते थे। गरीब और कमजोर वर्ग को मतदान का अधिकार नहीं मिल पाता था।

    सुब्रत पाठक ने कहा कि जब ईवीएम आई तो डकैती बंद हो गई, लेकिन जैसे ही समाजवादी पार्टी हारने लगी, उसने ईवीएम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा—

    • जहां बीजेपी जीतती है, वहां सपा कहती है “ईवीएम खराब है”
    • जहां बीजेपी हारती है, वहां “ईवीएम बिल्कुल ठीक है”

    उन्होंने 2022 और 2024 के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि 2022 में बीजेपी के विधानसभा चुनाव जीतते ही ईवीएम पर सवाल उठे, जबकि 2024 में सपा को सफलता मिली तो ईवीएम सही हो गई। इसे उन्होंने सपा का दोहरा आचरण बताया।

    SIR को लेकर उन्होंने बड़ा दावा किया कि कन्नौज जनपद की तीन विधानसभा सीटों में करीब 2.87 लाख वोट कट चुके हैं। अगर लोकसभा स्तर की बात की जाए तो यह आंकड़ा 4 से 5 लाख वोट तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि समाजवादी पार्टी SIR का विरोध कर रही है, क्योंकि फर्जी वोट हटने से उसकी चुनावी गणित बिगड़ जाएगी।

    पूर्व सांसद ने कहा कि SIR एक सुधारित और पारदर्शी तंत्र है, जिसमें अब मतपत्र लूट जैसी घटनाएं संभव नहीं हैं। पहले एक व्यक्ति के कई गांवों में वोट बन जाते थे, लेकिन अब यह संभव नहीं रहेगा।

    उन्होंने जनता से अपील की कि वे SIR प्रक्रिया में सहयोग करें और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में भागीदार बनें

  • मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना: अकबरपुर के शांति उपवन में 86 जोड़ों ने लिए सात फेरे, सामाजिक समरसता का दिखा भव्य उदाहरण

    मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना: अकबरपुर के शांति उपवन में 86 जोड़ों ने लिए सात फेरे, सामाजिक समरसता का दिखा भव्य उदाहरण

    उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत जनपद मुख्यालय अकबरपुर में भव्य आयोजन देखने को मिला।

    शुक्रवार को अकबरपुर स्थित शांति उपवन में 86 जोड़ों ने वैदिक रीति-रिवाजों के साथ एक-दूसरे के गले में वरमाला डालकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। अग्निकुंड के समक्ष सात फेरे लेते हुए नवदम्पतियों ने नए जीवन की शुरुआत की।

    इस सामूहिक विवाह समारोह को संपन्न कराने की जिम्मेदारी गायत्री परिवार के स्वयंसेवकों ने निभाई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से रामसेवक वर्मा, अशोक सेंगर, निर्मल कुमार और विजय बहादुर ने वाद्य यंत्रों के साथ संगीतमय मंत्रोच्चार कर वैदिक वातावरण बनाया। मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच विवाह संस्कार पूरे किए गए, जिससे आयोजन स्थल पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।

    समाज कल्याण अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि अकबरपुर और मीठा विकासखंड से कुल 86 जोड़ों का चयन किया गया था। आयोजन स्थल पर सभी जोड़ों का पहले बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन कराया गया, इसके बाद उन्हें सरकार की ओर से विवाह किट प्रदान की गई। इस किट में गृहस्थ जीवन से जुड़ी आवश्यक सामग्री और विवाह के वस्त्र शामिल थे। हालांकि कई जोड़े अपने घरों से भी शानदार परिधानों में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जिससे समारोह और भी आकर्षक नजर आया।

    कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिभा शुक्ला द्वारा गणेश पूजन से किया गया। इसके पश्चात गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर आरती की गई। वरमाला के दौरान उपस्थित जनसमूह ने नवविवाहित जोड़ों पर पुष्पवर्षा कर उन्हें आशीर्वाद दिया।

    इस अवसर पर अकबरपुर विकासखंड अध्यक्ष आशीष मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। विवाह संपन्न होने के बाद सभी जोड़ों को विवाह प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।

    यह आयोजन न केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सहारा बना, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिकता का भी सशक्त संदेश देता नजर आया। योगी सरकार की यह योजना प्रदेश में हजारों परिवारों के लिए खुशियों की सौगात बन रही है।

  • अमेठी में कोतवाली पुलिस पर गंभीर आरोप, युवक को फर्जी हिरासत में रखकर मारपीट और जेवर गायब करने का दावा

    अमेठी में कोतवाली पुलिस पर गंभीर आरोप, युवक को फर्जी हिरासत में रखकर मारपीट और जेवर गायब करने का दावा

    संवादवादा नितेश तिवारी अमेठी। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। कोतवाली पुलिस पर एक युवक को फर्जी तरीके से हिरासत में लेकर मारपीट करने और उसके जेवर गायब करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित युवक ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज कराते हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    पीड़ित युवक जामों थाना क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। आरोप है कि अमेठी कोतवाली पुलिस ने बिना किसी वैध कारण और परिजनों को सूचना दिए बिना युवक को हिरासत में ले लिया। युवक का दावा है कि उसे करीब 36 घंटे तक थाने में बैठाकर रखा गया, इस दौरान उसके साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की गई।

    पीड़ित के अनुसार, हिरासत के दौरान अमेठी कोतवाल, एक दीवान समेत कई पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की। इतना ही नहीं, युवक के पहने हुए सोने-चांदी के जेवर भी गायब हो गए। जब युवक ने अपने जेवरों के बारे में पूछताछ की तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। आरोप है कि पुलिस ने कहा कि अगर ज्यादा सवाल किए गए तो उसे फर्जी मुकदमे में फंसा दिया जाएगा

    पीड़ित युवक ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने डर और दबाव बनाकर उससे फर्जी बयान लिखवाने की कोशिश की। युवक का कहना है कि उसे लगातार धमकाया गया ताकि वह पुलिस की बातों का विरोध न कर सके। इस पूरे घटनाक्रम से युवक और उसका परिवार गहरे सदमे में है।

    मामले को लेकर पीड़ित ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उसने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे उच्च अधिकारियों और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे।

    फिलहाल इस मामले पर पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों की मानें तो शिकायत मिलने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच की जा रही है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोपों वाले मामले में क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।

  • पंकज चौधरी बन सकते हैं यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष, लखनऊ में जुटेंगे दिग्गज, आज भरे जाएंगे नामांकन

    पंकज चौधरी बन सकते हैं यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष, लखनऊ में जुटेंगे दिग्गज, आज भरे जाएंगे नामांकन

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीजेपी को करीब 11 महीने से नए प्रदेश अध्यक्ष का इंतजार है, जो अब खत्म होने वाला है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक रविवार को यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष के नाम का आधिकारिक ऐलान किया जाएगा। इससे पहले शनिवार को लखनऊ में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी की जानी है। माना जा रहा है कि इस पद के लिए सिर्फ एक ही नामांकन होगा और वह केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का होगा।

    पंकज चौधरी

    बीजेपी की सर्वसम्मति की परंपरा के तहत चुनाव प्रक्रिया औपचारिक रहेगी और पंकज चौधरी को एक भव्य कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया जाएगा। इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री और यूपी संगठन चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और संगठन महासचिव बी.एल. संतोष की मौजूदगी तय मानी जा रही है। संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने पहले ही लखनऊ पहुंचकर चुनाव तैयारियों का जायजा ले लिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पूरे लखनऊ को सजाया गया है और सभी सांसदों-विधायकों को राजधानी में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।

    2027 को साधने की रणनीति

    बीजेपी का यह फैसला 2027 विधानसभा चुनाव के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी ने इस बार प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ओबीसी चेहरे पर दांव लगाया है। पंकज चौधरी कुर्मी समाज से आते हैं और वर्तमान में महाराजगंज से सांसद हैं। वह सात बार सांसद रह चुके हैं और पूर्वांचल में उनका मजबूत जनाधार माना जाता है।

    पंकज चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत गोरखपुर से पार्षद के रूप में की थी। राजनीति के साथ-साथ वह कारोबारी भी हैं और ‘राहत रूह तेल’ कंपनी के मालिक बताए जाते हैं। पूर्वांचल, तराई, काशी, अवध और रुहेलखंड क्षेत्रों में कुर्मी समाज का प्रभाव माना जाता है, जहां वे पार्टी के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • बांदा में दिन-रात मौरंग की लूट, बागै नदी की जलधारा मोड़कर खुलेआम अवैध खनन

    बांदा में दिन-रात मौरंग की लूट, बागै नदी की जलधारा मोड़कर खुलेआम अवैध खनन

    संवादवादा लक्ष्मीकांत तिवारी अतर्रा (बांदा)। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में अवैध मौरंग खनन एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गया है। अतर्रा तहसील क्षेत्र के अंतर्गत स्थित “तेराब” मौरंग खंड में बागै नदी की जलधारा को मोड़कर दिन-रात खुलेआम अवैध खनन किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के सख्त नियम, खनिज निदेशक के स्पष्ट निर्देश और जिलाधिकारी के आदेश भी यहां पूरी तरह बेअसर नजर आ रहे हैं।

    स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्रतिबंधित भारी पोकलैंड मशीनों का इस्तेमाल कर नदी के बीच से मौरंग निकाली जा रही है। आरोप है कि खनन माफिया मोहित मिश्रा के कथित रसूख के चलते प्रशासनिक कार्रवाई ठप पड़ी है। नदी की प्राकृतिक जलधारा को जबरन मोड़ दिया गया है और उसी जलधारा के बीच अवैध पुल का निर्माण कर लिया गया है, ताकि भारी मशीनें और ट्रक बिना रोक-टोक आवाजाही कर सकें।

    ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि इस अवैध खनन से बागै नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। नदी के किनारों पर तेज भू-कटाव हो रहा है, जिससे आसपास की कृषि भूमि और गांवों को भी खतरा बढ़ गया है। साथ ही, नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव से जलस्तर और भूजल पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अवैध खनन की जानकारी होने के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। खनन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या यह लापरवाही है या फिर माफियाओं के साथ मिलीभगत?

    मुख्य आरोप एक नजर में:

    • प्रतिबंधित भारी पोकलैंड मशीनों से अवैध मौरंग खनन
    • खनन माफिया का प्रशासन पर कथित दबदबा
    • बागै नदी की प्राकृतिक जलधारा को मोड़कर खनन
    • जलधारा के बीच अवैध पुल का निर्माण
    • एनजीटी नियमों की खुलेआम अवहेलना
    • खनिज निदेशक और बांदा जिलाधिकारी के आदेशों की अनदेखी

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बांदा प्रशासन इस अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर बागै नदी यूं ही मौरंग माफियाओं की भेंट चढ़ती रहेगी। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसके पर्यावरणीय और सामाजिक परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं