वाराणसी: काशी के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले मणिकर्णिका घाट को लेकर फैले विवाद ने अब सियासी रूप ले लिया है। घाट पर मूर्तियों को तोड़े जाने की अफवाह और कथित फेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्यसभा सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेता पप्पू यादव समेत कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।पुलिस ने सभी नामजद आरोपियों को 72 घंटे के भीतर बयान दर्ज कराने का नोटिस जारी किया है। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि यदि तय समय सीमा में बयान दर्ज नहीं कराया गया, तो आगे की कानूनी कार्रवाई और सख्त की जा सकती है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था कथित वीडियो
दरअसल, मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण कार्य को लेकर कुछ वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें दावा किया गया कि घाट पर प्राचीन मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है। इन वीडियो के सामने आने के बाद धार्मिक भावनाएं भड़कने लगीं और माहौल तनावपूर्ण हो गया।जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि वायरल वीडियो भ्रामक और तथ्यों से परे हैं। पुलिस के अनुसार, इन वीडियो का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना और जनता को गुमराह करना था।

नेताओं की भूमिका की हो रही जांच
पुलिस का कहना है कि जांच में यह सामने आया है कि कुछ राजनीतिक नेताओं ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए सोशल मीडिया पर इन वीडियो और दावों को साझा किया, जिससे अफवाहों को और बल मिला। इसी आधार पर आईटी एक्ट और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।वाराणसी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या बड़ा राजनीतिक चेहरा। अफवाह फैलाने और धार्मिक भावनाएं भड़काने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।
प्रशासन ने की शांति बनाए रखने की अपील
इस पूरे मामले के बीच जिला प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी या वीडियो पर विश्वास न करें और अफवाहों से दूर रहें। प्रशासन का कहना है कि मणिकर्णिका घाट पर हो रहा कार्य पूरी तरह नियमों और परंपराओं के अनुरूप है।पुलिस अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। मणिकर्णिका घाट विवाद अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि कानूनी और राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।
























