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Category: उत्तर प्रदेश

  • लखनऊ: समाजवादी पार्टी के नए पोस्टर से राजनीति गरमाई, सड़कों पर उतरे भाजपाई- Akhilesh Yadav Poster Controversy

    लखनऊ: समाजवादी पार्टी के नए पोस्टर से राजनीति गरमाई, सड़कों पर उतरे भाजपाई- Akhilesh Yadav Poster Controversy

    लखनऊ: समाजवादी पार्टी के कार्यालय के बाहर लगे एक पोस्टर को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा हो गया है. लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी (सपा) के कार्यालय के बाहर लगे एक होर्डिंग (Akhilesh Yadav Poster Controversy) ने प्रदेश की सियासी फिजाओं को गरमा दिया है. इस पोस्टर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की आधी तस्वीर हटाकर उनकी जगह सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीर लगा दी गई है. इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने कड़ा विरोध जताया है.

    सोमवार सुबह जब लोगों ने सपा कार्यालय के बाहर यह पोस्टर देखा, तो सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक विरोध की लहर फैल गई. बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने राजधानी लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया. बड़ी संख्या में कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए अखिलेश यादव से माफी की मांग कर रहे हैं. बीजेपी के नगर अध्यक्ष और विधायक नीरज बोरा के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए हैं. उनके हाथों में बैनर और पोस्टर हैं, जिन पर अखिलेश यादव के खिलाफ जमकर नारे लिखे हैं.

    एक महिला बीजेपी कार्यकर्ता ने कहा, “यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, हमारे संविधान और दलित सम्मान पर हमला है. अखिलेश यादव को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए.” वहीं एक अन्य कार्यकर्ता ने कहा कि सपा जानबूझकर दलित प्रतीकों का अपमान कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

    बसपा ने जताई कड़ी आपत्ति
    विवाद को और हवा तब मिली जब बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर डॉ. अंबेडकर के नाम और तस्वीरों का राजनीतिक इस्तेमाल बंद नहीं किया गया तो बसपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे. मायावती ने ट्वीट कर कहा, “डॉ. अंबेडकर की छवि से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी.”

    उधर, समाजवादी पार्टी ने पूरे विवाद को “राजनीतिक साजिश” करार दिया है. सपा प्रवक्ता का कहना है कि पोस्टर किसी आम समर्थक द्वारा लगाया गया है और पार्टी की इसमें कोई भूमिका नहीं है. उन्होंने कहा कि भाजपा और बसपा जानबूझकर इस मुद्दे को तूल दे रही हैं ताकि सपा की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके.

    यह विवाद न सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच टकराव को बढ़ा रहा है, बल्कि जातिगत भावनाओं को भी उकसा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले ऐसे मुद्दे राजनीतिक एजेंडों को धार देने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं. फिलहाल, लखनऊ में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है और पुलिस प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

  • TRF की नई साजिश बेनकाब: पहलगाम हमले के बाद कश्मीर में फिर बड़े हमले की तैयारी, अलर्ट पर आर्मी – PAHALGAM ATTACK

    TRF की नई साजिश बेनकाब: पहलगाम हमले के बाद कश्मीर में फिर बड़े हमले की तैयारी, अलर्ट पर आर्मी – PAHALGAM ATTACK

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए हिंदू पर्यटकों के नरसंहार (PAHALGAM ATTACK) के बाद पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) एक और बड़ी आतंकी साजिश की तैयारी में है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, TRF कश्मीर घाटी में किसी बड़े आतंकी हमले की योजना बना रहा है। इसके पीछे पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर के इशारों पर काम करने वाले आतंकी नेटवर्क की भूमिका मानी जा रही है। रिपोर्ट सामने आने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती की गई है। क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को भी तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    कश्मीरी पंडितों और प्रवासी मजदूरों को बनाया जा सकता है निशाना
    एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खुफिया एजेंसियों को मिले ताज़ा इनपुट्स से संकेत मिलते हैं कि आतंकवादी समूह कश्मीरी पंडितों, प्रवासी मजदूरों और यहां तक कि सुरक्षा बलों के जवानों को भी निशाना बना सकते हैं। इसके चलते भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी की जा रही है और जवानों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।

    TRF का भड़काऊ वीडियो और जिम्मेदारी से इनकार
    पिछले सप्ताह TRF ने एक वीडियो जारी कर भारतीय सुरक्षा बलों को धमकी दी थी। इसमें TRF ने घरों के ध्वस्तीकरण को लेकर हमलों की चेतावनी दी थी। हालांकि बाद में संगठन ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी से इनकार किया। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि TRF ही इस हमले के पीछे है और वह लश्कर-ए-तैयबा का ही मुखौटा संगठन है, जो पाकिस्तान की शह पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है।

    जवानों को सतर्कता के निर्देश
    इंटेलिजेंस इनपुट के बाद घाटी में तैनात सभी सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है। सभी यूनिट्स को कैजुअल मूवमेंट बंद करने और ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल से बचने का निर्देश दिया गया है। सुरक्षा बलों को कहा गया है कि वे बिना पूर्व सूचना के किसी भी स्थान पर न जाएं।

    क्या है TRF : TRF (The Resistance Front) साल 2019-20 के दौरान उभरा एक आतंकी संगठन है, जो लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी माना जाता है। यह संगठन कई आतंकी घटनाओं की जिम्मेदारी ले चुका है, खासकर कश्मीर में नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमलों के लिए कुख्यात है।

  • नेपाल सीमा से सटे जिलों में योगी सरकार का बड़ा एक्शन, अवैध कब्जों और संस्थानों पर कार्रवाई तेज- YOGI GOVERNMENT ACTION

    नेपाल सीमा से सटे जिलों में योगी सरकार का बड़ा एक्शन, अवैध कब्जों और संस्थानों पर कार्रवाई तेज- YOGI GOVERNMENT ACTION

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने नेपाल सीमा से सटे जिलों में अवैध कब्जों और बिना मान्यता संचालित धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई (yogi government action) शुरू कर दी है. सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 25 से 27 अप्रैल के बीच विशेष अभियान चलाकर कई जिलों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटवाए गए. नेपाल सीमा के 10 किलोमीटर दायरे में किसी भी तरह के अवैध निर्माण को लेकर सरकार ने साफ संदेश दिया है कि अब कोई भी अनधिकृत कब्जा या गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

    बहराइच: सरकारी जमीन से कब्जे हटाए गए
    बहराइच जिले की नानपारा तहसील के अंतर्गत भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के 10 किलोमीटर क्षेत्र में सरकारी भूमि पर 227 अवैध अतिक्रमण के मामले चिन्हित किए गए थे. इनमें से पहले से हटाए गए 63 अतिक्रमणों के अलावा 25 से 27 अप्रैल के बीच 26 और अतिक्रमण हटवाए गए. अब तक कुल 89 अवैध कब्जेदारों से जमीन को मुक्त कराया जा चुका है. राहत की बात यह रही कि यहां किसी भी अतिक्रमित स्थल पर धार्मिक या शैक्षणिक संरचना नहीं मिली.

    श्रावस्ती: अवैध मदरसों पर कार्रवाई
    श्रावस्ती जिले में बिना मान्यता के संचालित 17 मदरसों पर कार्रवाई की गई है. तहसील जमुनहा में सात और भिनगा में 10 मदरसों को वैध कागजात न होने के कारण बंद करवा दिया गया. इसके अलावा भारत-नेपाल सीमा से सटे 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र में अस्थाई और स्थाई अवैध कब्जों के 119 मामलों में भी राजस्व संहिता की धारा-67 के तहत कार्रवाई जारी है.

    सिद्धार्थनगर और महाराजगंज: धार्मिक ढांचों पर नजर
    सिद्धार्थनगर जिले के नौगढ़ तहसील क्षेत्र में पांच स्थानों पर अवैध अतिक्रमण के तहत मस्जिद और मदरसे के निर्माण की पुष्टि हुई है. उच्चाधिकारियों के निर्देश पर यहां जांच और आगे की कार्रवाई जारी है. वहीं, शोहरतगढ़ तहसील में छह स्थानों पर अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं.

    बलरामपुर: स्वतः कब्जा हटाने की पहल
    बलरामपुर जिले में सात अवैध कब्जे चिन्हित किए गए. इनमें बलरामपुर तहसील में पांच और तुलसीपुर तहसील में दो कब्जे शामिल हैं. इनमें से दो अवैध कब्जेदारों ने स्वतः कब्जा हटा लिया, जबकि बाकी मामलों में प्रशासन द्वारा राजस्व संहिता के तहत बेदखली की कार्रवाई की जा रही है.

    लखीमपुर खीरी: अवैध मस्जिद निर्माण रोका गया
    लखीमपुर खीरी जिले के तहसील पलिया के कृष्णा नगर कॉलोनी में खसरा नंबर 222 पर अनाधिकृत रूप से नमाज पढ़ी जा रही थी और मस्जिद बनाए जाने की योजना थी. प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस अवैध निर्माण को हटा दिया है. जिले के अन्य स्थानों पर भी लगातार चिन्हीकरण और कार्रवाई का सिलसिला जारी है.

    सख्ती का संदेश
    योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि नेपाल सीमा से सटे संवेदनशील इलाकों में किसी भी प्रकार के अतिक्रमण, धार्मिक या शैक्षणिक संस्थान के अवैध संचालन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सभी जिलों के प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि चिन्हित अवैध कब्जों को शीघ्रता से हटाकर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें. यह सख्ती न केवल सुरक्षा कारणों से उठाई गई है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से भी यह अभियान चलाया जा रहा है.

  • पाकिस्तान ने फिर तोड़ा संघर्ष विराम, भारतीय सेना का मुंहतोड़ जवाब – FIRING AT LOC

    पाकिस्तान ने फिर तोड़ा संघर्ष विराम, भारतीय सेना का मुंहतोड़ जवाब – FIRING AT LOC

    श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर नियंत्रण रेखा (FIRING AT LOC) पर तनाव देखने को मिला. बीती रात पाकिस्तानी सेना ने कुपवाड़ा और पुंछ जिलों के आसपास के इलाकों में छोटे हथियारों से गोलीबारी की. भारतीय सेना ने इस उकसावे का मुंहतोड़ जवाब दिया. इस घटना में किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है. अधिकारियों के अनुसार यह इस सप्ताह में संघर्ष विराम उल्लंघन की पांचवीं घटना है.

    भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी सेना ने 26-27 अप्रैल 2025 की रात तुतमारी गली और रामपुर सेक्टर के सामने के इलाकों में बिना किसी उकसावे के फायरिंग की. भारतीय जवानों ने भी तत्काल प्रभावी प्रतिक्रिया देते हुए गोलीबारी का मजबूती से सामना किया.

    https://twitter.com/nnsdigital/status/1916398020465508443

    यह घटना ऐसे समय हुई है जब घाटी में हाल ही में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद सुरक्षा बलों ने आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर दिया है. इसके बावजूद एलओसी पर तनाव बना हुआ है. सेना के एक अधिकारी ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने संयम और सतर्कता के साथ जवाबी कार्रवाई करते हुए सीमावर्ती इलाकों में स्थिति को नियंत्रण में रखा.

    इस बीच, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों ने कुलगाम जिले में संयुक्त अभियान के दौरान दो आतंकवादी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है. अधिकारियों के अनुसार, कैमोह के मतलहामा चौक थोकरपोरा में स्थापित एक नियमित जांच चौकी पर तलाशी के दौरान दो संदिग्धों को पकड़ा गया. उनकी पहचान बिलाल अहमद भट और मोहम्मद इस्माइल भट के रूप में हुई है, जो दोनों थोकरपोरा, कैमोह के निवासी हैं.

    गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से दो पिस्तौल, दो पिस्तौल मैगजीन और 25 राउंड गोला-बारूद बरामद किया गया. प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि दोनों आतंकी गतिविधियों में शामिल आतंकियों के सक्रिय सहयोगी थे और घाटी में आतंकवाद फैलाने की साजिश में शामिल थे.

    सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पूरे इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है ताकि किसी भी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके. सुरक्षा बलों का कहना है कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा.

  • सिंधु जल संधि पर भारत का बड़ा कदम: अब किशनगंगा, रतले और पकाल दुल प्रोजेक्ट्स को मिलेगी रफ्तार- Indus Waters Treaty

    सिंधु जल संधि पर भारत का बड़ा कदम: अब किशनगंगा, रतले और पकाल दुल प्रोजेक्ट्स को मिलेगी रफ्तार- Indus Waters Treaty

    नई दिल्ली: भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को ठंडे बस्ते में डालकर पाकिस्तान पर रणनीतिक बढ़त हासिल करने का रास्ता साफ कर लिया है. इस कदम से भारत को जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा, रतले और पकाल दुल जैसे प्रमुख हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स (Hydroelectric Projects) को तेजी से आगे बढ़ाने का बड़ा मौका मिला है. इन प्रोजेक्ट्स को अब केवल ऊर्जा उत्पादन के स्रोत के तौर पर नहीं, बल्कि पाकिस्तान पर दबाव बनाने के साधन के रूप में भी देखा जा रहा है.

    पाकिस्तान ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. पाकिस्तान सरकार ने इसे ‘युद्ध का ऐलान’ करार दिया है. वहीं, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के नेता बिलावल भुट्टो ने उग्र चेतावनी देते हुए कहा, “सिंधु नदी में या तो हमारा पानी बहेगा या भारत का खून.”

    पाकिस्तान पर भारत के कदम का असर
    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत के इस निर्णय का मनोवैज्ञानिक असर पाकिस्तान में पहले से दिखने लगा है. पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों पर नागरिकों के बढ़ते दबाव को लेकर चिंता बढ़ गई है, खासकर तब जब भारत पश्चिमी नदियों के जल प्रवाह को नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इससे भारत के किशनगंगा, रतले और पकाल दुल जैसे प्रोजेक्ट्स को लेकर पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय विरोध की चिंता भी कम हो गई है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि इन तीनों प्रोजेक्ट्स का सामूहिक प्रभाव भारत को पाकिस्तान के खिलाफ एक मजबूत रणनीतिक दबाव उपकरण प्रदान करेगा. हाल ही में पहलगाम में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमले के बाद भारत ने अपने रुख को काफी सख्त कर लिया है. अब पाकिस्तान की सेना की हर हरकत का खामियाजा उसके आम नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है.

    झेलम नदी का पानी मोड़ने में मिली सफलता
    भारत ने पहले ही किशनगंगा प्रोजेक्ट के तहत झेलम नदी का पानी 23 किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिये मोड़ दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2018 में जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था. उसी दिन मोदी ने पकाल दुल पावर प्रोजेक्ट का भी शिलान्यास किया था, जो 1000 मेगावाट की क्षमता के साथ जम्मू-कश्मीर का सबसे बड़ा जलविद्युत परियोजना (Hydropower Project) बनने जा रहा है. पकाल दुल प्रोजेक्ट भारत को केवल पानी के उपयोग का अधिकार नहीं देगा, बल्कि जल पर वास्तविक नियंत्रण भी प्रदान करेगा. यह प्रोजेक्ट 2026 के मध्य तक बनकर तैयार हो जाएगा.

    रतले प्रोजेक्ट से भी पाकिस्तान को चिंता
    रतले हाइड्रो प्रोजेक्ट (Ratle Hydroelectric Project) भी पाकिस्तान के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है. 850 मेगावाट क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट में पिछले साल चेनाब नदी का पानी सुरंगों के जरिये मोड़ दिया गया, जिससे बांध निर्माण का काम शुरू हो सका. पाकिस्तान ने इसके डिजाइन, विशेषकर स्पिलवे की ऊंचाई और जल स्तर को लेकर आपत्ति जताई थी, लेकिन मोदी सरकार ने 2021 में 5,282 करोड़ रुपये की लागत से इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी.

    अब भारत इस बांध का निर्माण पाकिस्तान की आपत्तियों के बावजूद तेजी से कर सकता है, जिससे पाकिस्तान की रणनीतिक कमजोरियों को और उजागर किया जा सकेगा.

    सिंधु जल संधि अब अतीत की बात
    भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी बार सिंधु जल संधि पर सालाना बैठक जून 2023 में हुई थी, जब एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल भारत आया था. तब पाकिस्तान ने किशनगंगा, रतले और पकाल दुल प्रोजेक्ट्स का विरोध करते हुए इन्हें संधि का उल्लंघन बताया था. लेकिन अब 1960 में वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में हुई वह संधि, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति अयूब खान के बीच संपन्न हुई थी, इतिहास बन चुकी है.

    भारत ने अपनी जलसंपदा पर नियंत्रण के जरिए पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव बढ़ाने की नीति को स्पष्ट कर दिया है. आने वाले वर्षों में किशनगंगा, रतले और पकाल दुल जैसे प्रोजेक्ट्स भारत के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के साथ-साथ पाकिस्तान के लिए एक स्थायी चुनौती भी पेश करेंगे.

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  • सिंधु जल संधि पर भारत-पाकिस्तान में बढ़ा तनाव, पाकिस्तान ने दी ‘पूरी ताकत से जवाब’ की चेतावनी- India Pakistan conflict 2025

    सिंधु जल संधि पर भारत-पाकिस्तान में बढ़ा तनाव, पाकिस्तान ने दी ‘पूरी ताकत से जवाब’ की चेतावनी- India Pakistan conflict 2025

    नई दिल्लीः पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों तनाव (India Pakistan conflict 2025) बढ़ता जा रहा है. इस हमले के बाद भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को खत्म करने का ऐलान कर दिया है, जिससे पाकिस्तान बौखला गया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान के पानी को कम करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश का पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।

    प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा, “हम किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। किसी को इस बारे में कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। यह देश 240 मिलियन लोगों का है और हम अपने बहादुर सशस्त्र बलों के पीछे खड़े हैं। हमारा संदेश पूरी तरह साफ और दो टूक होना चाहिए।”

    शहबाज शरीफ ने आगे कहा कि शांति पाकिस्तान की प्राथमिकता है, लेकिन अपनी अखंडता और सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम किसी भी तटस्थ और संवाद प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।”

    सिंधु जल संधि पर चेतावनी
    सिंधु जल संधि को लेकर शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने या मोड़ने की किसी भी कोशिश का पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा। उनका कहना था कि पाकिस्तान अपने जल संसाधनों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

    बिलावल भुट्टो का उग्र बयान
    इस बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भी इस मुद्दे पर उग्र बयान दिया है। सिंधु नदी के किनारे सखर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “सिंधु दरिया में या तो अब पानी बहेगा, या उनका खून बहेगा जो हमारी हिस्सेदारी छीनना चाहता है। सिंधु दरिया हमारा था, है और रहेगा।”

    बिलावल ने आगे कहा कि पाकिस्तान की जनता बहादुर और गैरतमंद है। “हमारे दुश्मन यह न सोचें कि उनकी जनसंख्या ज्यादा है तो वे पानी के अधिकार भी तय करेंगे। पाकिस्तान की फौज और अवाम हर चुनौती का डटकर मुकाबला करने को तैयार हैं,” उन्होंने कहा।

    https://twitter.com/BBhuttoZardari/status/1900510986336886960

    ‘दरिया पर डाका मंज़ूर नहीं’
    बिलावल भुट्टो ने सिंधु नदी को पूरे पाकिस्तान की सांझी विरासत बताते हुए देश की जनता से एकजुटता की अपील की। उन्होंने कहा, “दुश्मन की नजरें हमारे पानी पर हैं। पूरे पाकिस्तान को मिलकर इसका जवाब देना होगा। हम दुनिया को सिंधु दरिया का पैगाम देंगे कि दरिया पर डाका मंजूर नहीं।”

    भारत का रुख
    भारत ने पहलगाम हमले के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि वह सिंधु जल संधि की समीक्षा करेगा और यदि आवश्यक हुआ तो इसे रद्द भी कर सकता है। भारत का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा और जल संसाधनों के संरक्षण के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।

    आपको बता दें कि सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता से हुई थी, जो अब तक दोनों देशों के जल बंटवारे का आधार रही है। इस संधि के तहत भारत को व्यास, रावी और सतलुज नदियों के पानी पर अधिकार मिला था, जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों का पानी मिला था। अब इस संधि पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।

  • फर्रुखाबाद: पहलगाम आतंकी हमले में 26 मौतों पर व्यापारियों में आक्रोश, पाकिस्तान के खिलाफ उग्र प्रदर्शन- PAHALGAM TERROR ATTACK

    फर्रुखाबाद: पहलगाम आतंकी हमले में 26 मौतों पर व्यापारियों में आक्रोश, पाकिस्तान के खिलाफ उग्र प्रदर्शन- PAHALGAM TERROR ATTACK

    फर्रुखाबाद: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले (PAHALGAM TERROR ATTACK) में 26 निर्दोष लोगों की मौत से पूरे देश में रोष फैला हुआ है. इस घटना के विरोध में फर्रुखाबाद के व्यापारियों ने आज बाजार बंद करके पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए और सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया. व्यापार मंडल के पदाधिकारियों के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन में पाकिस्तान का पुतला फूंककर आतंकवाद की कड़ी निंदा की गई.

    व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने इस हमले को कायराना करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन कर निर्दोषों की जान ले रहा है, जिसे भारतवासी कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे. विरोध प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे गूंजते रहे और जगह-जगह पुतले फूंके गए. सभी प्रमुख बाजारों में दुकानों के शटर डाउन रहे. व्यापारियों ने रैली निकाल कर लोगों को एकजुट किया और सरकार से पाकिस्तान के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को संरक्षण देता रहेगा, तब तक भारत को सख्त नीति अपनानी होगी.

    विरोध प्रदर्शन में शहर के छोटे-बड़े सभी व्यापारी संगठनों ने भाग लिया. बाजारों में ताले लटकते रहे और हर ओर पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा दिखाई दिया. इस एकता ने यह साबित कर दिया कि देश की अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. व्यापार मंडल अध्यक्ष ने कहा, “हमारा प्रदर्शन केवल संवेदना नहीं, बल्कि चेतावनी है कि अगर पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो भारत की जनता चुप नहीं बैठेगी.”

    पुलिस और प्रशासन ने भी प्रदर्शन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित बनाए रखने में सहयोग दिया. पूरे जिले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. यह विरोध प्रदर्शन केवल फर्रुखाबाद ही नहीं, बल्कि पूरे देश में व्याप्त जनक्रोध का प्रतीक है. भारत अब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई चाहता है और यह संदेश पाकिस्तान तक पहुंच चुका है.

  • यूपी बोर्ड रिजल्ट 2025: हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परिणाम आज दोपहर 12:30 बजे होगा घोषित- up board result 2025

    यूपी बोर्ड रिजल्ट 2025: हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परिणाम आज दोपहर 12:30 बजे होगा घोषित- up board result 2025

    प्रयागराज: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP BOARD) द्वारा आयोजित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2025 का परिणाम (up board result 2025) आज 25 अप्रैल को दोपहर 12:30 बजे घोषित किया जाएगा। परीक्षा परिणाम की घोषणा प्रयागराज स्थित यूपी बोर्ड मुख्यालय से की जाएगी। इस वर्ष परीक्षा में शामिल हुए 52 लाख विद्यार्थियों को बेसब्री से अपने रिजल्ट का इंतजार है।

    ऐसे चेक करें यूपी बोर्ड का रिजल्ट
    विद्यार्थी अपना परीक्षा परिणाम यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइटों पर जाकर देख सकते हैं:
    www.upmsp.edu.in

    रिजल्ट जारी होने के बाद, विद्यार्थियों की डिजिटल मार्कशीट भी उपलब्ध कराई जाएगी जिसे DigiLocker के माध्यम से डाउनलोड किया जा सकेगा। इसके लिए विद्यार्थियों को अपने मोबाइल नंबर से पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा और फिर लॉगइन कर डिजिटल मार्कशीट प्राप्त करनी होगी।

    इतने छात्रों ने दी परीक्षा
    यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 24 फरवरी 2025 से 12 मार्च 2025 के बीच आयोजित की गई थी। इस बार कुल 54 लाख छात्रों ने फॉर्म भरा था, जिनमें से 52 लाख परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। हाईस्कूल के लिए 27,32,216 और इंटरमीडिएट के लिए 27,05,017 परीक्षार्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 3,02,508 विद्यार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी।

    3 करोड़ कॉपियों का मूल्यांकन
    यूपी बोर्ड के सचिव भगवती प्रसाद के अनुसार, प्रदेश भर में बनाए गए 261 मूल्यांकन केंद्रों पर 19 मार्च से 3 अप्रैल तक कॉपियों का मूल्यांकन किया गया। हाईस्कूल की 1,63,22,248 और इंटरमीडिएट की 1,33,71,607 कॉपियों का मूल्यांकन किया गया। कुल मिलाकर लगभग 2 करोड़ 96 लाख 93 हजार 855 उत्तरपुस्तिकाएं जांची गईं। इसके लिए कुल 1,48,667 परीक्षकों को जिम्मेदारी दी गई थी।

    पिछले 4 सालों में कब आए रिजल्ट?

    वर्ष तिथि
    2024 20 अप्रैल
    2023 25 अप्रैल
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  • कानपुर में राजकीय सम्मान के साथ शुभम द्विवेदी का अंतिम संस्कार, सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि- Pahalgam terrorist attack

    कानपुर में राजकीय सम्मान के साथ शुभम द्विवेदी का अंतिम संस्कार, सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि- Pahalgam terrorist attack

    कानपुर। पहलगाम में आतंकी हमले में मृत शुभम द्विवेदी (Shubham Dwivedi) का कानपुर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। ड्योढ़ी घाट पर हजारों की भीड़ मौजूद थी। इसके पहले उनके पैतृक आवास पर लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। इस मौके पर पाकिस्तान के खिलाफ लोगों ने जमकर नारेबाजी की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गांव पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया.

    सीएम योगी ने कहा कि आतंकियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और डबल इंजन की सरकार मुंहतोड़ जवाब देगी. मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शुभम की जान चली गई. शुभम की हाल ही में दो महीने पहले शादी हुई थी.

    बाजार रहे बंद, व्यापारियों ने जताया शोक
    कानपुर के व्यापारियों ने गुरुवार को दोपहर दो बजे तक अपनी दुकानों को बंद रखकर शुभम को श्रद्धांजलि दी. नवीन मार्केट, नया गंज, बिरहाना रोड, सीसामऊ सहित पूरे शहर के कई इलाकों में बाजार पूरी तरह बंद रहे. व्यापारी नेता गुरुजिंदर सिंह और सुनील बजाज ने शुभम की मौत को व्यापार समुदाय के लिए गहरी क्षति बताया.

    राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
    महाराजपुर थाना क्षेत्र के ड्योढ़ी घाट पर शुभम द्विवेदी का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया. अंतिम संस्कार में पुलिस प्रशासन के अधिकारी, राजनीतिक नेता, रिश्तेदार और स्थानीय लोग मौजूद रहे. अंतिम यात्रा के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा.

    गुस्से और ग़म में डूबा गांव
    शुभम की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा. पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लोग नम आंखों से शुभम को अंतिम विदाई दे रहे थे. उनकी पत्नी ईशान्या और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा.

  • वाराणसी में प्रधानमंत्री आवास योजना से 39,400 लोगों को मिला अपना घर- PM AWAS YOJANA IN VARANSI

    वाराणसी में प्रधानमंत्री आवास योजना से 39,400 लोगों को मिला अपना घर- PM AWAS YOJANA IN VARANSI

    वाराणसी, उत्तर प्रदेश: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (PM AWAS YOJANA) शहरी के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अब तक 39,400 जरूरतमंदों को आवास मिल चुके हैं। इस योजना पर अब तक सरकार द्वारा कुल 985 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। योजना का उद्देश्य शहरी गरीबों को पक्का और सुरक्षित घर उपलब्ध कराना है।

    जिला नगरीय विकास अभिकरण (DUDA) की परियोजना अधिकारी निधि बाजपेई ने बताया कि पीएम आवास योजना अब अपने द्वितीय चरण (PMAY 2.0) में प्रवेश कर चुकी है, जिसमें BLC (Beneficiary Led Construction) मॉडल के तहत आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। अभी तक 36,000 नए आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से 3126 आवेदनों को स्वीकृति मिल चुकी है।

    कौन उठा सकता है योजना का लाभ?
    इस योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम हो और जिनके पास भारत में कहीं भी पक्का मकान न हो। एक परिवार में पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे शामिल होते हैं। योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को 2.50 लाख रुपये की तीन किस्तों में सहायता दी जाती है।

    अतिरिक्त सहायता व वरीयता समूह
    सरकार ने योजना में कुछ विशेष वर्गों को अतिरिक्त प्राथमिकता और लाभ देने की घोषणा की है:-

    वरिष्ठ नागरिकों को 30,000 रुपये अतिरिक्त सहायता

    विधवा या तलाकशुदा महिलाओं को 20,000 रुपये अतिरिक्त

    12 माह या उससे कम समय में मकान पूरा करने वाले लाभार्थियों को 10,000 रुपये का पुरस्कार मिलेगा।

    इन वर्गों को वरीयता:
    विधवा, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, ट्रांसजेंडर्स
    सफाईकर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, कंस्ट्रक्शन वर्कर्स
    पीएम स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स
    पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थी
    स्लम क्षेत्रों में रहने वाले निवासी

    पात्रता की जांच जारी
    परियोजना अधिकारी के अनुसार अभी बाकी आवेदनों की जांच प्रक्रिया जारी है और जल्द ही पात्र लोगों को स्वीकृति पत्र वितरित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य है कि 2025 के अंत तक सभी पात्र शहरी गरीबों को आवास की सुविधा मिल जाए।

    डिजिटल पोर्टल से आवेदन
    योजना के लिए आवेदन pmaymis.gov.in पर किए जा सकते हैं। इसके अलावा नगर निगम कार्यालय में जाकर भी जानकारी और आवेदन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

    सरकार की पहल और भविष्य की योजना
    प्रधानमंत्री आवास योजना का पहला चरण वाराणसी में काफी सफल रहा, जिसमें हजारों परिवारों को उनके सपनों का घर मिला। अब दूसरे चरण में सरकार का लक्ष्य है कि नए लाभार्थियों को और तेजी से राहत दी जाए। निधि बाजपेई ने बताया कि यह योजना गरीबी उन्मूलन और सामाजिक समावेशन की दिशा में बड़ा कदम है।