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अर्द्धसैनिक बलों की 574 कंपनियां, रेड कॉरिडोर पर प्रहार, 29 टॉप नक्सल कमांडर्स का ऐसे हुआ खात्मा

29 टॉप नक्सल कमांडर्स

2019 के बाद से देश में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने निर्णायक मोड़ ले लिया है। सरकार के अनुसार, अर्द्धसैनिक बलों की 574 कंपनियों को रेड कॉरिडोर इलाकों में तैनात कर व्यापक अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 29 टॉप नक्सल कमांडर्स का खात्मा किया जा चुका है। लोकसभा में दी गई इस जानकारी से साफ है कि केंद्र सरकार नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में बताया कि वर्ष 2019 से लेकर अब तक सुरक्षा बलों ने कई बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया। खास बात यह है कि साल 2025 में ही 14 केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो स्तर के नक्सली नेता मारे गए, जो संगठन की रीढ़ माने जाते थे। इन शीर्ष नेताओं के मारे जाने से नक्सली नेटवर्क को भारी झटका लगा है और उनकी रणनीतिक क्षमता कमजोर हुई है।

सरकार के मुताबिक, नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में भी ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। एक समय देश में 126 जिले नक्सल प्रभाव में थे, जो अब घटकर सिर्फ 11 जिले रह गए हैं। यह बदलाव सुरक्षा बलों की संयुक्त रणनीति, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, बेहतर खुफिया तंत्र और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय का परिणाम माना जा रहा है।

रेड कॉरिडोर में चलाए गए अभियानों के तहत अर्द्धसैनिक बलों के अलावा राज्य पुलिस, कोबरा कमांडो और अन्य विशेष इकाइयों को भी सक्रिय किया गया। इन बलों ने दुर्गम जंगलों और पहाड़ी इलाकों में नक्सलियों के ठिकानों को नष्ट किया, हथियार भंडार जब्त किए और उनकी सप्लाई चेन को भी तोड़ा। साथ ही, सरकार ने विकास और पुनर्वास पर भी जोर दिया, ताकि स्थानीय आबादी को नक्सल प्रभाव से बाहर लाया जा सके।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूरी तरह से खात्मा करना है। उनके अनुसार, लगातार कमजोर पड़ते नक्सली संगठन, सीमित होते प्रभावित इलाके और शीर्ष नेतृत्व का सफाया इस दिशा में सकारात्मक संकेत हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद पर यह निर्णायक प्रहार केवल सैन्य कार्रवाई का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ विकास योजनाओं, सड़क और संचार सुविधाओं, शिक्षा तथा रोजगार के विस्तार ने भी अहम भूमिका निभाई है। कुल मिलाकर, रेड कॉरिडोर पर जारी यह सख्त अभियान देश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में निर्णायक साबित होता नजर आ रहा है।

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