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Tag: जनसुनवाई

  • अमेठी में अधिवक्ताओं के विरोध के बीच SDM के समर्थन में उतरे सैकड़ों फरियादी

    अमेठी में अधिवक्ताओं के विरोध के बीच SDM के समर्थन में उतरे सैकड़ों फरियादी

    संवाददाता नितेश अमेठी जिले की मुसाफिरखाना तहसील में बीते पांच दिनों से चल रहे अधिवक्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। अधिवक्ताओं के आंदोलन के विपरीत अब सैकड़ों फरियादी और ग्राम प्रधान एसडीएम की कार्यशैली के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। यह समर्थन तहसील दिवस के दौरान उस समय देखने को मिला, जब मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) द्वारा जनसुनवाई की जा रही थी।

    तहसील दिवस की जनसुनवाई में दिखा जनसमर्थन

    तहसील दिवस में पहुंचे सैकड़ों फरियादियों और ग्राम प्रधानों ने एक स्वर में कहा कि एसडीएम आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुन रहे हैं और न्याय दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। फरियादियों का कहना है कि एसडीएम की कार्यशैली निष्पक्ष और जनहित में है, इसलिए उनके खिलाफ हो रहे विरोध को वे सही नहीं मानते।जनसुनवाई के दौरान कई ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखते हुए यह भी कहा कि वे दूर-दराज के गांवों से न्याय की उम्मीद लेकर तहसील आते हैं और एसडीएम के स्तर पर उन्हें राहत मिलती है।

    फरियादियों का आरोप: तारीख पर तारीख से नहीं मिल रहा न्याय

    फरियादियों ने अधिवक्ताओं के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अधिकारी न्याय करना चाहते हैं, तब कुछ मामलों में केवल तारीख पर तारीख दी जाती है, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि वकीलों के विरोध के चलते कई दिनों से तहसील का कामकाज प्रभावित हो रहा है और उन्हें न्याय पाने में देरी हो रही है।कुछ फरियादियों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिवक्ताओं के आंदोलन की वजह से उनकी शिकायतों की सुनवाई रुक गई है, जिससे गरीब और ग्रामीण वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है।

    मुसाफिरखाना तहसील में 5 दिन से जारी है विरोध

    गौरतलब है कि इससे पहले लेखपालों के समर्थन में भी फरियादी सामने आ चुके हैं और अब एसडीएम के पक्ष में सैकड़ों लोग उतर आए हैं। मुसाफिरखाना तहसील में अधिवक्ताओं का विरोध प्रदर्शन लगातार पांच दिनों से जारी है, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पूरे मामले पर उच्च अधिकारियों की नजर बनी हुई है और स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं फरियादियों की मांग है कि न्याय प्रक्रिया बाधित न हो और तहसील में नियमित रूप से जनसुनवाई जारी रहे।

  • कानपुर देहात: SP श्रद्धा नरेंद्र पांडेय जमीन पर बैठकर सुनती दिखीं दिव्यांग महिला की शिकायत

    कानपुर देहात: SP श्रद्धा नरेंद्र पांडेय जमीन पर बैठकर सुनती दिखीं दिव्यांग महिला की शिकायत

    कानपुर देहात- कानपुर देहात की पुलिस अधीक्षक (SP) श्रद्धा नरेंद्र पांडेय का हालिया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह जमीन पर बैठकर एक दिव्यांग महिला से उसकी शिकायत सुनती नजर आ रही हैं। इस व्यवहार ने आम जनता के बीच पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ा दिया।

    मामला उस समय का है जब SP कार्यालय में जनसुनवाई चल रही थी। इस दौरान एक दिव्यांग महिला अपनी समस्या लेकर आई। महिला को कार्यालय तक लाने की व्यवस्था की जा रही थी, लेकिन SP श्रद्धा नरेंद्र पांडेय खुद महिला के पास गईं और उनके सामने जमीन पर बैठकर पूरे धैर्य के साथ महिला की शिकायत सुनी।

    सिर्फ सुनने तक ही नहीं, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तुरंत उचित कार्रवाई के निर्देश भी दिए। यह संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण सोशल मीडिया पर लोगों की खूब सराहना पा रहा है। लोग बता रहे हैं कि इस तरह के व्यवहार से पुलिस और जनता के बीच की दूरी कम होती है और समाज में विश्वास का माहौल बनता है।

    कौन हैं आईपीएस श्रद्धा?

    श्रद्धा पांडेय का जन्म 1 जून 1986 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता का नाम नरेंद्र राममूर्ति पांडेय है। श्रद्धा अपने नाम के साथ पिता का नाम भी लिखती हैं। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी से एमटेक तक की पढ़ाई की। इसके बाद बीमा और आईसीएलएस सेवा में कार्यरत रहीं। श्रद्धा का सपना सेना में जाने का था। इसके लिए उन्होंने वर्ष 2011 में संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा में भाग लिया। वे अखिल भारतीय स्तर पर चौथी रैंक हासिल करने में सफल रहीं। हालांकि, दृष्टि दोष के कारण मेडिकल राउंड पास नहीं कर सकीं

    श्रद्धा नरेंद्र पांडेय की यह पहल यह साबित करती है कि वर्दी केवल अधिकार नहीं, बल्कि कर्तव्य और करुणा का भी प्रतीक होती है।