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  • कानपुर गंगा में 350 किलो की डॉल्फिन की मौत:लोग बोले- प्रदूषण से जान गई

    कानपुर गंगा में 350 किलो की डॉल्फिन की मौत:लोग बोले- प्रदूषण से जान गई

    कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में गंगा नदी के किनारे उस समय हड़कंप मच गया, जब करीब 350 किलो वजनी डॉल्फिन का शव पानी में तैरता हुआ दिखाई दिया। यह दृश्य देखने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग जमा हो गए। लोगों ने डॉल्फिन के शव को रस्सियों से बांधकर करीब 10 लोगों की मदद से किनारे तक खींचा, जिसके बाद वन विभाग और प्रशासन को सूचना दी गई।

    गंगा में डॉल्फिन की मौत से मचा हड़कंप

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डॉल्फिन काफी समय से मृत प्रतीत हो रही थी और उसके शरीर से दुर्गंध आ रही थी। गंगा में डॉल्फिन का यूं मृत पाया जाना न सिर्फ दुर्लभ है, बल्कि यह नदी की सेहत और जलीय जीवों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। मौके पर मौजूद लोगों ने आशंका जताई कि गंगा में बढ़ते प्रदूषण के कारण ही डॉल्फिन की मौत हुई होगी

    10 लोगों ने मिलकर खींचा शव

    डॉल्फिन का वजन अत्यधिक होने के कारण उसे बाहर निकालना आसान नहीं था। स्थानीय लोगों ने रस्सी का इंतजाम किया और करीब 10 लोगों ने मिलकर कड़ी मशक्कत के बाद शव को किनारे लाया। इस दौरान आसपास लोगों की भीड़ लग गई और घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे।

    प्रदूषण पर उठे गंभीर सवाल

    स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानपुर क्षेत्र में गंगा नदी लंबे समय से औद्योगिक और घरेलू कचरे से प्रदूषित है। चमड़ा उद्योगों, नालों और रासायनिक अपशिष्ट के कारण पानी की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए होते, तो ऐसी घटना टाली जा सकती थी।एक स्थानीय निवासी ने कहा,“जब इंसानों के लिए गंगा का पानी सुरक्षित नहीं है, तो डॉल्फिन जैसे संवेदनशील जीव कैसे जिंदा रहेंगे?”

    वन विभाग और प्रशासन की जांच

    सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और डॉल्फिन के शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि हो सकेगी। प्रारंभिक जांच में उम्रदराज या बीमारी की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया है, लेकिन प्रदूषण की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    डॉल्फिन: गंगा की पहचान और जैव विविधता

    गौरतलब है कि गंगा डॉल्फिन भारत की राष्ट्रीय जलीय जीव (National Aquatic Animal) है। यह जीव साफ और ऑक्सीजन युक्त पानी में ही जीवित रह सकती है। डॉल्फिन की मौजूदगी को नदी के स्वास्थ्य का संकेत माना जाता है। ऐसे में उसकी मौत यह दर्शाती है कि गंगा का इकोसिस्टम खतरे में है

  • कानपुर में ऑटो गैंग का भंडाफोड़: 48 घंटे में 6 लुटेरे गिरफ्तार, लाखों की बरामदगी

    कानपुर में ऑटो गैंग का भंडाफोड़: 48 घंटे में 6 लुटेरे गिरफ्तार, लाखों की बरामदगी

    कानपुर।कानपुर से बड़ी खबर सामने आई है, जहां सेंट्रल जोन की सर्विलांस टीम और स्वरूपनगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ऑटो गैंग द्वारा की जा रही लूट की घटनाओं का खुलासा किया है। पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर लूट में शामिल 6 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है।पुलिस के अनुसार, यह गैंग ऑटो का इस्तेमाल कर सेल्समैन और व्यापारियों को निशाना बनाता था। बीती 25 तारीख को आरोपियों ने एक सेल्समैन के साथ लूट की वारदात को अंजाम दिया था, जिसमें स्कूटी समेत 3 लाख 90 हजार रुपये नकद लूट लिए गए थे।

    बरामदगी में नकदी और वाहन शामिल

    पुलिस टीम ने गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से 1 लाख 73 हजार रुपये नकद, एक स्कूटी, मोबाइल फोन, एक ऑटो और एक बुलेरो गाड़ी बरामद की है। जांच में सामने आया है कि लूट में शामिल कई अभियुक्तों के खिलाफ पहले से ही अपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

    ऑटो गैंग का तरीका

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ऑटो के जरिए संभावित शिकार की रेकी करते थे और मौका पाकर लूट की घटना को अंजाम देते थे। वारदात के बाद ये लोग तेजी से इलाके से फरार हो जाते थे, जिससे इनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता था।

    पुलिस टीम को मिलेगा इनाम

    इस सफल कार्रवाई पर डीसीपी सेंट्रल श्रवण कुमार सिंह ने पुलिस टीम की सराहना करते हुए 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ इस तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।पुलिस फिलहाल आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस गैंग ने शहर में और कितनी वारदातों को अंजाम दिया है। कानपुर पुलिस की इस कार्रवाई से शहरवासियों में सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ा है।

  • कानपुर: नरवल तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान युवक ने खुद पर डाला पेट्रोल, सिस्टम से हताशा की चौंकाने वाली तस्वीर

    कानपुर: नरवल तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान युवक ने खुद पर डाला पेट्रोल, सिस्टम से हताशा की चौंकाने वाली तस्वीर

    कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। नरवल तहसील परिसर में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब फरियादियों की भीड़ के बीच एक युवक ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश कर ली। यह सब कुछ जिले के सबसे बड़े अधिकारी जिलाधिकारी (DM) की मौजूदगी में हुआ, जिसने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया।

    कानपुर: नरवल तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान युवक ने खुद पर डाला पेट्रोल, सिस्टम से हताशा की चौंकाने वाली तस्वीर
    कानपुर: नरवल तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान युवक ने खुद पर डाला पेट्रोल, सिस्टम से हताशा की चौंकाने वाली तस्वीर

    “साहब! कोई नहीं सुनता, आज जान दे देंगे”

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, समाधान दिवस की कार्यवाही चल ही रही थी कि अचानक भीड़ से निकलकर एक युवक जोर-जोर से चिल्लाने लगा। कुछ ही पलों में उसने अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया। कमरे में पेट्रोल की तेज गंध फैल गई और युवक चीखते हुए बोला“साहब! कोई नहीं सुनता, आज जान दे देंगे।”स्थिति बिगड़ते देख वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत युवक को काबू में लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

    युवक की पहचान और हताशा की वजह

    पुलिस ने युवक की पहचान रणजीत उर्फ बउवन सिंह के रूप में की है, जो करबिगवां साढ़ गांव का रहने वाला है। पूछताछ में रणजीत ने जो कहा, वह सिस्टम पर सीधा प्रहार था। उसने बताया,“हमने फिल्मों में देखा था कि जब सीधे तरीके से प्रशासन नहीं सुनता, तो ऐसे ही अपनी बात सुनानी पड़ती है।”जांच में सामने आया कि रणजीत का विवाद घर की नाली को लेकर है। उसका आरोप है कि परिवार के ही कुछ सदस्यों—सत्येंद्र, अभय सिंह और अखिलेश सिंह—ने उसके घर की नाली तोड़कर बंद कर दी है।

    नाली बंद, घर गिरने का खतरा

    रणजीत का मकान कच्चा है। नाली बंद होने से गंदा पानी मकान की नींव में भर रहा है, जिससे घर गिरने का खतरा बना हुआ है। रणजीत के पिता महावीर सिंह का पांच साल पहले निधन हो चुका है। वह अपनी विधवा मां रानी और दो भाइयों के साथ खेती कर किसी तरह परिवार का पालन-पोषण कर रहा है।

    धमकी, मारपीट और पुलिस पर गंभीर आरोप

    पीड़ित युवक का आरोप है कि पड़ोसी उसे धमकाते हैं और कहते हैं“हमारा बेटा फौज में है, तुम कहीं भी शिकायत कर लो, हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा।”रणजीत की मां रानी ने रोते हुए बताया कि पड़ोसी महिलाओं ने उनके साथ मारपीट की, यहां तक कि छाती पर चढ़कर पीटा। जब वे थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें भगा दिया। मां का आरोप है कि पुलिस ने विपक्षियों से पैसे ले लिए हैं और कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

    प्रशासन पर सवाल

    डीएम के सामने हुई यह घटना बताती है कि छोटे-छोटे स्थानीय विवाद जब समय पर नहीं सुलझते, तो वे कितनी बड़ी त्रासदी का रूप ले सकते हैं। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं, लेकिन यह सवाल कायम है—क्या रणजीत जैसे लोगों की आवाज अब सुनी जाएगी?

  • 40 साल की फरारी खत्म: दो नामों में जी रहा था हत्यारा, कानपुर पुलिस ने गोंडा से दबोचा

    40 साल की फरारी खत्म: दो नामों में जी रहा था हत्यारा, कानपुर पुलिस ने गोंडा से दबोचा

    रिपोर्ट: हिमांशु शर्मा | कानपुर कानपुर पुलिस ने 40 साल से फरार चल रहे हत्या के एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार कर पुराने मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। वर्ष 1982 में हुई हत्या के इस आरोपी ने न केवल अपना नाम बदलकर नई पहचान बना ली थी, बल्कि गोंडा जिले में पिछले कई वर्षों से आराम से जिंदगी भी बिता रहा था। पुलिस की लगातार पड़ताल और तकनीकी मदद के बाद आखिरकार आरोपी प्रेम प्रकाश उर्फ पप्पू को गिरफ्तार कर लिया गया है।

    डीसीपी पूर्वी ने प्रेसवार्ता कर बताया कि आरोपी प्रेम प्रकाश उर्फ पप्पू ने साल 1982 में अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। घटना के बाद उसे गिरफ्तार किया गया और उसने करीब दो साल जेल भी काटी। लेकिन 1985 में जमानत पर बाहर आने के बाद वह न्यायालय में हाजिर नहीं हुआ। अदालत ने आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया और तब से वो लगातार फरार था। आरोपी की उम्र उस समय लगभग 30 वर्ष थी।

    दो नामों में चलता रहा जीवन, पहचान पूरी तरह बदल दी

    पुलिस जांच में सामने आया कि 70 वर्षीय हो चुके आरोपी ने फरार रहने के लिए अपना नाम बदल लिया था। कानपुर के बंगाली मोहाल का रहने वाला यह आरोपी अब गोंडा में “प्रेम कुमार” की नई पहचान के साथ रह रहा था। नया नाम, नया पता और पूरी तरह बदला हुआ जीवन — लेकिन कानून से भागना आखिर उसके लिए संभव न हो सका।डीसीपी पूर्वी के अनुसार, केस में कोई भी ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं थे। लेकिन एसीपी कोतवाली और फीलखाना थाने की संयुक्त टीम ने लगातार पुराने दस्तावेजों की पड़ताल, स्थानीय इनपुट और संदिग्धों की तलाश के बाद उसकी लोकेशन तक पहुंचने में सफलता पाई।

    पकड़ने वाली पुलिस टीम को मिलेगा इनाम

    इतने पुराने और चुनौतीपूर्ण मामले में सफलता मिलने के बाद पुलिस प्रशासन ने गिरफ्तारी करने वाली टीम को पुरस्कृत करने का ऐलान किया है। डीसीपी पूर्वी ने बताया कि इस टीम को ₹25,000 का नगद इनाम दिया जाएगा।

    40 साल की कहानी: अपराध से नई पहचान तक

    – 1982: हत्या का आरोप
    – 1983–84: जेल में बिताए दो साल
    – 1985: जमानत पर बाहर आने के बाद फरार
    – अदालत द्वारा NBW जारी
    – पहचान बदली, नाम बदला
    – कानपुर से निकलकर गोंडा में बस गया
    – 2025: 40 साल बाद गिरफ्तारी

    कानपुर पुलिस की इस कार्रवाई से साबित हो गया कि चाहे कितना भी समय लग जाए, पर कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराधी अंत में पकड़ा ही जाता है।

  • कानपुर:100 करोड़ की संपत्ति का खुलासा: मैनपुरी सीओ ऋषिकांत शुक्ल निलंबित, अब होगी विजिलेंस जांच

    कानपुर:100 करोड़ की संपत्ति का खुलासा: मैनपुरी सीओ ऋषिकांत शुक्ल निलंबित, अब होगी विजिलेंस जांच

    कानपुर। मैनपुरी में तैनात पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) ऋषिकांत शुक्ल (Deputy Superintendent of Police (CO) Rishikant Shukla) के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। कानपुर पुलिस की एसआईटी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उनके पास 100 करोड़ रुपये की अकूत और बेनामी संपत्ति है। इसी आधार पर शासन ने उन्हें फिलहाल निलंबित कर दिया है।


    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सीओ शुक्ल ने जेल में बंद अधिवक्ता अखिलेश दुबे के गिरोह को सहयोग दिया था। हालांकि, शुक्ल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

    कुछ समय पहले “ऑपरेशन महाकाल” के तहत अधिवक्ता अखिलेश दुबे की गिरफ्तारी के बाद पुलिस, वकीलों और पत्रकारों के गठजोड़ की जांच की जा रही थी।अब ऋषिकांत शुक्ल के निलंबन और विजिलेंस जांच की संस्तुति को इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।

  • कानपुर में सड़क दुर्घटना में घायल सेना के हवलदार वीरेंद्र सिंह का निधन, पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

    कानपुर में सड़क दुर्घटना में घायल सेना के हवलदार वीरेंद्र सिंह का निधन, पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

    कानपुर : कानपुर से एक दुखद खबर सामने आई है। ड्यूटी के बाद अपने घर लौट रहे भारतीय सेना के हवलदार वीरेंद्र सिंह का सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद 45 दिनों तक चले इलाज के दौरान निधन हो गया।

    हवलदार वीरेंद्र सिंह मैथा ब्लॉक के रंजीतपुर गांव के निवासी थे और 16 कुमाऊँ रेजीमेंट में सेवा दे रहे थे।

    घटना 13 अक्टूबर 2025 को हुई। सड़क दुर्घटना में उन्हें गंभीर सिर की चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें तुरंत लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) में भर्ती कराया गया।

    45 दिनों तक चले सघन उपचार के बावजूद सोमवार, 13 अक्टूबर 2025 की रात उनका निधन हो गया।

    भारतीय सेना ने उनके पार्थिव शरीर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके परिवार को सौंपा। अगले दिन, 14 अक्टूबर 2025 को हवलदार वीरेंद्र सिंह की अंतिम यात्रा निकाली गई। रंजीतपुर गांव में शोक का माहौल था और ग्रामीणों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। सेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी और पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद, हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया।

    हवलदार वीरेंद्र सिंह ने देश की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएं उनके परिवार और 16 कुमाऊँ रेजीमेंट के सभी जवानों के साथ हैं।

  • कानपुर में जर्जर सड़क के विरोध में रामलीला पात्रों ने किया प्रदर्शन, 75 साल पुरानी परंपरा रुकने की कगार पर

    कानपुर में जर्जर सड़क के विरोध में रामलीला पात्रों ने किया प्रदर्शन, 75 साल पुरानी परंपरा रुकने की कगार पर

    कानपुर में जर्जर सड़कों के खिलाफ स्थानीय लोगों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। शहर की 75 साल पुरानी रामलीला समिति के सदस्य राम, लक्ष्मण और हनुमान के रूप में सड़क पर उतरे और प्रशासन से जल्द ही सड़क मरम्मत की मांग की।

    कमेटी ने कहा कि 48 घंटे में सड़क न बनी तो कार्यक्रम बंद होगा

    समिति के सदस्यों ने चेतावनी दी कि अगर अगले 48 घंटे में सड़क का निर्माण नहीं हुआ, तो इस साल का रामलीला कार्यक्रम रद्द किया जाएगा। रामलीला समिति का कहना है कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और इस सड़क की खराब स्थिति के कारण कार्यक्रम के आयोजन में गंभीर समस्याएं हो रही हैं।

    स्थानीय निवासी और रामलीला समिति के सदस्य सड़क की जर्जर हालत से नाराज हैं। उनका कहना है कि इस सड़क के कारण न सिर्फ रामलीला का मंचन मुश्किल हो रहा है, बल्कि आम जनता के लिए भी चलना और आवाजाही करना खतरनाक हो गया है।समिति ने प्रशासन से अपील की है कि वह जल्द से जल्द सड़क का मरम्मत कार्य शुरू करें ताकि 75 साल पुरानी रामलीला परंपरा बनी रहे। रामलीला पात्रों का यह विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है और इसे लेकर लोगों में संवेदनशीलता बढ़ रही है।

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    इस घटना ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है कि वह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए कार्रवाई करे। रामलीला समिति के सदस्यों का कहना है कि परंपरा और समाज के हित में उन्होंने यह कदम उठाया है और उनकी मांग जल्द पूरी होनी चाहिए।

  • अखिलेश दुबे का कच्चा चिट्ठा खोलने वाले अफसर को केंद्र ने बुलाया, जानिए कौन हैं कानपुर के पूर्व CP अखिल कुमार

    अखिलेश दुबे का कच्चा चिट्ठा खोलने वाले अफसर को केंद्र ने बुलाया, जानिए कौन हैं कानपुर के पूर्व CP अखिल कुमार

    कानपुर: कानपुर के चर्चित अफसर अखिल कुमार एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने अखिलेश दुबे गैंग का कच्चा चिट्ठा खोला था, जिसके बाद पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मच गई। अब खबर है कि केंद्र सरकार ने उन्हें तलब किया है

    कौन हैं पूर्व CP अखिल कुमार?

    • अखिल कुमार उत्तर प्रदेश कैडर के 1997 बैच के IPS अफसर हैं।वे कानपुर, लखनऊ और नोएडा जैसे बड़े जिलों में तैनात रह चुके हैं।कानपुर के कमिश्नरेट सिस्टम में उन्हें पहले CP (पुलिस कमिश्नर) के तौर पर जिम्मेदारी सौंपी गई थी।सख्त और ईमानदार छवि के लिए जाने जाने वाले अखिल कुमार कई बार माफिया और अपराधियों पर कार्रवाई के चलते सुर्खियों में रहे।

    क्यों बुलाया गया केंद्र?

    सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बुलाया है। चर्चा है कि जल्द ही उन्हें महत्वपूर्ण सुरक्षा एजेंसी या केंद्र सरकार के किसी अहम विभाग में तैनाती मिल सकती है।

    अखिलेश दुबे केस से कनेक्शन

    कानपुर में तैनाती के दौरान अखिल कुमार ने अखिलेश दुबे गैंग के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए थे। उनके नेतृत्व में पुलिस ने दुबे गैंग के आर्थिक और आपराधिक नेटवर्क की जांच की, जिससे इस गैंग की कमर टूट गई थी।

  • कानपुर में टीचर ने जब्त की चेन, मां की डांट के डर से 6वीं के छात्र ने उठाया खौफनाक कदम

    कानपुर में टीचर ने जब्त की चेन, मां की डांट के डर से 6वीं के छात्र ने उठाया खौफनाक कदम

    उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। सिर्फ 11 साल के छात्र ने स्कूल में शिक्षिका द्वारा चेन जमा कराने के बाद, मां की डांट के डर से आत्महत्या कर ली। यह घटना गोविंद नगर थाना क्षेत्र के दादा नगर कॉलोनी की है।

    क्या है पूरा मामला? कानपुर में टीचर ने जब्त की चेन

    स्वास्तिक शर्मा (11) श्रीमुनि इंटर कॉलेज में कक्षा 6 का छात्र था। शुक्रवार को स्कूल में उसकी क्लास टीचर ने उसके गले की चेन उतरवा कर जमा कर ली। जब यह बात बच्चे को याद आई तो वह डर गया कि मां डांटेंगी। इसी डर से उसने घर आकर फांसी लगाकर जान दे दी।

    परिवार में मचा कोहराम कानपुर में टीचर ने जब्त की चेन

    स्वास्तिक के पिता ऋषि शर्मा नमकीन कंपनी में ट्रेडिंग का काम करते हैं, जबकि मां पूजा शर्मा एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका हैं।स्वास्तिक इकलौता बेटा था, और उसकी मौत के बाद पूरा परिवार सदमे में है।स्वास्तिक के चाचा सुकांत शर्मा ने बताया कि वह रोज स्कूल से उसे लेने जाते थे, और आज भी वही रूटीन था। लेकिन शाम को घर लौटते ही स्वास्तिक ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और आत्मघाती कदम उठा लिया।

    पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर कानपुर में टीचर ने जब्त की चेन

    सूचना पर पहुंची गोविंद नगर पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटना स्थल की जांच की और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।