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Category: उत्तर प्रदेश

  • कानपुर मेयर ने CM का सिर झुकाकर किया स्वागत, कैबिनेट मंत्री की बेटी की शादी में पूर्व राष्ट्रपति भी पहुंचे

    कानपुर मेयर ने CM का सिर झुकाकर किया स्वागत, कैबिनेट मंत्री की बेटी की शादी में पूर्व राष्ट्रपति भी पहुंचे

    कानपुर में एक अनोखा और हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम देखने को मिला जब कानपुर मेयर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सिर झुकाकर स्वागत किया। यह दृश्य शहर में चर्चा का विषय बन गया। कार्यक्रम में मौजूद कई विधायकों ने भी आशीर्वाद लिया और राज्य सरकार के नेतृत्व में सम्मान और सम्मानजनक व्यवहार की झलक दिखाई।

    मेयर और CM के बीच सम्मानपूर्वक स्वागत

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन पर कानपुर मेयर ने अपने सिर को झुका कर उन्हें आदरपूर्वक स्वागत किया। इस स्वागत ने राजनीतिक शिष्टाचार और स्थानीय प्रशासन के सम्मान की मिसाल पेश की। इस अवसर पर उपस्थित अन्य अधिकारी और विधायक भी मुख्यमंत्री के साथ मिले और उनका आशीर्वाद लिया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि राजनीतिक प्रतिष्ठान और स्थानीय प्रशासन के बीच सम्मान और तालमेल कितना महत्वपूर्ण है।

    कैबिनेट मंत्री की बेटी की शादी में हाई-प्रोफाइल शिरकत

    इसी कार्यक्रम के दौरान कानपुर के एक कैबिनेट मंत्री की बेटी की शादी का आयोजन भी हुआ, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति ने भी शिरकत की। पूर्व राष्ट्रपति की मौजूदगी ने समारोह का महत्व और बढ़ा दिया। यह शादी न केवल राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि स्थानीय मीडिया और जनता का ध्यान भी आकर्षित किया। शादी समारोह में राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की भी भागीदारी देखने को मिली।

    राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की भागीदारी

    शादी और मुख्यमंत्री के स्वागत कार्यक्रम में कई स्थानीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक हस्तियों ने भाग लिया। विधायकों ने भी आशीर्वाद दिया और कार्यक्रम के दौरान अपने संदेश साझा किए। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक और सामाजिक मेलजोल से ही किसी बड़े आयोजन का महत्व और बढ़ता है।

    कानपुर में कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण

    कानपुर में आयोजित इस समारोह और स्वागत कार्यक्रम का आयोजन शहर के प्रमुख स्थल पर किया गया। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान समारोह स्थल और आसपास की सड़कें नियंत्रित रूट और सुरक्षा व्यवस्था के तहत रखी गई थीं। मुख्यमंत्री के स्वागत और शादी समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने आयोजनों का आनंद लिया और इसका पूरा लाभ उठाया।

    इस प्रकार यह आयोजन कानपुर मेयर के नेतृत्व में CM के स्वागत और कैबिनेट मंत्री की बेटी की शादी दोनों ही दृष्टियों से हाई-प्रोफाइल और महत्वपूर्ण रहा। इसने न केवल प्रशासन और राजनीतिक शिष्टाचार को उजागर किया, बल्कि स्थानीय नागरिकों और मीडिया के लिए भी एक आकर्षक घटना का रूप लिया।

    कुल मिलाकर, कानपुर में यह कार्यक्रम राजनीतिक सम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक खुशी का अद्भुत मिश्रण साबित हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वागत और पूर्व राष्ट्रपति की शिरकत ने इसे और भी यादगार बना दिया।

  • कुशीनगर में तेंदुए का आतंक: जाल फटने से भागा तेंदुआ, वन दरोगा समेत चार लोग घायल

    कुशीनगर में तेंदुए का आतंक: जाल फटने से भागा तेंदुआ, वन दरोगा समेत चार लोग घायल

    उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक तेंदुआ पकड़ने के दौरान जाल फटने से भाग निकला। इस घटना में वन दरोगा समेत चार लोग तेंदुए के हमले में घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, कुशीनगर के एक गांव के पास गन्ने के खेत में तेंदुआ देखे जाने की सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग को दी थी। तेंदुए की मौजूदगी से इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया। शुरुआती प्रयास में तेंदुआ जाल में फंस भी गया, लेकिन अचानक वह बुरी तरह घबरा गया और झटके मारने लगा।

    बताया जा रहा है कि इसी दौरान जाल कमजोर पड़ गया और फट गया, जिससे तेंदुआ खुद को छुड़ाने में सफल हो गया। जाल से निकलते ही तेंदुए ने आसपास मौजूद वन कर्मियों और ग्रामीणों पर हमला कर दिया। इस हमले में वन दरोगा सहित चार लोग घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर भगदड़ मच गई और ग्रामीण अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने तुरंत अतिरिक्त टीमों को बुलाया और पूरे इलाके को घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। तेंदुए की तलाश के लिए ड्रोन कैमरों और अतिरिक्त जालों की मदद ली जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तेंदुआ अब भी आसपास के गन्ने के खेतों और झाड़ियों में छिपा हो सकता है।

    प्रशासन और वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे घरों से बाहर न निकलें और खेतों की ओर जाने से बचें। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें इलाके में लगातार गश्त कर रही हैं।

    वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तेंदुए को सुरक्षित तरीके से पकड़ने की पूरी कोशिश की जा रही है, ताकि किसी और को नुकसान न पहुंचे और जानवर को भी सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके। फिलहाल कुशीनगर के इस इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है और लोग जल्द से जल्द तेंदुए के पकड़े जाने का इंतजार कर रहे हैं।

  • हमीरपुर में 40 साल बाद बेटी का जन्म, DJ और 12 स्कॉर्पियो के साथ जश्न

    हमीरपुर में 40 साल बाद बेटी का जन्म, DJ और 12 स्कॉर्पियो के साथ जश्न

    संवाददाता प्रवीण कुमार मिश्रा उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने बुंदेलखंड की पारंपरिक सामाजिक सोच को नई दिशा देने का काम किया है। आमतौर पर इस क्षेत्र में आज भी बेटा-बेटी के बीच भेदभाव देखने को मिलता है, लेकिन मौदहा कस्बे के फत्तेपुर मोहल्ले में 40 साल बाद बेटी के जन्म पर जिस तरह खुशियां मनाई गईं, उसने समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है।

    फत्तेपुर निवासी अंजुम परवेज उर्फ राजू और उनकी पत्नी निकहत फातिमा के घर नवजात बेटी के जन्म के बाद पूरा परिवार जश्न में डूब गया। बेटी को अस्पताल से घर लाने के लिए डीजे, ढोल-नगाड़ों और 12 स्कॉर्पियो गाड़ियों का काफिला निकाला गया। परिवार के सदस्य और मोहल्ले के लोग नाचते-गाते नवजात को घर लेकर पहुंचे। इस दृश्य ने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    बुंदेलखंड क्षेत्र खेती और मजदूरी पर निर्भर है और यहां लंबे समय से बेटे को वंश का सहारा मानने की सोच हावी रही है। ऐसे माहौल में बेटी के जन्म पर इस तरह का सार्वजनिक उत्सव सामाजिक बदलाव की दिशा में एक मजबूत संदेश देता है। यह आयोजन साफ तौर पर बताता है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि परिवार और समाज के लिए खुशियों की वजह होती हैं।

    बेटी के पिता अंजुम परवेज उर्फ राजू ने भावुक होते हुए कहा,“बेटियां अल्लाह की रहमत होती हैं। हमारे परिवार में लंबे समय से कोई संतान नहीं थी। अल्लाह ने 40 साल बाद हमें बेटी से नवाजा है, इसलिए खुशियां मनाना तो बनता है।

    इस मामले पर डॉक्टर अंशु मिश्रा ने बताया कि बीते तीन वर्षों में हमीरपुर जिले में यह पहला मामला है, जब बेटी के जन्म पर इस तरह सार्वजनिक रूप से भव्य जश्न मनाया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल समाज की सोच बदलने में अहम भूमिका निभा सकती है और अन्य परिवारों को भी प्रेरित कर सकती है।

    बेटी के जन्म पर मनाई गई यह खुशी केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक संदेश है। यह घटना साबित करती है कि सामाजिक सोच धीरे-धीरे बदल रही है और बेटियों को समान सम्मान देने की दिशा में समाज आगे बढ़ रहा है।

  • MaghMelaControversy: अविमुक्तेश्वरानंद को रोके जाने पर बवाल, शंकराचार्य नाराज़

    MaghMelaControversy: अविमुक्तेश्वरानंद को रोके जाने पर बवाल, शंकराचार्य नाराज़

    MaghMelaControversy : प्रयागराज माघ मेला विवाद उस समय गहराता चला गया जब ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम क्षेत्र में रोके जाने को लेकर संत समाज और प्रशासन आमने-सामने आ गया। घटना के बाद माघ मेले के प्रशासनिक इंतज़ामों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।मिली जानकारी के अनुसार, माघ मेला क्षेत्र में प्रवेश और गतिविधियों को लेकर बनाए गए नियमों के तहत जब अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों को रोका गया

    तो मामला तेजी से तूल पकड़ गया। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद बड़े अधिकारियों द्वारा संतों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें मारा-पीटा गया। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों को यह सब “ऊपर से मिले आदेश” के तहत करना पड़ा होगा।

    इस घटना के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बेहद नाराज़ हो गए और अपने शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति संभालने की पूरी कोशिश की। अधिकारियों ने हाथ जोड़कर समझाने का प्रयास किया, लेकिन शंकराचार्य किसी भी सूरत में पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।

    करीब दो घंटे तक माघ मेला क्षेत्र में गहमा-गहमी और तनाव का माहौल बना रहा। संत समाज के लोग एकत्र होते चले गए और प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी जताने लगे। इस दौरान किसी बड़े टकराव से बचने के लिए पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर डटे रहे।

    शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि संतों के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और यदि साधु-संतों के साथ इस तरह का व्यवहार होता रहा, तो वे इसका खुलकर विरोध करेंगे। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और संत समाज के सम्मान से जोड़ते हुए गंभीर मुद्दा बताया।

    घटना के बाद माघ मेला प्रशासन की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार की जा रही है और वरिष्ठ स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी। स्थानीय प्रशासन यह भी दावा कर रहा है कि मेला क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।फिलहाल, प्रयागराज माघ मेला विवाद ने प्रशासन और संत समाज के बीच तालमेल को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई या स्पष्टीकरण दिया जाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

  • CM Yogi Varanasi Statement: वाराणसी में CM योगी का विपक्ष पर हमला, बोले– काशी का विकास कांग्रेस को नहीं पच रहा

    CM Yogi Varanasi Statement: वाराणसी में CM योगी का विपक्ष पर हमला, बोले– काशी का विकास कांग्रेस को नहीं पच रहा

    CM Yogi Varanasi Statement: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वाराणसी पहुंचे। यहां उन्होंने विपक्षी दलों, खासतौर पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि काशी में हो रहे अभूतपूर्व विकास कार्य कांग्रेस को पसंद नहीं आ रहे हैं, इसलिए वह लगातार भ्रामक और झूठे प्रचार के जरिए देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।

    सीएम योगी ने यह बातें वाराणसी स्थित सर्किट हाउस में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर काशी को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी आज विकास की एक नई गाथा लिख रही है। उन्होंने बताया कि वाराणसी में अब तक 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं। इन परियोजनाओं से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।

    सीएम योगी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके निर्माण के समय कुछ लोगों ने खंडित प्रतिमाओं को दिखाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि उस समय भी कांग्रेस और उसके समर्थकों ने झूठा प्रचार किया, लेकिन आज सच्चाई सबके सामने है। कॉरिडोर बनने के बाद प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या केवल 10 से 15 हजार तक सीमित थी।

    मुख्यमंत्री ने मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण और विकास कार्यों को लेकर भी विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि घाट के विकास को लेकर अनर्गल बयानबाजी की जा रही है, जबकि काशी की जनता भली-भांति जानती है कि सरकार विकास और विरासत दोनों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी ऐतिहासिक या धार्मिक परंपरा से छेड़छाड़ नहीं की जा रही है।

    सीएम योगी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग भ्रामक जानकारी फैलाकर जनता को गुमराह करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार अपने विकास एजेंडे से पीछे हटने वाली नहीं है।

    वहीं मुख्यमंत्री योगी के इन बयानों पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि क्या ये बातें काशी के घाट पर जाकर काशीवासियों की आंखों में आंखें डालकर कही जा सकती हैं। उन्होंने इसे सवाल नहीं, बल्कि चुनौती बताया।

    कुल मिलाकर, वाराणसी में चल रहे विकास कार्यों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। जहां सरकार इसे विकास और विरासत का संतुलन बता रही है, वहीं विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में और गर्माने के संकेत दे रहा है।

  • CM Yogi Varanasi Visit: बुलडोजर एक्शन के बीच CM योगी काशी पहुंचे, विश्वनाथ और काल-भैरव मंदिर में की पूजा

    CM Yogi Varanasi Visit: बुलडोजर एक्शन के बीच CM योगी काशी पहुंचे, विश्वनाथ और काल-भैरव मंदिर में की पूजा

    CM Yogi Varanasi Visit: वाराणसी (उत्तर प्रदेश ) वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनरुद्धार कार्य के दौरान ऐतिहासिक चबूतरे और अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को बुलडोजर से हटाए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी पहुंचे और उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर तथा काल-भैरव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की।

    मणिकर्णिका घाट विवाद क्या है?

    काशी पुनर्विकास परियोजना के तहत मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में सौंदर्यीकरण और पुनरुद्धार कार्य चल रहा है। इसी दौरान घाट पर स्थित एक पुराना ऐतिहासिक चबूतरा और अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा हटाए जाने का वीडियो सामने आया, जिसके बाद विरोध शुरू हो गया।स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना पर्याप्त सूचना और सहमति के यह कार्रवाई की गई, जिससे धार्मिक और ऐतिहासिक भावनाएं आहत हुई हैं।

    मेयर और विधायक की सफाई

    विवाद बढ़ने पर वाराणसी के मेयर और क्षेत्रीय विधायक स्वयं मणिकर्णिका घाट पहुंचे। उन्होंने कहा कियह कार्रवाई पुनरुद्धार योजना का हिस्सा है किसी भी ऐतिहासिक विरासत को नष्ट करने का उद्देश्य नहीं हैसभी कार्य विशेषज्ञों और प्रशासनिक अनुमति के साथ किए जा रहे हैं प्रशासन का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद घाट की ऐतिहासिक गरिमा और बेहतर रूप में वापसी होगी।

    CM योगी का काशी दौरा, सियासी मायने

    विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काशी पहुंचना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन काल-भैरव मंदिर में विशेष पूजा अधिकारियों से परियोजना की स्थिति की जानकारी ली हालांकि, मणिकर्णिका घाट विवाद पर सीएम योगी की ओर से कोई आधिकारिक बयान फिलहाल सामने नहीं आया है।

    प्रशासन पर टिकी निगाहें

    स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि मणिकर्णिका घाट से जुड़े सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष समीक्षा हो ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए भविष्य में किसी भी कार्रवाई से पहले जनभावनाओं का सम्मान किया जाए प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की आंतरिक समीक्षा की जा रही है।

  • बांदा में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बड़े बयान, हिंदुत्व, शिक्षा और जनसंख्या पर खुलकर बोले

    बांदा में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बड़े बयान, हिंदुत्व, शिक्षा और जनसंख्या पर खुलकर बोले

    रिपोर्ट-मोहित पाल हनुमत कथा करने बांदा पहुंचे बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने धार्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर कई बड़े और चर्चित बयान दिए। उनके बयानों को लेकर कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं के साथ-साथ सियासी और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।

    हरिद्वार की हर की पौड़ी में मुसलमानों की एंट्री बैन की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनके अनुसार किसी भी धार्मिक स्थल की अपनी मर्यादा होती है। उन्होंने कहा कि जब हिंदू काबा नहीं जाते, तो फिर उन लोगों को हिंदू धार्मिक स्थलों पर जाने की आवश्यकता क्यों है, जिन्हें हिंदुत्व से परहेज है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई मुसलमान श्रद्धा के साथ उनकी कथा में आता है तो उसका स्वागत है, लेकिन यदि आपत्ति है तो घर पर रहकर टीवी के माध्यम से प्रवचन सुनना भी एक विकल्प है।

    अपने चर्चित “वेद नहीं पढ़ोगे तो नावेद और जावेद बनोगे” वाले बयान पर सफाई देते हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यह बयान विशेष रूप से सनातन समाज के लिए था। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य हिंदू समाज के लोगों को वेद पढ़ने और पढ़ाने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को इस बयान से आपत्ति है, तो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

    गुरुकुलम शिक्षा पद्धति को लेकर उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने सबसे पहले भारत की शिक्षा व्यवस्था पर हमला किया। उनका कहना था कि पहले बच्चों को ‘ग से गणेश’ पढ़ाया जाता था, जिसे सांप्रदायिक कहा गया और अब ‘ग से गधा’ पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुकुलम पद्धति का विरोध करने वालों ने ही देश को नुकसान पहुंचाया है।

    जनसंख्या के मुद्दे पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज से अपनी जनसंख्या बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि जल, जंगल, जमीन और परिवार को सुरक्षित रखना है तो हिंदुओं को अपनी संख्या बढ़ानी होगी।इस दौरान उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि बुंदेलखंड के बागेश्वर धाम में 2027 तक कैंसर अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसके उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर बागेश्वर धाम आएंगे।

  • कानपुर में चांदी चोरी का आरोपी थाने से फरार, महिला सिपाही निलंबित

    कानपुर में चांदी चोरी का आरोपी थाने से फरार, महिला सिपाही निलंबित

    कानपुर उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ज्वेलर्स की दुकान से तीन किलोग्राम चांदी चोरी के आरोप में पकड़ा गया आरोपी थाने से फरार हो गया। यह घटना गुजैनी थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जिसके बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।

    जानकारी के अनुसार, ज्वेलर्स शॉप से चांदी चोरी के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर गुजैनी थाने की हवालात में बंद किया था। पूछताछ के दौरान आरोपी को शौचालय ले जाने के लिए होमगार्ड को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी दौरान आरोपी ने होमगार्ड को धक्का दिया और मौके से फरार हो गया।

    आरोपी के भागते ही थाने में अफरा-तफरी मच गई। पुलिसकर्मियों ने उसका पीछा किया, लेकिन आरोपी कच्ची बस्ती की गलियों का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहा। घटना के बाद पुलिस की कई टीमों को आरोपी की तलाश में लगाया गया है और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

    इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है। थाना प्रभारी की तहरीर पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में जीडी मुंशी के पद पर तैनात महिला सिपाही, संबंधित होमगार्ड और फरार आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।

    मामले को गंभीरता से लेते हुए डीसीपी ने तत्काल प्रभाव से महिला सिपाही को निलंबित कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की विभागीय जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कानपुर चांदी चोरी आरोपी फरार होने के मामले को प्राथमिकता पर लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।फिलहाल यह घटना पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

  • अलीगढ़ में नाबालिग लड़की लापता, दवा लेने गई थी, पुलिस जांच में जुटी

    अलीगढ़ में नाबालिग लड़की लापता, दवा लेने गई थी, पुलिस जांच में जुटी

    अलीगढ़ जिले के पाली मुकीमपुर थाना क्षेत्र से नाबालिग लड़की के लापता होने का मामला सामने आया है, जिससे इलाके में चिंता का माहौल है। जानकारी के अनुसार, गांव गहतोली निर्मल निवासी एक नाबालिग लड़की दवा लेने के लिए घर से निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    लापता लड़की की पहचान अर्चना के रूप में हुई है। वह काफी समय से अपनी नानी भगवान देवी के घर गहतोली निर्मल गांव में रह रही थी। बताया गया कि 5 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 3 बजे अर्चना गांव के अड्डे पर दवा लेने गई थी। इसके बाद जब वह शाम तक घर नहीं पहुंची, तो नानी भगवान देवी ने उसकी तलाश शुरू की।

    देर शाम तक कोई जानकारी न मिलने पर नानी ने अर्चना के पिता रोशन सिंह को फोन कर इसकी सूचना दी। पिता रोशन सिंह, जो कि ग्राम रहीमकोट, थाना डिबाई, जिला बुलंदशहर के निवासी हैं, तुरंत रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से बच्ची की खोजबीन में जुट गए।

    परिजनों ने आसपास के गांवों और संभावित स्थानों पर काफी तलाश की, लेकिन नाबालिग लड़की का कोई सुराग नहीं मिल सका। इसके बाद पिता ने पाली मुकीमपुर थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर अलीगढ़ नाबालिग लड़की लापता होने का मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह पवार ने बताया कि लड़की की तलाश के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस द्वारा मिले मोबाइल नंबरों की जांच की जा रही है और आसपास के इलाकों में पूछताछ भी की जा रही है।

    थाना प्रभारी ने यह भी बताया कि पुलिस हर संभावित एंगल से मामले की जांच कर रही है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि यदि किसी को भी लापता लड़की के संबंध में कोई जानकारी मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।फिलहाल पुलिस की टीम लगातार दबिश दे रही है और परिजनों को भरोसा दिलाया गया है कि जल्द ही बच्ची को सकुशल बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • अमेठी महोत्सव की प्रदर्शनी पर विवाद, विदेशी उत्पाद बिकने के आरोप

    अमेठी महोत्सव की प्रदर्शनी पर विवाद, विदेशी उत्पाद बिकने के आरोप

    संवाददाता नितेश तिवारी अमेठी शहर के रामलीला मैदान में आयोजित “अमेठी महोत्सव 2025–26” के अंतर्गत लगी प्रदर्शनी को लेकर विवाद सामने आया है। प्रदर्शनी के बाहर इसे हैंडलूम, क्राफ्ट, हस्तशिल्प और खादी उत्पादों का एक्सपो बताया गया है, लेकिन कुछ संगठनों ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनी में बिक रहे कई उत्पाद भारतीय न होकर बांग्लादेश और चीन मूल के हैं।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रदर्शनी का विरोध किया। उनका कहना है कि यदि खादी और हस्तशिल्प के नाम पर विदेशी उत्पाद बेचे जा रहे हैं, तो यह मेड इन इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी पहलों की भावना के विपरीत है।

    कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस तरह की बिक्री से उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा है और स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस तरह के आयोजनों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

    संगठनों ने मांग की है कि प्रदर्शनी में लगाए गए सभी स्टॉलों पर बिकने वाले सामान की Country of Origin स्पष्ट रूप से दर्शाई जाए। इसके साथ ही आयोजकों से यह भी आग्रह किया गया है कि वे संबंधित अनुमति और आयात से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करें, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।

    विरोध के दौरान यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार देशवासियों से स्वदेशी उत्पाद अपनाने और स्थानीय उद्योगों को समर्थन देने की अपील की जाती रही है। ऐसे में यदि इन आयोजनों में आयातित वस्तुएं बेची जाती हैं, तो यह जनभावनाओं के विपरीत माना जाएगा।

    फिलहाल इस पूरे अमेठी महोत्सव प्रदर्शनी विवाद पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, प्रदर्शनी के आयोजकों ने भी अभी तक आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की है।स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।