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Category: वाराणसी

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  • मणिकर्णिका घाट विवाद: सांसद संजय सिंह और पप्पू यादव की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस का 72 घंटे का अल्टीमेटम

    मणिकर्णिका घाट विवाद: सांसद संजय सिंह और पप्पू यादव की बढ़ी मुश्किलें, पुलिस का 72 घंटे का अल्टीमेटम

    वाराणसी: काशी के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले मणिकर्णिका घाट को लेकर फैले विवाद ने अब सियासी रूप ले लिया है। घाट पर मूर्तियों को तोड़े जाने की अफवाह और कथित फेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्यसभा सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेता पप्पू यादव समेत कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।पुलिस ने सभी नामजद आरोपियों को 72 घंटे के भीतर बयान दर्ज कराने का नोटिस जारी किया है। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि यदि तय समय सीमा में बयान दर्ज नहीं कराया गया, तो आगे की कानूनी कार्रवाई और सख्त की जा सकती है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था कथित वीडियो

    दरअसल, मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण कार्य को लेकर कुछ वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनमें दावा किया गया कि घाट पर प्राचीन मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है। इन वीडियो के सामने आने के बाद धार्मिक भावनाएं भड़कने लगीं और माहौल तनावपूर्ण हो गया।जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि वायरल वीडियो भ्रामक और तथ्यों से परे हैं। पुलिस के अनुसार, इन वीडियो का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना और जनता को गुमराह करना था।

    नेताओं की भूमिका की हो रही जांच

    पुलिस का कहना है कि जांच में यह सामने आया है कि कुछ राजनीतिक नेताओं ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए सोशल मीडिया पर इन वीडियो और दावों को साझा किया, जिससे अफवाहों को और बल मिला। इसी आधार पर आईटी एक्ट और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।वाराणसी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या बड़ा राजनीतिक चेहरा। अफवाह फैलाने और धार्मिक भावनाएं भड़काने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।

    प्रशासन ने की शांति बनाए रखने की अपील

    इस पूरे मामले के बीच जिला प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी या वीडियो पर विश्वास न करें और अफवाहों से दूर रहें। प्रशासन का कहना है कि मणिकर्णिका घाट पर हो रहा कार्य पूरी तरह नियमों और परंपराओं के अनुरूप है।पुलिस अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। मणिकर्णिका घाट विवाद अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि कानूनी और राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।

  • VaranasiNews: इंग्लिशिया लाइन किसान मंडी में नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, अवैध दुकानें सील

    VaranasiNews: इंग्लिशिया लाइन किसान मंडी में नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, अवैध दुकानें सील

    VaranasiNews: संवाददाता मनीष पटेल वाराणसी: जिले की सबसे बड़ी किसान मंडी के रूप में जानी जाने वाली इंग्लिशिया लाइन स्थित फुल मंडी में नगर निगम ने अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कई दुकानों को सील कर दिया।

    यह कार्रवाई किसानों को अनावश्यक कर वसूली और शोषण से राहत दिलाने के उद्देश्य से की गई है।नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, फुल मंडी में लंबे समय से कुछ ठेकेदार अवैध रूप से दुकानों पर कब्जा जमाए हुए थे।

    इन कब्जों के कारण न केवल मंडी की व्यवस्था प्रभावित हो रही थी, बल्कि किसानों से जबरन वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने पहले ही मामले की सुनवाई कर संबंधित ठेकेदारों को दुकानों को खाली करने के निर्देश दिए थे।

    नगर निगम की चेतावनी के बाद भी नहीं हटे कब्जे

    कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद नगर निगम एसडीएम सुनील यादव ने मीडिया से बातचीत में बताया कि संबंधित ठेकेदारों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए थे कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अवैध कब्जा हटा लें। इसके बावजूद जब आदेशों की अवहेलना की गई, तो नगर निगम को विधिसम्मत कार्रवाई करनी पड़ी।उन्होंने बताया कि शुक्रवार को नगर निगम की टीम पुलिस बल के साथ फुल मंडी पहुंची और चिन्हित अवैध दुकानों को सील कर दिया गया। यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।

    कार्रवाई के दौरान हंगामा, पुलिस ने संभाला मोर्चा

    सीलिंग की कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने विरोध करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने की कोशिश की। हालात बिगड़ते देख मौके पर मौजूद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को हिरासत में लिया और उन्हें सिगरा थाने भेज दिया गया।नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि किसी भी कीमत पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी इस तरह की जांच और कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

    किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

    प्रशासन का मानना है कि इस कार्रवाई से मंडी में पारदर्शिता और व्यवस्था बेहतर होगी। अवैध कब्जे हटने से किसानों को राहत मिलेगी और उनसे होने वाली अतिरिक्त कर वसूली पर रोक लगेगी। साथ ही मंडी का संचालन नियमों के अनुरूप किया जा सकेगा।नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि आगे भी ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी और सरकारी संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाएगा।

  • CM Yogi Varanasi Statement: वाराणसी में CM योगी का विपक्ष पर हमला, बोले– काशी का विकास कांग्रेस को नहीं पच रहा

    CM Yogi Varanasi Statement: वाराणसी में CM योगी का विपक्ष पर हमला, बोले– काशी का विकास कांग्रेस को नहीं पच रहा

    CM Yogi Varanasi Statement: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वाराणसी पहुंचे। यहां उन्होंने विपक्षी दलों, खासतौर पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि काशी में हो रहे अभूतपूर्व विकास कार्य कांग्रेस को पसंद नहीं आ रहे हैं, इसलिए वह लगातार भ्रामक और झूठे प्रचार के जरिए देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।

    सीएम योगी ने यह बातें वाराणसी स्थित सर्किट हाउस में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर काशी को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी आज विकास की एक नई गाथा लिख रही है। उन्होंने बताया कि वाराणसी में अब तक 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं। इन परियोजनाओं से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।

    सीएम योगी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके निर्माण के समय कुछ लोगों ने खंडित प्रतिमाओं को दिखाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि उस समय भी कांग्रेस और उसके समर्थकों ने झूठा प्रचार किया, लेकिन आज सच्चाई सबके सामने है। कॉरिडोर बनने के बाद प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या केवल 10 से 15 हजार तक सीमित थी।

    मुख्यमंत्री ने मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण और विकास कार्यों को लेकर भी विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि घाट के विकास को लेकर अनर्गल बयानबाजी की जा रही है, जबकि काशी की जनता भली-भांति जानती है कि सरकार विकास और विरासत दोनों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी ऐतिहासिक या धार्मिक परंपरा से छेड़छाड़ नहीं की जा रही है।

    सीएम योगी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग भ्रामक जानकारी फैलाकर जनता को गुमराह करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार अपने विकास एजेंडे से पीछे हटने वाली नहीं है।

    वहीं मुख्यमंत्री योगी के इन बयानों पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि क्या ये बातें काशी के घाट पर जाकर काशीवासियों की आंखों में आंखें डालकर कही जा सकती हैं। उन्होंने इसे सवाल नहीं, बल्कि चुनौती बताया।

    कुल मिलाकर, वाराणसी में चल रहे विकास कार्यों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। जहां सरकार इसे विकास और विरासत का संतुलन बता रही है, वहीं विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में और गर्माने के संकेत दे रहा है।

  • CM Yogi Varanasi Visit: बुलडोजर एक्शन के बीच CM योगी काशी पहुंचे, विश्वनाथ और काल-भैरव मंदिर में की पूजा

    CM Yogi Varanasi Visit: बुलडोजर एक्शन के बीच CM योगी काशी पहुंचे, विश्वनाथ और काल-भैरव मंदिर में की पूजा

    CM Yogi Varanasi Visit: वाराणसी (उत्तर प्रदेश ) वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनरुद्धार कार्य के दौरान ऐतिहासिक चबूतरे और अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को बुलडोजर से हटाए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी पहुंचे और उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर तथा काल-भैरव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की।

    मणिकर्णिका घाट विवाद क्या है?

    काशी पुनर्विकास परियोजना के तहत मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में सौंदर्यीकरण और पुनरुद्धार कार्य चल रहा है। इसी दौरान घाट पर स्थित एक पुराना ऐतिहासिक चबूतरा और अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा हटाए जाने का वीडियो सामने आया, जिसके बाद विरोध शुरू हो गया।स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना पर्याप्त सूचना और सहमति के यह कार्रवाई की गई, जिससे धार्मिक और ऐतिहासिक भावनाएं आहत हुई हैं।

    मेयर और विधायक की सफाई

    विवाद बढ़ने पर वाराणसी के मेयर और क्षेत्रीय विधायक स्वयं मणिकर्णिका घाट पहुंचे। उन्होंने कहा कियह कार्रवाई पुनरुद्धार योजना का हिस्सा है किसी भी ऐतिहासिक विरासत को नष्ट करने का उद्देश्य नहीं हैसभी कार्य विशेषज्ञों और प्रशासनिक अनुमति के साथ किए जा रहे हैं प्रशासन का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद घाट की ऐतिहासिक गरिमा और बेहतर रूप में वापसी होगी।

    CM योगी का काशी दौरा, सियासी मायने

    विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काशी पहुंचना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन काल-भैरव मंदिर में विशेष पूजा अधिकारियों से परियोजना की स्थिति की जानकारी ली हालांकि, मणिकर्णिका घाट विवाद पर सीएम योगी की ओर से कोई आधिकारिक बयान फिलहाल सामने नहीं आया है।

    प्रशासन पर टिकी निगाहें

    स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि मणिकर्णिका घाट से जुड़े सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष समीक्षा हो ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए भविष्य में किसी भी कार्रवाई से पहले जनभावनाओं का सम्मान किया जाए प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की आंतरिक समीक्षा की जा रही है।

  • वाराणसी: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का बड़ा बयान, मनरेगा का नाम बदलने पर महात्मा गांधी का अपमान

    वाराणसी: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का बड़ा बयान, मनरेगा का नाम बदलने पर महात्मा गांधी का अपमान

    रिपोर्टर – मनीष पटेल वाराणसी (उत्तर प्रदेश)। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मनरेगा योजना के नाम बदलने को लेकर भाजपा सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना का नाम ‘जी ग्राम जी’ कर दिया गया है, जो कि महात्मा गांधी का अपमान है।अजय राय ने बताया कि मनरेगा योजना का पुराना नाम महात्मा गांधी से जुड़ा था और इसके माध्यम से मजदूरों को रोजगार मिलता था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने योजना का नाम बदलकर देश के जनक महात्मा गांधी का अपमान किया है।

    मनरेगा योजना का विरोध

    अजय राय के अनुसार, कांग्रेस ने देशभर में उपवास और विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मजदूरों के अधिकारों को नजरअंदाज किया है और महीने से मजदूरों को मनरेगा में काम नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है।“हमने मनरेगा का नाम महात्मा गांधी से रखा था, जिन्होंने देश की आज़ादी दिलाई। मोदी सरकार ने इसे बदलकर जी ग्राम जी कर दिया है। यह पूरी तरह से महात्मा गांधी का अपमान है। आज हम इसका विरोध करते हुए उपवास कर रहे हैं,” अजय राय ने कहा।

    प्रियंका गांधी का समर्थन

    अजय राय ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रियंका जी का कल जन्मदिन पूरे देश में मनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रियंका जी जहाँ चाहें वहाँ जा सकती हैं और उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ने का काम किया जाएगा।अजय राय ने कहा, “प्रियंका जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश, बंगाल, केरल और अन्य राज्यों में चुनाव लड़ा जाएगा। उनके नेतृत्व में संगठन मजबूत हो रहा है और जनता तक कांग्रेस की आवाज़ पहुंचेगी।”

    आगामी रैली का ऐलान

    अजय राय ने वाराणसी में 8 फरवरी को बड़ी रैली करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि रैली में कांग्रेस कार्यकर्ता और जनता बड़ी संख्या में शामिल होंगी। रैली का उद्देश्य कांग्रेस की नीतियों और महात्मा गांधी की याद को लोगों तक पहुँचाना है।कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बयान ने मनरेगा योजना के नाम बदलने को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अजय राय ने इसे महात्मा गांधी के अपमान के रूप में पेश किया और भाजपा सरकार पर श्रम कानूनों और मजदूर कल्याण की अनदेखी का आरोप लगाया।वाराणसी और पूरे उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे पर आगे भी बहस जारी रहने की संभावना है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वे महात्मा गांधी के नाम और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार आंदोलन करते रहेंगे।

  • वाराणसी दालमंडी में ध्वस्तीकरण शुरू,150 पुलिसकर्मियों की भारी तैनाती

    वाराणसी दालमंडी में ध्वस्तीकरण शुरू,150 पुलिसकर्मियों की भारी तैनाती

    रिपोर्ट: मनीष पटेल वाराणसी के व्यस्ततम इलाकों में शामिल दाल मंडी गली के चौड़ीकरण को लेकर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा 5 जनवरी तक दिया गया अल्टीमेटम समाप्त होने के बाद बुधवार को प्रशासन भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा।

    150 पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचा प्रशासन

    ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान एडीएम सिटी, एसीपी सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए तीन थानों की पुलिस के करीब 150 जवान तैनात किए गए हैं। इसके अलावा पीएससी और पैरामिलिट्री फोर्स के लगभग 100 जवान रिजर्व में रखे गए हैं।

    दूसरे चरण में 7वां मकान गिराया गया

    प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के दूसरे चरण में बुधवार को सातवें मकान को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई। इससे पहले नवंबर महीने में पहले चरण के तहत 6 मकान गिराए जा चुके हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, दूसरे चरण में कुल तीन मकानों को गिराया जाना प्रस्तावित है

    हथौड़ा फोर्स देख नहीं कर सके विरोध

    ध्वस्तीकरण के दौरान पूरी दालमंडी गली में बैरिकेडिंग कर दी गई थी। भारी पुलिस फोर्स और हथौड़ा दस्ते को देखकर दुकानदारों ने विरोध करने की कोशिश तो की, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी थी कि कोई खुलकर विरोध नहीं कर सका। पूरे इलाके में लगातार निगरानी रखी जा रही है।

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    कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर

    प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी प्रकार की भीड़ या अव्यवस्था से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

  • वाराणसी में कमिश्नर के वाहन के सामने महिलाओं का धरना, जमीन विवाद का मामला

    वाराणसी में कमिश्नर के वाहन के सामने महिलाओं का धरना, जमीन विवाद का मामला

    संवाददाता मनीष पटेल वाराणसी में उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई जब कुछ महिलाएं पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के कार्यालय के बाहर उनके वाहन के सामने धरने पर बैठ गईं। महिलाओं का आरोप था कि चोलापुर थाने में जमीन विवाद की शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही, जिससे परेशान होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।कार्यालय पुलिस आयुक्त के गेट पर धरना देख कैंट पुलिस महिलाओं को समझाकर हटाने का प्रयास कर रही थी। इसी दौरान पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल मौके पर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए उन्होंने वाहन से उतरकर स्वयं महिलाओं से बातचीत की और उनकी समस्या को गंभीरता से सुना। इसके बाद पुलिस आयुक्त ने सभी महिलाओं को अपने कार्यालय में बुलाया।

    चोलापुर थाने पर सुनवाई न होने का आरोप

    धरने पर बैठी महिलाओं ने बताया कि उनकी जमीन उनकी सास धनों देवी के नाम दर्ज है, लेकिन धनंजय यादव और उसके परिवार के लोग आए दिन उनकी जमीन पर आकर जबरन कब्जा करने का प्रयास करते हैं। महिलाओं का आरोप है कि उन्हें धमकाया जाता है और मारपीट की जाती है।महिलाओं ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में चोलापुर थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब कथित आरोपियों को पता चला कि महिलाएं थाने गई हैं, तो वे उनके घर पर चढ़ आए और बच्चों व पुरुषों के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की।

    पुलिस आयुक्त ने लिया संज्ञान

    थाने से न्याय न मिलने पर महिलाएं सीधे वाराणसी पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने महिलाओं की पूरी बात सुनी और मामले को गंभीर बताया।उन्होंने महिलाओं को आश्वासन दिया कि चोलापुर थाने को इस मामले में निर्देश दे दिए गए हैं। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर सुनवाई और कार्रवाई नहीं होती है, तो महिलाएं दोबारा उनसे संपर्क करें

    एक सप्ताह में कार्रवाई का भरोसा

    पुलिस आयुक्त के आश्वासन के बाद महिलाओं ने धरना समाप्त किया। प्रशासन की ओर से यह संदेश दिया गया कि जमीन विवाद जैसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पीड़ितों को न्याय दिलाया जाएगा।यह मामला एक बार फिर स्थानीय थानों की कार्यप्रणाली और आम नागरिकों की सुनवाई को लेकर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन के निर्देशों के बाद चोलापुर थाना इस विवाद में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।

  • काल भैरव–काशी विश्वनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की पूजा-अर्चना

    काल भैरव–काशी विश्वनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की पूजा-अर्चना

    वाराणसी।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान काशी की आध्यात्मिक परंपरा के अनुसार काल भैरव मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम में विधिवत पूजा-अर्चना की। सीएम योगी ने मंदिर परिसर में दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।

    सुबह काल भैरव मंदिर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने बाबा काल भैरव का आशीर्वाद लिया। इसके बाद वे काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे, जहां उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा विश्वनाथ की पूजा की। इस दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम रहे और श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु रूप से जारी रही।

    मुख्यमंत्री का यह दौरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के बाद से वाराणसी देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है। सीएम योगी का नियमित रूप से काशी आना उनकी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जुड़ाव को दर्शाता है।

  • वाराणसी कफ सिरप मामले में आरोपी शुभम जायसवाल की 38 करोड़ की संपत्ति हो सकती है जब्त

    वाराणसी कफ सिरप मामले में आरोपी शुभम जायसवाल की 38 करोड़ की संपत्ति हो सकती है जब्त

    वाराणसी के बहुचर्चित कफ सिरप मामले में फरार आरोपी शुभम जायसवाल की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कोर्ट के निर्देश पर शुभम जायसवाल की करीब 38 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। अदालत ने आरोपी को एक सप्ताह के भीतर अपनी चल-अचल संपत्तियों का पूरा विवरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

    एक हफ्ते में देना होगा संपत्ति का विवरण

    जानकारी के अनुसार, यदि शुभम जायसवाल तय समय सीमा में संपत्ति का विवरण देने में विफल रहता है, तो कोर्ट उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए संपत्ति जब्ती का आदेश जारी कर सकता है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी ने अवैध कफ सिरप कारोबार से भारी संपत्ति अर्जित की है।

    50 हजार रुपये का इनाम घोषित

    शुभम जायसवाल फिलहाल फरार चल रहा है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उस पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया है। यूपी पुलिस की कई टीमें लगातार उसकी तलाश में दबिश दे रही हैं, लेकिन अब तक वह कानून की पकड़ से बाहर है।

    कफ सिरप कांड में अहम आरोपी

    गौरतलब है कि वाराणसी कफ सिरप मामला पूरे देश में सुर्खियों में रहा है। इस मामले में अवैध और नकली कफ सिरप के जरिए नशीले पदार्थों की सप्लाई का आरोप है। शुभम जायसवाल को इस नेटवर्क का अहम कड़ी माना जा रहा है।फिलहाल कोर्ट की सख्ती और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आने वाले दिनों में आरोपी की गिरफ्तारी और संपत्ति को लेकर बड़ा अपडेट सामने आ सकता है।

  • कड़ाके की ठंड के बावजूद आस्था अडिग, शीतलहर में भी लोग कर रहे हैं गंगा स्नान

    कड़ाके की ठंड के बावजूद आस्था अडिग, शीतलहर में भी लोग कर रहे हैं गंगा स्नान

    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में इन दिनों कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप जारी है। सुबह के समय घना कोहरा और सर्द हवाएं लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं देखने को मिल रही है। गंगा नगरी काशी के प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट से सामने आए वीडियो और तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही हैं कि ठंड चाहे जितनी भी हो, आस्था उससे कहीं ज्यादा मजबूत है।

    शीतलहर के बीच तड़के सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंच रहे हैं और आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। ठंडे पानी में स्नान करते हुए श्रद्धालु “हर-हर गंगे” और “हर-हर महादेव” के जयकारे लगाते नजर आ रहे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि गंगा स्नान से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि शरीर और मन दोनों को शुद्धता मिलती है। विशेष रूप से माघ मास और शीत ऋतु में गंगा स्नान का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

    दशाश्वमेध घाट पर स्नान करने पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने बताया कि भले ही ठंड बहुत ज्यादा है, लेकिन गंगा में डुबकी लगाने के बाद एक अलग तरह की शांति और ऊर्जा महसूस होती है। कुछ बुजुर्ग श्रद्धालुओं का कहना है कि वे हर साल सर्दी के मौसम में भी नियमित रूप से गंगा स्नान करते हैं, क्योंकि यह उनकी आस्था और परंपरा का हिस्सा है।

    प्रशासन और स्थानीय नगर निगम की ओर से घाटों पर साफ-सफाई और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। ठंड को देखते हुए पुलिस और स्वयंसेवक श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके। इसके साथ ही घाटों पर अलाव और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था भी की गई है।

    वाराणसी में गंगा स्नान का यह दृश्य एक बार फिर यह साबित करता है कि काशी में आस्था मौसम की मोहताज नहीं होती। चाहे भीषण गर्मी हो या कड़ाके की ठंड, श्रद्धालुओं का विश्वास गंगा मां में अटूट बना रहता है। शीतलहर के बीच गंगा घाटों पर उमड़ी यह भीड़ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जीवंत तस्वीर भी पेश करती है।