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  • CM Yogi Varanasi Statement: वाराणसी में CM योगी का विपक्ष पर हमला, बोले– काशी का विकास कांग्रेस को नहीं पच रहा

    CM Yogi Varanasi Statement: वाराणसी में CM योगी का विपक्ष पर हमला, बोले– काशी का विकास कांग्रेस को नहीं पच रहा

    CM Yogi Varanasi Statement: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वाराणसी पहुंचे। यहां उन्होंने विपक्षी दलों, खासतौर पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर जमकर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि काशी में हो रहे अभूतपूर्व विकास कार्य कांग्रेस को पसंद नहीं आ रहे हैं, इसलिए वह लगातार भ्रामक और झूठे प्रचार के जरिए देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।

    सीएम योगी ने यह बातें वाराणसी स्थित सर्किट हाउस में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर काशी को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी आज विकास की एक नई गाथा लिख रही है। उन्होंने बताया कि वाराणसी में अब तक 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं। इन परियोजनाओं से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।

    सीएम योगी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके निर्माण के समय कुछ लोगों ने खंडित प्रतिमाओं को दिखाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि उस समय भी कांग्रेस और उसके समर्थकों ने झूठा प्रचार किया, लेकिन आज सच्चाई सबके सामने है। कॉरिडोर बनने के बाद प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या केवल 10 से 15 हजार तक सीमित थी।

    मुख्यमंत्री ने मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण और विकास कार्यों को लेकर भी विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि घाट के विकास को लेकर अनर्गल बयानबाजी की जा रही है, जबकि काशी की जनता भली-भांति जानती है कि सरकार विकास और विरासत दोनों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी ऐतिहासिक या धार्मिक परंपरा से छेड़छाड़ नहीं की जा रही है।

    सीएम योगी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग भ्रामक जानकारी फैलाकर जनता को गुमराह करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार अपने विकास एजेंडे से पीछे हटने वाली नहीं है।

    वहीं मुख्यमंत्री योगी के इन बयानों पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि क्या ये बातें काशी के घाट पर जाकर काशीवासियों की आंखों में आंखें डालकर कही जा सकती हैं। उन्होंने इसे सवाल नहीं, बल्कि चुनौती बताया।

    कुल मिलाकर, वाराणसी में चल रहे विकास कार्यों को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। जहां सरकार इसे विकास और विरासत का संतुलन बता रही है, वहीं विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में और गर्माने के संकेत दे रहा है।

  • CM Yogi Varanasi Visit: बुलडोजर एक्शन के बीच CM योगी काशी पहुंचे, विश्वनाथ और काल-भैरव मंदिर में की पूजा

    CM Yogi Varanasi Visit: बुलडोजर एक्शन के बीच CM योगी काशी पहुंचे, विश्वनाथ और काल-भैरव मंदिर में की पूजा

    CM Yogi Varanasi Visit: वाराणसी (उत्तर प्रदेश ) वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनरुद्धार कार्य के दौरान ऐतिहासिक चबूतरे और अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को बुलडोजर से हटाए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काशी पहुंचे और उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर तथा काल-भैरव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की।

    मणिकर्णिका घाट विवाद क्या है?

    काशी पुनर्विकास परियोजना के तहत मणिकर्णिका घाट क्षेत्र में सौंदर्यीकरण और पुनरुद्धार कार्य चल रहा है। इसी दौरान घाट पर स्थित एक पुराना ऐतिहासिक चबूतरा और अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा हटाए जाने का वीडियो सामने आया, जिसके बाद विरोध शुरू हो गया।स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना पर्याप्त सूचना और सहमति के यह कार्रवाई की गई, जिससे धार्मिक और ऐतिहासिक भावनाएं आहत हुई हैं।

    मेयर और विधायक की सफाई

    विवाद बढ़ने पर वाराणसी के मेयर और क्षेत्रीय विधायक स्वयं मणिकर्णिका घाट पहुंचे। उन्होंने कहा कियह कार्रवाई पुनरुद्धार योजना का हिस्सा है किसी भी ऐतिहासिक विरासत को नष्ट करने का उद्देश्य नहीं हैसभी कार्य विशेषज्ञों और प्रशासनिक अनुमति के साथ किए जा रहे हैं प्रशासन का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद घाट की ऐतिहासिक गरिमा और बेहतर रूप में वापसी होगी।

    CM योगी का काशी दौरा, सियासी मायने

    विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काशी पहुंचना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन काल-भैरव मंदिर में विशेष पूजा अधिकारियों से परियोजना की स्थिति की जानकारी ली हालांकि, मणिकर्णिका घाट विवाद पर सीएम योगी की ओर से कोई आधिकारिक बयान फिलहाल सामने नहीं आया है।

    प्रशासन पर टिकी निगाहें

    स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि मणिकर्णिका घाट से जुड़े सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष समीक्षा हो ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए भविष्य में किसी भी कार्रवाई से पहले जनभावनाओं का सम्मान किया जाए प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की आंतरिक समीक्षा की जा रही है।

  • बांदा में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बड़े बयान, हिंदुत्व, शिक्षा और जनसंख्या पर खुलकर बोले

    बांदा में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के बड़े बयान, हिंदुत्व, शिक्षा और जनसंख्या पर खुलकर बोले

    रिपोर्ट-मोहित पाल हनुमत कथा करने बांदा पहुंचे बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने धार्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर कई बड़े और चर्चित बयान दिए। उनके बयानों को लेकर कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं के साथ-साथ सियासी और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।

    हरिद्वार की हर की पौड़ी में मुसलमानों की एंट्री बैन की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनके अनुसार किसी भी धार्मिक स्थल की अपनी मर्यादा होती है। उन्होंने कहा कि जब हिंदू काबा नहीं जाते, तो फिर उन लोगों को हिंदू धार्मिक स्थलों पर जाने की आवश्यकता क्यों है, जिन्हें हिंदुत्व से परहेज है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई मुसलमान श्रद्धा के साथ उनकी कथा में आता है तो उसका स्वागत है, लेकिन यदि आपत्ति है तो घर पर रहकर टीवी के माध्यम से प्रवचन सुनना भी एक विकल्प है।

    अपने चर्चित “वेद नहीं पढ़ोगे तो नावेद और जावेद बनोगे” वाले बयान पर सफाई देते हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि यह बयान विशेष रूप से सनातन समाज के लिए था। उनका कहना था कि उनका उद्देश्य हिंदू समाज के लोगों को वेद पढ़ने और पढ़ाने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को इस बयान से आपत्ति है, तो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

    गुरुकुलम शिक्षा पद्धति को लेकर उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने सबसे पहले भारत की शिक्षा व्यवस्था पर हमला किया। उनका कहना था कि पहले बच्चों को ‘ग से गणेश’ पढ़ाया जाता था, जिसे सांप्रदायिक कहा गया और अब ‘ग से गधा’ पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुकुलम पद्धति का विरोध करने वालों ने ही देश को नुकसान पहुंचाया है।

    जनसंख्या के मुद्दे पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समाज से अपनी जनसंख्या बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि जल, जंगल, जमीन और परिवार को सुरक्षित रखना है तो हिंदुओं को अपनी संख्या बढ़ानी होगी।इस दौरान उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि बुंदेलखंड के बागेश्वर धाम में 2027 तक कैंसर अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसके उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर बागेश्वर धाम आएंगे।

  • कानपुर में चांदी चोरी का आरोपी थाने से फरार, महिला सिपाही निलंबित

    कानपुर में चांदी चोरी का आरोपी थाने से फरार, महिला सिपाही निलंबित

    कानपुर उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ज्वेलर्स की दुकान से तीन किलोग्राम चांदी चोरी के आरोप में पकड़ा गया आरोपी थाने से फरार हो गया। यह घटना गुजैनी थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जिसके बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।

    जानकारी के अनुसार, ज्वेलर्स शॉप से चांदी चोरी के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर गुजैनी थाने की हवालात में बंद किया था। पूछताछ के दौरान आरोपी को शौचालय ले जाने के लिए होमगार्ड को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी दौरान आरोपी ने होमगार्ड को धक्का दिया और मौके से फरार हो गया।

    आरोपी के भागते ही थाने में अफरा-तफरी मच गई। पुलिसकर्मियों ने उसका पीछा किया, लेकिन आरोपी कच्ची बस्ती की गलियों का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहा। घटना के बाद पुलिस की कई टीमों को आरोपी की तलाश में लगाया गया है और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

    इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है। थाना प्रभारी की तहरीर पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में जीडी मुंशी के पद पर तैनात महिला सिपाही, संबंधित होमगार्ड और फरार आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।

    मामले को गंभीरता से लेते हुए डीसीपी ने तत्काल प्रभाव से महिला सिपाही को निलंबित कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की विभागीय जांच कराई जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कानपुर चांदी चोरी आरोपी फरार होने के मामले को प्राथमिकता पर लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।फिलहाल यह घटना पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।

  • अलीगढ़ में नाबालिग लड़की लापता, दवा लेने गई थी, पुलिस जांच में जुटी

    अलीगढ़ में नाबालिग लड़की लापता, दवा लेने गई थी, पुलिस जांच में जुटी

    अलीगढ़ जिले के पाली मुकीमपुर थाना क्षेत्र से नाबालिग लड़की के लापता होने का मामला सामने आया है, जिससे इलाके में चिंता का माहौल है। जानकारी के अनुसार, गांव गहतोली निर्मल निवासी एक नाबालिग लड़की दवा लेने के लिए घर से निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    लापता लड़की की पहचान अर्चना के रूप में हुई है। वह काफी समय से अपनी नानी भगवान देवी के घर गहतोली निर्मल गांव में रह रही थी। बताया गया कि 5 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 3 बजे अर्चना गांव के अड्डे पर दवा लेने गई थी। इसके बाद जब वह शाम तक घर नहीं पहुंची, तो नानी भगवान देवी ने उसकी तलाश शुरू की।

    देर शाम तक कोई जानकारी न मिलने पर नानी ने अर्चना के पिता रोशन सिंह को फोन कर इसकी सूचना दी। पिता रोशन सिंह, जो कि ग्राम रहीमकोट, थाना डिबाई, जिला बुलंदशहर के निवासी हैं, तुरंत रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से बच्ची की खोजबीन में जुट गए।

    परिजनों ने आसपास के गांवों और संभावित स्थानों पर काफी तलाश की, लेकिन नाबालिग लड़की का कोई सुराग नहीं मिल सका। इसके बाद पिता ने पाली मुकीमपुर थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर अलीगढ़ नाबालिग लड़की लापता होने का मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह पवार ने बताया कि लड़की की तलाश के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस द्वारा मिले मोबाइल नंबरों की जांच की जा रही है और आसपास के इलाकों में पूछताछ भी की जा रही है।

    थाना प्रभारी ने यह भी बताया कि पुलिस हर संभावित एंगल से मामले की जांच कर रही है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि यदि किसी को भी लापता लड़की के संबंध में कोई जानकारी मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।फिलहाल पुलिस की टीम लगातार दबिश दे रही है और परिजनों को भरोसा दिलाया गया है कि जल्द ही बच्ची को सकुशल बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है।

  • अमेठी महोत्सव की प्रदर्शनी पर विवाद, विदेशी उत्पाद बिकने के आरोप

    अमेठी महोत्सव की प्रदर्शनी पर विवाद, विदेशी उत्पाद बिकने के आरोप

    संवाददाता नितेश तिवारी अमेठी शहर के रामलीला मैदान में आयोजित “अमेठी महोत्सव 2025–26” के अंतर्गत लगी प्रदर्शनी को लेकर विवाद सामने आया है। प्रदर्शनी के बाहर इसे हैंडलूम, क्राफ्ट, हस्तशिल्प और खादी उत्पादों का एक्सपो बताया गया है, लेकिन कुछ संगठनों ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनी में बिक रहे कई उत्पाद भारतीय न होकर बांग्लादेश और चीन मूल के हैं।

    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रदर्शनी का विरोध किया। उनका कहना है कि यदि खादी और हस्तशिल्प के नाम पर विदेशी उत्पाद बेचे जा रहे हैं, तो यह मेड इन इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी पहलों की भावना के विपरीत है।

    कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस तरह की बिक्री से उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा है और स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस तरह के आयोजनों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

    संगठनों ने मांग की है कि प्रदर्शनी में लगाए गए सभी स्टॉलों पर बिकने वाले सामान की Country of Origin स्पष्ट रूप से दर्शाई जाए। इसके साथ ही आयोजकों से यह भी आग्रह किया गया है कि वे संबंधित अनुमति और आयात से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करें, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।

    विरोध के दौरान यह भी कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार देशवासियों से स्वदेशी उत्पाद अपनाने और स्थानीय उद्योगों को समर्थन देने की अपील की जाती रही है। ऐसे में यदि इन आयोजनों में आयातित वस्तुएं बेची जाती हैं, तो यह जनभावनाओं के विपरीत माना जाएगा।

    फिलहाल इस पूरे अमेठी महोत्सव प्रदर्शनी विवाद पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, प्रदर्शनी के आयोजकों ने भी अभी तक आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की है।स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।

  • औरैया में किसान से टप्पेबाजी, सर्राफ से रुपये लेकर लौटते समय 40 हजार उड़ाए

    औरैया में किसान से टप्पेबाजी, सर्राफ से रुपये लेकर लौटते समय 40 हजार उड़ाए

    रिपोर्टर अमित शर्मा औरैया जिले के अछल्दा थाना क्षेत्र में औरैया टप्पेबाजी मामला सामने आया है, जहां एक किसान के साथ शातिर तरीके से जेब काटकर 40 हजार रुपये उड़ा लिए गए। यह घटना कस्बा अछल्दा के हरीगंज बाजार क्षेत्र की बताई जा रही है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, वीरपुर निवासी देवेंद्र सिंह पुत्र छोटे सिंह खेती-किसानी का कार्य करते हैं। उम्रदराज होने के कारण उनकी आंखों की रोशनी कुछ कम है। दोपहर के समय वह हरीगंज बाजार स्थित एक सर्राफ की दुकान पर अपनी चांदी की चीज गिरवी रखकर 40 हजार रुपये लेकर पैदल घर की ओर जा रहे थे।

    इसी दौरान बिना नंबर की अपाचे बाइक पर सवार दो युवक पीछे से पहुंचे। बदमाशों ने खुद को किसान का दूर का रिश्तेदार बताते हुए उसे घर छोड़ने की बात कही और बीच में बैठा लिया। भरोसा कर किसान बाइक पर बैठ गया।

    बाइक सवार बदमाश किसान को पहले ब्लॉक चौराहा ले गए, फिर हरीगंज तिराहे से सेऊपर रोड की ओर बढ़ गए। कुछ दूर चलने के बाद उन्होंने किसान को यह कहकर बाइक से नीचे उतार दिया कि “चच्चा, पापा को लेकर आते हैं।” इसके बाद दोनों बदमाश मौके से फरार हो गए।

    जब किसान ने अपनी जेब टटोली तो पता चला कि उसकी जेब कट चुकी है और उसमें रखे 40 हजार रुपये गायब हैं। घटना के बाद किसान काफी देर तक बदमाशों को ढूंढता रहा, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला।

    पीड़ित किसान ने गांव पहुंचकर परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद शाम करीब सात बजे अछल्दा पुलिस को सूचना दी गई। थाना प्रभारी पंकज मिश्रा मौके पर पहुंचे और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू करवाई।

    पुलिस का कहना है कि औरैया टप्पेबाजी मामला गंभीर है और जल्द ही सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर ली जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान व्यक्तियों पर भरोसा न करें और बड़ी रकम लेकर चलते समय सतर्क रहें।

  • KGMU विवाद: अपर्णा यादव से झड़प के बाद डॉक्टर और कर्मचारी आर-पार, हड़ताल और OPD बंद करने की चेतावनी

    KGMU विवाद: अपर्णा यादव से झड़प के बाद डॉक्टर और कर्मचारी आर-पार, हड़ताल और OPD बंद करने की चेतावनी

    KGMU विवाद : राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में चल रहा महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और लव जिहाद का मामला अब और गंभीर होता नजर आ रहा है। KGMU विवाद ने सोमवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष अपर्णा यादव की टीम और यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों व कर्मचारियों के बीच तीखी झड़प और बहस हो गई। इस घटना के बाद केजीएमयू में तनाव का माहौल है और डॉक्टरों ने हड़ताल पर जाने के साथ ही ओपीडी सेवाएं बंद करने की चेतावनी दे दी है।

    यह पूरा विवाद डॉक्टर रमीज से जुड़े कथित धर्मांतरण प्रकरण से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, केजीएमयू की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद द्वारा इस मामले पर आयोजित की जाने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले अपर्णा यादव के समर्थकों और केजीएमयू के डॉक्टरों व कर्मचारियों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई। इस घटना से पूरे मेडिकल कैंपस में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि बाहरी हस्तक्षेप से संस्थान की गरिमा और स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका आरोप है कि संवेदनशील मामले में बिना समन्वय के दबाव बनाने की कोशिश की गई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। KGMU विवाद को लेकर डॉक्टर संगठनों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों और आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो वे हड़ताल और ओपीडी सेवाएं बंद करने जैसे कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

    वहीं दूसरी ओर, यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता दिख रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टीम में ‘फेवरेट’ बनने की कोशिश से जुड़ा है। अपर्णा यादव, जो समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की बहू हैं, ने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थामा था। हालांकि, पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें न तो लोकसभा चुनाव में टिकट मिला और न ही महिला आयोग की अध्यक्ष जैसे किसी संवैधानिक पद पर नियुक्ति हुई।

    अब 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि KGMU विवाद जैसे संवेदनशील मामलों में हुई झड़प और बयानबाजी अपर्णा यादव की राजनीतिक छवि और महत्वाकांक्षा पर असर डाल सकती है। फिलहाल, पूरे मामले पर प्रशासन और सरकार की नजर बनी हुई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की जा रही है।

  • पुरी जगन्नाथ मंदिर के 4 द्वार और 22 सीढ़ियों का रहस्य, जानें पूरा इतिहास

    पुरी जगन्नाथ मंदिर के 4 द्वार और 22 सीढ़ियों का रहस्य, जानें पूरा इतिहास

    पुरी, ओडिशा में स्थित जगन्नाथ मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान जगन्नाथ को समर्पित है, जिन्हें भगवान विष्णु का एक स्वरूप माना जाता है। हर साल यहां देश-विदेश से लाखों-करोड़ों श्रद्धालु प्रभु के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पुरी जगन्नाथ मंदिर रहस्य अपनी भव्यता, रथ यात्रा और आध्यात्मिक मान्यताओं के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।

    पुरी जगन्नाथ मंदिर का धार्मिक महत्व

    जगन्नाथ मंदिर को चारधामों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि इसके निर्माण, पूजा पद्धति और संरचना से जुड़े कई रहस्य आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं।

    जगन्नाथ मंदिर के चार मुख्य द्वार

    जगन्नाथ मंदिर में चार प्रमुख द्वार हैं, जो चारों दिशाओं में स्थित हैं और प्रत्येक का अपना अलग आध्यात्मिक महत्व है।

    सिंह द्वार (पूर्व):
    यह मंदिर का मुख्य द्वार है, जिसका मुख पूर्व दिशा की ओर है। इसी द्वार के सामने अरुण स्तंभ स्थित है। सिंह द्वार को मोक्ष का प्रतीक माना जाता है और अधिकतर श्रद्धालु इसी द्वार से मंदिर में प्रवेश करते हैं।

    अश्व द्वार (दक्षिण):
    दक्षिण दिशा में स्थित इस द्वार का प्रतीक घोड़ा है। इसे विजय द्वार भी कहा जाता है। मान्यता है कि प्राचीन समय में योद्धा यहां से प्रवेश कर युद्ध में जीत की कामना करते थे। (अन्य द्वारों का भी धार्मिक महत्व बताया जाता है, जो मंदिर की संरचना को पूर्ण बनाते हैं।)

    22 सीढ़ियों का आध्यात्मिक रहस्य

    पुरी जगन्नाथ मंदिर रहस्य में सबसे रहस्यमयी मानी जाती हैं 22 सीढ़ियां, जिन्हें ‘बैसी पहाचा’ कहा जाता है। मान्यता है कि ये सीढ़ियां मानव जीवन की 22 बुराइयों या कमजोरियों का प्रतीक हैं। इन पर विजय प्राप्त करने के बाद ही व्यक्ति मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।इन सीढ़ियों में तीसरी सीढ़ी को ‘यम शिला’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस सीढ़ी पर पैर रखने से यमलोक के दर्शन होते हैं, इसलिए विशेष रूप से मंदिर से बाहर निकलते समय श्रद्धालु इस पर पैर रखने से बचते हैं। कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि इस पर पैर रखने से अर्जित पुण्य नष्ट हो सकते हैं।हालांकि वर्तमान समय में मंदिर में केवल 18 सीढ़ियां दिखाई देती हैं, लेकिन परंपरा और मान्यताओं में आज भी 22 सीढ़ियों का उल्लेख मिलता है।

    जगन्नाथ मंदिर का प्रारंभिक इतिहास

    जगन्नाथ मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने करवाया था। मंदिर की एक अनूठी परंपरा यह है कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की लकड़ी की मूर्तियां हर 12 से 19 वर्षों में बदली जाती हैं, जिसे ‘नवकलेवर’ कहा जाता है।पुरी जगन्नाथ मंदिर रहस्य आज भी श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के लिए आस्था, विज्ञान और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम बने हुए हैं।

  • HimachalPradesh : सिस्सू लेक हादसा: जमी बर्फ टूटी, रील बनाते समय दो पर्यटक डूबने से बचे

    HimachalPradesh : सिस्सू लेक हादसा: जमी बर्फ टूटी, रील बनाते समय दो पर्यटक डूबने से बचे

    HimachalPradesh : हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति ज़िले में भारी बर्फबारी के बाद एक बार फिर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। बर्फ से ढके पहाड़, जमी झीलें और खूबसूरत नज़ारे सोशल मीडिया यूजर्स को खूब आकर्षित कर रहे हैं। इसी बीच सिस्सू लेक हादसा सामने आया है, जिसने पर्यटकों की लापरवाही और प्राकृतिक खतरों को उजागर कर दिया है।

    जानकारी के अनुसार, सिस्सू लेक की जमी हुई झील की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे थे। इन्हीं नजारों को करीब से कैमरे में कैद करने के लिए दो पर्यटक रील बनाते समय झील की जमी बर्फ पर उतर गए। शुरुआत में बर्फ मजबूत दिख रही थी, लेकिन कुछ ही पलों में झील की सतह का एक हिस्सा अचानक टूट गया। इससे दोनों पर्यटक संतुलन खो बैठे और बर्फीले पानी में डूबने लगे।

    घटना के वक्त वहां मौजूद अन्य पर्यटकों ने शोर मचाया, जिसके बाद पुलिस और स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। सिस्सू लेक हादसा गंभीर रूप ले सकता था, लेकिन समय रहते रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दोनों पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बताया जा रहा है कि दोनों को प्राथमिक उपचार दिया गया और उनकी हालत स्थिर है।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि सर्दियों में झील की सतह जमी हुई जरूर दिखाई देती है, लेकिन अंदर की बर्फ कमजोर होती है। ऐसे में झील पर चलना या फोटो और रील बनाने के लिए जोखिम उठाना जानलेवा साबित हो सकता है। सिस्सू लेक हादसा इसी लापरवाही का नतीजा बताया जा रहा है।

    घटना के बाद प्रशासन और पुलिस ने पर्यटकों से अपील की है कि वे प्राकृतिक स्थलों पर सावधानी बरतें और चेतावनी बोर्डों का पालन करें। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ में लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, जो बेहद खतरनाक है। भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए सिस्सू लेक और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा सकती है।

    पर्यटन विभाग ने भी साफ किया है कि बर्फबारी के बाद झीलों और ऊंचाई वाले इलाकों में खतरा बना रहता है। सिस्सू लेक हादसा पर्यटकों के लिए एक चेतावनी है कि प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेते समय सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।