फरीदपुर, बरेली। ईद उल अजहा, जिसे बकरीद के नाम से भी जाना जाता है, फरीदपुर और आसपास के क्षेत्रों में (Eid ul Adha 2025) 7 जून 2025 को पूरे जोश और शांति के साथ मनाया गया। यह पर्व न केवल कुर्बानी की भावना को दर्शाता है, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारा और मानवीय मूल्यों को भी मजबूत करता है। सुबह तड़के से ही फरीदपुर की मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह 10 बजे ईदगाह में हज़ारों लोगों ने नमाज अदा की और देश की खुशहाली, शांति और तरक्की के लिए दुआएं मांगीं। Eid ul Adha 2025
प्यार-मोहब्बत का पैगाम- Eid ul Adha 2025
नमाज के बाद लोग आपस में गले मिले, एक-दूसरे को बधाइयां दीं और प्यार-मोहब्बत का पैगाम बांटा। यह नजारा समाज में एकता और प्रेम की मिसाल बन गया। इस अवसर पर स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। प्रो. डॉ. अलाउद्दीन खान, नगर पालिका अध्यक्ष सराफत जरी वाले, हाजी महबूब अली खान और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने ईद की शुभकामनाएं दीं और साझी संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश दिया। Eid ul Adha 2025
Best wishes on Eid ul-Adha. May this occasion inspire harmony and strengthen the fabric of peace in our society. Wishing everyone good health and prosperity.
प्रशासन ने पर्व को शांतिपूर्ण बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एसडीएम मल्लिका नैन, तहसीलदार सुरभि राय और सीओ संदीप सिंह के नेतृत्व में पुलिस बल ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। इससे लोग बिना किसी डर के उत्सव में शामिल हुए। Eid ul Adha 2025
ईद उल अजहा का असली संदेश कुर्बानी में निहित है। यह केवल पशु बलि तक सीमित नहीं, बल्कि यह अपने अंदर की बुराइयों जैसे अहंकार, नफरत और स्वार्थ को त्यागने की प्रेरणा देता है। आज के दौर में, जब समाज में तनाव और मतभेद बढ़ रहे हैं, यह पर्व हमें आपसी प्रेम और सहिष्णुता का पाठ पढ़ाता है। फरीदपुर की यह ईद सामाजिक सौहार्द का जीवंत उदाहरण बनी। Eid ul Adha 2025
यह त्यौहार हमें याद दिलाता है कि धर्म का मकसद बांटना नहीं, जोड़ना है। ईद की खुशियां तब और बढ़ जाती हैं, जब हम इसे समाज के हर वर्ग के साथ मिलकर मनाते हैं। यह पर्व हमें सामाजिक जिम्मेदारी, भाईचारे और मानवता के प्रति समर्पण की सीख देता है। फरीदपुर में इस बार की ईद ने न केवल धार्मिक उत्साह दिखाया, बल्कि एकता और प्रेम का संदेश भी दिया।
कानपुर नगर: उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में घाटमपुर तहसील के बेहटा बुजुर्ग गांव में स्थित (Kanpur Jagannath Temple) भगवान जगन्नाथ का प्राचीन मंदिर न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह अपने अनोखे चमत्कार के लिए भी विश्व भर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर, जिसे स्थानीय लोग “मानसून मंदिर” भी कहते हैं, हर साल मानसून की सटीक भविष्यवाणी करता है। मंदिर के गुंबद पर लगा एक विशेष पत्थर मानसून के आगमन से 15-20 दिन पहले पानी की बूंदें टपकाने लगता है, जो बारिश की मात्रा और तीव्रता का संकेत देता है। 2025 में इस पत्थर से बूंदें पहले से ही अच्छी मात्रा में गिर रही हैं, जिससे इस साल सामान्य से अधिक बारिश की उम्मीद जताई जा रही है। Kanpur Jagannath Temple
मंदिर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व- Kanpur Jagannath Temple
कानपुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी संरचना के लिए भी जाना जाता है। यह उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर से भिन्न है और बौद्ध स्तूप की तरह गोल गुंबद वाला है। मंदिर की शिल्पकला नागर शैली में है, और माना जाता है कि इसे 11वीं या 12वीं सदी में बनाया गया था। हालांकि, समय के साथ यह मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसकी मरम्मत स्थानीय जमींदारों द्वारा कराई गई। मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की काले पत्थर से बनी मूर्तियां स्थापित हैं। हर साल यहां पुरी की तर्ज पर रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
जगन्नाथ मंदिर में पत्थर की बूंदों का अनसुलझा रहस्य (फोटो- नेशन नाव समाचार)
मंदिर के बाहर मोर का निशान और चक्र बना हुआ है, जो इसे ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से और भी खास बनाता है। पुरातत्व विभाग के अधीन यह मंदिर अपनी प्राचीनता और रहस्यमयी विशेषताओं के कारण शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा है।
पत्थर की बूंदों का रहस्य- Kanpur Jagannath Temple
मंदिर के गर्भगृह के शिखर पर लगा पत्थर साल भर सूखा रहता है, लेकिन मई के अंत या जून की शुरुआत में, जब चिलचिलाती गर्मी अपने चरम पर होती है, इस पत्थर से पानी की बूंदें टपकने लगती हैं। यह प्रक्रिया मानसून के आगमन से ठीक पहले शुरू होती है और बारिश शुरू होते ही पत्थर पूरी तरह सूख जाता है। मंदिर के पुजारी कुड़हा प्रसाद शुक्ला के अनुसार, बूंदों का आकार और मात्रा मानसून की तीव्रता का संकेत देती है। यदि बूंदें छोटी और कम होती हैं, तो बारिश कमजोर रहती है, और यदि बूंदें बड़ी और अधिक होती हैं, तो अच्छी बारिश की उम्मीद की जा सकती है। Kanpur Jagannath Temple
2025 में पत्थर से बड़ी बूंदें टपक रही हैं, और पुजारी का कहना है कि यह संकेत है कि इस साल मानसून समय पर आएगा और बारिश सामान्य से अधिक होगी। सीएसए कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी भी इस भविष्यवाणी से सहमत हैं। उन्होंने बताया कि 41 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी में भी पत्थर से बूंदें टपक रही थीं, जो सामान्य से अधिक वर्षा का संकेत देती हैं। Kanpur Jagannath Temple
यहां होती है बाबा जगन्नाथ की पूजा. (फोटो- नेशन नाव समाचार)
वैज्ञानिकों की जिज्ञासा और अनसुलझा रहस्य- Kanpur Jagannath Temple
इस मंदिर के पत्थर के चमत्कार ने देश-विदेश के वैज्ञानिकों को भी हैरान किया है। कई वैज्ञानिक और पुरातत्वविद इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन अभी तक यह समझ नहीं पाए कि गर्मी के मौसम में पत्थर से पानी की बूंदें कैसे बनती हैं। कुछ का मानना है कि मंदिर की संरचना ऐसी है कि यह वातावरण की नमी को अवशोषित कर बूंदों के रूप में छोड़ती है। हालांकि, यह प्रक्रिया केवल मानसून से पहले क्यों होती है, इसका कोई वैज्ञानिक जवाब नहीं मिला है।
स्थानीय लोग इसे भगवान जगन्नाथ का चमत्कार मानते हैं और इस भविष्यवाणी पर पूरा भरोसा करते हैं। मंदिर के 50-60 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले किसान बूंदों को देखकर अपनी फसलों की बुआई और कटाई की योजना बनाते हैं। वे मानते हैं कि यह मंदिर उनकी खेती और आजीविका का मार्गदर्शक है।
स्थानीय लोगों और किसानों की आस्था- Kanpur Jagannath Temple
बेहटा बुजुर्ग और आसपास के गांवों के लोग इस मंदिर को अपनी आस्था का केंद्र मानते हैं। मई के अंतिम सप्ताह में जब पत्थर से बूंदें टपकने लगती हैं, तो किसान मंदिर में विशेष पूजा-पाठ शुरू कर देते हैं। वे अच्छी फसल और समृद्धि की कामना करते हैं। 2025 में बूंदों की अच्छी मात्रा ने किसानों में उत्साह जगाया है। उनका मानना है कि इस साल फसल की पैदावार बढ़ेगी और खेती को लाभ होगा।
मानसून 2025 की भविष्यवाणी- Kanpur Jagannath Temple
इस साल मंदिर के पत्थर से टपक रही बूंदें स्थानीय लोगों और मौसम विज्ञानियों दोनों के लिए सकारात्मक संकेत दे रही हैं। पुजारी के अनुसार, पत्थर पूरी तरह भीगा हुआ है और बूंदों की गति तेज है, जो 10-15 दिनों में मानसून के आगमन और अच्छी बारिश का संकेत है। मौसम विज्ञानियों ने भी इस साल सामान्य से अधिक वर्षा की भविष्यवाणी की है, जो मंदिर की भविष्यवाणी के साथ मेल खाती है।
मंदिर का पर्यटन और धार्मिक महत्व
यह मंदिर न केवल मानसून की भविष्यवाणी के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल भी है। हर साल रथ यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर की अनूठी संरचना और चमत्कारी पत्थर इसे पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनाते हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित इस मंदिर का रखरखाव नियमित रूप से किया जाता है, ताकि इसकी प्राचीनता बरकरार रहे।
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के धन्नीपुरवा गांव में 5 जून 2025 को एक ऐसी शादी (GONDA WEDDING UP STF) हुई, जिसने न केवल स्थानीय लोगों के दिलों को छुआ, बल्कि पूरे प्रदेश में मिसाल कायम की। यह शादी थी उदयकुमारी की, जिसके भाई शिवदीन की बीते 24 अप्रैल 2025 की रात चोरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस दुखद घटना ने उदयकुमारी की 5 मई को होने वाली शादी को स्थगित कर दिया था, क्योंकि बदमाशों ने शादी के लिए रखे गहने, नकदी और अन्य सामान लूट लिया था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने और भाई की हत्या के सदमे ने उदयकुमारी की मां शकुंतला और पूरे परिवार को तोड़ दिया था। लेकिन यूपी STF, गोंडा पुलिस और यूपी राज्य महिला आयोग ने इस परिवार को सहारा देकर एक ऐतिहासिक शादी का आयोजन किया। GONDA WEDDING UP STF
भाई की मौत से टूटा परिवार, पुलिस बनी सहारा- GONDA WEDDING UP STF
घटना की जानकारी मिलते ही गोंडा पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने चार बदमाशों को गिरफ्तार किया और दो इनामी अपराधियों, सोनू पासी और ज्ञानचंद्र पासी, को मुठभेड़ में ढेर कर दिया। सोनू पासी पर हत्या, लूट और डकैती जैसे 48 से अधिक मामले दर्ज थे। इस कार्रवाई ने परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया, लेकिन शादी की आर्थिक तंगी अभी भी एक चुनौती थी। GONDA WEDDING UP STF
इसी बीच, यूपी STF चीफ अमिताभ यश के निर्देश पर STF के सीओ डीके शाही और उनकी पत्नी, यूपी राज्य महिला आयोग की सदस्य ऋतु शाही, ने परिवार से मुलाकात की। उन्होंने उदयकुमारी की शादी की पूरी जिम्मेदारी लेने का फैसला किया। गोंडा पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल की पत्नी डॉ. तन्वी जायसवाल ने परिवार को 1.51 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण और घरेलू सामान देकर सहायता प्रदान की। शादी के लिए टेंट, जयमाल स्टेज, सजावट और भोजन की व्यवस्था भी पुलिस और STF ने की। GONDA WEDDING UP STF
UP STF और पुलिस बनीं ‘घराती’– GONDA WEDDING UP STF
5 जून को जब दूल्हा प्रदीप कुमार बारात लेकर धन्नीपुरवा पहुंचा, तो गोंडा पुलिस और STF ने घराती की भूमिका निभाई। SP विनीत जायसवाल, डॉ. तन्वी जायसवाल, डीके शाही और ऋतु शाही ने बारात का स्वागत किया और द्वार पूजा जैसे रीति-रिवाज पूरे किए। स्थानीय तरबगंज विधायक प्रेम नारायण पांडेय और जिला प्रशासन के अधिकारी भी इस समारोह में शामिल हुए। महिला पुलिसकर्मियों ने बहन की भूमिका निभाई, जबकि पुरुष पुलिसकर्मियों ने भाई और परिजनों का रोल अदा किया। GONDA WEDDING UP STF
यह शादी न केवल उदयकुमारी और उनके परिवार के लिए एक नई शुरुआत थी, बल्कि यह पुलिस की मानवीय संवेदनशीलता का प्रतीक भी बनी। स्थानीय लोगों ने इस पहल की जमकर सराहना की। शकुंतला ने भावुक होकर कहा, “पुलिस ने हमारे लिए वह किया, जो कोई अपना भी शायद न कर पाता।” डीके शाही ने बताया कि यह कदम न केवल परिवार की मदद के लिए था, बल्कि समाज में पुलिस की सकारात्मक छवि को मजबूत करने के लिए भी था। GONDA WEDDING UP STF
यह घटना दर्शाती है कि पुलिस न केवल अपराध से लड़ती है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाती है। गोंडा की इस शादी ने यूपी पुलिस को “मित्र पुलिस” का असली चेहरा बना दिया। यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो मानवता और एकजुटता में विश्वास रखता है। GONDA WEDDING UP STF
कानपुर देहात: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में नेशन नाव समाचार (NNS IMPCAT) की खबर एक बार फिर बड़ा असर हुआ है। “मेरा गांव मेरी आवाज” कार्यक्रम के तहत नेशन नाव समाचार ने जिले के अंतापुर ब्लॉक के संदलपुर गांव में सड़क समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा जोर शोर उठाया था। जिसके बाद अब जिले के आलाधिकारियों को तलब किया गया है। NNS IMPCAT
ब्रेकिंग | नेशन नाव समाचार की खबर का बड़ा असर ▪️ "मेरा गांव मेरी आवाज" कार्यक्रम की खबर का दिखा असर ▪️ जिले के अफसरों को किया गया तलब, जवाब-तलब शुरू ▪️ अंता पुर, ब्लॉक संदलपुर (कानपुर देहात) की जनता को राहत की उम्मीद ▪️ रामपुर गांव की सड़क निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना… pic.twitter.com/YTM1jdXGFQ
दरअसल, कानपुर देहात के संदलपुर गांव में लंबे समय से सड़क और बुनियादी सुविधाओं की कमी एक गंभीर समस्या रही है। ग्रामीणों की शिकायतें और उपेक्षा की कहानियां अक्सर अनसुनी रह जाती थीं, लेकिन नेशन नाव समाचार के “मेरा गांव मेरी आवाज” कार्यक्रम ने इस स्थिति को बदलने का बीड़ा उठाया। इस पहल के तहत, नेशन नाव समाचार के पत्रकारों ने अंतापुर ब्लॉक के संदलपुर गांव का दौरा किया और ग्रामीणों से उनकी समस्याओं पर चर्चा की। सड़कों की खराब हालत, इंडिया मार्का हैंडपंप की रीबोरिंग में अनियमितता, और मनरेगा में मजदूरी भुगतान में गड़बड़ी जैसे मुद्दों को उजागर किया गया। NNS IMPCAT
आला आलाधिकारियों को किया गया तलब
इस खबर के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। अधिकारियों को तलब किया गया और ग्राम पंचायत से जवाब मांगा गया। 31 मई 2025 को जारी एक आधिकारिक पत्र में पंचायत सहायक सुखी आम्रपाली को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया। पत्र में अधूरे कार्यों, भुगतान में अनियमितता, और अन्य शिकायतों का विवरण मांगा गया। यह कदम ग्रामीणों के लिए एक बड़ी जीत है, क्योंकि अब रामपुर गांव में सड़क निर्माण का कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
नेशन नाव समाचार की इस पहल ने न केवल ग्रामीणों की आवाज को बुलंद किया, बल्कि प्रशासन को भी जवाबदेही के लिए मजबूर किया। यह कार्यक्रम ग्रामीण भारत में सामाजिक जागरूकता और विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। संदलपुर के ग्रामीण अब उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी होंगी, और गांव में विकास की नई लहर आएगी।
यह घटना दर्शाती है कि मीडिया और जनता की एकजुटता से सकारात्मक बदलाव संभव है। ग्राम पंचायतों को अब और पारदर्शी और जवाबदेह बनना होगा, ताकि विकास कार्य समय पर पूरे हो सकें। संदलपुर जैसे गांवों की यह कहानी अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।
कानपुर देहात: यूपी के कानपुर देहात की जिला एवं सत्र न्यायालय (Kanpur Dehat News) ने एक जघन्य अपराध के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। 6 वर्षीय मासूम काव्या की हत्या और परिवार के छह लोगों पर जानलेवा हमले के दोषी दीपू को मृत्युदंड और 15 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह उत्तर प्रदेश में नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दूसरी मृत्युदंड की सजा है, जिसने पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया है। Kanpur Dehat News
6 साल की मासूम की हत्या के दोषी को फांसी की सजा (फोटो- नेशन नाव समाचार)
23 जुलाई 2024 की दिल दहलाने वाली घटना- Kanpur Dehat News
घटना 23 जुलाई 2024 की है, जब औरैया जिले के मुरलीपुर गांव निवासी अभियुक्त दीपू ने पिपरी गांव में एक घर में घुसकर परिवार पर धारदार हथियार से हमला किया। इस हमले में 6 साल की मासूम काव्या की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार के छह अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हमला पीड़िता पूजा के दूसरे पति द्वारा किया गया था, जिसने पारिवारिक विवाद के चलते इस क्रूर कृत्य को अंजाम दिया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही भोगनीपुर थाने की पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया और अभियुक्त दीपू को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने पूछताछ और साक्ष्य संकलन के बाद दीपू को जेल भेज दिया। विवेचक ने निष्पक्ष जांच के साथ सभी साक्ष्यों को एकत्रित कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- Kanpur Dehat News
एडीजे-6 और स्पेशल जज गैंगस्टर कोर्ट ने 10 महीने 13 दिन की सुनवाई के बाद 64 पेज के विस्तृत फैसले में दीपू को दोषी ठहराया। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर उसे मृत्युदंड और 15 लाख 30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली और कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया। परिवार ने कहा, “हमें अब न्याय मिला है।”
कानपुर देहात में दूसरी मृत्युदंड सजाज- Kanpur Dehat News
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उत्तर प्रदेश में BNS के तहत दूसरी मृत्युदंड की सजा है। कोर्ट के इस कठोर निर्णय ने समाज में अपराधियों के लिए कड़ा संदेश दिया है। कानपुर देहात पुलिस और न्यायिक व्यवस्था की त्वरित कार्रवाई ने इस मामले में न्याय सुनिश्चित किया। Kanpur Dehat News
कानपुर देहात: यूपी के कानपुर देहात के छोटे से कस्बे पुखरायां (Kanpur Dehat News) में रहने वाला 16 वर्षीय पार्थ बंसल आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। इस नन्हे वैज्ञानिक ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से एक ऐसी छड़ी का आविष्कार किया है, जो पार्किंसंस रोग (न्यूरोलॉजिकल विकार) से जूझ रहे लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। भारत सरकार ने इस अनूठे आविष्कार को 20 साल के लिए पेटेंट प्रदान किया है, जो इस उम्र में एक असाधारण उपलब्धि है। आइए, जानते हैं पार्थ की इस प्रेरणादायक कहानी के बारे में और उनके आविष्कार की खासियत। Kanpur Dehat News
पार्थ का प्रेरणादायक सफर- Kanpur Dehat News
पार्थ बंसल वर्तमान में नोएडा के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में इंटरमीडिएट का छात्र है। उनके पिता संदीप बंसल एक व्यापारी हैं, जिन्होंने हमेशा पार्थ की जिज्ञासा और रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया। बचपन से ही पार्थ को विज्ञान और तकनीक के प्रति गहरा लगाव रहा है। वह चुम्बक, तार, बल्ब और सेल जैसे सामानों के साथ प्रयोग करने में घंटों बिताया करता था। खिलौनों को खोलना और उनके पुर्जों को समझना उसका पसंदीदा शौक था। लेकिन इस शौक ने तब एक मिशन का रूप ले लिया, जब उसने अपनी दादी सुषमा अग्रवाल को पार्किंसंस रोग से जूझते देखा।
16 साल के पार्थ बंसल ने बनाई जादुई छड़ी (फोटो- नेशन नाव समाचार)
पार्किंसंस रोग एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें मरीज के शरीर में कंपन, मांसपेशियों में अकड़न और चलने-फिरने में असमर्थता जैसी समस्याएं हो जाती हैं। पार्थ अपनी दादी की इस हालत को देखकर बहुत दुखी हुआ। उसने ठान लिया कि वह कुछ ऐसा बनाएगा, जो उनकी जिंदगी को आसान बनाए। यहीं से शुरू हुआ उसकी जादुई छड़ी का सफर। Kanpur Dehat News
जादुई छड़ी का आविष्कार- Kanpur Dehat News
पार्थ ने 2016 में, जब वह केवल 13 साल का था और नौवीं कक्षा में पढ़ता था, इस अनोखी छड़ी का आविष्कार किया। यह छड़ी साधारण नहीं थी। इसमें एलईडी लाइट्स, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग किया गया था, जो पार्किंसंस रोगियों को चलने में सहायता प्रदान करते हैं। इस छड़ी की खासियत यह है कि यह कंपन को नियंत्रित करने में मदद करती है और मरीजों को संतुलन बनाए रखने में सहायता देती है। इसके अलावा, इसमें लगी एलईडी लाइट्स रात के समय या कम रोशनी में भी सुरक्षित चलने में मदद करती हैं।
पार्थ बंसल को भारत सरकार से मिला पेटेंट (फोटो- नेशन नाव समाचार)
पार्थ की इस छड़ी ने उनकी दादी की जिंदगी को न केवल आसान बनाया, बल्कि दुनिया भर के पार्किंसंस रोगियों के लिए एक नई उम्मीद जगाई। इस आविष्कार ने पार्थ को रातोंरात सुर्खियों में ला दिया। उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए भारत सरकार ने इस छड़ी को पेटेंट प्रदान किया, जो 20 वर्षों तक मान्य रहेगा।
पिता संदीप बंसल ने कहा- गर्व की बात!– Kanpur Dehat News
पार्थ के पिता संदीप बंसल अपने बेटे की उपलब्धियों पर गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने बताया कि पार्थ का स्वभाव बेहद सरल और जिज्ञासु है। वह हमेशा कुछ नया सीखने और बनाने की कोशिश में रहता है। संदीप कहते हैं, “पार्थ को बचपन से ही इलेक्ट्रॉनिक सामानों के साथ खेलना पसंद था। वह खिलौनों को खोलकर उनके पुर्जे देखता और फिर कुछ नया बनाने की कोशिश करता। जब उसने अपनी दादी की तकलीफ देखी, तो उसने इस छड़ी को बनाने का फैसला किया। आज उसकी मेहनत रंग लाई है।”
पार्थ की इस उपलब्धि को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहा गया है। नवंबर 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उन्हें डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइट अवार्ड से सम्मानित किया। इसके अलावा, हैदराबाद में उपराष्ट्रपति और पुणे में असम के राज्यपाल द्वारा सूर्यदत्त राष्ट्रीय पुरस्कार भी उन्हें प्रदान किया गया।
पार्थ की अन्य उपलब्धियां
पार्थ का यह आविष्कार उनकी प्रतिभा का केवल एक हिस्सा है। वह रोबोटिक्स, ऐप डेवलपमेंट और विज्ञान मॉडल्स बनाने में भी गहरी रुचि रखता है। वह अपने स्कूल और अन्य संस्थानों के लिए कई वेबसाइट्स और ऐप्स डिजाइन कर चुका है। उसकी जिज्ञासा और मेहनत ने उसे कम उम्र में ही एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बना दिया है।
पार्थ का सपना है कि वह भविष्य में और ऐसे आविष्कार करे, जो समाज के लिए उपयोगी हों। वह कहता है, “मैं चाहता हूं कि मेरे आविष्कार लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाएं। मेरी दादी की खुशी मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।”
भारत में युवा आविष्कारकों का भविष्य
पार्थ जैसे युवा आविष्कारक भारत के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्टार्टअप और युवा आविष्कारकों को प्रोत्साहित करने के लिए मुफ्त पेटेंट सेवाएं शुरू की हैं। यह पहल न केवल नवाचार को बढ़ावा देगी, बल्कि युवाओं को अपनी प्रतिभा को दुनिया के सामने लाने का अवसर भी प्रदान करेगी।
पार्थ की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को सच करने की हिम्मत रखता है। उनकी मेहनत, लगन और दादी के प्रति प्रेम ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। यह नन्हा वैज्ञानिक न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
श्रीनगर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर (PM Modi Kashmir visit) के दौरे पर चिनाब ब्रिज और अंजनी पुल का उद्घाटन किया। दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज, चिनाब ब्रिज, उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना का हिस्सा है। यह कश्मीर घाटी को साल भर शेष भारत से जोड़ेगा और कटरा-श्रीनगर की यात्रा को मात्र 3 घंटे में पूरा करेगा। इस अवसर पर पीएम ने कटरा-श्रीनगर वंदे भारत ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई, जो क्षेत्र में तेज और आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करेगी। PM Modi Kashmir visit
हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद यह पीएम का पहला कश्मीर दौरा है। उन्होंने 46 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी, जिससे जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। चिनाब ब्रिज न केवल कनेक्टिविटी में सुधार करेगा, बल्कि यह ‘दिल की दूरी और दिल्ली की दूरी’ को भी कम करेगा। यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पर्यटन को प्रोत्साहन देने में अहम भूमिका निभाएगी। PM Modi Kashmir visit
पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि यह रेल लिंक कश्मीर के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। चिनाब ब्रिज और वंदे भारत ट्रेन से न केवल यात्रा का समय बचेगा, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह कदम जम्मू-कश्मीर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। PM Modi Kashmir visit
बरेली: फरीदपुर तहसील में विद्युत विभाग ने बिजली चोरी (Bareilly Power Theft) के खिलाफ गुरुवार को एक बड़ा अभियान चलाया। मोहल्ला परा और मोहल्ला ऊँचा में चेकिंग के दौरान 15 उपभोक्ताओं को अवैध रूप से बिजली का उपयोग करते पकड़ा गया। इनके खिलाफ विद्युत अधिनियम की धारा 135 और 138 (बी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। इस कार्रवाई ने क्षेत्र में बिजली चोरी करने वालों के बीच हड़कंप मचा दिया। Bareilly Power Theft
बड़े बकायेदारों के बिजली कनेक्शन काटे गए- Bareilly Power Theft
विभाग ने जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की, उनमें रानी, शेषमणि शर्मा, यासीन खान, कालीचरन, साबरी, मुन्नी देवी, माया देवी, रघुनंदन प्रसाद, नितिन कुमार, इरफान, पप्पू, जैनेंद्र पाल सिंह, प्रदीप कुमार, जमुना देवी और मुनीष चंद्र शामिल हैं। इसके अलावा, 80 से अधिक बड़े बकायेदारों के बिजली कनेक्शन काटे गए। इस अभियान से विद्युत विभाग ने ₹6 लाख से अधिक की राजस्व वसूली की, जिससे विभागीय खजाने को काफी राहत मिली। Bareilly Power Theft
बकाया बिलों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी- Bareilly Power Theft
इस अभियान में उपकरण अधिकारी उमेश कुमार, उपखंड अधिकारी अक्षय यादव, अवर अभियंता वीरू सिंह, राम सिंह यादव, विष्णु प्रताप सिंह, सुशील मिश्रा, अजय कुमार और अन्य कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे। बिजली चोरी और बकाया बिलों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी। Bareilly Power Theft
विद्युत विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे समय पर अपने बिजली बिलों का भुगतान करें और केवल वैध कनेक्शन का उपयोग करें। अवैध बिजली उपयोग न केवल गैरकानूनी है, बल्कि इससे बिजली आपूर्ति पर भी बुरा असर पड़ता है। विभाग ने चेतावनी दी है कि बिजली चोरी करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह अभियान बरेली में बिजली चोरी को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि इससे बिजली व्यवस्था में सुधार होगा।
अयोध्या: 5 जून 2025 को अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एक बार फिर (Ayodhya Ram Mandir) आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति के रंग में रंगा। इस दिन राम मंदिर के प्रथम तल पर राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी की मूर्तियों को वैदिक मंत्रों के साथ स्थापित किया गया। इसके साथ ही मंदिर परिसर में सात अन्य मंदिरों की भी प्राण प्रतिष्ठा हुई, जिसने इस पावन अवसर को और भी विशेष बना दिया। Ayodhya Ram Mandir
राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा: एक नया अध्याय- Ayodhya Ram Mandir
राम मंदिर, जो 22 जनवरी 2024 को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ विश्वभर में चर्चा का केंद्र बना था, अब राम दरबार की स्थापना के साथ और भी भव्य हो गया है। प्रथम तल पर स्थापित राम दरबार में भगवान राम अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं। इस ऐतिहासिक क्षण को गंगा दशहरा के पावन अवसर पर आयोजित किया गया, जिसने इसकी आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ा दिया।
सुबह 6:30 बजे से यज्ञ मंडप में अयोध्या और काशी के 101 वैदिक आचार्यों ने वैदिक मंत्रों का जाप शुरू किया। आठ मूर्तियों को पहले शैय्याधिवास कराया गया, फिर सुबह 6:45 बजे इन्हें चेतन अवस्था में लाया गया। इसके बाद जल से स्नान और वैदिक अनुष्ठानों के साथ प्राण प्रतिष्ठा की प्रक्रिया पूरी हुई।
CM योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति- Ayodhya Ram Mandir
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने राम दरबार के समक्ष प्रार्थना की और प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। उनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया। योगी जी ने इस अवसर पर कहा, “राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा अयोध्या के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।”
मंदिर परिसर का भव्य स्वरूप
राम मंदिर परिसर को इस अवसर पर फूलों और रंगों से सजाया गया था। वैदिक मंत्रों की गूंज और यज्ञ की पवित्र धूप ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मंदिर के प्रथम तल पर राम दरबार के साथ-साथ सात अन्य मंदिरों की स्थापना ने इस परिसर को एक संपूर्ण तीर्थ स्थल का रूप दे दिया। मंदिर की नक्काशी, राजस्थानी गुलाबी बलुआ पत्थर, और मकराना मार्बल इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।
राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा का लाइव प्रसारण सोशल मीडिया, समाचार चैनलों, और अन्य माध्यमों से पूरी दुनिया तक पहुंचा। लाखों भक्तों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्राप्त किया। सोशल मीडिया पर भक्तों ने “जय सियाराम” और “राम दरबार” जैसे हैशटैग के साथ अपनी खुशी और भक्ति व्यक्त की।राम मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक भी है। राम दरबार की स्थापना ने इस मंदिर को और भी पूर्णता प्रदान की है। अब भक्तों को राम लला के साथ-साथ उनके पूरे परिवार के दर्शन का अवसर मिलेगा, जो भक्ति और एकता का संदेश देता है।
नई दिल्ली: 4 जून 2025 की शाम बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर एक पर मची भगदड़ (Chinnaswamy Stadium Stampede) में 11 लोगों की जान चली गई और 33 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। यह हादसा उस समय हुआ जब RCB की टीम कर्नाटक विधानसभा भवन में सम्मान समारोह में हिस्सा ले रही थी। इस त्रासदी ने न केवल बेंगलुरु को झकझोर दिया, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर दिए। आखिर इस भगदड़ का जिम्मेदार कौन है? क्या इस हादसे को रोका जा सकता था? आइए, इस हादसे की तह तक जाते हैं और उन कारणों को समझते हैं, जिन्होंने एक खुशी के मौके को मातम में बदल दिया। Chinnaswamy Stadium Stampede
क्या हुआ उस दिन?
3 जून 2025 को RCB ने IPL 2025 का खिताब जीतकर 18 साल के लंबे इंतजार को खत्म किया। बेंगलुरु में इस जीत का जश्न मनाने के लिए प्रशंसकों का उत्साह चरम पर था। RCB मैनेजमेंट ने 4 जून की सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर एक विक्ट्री परेड की घोषणा की, जो विधानसभा भवन से चिन्नास्वामी स्टेडियम तक जानी थी। दोपहर 3:15 बजे, उन्होंने एक्स पर परेड के टिकटों का विज्ञापन भी पोस्ट किया। Chinnaswamy Stadium Stampede
"It means a lot. Everyone had been waiting for this moment for 17 years. With such a massive fanbase and so many prayers behind us, it’s a perfect moment for us, for all the former RCB players, and everyone who’s been a part of this journey." 🗣
— Royal Challengers Bengaluru (@RCBTweets) June 4, 2025
लेकिन इस घोषणा के साथ ही भ्रम की स्थिति शुरू हो गई। बेंगलुरु पुलिस ने दावा किया कि कोई ओपन-टॉप बस परेड नहीं होगी, बल्कि स्टेडियम के अंदर एक समारोह आयोजित किया जाएगा। फिर भी, लाखों प्रशंसक परेड की उम्मीद में स्टेडियम के आसपास जमा होने लगे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बाद में बताया कि स्टेडियम के बाहर 2-3 लाख लोग जमा थे, जबकि इसकी क्षमता केवल 35-40 हजार है। Chinnaswamy Stadium Stampede
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शाम को, जब RCB की टीम विधानसभा में सम्मान समारोह में व्यस्त थी, चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर एक पर भीड़ बेकाबू हो गई। प्रशंसक बिना टिकट के स्टेडियम में घुसने की कोशिश करने लगे। इस दौरान एक अस्थायी संरचना भीड़ के दबाव में ढह गई, जिससे भगदड़ मच गई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया, जिसने हालात को और बिगाड़ दिया। Chinnaswamy Stadium Stampede
लापरवाही के कई चेहरे
इस हादसे ने पुलिस, प्रशासन, RCB मैनेजमेंट, और कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आइए, इनकी भूमिका को समझते हैं:-
पुलिस की नाकामी: बेंगलुरु सेंट्रल के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) शेखर एच. टेकान्नवर पर भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक नियंत्रण, और रूट प्लानिंग की जिम्मेदारी थी। लेकिन, पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या परेड को अनुमति दी गई थी। अगर अनुमति थी, तो इतनी बड़ी भीड़ को संभालने की क्या व्यवस्था थी? और अगर अनुमति नहीं थी, तो यह जानकारी प्रशंसकों तक क्यों नहीं पहुंचाई गई? स्टेडियम के आसपास पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं था। न ही बैरिकेडिंग की गई और न ही ड्रोन या CCTV का उपयोग किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिससे भगदड़ और बिगड़ गई।
RCB मैनेजमेंट की गलती: RCB ने सुबह परेड की घोषणा की, लेकिन दोपहर तक यह साफ नहीं हुआ कि परेड होगी या नहीं। उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स ने प्रशंसकों में उत्साह तो बढ़ाया, लेकिन भ्रम भी पैदा किया। अगर परेड रद्द हो चुकी थी, तो इसकी जानकारी समय पर क्यों नहीं दी गई? RCB ने बाद में हादसे पर दुख जताया, लेकिन उनकी खराब योजना ने इस त्रासदी को जन्म देने में अहम भूमिका निभाई।
प्रशासन और KSCA की चूक: कर्नाटक सरकार और KSCA ने इस आयोजन को भव्य बनाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि उन्हें इतनी बड़ी भीड़ की उम्मीद नहीं थी। लेकिन, RCB की जीत के बाद शहर में फैली दीवानगी को देखते हुए क्या इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता था? जिला सूचना विभाग ने परेड रद्द होने की जानकारी समय पर नहीं दी। अगर यह स्पष्ट कर दिया जाता कि परेड नहीं होगी, तो शायद लाखों लोग स्टेडियम के बाहर नहीं जमा होते।
हादसे के कारण – Chinnaswamy Stadium Stampede
इस त्रासदी के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं:-
सूचना का अभाव: परेड के बारे में बार-बार बदलती जानकारी ने प्रशंसकों में भ्रम पैदा किया।
भीड़ प्रबंधन की कमी: स्टेडियम की सीमित क्षमता के बावजूद लाखों लोगों को जमा होने दिया गया।
खराब योजना: RCB मैनेजमेंट और KSCA ने आयोजन का रूट मैप या समय सारिणी पहले से तैयार नहीं की।
पुलिस की गलतियां: लाठीचार्ज और अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था ने स्थिति को और खराब किया।
प्रशासन और RCB का रुख
हादसे के बाद कर्नाटक सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों के लिए मुफ्त इलाज की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने एक मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए, जिसकी रिपोर्ट 15 दिनों में जमा करने को कहा गया है। Chinnaswamy Stadium Stampede
भगदड़ के दौरान बेहोश बच्चे को उठाकर भीड़ से दूर ले जाता पुलिसकर्मी. (फोटो- सोशल मीडिया)
RCB और KSCA ने संयुक्त बयान में हादसे पर दुख जताया और पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की। RCB के पूर्व कप्तान विराट कोहली ने कहा, “यह हादसा बेहद दुखद है। मेरे पास शब्द नहीं हैं।” लेकिन, कई प्रशंसकों ने सवाल उठाया कि जब बाहर भगदड़ में लोग मर रहे थे, तब स्टेडियम के अंदर समारोह क्यों जारी रहा?
अनुत्तरित सवाल
अनियंत्रित भीड़: जब स्टेडियम की क्षमता 35-40 हजार थी, तो 2-3 लाख लोगों को जमा होने की अनुमति कैसे दी गई?
पूर्वानुमान की कमी: RCB की जीत के बाद प्रशंसकों का उत्साह देखते हुए भीड़ का अंदाजा क्यों नहीं लगाया गया?
प्रबंधन की कमी: बैरिकेडिंग, ड्रोन, या CCTV का उपयोग क्यों नहीं किया गया?
सूचना में देरी: परेड रद्द होने की जानकारी समय पर क्यों नहीं दी गई?
क्या यह हादसा टाला जा सकता था?
हां, यह हादसा टाला जा सकता था। अगर पुलिस, RCB मैनेजमेंट, और KSCA ने मिलकर एक ठोस योजना बनाई होती, तो यह त्रासदी शायद न होती। एक स्पष्ट रूट मैप, समय सारिणी, और भीड़ प्रबंधन की रणनीति तैयार की जा सकती थी। सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया के जरिए सही जानकारी समय पर दी जा सकती थी।