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Category: उत्तर प्रदेश

  • प्रयागराज: महिला IAS अधिकारी के घर सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, 9 गिरफ्तार

    प्रयागराज: महिला IAS अधिकारी के घर सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, 9 गिरफ्तार

    प्रयागराज में एक महिला IAS अधिकारी के घर पर चल रहे सेक्स रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने छापेमारी कर इस मामले में चार युवतियों और पांच युवकों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार, मकान को 15 हजार रुपए में किराए पर लिया गया था, और किराएदार ने यह दावा किया कि वह अपने परिवार के साथ यहां रहेगा।

    मकान मालिक और पड़ोसियों की शिकायत के बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि मकान में कुछ युवतियों और युवकों के साथ अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं। प्रयागराज पुलिस ने महिला IAS अधिकारी के घर में छापा मारकर सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया और सभी आरोपी को हिरासत में लिया।

    गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में 4 युवतियां और 5 युवक शामिल हैं। पूछताछ में पता चला कि मकान किराएदार ने मकान मालिक और पड़ोसियों को झूठा दावा किया था कि वह परिवार के साथ ही रहेगा, लेकिन वास्तव में वह घर को अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर रहा था।

    पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह छापेमारी कानून व्यवस्था बनाए रखने और समाज में अपराध को रोकने के लिए की गई। उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और सभी आरोपियों से पूरी जानकारी ली जा रही है।

    https://nationnowsamachar.com/uttar-pradesh/kasganj-gaushala-lapravahi-jildkari/

    यह मामला प्रयागराज सेक्स रैकेट की श्रेणी में आता है और इसे गंभीरता से लिया गया है। पुलिस का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अधिकारी नियमित निरीक्षण और सतर्कता बरतेंगे।

    सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने इस कार्रवाई को शीघ्रता से अंजाम दिया। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की अवैध गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस छापेमारी से यह संदेश भी जाता है कि प्रयागराज पुलिस अपराधियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाए हुए है। आम नागरिकों को यह भरोसा देना कि उनका शहर सुरक्षित है, पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है।

  • कासगंज गौशाला में लापरवाही, जिलाधिकारी ने लिया कड़ा कदम

    कासगंज गौशाला में लापरवाही, जिलाधिकारी ने लिया कड़ा कदम

    संवाददाता सौरभ यादव कासगंज जिले के पटियाली क्षेत्र के नवादा गांव में स्थित गौशाला की स्थिति देखकर प्रशासन सख्त हो गया है। जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने गौशाला में हुई अनियमितताओं के मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया है। वहीं दो अन्य अधिकारियों को “कारण बताओ” नोटिस जारी किया गया है।

    सूचना मिलने पर गौ रक्षा दल के पदाधिकारियों ने एसडीएम पटियाली को बताया कि गौशाला की स्थिति बेहद खराब है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि गायों को रखने के लिए बनाए गए गड्ढों में 8 से 10 गायें एक साथ पड़ी हुई थीं और उनकी सफाई व मिट्टी डालने की व्यवस्था बिल्कुल नहीं थी। इसके अलावा, गौशाला में 20 से 25 गायों की मृत्यु भी दर्ज की गई है।

    जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने स्पष्ट किया है कि गौशालाओं के संचालन में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि व्यवस्थाओं में शीघ्र सुधार किया जाए और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    मौके पर एसडीएम पटियाली, क्षेत्र अधिकारी और चौकी प्रभारी दरियागंज भी निरीक्षण के लिए पहुंचे। उन्होंने गायों के लिए भूसा, पानी और साफ-सफाई की कमी का जायजा लिया। अधिकारियों ने इस बात का संज्ञान लिया कि गौशाला में पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण गायों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

    स्थानीय ग्रामीणों और गौ रक्षा दल के सदस्यों ने भी अधिकारियों को बताया कि गौशाला की नियमित देखभाल नहीं होने के कारण हालात बिगड़े हैं। उन्होंने प्रशासन से निवेदन किया कि गायों की सुरक्षा और पोषण के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।

    जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अब से हर महीने गौशालाओं का निरीक्षण किया जाएगा और गायों की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    कुल मिलाकर, कासगंज गौशाला लापरवाही का मामला प्रशासनिक गंभीरता के साथ उठाया गया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि भविष्य में गायों की देखभाल और संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

  • “जाट हूं, 50 थार खरीद दूंगी” वीडियो वायरल, गाजियाबाद में 2 दरोगाओं संग दबंगई

    “जाट हूं, 50 थार खरीद दूंगी” वीडियो वायरल, गाजियाबाद में 2 दरोगाओं संग दबंगई

    गाजियाबाद से सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। गाजियाबाद दबंगई वीडियो में एक महिला खुलेआम यह कहते हुए नजर आ रही है कि “मैं जाट हूं, खड़े-खड़े 50 थार खरीद दूंगी”। हैरानी की बात यह है कि यह बयान दो पुलिस दरोगाओं की मौजूदगी में दिया गया, लेकिन मौके पर कोई सख्त कार्रवाई होती नजर नहीं आई।

    दरोगाओं के सामने दिखा दबंग अंदाज

    वायरल वीडियो में महिला खुद को प्रभावशाली बताते हुए पुलिस पर रौब झाड़ती दिख रही है। वीडियो में मौजूद दो दरोगा उसकी बातों को सुनते नजर आते हैं, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला का यह व्यवहार सोशल मीडिया यूजर्स को खासा नाराज कर रहा है।बताया जा रहा है कि यह वीडियो किसी स्थानीय विवाद के दौरान रिकॉर्ड किया गया, जहां पुलिस मौके पर पहुंची थी। उसी दौरान महिला ने जाति और आर्थिक ताकत का हवाला देकर दबंगई दिखाई।

    सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा

    वीडियो सामने आने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या कानून सभी के लिए समान है। कई यूजर्स ने पुलिस पर आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के सामने कार्रवाई करने से बचा जाता है। वहीं कुछ लोगों ने इसे पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला मामला बताया है।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान समाज में गलत संदेश देते हैं और कानून व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा कमजोर करते हैं।

    पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

    इस पूरे प्रकरण ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद हों और फिर भी इस तरह की दबंगई हो, तो आम नागरिकों को न्याय कैसे मिलेगा। हालांकि, वीडियो के वायरल होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया है।पुलिस विभाग का कहना है कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।फिलहाल, गाजियाबाद दबंगई वीडियो कानून, व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही को लेकर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।

  • कानपुर में मेयर-पार्षद विवाद सड़क पर, प्रभारी मंत्री के कार्यक्रम में हंगामा

    कानपुर में मेयर-पार्षद विवाद सड़क पर, प्रभारी मंत्री के कार्यक्रम में हंगामा

    कानपुर में नगर निगम की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। कानपुर मेयर पार्षद विवाद उस समय खुलकर सामने आ गया, जब एक सरकारी कार्यक्रम में पार्षद समर्थकों ने जमकर हंगामा किया। खास बात यह रही कि जिस कार्यक्रम में यह विवाद हुआ, उसमें प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।

    प्रभारी मंत्री के कार्यक्रम में हुआ हंगामा

    जानकारी के अनुसार, कानपुर में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया। पार्षदों के समर्थक कार्यक्रम स्थल पर नारेबाजी करने लगे और मेयर के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। हंगामे के चलते कुछ देर के लिए कार्यक्रम बाधित भी हुआ, जिससे प्रशासन और आयोजकों में अफरा-तफरी मच गई।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पार्षद समर्थक नगर निगम में अनदेखी और भेदभाव के आरोप लगा रहे थे। उनका कहना था कि विकास कार्यों और फैसलों में पार्षदों की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    पार्षद समर्थकों की नाराजगी खुलकर सामने

    पार्षदों और उनके समर्थकों का आरोप है कि मेयर द्वारा लिए जा रहे कई फैसलों में उनकी सहमति नहीं ली जाती। इसी असंतोष ने धीरे-धीरे बड़े विवाद का रूप ले लिया। कार्यक्रम के दौरान विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नगर निगम के भीतर चल रहा तनाव अब सार्वजनिक हो चुका है।

    स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। सुरक्षा बलों ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रण में लिया, ताकि कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सके।

    नगर निगम की राजनीति पर सवाल

    इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते मेयर और पार्षदों के बीच संवाद नहीं हुआ, तो आने वाले समय में विवाद और गहरा सकता है।

    प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में हुआ यह हंगामा प्रदेश स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि सरकार इस पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर सकती है, ताकि नगर निगम में चल रही खींचतान को सुलझाया जा सके।

    फिलहाल, कानपुर मेयर पार्षद विवाद ने यह साफ कर दिया है कि नगर निगम की अंदरूनी राजनीति अब सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सड़क पर उतर आई है।

  • हाथरस के सासनी के प्रसिद्ध अमरूद देख गदगद हुए सीएम योगी, 2 किलो का अमरूद बना आकर्षण

    हाथरस के सासनी के प्रसिद्ध अमरूद देख गदगद हुए सीएम योगी, 2 किलो का अमरूद बना आकर्षण

    उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले का सासनी क्षेत्र अपने प्रसिद्ध अमरूद के लिए जाना जाता है। हाल ही में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सासनी के अमरूद की 15 से अधिक प्रजातियां देखीं, तो वे खुद को सराहना से रोक नहीं सके। सासनी के अमरूद की गुणवत्ता, आकार और विविधता ने मुख्यमंत्री को गदगद कर दिया।

    15 से अधिक प्रजातियों ने खींचा ध्यान

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने सासनी क्षेत्र में उगाए जा रहे विभिन्न प्रकार के अमरूद प्रस्तुत किए गए। इनमें अलग-अलग स्वाद, रंग और आकार के अमरूद शामिल थे। बागवानी विशेषज्ञों और किसानों ने सीएम को बताया कि यहां पारंपरिक किस्मों के साथ-साथ उन्नत प्रजातियों की भी खेती की जा रही है, जो स्थानीय किसानों की आय का प्रमुख साधन हैं।

    दो किलो का अमरूद बना आकर्षण

    प्रदर्शित अमरूदों में करीब दो किलो वजनी एक विशाल अमरूद ने सभी का ध्यान खींचा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसे हाथ में लेकर न सिर्फ देखा, बल्कि उस पल को यादगार बनाते हुए फोटो भी खिंचवाई। इसके बाद उन्होंने अमरूद की पैदावार, लागत, सिंचाई व्यवस्था और बाजार तक पहुंच से जुड़ी जानकारियां भी बारीकी से लीं।

    बागवानों की चिंता सीएम तक पहुंची

    इस अवसर पर सासनी विधायक अंजुला माहौर ने अमरूद के उजड़ते बागों और बागवानों की समस्याओं को मुख्यमंत्री के सामने रखा। उन्होंने बताया कि पानी की कमी, मिट्टी में नमी घटने और बदलते मौसम के कारण लगातार अमरूद के बाग प्रभावित हो रहे हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

    किसानों के साथ साझा की चुनौतियां

    विधायक अंजुला माहौर बागवानी करने वाले किसानों और संगठन के पदाधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री से मिलीं। उन्होंने अमरूद से भरी एक टोकरी मुख्यमंत्री को भेंट की, जिसमें 15 से अधिक प्रजातियों के अमरूद शामिल थे। किसानों ने सीएम को बताया कि यदि समय रहते संरक्षण और सहायता नहीं मिली, तो सासनी की पहचान बने अमरूद के बाग समाप्त होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।

    प्रस्ताव बनाने का मिला आश्वासन

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बागवानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने विधायक से कहा कि अमरूद की बागवानी को बचाने और किसानों की मदद के लिए एक प्रस्ताव बनाकर भेजा जाए, ताकि सरकार स्तर पर उचित कार्रवाई की जा सके।सासनी के अमरूद न सिर्फ हाथरस, बल्कि पूरे प्रदेश की पहचान हैं। यदि संरक्षण और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा मिले, तो यह क्षेत्र बागवानी के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकता है।

  • नोएडा सेक्टर-104: इंडियन ऑयल अधिकारी अनिल गर्ग की 17वीं मंजिल से मौत

    नोएडा सेक्टर-104: इंडियन ऑयल अधिकारी अनिल गर्ग की 17वीं मंजिल से मौत

    नोएडा के सेक्टर-104 स्थित एक हाई-राइज सोसायटी में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी अनिल गर्ग की 17वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई। घटना के बाद सोसायटी में हड़कंप मच गया और पुलिस मौके पर पहुंचकर प्रारंभिक जांच में जुट गई। शुरुआती जांच में पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है। मामला थाना सेक्टर 39 इलाके का है।

    पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान अनिल गर्ग के रूप में हुई है। वे मूल रूप से कानपुर के निवासी थे और वर्तमान में सेक्टर-104 की एटीएस वन हेमलेट सोसाइटी में रह रहे थे। उनके पिता अजय गर्ग (55) इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया है।

    पुलिस को मौके से मिला सुसाइड नोट मामले को गंभीरता से जांचने का आधार बना है। सुसाइड नोट में अनिल गर्ग ने लिखा है कि वह अपनी जिंदगी से परेशान थे, लेकिन अपने परिवार से बेहद प्यार करते थे। पुलिस ने बताया कि सुसाइड नोट को ध्यान में रखते हुए पूरे मामले की जांच की जा रही है और परिजनों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

    सोसायटी के अन्य निवासियों ने बताया कि रविवार सुबह अचानक हड़कंप मच गया और लोग बाहर निकल आए। पुलिस ने सोसायटी के सभी कैमरों की फुटेज जांच के लिए जब्त कर ली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सेक्टर 39 की टीम लगातार घटनास्थल पर मौजूद है और पड़ोसियों से भी पूछताछ कर रही है।

    अनिल गर्ग की मौत ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और नोएडा के स्थानीय समाज में शोक की लहर फैला दी है। वरिष्ठ अधिकारियों ने परिवार के प्रति संवेदना जताई है और पुलिस को मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है।

    स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि हाई-राइज सोसायटी में रहने वालों के लिए सतर्कता बढ़ाना जरूरी है। सोसायटी प्रबंधन ने भी सुरक्षा उपायों को और सख्त करने का आश्वासन दिया है।पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामला सुसाइड या अन्य कारणों से जुड़ा है या नहीं, इसकी पूरी जांच की जाएगी। परिजनों और पड़ोसियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और कोर्ट निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।

  • मेरठ दौरे पर अखिलेश यादव ने पहना ब्लैक कोट, जिला पंचायत सदस्य ने गिफ्ट किया

    मेरठ दौरे पर अखिलेश यादव ने पहना ब्लैक कोट, जिला पंचायत सदस्य ने गिफ्ट किया

    मेरठ में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव का हाल ही में हुआ दौरा चर्चा का विषय बना हुआ है। इस दौरान उन्होंने ब्लैक कलर का कोट पहना, जो न केवल उनके स्टाइल को उभार रहा था, बल्कि राजनीतिक और व्यक्तिगत जुड़ाव का प्रतीक भी माना जा रहा है।

    इस ब्लैक कोट का खास महत्व है। बताया जा रहा है कि लगभग 20 दिन पहले मेरठ के विद्यार्थी खादी भंडार से अखिलेश यादव को यह कोट पसंद आया था। तब उन्होंने इसे देखा और वार्ड नंबर-14 से जिला पंचायत सदस्य सम्राट मलिक को यह कोट पहने देखा। कुछ ही समय बाद, यही कोट उन्हें गिफ्ट के रूप में दिया गया।

    अखिलेश यादव ने मेरठ दौरे के दौरान यह कोट पहनकर आम जनता और मीडिया के बीच अपने स्टाइल और सादगी का मिश्रण दिखाया। सोशल मीडिया पर भी यह तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेता के स्टाइल और पहनावे पर भी लोगों की नजर रहती है, और यह कोट अखिलेश यादव के व्यक्तित्व को और भी प्रभावशाली बनाता है।

    जिला पंचायत सदस्य सम्राट मलिक ने इस गिफ्ट के माध्यम से न केवल व्यक्तिगत सम्मान व्यक्त किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि नेताओं और आम जनता के बीच संवाद और सहयोग कितना महत्वपूर्ण होता है। खादी भंडार का यह कोट स्थानीय स्तर पर उत्पादन और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा देने वाला प्रतीक बन गया है।

    मेरठ दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने स्थानीय नेताओं और समर्थकों से मुलाकात की, साथ ही जनता से संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने राजनीतिक एजेंडे और आगामी योजनाओं पर चर्चा भी की। उनके स्टाइलिश ब्लैक कोट ने इस दौरे की तस्वीरों में एक अलग पहचान बनाई और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    इस तरह, अखिलेश यादव ब्लैक कोट सिर्फ फैशन का प्रतीक नहीं बल्कि राजनीतिक सादगी और स्थानीय समर्थन का भी संदेश दे रहा है। जनता और समर्थकों के बीच इस कोट की कहानी अब लंबे समय तक याद रहेगी।

  • कानपुर में शीतलहर और कोहरे का कहर, विजिबिलिटी सिर्फ 50 मीटर

    कानपुर में शीतलहर और कोहरे का कहर, विजिबिलिटी सिर्फ 50 मीटर

    कानपुर में शीतलहर का कहर लगातार जारी है। रविवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिससे शहर में विजिबिलिटी केवल 50 मीटर तक रह गई। उत्तर-पश्चिमी बर्फीली हवाओं के प्रभाव से गलन का एहसास भी हो रहा है, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटे में कानपुर का तापमान न्यूनतम 3.2°C दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय लोग विशेष सावधानी बरतें क्योंकि कोहरे और ठंडी हवाओं के कारण सर्दी का प्रभाव शरीर पर तेज़ी से पड़ सकता है।

    रविवार सुबह शहर की मुख्य सड़कों और एक्सप्रेस वे पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों को कोहरे के कारण धीमी गति से चलने की सलाह दी गई है। विजिबिलिटी कम होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से चेतावनी जारी की है कि सुबह और शाम के समय अनावश्यक यात्रा टालें और वाहन चलाते समय हेडलाइट का प्रयोग करें।शीतलहर और कोहरे के इस मौसम में स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है।

    डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादा देर तक ठंड में रहने से कमज़ोरी, सर्दी और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। बुजुर्ग और छोटे बच्चे इस समय विशेष रूप से संवेदनशील हैं। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि गर्म कपड़े पहनें, गर्म पेय पदार्थ लें और ज्यादा बाहर निकलने से बचें।

    कानपुर में इस बार की शीतलहर कई दिनों तक बनी रह सकती है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए भी घने कोहरे और तेज़ उत्तर-पश्चिमी हवाओं की चेतावनी जारी की है। इससे न केवल ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है बल्कि दैनिक जीवन में भी रुकावटें आ सकती हैं।शहरवासियों को सलाह दी जा रही है कि बिजली और हीटर का सुरक्षित उपयोग करें, और घर में पर्याप्त गर्मी बनाए रखें। इसके साथ ही, सर्दी के मौसम में घर के बाहर पालतू जानवरों और बूढ़े लोगों का विशेष ध्यान रखें।

  • नेहा सिंह राठौर ने हजरतगंज पुलिस में दिया बयान, कहा – जांच में सहयोग कर रही हूं

    नेहा सिंह राठौर ने हजरतगंज पुलिस में दिया बयान, कहा – जांच में सहयोग कर रही हूं

    लोकगायक नेहा सिंह राठौर मंगलवार को हजरतगंज पुलिस स्टेशन पहुंचीं और पहलगाम आतंकी हमले पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी भी तरह से गिरफ्तार नहीं किया गया है और वे पूरी तरह से जांच में सहयोग कर रही हैं।पुलिस सूत्रों के अनुसार, नेहा सिंह राठौर ने अपने बयान में कहा कि उनका इरादा किसी भी समुदाय या घटना के खिलाफ नहीं था। उन्होंने मीडिया और अधिकारियों को भरोसा दिलाया कि जांच में वह पूरी तरह से सहयोग करेंगी और किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर करने के लिए तैयार हैं।

    हजरतगंज पुलिस ने बताया कि मामले की जांच अभी चल रही है और बयान दर्ज करने के बाद अगले कानूनी कदम तय किए जाएंगे। यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय भी बना हुआ है, जहां लोगों ने नेहा के बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी।इस मामले में पुलिस की प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बयान के संदर्भ और सन्दर्भ को ध्यान में रखते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लोकगायक ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें जांच प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग देने में कोई आपत्ति नहीं है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक हस्तियों के बयान अक्सर सामाजिक और राजनीतिक संवेदनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा बयान दर्ज करना और मामले की जांच करना जरूरी होता है। नेहा सिंह राठौर के सहयोग से पुलिस को मामले की जांच में आसानी हो रही है और जल्द ही सटीक निष्कर्ष सामने आने की संभावना है।

    लोकगायक ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं किसी भी विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहती। मेरा उद्देश्य सिर्फ अपने पक्ष को स्पष्ट करना और जांच में सहयोग करना है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में सोशल मीडिया पर बयान देने में और सावधानी बरती जाएगी।अधिकारियों ने भी यह स्पष्ट किया कि नेहा सिंह राठौर के सहयोग से मामले में जल्द निष्कर्ष निकलने की संभावना है और जांच में किसी प्रकार की देरी नहीं होगी। अब पुलिस पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ा रही है।

  • काल भैरव–काशी विश्वनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की पूजा-अर्चना

    काल भैरव–काशी विश्वनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की पूजा-अर्चना

    वाराणसी।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान काशी की आध्यात्मिक परंपरा के अनुसार काल भैरव मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम में विधिवत पूजा-अर्चना की। सीएम योगी ने मंदिर परिसर में दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।

    सुबह काल भैरव मंदिर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने बाबा काल भैरव का आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा विश्वनाथ की पूजा की। इस दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम रहे और श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु रूप से जारी रही।

    मुख्यमंत्री का यह दौरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के बाद से वाराणसी देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है। सीएम योगी का नियमित रूप से काशी आना उनकी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जुड़ाव को दर्शाता है।