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  • BSF JAWAN RETURN: भारत की सख्ती पर झुका पाकिस्तान, 20 दिन बाद लौटाया BSF जवान पूर्णम कुमार

    BSF JAWAN RETURN: भारत की सख्ती पर झुका पाकिस्तान, 20 दिन बाद लौटाया BSF जवान पूर्णम कुमार

    नई दिल्ली: भारत की दृढ़ता रंग लाई और पाकिस्तान ने 20 दिन बाद आखिरकार बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार (BSF JAWAN RETURN) को भारत को सौंप दिया. अटारी-वाघा बॉर्डर से लौटे जवान का देशभर में स्वागत हुआ. यह घटना भारत-पाक के बीच बढ़ते तनाव के बीच राहत देने वाली खबर बनकर सामने आई है.

    कैसे पहुंचे पाकिस्तान?

    बीएसएफ के कॉन्स्टेबल पूर्णम कुमार शॉ, जो कि पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में तैनात थे, गलती से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान में घुस गए थे. पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें 20 दिन पहले हिरासत में लिया था. इस बीच भारत-पाक संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए, विशेषकर 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके जवाब में भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद.

    22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में एक भयावह आतंकी हमला हुआ, जिसमें नागरिकों और पर्यटकों को निशाना बनाया गया. भारत सरकार ने इसे मुंबई हमले के बाद सबसे घातक हमला माना और तुरंत कड़ी कार्रवाई की घोषणा की.

    ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि

    7 मई को शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय वायुसेना, थलसेना और नौसेना ने एक साथ मिलकर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया. इस ऑपरेशन का उद्देश्य स्पष्ट था — आतंकी गतिविधियों का समूल नाश.

    पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई और सीमा पर तनाव

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने 7-8 मई की रात को भारत के कई सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले की कोशिश की. लक्ष्य थे श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट और अमृतसर जैसे संवेदनशील क्षेत्र. लेकिन भारतीय सेना के सतर्क और समन्वित प्रयासों से ये हमले विफल कर दिए गए.

    भारतीय नौसेना ने अपने Carrier Battle Group के माध्यम से समुद्री क्षेत्र में पाकिस्तान की हवाई घुसपैठ की योजना को पूरी तरह नाकाम कर दिया. वहीं, भारतीय वायुसेना और थलसेना ने भी संयुक्त संचालन करते हुए भारत की सुरक्षा को सुनिश्चित किया.

    पूर्णम कुमार की वापसी: भारतीय प्रयासों का नतीजा

    जब पूर्णम कुमार पाकिस्तान में थे, तब उनके परिवार और खासकर पत्नी राजनी की चिंता लगातार बढ़ रही थी. राजनी ने मीडिया से बात करते हुए उम्मीद जताई थी कि डीजीएमओ (DGMO) स्तर की बातचीत में उनके पति का मुद्दा उठाया जाएगा.

    राजनी ने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें फोन कर हरसंभव मदद का आश्वासन दिया. उन्होंने उनके ससुराल वालों को स्वास्थ्य सेवा देने की बात भी कही.

    भारतीय सेना द्वारा 3 मई को एक पाकिस्तानी रेंजर को राजस्थान सीमा से हिरासत में लिए जाने के बाद उम्मीद जगी कि शायद उसके बदले पूर्णम को भी रिहा किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हालांकि भारत के निरंतर कूटनीतिक और सैन्य प्रयासों के चलते अंततः 13 मई को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान ने पूर्णम कुमार को भारत को सौंप दिया.

    देशभर में राहत और खुशी की लहर

    पूर्णम कुमार की वापसी के बाद सोशल मीडिया से लेकर संसद तक हर जगह इस फैसले की सराहना हुई. एक ओर जहां भारत की सख्त और निर्णायक नीति की तारीफ हुई, वहीं दूसरी ओर जवानों की सुरक्षा को लेकर नए सवाल भी खड़े हुए हैं.

    रक्षा विश्लेषकों की राय

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्णम कुमार की वापसी केवल मानवीय मामला नहीं था, बल्कि यह भारत की कूटनीतिक और सैन्य दृढ़ता का भी परिणाम है. अगर भारत ने आतंकी हमलों पर जवाब नहीं दिया होता, तो शायद पाकिस्तान भी इस तरह झुकने को मजबूर नहीं होता.

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  • ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में भड़का दुश्मन, पाकिस्तान की गोलाबारी में शहीद हुए DDC राज कुमार थापा- OPERATION SINDOOR INDIA

    ऑपरेशन सिंदूर के जवाब में भड़का दुश्मन, पाकिस्तान की गोलाबारी में शहीद हुए DDC राज कुमार थापा- OPERATION SINDOOR INDIA

    लखनऊ/राजौरी: भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जवाब में पाकिस्तान की तरफ से की गई कायराना गोलाबारी ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में एक बड़ा प्रशासनिक नुकसान (OPERATION SINDOOR INDIA) पहुंचाया है. इस हमले में जिले के अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त (ADC) डॉ. राजकुमार थापा शहीद हो गए. वह जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा के अनुभवी अधिकारी थे और इससे पहले डॉक्टर भी रह चुके थे.

    शनिवार तड़के पाकिस्तान ने राजौरी सहित कई सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन और मिसाइल अटैक किए. राजौरी में तैनात डॉ. राजकुमार थापा अपने घर में मौजूद थे, तभी एक गोला उनके घर पर गिरा. शुरुआती धमाके के बाद वे बाहर निकले, फिर लौटकर अपने कमरे में गए, तभी दूसरा गोला सीधे उनके कमरे पर आ गिरा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया.

    OPERATION SINDOOR INDIA- कौन थे डॉ. राजकुमार थापा?

    डॉ. राजकुमार थापा का जन्म 28 अप्रैल 1971 को हुआ था. उनके पिता का नाम दुर्गा दास है. थापा ने एमबीबीएस की पढ़ाई की थी और उसके बाद 2001 में जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए. 2010 में वे IAS स्तर पर पदोन्नत हुए और वर्तमान में वे राजौरी में ADC के रूप में कार्यरत थे. उनका प्रशासनिक और चिकित्सा सेवा का अनुभव उन्हें एक उत्कृष्ट अधिकारी बनाता था.

    सीएम उमर अब्दुल्ला ने दी श्रद्धांजलि

    जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने थापा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और स्वयं उनके परिजनों से मुलाकात की. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “डॉ. राजकुमार थापा (JKAS, ADC राजौरी) के परिवार के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना है. उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा. सरकार उनके परिवार के साथ खड़ी है.”

    घायल हुए अन्य कर्मचारी

    इस हमले में थापा के साथ दो और कर्मचारी भी घायल हुए हैं, जिनकी हालत गंभीर बताई जा रही है. अस्पताल में उनका इलाज जारी है. सरकार ने उनके उपचार की पूरी व्यवस्था की है.

    इलाके में शोक की लहर

    राजौरी जिले में थापा की शहादत के बाद से शोक की लहर है. स्थानीय नागरिकों और अधिकारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और सोशल मीडिया पर उनके प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं. उनका योगदान न केवल प्रशासनिक क्षेत्र में, बल्कि मानवीय सेवा के क्षेत्र में भी अनुकरणीय था.

    सरकार ने की निंदा

    केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन ने पाकिस्तान की इस हरकत की कड़ी निंदा की है. इसे एक कायरतापूर्ण हमला बताते हुए कहा गया कि भारत ऐसी किसी भी कार्रवाई का करारा जवाब देगा.

    ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
    गौरतलब है कि भारत ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए थे. इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान बौखला गया है और सीमाओं पर तनाव बढ़ गया है.

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