मुंबई: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने दिवाली के खास मौके पर अपने फैंस से मुलाकात की। छोटी दिवाली के दिन घर के बाहर आए अमिताभ बच्चन ने हाथ में दीया लेकर फैंस का स्वागत किया और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी देशभर में अपने फैंस को दिवाली की बधाई दी। फैंस की उत्साहपूर्ण भीड़ और दीयों की रोशनी ने इस अवसर को और भी खास बना दिया।
अमिताभ बच्चन की यह पहल फैंस के लिए एक यादगार अनुभव रही। बॉलीवुड के इस दिग्गज अभिनेता ने अपने सौम्य व्यवहार और मधुर मुस्कान से दिवाली की खुशियों को और बढ़ा दिया।
अमिताभ बच्चन दिवाली का जश्न उनके फैंस और जनता के लिए खास संदेश लेकर आया कि त्योहार हमेशा खुशियों और उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए।
दिवाली 2025 पर गणेश-लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन सभी लोग शुभ मुहूर्त में पूजा करने की कोशिश करते हैं ताकि घर में समृद्धि और सुख-शांति बनी रहे। इस वर्ष दिवाली पूजा मुहूर्त 2025 सोमवार शाम को है। गणेश-लक्ष्मी पूजा का सबसे प्रमुख मुहूर्त शाम 7:08 बजे से 8:18 बजे तक रखा गया है। प्रदोष काल में पूजा का शुभ समय शाम 5:46 बजे से रात 8:18 बजे तक और वृषभ काल का मुहूर्त शाम 7:08 से रात 9:03 बजे तक है।
दिवाली पर कार्तिक अमावस्या रात्रि में शुभ मुहूर्त में पूजा करने के बाद घरों में दीये जलाए जाते हैं और पटाखे फोड़कर खुशियां मनाई जाती हैं। लोग एक-दूसरे के घर मिठाइयाँ बाँटते और शुभकामनाएं देते हैं।
शहरवार दिवाली पूजा मुहूर्त 2025:
दिल्ली: शाम 7:08 से 8:18 बजे (1 घंटा 11 मिनट)
लखनऊ: शाम 6:56 से 8:04 बजे (1 घंटा 8 मिनट)
मुंबई: 7:41 से 8:41 बजे
बेंगलुरु: रात 7:31 से 8:25 बजे
कोलकाता: शाम 5:06 से 5:54 बजे
पटना: शाम 5:17 से 5:54 बजे
जयपुर: 7:17 से 8:25 बजे
चेन्नई: 7:20 से 8:14 बजे
हैदराबाद: 7:21 से 8:19 बजे
दिवाली पूजा विधि (सरल तरीका):
घर की साफ-सफाई और सजावट करें।
पूजा स्थल पर लाल कपड़ा बिछाएं।
गणेश और लक्ष्मी की प्रतिमा या फोटो रखें।
दीपक जलाकर व्रत और मंत्रों के साथ पूजा करें।
प्रसाद वितरण के बाद पूरे परिवार के साथ दीये जलाएं।
इस वर्ष दिवाली पूजा मुहूर्त 2025 का पालन करके घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहेगी।
भारत में दिवाली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार घरों में दीपक जलाने, मिठाइयाँ बनाने और पटाखों की गूंज के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले का सम्मू गांव इस दिन सन्नाटे में डूबा रहता है। यह गांव दशकों से दिवाली नहीं मनाता और इसे लोग आज भी शापित गांव के नाम से जानते हैं।
क्यों नहीं मनाते हैं दिवाली? जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित सम्मू गांव में लोग न दीपावली पर पकवान बनाते हैं, न घर सजाते हैं और न ही उत्सव मनाते हैं। मान्यता है कि यदि कोई दिवाली मनाने की कोशिश करता है, तो गांव में आपदा या अकाल मृत्यु हो सकती है। इसी डर के कारण लोग दिवाली से दूर रहते हैं।
गांव के बुजुर्गों के अनुसार यह श्राप सैकड़ों साल पुराना है। कहा जाता है कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान दिवाली के दिन गांव की एक महिला अपने मायके गई थी। उसी समय उसके पति, जो सेना में थे, की मृत्यु हो गई। गर्भवती महिला यह दृश्य देख नहीं सकी और अपने पति के साथ सती हो गई। जाते-जाते उसने पूरे गांव को श्राप दिया कि यहाँ कभी दिवाली नहीं मनाई जाएगी। तब से इस परंपरा का पालन होता आ रहा है।
प्रथम विश्व युद्ध और श्राप की कहानी
सम्मू गांव के निवासी रघुवीर सिंह रंगड़ा बताते हैं कि अब तक कई बार लोग दिवाली मनाने की कोशिश कर चुके हैं। पूजा-पाठ और विभिन्न उपाय किए गए, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। किसी ने भी त्योहार मनाने की हिम्मत नहीं जुटाई क्योंकि इसके बाद गांव में अनहोनी घटने का डर हमेशा बना रहता है।
यह कहानी सिर्फ सम्मू गांव दिवाली की अनूठी परंपरा नहीं है, बल्कि यह इतिहास और मान्यताओं के साथ जुड़े लोक जीवन का भी प्रतीक है। हिमाचल के इस गांव में दिवाली न मनाने की वजह से यह अन्य गांवों से पूरी तरह अलग और अद्वितीय बना हुआ है।